Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
118
अध्याय 118 / 232

Adhyaya 118

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अध्याय ११८

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे त्रिलोचनतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम सप्तदशोत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ११८ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेत्तु राजेन्द्र तीर्थं परमशोभनम् ।इन्द्रतीर्थेतिविख्यातं नर्मदादक्षिणे तटे

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe trilocanatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma saptadaśottaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 118 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchettu rājendra tīrthaṃ paramaśobhanam / indratīrthetivikhyātaṃ narmadādakṣiṇe taṭe

हिन्दी अर्थ

इच्छानुसार रूप घारण करने वाली थीं और वे दोनों भी उन पिशाचों के समान आचरण करने वाली थीं किस्तु उनका स्वरूप मनोरमा भा। उन दोनों कन्याओं के साथ वे पिशाच आहार के लिये रात में धूम रहे ६१६ वायुपुराणम्र्

English

Yaksas drink blood, and swallow flesh and fat of men by merely looking at them. Raksasas do so by entering the body and Pisacas by crushing and harassing.

अध्याय ११८

श्लोक 2

युधिष्ठिर उवाच: नर्मदादक्षिणे कूले इन्द्रतीर्थं कथं भवेत् ।श्रोतुमिच्छामि विप्रेन्द्र ह्यादिमध्यान्तविस्तरैः

yudhiṣṭhira uvāca: narmadādakṣiṇe kūle indratīrthaṃ kathaṃ bhavet / śrotumicchāmi viprendra hyādimadhyāntavistaraiḥ

हिन्दी अर्थ

तेः्पश्यन्राक्षसं तत्र कामरूप॑ महाबलम् । सहसा संनिपाते तु दृष्ट्वा चंव परस्परम्

English

All Guhyakas are inferior to Gandharvas by three- fourths. All Raksasas should be known as equal to Yaksas in prowess. Pisacas are three times less powerful in their AUvarya (prosperity and glory) than Yaksas.

अध्याय ११८

श्लोक 3

एतच्छ्रुत्वा तु वचनं धर्मपुत्रस्य धीमतः ।कथयामास तद्वत्तमितिहासं पुरातनम्

etacchrutvā tu vacanaṃ dharmaputrasya dhīmataḥ / kathayāmāsa tadvattamitihāsaṃ purātanam

हिन्दी अर्थ

ताभ्यां करे गृहीतं तं पिशाचावथ राक्षसम् । पृच्छतां कोइसि कस्य त्वं स च सर्वमभाषत तस्य कर्माभिविज्ञात ज्ञात्वा तौ राक्षसघंभो । अजस्य खण्ड तस्यते प्रत्यपादयतां सुते

English

Thus in wealth, beauty, longevity, strength, righ¬ teousness, affluence, mastery, intellect, penance, learning and exploits, the four Devayonis, beginning with Gandharvas and ending with Pisacas are (consecutively) three-fourths inferior to Devas and Asuras.

अध्याय ११८

श्लोक 4

श्रीमार्कण्डेय उवाच: विश्वासयित्वा सुचिरं धर्मशत्रुं महाबलम् ।वृत्रं जित्वाथ हत्वा तु गच्छमानं शचीपतिम्

śrīmārkaṇḍeya uvāca: viśvāsayitvā suciraṃ dharmaśatruṃ mahābalam / vṛtraṃ jitvātha hatvā tu gacchamānaṃ śacīpatim

हिन्दी अर्थ

तो तुष्टो कमंणा तस्थ कन्ये है ददतुस्तु ते

English

Welfare unto you. Henceforth, hear about the proge¬ ny of the family of Krodha. Krodha gave birth to twelve daughters. They became the wives of Pulaha. Understand them by name.

अध्याय ११८

श्लोक 5

निष्क्राममाणं मार्गेण ब्रह्महत्या दुरासदा ।अहोरात्रमविश्रान्ता जगाम भुवनत्रयम्

niṣkrāmamāṇaṃ mārgeṇa brahmahatyā durāsadā / ahorātramaviśrāntā jagāma bhuvanatrayam

हिन्दी अर्थ

इयं ब्रह्मधना नाम मस कन्या हालोमिका । ब्रह्मसत्त्तथनाहारा इति खण्डो5भ्यभाषत १२३ सर्वाद्धकेशी नाम्ता च कन्या जन्तुधना तथा । अकर्णन्ताध्प्यरोमा च कन्या ब्रह्मधना तुया

English

They were—Mrgi, Mrgamanda, Haribhadra, Iravatl, Bhuta, Kapisa, Damstra, Nisa, Tirya, Sveta, Svara and Surasa. They are well-known.

अध्याय ११८

श्लोक 6

यतोयतो ब्रह्महणं याति यानेन शोभनम् ।दिशो भागं सुरैः सार्द्धं ततो हत्या न मुञ्चति

yatoyato brahmahaṇaṃ yāti yānena śobhanam / diśo bhāgaṃ suraiḥ sārddhaṃ tato hatyā na muñcati

हिन्दी अर्थ

थे ।!१२-११४५। उन सबों ने वहाँ महाबलवान् एवं इच्छानुसार रूप धारण करने बाले राक्षस को देखा । एकाएक एक दूसरे को आमने-सामने देखकर वे पिशाच गण और राक्षस अपनी-अपनी जान बचाने की चिन्ता में लगे और एक दूसरे को पकड़ना भी चाहा । इसी बीच दोनों पिता अपनी-अपनी कन्याओं से बोले तुम दोनों शीघ्र इस जीते जी पकड़ लाओ, जो पग्र-पग पर फड़कते हुये चल रहा है। पिता के कथनानुसार उन दोनों

English

The sons of Mpgi were the different types of deer, viz. Karinas, Nyankus, Rurus and Prsalas as well as such other animals

