Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
125
अध्याय 125 / 232

Adhyaya 125

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अध्याय १२५

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे नर्मदेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम चतुर्विंशत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १२५ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महीपाल रवितीर्थमनुत्तमम् ।यत्र देवः सहस्रांशुस्तपस्तप्त्वा दिवं गतः

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe narmadeśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma caturviṃśatyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 125 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahīpāla ravitīrthamanuttamam / yatra devaḥ sahasrāṃśustapastaptvā divaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

तूलालाघश्च कोलश्च शिवा कन्या तथेव च्। अपत्यं सरमायास्तु गणा वे सरसादय:ः श्यामश्च शबलश्चैब अर्जुनो हरितस्तथा । कृष्णो धूम्रारणश्चव तुलालाबृश्च कद्गुकाः

English

Trisiras, Dusana, the Raksasa Vidyujjihva and the daughter Asalika are remembered as the children of Vaka.

अध्याय १२५

श्लोक 2

युधिष्ठिर उवाच: कथं देवो जगद्धाता सर्वदेवनमस्कृतः ।तपस्तपति देवेशस्तापसो भास्करो रविः

yudhiṣṭhira uvāca: kathaṃ devo jagaddhātā sarvadevanamaskṛtaḥ / tapastapati deveśastāpaso bhāskaro raviḥ

हिन्दी अर्थ

के जोंक आदि क्षुद्र जल जन्तुओं की उत्पत्ति भी अण्डों से हीती है । इसी प्रकार कबूतर, कुरर आदि पक्षी अण्डों से उत्पन्न होते हैं । अति सूक्ष्म यूक (जूँ) आदि जन्‍्तु भी अण्डों से उत्पन्य होते हैं। उसी प्रकार आठ पैरों वाले कुली रक (केकड़ा) भी अंडे से उत्पन्न होनेवाले जन्तुओ में गिने गये हैं ।३१३-३१५। सभी प्रकार की मव्खियों की जातियों में जितने अन्यान्य भेदोपभेद पाये जाते हैं, वे भी अंडों से उत्पन्न होते हैं। कुछ

English

These are the ten Raksasa descendants of Pulastya. They were cruel in their activities. All of their followers were terrible and unassailable even by Devas.

अध्याय १२५

श्लोक 3

आराध्यः सर्वभूतानां सर्वदेवैश्च पूजितः ।प्रत्यक्षो दृश्यते लोके सृष्टिसंहारकारकः

ārādhyaḥ sarvabhūtānāṃ sarvadevaiśca pūjitaḥ / pratyakṣo dṛśyate loke sṛṣṭisaṃhārakārakaḥ

हिन्दी अर्थ

मक्खियाँ उच्छिष्ट वस्तुओं पर, जल में तथा कीचड़ में निवास करती हैं । सभी प्रकार के मशको के भदोपभद, अमरों के भदोपभेद, पुत्चिका तथा पुत्र सप्तक आदि क्षुद्र जन्तु तृणों से उत्पन्न होते हैं। मणिच्छेद तथा व्याल ये पोतज नाम से प्रसिद्ध हैं (!) शतवेरि के जितने भेदोपभेद हैं व करोषों (करषे) से उत्पन्न होते हु । इस प्रकार के अन्यान्य स्वेदज क्षुद्र जन्तुओं की संख्या अगणित है। केवल संक्षप में मैंने इनका वणन किया हैं, ये सब जन्म प्राक्तन कम के अधीन कहे जाते हैं ।३१६-३३१९। इन सबों के अतिरिक्त जो नऋत प्राण' हैं, व उपसर्गज कहे जाते हैं। कोई जन्म ग्रहण करनेवाले प्राणी पृत और कोई औत्पत्तिक कहे जाते हैं । प्रायः सभी देवगणों को औत्पत्तिक जानना चाहिए । कुछ देवता योनिजात हैं ओर कुछ विना किसी कारण के ही उसन्न होनेवाले हैं सरमा के तुलालाघ, और कोल ये दो पुत्र ओर शिवा नाम की तीसरी कन्या हुईं ये सरमादिगण

English

All of them had secured boons. All of them were endowed with sons and grandsons.

अध्याय १२५

श्लोक 4

आदित्यत्वं कथं प्राप्तः कथं भास्कर उच्यते ।सर्वमेतत्समासेन कथयस्व ममानघ

ādityatvaṃ kathaṃ prāptaḥ kathaṃ bhāskara ucyate / sarvametatsamāsena kathayasva mamānagha

हिन्दी अर्थ

के नाम से प्रसिद्ध हैं। श्याम, शबल, अर्जुन, हरित, कृष्ण, धूमत्र, अरुण और तूलालाबू ये क्र की सन्ततियाँ हैं । सुरसा ने एक सौ शिरोमृत सर्पों को उत्पन्न क्रिया । सपो का राजा तक्षक ओर नागों का राजा बासुकि है। ये

English

Thus, there are seven classes of Raksasas (including the above three and the following four groups): Panlastyas, Nairrtas, Agastyas and Kausikas.

अध्याय १२५

श्लोक 5

मार्कण्डेय उवाच: महाप्रश्नो महाराज यस्त्वया परिपृच्छितः ।तत्सर्वं सम्प्रवक्ष्यामि नमस्कृत्य स्वयम्भुवम्

mārkaṇḍeya uvāca: mahāpraśno mahārāja yastvayā paripṛcchitaḥ / tatsarvaṃ sampravakṣyāmi namaskṛtya svayambhuvam

हिन्दी अर्थ

+धनुश्चिह्वान्तगंतग्रन्थः क. पुस्तके नास्ति। 2६ इदम्ध नास्ति डः.. पुस्तके । प्रे८ वायुपुराणम्

English

I shall describe the natural features of all these* (Raksasas) 1: They had round eyes. They were yellowish in colour. They had huge bodies and bellies. They had eight fangs; pikelike ears and hairs standing upright. They had their mouths extending (as if) upto the ears. Some had hair like the Munja grass. Some had smoke-coloured upright hair. Some had stout heads shedding white lustre. Some were short-statured. Some had long arms. Some had copper-coloured faces. Some had long (dangling down) tongues and lips. Some had long eyebrows and stout noses. Some were blue-bodied with red necks and majestic eyes. They were terrific. They were excessively terrible-voiced and hideous. They went in groups. They were stout with promi-

