Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
133
अध्याय 133 / 232

Adhyaya 133

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अध्याय १३३

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे आदिवाराहतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम द्वात्रिंशदधिकशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १३३ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महीपाल परं तीर्थचतुष्टयम् ।येषां दर्शनमात्रेण सर्वपापक्षयो भवेत्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe ādivārāhatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma dvātriṃśadadhikaśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 133 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahīpāla paraṃ tīrthacatuṣṭayam / yeṣāṃ darśanamātreṇa sarvapāpakṣayo bhavet

हिन्दी अर्थ

अलाने ध्यानिभिक्षृणां भोजयेदरब्रह्मचारिणों ।-तदलाभेः्प्युदासीन गरृहस्थमपि भोजयेत् . , यस्तिष्ठेदेकपादेन वायुभक्षः शर्तं समाः । ध्यानयोगी परस्तस्मादिति ब्रह्मानुशासनम् ७३

English

According to Mbh. Anu 86.14, the child came to be known as Skanda due to the casting off of the semen of £iva by Agni and Ganga (skannatvdt skanda tam prdptah)

अध्याय १३३

श्लोक 2

कौबेरं वारुणं याम्यं वायव्यं तु ततः परम् ।यत्र सिद्धा महाप्राज्ञा लोकपाला महाबलाः

kauberaṃ vāruṇaṃ yāmyaṃ vāyavyaṃ tu tataḥ param / yatra siddhā mahāprājñā lokapālā mahābalāḥ

हिन्दी अर्थ

नित्यप्रति गुरुपूजा प्रभृति सत्क्रियाओं में निरत रह योगाभ्यास में लगे रहते हैं। योगमार्ग में वे विस्यात पितर गण इस प्रकार सब को तृप्त रखते हैं । श्राद्ध के अवसर पर प्रसन्न हुये वे योगाम्यास में निरत रहनेवाले पितर गंण अपने योगबल से चन्द्रमा को तृंप्त करते हैं, जिससे त्रैलोक्य को जीवन प्राप्त होता है ।६०-६५। इसलिये योग की मर्यादा जाननेवालों को सवंदा यत्न पुवेक श्राद्धादि का दान करना चाहिए क्योंकि पितरों का बल योग है

English

(While) Slipping from heaven and falling down, she saw the aerial chariots as small as a mote and in them she saw the fallen Pitrs.

अध्याय १३३

श्लोक 3

युधिष्ठिर उवाच: किमर्थं लोकपालैश्च तपश्चीर्णं पुरानघ ।नर्मदातटमाश्रित्य ह्येतन्मे वक्तुमर्हसि

yudhiṣṭhira uvāca: kimarthaṃ lokapālaiśca tapaścīrṇaṃ purānagha / narmadātaṭamāśritya hyetanme vaktumarhasi

हिन्दी अर्थ

और योग बल से ही चन्द्रमा प्रवतित होता है ।६६। श्राद्ध के अवसर पर -अभ्यागत (आये हुए) सहस्रों ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए, यौग में निपुण एक ही ब्राह्मण सस्तुष्ट होकेर उक्त सहस्त ब्राह्मण भोजन का फल देता है, इसको सुनिए । सहत्न सामान्य ब्राह्मण, स्नातक अथबा एक योगाचार्य--इनमें से किसी एक के द्वारा जो भोजन किया जाता है बहू महान् भय (नरक) से छंटकारा दिलाता है। एक सहस्र गृहस्थ सौ वान- प्रस्थ अथवा एक सहसख्न ब्रह्मचारी--इन सबों से एक योगी (योग।भ्यासी) बढ़कर है ॥६७-६६। बह चांहे नास्तिक हो. चाहे दृष्कर्मी हो, चाहे संकीर्ण विचारों वाला हो अथवा चोर ही क्यों न हो । प्रजापति-ते योगमार्ग में ऐसी व्यवस्था बतलाई है कि अत्यत्ञ (योगी को छोड़कर) दान नहीं करमा चाहिए। जिस व्यक्ति का पुत्र अबबा पौत्र ध्यान में निमग्न रहनेवाले किसी योग।म्यथासी को श्राद्ध के अवसरःपर भोजन करायेगा,. उसके पितर गण

English

They were very subtle and unforsakcn 2 (?) (a-parityak- tan). They were like sparks of fire imposed on sparks of fire. Falling down topsy-turvy, she appealed to them, "Save, ye

अध्याय १३३

श्लोक 4

श्रीमार्कण्डेय उवाच: अधिष्ठानं समिच्छन्ति ह्यचलं निर्बले सति ।संसारे सर्वभूतानां तृणबिन्दुवदस्थिरे

śrīmārkaṇḍeya uvāca: adhiṣṭhānaṃ samicchanti hyacalaṃ nirbale sati / saṃsāre sarvabhūtānāṃ tṛṇabinduvadasthire

हिन्दी अर्थ

अच्छी वृष्टि होने से किसानों की तरह परम सस्‍्तुष्ट होंगे। यदि श्राद्ध के अवसर पर कोइ योगाभ्यासी ध्यान परायण भिक्षु न मिले तो दो ब्रह्मचारियों को भोजन कराना चाहिए, वे भी न मिले तो किसी - उदासीन ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए जो सांसारिक विषयों से विरक्त हो । उसके न मिलने पर गभृहस्थ को भी भोजन करा देता चाहिए ७००७४। जो व्यक्ति सौ वर्षों तक केवल एक पैर पर खड़े होकर वायु का आहार

English

She was consoled by them—"Do not be afraid 55. When thus urged, she became steady. Then she propitiated those Pitrs with pitiable words.

अध्याय १३३

श्लोक 5

कदलीसारनिःसारे मृगतृष्णेव चञ्चले ।स्थावरे जङ्गमे सर्वे भूतग्रामे चतुर्विधे

kadalīsāraniḥsāre mṛgatṛṣṇeva cañcale / sthāvare jaṅgame sarve bhūtagrāme caturvidhe

हिन्दी अर्थ

क के स्थित रहता है, उससे भी बढ़कर ध्यानी एव-योगी -हैं-ऐसी ब्रह्मा की आज्ञा है । सिद्ध लोग ब्राह्मण का वेश पुजयेच्चाध्यंपाधेन वेश्मना भोजनेन च । उवीं सागरपर्य॑न्तां देवा योगेश्वराः सदा ॥

English

Those Pitre spoke to the girl who fell down from her glory due to her transgression: "O lady of sparkling smiles, you are fallen from your prosperity due to your own fault. (Hence) you fall.

