Matsya Purana· Matsya Purāṇa
175
अध्याय 175 / 176

Adhyaya 175

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अध्याय १७५

श्लोक 1

मत्स्य-पुराण १७५ ताभ्यां बलाभ्यां संजज्ञे तुमुलो विग्रहस्तदा सुराणामसुराणां च परस्परजयैषिणाम्

matsya-purāṇa 175 tābhyāṃ balābhyāṃ saṃjajñe tumulo vigrahastadā surāṇāmasurāṇāṃ ca parasparajayaiṣiṇām

हिन्दी अर्थ

पुण्यं दिनमथासाद्य तुलापुरुषदानवत्। दिनके आनेपर यजमान तुलापुरुषदानकी तरह लोक- 'लोकेशावाहनं कृत्वा ततो धेनुं प्रकल्पयेत्॥ २ पालोंका आवाहन करनेके पश्चात् धेनुकी कल्पना करे। भूमौ कृष्णाजिनं कृत्वा लवणद्रोणसंयुतम्। पृथ्वीपर कृष्णमृगचर्म बिछाकर उसपर एक द्रोण लवण

English

value. Punishment in abhisansftna, etc. Punishment in rude speak- ing. Punishment in stealing big animals. Punishment in killing women and children............ 251

अध्याय १७५

श्लोक 2

दानवा दैवतैः सार्धं नानाप्रहरणोद्यताः समीयुर्युध्यमाना वै पर्वता इव पर्वतैः

dānavā daivataiḥ sārdhaṃ nānāpraharaṇodyatāḥ samīyuryudhyamānā vai parvatā iva parvataiḥ

हिन्दी अर्थ

धनुं रत्नमयाँ कुर्यात् सङ्कल्प्य विधिपूर्वकम्॥ ३ रखकर उसके ऊपर विधिपूर्वक संकल्पसहित रत्नमयी गु कुयात् सङ्क HE धेनुको स्थापित करे। बुद्धिमान् पुरुष उसके मुखमें स्थापयेत् पद्मरागाणामेकाशीतिं मुखे बुधः । इक्यासी पद्मराग मणि तथा थूथुनमें इक्यासी पुष्पराग पुष्परागशतं तद्वद् घोणायां परिकल्पयेत्॥ ४ (पुखराज) स्थापित करे। उस गौके ललाटपर सोनेका ललाटे हेमतिलकं मुक्ताफलशतं हशो: । र ss दोनों आँखोंमें सौ मुक्ता (मोती), विद्रुमशतं दोनों भौंहोंपर सौ प्रवाल (मूँगा) और दोनों कानोंकी भूयुगे विद्रुमशतं शुक्ती कर्णद्वये स्मृते॥ ५ जगह दो शुक्तियाँ (सींपें) लगानी चाहिए। उसके सींग काञ्चनानि च शृङ्गाणि शिरो वञ्रशतात्मकम्। सोनेके होने चाहिए। सिरकी जगह सौ हीरोंको स्थापित ग्रीवायां नेत्रपटलं गोमेदकशतान्वितम्॥ ६ करना चाहिए। कण्ठ और नेत्र-पलकोंमें सौ गोमेदक,

English

— Special observance of peace............251-253

अध्याय १७५

श्लोक 3

तत्सुरासुरसंयुक्तं युद्धमत्यद्भुतं बभौ धर्माधर्मसमायुक्तं दर्पेण विनयेन च

tatsurāsurasaṃyuktaṃ yuddhamatyadbhutaṃ babhau dharmādharmasamāyuktaṃ darpeṇa vinayena ca

हिन्दी अर्थ

इन्द्रनीलशतं बेदूर्यशतपा पृष्ठभागमें सौ इन्द्रनील (नीलम), दोनों पार्श्वस्थानोंमें इन्दनीलशतं स्काटिकेर्दा पृष्ठ चवीत सौ वैदू (डू)-र्य (बिलोर), उदरपर स्फटिक तथा खुरा हेममयाः कार्याः पुच्छं मुक्तावलीमयम्। चाहिए। खुरोंको स्वर्णमय, पूँछको मुक्ता (मोतियों)-

English

— The characters of kings in former births— of people whoso towns

अध्याय १७५

श्लोक 4

ततो रथैर्विप्रयुक्तैर् वारणैश्च प्रचोदितैः उत्पतद्भिश्च गगनम् असिहस्तैः समन्ततः

tato rathairviprayuktair vāraṇaiśca pracoditaiḥ utpatadbhiśca gaganam asihastaiḥ samantataḥ

हिन्दी अर्थ

सूर्यकान्तेन्दुकान्तौ च घ्राणे कर्पूरचन्दने॥ ८ कौ लड़ियोंसे युक्त और दोनों नाकोंको सूर्यकान्त तथा चन्द्रकान्त मणियोंसे बनाकर कर्पूर और चन्दनसे कुङ्कुमानि च रोमाणि रौप्यनाभिं च कारयेत्। अ्थित करना चाहिए। रोमोंको केसर और नाभिको गारुत्मतशतं तद्वदपाने परिकल्पयेत्॥ ९ चाँदीसे बनवाये। गुदामें सौ लाल मणियोंको लगाना तथान्यानि च रत्नानि स्थापयेत् सर्वसन्धिषु । चाहिए। अन्य रत्नोंको संधिभागोंपर लगाना चाहिए। जीभको शक्करसे, गोबरको गुड्से और गोमूत्रको घीसे

English

aro being destroyed............... 253-264

अध्याय १७५

श्लोक 5

क्षिप्यमाणैश्च मुसलैः संपतद्भिश्च सायकैः चापैर्विस्फार्यमाणैश्च पात्यमानैश्च मुद्गरैः

kṣipyamāṇaiśca musalaiḥ saṃpatadbhiśca sāyakaiḥ cāpairvisphāryamāṇaiśca pātyamānaiśca mudgaraiḥ

हिन्दी अर्थ

क्का बकाया घ.गुढालकव १8 बनवाना चाहिए। दही-दूध प्रत्यक्ष ही रखे। पूँछके गोमूत्रमाज्येन तथा दधिदुग्धे स्वरूपतः। अग्रभागपर चमर तथा समीपमें ताँबेकी दोहनी रखनी पुच्छाग्रे चामरं दद्यात् समीपे ताम्रदोहनम्॥ ११ चाहिए॥ १--११॥ कुण्डलानि च हैमानि भूषणानि च शक्तितः। अपनी आर्थिक शक्तिके अनुसार उसे सोनेसे निर्मित कारयेदेवमेवं तु चतुर्थाशेन वत्सकम्॥ १२ आभूषण और कुण्डल पहनाने चाहिए, उसके ईखके पैर तथा धान्यानि सर्वाणि पादाश्रैक्षुमया: स्मृताः। होने चाहिए। इसी प्रकार गौके चतुर्थांशसे बछड़ा बनवाना नानाफलानि सर्वाणि पञ्चवर्णं वितानकम्॥ १३ । उस गौके समीप सभी प्रकारके अन्न, विविध

English

— In the topic on supernatural means of pacification the efiicacy

अध्याय १७५

श्लोक 6

तद्युद्धमभवद्घोरं देवदानवसंकुलम् जगतस्त्रासजननं युगसंवर्तकोपमम्

tadyuddhamabhavadghoraṃ devadānavasaṃkulam jagatastrāsajananaṃ yugasaṃvartakopamam

हिन्दी अर्थ

; विरचनं तद्वद्धौमाधिवासनम् फल, पँचरंगा वितान भी यथास्थान रखना चाहिए। इस ऋत्विग्भ्यो दक्षिणां दद्याद् धेनुमामन्त्रयेत् ततः । प्रकार गौकी रचना, हवन और अधिवासन करनेके बाद ऋत्विजोंको दक्षिणा देनी चाहिए। इसके बाद धेनुको गुडधेनुवदावाह्ण इह चोदाहरेत् ततः॥ १४ आमन्त्रित करे। उस समय गुड्धेनुकी तरह आवाहन कर

English

of worship.................. 264-255

अध्याय १७५

श्लोक 7

हस्तमुक्तैश्च परिघैर् विप्रयुक्तैश्च पर्वतैः दानवाः समरे जघ्नुर् देवानिन्द्रपुरोगमान्

hastamuktaiśca parighair viprayuktaiśca parvataiḥ dānavāḥ samare jaghnur devānindrapurogamān

हिन्दी अर्थ

त्वां सर्वदेवगणधाम यतः पठन्ति यह कहना चाहिए--' देवि! चूँकि रुद्र, इन्द्र, सूर्य, ब्रह्मा, रद्रेनदरसूर्यकमलासनवासुदेवाः । विष्णु-ये सभी तुम्हें सम्पूर्ण देवताओंका निवासस्थान तस्मात् समस्तभुवनत्रयदेहयुक्ता मानते हैं तथा समस्त त्रिभुवन तुम्हारे ही शरीरमें व्याप्त मां पाहि देवि भवसागरपीड्यमानम्॥ १५ हैं, अत: तुम भवसागरसे पीड़ित मेरा उद्धार करो।'

English

— In tho same topic— mutilation by fire......... 265-256

अध्याय १७५

श्लोक 8

ते वध्यमाना बलिभिर् दानवैर्जितकाशिभिः विषण्णवदना देवा जग्मुरार्तिं परां मृधे

te vadhyamānā balibhir dānavairjitakāśibhiḥ viṣaṇṇavadanā devā jagmurārtiṃ parāṃ mṛdhe

हिन्दी अर्थ

दद्याद् द्विजाय गुरवे जलपूर्विकां ताम्। पापैर्विमुक्ततनुरेति पदं मुरारेः इस प्रकार आमन्त्रित करनेके बाद गौकी परिक्रमा कर भक्तिपूर्वक हाथमें जल लेकर उस गौको ब्राह्मण गुरुको दान करना चाहिए । जो व्यक्ति इस प्रकार पुण्य दिन आनेपर उपवासकर यह दान करता है, उसका शरीर पापोंसे मुक्त