अध्याय १२५

श्लोक 6

आसीदिदं तमोभूतमप्रज्ञातमलक्षणम् ।अप्रतर्क्यम् अविज्ञेयं प्रसुप्तम् इव सर्वतः

āsīdidaṃ tamobhūtamaprajñātamalakṣaṇam / apratarkyam avijñeyaṃ prasuptam iva sarvataḥ

हिन्दी अर्थ

सुरसाथ बिजन्ने तु शतमेक शिरोबृतम् । सर्वाणा तक्षकों राजा नागानां चापि बासुकिः ॥

English

Superstitions about Raksasas

अध्याय १२५

श्लोक 7

ततस् तेजश्च दिव्यं च तप्तपिण्डमनुत्तमम् ।आकाशात्तु यथैवोल्का सृष्टिहेतोर् अधोमुखी

tatas tejaśca divyaṃ ca taptapiṇḍamanuttamam / ākāśāttu yathaivolkā sṛṣṭihetor adhomukhī

हिन्दी अर्थ

श्येनी भासी तथा क्ोची धृतराष्ट्री शुकी तथा । अरुणस्थ भार्या श्येनी तु वीयंवन्‍्ती महाबलौ॥ संपातिरजनयत्पुत्रं कन्यामेकां तथंव च। जटायुषश्च ये पुत्रा: काकगृश्राश्वक णिनः

English

The deer, all the fanged beasts of prey, Bhutas, Pisacas, serpents, bees, elephants, monkeys, Kinnaras, Yamakimpurusas 1 (?) and all those mentioned by me as born of Krodhavasa—all these were Pulaha's sons.

अध्याय १२५

श्लोक 8

तत्तेजसो ऽन्तः पुरुषः संजातः सर्वभूषितः ।स शिवो ऽपाणिपादश्च येन सर्वमिदं ततम्

tattejaso 'ntaḥ puruṣaḥ saṃjātaḥ sarvabhūṣitaḥ / sa śivo 'pāṇipādaśca yena sarvamidaṃ tatam

हिन्दी अर्थ

भार्या गरत्मतश्चापि भासी क़ौची तथा शुकी । धृतराष्ट्री च भद्रा च तास्वपत्यानि वक्ष्यते (च्म्पहम् ) शुकी गरुत्मतः पुत्रा्युषुबे घट परिश्रुतान् । त्रिशिरं सुसु्खं चेव बल॑ पृष्ठ महाबलम्

English

In that Vaivasvata Manvantara, Kratu is remembered as childless. He had neither a son nor a grandson. He remained with fully controlled splendour (semen) (i.e. He was celibate).

अध्याय १२५

श्लोक 9

तस्योत्पन्नस्य भूतस्य तेजो रूपस्य भारत ।पश्चात्प्रजापतिर्भूयः कालः कालान्तरेण वै

tasyotpannasya bhūtasya tejo rūpasya bhārata / paścātprajāpatirbhūyaḥ kālaḥ kālāntareṇa vai

हिन्दी अर्थ

व्याप्तानि यानि देशानि(स्थानानि) तानि वक्ष्ये यथाक्रमम् । शाल्मलिद्वीपमखिलं देवक्टं च पर्वतम् ॥ मणिमन्तं च शलेन्द्रं सहल़शिखरं तथा। पर्णमालं सुकेशं च शतशूड्गं तथाइचलम् ३३३ कौरजं पतचशिखर हेमक्टं च पर्वंतम् । प्रचण्डवायुप्रभवर्दी पिते: पद्मरागिभिः प्रधानतया तमोगरुणवाले प्रजागण क्रोधवशात्मक कहे गये हैं ।३२०-३२४। प्रलह के पुत्र के संयोग से ताम्रा में जो प्रजा सृष्टि हुई, उसे सुनिये, ताम्रा से अन्यान्य बहुत सी संततियाँ उत्पन्न हुईं जो सुप्रसिद्ध हैं। जसे, व्येनी, भासी, क्रोआओ, धृतराष्ट्री और शुक्री । इनमें श्येनी अरुण की स्त्री हुई, और उसने सम्पाति और जटायु नामक महाबलवान् एवं पराक्रमी श्रेष्ठ पक्षियों को उत्पन्न किया, सम्पाति

English

I shall now recount the lineage of Atri 2, the third Praja- pati. He had ten chaste and beautiful wives.

अध्याय १२५

श्लोक 10

अग्निर्जातः स भूतानां मनुष्यासुररक्षसाम् ।सर्वदेवाधिदेवश्च आदित्यस्तेन चोच्यते

agnirjātaḥ sa bhūtānāṃ manuṣyāsurarakṣasām / sarvadevādhidevaśca ādityastena cocyate

हिन्दी अर्थ

ने एक पुत्र ओर एक एक कन्या को जन्म दिया । जटायु के जो पुत्र उत्पन्न हुये, वे काक गुृप्न और अछ्वकर्णी हैं ।३२५-२२७। गरुत्मानू (गरुड़) की , स्त्री भासी करा, शुकी, घृतराष्ट्री और भद्रा थीं, उनमें जो सनन्‍्ततियाँ उत्पन्न हुईं, उन्हें बतला रहा हूँ । इन पत्नियों में से शुकी ने ग़रुत्मान् के संयोग से छ सुविख्यात पुत्रों को जन्म दिया, जिनके नाम त्रिशिर, सुसुख, बल, महाबलवान् पृष्ठ, सुन्दर मुखवाला त्रिशंखनेत्र और महाबलशाली

English

Bhadrasva begot of Ghftacl the Apsaras, ten daugh¬ ters. They were:Bhadra, Sudra, Madra, Salada, Malada, Vela, Khala, these seven and Gocapala, Manarasa and Ratnakuta.