अध्याय ११८

श्लोक 7

ब्रह्महत्या सुरापानं स्तेयं गुर्वगनागमः ।पातकानां गतिर्दृष्टा न तु विश्वासघातिनाम्

brahmahatyā surāpānaṃ steyaṃ gurvaganāgamaḥ / pātakānāṃ gatirdṛṣṭā na tu viśvāsaghātinām

हिन्दी अर्थ

कन्याओं ने समीप जाकर उसको (राक्षस को) पकड़ लिया और हाथ से पकड़ कर पिता की सभा में लाकर उपस्थित किया । कन्याओं द्वारा हाथ में पकड़े हुये राक्षस से उन दोनों पिशाचों ने कहा, बोलो तुम कौन हो ? किसके (पुत्र) हो, राक्षस ने सब बातें ब़तलाईं ।११६-११९। उसके कार्य एवं विचारों को सुनकर उन बलवान् आज ओरश खण्ड (2?) नामक पिशाचों ने सन्तुष्ट होकर दोनों कनन्‍्याओ को उसे सौंप दिया पंशाचिक विवाह विधि के अनुसार उस सुन्दर दाँत वाली कन्या का विवाह बुद्धवधाहन (?) आज और खण्ड ने उसके साथ सम्पन्न किया और पुत्री के गुण स्वभाव एवं धन का परिचय स्वयं सुनाया । खण्ड ने कहा, यह मेरी ब्रह्मधना नाम कन्या है इसके शरीर में रोम नहीं हैं, यह सात्त्विक उपायों द्वारा अजित किये धन का आहार करती है, ओर ब्रह्म की आराधना में तत्पर रहती है । और यह दूसरी जत्तुधना नाम की सर्वाग सुन्दरी

English

Verses 192-197 describe the gradation (in descending order) of the divine and semi-divine beings as follows:

अध्याय ११८

श्लोक 8

पापकर्ममुखं दृष्ट्वा स्नानदानैर्विशुध्यति ।नारी वा पुरुषो वापि नैव विश्वासघातिनः

pāpakarmamukhaṃ dṛṣṭvā snānadānairviśudhyati / nārī vā puruṣo vāpi naiva viśvāsaghātinaḥ

हिन्दी अर्थ

कन्या है, जन्तुओं का यह आहार करती है, इस प्रकार उन दोनों ने कन्‍्याओं के धन का परिचय कराया और आगे कहा कि यह दूसरी जन्तुधना नाम की कन्या जो है इसके समस्त अंगों में बाल हैं, और ब्रह्मथना नाम की जो कन्या है, उनके कान के ऊपर तक रोम हैं, शेष अंगों में रोम नहीं है। उस ब्रह्म धना ने ब्रह्म धन नामक

English

(Defective Verse) Only this elephant has the strength of being a vehicle, since it is born of water, has a single root six teeth and the lustre of gold. It is of the Bhadra variety of elephants.

अध्याय ११८

श्लोक 9

एवमादीनि चान्यानि श्रुत्वा वाक्यानि देवराट् ।वचनं तद्विधैरुक्तं विषादमगमत्परम्

evamādīni cānyāni śrutvā vākyāni devarāṭ / vacanaṃ tadvidhairuktaṃ viṣādamagamatparam

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मधन॑ प्रसुता सा तत्त्वलां चेव कन्‍्यका । एवं पिशाचकन्ये ते मिथुने द्वे प्रसुयताम ॥ सर्पश् राक्षसा होते यातुधानात्मजा दश । सुर्यस्यानुचरा होते सह तेन भ्रमन्ति च १२८

English

Airavata had four sons, viz. Anjana, Supratlka, Va- mana and Padma. His mate was Abhramu.

अध्याय ११८

श्लोक 10

त्यक्त्वा राज्यं सुरैः सार्धं जगाम तप उत्तमम् ।पुत्रदारगृहं राज्यं वसूनि विविधानि च

tyaktvā rājyaṃ suraiḥ sārdhaṃ jagāma tapa uttamam / putradāragṛhaṃ rājyaṃ vasūni vividhāni ca

हिन्दी अर्थ

स्फूरजपुत्रा निकुम्भश्न क्रो व ब्रह्मराक्षसः । वातपुत्रो विरागस्तु आपपुत्रस्तु जम्बुकः

English

Sveta gave birth to four swift-footed sons who became the elephants of the quarters. They belonged to the varieties such as Bhadra, Mrga, Manda and Samklrna.

अध्याय ११८

श्लोक 11

फलान्येतानि धर्मस्य शोभयन्ति जनेश्वरम् ।फलं धर्मस्य भुञ्जेति सुहृत्स्वजनबान्धवाः

phalānyetāni dharmasya śobhayanti janeśvaram / phalaṃ dharmasya bhuñjeti suhṛtsvajanabāndhavāḥ

हिन्दी अर्थ

व्याश्नपुत्नों निरानन्दों जन्तुनां विष्नकारक: । इत्येते वे पराक्तान्ताः करा: सर्वे तु राक्षाः कोतिता यातुधानास्तु ब्रह्मघान।ज्रिबोधत । यज्ञ: पिता धुनिः क्षेमो ब्रह्मा पापोथ यज्ञ ॥१३२- स्वाफोटकः कलिः सर्पो ब्रह्मघानात्मजा दश । स्वसारो ब्रह्मराक्षस्यस्तेषां चेमा: सुदारणा:

English

Anjana, though belonging to the Sanklrna variety is the vehicle of Yama. Supratlka who belongs to the Bhadra variety and is green in colour is the vehicle of the Lord of Waters (Varuna). Padma which belongs to the Manda variety and is of white colour is the vehicle of Ailavila (Kubera). (Vamana) which was dark-coloured and belonged to the Mrga variety was the vehicle of the Fire-god (Agni).

