Linga Purana· Liṅga Purāṇa
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अध्याय 19 / 108

Book 1 - Adhyaya 19

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अध्याय १९

श्लोक 1

अथोवाच महादेवः प्रीतो ऽहं सुरसत्तमौ पश्यतां मां महादेवं भयं सर्वं विमुच्यताम्

athovāca mahādevaḥ prīto 'haṃ surasattamau paśyatāṃ māṃ mahādevaṃ bhayaṃ sarvaṃ vimucyatām

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् किरीटधारी विष्णुसे ऐसा ही होगा' कहकर अर्थात् वर देकर ब्रह्माजी प्रसन्नतायुक्त तथा द्वेषषहित हो गये। इसके बाद पितामहने उदीयमान सूर्यकी आभाके समान विशाल मुखवाले तथा अत्यन्त अद्भुत रूपवाले शिवको अति समीप आते हुए देखकर भगवान् विष्णुसे कहा- ॥ ५७-५८ /२॥

English

Both of you very powerful were born of me formerly. Brahma, the grandfather of the universe was born from my right side; Vi§nu, the soul of the universe, sprang from my left side. I am extremely pleased with both of you. I shall grant you the boon of your choice.

अध्याय १९

श्लोक 2

युवां प्रसूतौ गात्राभ्यां मम पूर्वं महाबलौ अयं मे दक्षिणे पार्श्वे ब्रह्मा लोकपितामहः

yuvāṃ prasūtau gātrābhyāṃ mama pūrvaṃ mahābalau ayaṃ me dakṣiṇe pārśve brahmā lokapitāmahaḥ

हिन्दी अर्थ

हे विष्णो ! अप्रमेय, विशाल वक्त्रसम्मन्न, वाराहके समान दाढ़ोंवाला, फैले हुए केशोंवाला, दश भुजाओंवाला, त्रिशूलधारी, नेत्रोंसे हर जगह स्थित अर्थात् सर्वदर्शी, मुंजकी मेखला धारण किये, विकृत रूपवाला, उन्नत तथा विशाल मेढ़वाला, अत्यन्त भयंकर ध्वनि करता हुआ साक्षात् लोक-प्रभुतुल्य, महान् कान्तिसम्मन्न तथा तेजपुंज- सा यह कोन प्राणी सभी दिशाओं तथा आकाशको व्याप्त करके इधर ही चला आ रहा है?॥ ५९-६१/२॥

English

After saying this, the lord, the storehouse of mercy patted Visnu with his gentle and smooth hands out of compassion.

अध्याय १९

श्लोक 3

वामे पार्श्वे च मे विष्णुर् विश्वात्मा हृदयोद्भवः प्रीतो ऽहं युवयोः सम्यग् वरं दद्मि यथेप्सितम्

vāme pārśve ca me viṣṇur viśvātmā hṛdayodbhavaḥ prīto 'haṃ yuvayoḥ samyag varaṃ dadmi yathepsitam

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माीके इस प्रकार कहनेपर भगवान् विष्णुने उनसे कहा-इस सागरमें चलनेके कारण जिनके दोनों पैरोंके आघातसे आकाशमें महान् वेगसे जलाशय उठ रहे हैं, सभी ओर उठी हुई विशाल जल-बूँदोंसे आप सिक्त हो चुके हैं, जिनकी नासिकासे निकली वायुसे आपके साथ कम्पायमान यह महापद्म-जो मेरी नाभिसे उत्पन्न है, स्वच्छन्दतापूर्वक दोलायमान हो रहा है, वे ही आदि-अन्तरहित पार्वतीनाथ प्रभु शिव आ रहे हैं।

English

Then with a delightful mind, Visnu bowed and spoke to the great lord who though devoid of Lihga was stationed in the Lihga.