अध्याय १२५

श्लोक 11

आदौ तस्य नमस्कारो ऽन्येषां च तदनन्तरम् ।क्रियते दैवतैः सर्वैस्तेन सर्वैर्महर्षिभिः

ādau tasya namaskāro 'nyeṣāṃ ca tadanantaram / kriyate daivataiḥ sarvaistena sarvairmaharṣibhiḥ

हिन्दी अर्थ

रस्वरूपवान सुरस थे । इन महाबलशाली, क्र्रकर्मा, सपंभक्षी ग्ररुड़ों के पुत्रों एवं पौत्रों कौ संख्या चौदह सहस्न थी। उनके पुत्रो पोच्रों से ही पक्षियों की सृष्टि का विस्तार हुआ ।३२८-३३१॥ उन पक्षियों ने जिन देशों को व्याप्त किया है, अर्थात् वे जिन-जिन देशों में अपना स्थान बनाकर निवास करते हैं, उन्हें ऋमशः बतला रहा हूँ । सम्पूर्ण शाल्मलि द्वीप, सारा देवकूट परत, पर्वतराज मणिमान् और सहस्न शिखर, पर्णमाल, सुकेश, शतश्यृंग, कौरज, पश्चशिखर, हेमकूट प्रभृति पर्व्तों पर निवास करते हैं। प्रचण्डवायु१ उत्पन्न होनेवाले अति कान्तिमान;

English

The founder of the lineage of Atri was famous by the name of Prabhakara (the originator of lustre). He was their husband. He begot of Bhadra, the famous son Soma (the Moon). When the Sun, struck by Rahu, was falling down to¬ wards the earth from the sky, the whole world was enveloped in darkness and it was he (the sage Atri) who spread light every¬ where whereby be got the name Prabhakara.

अध्याय १२५

श्लोक 12

तिस्रः सन्ध्यास्त्रयो देवाः सांनिध्याः सूर्यमण्डले ।नमस्कृतेन सूर्येण सर्वे देवा नमस्कृताः

tisraḥ sandhyāstrayo devāḥ sāṃnidhyāḥ sūryamaṇḍale / namaskṛtena sūryeṇa sarve devā namaskṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

१. अथवा, प्रचण्डवायु के समान प्रभावशाली ।

English

While the Sun was falling the words 'welfare unto you' were addressed to him. At these words of the Brahmana sage Atri (the Sun) did not fall on the earth from heaven.

अध्याय १२५

श्लोक 13

न दिवा न भवेद् रात्रिः षण्मासा दक्षिणायनम् ।अयनं चोत्तरं चापि भास्करेण विना नृप

na divā na bhaved rātriḥ ṣaṇmāsā dakṣiṇāyanam / ayanaṃ cottaraṃ cāpi bhāskareṇa vinā nṛpa

हिन्दी अर्थ

शलजालानि व्याप्तानि गारडंस्तेमहात्मभिः । भासीपुत्राः स्घुता भासा उलका: काककुक्कुटा: मयूराः कलविड्धाश्च कपोता लावतित्तिरा:। क़ौची वार्धोणसाअश्येनी कुररान्स;रसासबकान ।॥।

English

Atri who was the performer of great penance founded excellent Gotras. Among Yajnas (the one called) Atrighana (?) is initiated by Suras.

अध्याय १२५

श्लोक 14

स्नानं दानं जपो होमः स्वाध्यायो देवतार्चनम् ।न वर्तते विना सूर्यं तेन पूज्यतमो रविः

snānaṃ dānaṃ japo homaḥ svādhyāyo devatārcanam / na vartate vinā sūryaṃ tena pūjyatamo raviḥ

हिन्दी अर्थ

चक्वाकांश्च विन्द्रग्रान्सवाश्चेव्रादकाजिहान् । एतानेव विजज्ञेष्थ पुत्रपौत्रमनन्‍्तकम्

English

The race of Atri is described in vv. 67-78.

अध्याय १२५

श्लोक 15

शब्दगाः श्रुतिमुख्याश्च ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः ।प्रत्यक्षो भगवान्देवो दृश्यते लोकपावनः

śabdagāḥ śrutimukhyāśca brahmaviṣṇumaheśvarāḥ / pratyakṣo bhagavāndevo dṛśyate lokapāvanaḥ

हिन्दी अर्थ

पद्म के समान रंगवाले, उन महाबलशाली' गरुड नामक पक्षियों से इस पव॑तों के शिखर जाल भरे पड़े हैं। भासी के पुत्र भास नाम से विख्यात हुये । उलूक, काक. कुक्कुर (मुर्गे) मयूर, कलविक (गवरा, गौरैया) कपोत. लवा, तीतर प्रभृति पक्षी भासी की सन्‍्तति स्मरण किये गये हैं ३३२-३३४)। क्रौच्ची ने वार्धीणस) नामक पक्षियों को उत्पन्न किया कुरर, सारस, बगले, आदि अन्यान्य जो मांसभक्षी पक्षी हैं, उन्हें इ्येनी ने उत्पन्न किया । सुन्दरी घृतराष्ट्री ने हंस कलहंस, चक्रवाक तथा अन्य सभी प्रकार के हिंसक पक्षियों को जन्म दिया इत सबों के इन पृत्रों के पुत्र पौतों की संख्या असंड्य हुई ।३३६-२३८। गरुड़ की सन्‍्ततियों का विवरण कह चुका अब इरा की सन्‍्ततियों को सुनिये । इरा ने कमल के समान मनोहर नेत्रोंवाली तीन कन्याओं को जन्म दिया, जो सभी प्रकार की वनस्पतियों, वृक्षों और लताओं की माता थीं। उनके नाम थे लता, वल्‍ली ओह वीरुधा । जिनमें

English

He begot of them ten sons, all equal to him. They had no names. All the ten were purified by great penance. They were the sages famous by the name 'Svastyatrcyas. They were mas¬ ters of Vedas. Among them, two were very famous, powerful and expounders of Brahman the eldest was Dattalreya and Durvasas was his younger brother. The youngest daughter was Abala who expounded Brahman. In this connection, the for¬ mer (ancient) Pauranikas cite this verse.

