Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
153
अध्याय 153 / 232

Adhyaya 153

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अध्याय १५३

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे भार्गलेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम द्विपञ्चाशदधिकशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १५३ मार्कण्डेय उवाच: तस्यैवानन्तरं चान्यद्रवितीर्थमनुत्तमम् ।यस्य संदर्शनादेव मुच्यन्ते पातकैर्नराः

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe bhārgaleśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma dvipañcāśadadhikaśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 153 mārkaṇḍeya uvāca: tasyaivānantaraṃ cānyadravitīrthamanuttamam / yasya saṃdarśanādeva mucyante pātakairnarāḥ

हिन्दी अर्थ

मकरे वतंमाने तु ग्रहणे चन्द्रसुर्ययो: । प्रेतपक्षे च चेत्रे च दुर्लभ पिण्डपातनम् ३४ १ अधिमासे जन्मदिने चास्ते च॒ गुरुशुक्रयो: । न त्यक्तव्यं गयाश्राद्ध सिहस्थे च ब्ृहस्पतों ॥ द गयायां सर्वकालेषु पिण्ड दद्याद्विचक्षणः) ४२

English

A person desirous of children should perform a Sraddha under Rohini.By performing a Sraddhaundcr theSaumya (Mrga-

अध्याय १५३

श्लोक 2

रवितीर्थे तु यः स्नात्वा नरः पश्यति भास्करम् ।तस्य यत्फलमुद्दिष्टं स्वयं देवेन तच्छृणु

ravitīrthe tu yaḥ snātvā naraḥ paśyati bhāskaram / tasya yatphalamuddiṣṭaṃ svayaṃ devena tacchṛṇu

हिन्दी अर्थ

गोत्र में उत्पन्न होने वाले जो हों, उनके लिए भी यही विधान है। पुत्रों, कन्‍्याओं एबं इष्टमित्रों सब के लिए सावधान होकर बुडद्धिमान् पुरुष को प्रयत्नपूवंक पिण्डददान करना चाहिए ।३४-३५। वे सभी पिण्डदाल करने वाले स्व लोक प्राप्त करते हैं ऐसा युता जाता है। ब्रह्म हत्या करने वाले, कृतघ्त एवं महाव पाप कर्म करने वाले, जो लोग हैं वे सब भी गया में पिण्डदान करने से निस्तार पा जाते हैं। ब्रह्म हत्या करने

English

This chapter is incorporated from Mbh. AnuSasana 89.

अध्याय १५३

श्लोक 3

नान्धो न मूको बधिरः कुले भवति कश्चन ।कुरूपः कुनखी वापि तस्य जन्मानि षोडश

nāndho na mūko badhiraḥ kule bhavati kaścana / kurūpaḥ kunakhī vāpi tasya janmāni ṣoḍaśa

हिन्दी अर्थ

वाले, मदिरा पान करने वाले, बालक, वृद्ध एवं गुरु से द्वोह करने वाले, इन सबों के भी पाप नष्ट हो जाते हैं, यदि वे गया की यात्रा करे । जिसका नाम लेकर पिण्डदान किया जाता है, वह शाइवत ब्रह्म पद की प्राप्ति करता है ।३६०३२०। तीनों लोफों में गया के समान दुलंभ तीथ कोई नहीं है। उप्तके प्रभाव से नरक में रहने वाले स्वर्ग जाते हैं और स्वर्ग” में रहने वाल्ले मोक्ष को प्राप्त करते हैं ।३६। मनुष्य अपने मन में यह शुभ कल्पना करते रहते हैं कि हमारे कुल में भी ऐसे सम्मार्गगामी पुत्र उत्पन्न होंगे, जो गया की मात्रा कर आदरपुवंक हमें पिण्डदान करेंगे!। मकर राशि में सूर्य के होने पर, चर्द्ग्रहूण और सूरयंप्रहण के अवसर पर, पितृपक्ष में, और चंत्र मास में पिण्डदान दुले भ है, अर्थात् इन अवसरों पर गया में पिण्डदान का महान् फल है। अधिक मास में, जन्मदिन में, गुद ओर शुक्र के अस्त होने पर; पिंह राह्षि में बृहस्पति के आने पर

English

Vi§nu Dh.S. (78.8-15) mentions the rewards obtained by performing iriddha under different constellations from Krttika to Bhararu. Yajnavalkya I. 265-268, MK. 8-16, BM. 33-42, KP.II. 20.9-15, Bd.P..2.3.18 deal with the same topic though there is some disagreement about the benefits promised.

अध्याय १५३

श्लोक 4

दद्रुचित्रककुष्ठानि मण्डलानि विचर्चिका ।नश्यन्ति देवभक्तस्य षण्मासान्नात्र संशयः

dadrucitrakakuṣṭhāni maṇḍalāni vicarcikā / naśyanti devabhaktasya ṣaṇmāsānnātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

गया का श्राद्ध न छोड़ना चाहिए। बुद्धिमान लोग तो सर्वदा गया में पिण्डदान करते हैं ।४०-४२॥ है पुत्र गया तो में पितरों की निधनतिथि के अवसर पर श्राद्ध का अक्षय फल होता है, जप, हवन एवं तप का भी अक्षयफल कहा जाता है। गोरी पत्नी में समुत्पन्ष पुत्र इक्‍्कीस पीढ़ी को पवित्र करता है। इसके

English

One performing a Sraddha under the Punarvasu conste¬ llation becomes the possessor of fields and begets sons. He will be blessed with wealth and food-grains as well as sons and grand¬ sons. A man who desires satisfaction and contentment should perform Sraddha under Pusya constellation. One shall attain heroic sons by worshipping Pitfs under Aglesa.

अध्याय १५३

श्लोक 5

चरितं तस्य देवस्य पुराणे यच्छ्रुतं मया ।न तत्कथयितुं शक्यं संक्षेपेण नृपोत्तम

caritaṃ tasya devasya purāṇe yacchrutaṃ mayā / na tatkathayituṃ śakyaṃ saṃkṣepeṇa nṛpottama

हिन्दी अर्थ

धनुश्चिन्नास्तगंतग्रन्थः ख. पुस्तके नास्ति ।. पुनीयादेकाविशं तु गौर्यामुत्पादितः सुत: । माताहांस्तु षड्भुय इति तस्य फल स्मृतम् ४४

English

He who performs a Sraddha under Magha becomes the most excellent among his kinsmen. A man worshipping Pitrs in the (Purva) Phalgunl constellation attains good fortune.