English

— In tho same— the means of removing dangers to trees... 256

अध्याय १७५

श्लोक 9

ते ऽस्त्रशूलप्रमथिताः परिघैर्भिन्नमस्तकाः भिन्नोरस्का दितिसुतैर् वेमू रक्तं व्रणैर्बहु

te 'straśūlapramathitāḥ parighairbhinnamastakāḥ bhinnoraskā ditisutair vemū raktaṃ vraṇairbahu

हिन्दी अर्थ

हो जाता है और वह भगवान् मुरारिके परमपदको प्राप्त करता है। इस प्रकार सम्पूर्ण विधियोंको जाननेवाला जो पुरुष इस रत्नधेनुका दान करता है, वह सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त होकर कामदेव-सदूश सौन्दर्यशाली हो जाता है तथा अपने बन्धुओं, पुत्रों और पौत्रोंके साथ देदीप्यमान विमानपर सवार हो, शिवके लोक (कैलास या सुमेरुस्थित दिव्य

English

— Removal of drought and overflow......... 257

अध्याय १७५

श्लोक 10

वेष्टिताः शरजालैश्च निर्यत्नाश्चासुरैः कृताः प्रविष्टा दानवीं मायां न शेकुस्ते विचेष्टितुम्

veṣṭitāḥ śarajālaiśca niryatnāścāsuraiḥ kṛtāḥ praviṣṭā dānavīṃ māyāṃ na śekuste viceṣṭitum

हिन्दी अर्थ

स हि मदनसरूपः स्थानमभ्येति शम्भोः॥ ९७ शिवधाम) -को प्राप्त करता है॥ १२ --१७॥ इति श्रीमत्स्ये महापुराणे महादानानुकीर्तने रत्नधेनृप्रदानविधिर्नामाष्टाशीत्यधिकद्विशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणके महादानवर्णन-प्रसङ्गमें रत्नधेनुदान नामक दो सौ अठासीवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ

English

— In the same— dangers from reservoirs of water...... 257

अध्याय १७५

श्लोक 11

अस्तं गतमिवाभाति निष्प्राणसदृशाकृति बलं सुराणामसुरैर् निष्प्रयत्नायुधं कृतम्

astaṃ gatamivābhāti niṣprāṇasadṛśākṛti balaṃ surāṇāmasurair niṣprayatnāyudhaṃ kṛtam

हिन्दी अर्थ

महाभूतघट -दानकी विधि अथातः सम्प्रवक्ष्यामि महादानमनुत्तमम्। महाभूतघटं नाम महापातकनाशनम्

English

— In the same — delivery of women.........258

अध्याय १७५

श्लोक 12

दैत्यचापच्युतान् घोरांश् छित्त्वा वज्रेण ताञ्छरान् शक्रो दैत्यबलं घोरं विवेश बहुलोचनः

daityacāpacyutān ghorāṃś chittvā vajreṇa tāñcharān śakro daityabalaṃ ghoraṃ viveśa bahulocanaḥ

हिन्दी अर्थ

तुलापुरुषवत् कुर्याल्लोकेशावाहनादिकम्। कारयेत् काञ्चनं कुम्भं महारत्नाचितं बुधः Fra कर -लशतं यावत् कुर्यात् प्रमाणतः । र तद्वत् कल्पवृक्षसमन्वितम् पद्यासनगतांस्तत्र ब्रह्मविष्णुमहेश्वरान्। लोकपालान् महेनदरांश्च स्वस्ववाहनमास्थितान्। वराहेणोद्धतां तद्वत् कुर्यात् पृथ्वीं सपङ्काजाम्

English

— In the same— unusual peace of offerings......... 258

अध्याय १७५

श्लोक 13

स दैत्यप्रमुखान्हत्वा तद्दानवबलं महत् तामसेनास्त्रजालेन तमोभूतमथाकरोत्

sa daityapramukhānhatvā taddānavabalaṃ mahat tāmasenāstrajālena tamobhūtamathākarot

हिन्दी अर्थ

वरुणं चासनगतं काञ्चनं मकरोपरि। हुताशनं मेषगतं वायुं कृष्णमृगासनम् तथा कोशाधिपं कुर्यान्मूषकस्थं विनायकम्। विन्यस्य घटमध्ये तान् वेदपञ्चकसंयुतान्

English

S7.— In tho same— dangers to animals and birds...... 258-259

अध्याय १७५

श्लोक 14

ते ऽन्योन्यं नावबुध्यन्त देवानां वाहनानि च घोरेण तमसाविष्टाः पुरुहूतस्य तेजसा

te 'nyonyaṃ nāvabudhyanta devānāṃ vāhanāni ca ghoreṇa tamasāviṣṭāḥ puruhūtasya tejasā

हिन्दी अर्थ

मत्स्यभगवान्ने कहा अब इसके बाद मैं महापातकोंको नष्ट करनेवाले अत्युत्तम “महाभूतघट- दान' नामक महादानकी विधि बतला रहा हूँ। किसी पवित्र तिथिके आनेपर तुलापुरुष-दानकी तरह पुण्याहवाचन कर ऋत्विज्, मण्डप, पूजन-सामग्री, आभूषण और आच्छादन आदिके प्रबन्धके साथ लोकपालोंका आवाहन आदि कार्य सम्पन्न करे। फिर बुद्धिमान् पुरुष रत्नोंसे जटित सोनेका एक कलश बनवाये, जो एक वित्तेसे लेकर सौ अंगुलतकके विस्तारवाला हो। उसे दुग्ध और घृतसे पूर्ण करके उसके पास कल्पवृक्ष रख दे। वहीं पद्मासनपर स्थित ब्रह्मा तथा अपने-अपने वाहनोंपर आरूढ़ विष्णु, शिव, लोकपालगण, देवराज इन्द्रादि

English

— In the samo- rerooval of accidents......259-260

अध्याय १७५

श्लोक 15

मायापाशैर्विमुक्तास्तु यत्नवन्तः सुरोत्तमाः वपूंषि दैत्यसिंहानां तमोभूतान्यपातयन्

māyāpāśairvimuktāstu yatnavantaḥ surottamāḥ vapūṃṣi daityasiṃhānāṃ tamobhūtānyapātayan

हिन्दी अर्थ

देवगणोंको भी बनाये। उसी प्रकार वराहद्वारा ऊपर उठायी गयी कमलसमेत पृथ्वीकी रचना करनी चाहिए। फिर मकरके वाहनपर आसन लगाये हुए स्वर्णनिर्मित वायु, पालकीपर बैठे हुए कुबेर तथा मूषकपर स्थित गणपति-इन सब देवताओंको पाँचों वेदोंके साथ उक्त घटमें स्थापित करना चाहिए। उनमें ऋग्वेदको रुद्राक्षमाला लिये, यजुर्वेदको कमल लिये, सामवेद-को

English

— Sacrifices to tho Grahas. A Lakh homas and a koti homas. The

अध्याय १७५

श्लोक 16

अपध्वस्ता विसंज्ञाश्च तमसा नीलवर्चसा पेतुस्ते दानवगणाश् छिन्नपक्षा इवाद्रयः

apadhvastā visaṃjñāśca tamasā nīlavarcasā petuste dānavagaṇāś chinnapakṣā ivādrayaḥ

हिन्दी अर्थ

सामवेदस्य वीणा स्याद् वेणुं दक्षिणतो न्यसेत्॥ ८ बायें हाथमें वीणा और दाहिने हाथमें वेणु लिये अथर्ववेदस्य पुनः स्त्रुकरनुवौ कमलं करे। पुराणवेदो वरदः पादुकोपानहच्छत्रं दीपिकाभूषणानि च

English

measure of aikunda. The materials and means, e.p., rltvik. The priests to be fed with kaira, etc., in tho first month, etc. Distribu- tion of one's weight in gold at the close of the sacrifice... 260-262

अध्याय १७५

श्लोक 17

तद्घनीभूतदैत्येन्द्रम् अन्धकार इवार्णवे दानवं देवकदनं तमोभूतमिवाभवत्

tadghanībhūtadaityendram andhakāra ivārṇave dānavaṃ devakadanaṃ tamobhūtamivābhavat

हिन्दी अर्थ

नमो वः सर्वदेवानामाधारेभ्यश्चराचरे। महाभूताधिदेवेभ्यः शान्तिरस्तु शिवं मम ब्रह्माण्डे सर्वभूतेषु तस्माच्छीरक्षयास्तु मे

English

— The discourse on taking a journey. Tho proper time of a

अध्याय १७५

श्लोक 18

तदासृजन्महामायां मयस्तां तामसीं दहन् युगान्तोद्योतजननीं सृष्टामौर्वेण वह्निना

tadāsṛjanmahāmāyāṃ mayastāṃ tāmasīṃ dahan yugāntodyotajananīṃ sṛṣṭāmaurveṇa vahninā

हिन्दी अर्थ

सर्वपापविनिर्मुक्तः स याति परमां गतिम् न तस्य पुनरावृत्तिरिह लोकेऽभिजायते इह पठति य इत्थं वासुदेवस्य पार्श्व

English

journey described in the dialogue between Matsya and Manu... 262-264

अध्याय १७५

श्लोक 19

सा ददाह ततः सर्वान् माया मयविकल्पिता दैत्याश्चादित्यवपुषः सद्य उत्तस्थुराहवे

sā dadāha tataḥ sarvān māyā mayavikalpitā daityāścādityavapuṣaḥ sadya uttasthurāhave