अध्याय १२५

श्लोक 16

उत्पत्तिः प्रलयस्थानं निधानं बीजमव्ययम् ।हेतुरेको जगन्नाथो नान्यो विद्येत भास्करात्

utpattiḥ pralayasthānaṃ nidhānaṃ bījamavyayam / hetureko jagannātho nānyo vidyeta bhāskarāt

हिन्दी अर्थ

ने लता ने नदी भादि के तट प्रदेश में स्थित रहने वाले, पृष्परहित वनस्पतियों को उत्पन्न किया, इसके अतिरिक्त पुष्पों और फलों से संयुक्त वक्षों को लता ने जन्म दिया। वल्ली ने गुल्मों को जन्म दिया, समस्त तृण जाति एवं त्वक सार (जिनके चमड़े में ही सार हो, बाँस) आदि को भी वल्ली ने उत्पन्न किया। वीरुधा की सन्‍्ततियाँ वीरुध' के ताम से विख्यात हुईं । यह वंश परिचय की कथा यहाँ समाप्त की जाती है। कश्यप

English

Those who arc conversant with Puranas say that Atri's son Dattatreya is embodied Visnu. The noble-souled one is free from sins and tranquil in mind.

अध्याय १२५

श्लोक 17

एवमात्मभवं कृत्वा जगत्स्थावरजङ्गमम् ।लोकानां तु हितार्थाय स्थापयेद् धर्मपद्धतिम्

evamātmabhavaṃ kṛtvā jagatsthāvarajaṅgamam / lokānāṃ tu hitārthāya sthāpayed dharmapaddhatim

हिन्दी अर्थ

एतदधेस्थाने 'कौज्चा बान्नीणसाः श्येना: कुरराः सारसा बका:! इति ख. ग. घ. डः पुस्तकेषु । १. एक विशेष पक्षी । जिसका पैर, शिर और आँखें लाल तथा शेष अंग काले रंग के हो मार्केण्डेय पुराण में उसका लक्षण इस प्रकार लिखा गया है। 'रक्तपादों रक्तशिरशा रक्तचक्षविहंगम:ः, क्ृष्णवर्णेन च तथा पक्षी वार्धीगसो मतः ॥ इसके अतिरिक्त “नीलग्रीवो रक्तशीषं: क्रष्णपादः सितच्छद: । वार्धीणसः स्थात् पक्षी्ो मम विष्णोरतिप्रिय:” यह एक दूसरा लक्षण भी मिलता है ।

English

Four persons born in his spiritual lineage were famous on the earth. They were- Syamas, Mudgalas, Balarakas and Gavisthiras. These are remembered as the groups of very power- fill men.

अध्याय १२५

श्लोक 18

नर्मदातटमाश्रित्य स्थापयित्वात्मनस् तनुम् ।सहस्रांशुं निधिं धाम्नां जगामाकाशमव्ययम्

narmadātaṭamāśritya sthāpayitvātmanas tanum / sahasrāṃśuṃ nidhiṃ dhāmnāṃ jagāmākāśamavyayam

हिन्दी अर्थ

२. विस्तार के साथ फंलनेवाली लताएं ।

English

From Kasyapa Narada, Parvata and Arundhati were born. O excellent ones, (listen to and) understand (thesons)of Arundhati.

अध्याय १२५

श्लोक 19

तत्र तीर्थे तु यः स्नात्वा पूजयेत् परमेश्वरम् ।सहस्रकिरणं देवं नाममन्त्रविधानतः

tatra tīrthe tu yaḥ snātvā pūjayet parameśvaram / sahasrakiraṇaṃ devaṃ nāmamantravidhānataḥ

हिन्दी अर्थ

इति सर्गेकदेशस्य कीतितोइबयबों मया। मारीक्तो5यं प्रजासगं: समासेन प्रकीतितः ॥ + मुनिश्च गन्धशीला वे प्राबाध्ययनशालिनी । गीतशीला त्वरिष्टाइ्य क्रोधशीला खशा स्मृता

English

Narada gave Arundhati (in marriage) to Vasistha. 1 Due to the curse of Daksa, the brilliant Narada (was compel¬ led to be) celibate.

अध्याय १२५

श्लोक 20

तेन तप्तं हुतं तेन तेन सर्वमनुष्ठितम् ।तेन सम्यग्विधानेन सम्प्राप्तं परमं पदम्

tena taptaṃ hutaṃ tena tena sarvamanuṣṭhitam / tena samyagvidhānena samprāptaṃ paramaṃ padam

हिन्दी अर्थ

बाहशीला तु विनता ताम्रा वे पाशशालिती । स्वभावा लोकमात॒णां शीलान्येतानि सर्वेशः

English

Formerly when there was a great battle between Devas and Asuras, called Tarakamava, the whole world was op¬ pressed by drought and Sakra was aggrieved along with Suras. The intelligent Vasistha sustained all the subjects by means of his penance.

अध्याय १२५

श्लोक 21

ते धन्यास्ते महात्मानस्तेषां जन्म सुजीवितम् ।स्नात्वा ये नर्मदातोये देवं पश्यन्ति भास्करम्

te dhanyāste mahātmānasteṣāṃ janma sujīvitam / snātvā ye narmadātoye devaṃ paśyanti bhāskaram

हिन्दी अर्थ

धमंतः शीलतो बुद्धचा क्षमया बलरूपतः । रज:सत्त्वतमोबृत्ता धामिकाधा्िकास्तु वें मातृतुल्याश्वाभिजाताः कश्यपस्या55त्मजाः प्रजा: देवत/सुरगन्धर्वा यक्षराक्षसपन्नगाः ॥

English

Making use of the medicinal herbs, fruits and roots (the sage) sympathetically enlivened them.

अध्याय १२५

श्लोक 22

तथा देवस्य राजेन्द्र ये कुर्वन्ति प्रदक्षिणम् ।अनन्यभक्त्या सततं त्रिरक्षरसमन्विताः

tathā devasya rājendra ye kurvanti pradakṣiṇam / ananyabhaktyā satataṃ trirakṣarasamanvitāḥ

हिन्दी अर्थ

के वंश में उत्पन्न होनेवाले स्थावर जंगस जीव निकाय की सृष्टि को मैं सुना चुका, इनके पुत्रों एवं पोत्रों का परिचय सुना चुका, जो इस समस्त जगन्मण्डल को छेंके हुये हैं। इस विस्तृत प्रजा सृष्टि के एक अंश का लघ परिचय मैं आप लोगों को करा चुका । मरीचि पुत्र कश्यप की प्रजाओं का सुष्टि-विस्तार इस प्रकार सक्षप में कहा जा चुका। द्विजण इस सृष्टि-क्रम को विस्तार के साथ संकेड़ों वर्षों में नहीं कहा जा

English

(Defective Verse) O Brahmanas, Vasistha begot Sakti of Arundhati. Ad r syanti (wife of Sakti) bore Parara to Sakti on the seashore (?)