अध्याय १३३

श्लोक 6

धर्मो माता पिता धर्मो धर्मो बन्धुः सुहृत् तथा ।आधारः सर्वभूतानां त्रैलोक्ये सचराचरे

dharmo mātā pitā dharmo dharmo bandhuḥ suhṛt tathā / ādhāraḥ sarvabhūtānāṃ trailokye sacarācare

हिन्दी अर्थ

नावारूपेश्ररन्त्येते प्रजा धर्मेण पालयन् ७४,

English

Deities (god) attain (experience) the fruits of their actions by means of the same bodies with which they perform those actions.

अध्याय १३३

श्लोक 7

एवं ज्ञात्वा तु ते सर्वे लोकपालाः कृतक्षणाः ।तपस्ते चक्रुरतुलं मारुताहारतत्पराः

evaṃ jñātvā tu te sarve lokapālāḥ kṛtakṣaṇāḥ / tapaste cakruratulaṃ mārutāhāratatparāḥ

हिन्दी अर्थ

आद्य एप गणः प्रोक्त: पितृणाममितौजसाम् । भावयन्सप्त कालान्वे स्थित एब गणः सदा ७८ इति श्रीमहापुराणे वायुप्रोक्ते उपोद्घातपादे श्राद्धप्रक्रियारम्भो नामकसप्ततितमोध्ध्याय:

English

In the case of Devas, the actions fructify immediately. In the case of human beings, they fructify after death. Hence you will attain the status of the child of Amavasu after death and will attain the fruit 55.

अध्याय १३३

श्लोक 8

ततस्तुष्टो महादेवः कृतस्यार्द्धे गते तदा ।अनुरूपेण राजेन्द्र युगस्य परमेश्वरः

tatastuṣṭo mahādevaḥ kṛtasyārddhe gate tadā / anurūpeṇa rājendra yugasya parameśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

धारण कर इस पृथ्वी पर भ्रमण किया करते हैं अतः किसी अतिथि के आ जाने पर मनुष्य को चाहिए कि उसकी अग॒वानी के लिये हाथ जोड़कर जाय, अध्य पद्मयादि से उसकी पूजा करे, रहने के लिये सुन्दर स्थान दे ओर भोजन की व्यवस्था करे । समुद्र पयेस्त दिस्तृत इस भूमण्डल पर ये यौगेश्वर देवगण विविध रूप धारण कर धर्म पूक प्रजावगं की पालना करते हुए सबंदा विचरण किया करते हैं, अतः मनुष्य को चाहिए कि अपने द्वार

English

On being told thus (by her Pitrs), she again propitiated Pitrs. After meditating (for a while), they took pity on her and became pacified and pleased.

अध्याय १३३

श्लोक 9

वरेण छन्दयामास लोकपालान् महाबलान् ।यो यमिच्छति कामं वै तं तं तस्य ददाम्यहम्

vareṇa chandayāmāsa lokapālān mahābalān / yo yamicchati kāmaṃ vai taṃ taṃ tasya dadāmyaham

हिन्दी अर्थ

पर आये हुए अतिथि ब्राह्मण को विधिपूर्वक दानादि दे। आगे चलकर मैं उन विविध दानादिकों को तथा उनके फलों को बतला रहा हूँ ।७२-७६। सहलस्न अश्वमेघ, सौ राजसूय, सहस्त पुण्डरीक नामक यज्ञों से बढ़कर फल योगियों के मध्य में निवास स्थान बनाने से प्राप्त होता है। उम अमित तेजस्बी पितरों के साथ घणों में से यह प्रथम गण (समूह) कहा जा चुका, पितरों का यह गण सभी कालों को भावना करते हुए सबंदा अवस्थित है । अब इसके उपरान्त मैं पुनः समस्त पितरों का वर्णन कर रहा हूँ, उनकी सस्तति, अवस्थिति एवं भावनाओं

English

The missing lines are traceable to Bd. 3.10. w. 53-b to 58. They are translated here to supply the lacuna: 53b-54. "It is heard that the Pitrs named Barbisads are somapas (imbibers of Soma). The mental daughter of the Pitrs was the river named Acchoda.

अध्याय १३३

श्लोक 10

एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य लोकपाला जगद्धिताः ।वरदं प्रार्थयामासुर् देवं वरम् अनुत्तमम्

etacchrutvā vacastasya lokapālā jagaddhitāḥ / varadaṃ prārthayāmāsur devaṃ varam anuttamam

हिन्दी अर्थ

के विषय में भी क्रशः कह रहा हूं

English

Those Pitrs had never before been seen by her. She was born as their mental daughter. Hence she did not know her Pitrs.

अध्याय १३३

श्लोक 11

कुबेर उवाच: यदि तुष्टो महादेव यदि देयो वरो मम ।यक्षाणाम् ईश्वरश्चाहं भवामि धनदस्त्विति

kubera uvāca: yadi tuṣṭo mahādeva yadi deyo varo mama / yakṣāṇām īśvaraścāhaṃ bhavāmi dhanadastviti

हिन्दी अर्थ

तेषां लोकबिसगं तु कीतंथिष्ये निबोधत या वे दुहितरस्तेषां दौहित्राश्चेव ये स्मृताः धर्ममृतिधरास्तेषां ये त्रयः परमा गणाः

English

Transgressing those real Pitrs, she chose Amavasu as her father. He was traversing the sky accompanied by the Apsaras named Adrika. He was seated man aerial chariot. in the firmament. But due to her trans¬ gression (of her real father), she was unable to move about in the sky.

अध्याय १३३

श्लोक 12

ततः प्रोवाच देवेशं यमः संयमने रतः ।तत्र प्रधानो भगवान् भवेयं सर्वजन्तुषु

tataḥ provāca deveśaṃ yamaḥ saṃyamane rataḥ / tatra pradhāno bhagavān bhaveyaṃ sarvajantuṣu

हिन्दी अर्थ

नामानि लोकसर्ग च तेषां वक्ष्ये समासतः। लोका विरजसो नास्‍्ना यत्र तिष्ठन्ति भास्वराः (३३ अमूर्तयः पितृगणाः पुत्रास्ते वे प्रजापतेः । विरजस्य द्विजाः श्रेष्ठा बेराजा इति विश्वुता: ॥ एष वे प्रथमः कल्पो वराजानां प्रकातितः ।

English

After seeking another father (viz. Amavasu) she slipped from her Yogic power and fell down."