अध्याय १९

श्लोक 4

एवमुक्त्वा तु तं विष्णुं कराभ्यां परमेश्वरः पस्पर्श सुभगाभ्यां तु कृपया तु कृपानिधिः

evamuktvā tu taṃ viṣṇuṃ karābhyāṃ parameśvaraḥ pasparśa subhagābhyāṃ tu kṛpayā tu kṛpānidhiḥ

हिन्दी अर्थ

अब हम दोनों मिलकर स्तोत्रके द्वारा इन वृषध्वज महादेवकी प्रार्थना करें॥ ६२--६५ /२॥ तत्पश्चात् कमलको आभाके समान नेत्रोंवाले भगवान् विष्णुसे ब्रह्माजीने कुपित होकर कहा कि लोकोंके स्वामी तथा सर्वव्यापी स्वयं अपनेको एवं जगतूके कर्ता मुझ सनातन ब्रह्माको आप नहीं जानते। हम दोनोंसे बढ़कर यह

English

If love has been generated in you, if boon has to be granted to us, may our devotion to you remain perpetual and unswerving.

अध्याय १९

श्लोक 5

ततः प्रहृष्टमनसा प्रणिपत्य महेश्वरम् प्राह नारायणो नाथं लिङ्गस्थं लिङ्गवर्जितम्

tataḥ prahṛṣṭamanasā praṇipatya maheśvaram prāha nārāyaṇo nāthaṃ liṅgasthaṃ liṅgavarjitam

हिन्दी अर्थ

शंकर नामवाला कौन है ?॥ ६६-६७ /२॥ उन ब्रह्माका वह क्रोधयुक्त वचन सुनकर भगवान् विष्णु बोले-हे कल्याणकारक! महात्मा शिवके लिये

English

O Devas. the moon-crested lord accordingly granted them an unswerving devotidn and faith.

अध्याय १९

श्लोक 6

यदि प्रीतिः समुत्पन्ना यदि देयो वरश् च नौ भक्तिर्भवतु नौ नित्यं त्वयि चाव्यभिचारिणी

yadi prītiḥ samutpannā yadi deyo varaś ca nau bhaktirbhavatu nau nityaṃ tvayi cāvyabhicāriṇī

हिन्दी अर्थ

हेतुरस्याथ जगतः पुराणपुरुषोऽव्ययः। ऐसा निन्दित वचन मत बोलिये। ये महादेव सा बीजी खल्वेष बीजानां ज्योतिरेकः प्रकाशते॥ धर्मस्वरूप हैं, अत्यन्त प्रचण्ड हैं, महायोग प्रदीप्त करनेवाले तथा वर प्रदान करनेवाले हैं

English

Then Visnu knelt on the ground and bowed to the lord. With perfect control over himself he spoke to the lord in low tones.

अध्याय १९

श्लोक 7

देवः प्रदत्तवान् देवाः स्वात्मन्यव्यभिचारिणीम् ब्रह्मणे विष्णवे चैव श्रद्धां शीतांशुभूषणः

devaḥ pradattavān devāḥ svātmanyavyabhicāriṇīm brahmaṇe viṣṇave caiva śraddhāṃ śītāṃśubhūṣaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

ये शिव ही इस जगतूके कारण हैं। ये प्राचीन पुरुष हैं, समस्त बीजों अर्थात् कारणोंके मूल बीज अर्थात् परम कारण हैं, निर्विकार हैं एवं एकमात्र ज्योतिके रूपमें जगत्को प्रकाशित कर रहे हैं। जिस प्रकार बच्चे खिलौनोंसे खेलते हैं, उसी प्रकार ये महादेव स्वयं जगतूके साथ खेलते रहते हैं अर्थात् नानाविध लीलाएँ रचते रहते हैं ॥ ७०/२ ॥

English

O lord of the Devas, our controversy has borne splendid fruits, since you yourself have come over here to remove the same.

अध्याय १९

श्लोक 8

जानुभ्यामवनीं गत्वा पुनर्नारायणः स्वयम् प्रणिपत्य च विश्वेशं प्राह मन्दतरं वशी

jānubhyāmavanīṃ gatvā punarnārāyaṇaḥ svayam praṇipatya ca viśveśaṃ prāha mandataraṃ vaśī

हिन्दी अर्थ

नित्य आदि ये नाम मुझ प्रसवधर्मीके हैं और जिनके मरण आदि दुःखोंका भलीभाँति अनुभव करके वैराग्यको प्राप्त यतियोंद्वारा दृष्टिगत किये जाते हैं। ये शिव बीजवान् हैं, आप (ब्रह्मा) बीज हैं तथा सनातनरूप मैं (विष्णु) योनि हूँ॥ ७१-७२/.॥

English

On hearing this, Lord Siva again spoke smiling to Visriu who bowed to him with his head bent down and who stood with palms joined in reverence.

