Shri Ramcharitmanas· Śrī Rāmacaritamānasa
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अध्याय 7 / 7

Uttara Kanda — The Reign of Rama

उत्तरकाण्ड

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पूर्ण अध्याय पाठ5 श्लोक

अध्याय ७

श्लोक 1

दैहिक दैविक भौतिक तापा ।राम राज काहूहि नहिं ब्यापा ॥ सब नर करहिं परस्पर प्रीती ।चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती

daihika daivika bhautika tāpā | rāma rāja kāhūhi nahiṃ byāpā || saba nara karahiṃ parasapara prītī | calahiṃ svadharma nirata śruti nītī

हिन्दी अर्थ

रामराज में दैहिक, दैविक, और भौतिक — किसी को भी कोई ताप न व्यापा। सब मनुष्य परस्पर प्रेम करते थे; सब अपने-अपने स्वधर्म में लगे, श्रुति-नीति का पालन करते थे।

English

In the reign of Rama, no one suffered the three afflictions — of body, of fate, or of the world. All people loved one another; all moved in their own dharma, devoted to the Vedic way.

अध्याय ७

श्लोक 2

राम कहत चलु राम कहत चलु राम कहत चलु भाई ।जो यह राम नाम रट लावे ताहि न काल सताई

rāma kahata calu rāma kahata calu rāma kahata calu bhāī | jo yaha rāma nāma raṭa lāve tāhi na kāla satāī

हिन्दी अर्थ

राम कहते चलो, राम कहते चलो, राम कहते चलो, भाई। जो यह राम-नाम जपता रहे — काल भी उसे नहीं सताता।

English

Keep saying "Rama," keep saying "Rama," keep saying "Rama," brother. Whoever fixes this name of Rama — time will not torment that one.

अध्याय ७

श्लोक 8

सुनत शबरी भक्ति भावि भयाउ तरसी सुधाउ ।प्रेम प्रगट सोई जानि भगति न भजति गाउ

sunata śabarī bhakti bhāvī bhayāu tarasī sudhāu | prema pragaṭa soī jānī bhagati na bhajati gāu

हिन्दी अर्थ

शबरी की भक्ति सुनकर राम आँसू बहाने लगे। प्रेम ही सच्ची भक्ति जानकर, वे प्रेम के बिना पूजा नहीं करते।

English

Hearing Shabari's devotion, Rama was moved to tears. Knowing that love alone is true devotion, he does not worship without love.

अध्याय ७

श्लोक 9

कहँ रघुपति निसिचर भरोसी जोर जोर सुनाउ ।जेहि बिधि बिसरहिं सब गति बिसराउ मोर पग चलाउ

kahaṃ raghupati nisicara bharosī jora jora sunāu | jehi bidhi bisarihaṃ sab gati bisarāu mora paga calāu

हिन्दी अर्थ

रघुपति ने समुद्र से ज़ोर से कहा: मेरी बात सुनो। जिस विधि से तुम सब रास्ते भूल जाओ, मेरा रास्ता भूल जाओ और मुझे पार कर दो।

English

Lord Rama said to the ocean with force: hear my command. By whatever means you forget all paths, forget my path and let me cross.

अध्याय ७

श्लोक 10

जानकी राम लखन समेत हनुमान ।सेवक समेत सब कोटि राम भगवान

jānakī rāma lakhaṇa sameta hanumāna | sevaka sameta saba koṭi rāma bhagavān

हिन्दी अर्थ

जानकी, राम, लखन और हनुमान साथ में — सेवक समेत सब कोटि राम भगवान हैं।

English

Janki, Rama, Lakshman, and Hanuman together — with all servants, crores of Rama are the Lord.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 14/5/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Shri Ramcharitmanas — Chapter 7
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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