अध्याय २२
श्लोक 1
॥ इति श्रीनरसिंहपुराणे सूर्यवंशकथनं नामैकविंशो ऽध्याय ॥ नर्प् २१ ॥ सोमवंशं शृणुष्वाथ भरद्वाज महामुने पुराणे विस्तरेणोक्तं संक्षेपात् कथये ऽधुना
|| iti śrīnarasiṃhapurāṇe sūryavaṃśakathanaṃ nāmaikaviṃśo 'dhyāya || narp 21 || somavaṃśaṃ śṛṇuṣvātha bharadvāja mahāmune purāṇe vistareṇoktaṃ saṃkṣepāt kathaye 'dhunā
हिन्दी अर्थ
मदसे मत्त रहते हैं, जिनके नेत्र भयंकर हैं और जो भक्तोके विघ्न दूर करनेवाले हैं, करोड़ों सूर्यके समान जिनकी कान्ति है, खानसे काटकर निकाले हुए कोयलेकी भाँति जिनकी श्याम प्रभा है तथा जो विमल और शान्त हैं, उन भगवान् विनायकको मै नमस्कार करता हूँ। मेरुगिरिंके समान रूप और हाथीके मुख- सदृश मुखवाले, कैलासवासी गणपतिको नमस्कार है। विनायक देव! आप विरूपधारी और ब्रह्मचारी हैं,
English
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