अध्याय ११७
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे पाण्डुतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम षोडशाधिकशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ११७ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेत्तु राजेन्द्र पुण्यं तीर्थं त्रिलोचनम् ।तत्र तिष्ठति देवेशः सर्वलोकनमस्कृतः
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe pāṇḍutīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma ṣoḍaśādhikaśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 117 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchettu rājendra puṇyaṃ tīrthaṃ trilocanam / tatra tiṣṭhati deveśaḥ sarvalokanamaskṛtaḥ
हिन्दी अर्थ
रात में तृम दोनों बहुत बलवान् हो जाओगे और दिन भर सोते रहोगे । अब से माता की दोनों मिलकर रक्षा करो और धर्म की मर्यादा का पालन करो, धर्म का अनुशासन मानो ।” पुत्रों से ऐसी बातें कर कश्यप जी वहीं पर अन्तहित हो गये ।! ०३-१०६। पिता के चले जाने पर स्वभाव से ही दारुण प्रकृति वाले उन दोनों महांवीरों ने प्राणियों की हिंसा में तत्पर रह कर कुत्सित एवं अखाद्य वस्तुओं का भोजन करना श्रारम्भ किया और पिता
English
There are many terrible Bhutas having the same traits as their mother Putana. They harass children in the human world like the evil planets, causing dejectedness.