Mahanarayana Upanishad· Mahānārāyaṇopaniṣad
41
अध्याय 41 / 79

Anuvāka 41

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पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय ४१

श्लोक 1

मेधादेवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्यमाना ।त्वया जुष्टा जुषमाणा दुरुक्तान्बृहद्वदेम विदथे सुवीराः

medhādevī juṣamāṇā na āgādviśvācī bhadrā sumanasyamānā | tvayā juṣṭā juṣamāṇā duruktānbṛhadvadema vidathe suvīrāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रसन्न होकर मेधा-देवी हमारे पास आएँ — सर्वव्यापी, कल्याणी, सुमना; आपसे सेवित होकर हम सभा में सुवीरों के साथ बड़े स्वर में बोल सकें।

English

May the goddess Medha, well pleased, come to us, all-pervading, auspicious, gracious; enjoyed by you, may we speak greatly at the gathering, rich in heroes.

अध्याय ४१

श्लोक 2

त्वया जुष्ट ऋषिर्भवति देवि त्वया ब्रह्मागतश्रीरुत त्वया ।त्वया जुष्टश्चित्रं विन्दते वसु सा नो जुषस्व द्रविणेन मेधे

tvayā juṣṭa ṛṣirbhavati devi tvayā brahmāgataśrīruta tvayā | tvayā juṣṭaścitraṃ vindate vasu sā no juṣasva draviṇena medhe

हिन्दी अर्थ

हे देवी! तुमसे सेवित होकर मनुष्य ऋषि बनता है; तुम्हारे द्वारा ब्राह्मण श्री-सम्पन्न होता है; तुमसे सेवित होकर वह विचित्र धन पाता है। हे मेधा! वह तुम हमें धन के साथ स्वीकार करो।

English

Enjoyed by you, O goddess, one becomes a sage; by you a Brahmin attains glory; enjoyed by you one finds wondrous wealth; accept us with riches, O Medha.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/mahanarayana.itx · प्राप्त 30/9/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Mahanarayana Upanishad — Chapter 41
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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