अध्याय १२५

श्लोक 23

तेन पूतशरीरास्ते मन्त्रेण गतपातकाः ।यत्पुण्यं च भवेत् तेषां तदिहैकमनाः शृणु

tena pūtaśarīrāste mantreṇa gatapātakāḥ / yatpuṇyaṃ ca bhavet teṣāṃ tadihaikamanāḥ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

सकता ।३३९-३४३॥। कश्यप की स्त्रियों में अदिति धर्मंशील एवं दिति बलशील कही जाती हूँ । इसी प्रक/र धुरभि तपस्या में निरत रहनेवाली तथा दनु मायाविनंं कही गई है । मुनि अध्ययन करनेवाली तथा गन्धशीला है । अरिष्टा गान करने वाली तथा खद्या क्रोध करनेवाली कही जाती है ।३४४-३४५॥। कब्रु परम क्र प्रकृति की तथा क्रौस्ची वेदों का अध्ययन करमरेवाली अथवा बहुत अधिक सुननेवाली कही जाती है। इसी प्रकार इरा को लोग अनुग्रह करनेवाली तथा दनायु को भक्षण करनेवाली बतलाते हैं । विनता भार वहन करनेवाली और ताम्रा पाथ धारण करनेवाली कही जाती है। लोकमाताओं के यही स्वभाव हैं, उनके शील सदाचारादि का समष्ठि में यहो परिचय है। इन सबों के धर्म, शील सदाचारादि, बुद्धि, क्षमा, बल एवं स्वरूप से राजसी, तामसी एवं मात्त्विकी प्रवत्तियाँ उनमें पाई जाती है, और इस प्रकार वे धामिक और अधाभिक दोनों प्रकार के विचारोंवाली कही जाती

English

Kali bore K r?nadvaipayana, the holy lord, to Parasara. FromDvaipayana, Suka, endowed with good qualities, was born,

अध्याय १२५

श्लोक 24

ससमुद्रगुहा तेन सशैलवनकानना ।प्रदक्षिणीकृता सर्वा पृथिवी नात्र संशयः

sasamudraguhā tena saśailavanakānanā / pradakṣiṇīkṛtā sarvā pṛthivī nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

हैं ।३४६-३४८। कश्यप की ये समस्त प्रजायें अपनी-अपनी माताओं के समान स्वभाववाली तथा कुलीन थी। देवता अपर, गन्धवं, यक्ष, राक्षस, सपे, पिशाच, पशु, मृग, पक्षी और लता वल्ली आदि सभी प्रजाये इस प्रकार की कही जाती हैं यतः ये प्रजायें दक्ष की मानुषी कन्याओं में उत्पन्न हुई अत सभो मन्वन्तरों में मनुष्य सवश्रेष्ठ माने

English

The following six children were born of Plvar! to Suka: five sons, viz. Bhurisravas, Prabhu, Sambhu, Krsna and Gaura and a daughter Kirtimati by name. She was firm'in her holy rites and a Yogic mother. She was the wife of Sattvaguha and the mother of Brahmadatta.

अध्याय १२५

श्लोक 25

मन्त्रमूलम् इदं सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम् ।तेन मन्त्रविहीनं तु कार्यं लोके न सिध्यति

mantramūlam idaṃ sarvaṃ trailokyaṃ sacarācaram / tena mantravihīnaṃ tu kāryaṃ loke na sidhyati

हिन्दी अर्थ

+ धनुश्चिह्वान्तगंतग्रन्थो ग. पुस्तके नास्ति । धर्मार्थकाममोक्षाणां मानुषा: साधकास्तु बै । ततो5धःशओोतसस्‍्ते बै उत्पद्न्ते सुरासुराः (३५१ जायन्ते कार्यसिद्धचर्थे मानुषेषु पुनः पुनः । इत्येव वंशप्रभवः प्रसंख्यातस्तपस्विनाम्

English

here were eight groups (spiritual lineage) of Parasaras of noble souls. They were Svetas, Kfsnas, Gauras, Syamas, Dhumras, Samfilikas, Darakas, the imbibers of hot ' (drinks?/ (Osmapas) and Nilas.

अध्याय १२५

श्लोक 26

यथा काष्ठमयो हस्ती यथा चर्ममयो मृगः ।कार्यार्थं नैव सिध्येत तथा कर्म ह्यमन्त्रकम्

yathā kāṣṭhamayo hastī yathā carmamayo mṛgaḥ / kāryārthaṃ naiva sidhyeta tathā karma hyamantrakam

हिन्दी अर्थ

व्यालानां शिखिनां चेब ओषधीनां च सवंश: कृमिकीटपतदूगानां क्षुद्रणां जलजाश्च ये ॥

English

Henceforth, understand the progeny of Indrapratima. Kusiti, who was bom of Kapinjall-GhrtacI to Vasistha is called Indrapratima.

अध्याय १२५

श्लोक 27

भस्महुतं पार्थ यथा तोयविवर्जितम् ।निष्फलं जायते दानं तथा मन्त्रविवर्जितम्

bhasmahutaṃ pārtha yathā toyavivarjitam / niṣphalaṃ jāyate dānaṃ tathā mantravivarjitam

हिन्दी अर्थ

आयुष्यश्चेव धन्यश्च श्रीमान्हितसुखावहः । श्रोतव्यश्चैव सतत प्राह्मश्चेवानसुयता . (३५५ इति श्रीमहापुराणे वायुप्रोक्ते उपोद्घातपादे कश्यपीयप्रजासगों नाम नवषष्टितमो5्ष्याय: ॥।६८।।

English

Vasu was his son born of Pflhu's daughter. Upamanyu was his son whose (descendants) were these Upamanyus.