अध्याय १३३

श्लोक 13

वरुणो ऽनन्तरं प्राह प्रणम्य तु महेश्वरम् ।क्रीडेयं वारुणे लोके यादोगणसमन्वितः

varuṇo 'nantaraṃ prāha praṇamya tu maheśvaram / krīḍeyaṃ vāruṇe loke yādogaṇasamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

जात: सर्वोषधिधरः स्ंरत्माकरात्मवान् । पव॑तः प्रवरः पुण्यः क्रौश्वस्तस्या5उत्मजो 5भवत् ६ सूतजी ने कहा -ऋषिव॒न्द परम बुद्धिमान पितरों के सात गण कहे गये हैं, जिनमें चार तो मूतिमान हैं और शेष तीन अमूतं हैं। मैं उनके द्वारा होनेवाली लोकसृष्टि का वर्णन कर रहा हूं, सुनिये ।! उनकी जो-जो पुत्रियाँ हैं, एवं जो-जो दौहित्र हुए हैं, उन सब का भी वर्णन कर रहा हूं। जो तीन धर्ममूर्ति परमश्रेष्ठ गण कहे गये हैं, सबंप्रथम मैं उनके नाम एथं उनके द्वारा होनेबालो लोक सृष्टि का वर्णन संक्षेप में

English

On foreseeing what is surely destined to happen, Devas, the Soma-imbibing Pitrs spoke to the girl, "You will become the daughter of the noble-souled king Amavasu who is born on the earth as a human being and thereafter attain these worlds of your own.

अध्याय १३३

श्लोक 14

जगादाशु ततो वायुः प्रणम्य तु महेश्वरम् ।व्यापकत्वं त्रिलोकेषु प्रार्थयामास भारत

jagādāśu tato vāyuḥ praṇamya tu maheśvaram / vyāpakatvaṃ trilokeṣu prārthayāmāsa bhārata

हिन्दी अर्थ

कर रहा हूँ । जहाँ परम कान्तिमव विरजस नाम से विख्यात लोकों की अबस्थिति है, वहीं पर प्रजापति ब्रह्मा के पुत्र अमूत पितरगण निवास करते हैं। है द्विजगण ! वे पितरगण विरज के निवासी हैं, अतः वेराज नाम से प्रसिद्ध हैं। वैराज नामक पितरों के इस पहिले गण को आप लोगों सुना चुका ।२-४। इन्हीं वेराजों की मानसी पुत्री मेना थी, जो महागिरिं हिमवान् की सुन्दरी पत्नी थी और जिसमें मैनाक की उत्पत्ति हुई। यह

English

In the twenty-eighth Dvapara Yuga you will be born of the womb of a fish; you will be the daughter of this very same king Amavasu and (the celestial damsel) Adrika.

अध्याय १३३

श्लोक 15

तेषां यदीप्सितं काममुमया सह शङ्करः ।सर्वेषां लोकपालानः दत्त्वा चादर्शनं गतः

teṣāṃ yadīpsitaṃ kāmamumayā saha śaṅkaraḥ / sarveṣāṃ lokapālānaḥ dattvā cādarśanaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

पत्त श्रेष्ठ मैनाक सभी प्रकार के रत्नादिकों से परिप्रणं, समस्त ओषधियों का आगार एवं पृण्यशालो उपन्न अश्विते है ह्यर्णा तु अनिकेता तपो5चरत् । न्यग्रोधभेकपर्णो तु पाठलामेकपाटला ॥

English

You will give birth to the successor of the sage Para- Sara. That Brahmanical sage will divide the single Veda into four parts.

अध्याय १३३

श्लोक 16

गते महेश्वरे देवे यथास्थानं तु ते स्थिताः ।स्थापना च कृता सर्वैः स्वनाम्नैव पृथक्पृथक्

gate maheśvare deve yathāsthānaṃ tu te sthitāḥ / sthāpanā ca kṛtā sarvaiḥ svanāmnaiva pṛthakpṛthak

हिन्दी अर्थ

शत वर्षसहस्राणि दुश्चरं देवदानवं ८ आहारमेकपर्णन एकपर्णो समाचरत् । पाठलेनेव चेकेव विदध्यादेकपाटला

English

You alone will give birth to two sons who will heighten the glory of Mahabhisa (?) Santanu—the sons Vicitravlrya, the knower of Dharma, and Citrangada, the king endowed with the attributes of brilliance and strength. After giving birth to these sons, you will regain your own worlds.

अध्याय १३३

श्लोक 17

कुबेरश्च कुबेरेशं यमश्चैव यमेश्वरम् ।वरुणो वरुणेशं तु वातो वातेश्वरं नृप

kuberaśca kubereśaṃ yamaścaiva yameśvaram / varuṇo varuṇeśaṃ tu vāto vāteśvaraṃ nṛpa

हिन्दी अर्थ

पूर्ण पूर्ण सहख्न हैं आहार व प्रचक्रतु:। एका तत्र निराहारा तां माता प्रत्यभाषत १० निषेधयन्ती ह्ममेति माता स्नेहेन दुःखिता । सा तथोक्ता तया देवी मात्रा दुश्चरचारिणी . उमेति सा महाभांगी त्रिषु लोकेंषु विश्व्तां ॥ तथेति नाम्नों तेनासौ निरुक्ता कमंणा शुभा..

English

Due to your transgression towards the Pitrs, you will attain that despicable birth. You will become the daughter of the very same king and Adrika.

अध्याय १३३

श्लोक 18

तर्पणं विदधुः सर्वे मन्त्रैश्च विविधैः शुभैः ।सर्वे सर्वेश्वरं देव पूजयित्वा यथाविधि

tarpaṇaṃ vidadhuḥ sarve mantraiśca vividhaiḥ śubhaiḥ / sarve sarveśvaraṃ deva pūjayitvā yathāvidhi

हिन्दी अर्थ

तपःशरीरास्ता: संर्वास्तिल्नो योंगबलान्विता: । देव्यस्ता: सुमहांभागा: सवश्च स्थिरयौवनाः.

English

After becoming (his) daughter, you will regain these worlds."

अध्याय १३३

श्लोक 19

आह्वयामासुस् तान् विप्रान्सर्वे सर्वेश्वरा इव ।क्षान्तदान्तजितक्रोधान्सर्वभूताभयप्रदान्

āhvayāmāsus tān viprānsarve sarveśvarā iva / kṣāntadāntajitakrodhānsarvabhūtābhayapradān

हिन्दी अर्थ

सर्वाश्व ब्रह्मवादिन्‍्य: सर्वाश्चेबोध्वंरेतस: । उमा तासां वरिष्ठा च श्रेष्श च वरवणिनी.. महायोगवलोपेता महादेवमुपास्थिता । दन्तकाण्वोशनास्तस्या: पुत्री वे भूगुनन्दनः: ...