अध्याय ११८

श्लोक 12

पश्यतां सर्वम् एतेषां पापमेकेन भुज्यते ।परं हि सुखमुत्सृज्य कर्शयन्वै कलेवरम्

paśyatāṃ sarvam eteṣāṃ pāpamekena bhujyate / paraṃ hi sukhamutsṛjya karśayanvai kalevaram

हिन्दी अर्थ

रक्तकर्णा महाजिद्वाक्षया चवोपहारिणी । एतेषामन्बये जाता: पुथिव्यां ब्रह्मराक्षसा:

English

(Defective) He has eight sons, viz. Padmottara

अध्याय ११८

श्लोक 13

देवराजो जगामासौ तीर्थान्यायतनानि च ।गङ्गातीर्थेषु सर्वेषु यामुनेषु तथैव च

devarājo jagāmāsau tīrthānyāyatanāni ca / gaṅgātīrtheṣu sarveṣu yāmuneṣu tathaiva ca

हिन्दी अर्थ

पुत्र और तत्त्वला नाम की कन्या का जन्म दिया। इस प्रकार उन दोनों पिशाच कतन्याओं ने दो दो सन्तरतियां उत्पन्न की । अब उबके द्वारा होने वाली प्रजाओं (सन्तानों) का सृष्टि क्रम सुनिये, मैं कह रहा हूं 7२२-३१२६। हेतृ, प्रहेतृ, उग्र, पौरषेय, वध, विस्फूरजि, बात, आप ब्यापन्न और सर्पे--ये दस राक्षस यातुधान के आत्मज ओर सूर्य के अनुचर हैं, सूयं के साथ ही ये भी भ्रमण करते हैं। इनमें हेतृ का पुत्र लंकु हुआ। लंकु के माल्यवान् ओर सुमाली नामक दो पुत्र हुये । अब प्रहेतृ के पुत्रों को सुनिये, उस प्रहेतृ का पुत्र प्रलोमा हुमा जो अपने समय में परम विख्यात था ।१९७-१२६। बध के दो दुराचारी पुत्र विनल्ल और शमन थे। विद्युत् का पृत्र परम दुराचारी रुमन नामक राक्षस हुआ । सर्फज का पुत्र निकुम्भ था जो उम्र प्रकृति वाला एवं ब्रह्म राक्षस था, वात का पुत्र विराग नामक ओर जम्बुक हुआ। व्याश्न का पृत्र निरानंद तामक हुआ, जो जन्‍्तुओं को

English

The text is very corrupt and is translated tentatively in the light of Bd. P. vv. 332-33a.

अध्याय ११८

श्लोक 14

सारस्वतेषु सर्वेषु सामुद्रेषु पृथक्पृथक् ।नदीषु देवखातेषु तडागेषु सरःसु च

sārasvateṣu sarveṣu sāmudreṣu pṛthakpṛthak / nadīṣu devakhāteṣu taḍāgeṣu saraḥsu ca

हिन्दी अर्थ

विश्न पहुंचाने वाला था। ये सब के सब परम पराक्रमशील राक्षस क्र प्रत्ति के थे। यातुधानों का वर्णन तो मैं कर चुका । अब ब्रह्मधान के पुत्रों को सुनिये यज्ञ, पिता, धुनि, क्षेम, ब्रह्मा, पाप, यज्ञहा, स्वाकोटक, कलि और सर्प-ये दस ब्रह्मधान के पुत्र हैं।१३०-१३२३। उन दसों की बहनें ब्रह्म राक्षसी थी, जिनमें ये निम्नलिखित परम दारुण स्वभाव वाली थीं, रक्तकर्णा, महाजिद्वा, अक्षया और उपहारिणी--इन ब्रह्मराक्षसियों

English

In his race elephants possessing lofty stature, white nails and hair, yellowish colour'are born. I shall recount Mata- ngaja and other (types) of elephants in due order.

अध्याय ११८

श्लोक 15

पापं न मुञ्चते सर्वे पश्चाद्देवसमागमे ।रेवाप्रभवतीर्थेषु कूलयोर् उभयोर् अपि

pāpaṃ na muñcate sarve paścāddevasamāgame / revāprabhavatīrtheṣu kūlayor ubhayor api

हिन्दी अर्थ

के गर्भ से समस्त पृथ्वी पर निवास करने वाले ब्रह्मराक्षसों के जन्म हुये । ये ब्रह्मराक्षस गण श्लेष्मातक (लसोढड़े) ६१८ वायुपुराणम्र्

English

The elephant Pundarlka was grey-coloured and Rathanara had a flowery colour. Their sons were Supratistha and Pramardana.

अध्याय ११८

श्लोक 16

पूजयन्वै महादेवं स्कन्दतीर्थं समासदत् ।तव स्थित्वोपवासैश्च कृच्छ्रचान्द्रायणादिभिः

pūjayanvai mahādevaṃ skandatīrthaṃ samāsadat / tava sthitvopavāsaiśca kṛcchracāndrāyaṇādibhiḥ

हिन्दी अर्थ

नोपाय॑ विन्दते तत्र तस्या लाभाय चिन्तयन् । दूषितः स्वेन रूपेण कर्मणा तेन दृषितः १३८

English

(Defective Verse) Other types of elephants—spear- shaped, stout, with raised heads, having white (?) hair and nails, strong and energetic. They are called Akulika elephants.