हिन्दी अर्थ

तथा अथर्ववेदको हाथोंमें लुक्, ्रुवा और कमल लिये साक्षसूत्रकमण्डलुः॥ ९ हुए बनाना चाहिए। पञ्चमवेद पुराणके आयुध अक्षसूत्र,

English

— The movements in the difforoiit parts of the body as forecasting

अध्याय १७५

श्लोक 20

मायामौर्वीं समासाद्य दह्यमाना दिवौकसः भेजिरे चन्द्रविषयं शीतांशुसलिलप्रदम्

māyāmaurvīṃ samāsādya dahyamānā divaukasaḥ bhejire candraviṣayaṃ śītāṃśusalilapradam

हिन्दी अर्थ

कमण्डलु और अभय तथा वरद मुद्राएँ हैं उस कलशके चारों ओर सभी (अठारह) प्रकारके अन्न, चामर, आसन, दर्पण, पादुका, जूता, छत्र, दीपक, रखना चाहिए। फिर यजमान अधिवासनके अन्तमें स्नान करके इस मन्त्रका उच्चारण करे-'इस चराचर जगतूमें आपलोग सम्पूर्ण देवताओंके आधार तथा पञ्चमहाभूतोंके अधिदेवता हैं, आपलोगोंको प्रणाम है। आप मुझे शान्ति

English

tho success in a journey............264

अध्याय १७५

श्लोक 21

ते दह्यमाना ह्यौर्वेण वह्निना नष्टचेतसः शशंसुर्वज्रिणं देवाः संतप्ताः शरणैषिणः

te dahyamānā hyaurveṇa vahninā naṣṭacetasaḥ śaśaṃsurvajriṇaṃ devāḥ saṃtaptāḥ śaraṇaiṣiṇaḥ

हिन्दी अर्थ

एवं कल्याण प्रदान कीजिये। चूँकि इस ब्रह्माण्डके सभी जीवोंमें इन पञ्च महाभूतोंके अतिरिक्त अन्य कुछ भी नहीं है, अतः इनकी कृपासे मुझे अक्षय लक्ष्मी प्राप्त हो।' इस प्रकार उच्चारण करनेके बाद जो व्यक्ति महाभूतघटका दान करता है, वह सभी पापोंसे मुक्त होकर परम गतिको प्राप्त होता है तथा पितरों एवं बन्धुगणोंके साथ सूर्यके

English

— Dreams as foretelling the success of a journey......265-266

अध्याय १७५

श्लोक 22

संतते मायया सैन्ये हन्यमाने च दानवैः चोदितो देवराजेन वरुणो वाक्यमब्रवीत्

saṃtate māyayā sainye hanyamāne ca dānavaiḥ codito devarājena varuṇo vākyamabravīt

हिन्दी अर्थ

होता हुआ विष्णुके लोकको जाता है। जो मानव इन उपर्युक्त सोलहों महादानोंका अनुष्ठान करता है, उसे इस लोकमें पुनः नहीं आना पड़ता। इस पृथ्वीपर जो मनुष्य वासुदेवके समीप इसे इस विधिसे पढ़ता है तथा पुत्र, पिता एवं स्त्रीक साथ भलीभाँति श्रवण करता है, वह सूर्यके समान तेजस्वी होकर देवाङ्गनाओंके साथ विष्णुलोकमें त्वमरपुरवधूभिर्मोदते सोऽपि कल्पम्॥ १७ कल्पपर्यन्त आनन्दका अनुभव करता है

English

— Sights— propitious aud ominous, at the time of starting... 266-267

अध्याय १७५

श्लोक 23

पुरा ब्रह्मर्षिजः शक्र तपस्तेपे सुदारुणम् ऊर्वः सपूर्वतेजस्वी सदृशो ब्रह्मणो गुणैः

purā brahmarṣijaḥ śakra tapastepe sudāruṇam ūrvaḥ sapūrvatejasvī sadṛśo brahmaṇo guṇaiḥ

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमत्स्ये महापुराणे महादानानुकीर्तनं नामैकोननवत्यधिकद्विशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणमें महादान-वर्णन नामक दो सौ नवासीवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ

English

— Visnu's greatness. Tho manifestation of Vamaiis when bakra

अध्याय १७५

श्लोक 24

तं तपन्तमिवादित्यं तपसा जगदव्ययम् उपतस्थुर्मुनिगणा दिव्या देवर्षिभिः सह

taṃ tapantamivādityaṃ tapasā jagadavyayam upatasthurmunigaṇā divyā devarṣibhiḥ saha

हिन्दी अर्थ

मनुने पूछा--- अच्युत! मन्वन्तर एवं युगोंका वर्णन करते समय आपने कल्पका प्रमाण तो बता दिया हैं, अब मुझे (सभी तीस) कल्पोंके नाम संक्षेपसे 'कल्पानां कीर्तनं वक्ष्ये महापातकनाशनम्। अस्यानुकीर्तनादेख वेदपुण्येन युज्यते वामदेवस्तृतीयस्तु ततो राथन्तरोऽपरः

English

and others were vanquished. Aditi practising dilTicnlt penances.

अध्याय १७५

श्लोक 25

हिरण्यकशिपुश्चैव दानवो दानवेश्वरः ऋषिं विज्ञापयामासुः पुरा परमतेजसम्

hiraṇyakaśipuścaiva dānavo dānaveśvaraḥ ṛṣiṃ vijñāpayāmāsuḥ purā paramatejasam

हिन्दी अर्थ

रौरवः पञ्चमः प्रोक्तः षष्ठो देव इति स्मृतः। सप्तमोऽथ बृहत्कल्पः कन्दर्पोऽष्टम उच्यते तम एकादशः प्रोक्तस्तथा सारस्वतः परः

English

Plea.scd the Oiniiipresont by sweet words in order to re.storc her own children to life. On Yisnii asking her to solicit for the boon she liked most, she says '' Let my son VAsava be tho ruler of tho three worlds." The Lord grants her tho boon saying,

अध्याय १७५

श्लोक 26

ऊचुर्ब्रह्मर्षयस्तं तु वचनं धर्मसंहितम् ऋषिवंशेषु भगवंश् छिन्नमूलमिदं पदम्

ūcurbrahmarṣayastaṃ tu vacanaṃ dharmasaṃhitam ṛṣivaṃśeṣu bhagavaṃś chinnamūlamidaṃ padam

हिन्दी अर्थ

पितृकल्पस्तथान्ते तु या कुहूर्ब्रह्मणः पुरा। इत्येबं ब्रह्मणो मासः सर्वपातकनाशनः तस्य कल्पस्य तन्नाम विहितं ब्रह्मणा पुरा संकीर्णास्तामसाश्चैव राजसा: सात्त्विकास्तथा । रजस्तमोमयास्तद्वदेते त्रिंशदुदाहता:

English

** I shall be born from you by Kasyapa, and killing tho demons, shall fulfil your request."............267-269

अध्याय १७५

श्लोक 27

एकस्त्वमनपत्यश्च गोत्रजो ऽन्यो न वर्तते कौमारं व्रतमास्थाय क्लेशमेवानुवर्तसे

ekastvamanapatyaśca gotrajo 'nyo na vartate kaumāraṃ vratamāsthāya kleśamevānuvartase

हिन्दी अर्थ

संकीर्णेषु सरस्वत्याः पितृणां व्युष्टिरुच्यते। अग्नेः शिवस्य माहात्म्यं तामसेषु दिवाकरे। राजसेषु च माहात्म्यमधिकं ब्रह्मणः स्मृतम् यस्मिन् कल्पे तु यत्रोक्तं पुराणं ब्रह्मणा पुरा। तस्य तस्य तु माहात्म्यं तत्स्वरूपेण वर्ण्यते

English

— The Lord appears in the form of a V&mana (dwarf). Learning

अध्याय १७५

श्लोक 28

बहूनि विप्र गोत्राणि मुनीनां भावितात्मनाम् एकदेहानि तिष्ठन्ति विविक्तानि विना प्रजाः

bahūni vipra gotrāṇi munīnāṃ bhāvitātmanām ekadehāni tiṣṭhanti viviktāni vinā prajāḥ

हिन्दी अर्थ

सात्त्विकेष्वधिकं तद्वद् विष्णोर्माहात्म्यमुत्तमम्। तथैव योगसंसिद्धा गमिष्यन्ति परां गतिम् मत्स्यभगवानूने कहा--अब मैं कल्पोंका वर्णन कर रहा हूँ, जो महान् पातकोंको नष्ट करनेवाला है और जिसका अनुकीर्तन करनेसे वेदाध्ययनका पुण्य प्राप्त होता है। उनमें प्रथम श्वेतकल्प, दूसरा नीललोहित, तीसरा वामदेव, चौथा रथन्तरकल्प, पाँचवाँ रौरवकल्प, छठा देवकल्प, सातवाँ बृहत्कल्प, आठवाँ कंदर्पकल्प,

English

that all the Asuras became weak through tho proweas of tho Lord,

अध्याय १७५

श्लोक 29

एवमुच्छिन्नमूलैश्च पुत्रैर्नो नास्ति कारणम् भवांस्तु तपसा श्रेष्ठो प्रजापातसमद्युतिः

evamucchinnamūlaiśca putrairno nāsti kāraṇam bhavāṃstu tapasā śreṣṭho prajāpātasamadyutiḥ

हिन्दी अर्थ

गारुडकल्प तथा पंद्रहवाँ कौर्मकल्प कहा गया है। इस दिन ब्रह्माजीकी पूर्णिमातिथि थी। सोलहवाँ नारसिंहकल्प, सोमकल्प, बीसवाँ मानवकल्प, इक्कीसवाँ तत्पुमान्कल्प,

English

Bali asks his grandfather how that could be. PrahlAda replies that His true nature isoiot known even by BrahmA and others— and He is the source of this entire universe. Tho same VAsiideva manifesting himself as the son of Kas'yapa and Aditi will kill tho Daityas, the burdens of this world, and make Indra and others happy. Bali says, ** who, Graiidsire, is this Hari, who is the dread of us all? 1 have got hundreds of heroes who will relieve this world, such as Vipraohiti and others, who excel VAsudeva in power.

