Varaha Purana· Vārāha Purāṇa
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अध्याय 2 / 3

Bhudevi Samvada — The Earth Speaks

भूदेवी संवाद

2 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय २

श्लोक 1

भूरुवाच: को धर्मः परमो लोके केन मुक्तिः प्रजायते ।कथं त्वां पूजयेद् विष्णो यथा मुक्तिः प्रजायते

bhūruvāca: ko dharmaḥ paramo loke kena muktiḥ prajāyate | kathaṃ tvāṃ pūjayed viṣṇo yathā muktiḥ prajāyate

हिन्दी अर्थ

भूदेवी बोलीं: इस लोक में परम धर्म क्या है? किससे मुक्ति होती है? हे विष्णो! आपकी पूजा कैसे करें जिससे मुक्ति मिले?

English

The Earth speaks: What is the highest dharma in the world? By what does liberation arise? How should one worship You, O Vishnu, such that liberation is born?

अध्याय २

श्लोक 8

सर्वभूतहितं धर्मं विष्णुरुवाच महामते ।अहिंसा परमो धर्मः सर्वप्राणभृतां वर

sarvabhūtahitaṃ dharmaṃ viṣṇuruvāca mahāmate | ahiṃsā paramo dharmaḥ sarvapraṇabhṛtāṃ vara

हिन्दी अर्थ

विष्णु बोले: हे महामते! धर्म वह है जो सभी प्राणियों का हित करे। सभी प्राणियों के लिए अहिंसा परम धर्म है।

English

Vishnu speaks: O great-minded one, dharma is that which benefits all beings. Non-harm (ahimsa) is the highest dharma for all creatures.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Varaha Purana — Chapter 2
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.