अध्याय ११८

श्लोक 17

कर्शयन्वै स्वकं देहं न लेभे शर्म वै क्वचित् ।ग्रीष्मे पञ्चाग्निमध्यस्थो वर्षासु स्थण्डिलेशयः

karśayanvai svakaṃ dehaṃ na lebhe śarma vai kvacit / grīṣme pañcāgnimadhyastho varṣāsu sthaṇḍileśayaḥ

हिन्दी अर्थ

दृष्टोपायं ततः सोञथ शीघ्नकारी व्यवतंत । क्ृत्वा रूप॑ वसुरुचेगंन्धवस्थ तु गुह्यकः ॥ राजा5हमिति नाभिहि पितरं सोउभ्यभाषत । तवात्न जाते न भीतिः पिता त॑ प्रत्युवाच हु

English

Puspadanta, Brhatsaman, Saddanta, Dantapuspavan and Tamra varna were his sons and companion tuskers.

अध्याय ११८

श्लोक 18

आर्द्रवासास्तु हेमन्ते चचार विपुलं तपः ।एवं तु तपतस्तस्य इन्द्रस्य विदितात्मनः

ārdravāsāstu hemante cacāra vipulaṃ tapaḥ / evaṃ tu tapatastasya indrasya viditātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

के वृक्षों पर प्रायः आश्रय करते हैं। इन राक्षस के पुत्रों की चर्चा की जा चुकी, अब यक्ष के पुत्रों को सुनिये ।१३३-१३५। यक्ष ने अपने मन में ऋतुस्थली नामक पाँच अवबयवबों से स्थल अंमों वाली अप्सरा को गने को कामना की। उसको प्राप्त करने की चिन्ता में वह ननन्‍्दनवन में विचरण करता रहा इसके अतिरिक्त सुर्दर वेध्राज, (?) और चंत्र रथ नामक वनों में भी वह चक्‍कर लगाता रहा अन्ततः नन्दन वन में अन्यान्य

English

* 1 In his family are born elephants beautiful in appeara¬ nce having protruding lips, dark-coloured, fierce and able to endure diverse kinds of ordeal (?)

अध्याय ११८

श्लोक 19

वत्सराणां सहस्राणि गतानि दश भारत ।ततस्त्वेकादशे प्राप्ते वर्षे तु नृपसत्तम

vatsarāṇāṃ sahasrāṇi gatāni daśa bhārata / tatastvekādaśe prāpte varṣe tu nṛpasattama

हिन्दी अर्थ

अप्सराओं के साथ विहार करती हुई उस असती को उसने देखा; किन्तु उसके प्राप्त करने का कोई उपाय चिन्तन करने पर बुद्धि में न आया । अपनी कुरूपता एवं कुकर्म से दूषित होने के कारण उसने अपने मन में सोचा कि भयभीत होने के कारण मेरे द्वारा सभी जीव गण उद्विग्न हो जाते हैं तो फिर इस सुन्दर अंगो वाली को किस प्रकार मैं प्राप्त कर सकता हूँ ? तदनन्तर उसने एक उपाय विचारा और शीघ्र उसका उपयोग किया, तदनुसार उसने वसुरुचि नामक गन्धर्व का मनोहर रूप बनाकर उन अप्सराओं के बीच से उस ऋतु सस्‍्थली को जाकर पकड़ा ।१३६-१४०। अप्सरा ने वसुरुचि को जानकर उस यक्ष के साथ पूर्ण मनोयोग एवं सजख्भाव के साथ व्यवहार किया । फलतः सब अप्सराओं के समाने ही उसने ऋरतुस्थली के साथ समागम किया, और उसी समय उसी स्थान पर उससे फलस्वरूप एक पुत्र उत्पन्न हुआ जो लम्बाई और

English

Vamadeva was as dark as collyrium. From Saman was bom Vamana. His wife was Angada and the two sons were Nilavan and Laksana.

अध्याय ११८

श्लोक 20

सहसा भगवान्देवस्तु तुतोष परमेश्वरः ।तथा ब्रह्मर्षयः सिद्धा ब्रह्मविष्णुपुरोगमाः

sahasā bhagavāndevastu tutoṣa parameśvaraḥ / tathā brahmarṣayaḥ siddhā brahmaviṣṇupurogamāḥ

हिन्दी अर्थ

चौड़ाई में विशाल था, जन्मते ही वह शोभा से युक्त हो गया । उत्पन्न होते ही उसने अपने पिता से कहा, 'मैं राजा हूं, मेरा नाम नाभि है', पिता ने पुत्र से कहा तुम्हारे यहाँ उत्तन्न हो जाने पर कोई डर नहीं है। वह यक्ष पुत्र नाभि स्वरूप में माता के समान सुन्दर और पराक्रम में पिता के समान वीर हुआ ऐसे पुत्र के उत्पन्न हो जाने पर वह यक्ष अपने स्वाभाविक वेश्व में आ गया । १४१-१४४। प्रायः बड़े बड़े यक्ष और राक्षस

English

These elephants were fierce. Their necks and heads were beautiful. Their chests were broad and they were swift¬ footed. If they are bound by men, the elephants born become deformed.

अध्याय ११८

श्लोक 21

तत्राजग्मुः सुराः सर्वे यत्र देवः शतक्रतुः ।दृष्ट्वा समागतान् देवान् ऋषींश्चैव महामतिः

tatrājagmuḥ surāḥ sarve yatra devaḥ śatakratuḥ / dṛṣṭvā samāgatān devān ṛṣīṃścaiva mahāmatiḥ

हिन्दी अर्थ

ततो5ब्रवीदप्सरसं स्मयमानः स गुह्यकः । गृह से गच्छ सुश्रोणि सपुत्रा वरवर्णिनी जगाम स ह पुत्रेण ततो यक्ष: स्वमालयम् । न्यग्रोधरोहिणं नाम गुह्मका यत्र शेरते 0

English

There is no other elephant equal to Supratlka in beauty. He had three sons, viz. Praharl, Sampatl and Prthu.