अध्याय १७५

श्लोक 30

तत्र वर्तस्व वंशाय वर्धयात्मानम् आत्मना त्वया धर्मो ऽर्जितस्तेन द्वितीयां कुरु वै तनुम्

tatra vartasva vaṃśāya vardhayātmānam ātmanā tvayā dharmo 'rjitastena dvitīyāṃ kuru vai tanum

हिन्दी अर्थ

माहेश्वरकल्प कहा गया है, जिसमें त्रिपुरका विनाश हुआ था। तीसवाँ पितृकल्प है, जो प्राचीन कालमें ब्रह्माको अमावस्या थी। इस प्रकार ये सभी तीसों कल्प ब्रह्माके एक मास हैं, जो सभी पातकोंका नाश करनेवाले प्रारम्भमें ही जिस कल्पमें जिसका माहात्म्य वर्णन किया गया है, उसी आधारपर ब्रह्माने उस कल्पका वह नाम रखा है। ये तीसों कल्प संकीर्ण, तामस, राजस, सात्त्विक तथा रजस्तमोमय-इन भेदोंसे युक्त कहे गये हैं। संकीर्ण कल्पोंमें सरस्वती तथा पितरोंका, तामसमें अग्नि, सूर्य तथा शिवका और राजसमें ब्रह्माका अधिक माहात्म्य कहा गया है। प्राचीन कालमें ब्रह्माने जिस कल्पमें जिस पुराणको कहा है, उसी कल्पका माहात्म्य

English

Kfisna is not half of any of them in strength. PrahlAda curses him saying—** Since you are abusing Kri$na, the god of your grand- father, you will ere long loso your sovoreignty " At the solicita- tion of Bali, PrahlAda says— " Be you His devotee from this day.

अध्याय १७५

श्लोक 31

स एवमुक्तो मुनिभिर् मुनिर् मर्मसु ताडितः जगर्हे तानृषिगणान् वचनं चेदमब्रवीत्

sa evamukto munibhir munir marmasu tāḍitaḥ jagarhe tānṛṣigaṇān vacanaṃ cedamabravīt

हिन्दी अर्थ

उस पुराणमें वर्णन किया गया है। सात्त्विक कल्पोंमें उत्तम रूपसे विष्णु भगवानका माहात्म्य वर्णित है। योगसे सिद्धि प्राप्त करनेवाले लोग उनके पाठसे तस्य धर्मे मतिर्ब्रह्मा करोति विपुलां श्रियम्

English

He will be your saviour." The Lord takes birth in tho form of a dwarf. Propitious signs on the advent of the Protector of tho world. Tho gods give up their sorrow. Pleasant breezes blow.

अध्याय १७५

श्लोक 32

यथायं विहितो धरो मुनीनां शाश्वतः पुरा आर्षं वै सेवतः कर्म वन्यमूलफलाशिनः

yathāyaṃ vihito dharo munīnāṃ śāśvataḥ purā ārṣaṃ vai sevataḥ karma vanyamūlaphalāśinaḥ

हिन्दी अर्थ

यस्तु दद्यादिमान् कृत्वा हैमान् पर्वणि पर्वणि। ब्रह्मविष्णुपुरे वासं मुनिभिः पूज्यते दिवि सर्वपापक्षयकरं कल्पदानं यतो भवेत्। मुनिरूपांस्ततः कृत्वा दद्यात् कल्पान् विचक्षणः पुराणसंहिता चेयं तव भूप मयोदिता। सर्वपापहरा नित्यमारोग्यश्रीफलप्रदा

English

Praiso to the Lord by BrahmA and the other gods. The Lord thus self-manifested speaks of the different vratas and goos to tho sacrifice celebrated by Bali............269-274

अध्याय १७५

श्लोक 33

ब्रह्मयोनौ प्रसूतस्य ब्राह्मणस्यात्मदर्शिनः ब्रह्मचर्यं सुचरितं ब्रह्माणमपि चालयेत्

brahmayonau prasūtasya brāhmaṇasyātmadarśinaḥ brahmacaryaṃ sucaritaṃ brahmāṇamapi cālayet

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मसंवत्सरशतादेकाहं शैवमुच्यते। शिववर्षशतादेकं निमेषं वैष्णवं विदुः यदा स विष्णुर्जागर्ति तदेदं चेष्टते जगत्।

English

OiiAPTBR 240.— At V&manaX tread the whole earth shakos and Bali asks his preceptor Snkrfichftryya— why the earth trerablos and why tlio fires do not accept the offerings of the Asnras. Ho muses Jong and says, ** In Easyapa's house Visnu has taken birth. He comes to your sacrifice. The earth quakes at his strides, unable to boar his great weight. And on his approach the fires refuse your offerings." At this Bali feels delighted and asks his preceptor how the Lord ought to be received and entertained. Bukr&chary- ya says— " The Lord comes in hio ' Satva quality ' to preserve creation and to crush yon. Beware of making any promises to him, however small. Just say I am unable to give you anything."

अध्याय १७५

श्लोक 34

जनानां वृत्तयस्तिस्रो ये गृहाश्रमवासिनः अस्माकं तु वरं वृत्तिर् वनाश्रमनिवासिनाम्

janānāṃ vṛttayastisro ye gṛhāśramavāsinaḥ asmākaṃ tu varaṃ vṛttir vanāśramanivāsinām

हिन्दी अर्थ

इत्युक्त्वा देवदेवेशो मत्स्यरूपी जनार्दन: । पश्यतां सर्वभूतानां तत्रैवान्तरधीयत वैवस्वतो हि भगवान् विसृज्य विविधाः प्रजा: । स्वान्तरं पालयामास मार्तण्डकुलवर्धनः पुण्यं पवित्रमेतद् वः कथितं मत्स्यभाषितम्।

English

Bali replies, "How can I refuse the Lord anything when ho directly prefers a request?............ 3C9-870

अध्याय १७५

श्लोक 35

अब्भक्षा वायुभक्षाश्च दन्तोलूखलिनस्तथा अश्मकुट्टा ह्यशनकाः पञ्चातपसहाश्च ये

abbhakṣā vāyubhakṣāśca dantolūkhalinastathā aśmakuṭṭā hyaśanakāḥ pañcātapasahāśca ye

हिन्दी अर्थ

परमगतिको प्राप्त होते हैं। जो व्यक्ति प्रत्येक पर्वमें इन ब्रह्म तथा पद्म नामक पुराणोंका पाठ करता है, उसकी बुद्धिको ब्रह्मा धर्में लगाते हैं तथा उसे प्रचुर सम्पत्ति प्रदान करते हैं। जो व्यक्ति पर्व आनेपर इन्हें सोनेका बनवाकर दान करता है, वह ब्रह्मा तथा विष्णुके पुरमें निवास करते हुए स्वर्गमें मुनियोंद्वारा पूजित होता है; क्योंकि कल्पदान सम्पूर्ण पापोंको नष्ट करनेवाला होता है। विचक्षण पुरुषको इन कल्पको मुनिके समान

English

„ 24C-~IIow can I say I have nothing to give you? Please do nob stand in the way of my charity. Yon know I am his devotee. Ho will not kill me. Instantly Ho appears there in the form of the dwarf. At his sight the Daityas tremble and the sages worship him. Bali is greatly delighted and blesses his stars. All remain silent. Visnu pleases everybody. Seeing the modesty of the king of the Daityas Bali takes an " Argha " and approaching the Lord says, "1 shall present you anything you ask for, oven.4 1 my wealth or the whole world." At this the Lord says— " O king! please give mo throe feet of ground for my worship of fire." Bali gives Him throe feet of land. As tho consecrating waterfalls on VSmana's hands, He displ.ays His true form. Then assigning tlic throe worlds to Indra and granting many a boon to Bali, establishes him on his throne............274-278

अध्याय १७५

श्लोक 36

एते तपसि तिष्ठन्ति व्रतैरपि सुदुष्करैः ब्रह्मचर्यं पुरस्कृत्य प्रार्थयन्ति परां गतिम्

ete tapasi tiṣṭhanti vratairapi suduṣkaraiḥ brahmacaryaṃ puraskṛtya prārthayanti parāṃ gatim

हिन्दी अर्थ

स्वरूपवाला बनाकर दान करना चाहिए। राजन्! यह पुराण-संहिता, जो मैंने तुम्हें बताया है, सभी पापोंको नष्ट करनेवाली तथा नित्य आरोग्य एवं श्रीरूप फल प्रदान करनेवाली है। ब्रह्माका सौ वर्ष शिवका एक दिन तथा शिवका सौ वर्ष विष्णुका एक निमेष कहा जाता है। जब वे विष्णु जागते रहते हैं, तब यह जगत् भी चेष्टावान् रहता है और जब वे शान्त होकर शयन करते हैं, तब सारा जगत् शान्त हो जाता है सूतजी कहते हैं-ऋषियो ! ऐसा कहकर मत्स्यरूपी देवदेवेश्वर जनार्दन सभी प्राणियोंके सामने वहीं अन्तर्हित हो गये। विवस्वान्के पुत्र मार्तण्ड-कुलवर्धन भगवान् मनु विविध प्रजाओंकी सृष्टि कर अपनी अवधितक

English

„ 247 — Vartlha's deeds in the dialogue between Arjuna and Baunaka.

