अध्याय १६१
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे मोक्षतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम षष्ट्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १६१ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महाराज सर्पतीर्थमनुत्तमम् ।यत्र सिद्धा महासर्पास्तपस्तप्त्वा युधिष्ठिर
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe mokṣatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma ṣaṣṭyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 161 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahārāja sarpatīrthamanuttamam / yatra siddhā mahāsarpāstapastaptvā yudhiṣṭhira
हिन्दी अर्थ
इति श्रीमहापुराणे वायुप्रोक्त इक्ष्वाकुवंशानुकीतंन नामाष्टाशीतितमोउध्याय: ॥छ८।॥। सौ संहिताओं का विधिवत् अध्ययन किया था, परम बुद्धिमान् यज्ञावल्क्य ने इन्हीं से योग की साज्ोपाड् दिक्षा प्राप्ति की थी उनके पुत्र परम विद्वान् पुष्य हुए । पुष्य के पुत्र श्र्वसन्धि नाम से विख्यात हुए, उनके पुत्र सुदर्शन हुये, सुदर्शन से अग्निवर्ण की उत्पत्ति हुई। भरिन वर्ण के पुत्र ज्ीध्र नाम से विख्यात हुए, शौध्रक के बुत्र मनु कहे जाते हैं । मनु योग मार्ग का अवलम्ब करके कलाप नामक ग्राम में निवास करते थे, परम ऐश्वर्य-
English
Hari&jandra's son was Rohita, the powerful. Harita, wasRohita's son. Cancu is called Harita (son of Harita).