English

In the confluence of Ganga and Yamuna, she was born of the fish Adrika, She was born as the daughter of Amavasu in Adrika the fish. 1

अध्याय १३३

श्लोक 20

वेदविद्याव्रतस्नातान् सर्वशास्त्रविशारदान् ।ऋग्यजुःसामसंयुक्तांस् तथाथर्वविभूषितान्

vedavidyāvratasnātān sarvaśāstraviśāradān / ṛgyajuḥsāmasaṃyuktāṃs tathātharvavibhūṣitān

हिन्दी अर्थ

हुआ, इसका पुंत्र क्रौच्य हुआ ।५-६ पवेर्तेराज नेम्मेना से तींन कन्याओं को भी जन्म, दिय जिनके नाम अपर्णा, एकपर्णा तथा एकपाठला थे। इन तीनों कन्याओं में से दो ने आश्रय ग्रहण किया, केवल अपर्णा ने कोई आश्रय नहीं बनाया, विना घर द्वार के हो वह तपस्या में दत्तचित्ते रही। एकपर्णा ने एक न्यंग्रोध (बरगद) का तथा एकपाटला ने- एक पाटला वृक्ष का अवलम्ब लिया था। इस प्रकार तीबों कनन्‍्याओं ने एक सहसत्र वर्षों

English

Indeed, she was the daughter of that king (being bom of) the semen virile of the king.

अध्याय १३३

श्लोक 21

चातुर्विध्यं तु सर्वेषां दानं दास्याम गृह्णत ।एवमुक्त्वा तु सर्वेषां विप्राणां दानमुत्तमम्

cāturvidhyaṃ tu sarveṣāṃ dānaṃ dāsyāma gṛhṇata / evamuktvā tu sarveṣāṃ viprāṇāṃ dānamuttamam

हिन्दी अर्थ

तक कठोर तप किया, जिसे देवता अथवा दानव-कोईउी' करने में असमर्थ थे ।७-८५। एकपर्णा एक पत्ते का आहार करती थी एक पाटला एक पाटल पर अपना जीवन निर्भर किये थी, और इस प्रकार इन दोनों बहिनों ने दो सहख्न वर्ष बीत जानेपर आहार स्वीकार कर लिया) परन्तु तीसरी कन्या अपर्णा बिना किसी आहार के उप्त समग्र त्मी तपस्या में लीन रही +;,माता ने स्नेह से अति'दुृखित हो तपस्या. से विरत -करने के लिए निषध के ई॑वर में उससे /उ 'मा' ऐसा कहा ।- महाभाग्यशालिनी अत्यस्त दृष्कर तप करनेवाली बह देवी अपनी माता के ऐस क़हने पर उमा नाम से तीनों लोकों में विख्यात हुई और अपने , उस कठोर कर्म के कारण अपर्णा इस शुभ नरम से; भी उसकी ख्याति हुई । इस जगत् की सत्ता जब -तक रहेगी, ज़ब तक:श्थिर रहेगी, तब-तक इनः तौनों- कुमारियों के ताम एवं उनकी घोर. तफ्स्याओं के यद्योग्रव जीवित. रहेंगे १९-१३।-थोगबल से संयुक्त, तपोमय

English

There the Pitrs are the Agnisvattas of shining lustre. With a desire for (attaining) excellent fruits, groups of Danavas, Yaksas, Raksasas, Gandharvas, Kinnaras, Bhutas, ser¬ pents and Pisacas worship them.

अध्याय १३३

श्लोक 22

तत्र स्थाने ददुस् तेषां भूमिदानम् अनुत्तमम् ।यावच्चन्द्रश्च सूर्यश्च यावत् तिष्ठति मेदिनी

tatra sthāne dadus teṣāṃ bhūmidānam anuttamam / yāvaccandraśca sūryaśca yāvat tiṣṭhati medinī

हिन्दी अर्थ

शरीरकाली जे तीनों कन्यायें: समस्त -दिव्यगुणों से सम्पन्न, महाभाग्यशालिनी,. एवं स्थिर यौवनवाली हैं । उन सब कौ- सब ब्रह्यवादिनी एवं ब्रह्मचारिणी. कन्याओ, में उमा परश्रेष्ठ: सरत्ंगुणान्वित तथा सुन्दरी क्षी। उसका योगबल परम महान् था, और उसने महादेतव्र- को पति रूप में प्राप्त किया । उसके-पुत्र दन्‍त, कण्व उशना

English

Thus, these sons of Pulaha, the Prajapati, have been recounted. These groups are said to be three. They are auspicious and assumers of Dharma-form.

अध्याय १३३

श्लोक 23

तावद्दानं तु युष्माकं परिपन्थी न कश्चन ।राजा वा राजतुल्यो वा लोकपालैर् अनुत्तमम्

tāvaddānaṃ tu yuṣmākaṃ paripanthī na kaścana / rājā vā rājatulyo vā lokapālair anuttamam

हिन्दी अर्थ

देवल॑ सुधुवे सा तु ब्रह्विष्ठं माससं सुत६मतू « 7 का 2४३ 7 7? ॥१४ं तस्पापि शद्भलिखितो स्पृतो' पुत्राबंयोनिजों । इत्येता वे सहाभागाः कन्या हिमवतः शुभा .

English

In the missing lines in the text supplemented from Bd. P. (w. 55- 58) and w. 51-66, the Purana writers have used the curse-motif to explain the unusual matrimonial life of Satyavati.

अध्याय १३३

श्लोक 24

दत्तं लोपयते मूढः श्रूयतां तस्य यो विधिः ।शोषयेद्धनदो वित्तं तस्य पापस्य भारत

dattaṃ lopayate mūḍhaḥ śrūyatāṃ tasya yo vidhiḥ / śoṣayeddhanado vittaṃ tasya pāpasya bhārata

हिन्दी अर्थ

इंद्राणी सा तु प्रवरा स्वृगुणेरंतिरिच्यतें ॥ अन्योन्यप्रीतिरनधोर्भाशंकरयोरंथ ॥र०

English

Their mental daughter is (will be) famous by the name of Pivarl. She was (will be) reputed to be a YoginI, a Yogic wife and a Yogic mother.

अध्याय १३३

श्लोक 25

शरीरं वरुणो देवः संततीं श्वसनस् तथा ।आयुर्नयति तस्याशु यमः संयमनो महान्

śarīraṃ varuṇo devaḥ saṃtatīṃ śvasanas tathā / āyurnayati tasyāśu yamaḥ saṃyamano mahān

हिन्दी अर्थ

तयीं/ सकाशमिन्द्रेण प्रेषितो हृष्यवाहन कि ह . ततो रुषितया देव्या शप्तोडग्निः शांशपायन । इर्द चोत्तवती- बह्लि रोषगद्गदया गिरा. है 8 मरंमान्मय्यवितृप्तायां रतिविध्यं हुताशन-+ कृतवानस्य कर्तंव्यं तस्मात््वमसि दुर्मतिः.-. ७२५ यदेवं बिभूतं गर्भ रोदं शुक्र महाप्रभम् । गर्भ त्वं धारयस्वबमेषा ते दण्डघारणा (२६

English

In the (future) twenty-eighth Dvaparayuga (a sage) of great penance named Suka will be born in the family of Parasara.