अध्याय १५३

श्लोक 6

तत्र तीर्थे तु यद्दानं रविमुद्दिश्य दीयते ।विधिना पात्रविप्राय तस्यान्तो नास्ति कर्हिचित्

tatra tīrthe tu yaddānaṃ ravimuddiśya dīyate / vidhinā pātraviprāya tasyānto nāsti karhicit

हिन्दी अर्थ

( » सहन्ननल्वमात्रेण तडाकेन यथा श्रुति: । तृप्तिस्तृप्ति: पितृणां वे सद्वृषस्थाधिकोच्यते ४६ यो ददाति गुडेमिश्रांस्तिलास्वे श्राद्धकर्म णि । मधुना मधुभिश्षान्वा अक्षय सबबंसेब तत् ५०

English

He who performs a Srdddha under Uttaraphalguni

अध्याय १५३

श्लोक 7

अयने विषुवे चैव चन्द्रसूर्यग्रहे तथा ।रवितीर्थे प्रदत्तानां दानानां फलमुत्तमम्

ayane viṣuve caiva candrasūryagrahe tathā / ravitīrthe pradattānāṃ dānānāṃ phalamuttamam

हिन्दी अर्थ

न ब्राह्मणासपरीक्षेत सदा देये तु मानवः । देवे कर्णि पिश्ये च भ्रूयते व परीक्षणस् ॥५ १ सर्ववेदब्रतस्नाता: पदक्तीनां पावता द्विजा:। ये च भाष्यविदो मुख्या ये च॒ व्याकरण रताः अधोयते पुराण च धमंशास्त्रं तथेब च । त्रिणाचिकेतपआग्निस्त्रिसुपर्ण: षडज़बित्

English

He who performs a Sraddha in the Citra constel¬ lation sees (has) handsome sons. He who performs a Sraddha

अध्याय १५३

श्लोक 8

संक्रान्तौ यानि दानानि हव्यकव्यानि भारत ।अपामिव समुद्रस्य तेषामन्तो न लभ्यते

saṃkrāntau yāni dānāni havyakavyāni bhārata / apāmiva samudrasya teṣāmanto na labhyate

हिन्दी अर्थ

अतिरिक्त मामा के परिवार में छः को पत्िित्र करता है-- ऐसा फल कहा गया दवै ।४३-४४ अब वध का फल बतला रहा हूँ, सुनिये । वषौत्सगं करने वाला दस पूर्वजों और दस बाद में उत्पन्न होने वाले पुरुषों को पवित्र करता है। जल से तेर कर पृथ्वी पर आने वाले बुष की पूछ से गिरने वाले जल बिन्दुओं द्वारा वृषोत्सग कर्म में जो वस्तुएं स्पर्श की जाती हैं, वे पितरों के लिए अक्षयफलदायिनी कही जाती हैं

English

A man wishing for sons shall perform a Sraddha in the Visakha constellation. He who performs a Srdddha in the Anu- radha constellation extends his realm.

अध्याय १५३

श्लोक 9

येन येन यदा दत्तं येन येन यदा हुतम् ।तस्य तस्य तदा काले सविता प्रतिदायकः

yena yena yadā dattaṃ yena yena yadā hutam / tasya tasya tadā kāle savitā pratidāyakaḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार अन्त तक वृष के लॉगूल आदि से गिरने वाले जल द्वारा जो-जो वस्तुएं स्पश्ठ की जाती हैं, वे सब पितरों को अक्षय तृप्ति प्रदान करने वाली हैं--इसमें सम्देह नहीं। वह वृष अपने सींगों तथा खूरों से जो भूमि खोदता है, वह भूमि क्रक्षय मधु की नहर के रूप में उसके :दाता के) पितरों को प्राप्त होती है । एक सहस्न॒नल्व (एक नलव बराबर चार सो हाथ के) में विस्तृत तड़ाग के खनाने से पितरों की जो तृप्ति सुनी जाती है, उसस्ले अधिक तृप्ति वषोत्सगं से होती है। गुड़मित्रित तिलों, मधु मिश्रित तिलों से अथवा मधु से जो श्राउ्धकर्म किया जाता हैं, वह सब अक्षय फलदायी होता है

English

He who performs a Srdddha under the Jyestha constella¬ tion attains lordship and excellence for ever. Those who desire health shall perform a Srdddha under the Mula constellation. Those who desire great fame should perform a Srdddha under Purvasadha.

अध्याय १५३

श्लोक 10

सप्त जन्मानि तान्येव ददात्यर्कः पुनः पुनः ।शतमिन्दुक्षये दानं सहस्रं तु दिनक्षये

sapta janmāni tānyeva dadātyarkaḥ punaḥ punaḥ / śatamindukṣaye dānaṃ sahasraṃ tu dinakṣaye

हिन्दी अर्थ

बहस्पति ने कहा--मनुष्य को चाहिए कि वह सबंदा दान कम में ब्राह्मणों की परीक्षा न करे देव कम में तथा पितरों के कम में ब्राह्मणों की परीक्षा सुनी जाती है ।५१॥ सभी समस्त वेदों के ब्रती अर्थात् वेदास्यास परायण, वेदों के पारगामी, पंक्तिपावन, भाष्य के जानते वाले, मुख्यत्र: व्याकरण वेत्ता, पुराणों ओर धर्मशास्त्रों के अध्ययन में निरत रहने वाले, नचिकेता की तीनों विद्याओं के बध्येता, पंचार्नि के

English

A man performing a Srdddha under the Uttarasadha con¬ stellation shall be free from grief. By performing a Srdddha under the Sravana constellation, one shall attain the greatest goal in excellent worlds.

अध्याय १५३

श्लोक 11

संक्रान्तौ शतसाहस्रं व्यतीपाते त्वनन्तकम्

saṃkrāntau śatasāhasraṃ vyatīpāte tvanantakam

हिन्दी अर्थ

» धनुध्चित्वास्तगंतग्रन्थो घ. पुस्तके नास्ति । ७४४ बायुपुराणवें

English

A man who performs a Srdddha under the Dhanistha constellation gains a kingdom and attains enormous wealth. By performing a Srdddha under the Abhijit constellation, (he) ob¬ tains goats and sheep as fruit.

