अध्याय १०१
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण १०१ अथातः सम्प्रवक्ष्यामि व्रतषष्ठीमनुत्तमाम् रुद्रेणाभिहितां दिव्यां महापातकनाशनम्
matsya-purāṇa 101 athātaḥ sampravakṣyāmi vrataṣaṣṭhīmanuttamām rudreṇābhihitāṃ divyāṃ mahāpātakanāśanam
हिन्दी अर्थ
जलसे सर्वप्रथम विद्युन्मालीके शवको धोया उस बावलीमें डुबोये जानेपर देवशत्रु महाबली हैत्य विद्युन्माली उसी प्रकार उठ खड़ा हुआ, जैसे इन्धन पड्नेसे हवन की गयी अग्नि तुरंत उद्दी्त हो उठती है। उठते ही विद्युन्मालीने हाथ जोड़कर मय और तारकासुरका अभिवादन किया और मयसे इस प्रकार कहा--' प्रमथरूपी शृगालोंसे घिरा हुआ रुद्रके साथ नन्दी कहाँ खड़ा है? अब हमलोग शत्रुओंको पीसते हुए युद्ध करेंगे। हमलोगोंके शरीरमें दया कहाँ? हमलोग या तो रुद्रको खदेड़कर प्रभावशाली होंगे अथवा उनके द्वारा युद्धस्थलमें मारे जाकर यमराजके ग्रास बन जायंगे।' विद्युन्मालीके ऐसे उत्साहपूर्ण वचन सुनकर महासुर मयके नेत्रॉंमें आँसू छलक आये। तब
English
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