अध्याय १७५

श्लोक 37

ब्रह्यचर्याद्ब्राह्मणस्य ब्राह्मणत्वं विधीयते एवमाहुः परे लोके ब्रह्मचर्यविदो जनाः

brahyacaryādbrāhmaṇasya brāhmaṇatvaṃ vidhīyate evamāhuḥ pare loke brahmacaryavido janāḥ

हिन्दी अर्थ

उनका पालन करते रहे। उन्हींका यह मन्वन्तर अभीतक चला आ रहा है। इस प्रकार मैंने आपलोगोंसे मत्स्यभगवानुद्वारा कहे गये पुण्यप्रद पवित्र पुराणका वर्णन कर दिया। यह मत्स्यपुराण सभी शास्त्रॉमें शिरोभूषण- पुराणं सर्वशास्त्राणां यदेतन्मूर्थिन संस्थितम्॥ २५ रूपसे अवस्थित है॥ २३--२५॥

English

Tho disaolutiou of tho world and its fresh creation...... 278-2ii0

अध्याय १७५

श्लोक 38

ब्रह्मचर्ये स्थितं सत्यं ब्रह्मचर्ये स्थितं तपः ये स्थिता ब्रह्मचर्ये तु ब्राह्मणा दिवि संस्थिताः

brahmacarye sthitaṃ satyaṃ brahmacarye sthitaṃ tapaḥ ye sthitā brahmacarye tu brāhmaṇā divi saṃsthitāḥ

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमत्स्ये महापुराणे कल्पानुकीर्त्तनं नाम नवत्यधिकद्विशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणमें कल्पानुकीर्तन नामक दो सौ नब्बेवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ मात्स्यं पुराणमखिलं धर्मकामार्थसाधनम्

English

„ 218— Tho earth's praise of Visnu. Visnu adopts tho form of Varaha.

अध्याय १७५

श्लोक 39

नास्ति योगं विना सिद्धिर् न वा सिद्धिं विना यशः नास्ति लोके यशोमूलं ब्रह्मचर्यात्परं तपः

nāsti yogaṃ vinā siddhir na vā siddhiṃ vinā yaśaḥ nāsti loke yaśomūlaṃ brahmacaryātparaṃ tapaḥ

हिन्दी अर्थ

यत्रादौ मनुसंवादो ब्रह्माण्डकथनं तथा। सांख्यं शारीरकं प्रोक्तं चतुर्मुखमुखोदभवम् देवासुराणामुत्पत्तिर्मारुतोत्पत्तिरेव च। मदनद्वादशी तद्ल्लोकपालाभिपूजनम्

English

Tho Lord relievos the earth.........280-288

अध्याय १७५

श्लोक 40

यो निगृह्येन्द्रियग्रामं भूतग्रामं च पञ्चकम् ब्रह्मचर्यं समाधत्ते किमतः परमं तपः

yo nigṛhyendriyagrāmaṃ bhūtagrāmaṃ ca pañcakam brahmacaryaṃ samādhatte kimataḥ paramaṃ tapaḥ

हिन्दी अर्थ

मन्वन्तराणामुद्देशो वैन्यराजाभिवर्णनम्। सूर्यवैवस्वतोत्पत्तिर्बुधसङ्गमनं तथा पितृवंशानुकथनं श्राद्धकालस्तथैव च। पितृतीर्थप्रवासश्च सोमोत्पत्तिस्तथैव च कीर्तनं सोमवंशस्य ययातिचरितं तथा। कार्तवीर्यस्य माहात्म्यं वृष्णिवंशानुकीर्तनम्

English

i0— The immortality of tho gods and tho.story of tho Ampita. /&?ahkara, iSukra and the BanjivanividyA. Request to tho Mandar Hill. The gods and the DAnavas praise Visnu. Churning of tho milk ocean. Brahmft and the gods praise Visnu and tho gods are endowed with strength.........288-286

अध्याय १७५

श्लोक 41

अयोगे केशधरणम् असंकल्पव्रतक्रियां अब्रह्मचर्ये चर्या च त्रयं स्याद् दम्भसंज्ञकम्

ayoge keśadharaṇam asaṃkalpavratakriyāṃ abrahmacarye caryā ca trayaṃ syād dambhasaṃjñakam

हिन्दी अर्थ

भृगुशापस्तथा विष्णोर्हैत्यशापस्तथैव च। कीर्तनं पुरुषेशस्य वंशो हौताशनस्तथा पुराणकीर्तनं तद्वत् क्रियायोगस्तथैव च। व्रतं नक्षत्रसंख्याकं मार्तण्डशयनं तथा

English

— Tho origin of Kfila Kiita. The origin of Soma, «ri, Sivft, Ucchai-

अध्याय १७५

श्लोक 42

क्व दाराः क्व च संयोगः क्व च भावविपर्ययः नन्वियं ब्रह्मणा सृष्टा मनसा मानसी प्रजा

kva dārāḥ kva ca saṃyogaḥ kva ca bhāvaviparyayaḥ nanviyaṃ brahmaṇā sṛṣṭā manasā mānasī prajā

हिन्दी अर्थ

आर्द्रानन्दकरी तद्वद् व्रतं सारस्वतं पुनः। उपरागाभिषेकश्च सप्तमीस्नपनं पुनः सूतजी कहते हैं-ऋषियो! विश्वस्वरूप मत्स्यभगवान्ने धर्म, अर्थ और कामके साधनभूत जिस सम्पूर्ण मत्स्यपुराणका वर्णन किया था, वह सब मैंने आपलोगोंको बतला दिया। उसमें आदिमें मनुका संवाद, ब्रह्माण्डका वर्णन तथा चतुर्मुख ब्रह्माके मुखसे उद्भूत शारीरिक सांख्यका वर्णन है । तत्पश्चात्

English

sravas, Kaustubha and PSrfjftta. Tho origin of fire and of the serpents JIundubha, etc. Discourse between Visnu and KfiU kiita. IVaiso o'f Siva by tho gods.and tho Drinava.s. Disconr.se between tho gods and Asuras and Siva. Mahftdova drinks up tho deadly poison- The god and tho Asuras dance and sing when the poison is drunk up............ 287-280 251 — Churning out tho Amrita. Birth of Dhanvantari. Tho holding

अध्याय १७५

श्लोक 43

यद्यस्ति तपसो वीर्यं युष्माकं विदितात्मनाम् सृजध्वं मानसान्पुत्रान् प्राजापत्येन कर्मणा

yadyasti tapaso vīryaṃ yuṣmākaṃ viditātmanām sṛjadhvaṃ mānasānputrān prājāpatyena karmaṇā

हिन्दी अर्थ

मदनद्वादशी, लोकपालोंका पूजन, मन्वन्तरोंका उद्देश्य, राजा पृथुका वर्णन, सूर्य और वैवस्वत मनुकी उत्पत्ति, बुधका इलासे संयोग, पितृवंशका वर्णन, श्राद्धके कालका निर्णय, पितृतीर्थोमें प्रवास, सोमकी उत्पत्ति, सोमवंशका वर्णन, ययातिका चरित्र, कार्तवीर्य अर्जुनका माहात्म्य, वृष्णिबंशका वर्णन, भृगुशाप, विष्णुका हैत्योंको शाप, पुरुषेशका कीर्तन, अग्नि-वंशका वर्णन, पुराणोंका वर्णन, क्रियायोगका विवेचन, नक्षत्रसंज्ञकव्रत,

English

of the gora. The Lord in tho form of a fair woman steals tho Amrita from Asuras. R&hfi bciicadod. Tho war between tho gods and tho Asuras............280-291

अध्याय १७५

श्लोक 44

मनसा निर्मिता योनिर् आधातव्या तपस्विभिः न दारयोगो बीजं वा व्रतमुक्तं तपस्विनाम्

manasā nirmitā yonir ādhātavyā tapasvibhiḥ na dārayogo bījaṃ vā vratamuktaṃ tapasvinām

हिन्दी अर्थ

तडागविधिका माहात्म्य, पादपोत्सर्ग-विधि, रसकल्याणिनी्रत, आर्द्रानन्दकरीब्रत, सारस्वतव्रत, सप्तमीसप्तकव्रत, विशोकद्वादशीब्रत, दस प्रकारके मेरुओंके दानकी विधि, ग्रहशान्ति, ग्रहोंके स्वरूपका

English

— Blirif?Ui Atri and Vasigtha— tho authors of tho VAstu Hfistras. Birth of Vftstubhfita from the sweat of tho brow of Siva in tlio fight with Andhaka............... 291-292

अध्याय १७५

श्लोक 45

यदिदं लुप्तधर्मार्थं युष्माभिरिह निर्भयैः व्याहृतं सद्भिरत्यर्थम् असद्भिरिव मे मतम्

yadidaṃ luptadharmārthaṃ yuṣmābhiriha nirbhayaiḥ vyāhṛtaṃ sadbhiratyartham asadbhiriva me matam

हिन्दी अर्थ

व्रतका निरूपण हुआ है॥ १--१४॥ प्रयागस्य तु माहात्म्यं सर्वतीर्थानुकीर्तनम्। ऐलाश्रमत्रतं तद्वद् द्वीपलोकानुकीर्तनम्

English

— Tho inlluonco of the different months and astorisms. Tho

अध्याय १७५

श्लोक 46

वपुर्दीप्तान्तरात्मानम् एतत्कृत्वा मनोमयम् दारयोगं विना स्रक्ष्ये पुत्रम् आत्मतनूरुहम्

vapurdīptāntarātmānam etatkṛtvā manomayam dārayogaṃ vinā srakṣye putram ātmatanūruham

हिन्दी अर्थ

वञ्राङ्गस्य तु सम्भूतिस्तारकोत्पत्तिरेव च। तारकासुरमाहात्म्यं ब्रह्मदेवानुमन्त्रणम् पार्वतीऋषिसंवादस्तथैवोद्वाहमङ्कलम् प्रवरानुक्रमस्तद्वत् पितृगाथानुकीर्तनम्। तथोभयमुखीदानं दानं कृष्णाजिनस्य च

English

different methods of making houses..........292-295 254— Tho measure of a building. Tho nature of Chatuhsata, etc.