अध्याय १५३

श्लोक 12

युधिष्ठिर उवाच: रवितीर्थं कथं तात पुण्यात्पुण्यतरं स्मृतम् ।विस्तरेण ममाख्याहि श्रवणौ मम लम्पटौ

yudhiṣṭhira uvāca: ravitīrthaṃ kathaṃ tāta puṇyātpuṇyataraṃ smṛtam / vistareṇa mamākhyāhi śravaṇau mama lampaṭau

हिन्दी अर्थ

मुख्येषु येषु सन्नेषु भवन्त्यवभूथप्लुता: । ये व सद्योव्षता नित्यं स्वकर्मनिरताश्च ये ॥

English

He who performs a Srdddha in the Satabhisak constel¬ lation attains success as a great physician. He who performs a. Srdddha in the Purva-Bhadrapada (Prosthapada) constellation attains goats and sheep as the fruit.

अध्याय १५३

श्लोक 13

श्रीमार्कण्डेय उवाच: शृणुष्वावहितो भूत्वा ह्यादित्येश्वरमुत्तमम् ।उत्तरे नर्मदाकूले सर्वव्याधिविनाशनम्

śrīmārkaṇḍeya uvāca: śṛṇuṣvāvahito bhūtvā hyādityeśvaramuttamam / uttare narmadākūle sarvavyādhivināśanam

हिन्दी अर्थ

+ये चापि नित्यं दशसु सुकृतेषु व्यवस्थिता: । स्वकर्मनिरता नित्य ताउश्राद्धेषु निमन्त्रयेत् एतेषु दत्तमक्षय्यमेते वे पश्क्तिपावना:। श्रद्धया ब्राह्मणा ये तु योगधर्म मनुब्नताः ५७ धर्मा श्रमवरिष्ठास्ते हृव्यकब्येषु ते बराः । त्रयो5पि पूजितास्तेन ब्रह्मविष्ण महेश्व रा: ३५८ पितृनिः सह लोकाश्र यो होतान्पूजयेश्वर: । पवित्नाणां पवित्र च मद्भालानां व मद्भलम् ह

English

He who performs a Sraddha unfailingly under Uttara Bhadrapada shall obtain thousands of cows. He who per¬ forms a Sraddha under the Revatl constellation gets much wealth. By performing a Sraddha under the Asvini constellation one at¬ tains horses. He who performs a Sraddha in the BharanI constel¬ lation attains long life.

अध्याय १५३

श्लोक 14

पुरा कृतयुगस्यादौ जाबालिर्ब्राह्मणो ऽभवत् ।वसिष्ठान्वयसम्भूतो वेदशास्त्रार्थपारगः

purā kṛtayugasyādau jābālirbrāhmaṇo 'bhavat / vasiṣṭhānvayasambhūto vedaśāstrārthapāragaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रथम: सर्वधधर्माणां योगधर्मो निगद्यते। अपाइक्तेयांस्तु बक्ष्यासि गदतों मे निबोधत १६० कितबो मद्यपो यक्ष्मी पशुपालो निराक्ृति:। पग्रामप्रेष्यों वार्धषिको गायनो वणिजस्तथा ॥६ १ अगारदाही गरदः कुण्डाशी सोमबिक्रयी । समुद्रयायी दुश्चर्मा तैलिक: कृटकारकः

English

By performing a Sraddha according to these injunctions SaSabindu attained the entire earth. After attaining the entire earth he praised him (Yaraa).

अध्याय १५३

श्लोक 15

पतिव्रता साधुशीला तस्य भार्या मनस्विनी ।ऋतुकाले तु सा गत्वा भर्तारम् इदम् अब्रवीत्

pativratā sādhuśīlā tasya bhāryā manasvinī / ṛtukāle tu sā gatvā bhartāram idam abravīt

हिन्दी अर्थ

उपासक वेदों के छहों अंगों के जानने वाले, त्रियुपर्ण, ब्रह्मज्ञानियों का पुत्र, छत्दोग, ज्येष्ठसाम को जानने वाले, जितने भी पुण्य तीथे हैं, उनमें ब्रतोपरास्त अभिषेक करने वाले, मुख्य-मुख्य यज्ञों में अवभृथ स्नान करने वाले, शीक्ष ही किसी ब्रत से निवत्त होने वाले, अपने-अपने कर्मों में निरत रहने वाले, क्रोधरहित, तथा शान्तिपरायण जो ब्राह्मण हों उन्हें श्राद्ध में निमन्त्रित करना चाहिए ।१३-५४। जो सवंदा दसों शुभ कर्मों में व्यवस्थित रहकर जीवन यापन करने वाले हैं तथा अपने कर्मों में निरत रहते हैं, उन्हें श्राद्ध में निमन्त्रित करना चाहिए ।५६। इन सत्पात्नों में दिया गया दान अक्षय फलदायी होता है--ये उपर्युक्त ब्राह्मण पंक्तिपावन हैं । जो योगधमं में अनुरक्ति एवं श्रद्धां रखने वाले ब्राह्मण हैं, वे वर्णाश्रम धर्म की मर्यादा मानने वाली सभी जातियों में श्रेष्ठ हैं, ओर हृब्य कव्य--सभी कार्यों में श्रेष्ठ हैं। जिसने ऐसे ब्राह्मणों की पूजा की, उसने

English

O foremost one among the eloquents, what is it that offered to the Pitj-s, delights them to a little extent? What deli¬ ghts (them) for a long time? What is it that is conducive to delight them infinitely 7 1

अध्याय १५३

श्लोक 16

वर्तते ऋतुकालो मे भर्तारं त्वामुपस्थिता ।भज मां प्रीतिसंयुक्तः पुत्रकामां तु कामिनीम्

vartate ṛtukālo me bhartāraṃ tvāmupasthitā / bhaja māṃ prītisaṃyuktaḥ putrakāmāṃ tu kāminīm

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मा, विष्णु, महेश--तीनों देवताओं की पूजा की जो मनुष्य ऐसे सवंगुण सम्पन्न ब्राह्मणों की पूजा करता है, वह पितरों के साथ समस्त लोकों की पूजा करता है। योगधर्म सभी पवित्र पदार्थों से अधिक पवित्र एवं सभी मंगलदायी वस्तुओं से अधिक मंगलदायी हैं। सभी धर्मों में वह प्रथम कहा गया है। अब इसके उपरान्त जो अप॑क्तिपावन ब्राह्मण हैं, उन्हें मैं बतला रहा हैं, सुनिये ।६७-६०। धत्तं, शराबी, यक्ष्मारोग ग्रस्त, पशुओं

English

The first topic discussed is about the vegetarian and non-vegetarian dishes liked by Pitxs and therefore should be served to Brahmanas while dining at a Sraddha (vide w. 3-9).