अध्याय १२५

श्लोक 28

काष्ठपाषाणलोष्टेषु मृन्मयेषु विशेषतः ।मन्त्रेण लोके पूजां तु कुर्वन्ति न ह्यमन्त्रतः

kāṣṭhapāṣāṇaloṣṭeṣu mṛnmayeṣu viśeṣataḥ / mantreṇa loke pūjāṃ tu kurvanti na hyamantrataḥ

हिन्दी अर्थ

गये ।३४९-३५०। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चारों पदार्थों के साधक मनुष्य ही हैं। उनके इस लोक में (मत्येलोक) सुर असुरगण कार्य सिद्धि के लिये बारम्बार निम्नश्रोत के रूप में उत्पन्न होते हैं। तपस्वियों के वंश में उत्पन्न होनेवाले देवताओं, असुरों, गन्धर्वों, अप्सराओं, यक्षों, राक्षसों, पिशाचों, पक्षियों, सर्पों, विहंगमो, ब्यालों, शिखियों, सभी प्रकार की ओषध्षियों, कृमि, कीट-पतंगों, क्षुद्र जलजन्तुओं, पशुओं, ब्राह्मणों एवं श्रीमानों

English

Kundins who were famous as descendants of Mitra- Varuna have one spiritual lineage. Others are well-known as Vasisthas. These are the eleven Gotras of Vasisthas.

अध्याय १२५

श्लोक 29

द्वादशाब्दान्नमस्काराद्भक्त्या यल्लभते फलम् ।मन्त्रयुक्तनमस्कारात्सकृत्तल्लभते फलम्

dvādaśābdānnamaskārādbhaktyā yallabhate phalam / mantrayuktanamaskārātsakṛttallabhate phalam

हिन्दी अर्थ

के पुण्यदायी लक्षण एवं बंश विस्तार को मैं बतला चुका । यही उनका वर्णन है। यह वर्णन आयु प्रदान करनेवाला, धन्य, श्री सम्पन्न, कल्याणदायी एवं सुख का साधन देनेवाला है, इसको सवंदा निश्दा तन करते हुये सुनना तथा धारण करना चाहिए । इस सुष्टि विस्तार के वर्णन का जो मनुष्य नियमपूर्वक, महात्माओं, पण्डितों एवं ब्राह्मणों की सभा में पाठ करता है, वह सन्‍्तति लाभ करता है, प्रचुर धन सम्पत्ति को प्राप्त करता है तथा इस लोक के बाद परलोक में सुन्दर गति प्राप्त करता है

English

Thus these eight renowned mental sons of Brahma have been recounted. They were blessed brothers and their spiritual lineages have been established.

अध्याय १२५

श्लोक 30

संक्रान्तौ च व्यतीपाते अयने विषुवे तथा ।नर्मदाया जले स्नात्वा यस्तु पूजयते रविम्

saṃkrāntau ca vyatīpāte ayane viṣuve tathā / narmadāyā jale snātvā yastu pūjayate ravim

हिन्दी अर्थ

श्रीवायुमहापु राण में कश्यपीयप्रजासर्ग नामक उनहृत्तरवाँ अध्याय समाप्त

English

They sustain these three worlds consisting of groups of Dcvas and sages. Their sons and grandsons are hundreds and thousands. By them the entire Earth is pervaded as with the rays of the Sun.

अध्याय १२५

श्लोक 31

द्वादशाब्देन यत् पापम् अज्ञानज्ञानसंचितम् ।तत्क्षणान्नश्यते सर्वं वह्निना तु तुषं यथा

dvādaśābdena yat pāpam ajñānajñānasaṃcitam / tatkṣaṇānnaśyate sarvaṃ vahninā tu tuṣaṃ yathā

हिन्दी अर्थ

ध्घर वायुपुराणम् द्विजातोनां वोरुधां च नक्षत्राणां ग्रहैः सह । यज्ञानां तपसां चेव सोम राज्येडस्यषेचयत्

English

After hearing this narrative of Su ta, the knower of Atman, the Brahmanas, subsequently asked him as follows:

अध्याय १२५

श्लोक 32

चन्द्रसूर्यग्रहे स्नात्वा सोपवासो जितेन्द्रियः ।तत्रादित्यमुखं दृष्ट्वा मुच्यते सर्वकिल्बिषैः

candrasūryagrahe snātvā sopavāso jitendriyaḥ / tatrādityamukhaṃ dṛṣṭvā mucyate sarvakilbiṣaiḥ

हिन्दी अर्थ

बृहस्पति तु विश्वेषां ददावड्धिरसां पतिम् ।भुगुणामधिपं चेब काव्य राज्येडम्यषेचयत् ४ आदित्यानां पुनविष्णुं बसुनामथ पावकम् । प्रजापतीनां दक्ष च मस्तामथ वासवम् ४ देत्यानामथ राजानं प्रह्मादं दितिनन्दनम् । नारायण तु साध्यानां रुद्राणां वृषभध्यजम् ६ विप्रचित्ति च राजानं दानवानामथा55दिशत् । अपां तु वरुण राज्ये राज्ञो वेश्रव्णं पतिभ् 0

English

Sraddha is a form of ancestor worship. It is based on the belief in after-death survival of the deceased ancestors and their residence in a parti¬ cular region called Pitr-loka. It is an important topic and forms an integral part of Hindu Dharmasastra. This belief is pre-Vcdic as it dates back to the Indo-Iranian period {vide S.B.E. IV, ). Ancestor-worship was regarded essential for the continuation of one's race and prosperity to

अध्याय १२५

श्लोक 33

माघमासे तु सम्प्राप्ते सप्तम्यां नृपसत्तम ।सोपवासो जितक्रोध उषित्वा सूर्यमन्दिरे

māghamāse tu samprāpte saptamyāṃ nṛpasattama / sopavāso jitakrodha uṣitvā sūryamandire