अध्याय १७५

श्लोक 47

एवमात्मानमात्मा मे द्वितीयं जनयिष्यति वन्येनानेन विधिना दिधक्षन्तमिव प्रजाः

evamātmānamātmā me dvitīyaṃ janayiṣyati vanyenānena vidhinā didhakṣantamiva prajāḥ

हिन्दी अर्थ

तथा सावित््युपाख्यानं राजधर्मास्तथैव च। यात्रानिमित्तकथनं स्वप्नमाङ्गल्यकीर्तनम् क्षीरोदमथनं तद्वत् कालकूटाभिशासनम्

English

Five sorts of royal palaco.s. Tho shape of the bouse of a prince* 295-297

अध्याय १७५

श्लोक 48

ऊर्वस्तु तपसाविष्टो निवेश्योरुं हुताशने ममन्थैकेन दर्भेण सुतस्य प्रभवारणिम्

ūrvastu tapasāviṣṭo niveśyoruṃ hutāśane mamanthaikena darbheṇa sutasya prabhavāraṇim

हिन्दी अर्थ

देवासुरविमर्दश्च वास्तुविद्यास्तथैव च। प्रतिमालक्षणं तद्वद् देवताराधनं ततः भविष्यद्राजनिर्देशो महादानानुकीर्तनम्। कल्पानुकीर्तनं तद्वद् ग्रन्थानुक्रमणी तथा एतत् पवित्रमायुष्यमेतत् कीर्तिविवर्धनम्। एतत् पवित्रं कल्याणं महापापहरं शुभम्

English

— TJio five kinds of pillars. The effect of having big treos like tho banyan to the cast of tho house......... 297-298

अध्याय १७५

श्लोक 49

तस्योरुं सहसा भित्त्वा ज्वालामाली ह्यनिन्धनः जगतो दहनाकाङ्क्षी पुत्रो ऽग्निः समपद्यत

tasyoruṃ sahasā bhittvā jvālāmālī hyanindhanaḥ jagato dahanākāṅkṣī putro 'gniḥ samapadyata

हिन्दी अर्थ

अस्मात् पुराणात् सुकृतं नराणां समस्तधर्माचरणोदभवानां सहैव लाभश्च महाफलानाम्

English

— On V&stu Vidyft...............299-800

अध्याय १७५

श्लोक 50

ऊर्वस्योरुं विनिर्भिद्य और्वो नामान्तको ऽनलः दिधक्षन्निव लोकांस्त्रीञ् जज्ञे परमकोपनः

ūrvasyoruṃ vinirbhidya aurvo nāmāntako 'nalaḥ didhakṣanniva lokāṃstrīñ jajñe paramakopanaḥ

हिन्दी अर्थ

उसी प्रकार संक्रान्तिस्नपनत्रत, विभूतिद्वादशीव्रत, साठ व्रतोंका माहात्म्य, स्नानविधिका क्रम, प्रयागका माहात्म्य, समस्त तीर्थाँका वर्णन, ऐलाश्रमव्रत, द्वीप और लोकोंका कथन, सूर्य और चन्द्रमाकी गतिका वर्णन, आदित्यके रथका वर्णन, उसका अन्तरिक्षमें गमन, ध्रुवका माहात्म्य, सुरेन्द्रोंके भुवन, त्रिपुरके प्रति घोषणा, पितरोंके पिण्डदानका माहात्म्य, मन्वन्तरोंका निर्णय, वज्राङ्गकी उत्पत्ति, तारककी उत्पत्ति, तारकासुरकी प्रशंसा, ब्रह्मा और देवताओंकी मन्त्रणा, पार्वतीकी उत्पत्ति, शिवका तपोवन-गमन, कामदेवके शरीरका दाह, रतिका शोक, पार्वतीका तपोवन-गमन, विश्वनाथकी प्रसन्नता, पार्वती और सप्तर्षियोंका संवाद, पार्वतीका विवाहोत्सव, कुमार

English

— Ditto.....•...... 300-801 258— On the measurements of limbs of the images of tho Devas... 301-306

अध्याय १७५

श्लोक 51

उत्पन्नमात्रश्चोवाच पितरं क्षीणया गिरा क्षुधा मे बाधते तात जगद्भक्ष्ये त्यजस्व माम्

utpannamātraścovāca pitaraṃ kṣīṇayā girā kṣudhā me bādhate tāta jagadbhakṣye tyajasva mām

हिन्दी अर्थ

स्कन्दकी उत्पत्ति, कुमारकी विजय, तारकासुरका भयंकर वध, नरसिंहावतारका वर्णन, पद्मोदभवका विसर्ग, अन्धकासुरका वध, वाराणसीका माहात्म्य, नर्मदाका माहात्म्य, प्रवरोंका अनुक्रम, पितृगाथाका वर्णन, उभयमुखी दान तथा कृष्णमृगचर्मके दानका वर्णन, सावित्रीका उपाख्यान, राजधर्मका वर्णन, यात्राके निमित्तका कथन, शुभ-अशुभ स्वप्नों और शकुनोंका निरूपण, वामनका माहात्म्य, वराहका माहात्म्य, क्षीरसागरका मन्थन, कालकूटका दमन,

English

— Tho distinctive marks of an imago. Its shapes and sizes... 305-807

अध्याय १७५

श्लोक 52

त्रिदिवारोहिभिर्ज्वालैर् जृम्भमाणो दिशो दश निर्दहन्सर्वभूतानि ववृधे सो ऽन्तको ऽनलः

tridivārohibhirjvālair jṛmbhamāṇo diśo daśa nirdahansarvabhūtāni vavṛdhe so 'ntako 'nalaḥ

हिन्दी अर्थ

देवों और असुरोंका संग्राम, वास्तुविद्याका कथन, प्रतिमाओंके लक्षण, देवताओंकी आराधना, प्रासादोंका लक्षण, मण्डपाँका लक्षण, भविष्यत्कालीन राजाओंका वर्णन, महादानोंका कथन, कल्पोंका वर्णन तथा ग्रन्थोंकी अनुक्रमणिकाका कथन हुआ है॥ १५--२८॥ यह पुराण परम पवित्र, आयु प्रदान करनेवाला कीर्तिवर्धक, परम पावन, कल्याणकारक, बड़े-बड़े पापोंको नष्ट करनेवाला और मङ्गलमय है। इस पुराणसे मनुष्योको सहैव पुण्य तथा समस्त तीर्थॉमें स्नान करने और सम्पूर्ण र

English

magea whore half is a god and half a goddess...... 807-310 261— Images of PrabhfiJrara, etc............. 310-818

अध्याय १७५

श्लोक 53

एतस्मिन्नन्तरे ब्रह्मा मुनिमूर्वं सभाजयन् उवाच वार्यतां पुत्रो जगतश्च दयां कुरु

etasminnantare brahmā munimūrvaṃ sabhājayan uvāca vāryatāṃ putro jagataśca dayāṃ kuru

हिन्दी अर्थ

धर्माचरणसे उत्पन्न हुए महान् फलोंका लाभ प्राप्त होताहै। ९०८४ मत्स्यपुराण

English

( xvil )

अध्याय १७५

श्लोक 54

अस्यापत्यस्य ते विप्र करिष्ये स्थानमुत्तमम् तथ्यमेतद्वचः पुत्र शृणु त्वं वदतां वर

asyāpatyasya te vipra kariṣye sthānamuttamam tathyametadvacaḥ putra śṛṇu tvaṃ vadatāṃ vara

हिन्दी अर्थ

एतत् पुराणं परमं सर्वदोषविघातकम्। यह परमोत्तम पुराण सम्पूर्ण दोषोंका नाशक है। इसे मत्स्यरूपेण हरिणा कथितं मनवेऽर्णवे॥ ३९ मत्स्यरूपधारी श्रीहरिने प्रलयकालमें एकार्णवके जलमें अस्मात् पुराणादपि पादमेकं मनुके प्रति कहा था। जो मनुष्य इस पुराणके एक पठेत् तु यः सोऽपि विमुक्तपापः। श्लोकके एक चरणका भी पाठ करता है, वह भी नारायणस्यास्पदमेति नून- पापॉसे मुक्त होकर सुखी हो जाता है तथा कामदेवकी भाँति दिव्य शरीर धारणकर निश्चय ही नारायणके

English

— Description of the pcdastal. The mention of the fruit in des- cribing the altar...............813-614

अध्याय १७५

श्लोक 55

धन्यो ऽस्म्यनुगृहीतो ऽस्मि यन्मे ऽद्य भगवाञ्छिशोः मतिमेतां ददातीह परमानुग्रहाय वै

dhanyo 'smyanugṛhīto 'smi yanme 'dya bhagavāñchiśoḥ matimetāṃ dadātīha paramānugrahāya vai

हिन्दी अर्थ

कवत्, ततवर ति जग निवासस्थान वैकुण्ठमें चला जाता है । जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक ४3002, Sb वह शंकरजीकी कृपासे अश्वमेध-यज्ञके अन्तमें होनेवाले

English

— The distinctive features of the Linga. The nine.sorts of Liuga...314-315

अध्याय १७५

श्लोक 56

प्रभातकाले सम्प्राप्ते काङ्क्षितव्ये समागमे भगवंस्तर्पितः पुत्रः कैर्हव्यैः प्राप्स्यते सुखम्

prabhātakāle samprāpte kāṅkṣitavye samāgame bhagavaṃstarpitaḥ putraḥ kairhavyaiḥ prāpsyate sukham