अध्याय १५३

श्लोक 17

एवमुक्तो द्विजः प्राह प्रिये ऽद्याहं व्रतान्वितः ।गच्छेदानीं वरारोहे दास्य ऋत्वन्तरे पुनः

evamukto dvijaḥ prāha priye 'dyāhaṃ vratānvitaḥ / gacchedānīṃ varārohe dāsya ṛtvantare punaḥ

हिन्दी अर्थ

को पालना करने वाला, कुरूप, ग्राम में दृत या सेवक का काम करने वाला, व्याज से जीविका चलाने वाला, गायक, व्यवसा ), किसी का स्थान जलाने वाला, विष देने वाला, छिनाले से उत्पन्न होने बालों का अन्न लाने वाला, सोमरस का विक्रय करने वाला, समुद्र यात्रा करने बाला, दुष्ट चमड़े बाला, तेल का व्यवसायी, इृदमर्ध नास्ति क. पुस्तके ।

English

Listen to those sacrificial offerings which are to be made at the time of Sraddha as the knowers of Sraddha have under¬ stood. Listen also to the benefit of these in accordance with their strength.

अध्याय १५३

श्लोक 18

पुनर्द्वितीये सम्प्राप्ते ऋतुकाले ऽप्युपस्थिता ।पुनः सा छन्दिता तेन व्रतस्थो ऽद्येति भारत

punardvitīye samprāpte ṛtukāle 'pyupasthitā / punaḥ sā chanditā tena vratastho 'dyeti bhārata

हिन्दी अर्थ

पिन्ना विवदमानशभ्र यस्य चोपपतिग है । अभिशस्तस्तथा स्तेनः शिल्पयंश्रोपजीबति

English

Grandfathers are pleased for a month by a Sraddha in which gingelly seeds, grains of rice, barley, black gram, water, fruits and roots are offered.

अध्याय १५३

श्लोक 19

इत्थं वा बहुशस्तेन छन्दिता च पुनः पुनः ।निराशा चाभवत्तत्र भर्तारं प्रति भामिनी

itthaṃ vā bahuśastena chanditā ca punaḥ punaḥ / nirāśā cābhavattatra bhartāraṃ prati bhāminī

हिन्दी अर्थ

सूचकः पर्वकारी च यस्तु मित्रेषु दुह्मति । गणयाचलकश्ेव नाह्तिको बेदवर्जितः . द्द४ बिक्रीणाति च यो ब्रह्म ब्रतानि च तपांसि च। नष्ट स्यान्नास्तिके दत्त कृतध्ने चेब शंसके ६६ यच्च वाणिजके चेब नेह नामुत्र तजूबेत् निक्षेपहारिणे चव कितवे बेदनिन्दके ३६७ तथा वाणिजके चेब कारुके धर्मर्वाजते । निनदर्क्रीणाति पण्यानि विक्रीणंश्र प्रशंसति ६८

English

They are pleased for two months if fishes are offered; for three months if venison is offered; for four months if the meat of hare is offered; and forfive months if the meat of birds is offered.

अध्याय १५३

श्लोक 20

दुःखेन महताविष्टा विधायानशनं मृता ।तेन भ्रूणहतेनैव पापेन सहसा द्विजः

duḥkhena mahatāviṣṭā vidhāyānaśanaṃ mṛtā / tena bhrūṇahatenaiva pāpena sahasā dvijaḥ

हिन्दी अर्थ

घष्टि काण: शर्त पण्ड: श्वित्री यावत्प्रपश्यति । पापरोगी सहस्नस्य दातुर्नाशयते फलम् ११७०

English

They are delighted for six months with the flesh of boars, for seven months with goats' flesh and for eight months with the flesh of a spotted doe.

अध्याय १५३

श्लोक 21

शीर्णघ्राणाङ्घ्रिरभवत्तपः सर्वं ननाश च ।दृष्ट्वात्मानं स कुष्ठेन व्याप्तं ब्राह्मणसत्तमः

śīrṇaghrāṇāṅghrirabhavattapaḥ sarvaṃ nanāśa ca / dṛṣṭvātmānaṃ sa kuṣṭhena vyāptaṃ brāhmaṇasattamaḥ

हिन्दी अर्थ

करना पल काना "न "कमान लगना ५ ना डा ननाक कल दा का ध विननानण परम भानप क7//ककनकनन काफी एई हर ता या कूटनीतिज्ञ, पिता के साथ विवाद करने बाला, जिसके घर में कोई दूसरा गृहस्वामी हो, लम्पठ, चोर, शिल्पजीवी, चुगुलखोर, धन के लोभ से विना पर्व के ही अमावास्या आदि पर्बो के दित सम्पन्त होने वाली सत्क्रियाओं का अनुष्ठान करने वाला, मित्रों के साथ द्रोह करने बाला, समूह बनाकर यावना करने वाला, नास्तिक, वेदविहीन, उन्मत्त, हिजड़ा, दुष्ट प्रकृति वाला, गर्भ हत्या करने वाला, गुरु की शब्या पर शयन

English

The manes are delighted for nine months with the meat of the Ruru deer. They will have contentment lasting for ten months with the meat of Gauaya (a kind of ox).

अध्याय १५३

श्लोक 22

विषादं परमं गत्वा नर्मदातटमाश्रितः ।अपृच्छद्भास्करं तीर्थं द्विजेभ्यो द्विजसत्तमः

viṣādaṃ paramaṃ gatvā narmadātaṭamāśritaḥ / apṛcchadbhāskaraṃ tīrthaṃ dvijebhyo dvijasattamaḥ

हिन्दी अर्थ

करने वाला, बैचक से जीविका चलाने वाला, दूत का कर्म करने बाला, परस्त्रीगामी, जो ब्रह्म, (विद्या) ब्रत एवं तपस्या को बेंचता है, इन सबको दान करने से दान का समस्त फेल नष्ट हो जाता है। इसी प्रकार नास्तिक, कृतप्न, एवं निन्‍दक को दान करने से फल का नाश हो जाता है ।६१-६६। वाणिज्य व्यवसाय में लगे हुए ब्राह्मण को जो कुछ दिया जाता है बह न तो इस लोक में फल देता है न पर लोक में ।

English

They are propitiated for eleven months with the meat of a tortoise. Know that Sraddha with (products of) cow's milk lasts for a year.