अध्याय ११८

श्लोक 22

उवाच प्रणतो भूत्वा सर्वदेवपुरोहितः ।विदितं सर्वमेतेषां यथा वृत्रवधः कृतः

uvāca praṇato bhūtvā sarvadevapurohitaḥ / viditaṃ sarvameteṣāṃ yathā vṛtravadhaḥ kṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

यक्षो रजतनाभस्तु गुह्मकानां पितामहः । अनुह्नादस्य देत्यस्य भद्रामतिवरां सुताम् ॥॥ क्‍

English

The animals with long palate and lips and with symmetrical portions of head and belly, of gentle birth (?) bom in his family, become Matangajas.

अध्याय ११८

श्लोक 23

युष्माकं चाज्ञया पूर्वं ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः ।तथाप्येवं ब्रह्महणं मत्वा पापस्य कारिणम्

yuṣmākaṃ cājñayā pūrvaṃ brahmaviṣṇumaheśvarāḥ / tathāpyevaṃ brahmahaṇaṃ matvā pāpasya kāriṇam

हिन्दी अर्थ

नामना पुण्यजनी चेव तथा देवजनी च या। विजज्ञे मणिभद्वात्तु पुत्रान्पुण्यजनी शुभान् रराा:गा। " थ3।ए।ा"+"पे+ आल लए घ।।।हपहपभजजणहफै :/ू(ऊहभ "घटी एड फघचह?७हंतत््'"'" +न-++न नल ह+ह३+.-.ह३......0ठ0क्‍-ह.०ल०ल.औ.औक्‍लुलीकीईईक्‍लहलत0०ञलवज३ञॉञीधजत8तॉ३॥३ॉ२कबरी३़्०॥३॥॒॒ ौौहहऔैौू

English

Anjana was bom to Anjana and Anjana vatl to Saman. The mother of both of them is reputed to be the daughter (s) of Ayurajas.

अध्याय ११८

श्लोक 24

भ्रमन्तं सर्वतीर्थेषु ब्रह्महत्या न मुञ्चति ।न नन्दति जगत्सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम्

bhramantaṃ sarvatīrtheṣu brahmahatyā na muñcati / na nandati jagatsarvaṃ trailokyaṃ sacarācaram

हिन्दी अर्थ

मृत्यु के समान घोर संकट पड़ने पर, सो जाने पर, क्रद्ध होने पर, भयभीत होने पर तथा अति प्रसन्नता के अवसर पर अपने स्वाभाविक स्वरूप पर आ जाते हैं। इस स्वाभाविक नियम के अनुसार वह यक्ष उस ऋतु सस्‍्थली अप्सरा को विस्मित करता हुआ बोला, है सुन्दर कटि वाली ! सुन्दरी ! अब अपने पुत्र को साथ लेकर मेरे घर चलो यक्ष के ऐसा कहने पर एवं सहसा अपने वास्तविक यक्ष रूप में उपस्थित देखकर सभी अप्सरा9ें

English

In his family were bom elephants with (distinctly divided) symmetrical heads, resembling the smooth clouds.

अध्याय ११८

श्लोक 25

यथा विहीनचन्द्रार्कं तथा राज्यमनायकम् ।तस्मात्सर्वे सुरश्रेष्ठा विज्ञाप्यं मम सम्प्रति

yathā vihīnacandrārkaṃ tathā rājyamanāyakam / tasmātsarve suraśreṣṭhā vijñāpyaṃ mama samprati

हिन्दी अर्थ

क्रोध के मारे अआन्त बुद्धि हो गई और भयभीत होकर भग चली । भागती हुई अपनी सदियों के पीछे पौछे क्रतु स्थली भी चली और उसके पुत्र ने वाग्नी से सान्‍्त्वना देते हुये उसे मन्धवों एवं अप्सराओं के समूह में ले जाकर पहुँचाया । पहुंचाने के बाद स्वयं लोट आया ।१४५-१४८। अप्सराओं ने यक्ष द्वारा उसके बर्भ से पृत्रोत्पत्ति होते देखा था अतः उन्होंने एक स्वर से कऋ्रतुस्थली से कहा कि तू यक्षों की माता है। तदननन्‍्तर यक्ष पुत्र के साथ अपने घर को चला गया जहाँ बरगद के वृक्ष पर निवास करने वाले यक्ष गण शयन करते थे। बरगद के वृक्ष में यक्षों का निवास-स्थान है, यह बरगद का वक्ष उन्हें सभी प्रकार से प्रिय हैं। यक्ष रजतनाभ गुद्यकों का पितामह था, उसने अनुह्लाद नाम द॑त्य की परम सुन्दरी कन्या भद्रा के साथ अपना विवाह किया था, उस भद्रा में जितेन्द्रिय मणिवर वामक पुत्र उत्पन्न हुआ था ।१४६-१५१। भद्रा ने एक दूसरे पुत्र मणिभत्र को भी उत्पन्न

English

Pidapatdnanah in some editions is obscure and should be emended as Piidyaiananah 'with large and stout (big) faces (heads)as in Bd. P. V. 338.