हिन्दी अर्थ

हि अवभृथ-स्नानके सदृश प्रभावशाली फलको प्राप्त करता फलं समाप्नोति हरप्रसादात्॥ ३३ है द्विजवरो ! जो धर्मज्ञ मनुष्य शिव, विष्णु, ब्रह्मा और शिवं विष्णुं समभ्यर्च्य ब्रह्माणं सदिवाकरम्। सूर्यकी अर्चना करके श्रद्धापूर्वक इस पुराणके एक श्लोकं श्लोकार्धपादं वा श्रद्धया यः शृणोति बा। श्लोक, आधे श्लोक अथवा एक चरणको सुनता है श्रावयेद् वापि धर्मज्ञस्तत्फलं शृणुत द्विजाः ॥ ३४ अथवा दूसरेको सुनाता है, उसे जो फल प्राप्त होता है, उसे सुनिये। वह ब्राह्मण हर ब्राह्मणो लभते विद्यां क्षत्रियो लभते महीम्। उसे सुनिये। वह ब्राह्मण हो तो विद्या, क्षत्रिय हो

English

— The measurements, Kuurta etc., The placing of the imago, etc., * and their methods............ 315-818

अध्याय १७५

श्लोक 57

कुत्र चास्य निवासः स्याद् भोजनं वा किमात्मकम् विधास्यतीह भगवान् वीर्यतुल्यं महौजसः

kutra cāsya nivāsaḥ syād bhojanaṃ vā kimātmakam vidhāsyatīha bhagavān vīryatulyaṃ mahaujasaḥ

हिन्दी अर्थ

वैश्यो धनमवाप्नोति सुखं शूद्रस्तु विन्दति॥ ३५ करता है। सम्पूर्ण पुराण सुननेवाला पापरहित होकर आयुष्मान् पुत्रवांश्चैव लक्ष्मीवान् पापवर्जितः। आयुष्मान्, पुत्रवान् और लक्ष्मीवान् हो जाता है तथा उसे श्रुत्वा पुराणमखिलं शत्रुभिश्चापराजितः॥ ३६ शत्रु पराजित नहीं कर सकते॥ २९--३६॥

English

— Method of adhivAsaiiu. The definition of an Achdrya." Fruit

अध्याय १७५

श्लोक 58

वडवामुखे ऽस्य वसतिः समुद्रे वै भविष्यति मम योनिर्जलं विप्र तस्य पीतवतः सुखम्

vaḍavāmukhe 'sya vasatiḥ samudre vai bhaviṣyati mama yonirjalaṃ vipra tasya pītavataḥ sukham

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमत्स्ये महापुराणेऽनुक्रमणिका नामैकनवत्यधिकद्विशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणमें अनुक्रमणिका नामक दो सौ इक्यानबेवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ पुराण- श्रवण-कालमें पालनीय धर्म

English

ofadhivdsana...............318*820 266— The ceremony of Pratisthd. After the establishment cere-

अध्याय १७५

श्लोक 59

यत्राहमास नियतं पिबन्वारिमयं हविः तद्धविस्तव पुत्रस्य विसृजाम्यालयं च तत्

yatrāhamāsa niyataṃ pibanvārimayaṃ haviḥ taddhavistava putrasya visṛjāmyālayaṃ ca tat

हिन्दी अर्थ

श्रद्धाभक्तिसमायुक्ता नान्यकार्येषु लालसाः। जो लोग श्रद्धा और भक्तिसे सम्पन्न, अन्य कार्योंकी वाग्यताः शुचयोऽव्यग्राः श्रोतारः पुण्यभागिनः॥ १ लालसासे रहित, मौन, पवित्र और शान्तचित्तसे (पुराणकी ट ण्या णयन्ति मंुजधमोः कथाको) श्रवण करते हैं, वे ही पुण्यके भागी होते हैं । जो 7 ऊयाचिरत अधम मनुष्य भक्तिरहित होकर पुण्यकथाको सुनते हैं, उन्हे

English

mony of the image, the* worship of the Ac h dry a. Besmearing honey, etc., on succeeding days. The fault of moving an imago once established............... 320-32.)

अध्याय १७५

श्लोक 60

ततो युगान्ते भूतानाम् एष चाहं च पुत्रक सहितौ विचरिष्यावो निष्पुत्राणामृणापहः

tato yugānte bhūtānām eṣa cāhaṃ ca putraka sahitau vicariṣyāvo niṣputrāṇāmṛṇāpahaḥ

हिन्दी अर्थ

तेषां पुण्यफलं नास्ति दुःखं स्याज्जन्मजन्मनि॥ २ पुण्यफल तो मिलता नहीं, उलटे प्रत्येक जन्ममें दुःख भोगना पुराणं ये च सम्पूज्य ताम्बूलाद्यैरुपायनैः। पडता है। जो लोग ताम्बूल, पुष्प, चन्दन आदि पूजन- व्याव्दरिता प सामग्रियोंद्वारा पुराणकी भलीभाँति पूजा करके भक्तिपूर्वक

English

— The ceremony of bathing the god. The obsorvanetj of the " seven-day festival *' cercjnony......... 323-325

अध्याय १७५

श्लोक 61

एषो ऽग्निर् अन्तकाले तु सलिलाशी मया कृतः दहनः सर्वभूतानां सदेवासुररक्षसाम्

eṣo 'gnir antakāle tu salilāśī mayā kṛtaḥ dahanaḥ sarvabhūtānāṃ sadevāsurarakṣasām

हिन्दी अर्थ

"कथा भक्त्या द स्युर्न :॥ ३ हैं संदेह शृण्वन्ति च थाप कथा सुनते हैं, वे निःसंदेह दरिद्रतारहित अर्थात् धनवान् कथायां कीर्त्यमानायां ये गच्छन्त्यन्यतो नराः। होते हैं। जो मनुष्य कथा होते समय अन्य कार्यके लिये भ्ोगान्तरे प्रणश्यन्ति तेषां दाराश्च सम्पदः॥ ४ वहाँसे उठकर अन्यत्र चले जाते हैं, उनकी पत्ती और

English

— The ceremony of removing evils from buildings. Special offer-

अध्याय १७५

श्लोक 62

एवमस्त्विति तं सो ऽग्निः संवृतज्वालमण्डलः प्रविवेशार्णवमुखं प्रक्षिप्य पितरि प्रभाम्

evamastviti taṃ so 'gniḥ saṃvṛtajvālamaṇḍalaḥ praviveśārṇavamukhaṃ prakṣipya pitari prabhām

हिन्दी अर्थ

पुराण- श्रवण-कालमें पालनीय धर्म १०८५ TSS ००००० ००कारा००ल व व च सर! भर र््च्च्च्च्च्प्च्च्वचचचिलििितता सोष्णीषमस्तका ये च कथां शृण्वन्ति पावनीम्। ते बलाकाः प्रजायन्ते पापिनो मनुजाधमाः

English

ings to special gods..............325-327 269— Palaces— their names and characteristics...... 327-320

अध्याय १७५

श्लोक 63

प्रतियातस्ततो ब्रह्मा ये च सर्वे महर्षयः और्वस्याग्नेः प्रभां ज्ञात्वा स्वां स्वां गतिमुपाश्रिताः

pratiyātastato brahmā ye ca sarve maharṣayaḥ aurvasyāgneḥ prabhāṃ jñātvā svāṃ svāṃ gatimupāśritāḥ

हिन्दी अर्थ

श्वविष्ठां खादयन्त्येतान्नयन्ति यमकिङ्कराः ये च तुड्कासनारूढाः कथां शृण्वन्ति दाम्भिकाः । अक्षय्यनरकान् भुक्त्वा ते भवन्त्येव वायसाः

English

— The signs of a "mandapa.'* Dillorent names for mandapa.

अध्याय १७५

श्लोक 64

हिरण्यकशिपुर्दृष्ट्वा तदा तन्महदद्भुतम् उच्चैः प्रणतसर्वाङ्गो वाक्यमेतदुवाच ह

hiraṇyakaśipurdṛṣṭvā tadā tanmahadadbhutam uccaiḥ praṇatasarvāṅgo vākyametaduvāca ha

हिन्दी अर्थ

गुरुतल्पसमं पापं सम्प्राप्य नरकं व्रजेत् ये निन्दन्ति पुराणज्ञान् कथां वै पापहारिणीम्। ते वै जन्मशतं मर्त्याः सूकराः सम्भवन्ति हि कथायां कीर्त्यमानायां ये वदन्ति दुरुत्तरम्। ते गर्दभाः प्रजायन्ते कुकलासास्तथैव च

English

Their distinctive features......... *...329-331 271 — The future kings of the Iks vakil and Magadha families... 331-333

अध्याय १७५

श्लोक 65

भगवन्नद्भुतमिदं संवृत्तं लोकसाक्षिकम् तपसा ते मुनिश्रेष्ठ परितुष्टः पितामहः

bhagavannadbhutamidaṃ saṃvṛttaṃ lokasākṣikam tapasā te muniśreṣṭha parituṣṭaḥ pitāmahaḥ

हिन्दी अर्थ

ते भुक्त्वा नरकान् घोरान् भवन्ति वनसूकराः ये कथामनुमोदन्ते कीर्त्यमानां नरोत्तमाः। अशृण्वन्तोऽपि ते यान्ति शाश्वतं परमं पदम्

English

— The reign of the Pulaka family. The names of the kings of the

अध्याय १७५

श्लोक 66

अहं तु तव पुत्रस्य तव चैव महाव्रत भृत्य इत्यवगन्तव्यः साध्यो यदिह कर्मणा

ahaṃ tu tava putrasya tava caiva mahāvrata bhṛtya ityavagantavyaḥ sādhyo yadiha karmaṇā