अध्याय १५३

श्लोक 23

आरोग्यं भास्करादिच्छेदिति संचिन्त्य चेतसि ।कुतस्तद्भास्करं तीर्थं भो द्विजाः कथ्यतां मम

ārogyaṃ bhāskarādicchediti saṃcintya cetasi / kutastadbhāskaraṃ tīrthaṃ bho dvijāḥ kathyatāṃ mama

हिन्दी अर्थ

दूसरे के रखे हुए निःक्षेप (गिरबी) को ले लेनेवाले धूर्त एवं वेदनिन्दक को दिये गये दान का भी यही फल होता है। वाणिज्य कम में प्रवृत, कारोगर, धर्महीन, एबं ऐसे लोग जो दूसरे की अच्छी वस्तु की खरीदते समय निन्‍दा करते हों और अपनी खराब वस्तु को बेचते समय प्रशंसा करते हों--इस सबों को भी दान देने से यही फल होता है। इसी प्रकार मिथ्या भाषण करनतेवाला वणिक् व्यवसाय में भ्रवृत्त द्विज भी श्राद्ध के योग्य नहीं है। पोनभंव ब्राह्मण को दिया गया दान भस्म (राख) पर दी गई आहुति के समान व्यर्थ है ।६७-६६। काना व्यक्ति साठ, नपुश्तक सो, दवेसकुष्ठ ग्रसित जितने भी कर्मो को देखता है, तथा पाप के कारण रोगी, एक सहसख्र दाता के सत्कर्मों के फलों को नष्ट कर देता है। मूर्ख व्यक्ति को दान करनेवाला

English

So also in the case of milk-pudding along with milk pro¬ ducts, honey and ghee. The satisfaction with the meat of a Vadhririasa (a rhino-like animal?) lasts for twelve years.

अध्याय १५३

श्लोक 24

तपस् तप्याम्यहं गत्वा तस्मिंस्तीर्थे सुभावितः

tapas tapyāmyahaṃ gatvā tasmiṃstīrthe subhāvitaḥ

हिन्दी अर्थ

१९. पति से परित्यक्त अथवा विधवा यदि अपनी इच्छा से पर पुरुष द्वारा पुत्र उत्पन्न करतीं है तो बहू पौनभव कहा जाता है ।

English

With the meat of Khadga (rhinoceros) during the rites of Pitrs, the pleasure is everlasting. So also with the meat of a black goat and an alligator provides endless pleasure.

अध्याय १५३

श्लोक 25

द्विजा ऊचुः ।रेवाया उत्तरे कूले आदित्येश्वरनामतः ।विद्यते भास्करं तीर्थं सर्वव्याधिविनाशनम्

dvijā ūcuḥ / revāyā uttare kūle ādityeśvaranāmataḥ / vidyate bhāskaraṃ tīrthaṃ sarvavyādhivināśanam

हिन्दी अर्थ

७४६. वायुपुराणध् सोपानत्कश्न यो भुदक्ते यच्च दद्यात्तिरस्कृतम् । सर्व तदसुरेन्द्राणां ब्रह्मा भागमकल्पयत् ७२ श्वानश्व यातुधानाश्र नावेक्षेरन्‍्कथंचन । तस्मात्परिवार्ति दर्यात्तिलेश्वान्ववकी रयन् ५७३ राक्षसानां तिला: प्रोक्ता : शुनां परिवृतिस्तथा । दर्शनात्सुकरों हन्ति पक्षपातेन कुबकुटः ७४ न प्रोणाति पितन्देवास्स्वर्ग न च स गच्छति

English

In this connection, those who know the ancient lores mention about the gathas (traditional verses) sung by Pitrs.

अध्याय १५३

श्लोक 26

तत्र याह्यविचारेण गन्तुं चेच्छक्यते त्वया ।एवमुक्तो द्विजैर्विप्रो गन्तुं तत्र प्रचक्रमे

tatra yāhyavicāreṇa gantuṃ cecchakyate tvayā / evamukto dvijairvipro gantuṃ tatra pracakrame

हिन्दी अर्थ

अपसब्ये कृते तेन विधिवद॒र्भपाणिना । पिश्यसानिधन कार्यभेवं प्रीणाति वे पित॒न् ७८

English

(Pitrs sing) "Will a son be bom in our own family who will give us on the Trayodafi (thirteenth) day, cooked food, milk pudding, honey and ghee on the occasion of Gaja- cchaya Parvan P * 1 Or give the same with the meat of a goat that is

अध्याय १५३

श्लोक 27

व्याधिना परिभूतस्तु घोरेण प्राणहारिणा ।यदा गन्तुं न शक्नोति तदा तेन विचिन्तितम्

vyādhinā paribhūtastu ghoreṇa prāṇahāriṇā / yadā gantuṃ na śaknoti tadā tena vicintitam

हिन्दी अर्थ

कननन्‍गनगनाी + "का फिपश गा "शाम एक ता बयान टिकी जज जा करीीत, 5» तन बआ अगला 6 अल“ त शुभकर्म फलों से बंचित हो जाता है। जो शिर को बाँधकर भोजन करता है, जो दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करता है, जो जूता पहिनकर भोजन करता है, जो तिरस्कार पूर्वक दान करता हैं, उनके समस्त कर्मों के फल को भगवान् ब्रह्मा असुरेन्द्रों के लिए कल्पित करते हैं ।७०-७२। श्राद्ध के सम्पन्न होते समय उसे श्वान और यातुधान किसी प्रकार भीन देखने पावें, इसके लिए चारों तरफ से ऑट करने के लिए.

English

The conjunction that occurs when the Moon is in the Magha constel¬ lation, the Sun is in Hasta and the Tithi is the 13th in the rainy season, it is called Gajacchdya or Kunjaracchaya.

अध्याय १५३

श्लोक 28

सामर्थ्यं ब्राह्मणानां हि विद्यते भुवनत्रये ।लिङ्गपातः कृतो विप्रैर्देवदेवस्य शूलिनः

sāmarthyaṃ brāhmaṇānāṃ hi vidyate bhuvanatraye / liṅgapātaḥ kṛto viprairdevadevasya śūlinaḥ

हिन्दी अर्थ

परदा लगा देना चाहिए और चारों ओर तिलों का विकिरण करना चाहिए। राक्षसों को निवारित करने के लिए तिल और कुत्तों को निवारित करने के लिए परदा या दूसरे किसी प्रकार का घेरा बना देने की बात कही जाती है शूकर केवल देख लेने से हो श्राद्ध के फल को नष्ट कर देता है, मुर्गा अपने पंखों के फड़फड़ाने से उसके फल को नष्ट कर देता है, रजस्वला स्त्री के स्पर्श से तथा क्रोध पूवंक दान कर: से क्षाद्ध के फलों

English

O dear one, recount the benefit of the holy centres Gaya etc. to me who ask. Please mention the merit entirely that is derived by performing the rites of Pitrs.