अध्याय १९

श्लोक 9

आवयोर्देवदेवेश विवादमतिशोभनम् इहागतो भवान् यस्माद् विवादशमनाय नौ

āvayordevadeveśa vivādamatiśobhanam ihāgato bhavān yasmād vivādaśamanāya nau

हिन्दी अर्थ

विष्णुके इस प्रकार कहनेपर विश्वात्मा ब्रह्माने उनसे पूछा-आप योनि, मैं बीज तथा महेश्वर शिव बीजी (बीजवान्) किस प्रकार हैं? आप मेरे इस सूक्ष्म तथा अव्यक्त संदेहका निवारण करनेकी कृपा अनेक प्रकारसे लोकतन्त्र ब्रह्माकी उत्पत्ति जानकर भगवान् विष्णुने उनके इस परम निगूढ़ प्रश्नका उत्तर दिया। इन महादेवसे बढ़कर अन्य कोई भी गूढ़ तत्त्व नहीं है । महत्तत्त्वका सर्वोत्कृष्ट स्थान अध्यात्मज्ञानियोंका

English

O Vi?pu, I am lord Siva, the unsullied, I divided my-

अध्याय १९

श्लोक 10

तस्य तद्वचनं श्रुत्वा पुनः प्राह हरो हरिम् प्रणिपत्य स्थितं मूर्ध्ना कृताञ्जलिपुटं स्मयन्

tasya tadvacanaṃ śrutvā punaḥ prāha haro harim praṇipatya sthitaṃ mūrdhnā kṛtāñjalipuṭaṃ smayan

हिन्दी अर्थ

उन्होंने अपनेको सगुण तथा निर्गुण--इन दो रूपॉमें विभाजित किया। उनमें जो निर्गुण हैं, वे अव्यक्तरूपमें तथा जो सगुण हैं, वे महेश्वररूपमें प्रतिष्ठित हैं प्राचीनकालमें सृष्टिके आदिमें मायाकी विधिको भी जाननेवाले, अगम्य तथा दुर्बोध उन्हीं महादेवके लिङ्गसे प्रादुर्भूत बीज सर्वप्रथम मेरी योनिमें गिरा। पुनः कालान्तरमें उस सागररूप योनिमें वह बीज स्वर्णके

English

O Vi?9u, abandon your delusion. Protect this Brahma, who in the Padmakalpa, will become your son.

अध्याय १९

श्लोक 11

प्रलयस्थितिसर्गाणां कर्ता त्वं धरणीपते वत्स वत्स हरे विष्णो पालयैतच्चराचरम्

pralayasthitisargāṇāṃ kartā tvaṃ dharaṇīpate vatsa vatsa hare viṣṇo pālayaitaccarācaram

हिन्दी अर्थ

बालक्रोडनकैर्देवः क्रीडते शङ्करः स्वयम् । प्रधानमव्ययो योनिरव्यक्तं प्रकृतिस्तमः मम चैतानि नामानि नित्यं प्रसवधर्मिणः। यः कः स इति दुःखार्तैदुश्यते यतिभिः शिव:

English

Then you will see me thus, so will the lotus-born Brahmi too. Thus saying the lord vanished there itself.

अध्याय १९

श्लोक 12

त्रिधा भिन्नो ह्यहं विष्णो ब्रह्मविष्णुभवाख्यया सर्गरक्षालयगुणैर् निष्कलः परमेश्वरः

tridhā bhinno hyahaṃ viṣṇo brahmaviṣṇubhavākhyayā sargarakṣālayaguṇair niṣkalaḥ parameśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

स एवमुक्तो विश्वात्मा ब्रह्मा विष्णुमपृच्छत ज्ञात्वा च विविधोत्पत्तिं ब्रह्मणो लोकतन्त्रिणः । इमं परमसादृश्यं प्रशनमभ्यवदद्धरिः

English

Ever since then the worship of the Lihga was well established in the world. The great goddess is the altar for the Lihga. The Lihga is the great lord himself.