हिन्दी अर्थ

कथायां कीर्त्यमानायां विघ्नं कुर्वन्ति ये शठाः। कोट्यब्दं नरकान् भुक्त्वा भवन्ति ग्रामसूकराः ये श्रावयन्ति मनुजान् पुण्यां पौराणिकीं कथाम्। कल्पकोटिशतं साग्रं तिष्ठन्ति ब्रह्मणः पदे आसनार्थं प्रयच्छन्ति पुराणज्ञस्य ये नराः। 'कम्बलाजिनवासांसि मञ्जं फलकमेव च

English

family................•• 384 337 273~The reigns of the Andhras, Yavauas and the Mlcchchhas. The

अध्याय १७५

श्लोक 67

तन्मां पश्य समापन्नं तवैवाराधने रतम् यदि सीदेन्मुनिश्रेष्ठ तवैव स्यात्पराजयः

tanmāṃ paśya samāpannaṃ tavaivārādhane ratam yadi sīdenmuniśreṣṭha tavaiva syātparājayaḥ

हिन्दी अर्थ

स्वर्गलोकं समासाद्य भुक्त्वा भोगान् यथेप्सितान्। स्थित्वा ब्रह्मादिलोकेषु पदं यान्ति निरामयम् पुराणस्य प्रयच्छन्ति ये वरासनमुत्तमम्। भोगिनो ज्ञानसम्पन्ना भवन्ति च भवे भवे

English

end of a Yuga. The origin of Kali Yuga... ... 337*347

अध्याय १७५

श्लोक 68

धन्यो ऽस्म्यनुगृहीतो ऽस्मि यस्य ते ऽहं गुरुः स्थितः नास्ति मे तपसानेन भयमद्येह सुव्रत

dhanyo 'smyanugṛhīto 'smi yasya te 'haṃ guruḥ sthitaḥ nāsti me tapasānena bhayamadyeha suvrata

हिन्दी अर्थ

सम्पत्ति नष्ट हो जाती है। जो पापी अधम मनुष्य मस्तकपर पगड़ी बाँधकर (या टोपी लगाकर) पवित्र कथाको सुनते हैं, वे (दूसरे जन्ममें) बगुला होकर उत्पन्न होते हैं। जो लोग पान चबाते हुए पवित्र कथाको सुनते हैं, उन्हें कुत्तेका मल खाना पड़ता है और यमदूत उन्हें यमपुरीमें ले जाते हैं । जो ढोंगी मनुष्य (व्यासासनसे) ऊँचे आसनपर बैठकर कथा सुनते हैं, वे ही अक्षय नरकोंका भोग करके कौआ होते हैं । जो लोग (व्यासासनसे) श्रेष्ठ आसनपर अथवा मध्यम आसनपर बैठकर उत्तम कथाको श्रवण करते हैं, वे अर्जुन नामक वृक्ष होते हैं। जो मनुष्य (पुराणकी पुस्तक और व्यासको) बिना प्रणाम किये ही कथा सुनते हैं, वे विषभक्षी होते हैं तथा जो लोग सोते

English

— The gift called Tuldpurusaddna Mahdddna. Different sorts of Tuldpurusaddna............ 347-351

अध्याय १७५

श्लोक 69

तामेव मायां गृह्णीष्व मम पुत्रेण निर्मिताम् निरिन्धनामग्निमयीं दुर्धर्षां पावकैरपि

tāmeva māyāṃ gṛhṇīṣva mama putreṇa nirmitām nirindhanāmagnimayīṃ durdharṣāṃ pāvakairapi

हिन्दी अर्थ

हुए कथा सुनते हैं, वे अजगर साँप होते हैं इसी प्रकार जो वक्ताके समान आसनपर बैठकर कथा सुनता है, वह गुरु-शय्या-गमनके समान पापका भागी होकर नरकगामी होता है। जो मनुष्य पुराणोंके ज्ञाता (व्यास) और पापोंको हरण करनेवाली कथाकी निन्दा

English

— Giftof Uiranyagarbha............861-353

अध्याय १७५

श्लोक 70

एषा ते स्वस्य वंशस्य वशगारिविनिग्रहे संरक्षत्यात्मपक्षं च विपक्षं च प्रधक्ष्यति

eṣā te svasya vaṃśasya vaśagārivinigrahe saṃrakṣatyātmapakṣaṃ ca vipakṣaṃ ca pradhakṣyati

हिन्दी अर्थ

करते हैं, वे सौ जन्मोंतक सूकर-योनिमें उत्पन्न होते हैं। कथा होते समय जो लोग वक्ताको बुरा उत्तर देते हैं, वे गदहा तथा गिरगिटकी योनिमें पैदा होते हैं । जो मनुष्य इस पुण्य कथाको कभी भी नहीं सुनते, वे घोर नरकोंका भोग करके बनैले सूअर होते हैं । जो नरश्रेष्ठ कही जाती हुई कथाका अनुमोदन करते हैं, वे कथा न सुननेपर भी अविनाशी परम पदको प्राप्त होते हैं। जो दुष्ट कही जाती हुई कथामें विघ्न पैदा करते हैं, वे करोड़ों वर्षोतक नरकोंका भोग करके अन्तमें ग्रामीण सूअर होते हैं। जो लोग साधारण मनुष्योंको पुराणसम्बन्धिनी पुण्य कथा सुनाते हैं, वे सौ करोड़ कल्पोंसे भी अधिक समयतक ब्रह्मलोकमें निवास

English

— The moihod of giving away the Brahuidiida, Tho fruit of doing, reading or listening to this account.........353-354

अध्याय १७५

श्लोक 71

एवमस्त्विति तां गृह्य प्रणम्य मुनिपुंगवम् जगाम त्रिदिवं हृष्टः कृतार्थो दानवेश्वरः

evamastviti tāṃ gṛhya praṇamya munipuṃgavam jagāma tridivaṃ hṛṣṭaḥ kṛtārtho dānaveśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

करते हैं। जो मनुष्य पुराणके ज्ञाता वक्ताको आसनके लिये कम्बल, मृगचर्म, वस्त्र, सिंहासन और चौकी करते हैं, वे स्वर्गलोकमें जाकर अभीष्ट भोगोंका उपभोग करनेके बाद ब्रह्मा आदिके लोकोंमें निवास कर अन्तमें निरामय पदको प्राप्त होते हैं॥ १०--१८॥ इसी तरह जो लोग पुराणकी पुस्तकके लिये

English

— -Gift of a Kalpa tree. The fruit of hearing and reading this

अध्याय १७५

श्लोक 72

एषा दुर्विषहा माया देवैरपि दुरासदा और्वेण निर्मिता पूर्वं पावकेनोर्वसूनुना

eṣā durviṣahā māyā devairapi durāsadā aurveṇa nirmitā pūrvaṃ pāvakenorvasūnunā

हिन्दी अर्थ

उत्तम श्रेष्ठ आसन प्रदान करते हैं, वे प्रत्येक जन्ममें भोगोंका उपभोग करनेवाले एवं ज्ञानी ह होते हैं हू पुराणश्रवणादेव ते प्रयान्ति परं पदम् एवंविधकविधानेन पुराणं शृणुयान्नरः। भुक्त्वा भोगान् यथाकामं विष्णुलोकं प्रयाति सः

English

account...... *•*... •*. 354-85.5 278— Gift of a thousand cows. Tho fruit of hearing the account... 355-357

अध्याय १७५

श्लोक 73

तस्मिंस्तु व्युत्थिते दैत्ये निर्वीर्यैषा न संशयः शापो ह्यस्याः पुरा दत्तः सृष्टा येनैव तेजसा

tasmiṃstu vyutthite daitye nirvīryaiṣā na saṃśayaḥ śāpo hyasyāḥ purā dattaḥ sṛṣṭā yenaiva tejasā

हिन्दी अर्थ

पुस्तकं पूजयेत् पश्चाद् सस्त्रालङ्करणादिभिः। वाचकं विप्रसंयुक्तं पूजयीत प्रयत्नवान् गोभूमिहेमवस्त्राणि वाचकाय निवेदयेत्। ब्राह्मणान् भोजयेत् पश्चान्मण्डलङ्डुकपायसैः

English

— Mothod of making gift of a golden milch cow. Tho proper

अध्याय १७५

श्लोक 74

यद्येषा प्रतिहन्तव्या कर्तव्यो भगवान्सुखी दीयतां मे सखा शक्र तोययोनिर्निशाकरः

yadyeṣā pratihantavyā kartavyo bhagavānsukhī dīyatāṃ me sakhā śakra toyayonirniśākaraḥ

हिन्दी अर्थ

त्वत्प्रसादादिमान् धर्मान् सम्पूर्णाञ््रुतवानहम् यशस्वी च भवेन्नित्यं यः कुर्यादेवमादरात् नारदोक्तानिमान् धर्मान् यः कुर्यान्नियतेन्द्रियः। कृत्स्नं फलमवाप्नोति पुराणश्रवणस्य वै

English

Brdhmana for such a gift............357 280— Gift of a golden horse. Tho fruit of reading and hearing this

अध्याय १७५

श्लोक 75

तेनाहं सह संगम्य यादोभिश्च समावृतः मायामेतां हनिष्यामि त्वत्प्रसादान्न संशयः

tenāhaṃ saha saṃgamya yādobhiśca samāvṛtaḥ māyāmetāṃ haniṣyāmi tvatprasādānna saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

मत्स्यरूपी स भगवान् मनवे बुद्धिशालिने। अवापोद्घातसहितमुक्त्वा ह्यन्तर्दधौ तदा जो महापातकोंसे युक्त होते हैं अथवा जो उपपातकी होते हैं, वे सभी पुराणकी कथा सुननेसे ही परम पदको प्राप्त हो जाते हैं। जो मनुष्य इस प्रकारके नियम-विधानसे पुराणको कथा सुनता है, वह स्वेच्छानुसार भोगोंको भोगकर

English

account...... •••...... 358

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_matsyapurANa1-176.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Matsya Purana — Chapter 175
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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