अध्याय १५३

श्लोक 29

समुद्रः शोषितो विप्रैर्विन्ध्यश्चापि निवारितः ।अहमप्यत्र संस्थस्तु ह्यानयिष्यामि भास्करम्

samudraḥ śoṣito viprairvindhyaścāpi nivāritaḥ / ahamapyatra saṃsthastu hyānayiṣyāmi bhāskaram

हिन्दी अर्थ

का विनाश हो जाता है। इसी प्रकार जो व्यक्ति अपने द्वारा किये जाने वाले श्राद्ध के कार्यों को अथवा हवनादि को मित्रों द्वारा सम्पन्त कराता है, उसके कार्य पितरों और देवताओं को सन्तुष्ट नहीं करते और वह स्व्गलोक को नहीं जाता ।७३-७१। सुरम्य नदियों के किनारों पर छोटी-छोटी सरिताओं एवं सरोबरों के मनोहर एकान्स तट पर, किये गये श्राद्धादि कार्य से पितामहगण तृप्त होते हैं ।७६। श्राद्ध करते समय न तो कभी आँसू गिराना चाहिए न किसी साधारण बात-चीत में सम्मिलित होना चाहिए, न भोजन करते हुए ही श्राद्ध करना चाहिए, एक दूसरे के प्रति मत्सर अथवा ईष्यॉभाव भी नहीं प्रकट करना चाहिए

English

O son, a Sraddha performed in Gaya yields endless benefit. Japas, Homas and penances (performed there) 'are also beneficial endlessly. Hence on the anniversary day of the death of father, Sraddha performed there is remembered as everlasting,

अध्याय १५३

श्लोक 30

तपोबलेन महता ह्यादित्येश्वरसंज्ञितम् ।इति निश्चित्य मनसा ह्युग्रे तपसि संस्थितः

tapobalena mahatā hyādityeśvarasaṃjñitam / iti niścitya manasā hyugre tapasi saṃsthitaḥ

हिन्दी अर्थ

भपसव्य होकर विधिपृंक हाथ में कुशा लेकर अपने जीवन पय॑न्त मनुष्य को पितरों का श्राद्ध/दि कार्य सम्पन्त करना चाहिए। इस प्रकार श्राद्ध के करने से पितरगणों की तृप्ति होती है। सर्वप्रथम (गृरुजनों या ब्राह्मणों की) अनुमति प्राप्तकर अग्नि में विधिपूर्वंक आहुति करे। पितरों के उद्देश से दिया जाने वाला पदार्थ पथ्वी पर, सूप पर अथवा कुश के विछावन पर रखना चाहिए ।७८-७९। बुद्धिमान पुरुष शुक्लपक्ष में

English

A son begot after marrying a girl of eight years sanctifies twentyone generations. Moreover, he sanctifies six generations in the family of his maternal uncle. This is remem¬ bered as the benefit (of such a marriage).

अध्याय १५३

श्लोक 31

वायुभक्षो निराहारो ग्रीष्मे पञ्चाग्निमध्यगः ।शिशिरे तोयमध्यस्थो वर्षास्वप्रावृताकृतिः

vāyubhakṣo nirāhāro grīṣme pañcāgnimadhyagaḥ / śiśire toyamadhyastho varṣāsvaprāvṛtākṛtiḥ

हिन्दी अर्थ

एबमेते महात्मानो महायोगा महौजस: । सदा वे पितरः पूज्या द्रष्टारों देशकालयो: ८१ पितृभक्तिरतो नित्य योगं प्राप्नोत्यनुत्तमम् । ध्यानेन मोक्ष गच्छन्ति हित्वा कर्म शुभाशुभभ्ू अमृत गुह्यमुद्भधुत्य योगं योगविदांवर। प्रोक्त सनत्कुमारेण महान्त धर्मशाश्वतम् ८४ देवानां परम गुह्ामृषीणां च परायणम् । पितृभक्त्या प्रयत्नेन पितृभक्तेश्व नित्यशः ८५ त॑ व योगं समासेन पितृभक्तस्तु कृत्स्नशः। प्रयत्नात्पराप्नुयात्तन्न सर्वभेव न संशय: ८६ यस्से भ्राद्धानि देयानि यच्च दत्त महाफलम् । येषु वाधष्प्यक्षयं श्राद्ध तीथेंषु च नदीषु च्॥

English

I shall recount the benefit derived from (discharging) a bull. Even as I recount listen and understand. The discharger of the bull sanctifies ten previous generations and ten succeeding generations.

अध्याय १५३

श्लोक 32

साग्रे वर्षशते पूर्णे रविस्तुष्टो ऽब्रवीद् इदम्

sāgre varṣaśate pūrṇe ravistuṣṭo 'bravīd idam

हिन्दी अर्थ

श्रत्वेवं शाकल्पं तु योधसुर्या कुर्ते नरः। स सज्जेन्न रके घोरे नास्तिकस्तमसाइ्बुतः ८८

English

At the time of letting free the bull whatever is sprinkled with water as it emerges from water on to the ground, is said to yield endless benefit.

अध्याय १५३

श्लोक 33

सूर्य उवाच: वरं वरय भद्रं ते किं ते मनसि वाञ्छितम् ।अदेयमपि दास्यामि ब्रूहि मां त्वं चिरं कृथाः

sūrya uvāca: varaṃ varaya bhadraṃ te kiṃ te manasi vāñchitam / adeyamapi dāsyāmi brūhi māṃ tvaṃ ciraṃ kṛthāḥ

हिन्दी अर्थ

दिन के प्रथमार्थ में श्राद्ध सम्पन्न करे, और कृष्णपक्ष में उनके उत्तराद्धे में करे, रोहिणी! का उल्लंघन नहीं करना चाहिए, देश और काल के देखने वाले, महान् तेजस्वी, महान योगी एवं परम महात्मा उन पितरों की सर्वदा पूजा करनी चाहिए ।5०-८१॥ पितरों में भक्ति रखते बाला मनुष्य सबेदा श्रेष्ठ योग की सिद्धि प्राप्त करता है। पितरों का ध्यान करने से वे अपने शुभाशुभ कर्म बन्धतनों से छुटकारा पाकर मोक्ष की भ्राष्ति करते हैं। महात्मा कश्यप ने जगत् को मोहित करके यज्ञ के लिए जिस योग का उद्घधारकर गुफा में सुरक्षित रखा था, है योग जानने वालों में प्रवीग उस अमरत्व पूर्ण, परमगोपनीय चिरन्तत एवं परम महात् योगधर्म को उद्धत करके सनत्कुमार ने प्रकाशित किया । 5२-८४ उस देवताओं की परमभोपनीय, ऋषियों की सर्वध्व योग सम्पत्ति को पितरों में भक्ति रखने वाले मानव पितरों में भक्ति रखकर नित्य ही प्राप्त करते हैं ।

English

There is no doubt in this that all those things touched by water tossed about by its tail etc., give endless satisfaction to Pitrs.