अध्याय ११८

श्लोक 26

कुर्वन्तु शक्रं निर्दोषं तथा सर्वे महर्षयः ।बृहस्पतिमुखोद्गीर्णं श्रुत्वा तद्वचनं शुभम्

kurvantu śakraṃ nirdoṣaṃ tathā sarve maharṣayaḥ / bṛhaspatimukhodgīrṇaṃ śrutvā tadvacanaṃ śubham

हिन्दी अर्थ

किया, जो इन्द्र के समान पराक्रमी था। उन दोनों को पत्नी सगी बहने थीं, जो ऋतुस्थली की दो पुनत्रियाँ थीं उनका नाम पुण्यजनी भोर देवजनी था । पुण्यजनी ने मणिभद्र के संयोग से जिन शुभाचारी पुत्रों को उत्पन्न किया, उनके नाम सिद्धार्थ, सूर्थत्ेज, सुमन्त, नन्‍्दन, कल्यक, यविक, मणिदत्त, वध सर्वानभ्र॒त, शंख, पियाक्ष, भीर.

English

From Candramas and Saman were born Pingala and Kumudadyuti. Pihgala's sons were Mahapadma and Ormi- malin.

अध्याय ११८

श्लोक 27

ततः प्रोवाच भगवान्ब्रह्मा लोकपितामहः ।एतत्पापं महाघोरं ब्रह्महत्यासमुद्भवम्

tataḥ provāca bhagavānbrahmā lokapitāmahaḥ / etatpāpaṃ mahāghoraṃ brahmahatyāsamudbhavam

हिन्दी अर्थ

मेघपूर्ण सुभद्वं व प्रयोतं च सहौजसम् । द्युतिमत्केतुमन्तौ च मित्र मौलिसुदर्शनो घिजज्ञे देवजननी पुत्रान्मणिवरात्मजात् । पूर्ण भद्ं हेमरथं मणिमन्नन्दिवर्धनी

English

Know that the elephants born of his family have equal and unrivalled tusks. They are fierce. Their strength is enormous. Their belly is large. They are fond of elephant fights.

अध्याय ११८

श्लोक 28

दैवतेभ्यो ऽथ भूतेभ्यश्चतुर्भागं क्षिपाम्यहम् ।एवं मुक्त्वा क्षिपच्चैनो जलोपरि महामतिः

daivatebhyo 'tha bhūtebhyaścaturbhāgaṃ kṣipāmyaham / evaṃ muktvā kṣipaccaino jalopari mahāmatiḥ

हिन्दी अर्थ

कुस्तुम्बुरं पिशड्भा्भ स्थूलकर्ण महाजयम् । श्वेतं थे विएल॑ चेव पुष्पवस्त भयावहम्

English

In the course of wars between Devas and Asuras, Suras used them for the purpose of victory. When they achieved their object, those elephants were let off by them and they went to different directions as mentioned before.

अध्याय ११८

श्लोक 29

अवगाह्य ततः पेया आपो वै नान्यथा बुधैः ।धरायामक्षिपद्भागं द्वितीयं पद्मसंभवः

avagāhya tataḥ peyā āpo vai nānyathā budhaiḥ / dharāyāmakṣipadbhāgaṃ dvitīyaṃ padmasaṃbhavaḥ

हिन्दी अर्थ

पुत्रा मणिवरस्थेते यक्षा वे गुह्काः स्पृता: । सुरूपाश्य विरूपाध्न स्रग्विणः प्रियदर्शनाः खशायस्त्वपरे पुत्रा राक्षता: कामरूपिणः । तेषां यथा प्रधानानव वण्पंमानान्निबोधत १ ६४

English

Devas gave unto Lomapada, the king of Anga and author of a Sutra work, elephants born in these families and well-trained.

अध्याय ११८

श्लोक 30

अभक्ष्या तेन संजाता सदाकालं वसुंधरा ।तदार्धमर्द्धं नारीणां द्वितीये ऽह्नि युधिष्ठिर

abhakṣyā tena saṃjātā sadākālaṃ vasuṃdharā / tadārdhamarddhaṃ nārīṇāṃ dvitīye 'hni yudhiṣṭhira

हिन्दी अर्थ

चरद्वार्क: सुकरो बुध्न: कपिलोम: प्रहासक: । क्रोड: परशुनाभश्न चक्राक्षभश्र तिशाचर:

English

(The various names of elephants are to be etymo¬ logically derived as follows:)

अध्याय ११८

श्लोक 31

निक्षिप्य भगवान्देवः पुनरन्यज्जगाद ह ।असंग्राह्या त्वसंग्राह्या तेन जाता रजस्वला

nikṣipya bhagavāndevaḥ punaranyajjagāda ha / asaṃgrāhyā tvasaṃgrāhyā tena jātā rajasvalā

हिन्दी अर्थ

मम्दरदोभि, पदम, चद्द्प्रभ, मेधपूर्ण, सुभद्, प्रयोत, महौजस, द्यतिमान्, केतुमान्ू मित्र, मौलि और सुदर्शन थे। ये चोबीस पृत्र सदाचारी और पुण्यात्मा थे। मणिप्रभ के संयोग से इन पुण्यात्मा पुत्रों की उत्पत्ति हुई थी। इनके पूत्र पौनत्रादि जो यक्ष हुये वे भी पुण्यका्य करने वाले एवं सदाचारी थे देवजननी ने मणिवर के संयोग से जिन पुत्रों को जन्म दिया उनके नाम पूर्णभद्र, हेमरथ, मणिमतु, नन्दिवधंन, कुस्तुम्बुरु, पिश्ज्भाभ, स्थलकर्ण, महाजय, श्वेत, विपुल, पुष्पवान, भयावह, पद्मपर्ण, सुनेत्र, यक्ष,

English

The curvedness of their tongues and their muteness are due to Agni's curse. The fact that they are unaware of their strength and that the scrotum is concealed—these two are due to the curses of Svayambhu and Suras.