अध्याय १३३

श्लोक 26

निःशेषं भस्मसात् कृत्वा हुतभुग्याति भारत ।तस्मात् सर्वप्रयत्नेन ब्राह्मणेभ्यो युधिष्ठिर ।भक्तिः कार्या नृपैः सर्वैर् इच्छद्भिः श्रेय आत्मनः

niḥśeṣaṃ bhasmasāt kṛtvā hutabhugyāti bhārata / tasmāt sarvaprayatnena brāhmaṇebhyo yudhiṣṭhira / bhaktiḥ kāryā nṛpaiḥ sarvair icchadbhiḥ śreya ātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

थीं।। हिमवान ने;:ही एंकप्र्णी।को योगाचार्य परम बुद्धिमानू असित को समर्पित-किय।न्‍था ! एकपूर्णी ने ब्रह्मनिष्ठ देवल को मातसपुर्ज के :रूप में उत्पन्न किया ।१४-१७ इन तीनो" कुमारियों में तीधवरी: एकपटला, नामक जो कुमारी थी; उसने शतशिंलाक के पुत्र जेगीषव्य को पतिरूप में स्वीकारे 'किया था, उसके “भी शंख और लिखित तामक को: पुत्र हुए। जिनकी।उत्पत्ति योनि से' नहीं हुई थी'+ ये ही तीन महामाग्यशालिनी हिमवाने् की कल्याण

English

O excellent Brahmanas, he will be a glorious and great Yogin. Yoga (will spread) from him. He will be born of Vyasa, from the AranI (a piece of wood used for the production of fire by attrition) like the smokeless fire.

अध्याय १३३

श्लोक 27

राजा वृक्षो ब्राह्मणास्तस्य मूलं भृत्याः पर्णा मन्त्रिणस्तस्य शाखाः ।तस्मान् मूलं यत्नतो रक्षणीयं मूले गुप्ते नास्ति वृक्षस्य नाशः

rājā vṛkṣo brāhmaṇāstasya mūlaṃ bhṛtyāḥ parṇā mantriṇastasya śākhāḥ / tasmān mūlaṃ yatnato rakṣaṇīyaṃ mūle gupte nāsti vṛkṣasya nāśaḥ

हिन्दी अर्थ

दायिनो :कम्पाएँ हैं:। : इनमें रुद्राणी उमा अपने गुणों के! कारण सब से बढ़चढ़कर थीं॥ उमा£ और शंकर के पारस्परिक सम्बन्ध और प्रेम' को देखकर वृत्रह्म (इम्द्र) को सन्देह 'हुआ । दाम्फ्त्य प्रेम में अनुरक्त उन दोनों से होनेवाली संतति के भेय से आतद्धूत होकर इन्द्र ने उनके पास अग्नि 'को भेजा और कहा, है 'हुताशनः ! तुम इस दोनों के रतिकर्म में जाऋरःविध्न पहुचाओं, "तुम तो' सर्वत्र जा;ःसकते हो ।' अतः तुम्हारे वहाँ जाने फर कोई दोष न होगा ।१८+२१।इरद्र के कहने पर अभ्मि ने वैसा ही किया जिसका'परिणाम यह ' हुआ कि ' झंकर नें अपना वौय उमा के शरीर में तः छोड़कर पृथ्वी 'परं गिरा दिया । शांशपायन / इस घटना के धठित होने पर ठमा को क्रोध आया और उन्होंने अग्ति को शाप दिया कि है अभ्नि ! यतः तुमने मेरी' तृप्ति के बिना हुए ही इस रतिक्रीडा में धिध्न 'डाल दिया है, अतः 'तुम' निग्चय ही बड़े कुबुद्धि हो, और यह जो मेरें गर्भ द्वार से

English

In the (mental) daughter of the Pitrs, he will beget these well-known Yogic preceptors, viz. Krsna, Gaura, Prabhu, Sambhu and Bhurisruta.

अध्याय १३३

श्लोक 28

षष्टिवर्षसहस्राणि स्वर्गे तिष्ठति भूमिदः ।आच्छेत्ता चावमन्ता च तान्येव नरके वसेत्

ṣaṣṭivarṣasahasrāṇi svarge tiṣṭhati bhūmidaḥ / ācchettā cāvamantā ca tānyeva narake vaset

हिन्दी अर्थ

बहिंगंत रुद्र का महान् तेजोमय दीर्थ है उसे तुम गर्भेरूप में वहन करो, यही मैं तुझे दण्ड दे रही हें

English

He will beget a daughter Klrtimati who will be a YoginI and a Yogic mother. She will become the queen of Anuha and the mother of Brahmadatta.

अध्याय १३३

श्लोक 29

स्वदत्ता परदत्ता वा पालनीया वसुंधरा ।यस्य यस्य यदा भूमिस्तस्य तस्य तदा फलम्

svadattā paradattā vā pālanīyā vasuṃdharā / yasya yasya yadā bhūmistasya tasya tadā phalam

हिन्दी अर्थ

स गड्भामुपगम्या55ह श्रूयतां सरिदृत्तमे । सुमहान्परिखेदों मे गर्भधारणकारणात् सा5पि कृच्छ ण महता खिद्यमाना महानदी । काले प्रकृष्टं सुमहद्गर्भधारणतत्परा

English

After begetting these children and attaining great Yogic power, he will become a great Yogin and ascetic. He will attain that goal from which there is no return. Like the rays of the sun, he will attain the status of no rebirth. The great sage will become omnipresent and liberated.

अध्याय १३३

श्लोक 30

देवताज्ञामनुस्मृत्य राजानो ये ऽपि तां नृप ।पालयिष्यन्ति सततं तेषां वासस्त्रिविष्टपे

devatājñāmanusmṛtya rājāno ye 'pi tāṃ nṛpa / pālayiṣyanti satataṃ teṣāṃ vāsastriviṣṭape

हिन्दी अर्थ

रुद्राग्तिगद्भातनयस्तत्र जातो5रुणप्रभ: । आदित्यशतसंकाशो महातेजा: प्रतापवान् ३३ तस्मिञ्जाते महाभागे कुमारे जाह्नवीसुते । विभानयानेराकाशं पतत्रिभिरिवावुतम्

English

These three are the disembodied Pitrs who assume Dharmic forms. There are four others. (Listen and) understand.