अध्याय १५३

श्लोक 34

किमसाध्यं हि ते विप्र इदानीं तपसि स्थितः

kimasādhyaṃ hi te vipra idānīṃ tapasi sthitaḥ

हिन्दी अर्थ

संक्षेप में उस योम की प्राप्ति पितृभक्त लोग अपने प्रयत्न से सर्वाशतः प्राप्त कर लेते हैं-- इसमें सन्देह नहीं है। जिसे श्राद्ध देना चाहिए, जिम वस्तु के देते से महान् फल की प्राप्ति होती है, जिन तीर्थों अथवा नदियों में किये गये श्राद्ध का अक्षय फल होता है, जिन तीर्थों में करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है--उन सब को मैं

English

This is called'the rite of letting free a bull* ( Vrsotsarga-vidhi). For the details vide Vifliu Dh. S. 86.1-20. Vimdharmottara 1.147. 1-19 repeat the same procedure. Though the words ' nilam vam' are translated as 'blue bull* the bull is not blue in colour. Though the adjective 'blue* (Mla) is variously defined, Mt. 38 defines it as 'a bull having white legs, face & tail and the rest of the body as red* I could not trace the verse lohilo yastu varpena etc. in Bd. P. though Kane quotes it as ascribed to it (HD, IV , fn 1215). •

अध्याय १५३

श्लोक 35

जाबालिरुवाच: यदि तुष्टो ऽसि देवेश यदि देयो वरो मम ।मम प्रतिज्ञा देवेश ह्यादित्येश्वरदर्शने

jābāliruvāca: yadi tuṣṭo 'si deveśa yadi deyo varo mama / mama pratijñā deveśa hyādityeśvaradarśane

हिन्दी अर्थ

तुम से संग्रहपूृवंक बतला चुका बहस्पति ने कहा--इस प्रकार श्राद्ध विषयक चर्चा एवं उसकी विधियों को चुनकर जो मनुष्य दोष

English

The ground dug up by the bull by means of its hoofs or horns, serves as canals of honey perpetually feeding Pitrs.

अध्याय १५३

श्लोक 36

कृता तां पारितुं देव न शक्तो व्याधिना वृतः ।शुक्लतीर्थे ऽत्र तिष्ठ त्वम् आदित्येश्वरमूर्तिधृक्

kṛtā tāṃ pārituṃ deva na śakto vyādhinā vṛtaḥ / śuklatīrthe 'tra tiṣṭha tvam ādityeśvaramūrtidhṛk

हिन्दी अर्थ

१. पन्द्रह भागों में विभक्त दिन का नवाँ. भाग. ।.

English

The satisfaction derived by Pitrs at the rite of letting free the bull is more than that when they hear that a tank, a thousand Nalvas square, has been dug (a Nalva =400 hands).

अध्याय १५३

श्लोक 37

एवमुक्ते तु देवेशो बहुरूपो दिवाकरः ।उत्तरे नर्मदाकूले क्षणादेव व्यदृश्यत

evamukte tu deveśo bahurūpo divākaraḥ / uttare narmadākūle kṣaṇādeva vyadṛśyata

हिन्दी अर्थ

सहारोगावसायस्तु स यः संपततमानस: । वेदाश्नमान्पुक्तचिल:ः कुम्भीकानधिगच्छति ॥॥ तस्माच्छादुध धर्म उद्दिष्टि एप नित्य कार्य: अश्रहधानेन पुंसा

English

If anyone gives gingelly seeds mixed with honey and jaggery, it yields everlasting benefit.

अध्याय १५३

श्लोक 38

तदाप्रभृति भूपाल तद्धि तीर्थं प्रचक्षते ।सर्वपापहरं प्रोक्तं सर्वदुःखविनाशनम्

tadāprabhṛti bhūpāla taddhi tīrthaṃ pracakṣate / sarvapāpaharaṃ proktaṃ sarvaduḥkhavināśanam

हिन्दी अर्थ

योग परिवदेश्वस्तु ध्वानिनां मोक्षकारणम् । स गच्छेन्नरक घोर॑ श्रोता यश्व न संशय:

English

One should not test Brahmanas always in order to give them anything. But testing is heard about (i.e. prescribed in £rutis) in regard to the rites of Devas (gods) and Pitrs. 1 One should invite these for the Sraddha rite: Those who have studied all the Vedas and who have performed all rites; the Brahmanas who are the sanctifiers of the row; important Brahmanas who know the Bhasyas (Glosses on Aphorisms); those who regularly study Grammar; those who study Puranas and Dharmasastras; those who are conversant with the three-Naci- ketas-Vidyas; the worshippers of five fires; the Trisuparnas, the knowers of the six ancillary subjects of the Vedas; a son of the Brahma form of marriage; a master of Vedic Prosody (or chanter of the Vedas); a singer of the Jycstha Saman; one who has taken baths in sacred waters (at holy places); those who have taken part in important Yajnas and taken the concluding (Avabhrtha) ablutions; those who observe rites immediately; those who stri¬ ctly adhere to their own duties; those who are not wrathful and those who are always calm and quiescent. And those who perpetually observe the ten meritorious deeds shall also be invited.

अध्याय १५३

श्लोक 39

यस्तु संवत्सरं पूर्णं नित्यम् आदित्यवासरे ।स्नात्वा प्रदक्षिणाः सप्त दत्त्वा पश्यति भास्करम्

yastu saṃvatsaraṃ pūrṇaṃ nityam ādityavāsare / snātvā pradakṣiṇāḥ sapta dattvā paśyati bhāskaram

हिन्दी अर्थ

योगेश्वराणामाक्ोश शुणुयाद्यों यतात्मनाम् । स हि काल चिरं मज्जेत्कुस्भीपाके न संशय: मनसा कर्मंणा वाचा द्वेषं योगिषु बर्जयेत् । प्रेत्यान्यं तत्फल भुड्क्त इह बेब न संशय: ६४ न पारगो विन्दति पारसात्मनस्त्रिलोकमध्ये चरति स्वक्लिः । क्‍ ऋचो यजुः साम तदड्भपारगो विकारमेन हानवाप्प सीदति ६६

English

Whatever is offered to these, yields everlasting benefit. These are the sanctifiers of the row. Those Brahmanas who observe Yogic rites and duties should be revered faithfully.