अध्याय १९

श्लोक 13

संमोहं त्यज भो विष्णो पालयैनं पितामहम् पाद्मे भविष्यति सुतः कल्पे तव पितामहः

saṃmohaṃ tyaja bho viṣṇo pālayainaṃ pitāmaham pādme bhaviṣyati sutaḥ kalpe tava pitāmahaḥ

हिन्दी अर्थ

महतः परमं धाम शिवमध्यात्मिनां पदम् पुरा लिङ्गोद्भवं बीजं प्रथमं त्वादिसर्गिकम्

English

Lihga is so called because, O gods, everything gets dissolved in it. The brahmin who reads this narrative of Lihga, in the presence of the Lihga image attains Siva-hood. No doubt need be entertained in this respect.

अध्याय १९

श्लोक 14

तदा द्रक्ष्यसि मां चैवं सो ऽपि द्रक्ष्यति पद्मजः एवमुक्त्वा स भगवांस् तत्रैवान्तरधीयत

tadā drakṣyasi māṃ caivaṃ so 'pi drakṣyati padmajaḥ evamuktvā sa bhagavāṃs tatraivāntaradhīyata

हिन्दी अर्थ

मम योनौ समायुक्तं तद् बीजं कालपर्ययात्। हिरण्मयमकूपारे योन्यामण्डमजायत उल्बं तस्य महोत्सेधो योऽसौ कनकपर्वतः

English

Lihga is so called because, O gods, everything gets dissolved in it. The brahmin who reads this narrative of Lihga, in the presence of the Lihga image attains Siva-hood. No doubt need be entertained in this respect.

अध्याय १९

श्लोक 15

तदाप्रभृति लोकेषु लिङ्गार्चा सुप्रतिष्ठिता लिङ्गवेदी महादेवी लिङ्गं साक्षान्महेश्वरः

tadāprabhṛti lokeṣu liṅgārcā supratiṣṭhitā liṅgavedī mahādevī liṅgaṃ sākṣānmaheśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

ततश्च प्रतिसन्ध्यात्मा देवदेवो वर: प्रभुः। हिरण्यगर्भो भगवांस्त्वभिजज्ञे चतुर्मुखः आतारार्केन्दुनक्षत्रं शून्यं लोकमवेक्ष्य च। कोऽहमित्यपि च ध्याते कुमारास्तेऽभवंस्तदा

English

Lihga is so called because, O gods, everything gets dissolved in it. The brahmin who reads this narrative of Lihga, in the presence of the Lihga image attains Siva-hood. No doubt need be entertained in this respect.

अध्याय १९

श्लोक 16

लयनाल्लिङ्गमित्युक्तं तत्रैव निखिलं सुराः यस्तु लैङ्गं पठेन्नित्यम् आख्यानं लिङ्गसन्निधौ

layanālliṅgamityuktaṃ tatraiva nikhilaṃ surāḥ yastu laiṅgaṃ paṭhennityam ākhyānaṃ liṅgasannidhau

हिन्दी अर्थ

भुवनानलसङ्काशाः पद्यपत्रायतेक्षणाः। श्रीमान् सनत्कुमारश्च ऋभुश्चैवोर्ध्वरेतसौ उत्पन्नाः समकालं ते बुद्धयातीन्द्रियदर्शनाः

English

Lihga is so called because, O gods, everything gets dissolved in it. The brahmin who reads this narrative of Lihga, in the presence of the Lihga image attains Siva-hood. No doubt need be entertained in this respect.

अध्याय १९

श्लोक 17

स याति शिवतां विप्रो नात्र कार्या विचारणा

sa yāti śivatāṃ vipro nātra kāryā vicāraṇā

हिन्दी अर्थ

नारप्स्यन्ते च कर्माणि तापत्रयविवर्जिताः अल्पभूतं सुखं स्वर्गे दुःखानि नरके तथा।

English

Lihga is so called because, O gods, everything gets dissolved in it. The brahmin who reads this narrative of Lihga, in the presence of the Lihga image attains Siva-hood. No doubt need be entertained in this respect.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_liGgapurANa1-108.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Linga Purana — Chapter 19
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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