हिन्दी अर्थ

ऋषियों के वंशों का अनुकीतंन सूत ने कहा--ऋषिवुन्द ! इस प्रकार महात्मा कश्यप द्वारा सभी स्थावर जंग्रमात्मक प्रजाओं की सृष्टि सम्पन्न हो जाने पर एवं उनके भली भाँति प्रतिष्ठित हो जाने पर सब के प्रमुख प्रजापति ब्रह्मा ने उत् सब के आधिपत्य पर क्रमहय: भिन्न-भिन्न को नियुक्त करने का उपक्रम किया ।१-२। समस्त द्विजातियों (ब्राह्मणों) वीरुधों, नक्षत्रों, ग्रहों, यक्षों एवं तपस्याओं के राजा के पद पर सोम (चन्द्रमा) को अभिषिक्त किया। सभी

English

How was BhavanI who was formerly Satl, born for the second time? She was DaksayanI at first. How did she become

अध्याय १२५

श्लोक 34

प्रातः स्नात्वा विधानेन ददात्यर्घं दिवाकरे ।विधिना मन्त्रयुक्तेन स लभेत् पुण्यमुत्तमम्

prātaḥ snātvā vidhānena dadātyarghaṃ divākare / vidhinā mantrayuktena sa labhet puṇyamuttamam

हिन्दी अर्थ

अंपिरा के वंश में उत्पन्न होनेवाली प्रजाओं का राज्यपद बृहस्पति को दिया। भृगु गोत्र में उत्पन्न होतेवाली प्रजाओं का राज्यपद काव्य (शुक्र) को दिया। इसी प्रकार आदित्यों का राज्य पद विष्णु को, महतों का वासव को दिया हैत्यों का राजा दितिनन्दन प्रह्लाद को बनाया, इसी प्रकःर साध्यों का राजा नारायण को, रुद्ों का राजा वृषभध्वज (इंंकर) को तथा दानवों का राजा विप्रचित्ति को नियुक्त किया । जल का राज्यपद

English

(Who are the Pitrs) whose grandson was Mainaka and whose grand-daughters wei'e Uma, Ekaparna, Ekapatala and Gaiiga, the most excellent one among rivers as well as the eldest of them all? Even before this, all this has been already desired to be pointed out (by you). Please listen to all my requests.

अध्याय १२५

श्लोक 35

पितृदेवमनुष्याणां कृत्वा ह्युदकतर्पणम् ।मन्दिरे देवदेवस्य ततः पूजां समाचरेत्

pitṛdevamanuṣyāṇāṃ kṛtvā hyudakatarpaṇam / mandire devadevasya tataḥ pūjāṃ samācaret

हिन्दी अर्थ

बरुण को. राजाओं . यक्षों, राक्षसों, भूपतियों तथा घत-सम्पत्ति का स्वाभित्व विश्ववा के पुत्र कुबेर को समर्पित उच्चे:अवसमश्वानां राजानं चाभ्यषेचयत् मृगाणासथ शादल गोवषं च चतुष्पदाम् ११०

English

Are there many Pitrs P * 1 And then where do they stay? Welfare unto you. I wish to hear the great procedure of Sraddha.

अध्याय १२५

श्लोक 36

गन्धैः पुष्पैस्तथा धूपैर्दीपनैवेद्यशोभनैः ।पूजयित्वा जगन्नाथं ततो मन्त्रमुदीरयेत्

gandhaiḥ puṣpaistathā dhūpairdīpanaivedyaśobhanaiḥ / pūjayitvā jagannāthaṃ tato mantramudīrayet

हिन्दी अर्थ

शब्दाकाशबलानां च वायुं बलवतां वरम् । सर्वेषां दंष्ट्रिणां शेष नागानामथ वासुकिस्

English

Whose sons are they (Pitrs) remembered to be? How are they the Pitrs? How were the Pitrs born and whose sons were they? Of what nature are they?

अध्याय १२५

श्लोक 37

विष्णुः शक्रो यमो धाता मित्रो ऽथ वरुणस्तथा ।विवस्वान्सविता पूषा चण्डांशुर्भर्ग एव च

viṣṇuḥ śakro yamo dhātā mitro 'tha varuṇastathā / vivasvānsavitā pūṣā caṇḍāṃśurbharga eva ca

हिन्दी अर्थ

सर्वाप्सरोगणानां च कामदेवं तथेव च। ऋतुनामथ मासानामातंवानां तथव च ११४ पक्षाणां च॒ विपक्षाणां मुहूर्तानां व पर्वणाम् । कलाकाष्ठाप्रमाणानां गतेरयनयोस्तथा ॥

English

Are there other Pitrs who are deities (i.e. worthy of wor¬ ship) unto the Devas in heaven? Thus I wish to hear the excellent creation of Pitrs and how the Sraddha performed by us (as per prescribed injunctions) propitiates Pitrs.

अध्याय १२५

श्लोक 38

इति द्वादशनामानि जपन्कृत्वा प्रदक्षिणाम् ।यत्फलं लभते पार्थ तदिहैकमनाः शृणु

iti dvādaśanāmāni japankṛtvā pradakṣiṇām / yatphalaṃ labhate pārtha tadihaikamanāḥ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

प्रजापतियें रजसः पूर्वस्यां दिशि विश्वुतम् । पुत्रं नाम्ता सुधामानं राजानं सोभ्यषेचयत् १६ पश्चिमस्थां (मायां) दिशि तथा रजसः पुत्रमच्युतम् केतुमन्तं महात्मानं राजानं सोधभ्यधेचयत्

English

What is regarded (in the Smrtis) as the reason of their being not visible? What types of Pitrs stay in heaven and what types in hell?

अध्याय १२५

श्लोक 39

दरिद्रो व्याधितो मूको बधिरो जड एव च ।न भवेत्सप्त जन्मानि इत्येवं शङ्करो ऽब्रवीत्

daridro vyādhito mūko badhiro jaḍa eva ca / na bhavetsapta janmāni ityevaṃ śaṅkaro 'bravīt

हिन्दी अर्थ

यथाप्रदेशमदण्यापि धर्मण परिपाल्यते १८ किया । पितरों के राज्यपद पर सूयंपुत्र यमराज को अभिषिक्त किया। सभी भूतों एवं पिशाचों का स्वामित्व शूलपाणि शंकर को समर्पित किया ॥३-७। पव॑तों का राज्यपद हिमवान् को, नदियों का सागर को तथा गर्धवों का चित्ररथ को दिया। अइवों के राज्यपद पर उच्चें:क्रवा को अ««्षिक्त किया, मृगों एवं गौ, बेल तथा अन्य चतुष्पदों का राजा सिंह को बतामा। सभी प्रकार के पक्षियों का स्वामी पक्षधारियों में श्रेष्ठ गररड़ को नियत

English

What Sraddhas are to be offered (to Pitrs)? How do these Sraddhas reach Pitrs—the Sraddhas that are offered uttering the names of father, father's father and great¬ grandfather against the three ricc-balls (Pintfas)? How are they (Pitrs), if stationed in hell, competent to grant benefits? Who are these called by the name' Pitrs? Whom shall we worship again? We have heard that even Devas in heaven worship Pitrs.