अध्याय १५३

श्लोक 40

यत्फलं लभते तेन तच्छृणुष्व मयोदितम् ।प्रसुप्तं मण्डलानीह दद्रुकुष्ठविचर्चिकाः

yatphalaṃ labhate tena tacchṛṇuṣva mayoditam / prasuptaṃ maṇḍalānīha dadrukuṣṭhavicarcikāḥ

हिन्दी अर्थ

दृष्टि से देखकर उनमें अश्रद्धा करता है। वह नास्तिक अन्धकार से चारों ओर घिर कर घोर नरक में गिरता है। जो मन को संयत रखकर श्राद्धकर्म सम्पन्न करते हैं, उनके भीषण रोगों का बिनाश होता है। वेदों में वर्णित आश्रमों से मुक्त होकर मन माने ढंग से जीवन यापत्त करने वाले कुम्भीक तरक में जाते हैं । जिद्ठा के छेदन एवं चौय॑ कर्म को वे प्राप्त होते हैं ।४८-८६। जो योग के द्वेष करने वाले हैं, वे समुद्र में ढेला होकर

English

They are the foremost due to their adherence to the duties of their (specific) stages of life. In regard to the offering Verses 22-31 state the qualifications of the Brahmins eligible for in¬ vitation to Sraddha, though it has been already discussed in Gh. 17. Yogins are given the first preference as Yoga-dharma was regarded as the foremost among Dharmas.

अध्याय १५३

श्लोक 41

नश्यन्ति सत्वरं राजंस्तूलराशिरिवानले ।धनपुत्रकलत्राणां पूरयेद्वत्सरत्रयात्

naśyanti satvaraṃ rājaṃstūlarāśirivānale / dhanaputrakalatrāṇāṃ pūrayedvatsaratrayāt

हिन्दी अर्थ

तब तक निवास करते हैं जब तक इस पृथ्वी की अवस्थिति रहती है। इसलिए श्राद्ध में ऊपर बतलाये गये इन श्राद्ध नियमों का श्रद्धापूवेंक मनुष्यों को सबंदा पालन करना चाहिए ।६०। विशेषतया योगियों की निन्दा तो नहीं ही करनी चाहिए, योगियों की निन्‍दा करने से बहीं पर कृमि होकर जन्म धारण करना पड़ता है । ध्यान परायण योगियों के अन्यतम लक्ष्य मोक्ष के मुख्य साधन योग की जो निन्‍दा करता है, वह घोर नरक में जाता है, उस निन्‍दा को सुनने वाला भी घोर नरक में जाता है--इसमें सन्देह नहीं ।६१-६२। योग परायण योगेदवरों की निन्‍दा करने से मनुष्य चारों ओर से अन्धकार से आच्छन्न, परम घोर दिखाई पड़ने वाले नरक में निश्चय ही जाता है। आत्मा को वश में रखने वाले योगेश्वरों की निन्‍्दा जो मनुष्य सुनता है, बह चिरकाल पयं॑न्‍्त कुम्भीपाक नरक में निवास करता है--इसमें सनन्‍्देह नहीं । योगियों के अ्रति देष की भावना

English

One who worships these, worships all the worlds along with the Pitrs. ( Togadharma ) is the holiest of all holy things, the most auspicious of all auspicious things.

अध्याय १५३

श्लोक 42

यस्तु श्राद्धप्रदस्तत्र पित्ःनुद्दिश्य संक्रमे ।तृप्यन्ति पितरस्तस्य पितृदेवो हि भास्करः

yastu śrāddhapradastatra pitḥnuddiśya saṃkrame / tṛpyanti pitarastasya pitṛdevo hi bhāskaraḥ

हिन्दी अर्थ

मनसा, वाचा, करमंणा--सर्वथा वर्जित रस्तनो चाहिसे। इस सत्कर्म का फल वह दूसरे जन्म में भोगता है, ओर इस जन्म ने भी भोगता है- इसमें सन्देह नहीं ।६३-६५॥ योग मार्ग के पारंगत आत्मा के पार को नहीं प्राप्त होते (१) अपने कर्म के अनुसार वे तीनों लोकों में विचरण करते हैं। ऋक, य्जु और सामवेद तथा इनके स्रमस्त अंगों के पारंगत इस प्रकार. विकारों को नः प्राप्त होकर आनन्द का अनुभव करते,

English

Togadharma is mentioned as the first among all Dharmas. A rogue, a drunkard, a patient of pulmonary con¬ sumption, a cattle breeder, an ugly person, a common servant of all in the village, a usurer, a professional musician, a merchant, an incendiary, an administerer of poison, a pimp, a seller of Soma juice, a person who undertakes sea voyage, one whose skin is defiled, a dealer in oil, a deceitful person, one who quarrels with his father, one who has a co-husband at home, a calumnia¬ ted person, a thief, a person whose livelihood is arts and crafts, a tale-bearer, a person giving wrong information about holy days, one who is malicious to his friends, a group-beggar, an atheist, a discarder of the Vedas, a mad fellow, a eunuch, a knavish fellow, a destroyer of foetus, a defiler of the preceptor's bed, a follower of the physician's profession for livelihood, a messenger and an adulterer.

अध्याय १५३

श्लोक 43

इति ते कथितं सर्वमादित्येश्वरमुत्तमम् ।सर्वपापहरं दिव्यं सर्वरोगविनाशनम्

iti te kathitaṃ sarvamādityeśvaramuttamam / sarvapāpaharaṃ divyaṃ sarvarogavināśanam

हिन्दी अर्थ

विकारपारः प्रकृतेश्व॒ पारगस्त्रयोगुणानां त्रिगुणान्तपारगः । बेशं च बेदितव्यं च विदित्वा वे यथाविधि । एवं बेदबिदं प्राहुस्ततोडस्ये बेदचिन्तकाः १००

English

He who sells the Vedas, religious observances, holy rites and penances—all these are defilers of the row.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 153
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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