अध्याय १३३

श्लोक 31

स्वदत्ता परदत्ता वा यत्नाद्रक्ष्या युधिष्ठिर ।मही महीक्षिता नित्यं दानाच्छ्रेयो ऽनुपालनम्

svadattā paradattā vā yatnādrakṣyā yudhiṣṭhira / mahī mahīkṣitā nityaṃ dānācchreyo 'nupālanam

हिन्दी अर्थ

देवदुन्दुभयों नेदुराकाशे मधुरस्व॒राः । मुमुचुः पुष्पवर्ष च खेचरा: सिद्धचारणाः ऋषिव॒न्द ! रुद्राणी उमा के रोषज शाप के कारण हुताशन को वह गर्भ धारण करना पड़ा और उस गर्भ को उसने बहुत वर्षों तक वहन किया । बहुत दिनों के बाद गंबा के तट पर आकर अग्नि ने निवेदन किया, है उत्तम सरिते ! मेरी यह प्रार्थना श्रवण करो । इस ग्रभ भार के बहन करने में मुझे महान् खेद हो रहा है, है निम्नगे ! मेरे लिए तुम इस गभ को आज्न से धारण कर लो, मेरे आशीर्वाद से तुम्हें इसके वहन करने में बहुत अल्पखेद

English

O excellent Brahmanas! The Pitrs whom I shall describe assume forms of great lustre. They are Kavyas*, sons of Agni, Kavi (the wise one?) born of Svadha.

अध्याय १३३

श्लोक 32

आयुर्यशो बलं वित्तं संततिश्चाक्षया नृप ।तेषां भविष्यते नूनं ये प्रजापालने रताः

āyuryaśo balaṃ vittaṃ saṃtatiścākṣayā nṛpa / teṣāṃ bhaviṣyate nūnaṃ ye prajāpālane ratāḥ

हिन्दी अर्थ

होगा ।२७-२६। महानदी गंगा ने अग्नि की विनयपुर्ण बार्ण बातें सुनकर स्वीकार कर लिया, और बड़े आनन्द से उस गर्भ को धारण किया, अपने तेज से जलते हुए उस गर्भ को बहन करने में वे महानदी भी बहुत परेशान हुई, फिर भी बहुत दिनों तक तत्परता के साथ अनेक कठिनाइयों की उपेक्षा कर वे गर्भ को धारण किये रहीं । हिमवान् पर्वत के मनोहर कुक्षि प्रदेश (घाटी) में शरवण नामक एक विचित्र सुन्दर वन था जिसमें वक्ष

English

These are the Pitrs shining i n the worlds of Devas with their lustre amidst the luminaries. They are richly endowed with all desirable objects and the -Brahmanas revere them.

अध्याय १३३

श्लोक 33

एवमुक्त्वा तु तान् सर्वांल्लोकपालान् द्विजोत्तमान् ।पूजयित्वा विधानेन प्रणिपत्य व्यसर्जयन्

evamuktvā tu tān sarvāṃllokapālān dvijottamān / pūjayitvā vidhānena praṇipatya vyasarjayan

हिन्दी अर्थ

खूब फूले हुए थे, वहीं पर जाकर गंगा ने अनृपम तेज से जलते हुए अग्ति की भाँति उस गरभे का विमोचन किया ।३०-३३। रुद्र, अग्ति ओर गंगा का वहू शिशु अरुण के समान कान्तिमान हुआ, सैकड़ों सूर्य के समान् तेजस्वी और प्रतापी था । जाह्लवी के गर्भ से उस कुमार के समुत्पन्न होने पर सारा आकाशमण्डल देवताओं के सुन्दर विमानों और यानों से इस प्रकार आबृत हो गया मानो पक्षियों के समूह घेरे हुए हों।३३-३४। देवगण आकादय मण्डल में मधुरस्वर से दुन्दुभि बजाने लगे। आकाश में उड़नेवाले सिद्ध और चारणों के वन्द पुष्पों की वृष्टि करने लगे। चारों ओर से मुख्य-मुख्य गन्धबं लोग गान करने लगे, विद्याधरों, सिद्धों, तथा किन्नरों के समूह सम्मिलित होकर उत्सव मनाने लगे । सहस्नों विशालकाय नाग (एवं पक्षियों के प्रमुख गण उस दंंकरात्मज

English

Their mental daughter was famous in heaven by

अध्याय १३३

श्लोक 34

गतेषु विप्रमुख्येषु स्नात्वा हुतहुताशनाः ।लोकपालाः क्षुधाविष्टाः पर्यटन्भैक्षमात्मनः

gateṣu vipramukhyeṣu snātvā hutahutāśanāḥ / lokapālāḥ kṣudhāviṣṭāḥ paryaṭanbhaikṣamātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

भिः स बालाऊनिभो रोदरः परिवतः प्रभुः । स्निह्म मानाभिरत्यर्थ स्वकाभिरिव सातृभिः

English

There were thirty-one Pit r s who heightened the glory of Bhrgus. Their worlds were known as Maricigarbhcs (having rays within) which envelop the heavens.

अध्याय १३३

श्लोक 35

अस्थिचर्मावशेषाङ्गाः कपालोद्धृतपाणयः ।अलब्धग्रासमर्द्धार्धं निर्ययुर् नगराद्बहिः

asthicarmāvaśeṣāṅgāḥ kapāloddhṛtapāṇayaḥ / alabdhagrāsamarddhārdhaṃ niryayur nagarādbahiḥ

हिन्दी अर्थ

युगपत्सबेदेवीहि दिदृक्षुर्नाक्ववीधुतः । पण्पुखान्यसृजच्छीमांस्तासां प्रीत्या महायुतिः श्रीक्षानकमलपत्राक्षस्त रुगादित्यसंनिभः । ग्रेन जातेन लोकानामाक्षेपस्तेजसा कृत: .- : ४९ तेन जातेन महता देवाना मसहिष्णव: । स्कन्दिता दानवगणास्तस्मात्स्कर्दः श्रतायवान् ४२ कृत्तिकाभिस्तु यप्मात्स वधितः स पुरातन:। कारतिकेय इति ख्यातस्तस्मादसुरसुदन

English

Those sons of Angiras, nourished along with Sadhyas, are remembered as the Pitrs Upahutas. They shine in heaven. Looking up to them, the Pitr Groups of Ksatriyas, those who are desirous of benefits, revere them.