अध्याय ११८

श्लोक 32

चतुर्दिनानि सा प्राज्ञैः पापस्य महतो महात् ।चतुर्थं तु ततो भागं विभज्य परमेश्वरः

caturdināni sā prājñaiḥ pāpasya mahato mahāt / caturthaṃ tu tato bhāgaṃ vibhajya parameśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

थे। मणिवर के ये पुत्रगण गुह्मक के नाम से स्मरण किये जाते हैं। ये सब पुत्रगण सुन्दर स्वरूप बाले-- कुछ कुरूप भी माला धारण करने वाले तथा देखने में प्रिय लगने वाले थे। इनके पुत्र पौत्रादि की संख्या सेकड़ों से सहस्नों तक थी! खज्ना के अन्य पूत्रणण जो हुए वे इच्छानुसार रूप बदलने वाले राक्षस थे, उनमें जो प्रधान-प्रधान थे उनका वर्णन मैं कर रहा हूँ, सुनिये ।१५५-१६४। उनके नाम थे लालावि, कुथन, भीम,

English

Elephants of diverse inherent strengths are born of girls of Deva, Danava, Gandharva, Pisaca, Uraga (Ser¬ pent) and Raksasa tribes through their union with the ele¬ phants of the quarters ( Dih-nagas ).

अध्याय ११८

श्लोक 33

कृषिगोरक्ष्यवाणिज्यैः शूद्रसेवाकरे द्विजे ।ततो ऽभिनन्दयामासुः सर्वे देवा महर्षयः

kṛṣigorakṣyavāṇijyaiḥ śūdrasevākare dvije / tato 'bhinandayāmāsuḥ sarve devā maharṣayaḥ

हिन्दी अर्थ

सुमाली, मधु, विस्फूजित, विद्युज्जिल्न, मातज्भ धृम्रित, चन्द्राकं, सुकर, बुध्न, कपिलोम, प्रहासक, करीड, परशुनाभ, चक्राक्ष, निशाचर त्रिशिरा, शतदंष्ट्र, राक्षस तुण्डकेश, यक्ष, अकम्पन, दुर्मुतल, और शिलीमुख ये सभो तिशिरा: शतदंष्ट्श्व तुण्डकेशश्र राक्षसः । यक्षश्राकम्पनश्चेव दुर्मुखश्र शिलीमुखः १६७ इत्येते राक्षसवरा विक्रान्ता गणरूपिण: सर्वलोकचरास्ते तु त्रिदशानां समक्रमा: (१६८

English

The story of the origin, development and derivation

अध्याय ११८

श्लोक 34

देवेन्द्रं वाग्भिर् इष्टाभिर् नर्मदाजलसंस्थितम् ।वरेण छन्दयामास ततस्तुष्टो महेश्वरः

devendraṃ vāgbhir iṣṭābhir narmadājalasaṃsthitam / vareṇa chandayāmāsa tatastuṣṭo maheśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

आलम्बा उत्कचा कृष्णा निऋ ता कपिला शिवा केशिनी च महाभागा भगिन्यः सप्त याः स्मृताः

English

(Defective Verse) The forest in the east bound by the rivers Kausiki and Ganga and the sea belongs to Anjana and the family of elephants of which he is the founder (or of one tusk?).

अध्याय ११८

श्लोक 35

वरं दास्यामि देवेश वरं वृणु यथेप्सितम्

varaṃ dāsyāmi deveśa varaṃ vṛṇu yathepsitam

हिन्दी अर्थ

'स्यो लोकामिषादश्व हन्तारों युद्धदुर्म दा: । उदीर्णा राक्षसगणा इमे उत्पादिता: शुभाः आलम्बेयो गण: क़र उत्कचेयो गणध्तथा । तथा काष्णयशवेया राक्षसा ह्यत्तमा गणा १७२ तथव नेऋ तो नाम वर्यम्बकानुचरेण हु। उत्पादितः प्रजासर्गों गणेश्वरचरेण तु १७३ उत्पादिता बलवता उदीर्णा यक्षराक्षसा: विक्रान्ताः शौय॑संपन्ना नऋ ता देवराक्षसाः ॥ . हे

English

The forest of Supratlka is situated north of Vin- dhya, south of Ganga and in between the land of Karusa and the source of Ganga.

अध्याय ११८

श्लोक 36

इन्द्र उवाच: यदि तुष्टो ऽसि देवेश यदि देयो वरो मम ।अत्र संस्थापयिष्यामि सदा संनिहितो भव

indra uvāca: yadi tuṣṭo 'si deveśa yadi deyo varo mama / atra saṃsthāpayiṣyāmi sadā saṃnihito bhava

हिन्दी अर्थ

तेषां गणशतानेका' उद्धृतानां महात्मनाम् । प्रायेणानु चरन्त्येते शंकर जगतः प्रभुम् .

English

The fifth forest west of Utkala and extending upto the land of Vedi is remembered as the forest of Vamana who is the sole Atman (?) The forest to the west of Lauhitya extending west¬ wards upto the sea, is said to be the forest of Yama. It is near a mountain.

अध्याय ११८

श्लोक 37

एवमस्त्विति चोक्त्वा तं ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः ।जग्मुराकाशमाविश्य स्तूयमाना महर्षिभिः

evamastviti coktvā taṃ brahmaviṣṇumaheśvarāḥ / jagmurākāśamāviśya stūyamānā maharṣibhiḥ

हिन्दी अर्थ

देत्यराजेन कुम्मेन महाकाया महात्मला । उत्पादिता महावीर्या सहाबलपराक्रमा: द श्रेष्ठ राक्षस परम पराक्रमी तथा गणरूपी ये, बर्थात् उनमें से एक एक राक्षस वीरता आदि में एक-एक समूह का सामना करने में समर्थ था। वे देवताओं के समान सभी लोकों में विचरण किया करते थे