अध्याय १२५

श्लोक 40

एवं ज्ञात्वा विधानेन जपन्मन्त्रं विचक्षणः ।आराधयेद् रविं भक्त्या य इच्छेत्पुण्यमुत्तमम्

evaṃ jñātvā vidhānena japanmantraṃ vicakṣaṇaḥ / ārādhayed raviṃ bhaktyā ya icchetpuṇyamuttamam

हिन्दी अर्थ

किया । अशरीरी भूतों एवं गन्‍्धों का स्वामी मारुत को बनाया । शब्द, भाकाश, एवं बल का स्वामी बलवानों में श्रेष्ठ वायु को नियत किया । समस्त दंष्ट्राधारी सर्पों का स्वामित्व शेष को तथा नागों का स्वामी बासुकि को बनाया । सरीसृप, सर्प एवं नागों का स्वामी तक्षक को बनाया । समस्त सागरों, नदियों मेघों, वर्षा तथा आदित्य के स्वामित्व पर अन्यतम पजंन्य को अभिषिक्त किया ।६-१३। सभी अप्सरावुन्दों का स्वामी कामदेव को

English

O extremely learned one, we wish to hear this in de¬ tail. It behoves you to explain the significance of this clearly.

अध्याय १२५

श्लोक 41

मन्त्रहीनां तु यः कुर्याद् भक्तिं देवस्य भारत ।स विडम्बति चात्मानं पशुकीटपतङ्गवत्

mantrahīnāṃ tu yaḥ kuryād bhaktiṃ devasya bhārata / sa viḍambati cātmānaṃ paśukīṭapataṅgavat

हिन्दी अर्थ

बनाया । ऋतुओं, मास, ऋतुओं में होनेवाले कार्य विशेष पक्ष, विपक्ष, (?) मुहर्त, पर्वों, कला, काष्ठा आदि के प्रमाण, दोनों अयनों की गणित एवं योग का स्वामी संवस्सर को बनाया । तदनन्तर प्रजापति ने पृबंदिशा में सुविर्यात रज के पुत्र सुधामा को राजा बनाया। परदिचम दिशा में रज के पुत्र महात्मा केतुमान अच्युत को राजा के पद पर अभिषिक्त किया । तदनन्तर मनुष्यों का अधिपति सुय्यंपुत्र मनु को बनाया। आज भी ये अधिपति गण इन सातों द्वीपों एवं नगरादि से समस्वित समस्त प्रथ्वी मण्डल में अपने-अपने प्रदेशों में धर्म पूर्वक

English

On hearing the words of the sages, Suta, the seer of reality, said in accordance with the questions and the desire in the minds of the sages. I shall describe to you (in detail) what I have heard (regaxding Sraddha), in accordance with my intellectual ability. In every Manvantara, Pitrs are born as the sons of Devas.'

अध्याय १२५

श्लोक 42

तत्र तीर्थे तु यः कश्चित् त्यजते देहमुत्तमम् ।स गतस्तत्र देवैस्तु पूज्यमानो महर्षिभिः

tatra tīrthe tu yaḥ kaścit tyajate dehamuttamam / sa gatastatra devaistu pūjyamāno maharṣibhiḥ

हिन्दी अर्थ

स्वायंधुवेडन्तरे पु ब्रह्मगा तेडभिषेचिता:। न॒पा होतेडइभिषिच्यन्ते मनवो ये भवन्ति वे (१९ मन्वन्तरेष्वतीतेषु मता होतेषु पाथिवा:। एवमन्येडभिषिच्यन्ते प्राप्ते सन्‍्वन्तरे पुनः ॥।

English

In the past and the future Manvantaras, they are respectively the eldest and the youngest. I shall precisely recount the Pitrs who have gone in the past Manvantaras along with Devas and who exist at present,

अध्याय १२५

श्लोक 43

स्वेच्छया सुचिरं कालमिह लोके नृपो भवेत्

svecchayā suciraṃ kālamiha loke nṛpo bhavet

हिन्दी अर्थ

राजसुयेडभिविक्तश्न प्रथुरेभिनरोत्तमे: । वेददृष्टेन विधिना कृतो राजा प्रतापवान् एतानुत्पाद पुत्रांस्तु प्रजासंतानकारणात् । पुनरेव महाभागः प्रजानां पतिरीश्वर: २२ कश्यपो गोत्रकासस्तु चचार परम तपः। पुत्रों गोत्रकरो मह्यं भवेतामित्यचिन्तयत्

English

They were cursed by Brahma—"O deluded ones! You will all become devoid of sense." They did not know anything. Then the whole world became deluded. All of them bowed to god Brahma and implored him. In order to bless the worlds, the lord spoke to them again.

अध्याय १२५

श्लोक 44

पुत्रपौत्रसमायुक्तो हस्त्यश्वरथसङ्कुलः ।दासीदासशतोपेतो जायते विपुले कुले

putrapautrasamāyukto hastyaśvarathasaṅkulaḥ / dāsīdāsaśatopeto jāyate vipule kule

हिन्दी अर्थ

तस्य प्रध्यायमानस्य कश्यपस्य महात्मनः । ब्रह्मणोंइशौ सुतौ पश्चात्प्रादुभेतो महोजसो २४ वत्सारभश्रासितश्चव तावुभो ब्रह्मवादिनौ । वत्साराक्षिश्लुवों जज्ञे रेभ्यश्न स महायशाः

English

"Perform expiatory rites for the transgression which has been committed. Ask your sons and therefrom you will attain knowledge."

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 125
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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