अध्याय १३३

श्लोक 36

शापं दत्त्वा तदा क्रोधाद् ब्राह्मणाय युधिष्ठिर ।दरिद्राः सततं मूर्खा भवेयुश्च ययुर्गृहान्

śāpaṃ dattvā tadā krodhād brāhmaṇāya yudhiṣṭhira / daridrāḥ satataṃ mūrkhā bhaveyuśca yayurgṛhān

हिन्दी अर्थ

क्रोडार्थ चेय स्कन्दस्थ विज्णुना प्रमविष्णुना । गरडादति छृष्टो हिं पल्षिणों हिं प्रभद्रक्ो (६४५

English

Their mental daughter is well known by the name of Yaioda. She was the wife of Visvamahan and the daughter-in- law of Visvasarmin.

अध्याय १३३

श्लोक 37

तदाप्रभृति ते सर्वे ब्राह्मणा धनवर्जिताः ।शापदोषेण कौबेर्यां संजाता दुःखभाजनाः

tadāprabhṛti te sarve brāhmaṇā dhanavarjitāḥ / śāpadoṣeṇa kauberyāṃ saṃjātā duḥkhabhājanāḥ

हिन्दी अर्थ

॒.. .॒. ७ हट ० उ्औन्‍्ीनननिपापापपपप पप।प।ख।ख।य//ः अग्नि सम्भव कुमार की उपासना करने लगे । उस परम तेजस्वी कुमार ने अपने अनृपम प्रभाव से ही दंत्यों दानवों तथा राक्षसों को हतप्रभ कर दिया ३५०३७। अभिषेक के लिए आई हुई सप्ताषियों की स्त्रियों में से अरुन्धती को छोड़कर सब ने सर्वप्रथम ही उस अग्निसम्भव कुमार का दश्शन किया । रुद्र के उस महान् तेजस्वी परम ऐश्वयंशाली, बालसूर्थ के समान कान्तिमान् पुत्र को उन ऋषि पत्नियों ने चारों ओर से घेर लिया, और

English

The gentle lady was the mother of the saintly king Khatvanga of noble soul, in whose Yajna Gatha (a laudatory verse) was sung formerly by great sages.

अध्याय १३३

श्लोक 38

न धनं पैतृकं पुत्रैर्न पिता पुत्रपौत्रिकम् ।भुञ्जते सकलं कालमित्येवं शङ्करो ऽब्रवीत्

na dhanaṃ paitṛkaṃ putrairna pitā putrapautrikam / bhuñjate sakalaṃ kālamityevaṃ śaṅkaro 'bravīt

हिन्दी अर्थ

अपनी माता के समान परम स्नेह युक्त नेत्रों से देखने लगीं उन सबों को श्रसन्न करने के लिए तथा एक ही साथ सव को देखने की इच्छा से जाह्नवी सुत ने छः मुखों की सृष्टि करली और उस समय उनकी महान् शोभा हुई । कमलनयन, मध्याक्न के सूर्य के समान कान्तिशाली, श्रीमानू अग्निश्रम्भव ने समस्त लोकों को अपने तेज से तेजोविहीत कर दिया । उस महान्तेजस्वी के जन्म लेते ही देवताओं को श्री सम्पत्ति को न सहन करनेवाले

English

After seeing the birth of fire (in the Yajna) of the noble-souled Sanqlilya, the deathless Devas conquering heaven with purity of mind observe the Yajamana (under whose auspices the Yajna is performed) Dilipa, the noble soul of truthful rites.

अध्याय १३३

श्लोक 39

कुबेरेशो नरः स्नात्वा यस्तु पूजयते शिवम् ।गन्धधूपनमस्कारैः सो ऽश्वमेधफलं लभेत्

kubereśo naraḥ snātvā yastu pūjayate śivam / gandhadhūpanamaskāraiḥ so 'śvamedhaphalaṃ labhet

हिन्दी अर्थ

दानवगण स्कन्दित (व्यथित) हो गयें अत: उस प्रताप दाली की स्कन्द नाम से प्रसिद्ध हुई ।३८-४२। अधुरों का विनाशक वह पुरातन पुरष यतः छृत्तिकाओं द्वारा पुष्ठ हुआ था अतः कारतिकेय नाम से उसकी प्रसिद्धि हुई । उस हैत्य विनाशक के जम्भआई लेते समय मुख अग्नि की ज्वालाओं को माला से पूर्ण हो गया ओर उससे उसकी अपराजिता नामक शक्ति बाहर हुई ।४३-४४। महान् प्रभावशाली भगवान् विष्णु ने स्कन्द को क्रीड़ा के लिए गरुड़ से भी अतिशय बलशाली तथा प्रभावशाली दो प्रभद्रक नामक मदर और कुक्कुट पक्षियों

English

Ajyapaswere the Pitrs of Kardama, the Prajapati, who was born of Pulaha. They were born of him again.

अध्याय १३३

श्लोक 40

यमतीर्थे तु यः स्नात्वा सम्पश्यति यमेश्वरम् ।सर्वपापैः प्रमुच्येत सप्तजन्मान्तरार्जितैः

yamatīrthe tu yaḥ snātvā sampaśyati yameśvaram / sarvapāpaiḥ pramucyeta saptajanmāntarārjitaiḥ

हिन्दी अर्थ

लात्राध्यायपरिसमाप्ति: क. ख. घ. छ. पुस्तकेषु । परंतु कथासंमत्याध्यमेव पाठः समीचीन

English

Moving about in the sky, they are stationed in these worlds that go about as they please. Groups of Vaisyas who are desirous of benefits, revere these in Sraddha.

अध्याय १३३

श्लोक 41

पूर्णमास्याम् अमावास्यां स्नात्वा तु पितृतर्पणम् ।यः करोति तिलैः स्नानं तस्य पुण्यफलं शृणु

pūrṇamāsyām amāvāsyāṃ snātvā tu pitṛtarpaṇam / yaḥ karoti tilaiḥ snānaṃ tasya puṇyaphalaṃ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

६९६ वायुपु्राणस् मयूरः कुक्कुटश्चेच पताका चेव वायुना। यस्य दत्ता सरस्वत्या महावीणा महास्वना ॥।

English

Their mental daughter is famous by the name of Viraja. The chaste lady was the wife of Nahusa and the mother of Yayati.

अध्याय १३३

श्लोक 42

सुतृप्तास्तेन तोयेन पितरश्च पितामहाः ।स्वर्गस्था द्वादशाब्दानि क्रीडन्ति प्रपितामहाः

sutṛptāstena toyena pitaraśca pitāmahāḥ / svargasthā dvādaśābdāni krīḍanti prapitāmahāḥ

हिन्दी अर्थ

मायाविहरणे विप्रा गिरो कौड्चे नियातिते । तारके चासुरवरे समुदीर्णं निपातिते

English

This is the translation of *Datlasend Kumareria.* The absurdity of the text is obvious. 3d. P. ibid V. 87 reads Dattd Sanatkumareria 'She was given by Sanatkumara*. The reading in Bd. P. deserves adoption here as the next line reads "She became the beloved...of Sukra".