English

Bhuti gave birth to Bhutas (goblins) who are the followers of lord Rudra. They were stout, lean, longish, dwar¬ fish, short-statured and normal. The ears of some were hang¬ ing down. The lips of some were suspended. Some had tongues, breasts and bellies hanging down. Some had single form, some double form. The hips of some hung down. Some had stout calves of the leg. They stayed on the banks of rivers, lakes or seas. They were of all colours, black, white, blue, grey, red and pink. Some were smoke-coloured and some had variegated colours. Some were terrible like Raksasas and Kadrus (?). Some had dishevelled hair like the Munja grass. Some had hair standing up. Some wore serpents as the sacred thread. Some had eyes removed; some had hideous eyes. Some had small eyes. Somehad only a single eye. Some had many heads. Some had no head. Somehad a single head. Some had the head cut off. They were fierce and hideous. Some had no hair. Some had plenty of it. Some were blind. Some had matted hair. Some were yellow. Some were dwarfish. They resorted to the banks of rivers, lakes an oceans. Some had a single ear, some had large ears. Some were spike-eared, some had no ear. Some had fangs. Some had claws. Some had no teeth. Some had two tongues. Some had a

अध्याय ११८

श्लोक 38

गतेषु देवदेवेषु देवराजः शतक्रतुः ।स्थापयित्वा महादेवं जगाम त्रिदशालयम्

gateṣu devadeveṣu devarājaḥ śatakratuḥ / sthāpayitvā mahādevaṃ jagāma tridaśālayam

हिन्दी अर्थ

इनके अतिरिक्त सात अन्य कस्याएँ भी थीं, उन्हें ऋ्रमानुसार सुनिये । साथ ही उन कन्याओं द्वारा जिन प्रजाओं की सृष्िट हुईं, और उनसे जिन गणों की उत्पत्ति हुई, उसे भी सुनिये । उन कन्याओं के नाम आलम्बा, उत्कचा, कृष्णा, निऋ ता, कपिला. शिवा और मह।भाग्यशालिनी केशिती थे, ये सात उक्त राक्षसों की बहिनें कही जाती हैं ।! ६१-१७०। उन्हीं कन्याओं द्वारा लोक में मांस खानेवाले जीवहिसक, बुद्ध में उत्कट पराक्रम दिखलानेवाले

English

All of them directed their minds towards lord Bhava (Siva) as the greatest god. They had no wives or sons. All of them were celibate with sublimated sexuality. These Bhutas, the great Almayogins, numbered a hund¬ red thousand. Thus all these noble-souled sons of Bhuti have been recounted.

अध्याय ११८

श्लोक 39

इन्द्रतीर्थे तु यः स्नात्वा तर्पयेत् पितृदेवताः ।महापातकयुक्तो ऽपि मुच्यते सर्वपातकैः

indratīrthe tu yaḥ snātvā tarpayet pitṛdevatāḥ / mahāpātakayukto 'pi mucyate sarvapātakaiḥ

हिन्दी अर्थ

महान राक्षसगणों की उत्पत्ति हुई, इनमें से कुछ शुभ कार्य करनेवाले भी थे। आलम्बा से उत्पन्न होनेवाले आलम्बेय नामक राक्षसगण क्र प्रकृति के थे, उत्कचेय गण भी उसी प्रकार कै ऋरकर्मा थे। काष्णेय और शनेय नामक राक्षसगण उत्तम गुण वाले थे। इसी प्रकार महादेव जी के अनुचर गणेइवरों के चर ने नेऋ त नामक प्रजाओं की सृष्टि की । उस बलवान् ने महान् यक्षों एवं राक्षसों को उत्पन्न किया, जो परम पराक्रमी शौर्य॑सम्पन्न नैऋत नाम से विख्यात हुये, उन्हें देवराक्षस कहते हैं। उन सबों का अधिप्ति विरूपक नामक हुआ

English

Kapisa, Kusmandl bore to Kusmanda twins of Pis¬ acas who were tawny-coloured. Because they were brownish, they were called Pisacas. 2 All of them were flesh-eaters.

अध्याय ११८

श्लोक 40

इन्द्रतीर्थे तु यः स्नात्वा पूजयेत् परमेश्वरम् ।सो ऽश्वमेधस्य यज्ञस्य पुष्कलं फलम् अश्नुते

indratīrthe tu yaḥ snātvā pūjayet parameśvaram / so 'śvamedhasya yajñasya puṣkalaṃ phalam aśnute

हिन्दी अर्थ

नैऋत नामक उद्धत स्वभाववाले उन महात्मा देवराक्षसों के सैकड़ों गण प्रायः जगत स्वामी शंकर भगवान् के अनुचर हुये । महात्मा हैत्यराज कुम्भ ने महाबलवानू, महा पराक्रमी, परम साहसी एवं विशालकाय कापिलेय

English

There are sixteen other twins. Their descendants are living now. I shall mention by names the man-eaters belonging to their family. They are Chagala and Chagall, Vakra and Vakra- mukhi, Sue! and Suclmukha, Kumbhapatra and Kumbhl,

अध्याय ११८

श्लोक 41

एतत्ते कथितं सर्वं तीर्थमाहात्म्यमुत्तमम् ।श्रुतमात्रेण येनैव मुच्यन्ते पातकैर् नराः

etatte kathitaṃ sarvaṃ tīrthamāhātmyamuttamam / śrutamātreṇa yenaiva mucyante pātakair narāḥ

हिन्दी अर्थ

इृदमधे नास्ति ख. ग. घ. ड. पुस्तकेष । कापिलेया महावीर्या उदीर्णा देत्यराक्षसा: कम्पनेन च यक्षेण केशिन्यास्ते परे जना:

English

Bd. 3.7.367 reads sumanaska 'of very good minds*.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 118
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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