अध्याय १३३

श्लोक 43

वरुणेशे नरः स्नात्वा ह्यर्चयित्वा महेश्वरम् ।वाजपेयस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोति पुष्कलम्

varuṇeśe naraḥ snātvā hyarcayitvā maheśvaram / vājapeyasya yajñasya phalaṃ prāpnoti puṣkalam

हिन्दी अर्थ

सेर्द्रोपेन्द्रेम हाभागेदवरग्निसुतः प्रभुः। सेनापत्येन देत्यारिरभिषिक्तः प्रतापवान् ४८ देवसेनापतिस्त्वेब॑ पठचते नरनायक । देवारिस्कन्दनः स्कल्दः सर्वलोकेश्वर: प्रभु. ४६ इति श्रीमहाप्राणे वायुप्रोक्ते सेनान्युत्पत्तिकथनं नाम द्विसप्ततितमोअध्यायः ।

English

The combined verses can be constructed as follows: Sukalas are the Pitrs of Vasistha, the Prajapati. They are the sons of Hiranyagarbha.

अध्याय १३३

श्लोक 44

मृतां कालेन महता लोके यत्र जलेश्वरः ।स गच्छेत् तत्र यानेन गीयमानो ऽप्सरोगणैः

mṛtāṃ kālena mahatā loke yatra jaleśvaraḥ / sa gacchet tatra yānena gīyamāno 'psarogaṇaiḥ

हिन्दी अर्थ

की सृष्टि की बायु ने पताका दी, सरस्वती ने उसे महान् शब्द करनेवाली एक बहुत बड़ी वीणा अपित की, स्वयः्भ् ब्रह्मा ने एक अज बिकरा) दिया, शंकर ने एक मेढ़ा दिया । द्विजवल्द ! क्रौज्वगमिरि पर असुरश्रेष्ठ तारकासुर की समस्त माया का उन्मूलनकर अग्नि कुमार ने जब उसका समस्त सेना के साथ संहार कर दिया, उस समय महाभाग्यशाली, इन्द्र, उपेन्द्र (विष्णु) प्रभूति देवताओं ने द॑त्यों के इस प्रबल प्रतापी शत्रु

English

There are the worlds named Manasas where these are stationed. Their mental daughter is Narmada, the most excellent of rivers.

अध्याय १३३

श्लोक 45

वातेश्वरे नरः स्नात्वा सम्पूज्य च महेश्वरम् ।जायते कृतकृत्यो ऽसौ लोकपालानवेक्षयन्

vāteśvare naraḥ snātvā sampūjya ca maheśvaram / jāyate kṛtakṛtyo 'sau lokapālānavekṣayan

हिन्दी अर्थ

को सेनापति के पद तर अभिषिक्त किया । ओर उसे समय विविध देवताओं, भूतों शिव के गणों, मातृकाओं तथा विनायकों के समूहों ने इसका नरनायक, देव सेनापति, देवारिस्कन्दन (देवताओं के शत्रु को व्यथित करने वाला) स्कल्द, स्वलोकेदवर एबं प्रभ आदि नामों से स्तवन किया लोकाः सोमपदा नाम मारीचेयंत्र वे सुता:। पितरो दिवि वर्तन्ते देवास्तान्भावयन्ति वे ३१ अग्निष्वात्ता इति ख्याता: सर्व एवामितौजसः । एतेषां मानसो कन्या अच्छीदा नाम निम्नगा

English

Flowing in the southern region, she sanctifies living beings. She was tiie wife of Purukutsa and the mother of Trasadasyu. Manu became the lord of Manvantara by adopting these (Pitrs). In the beginning of Manvantara, he initiates all types of Sraddhas.

अध्याय १३३

श्लोक 46

किं तस्य बहुभिर्यज्ञैर्दानैर्वा बहुदक्षिणैः ।स्नात्वा चतुष्टये लोके अवाप्तं जन्मनः फलम्

kiṃ tasya bahubhiryajñairdānairvā bahudakṣiṇaiḥ / snātvā catuṣṭaye loke avāptaṃ janmanaḥ phalam

हिन्दी अर्थ

अच्छोद॑ नाम तहिव्यं सरो यस्या: समुच्छितम् । अद्विकाप्सरसा युक्‍तं विमानधिषिठितं दिवि रे

English

O excellent Brahmanas, (I have recounted), all the Pitrs in their proper order. Hence Sraddha is to be* offered with faith in accordance with one's Dharma.

अध्याय १३३

श्लोक 47

ते धन्यास्ते महात्मानस् तेषां जन्म सुजीवितम् ।नित्यं वसन्ति कौरिल्यां लोकपालान्निमन्त्र्य ये

te dhanyāste mahātmānas teṣāṃ janma sujīvitam / nityaṃ vasanti kaurilyāṃ lokapālānnimantrya ye

हिन्दी अर्थ

सा तेन व्यभिचारेण मनसः कामचारिणी पतिकामा तदा सा च योगश्रष्टा पपात ह कि यणथी-- ्--- न तप +++ व भ"तथि:ं ी ंक्‍ॉक्‍क्‍हा+-न आह... ---.3ल्‍कर७»+ ७७-३० ...ललल६लुलॉैंकऋऋएए(' ५... कन-क+.. 4/977एश"/शश"शखशशणशणशणशशणणणणाणज तन

English

A Sraddha offered in silver vessels or those of silver alloy, after proferring Svadha, propitiates Pitrs. By the propitiation of Soma, Agni and Vaivasvata (Manu) and by the performance of Homo, in the sacrificial fire during the northern transit (of the sun), one shall attain the fruit of an Asvamcdha (a Horse Sacrifice).

अध्याय १३३

श्लोक 48

एतत्पुण्यं पापहरं धन्यमायुर्विवर्धनम् ।पठतां शृण्वतां चैव सर्वपापक्षयो भवेत्

etatpuṇyaṃ pāpaharaṃ dhanyamāyurvivardhanam / paṭhatāṃ śṛṇvatāṃ caiva sarvapāpakṣayo bhavet

हिन्दी अर्थ

चृहस्पति बोल्ते-- स्वर्ग में सोमपद नामक लोक है, जहाँ मरीचि के पुत्र पितर गण वर्तमान

English

Pitrs delight him who propitiates Pitrs with devo¬ tion. There is no doubt in this that Pitrs bestow nourish¬ ment or progeny.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 133
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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