Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
161
अध्याय 161 / 232

Adhyaya 161

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अध्याय १६१

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे मोक्षतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम षष्ट्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १६१ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महाराज सर्पतीर्थमनुत्तमम् ।यत्र सिद्धा महासर्पास्तपस्तप्त्वा युधिष्ठिर

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe mokṣatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma ṣaṣṭyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 161 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahārāja sarpatīrthamanuttamam / yatra siddhā mahāsarpāstapastaptvā yudhiṣṭhira

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमहापुराणे वायुप्रोक्त इक्ष्वाकुवंशानुकीतंन नामाष्टाशीतितमोउध्याय: ॥छ८।॥। सौ संहिताओं का विधिवत् अध्ययन किया था, परम बुद्धिमान् यज्ञावल्क्य ने इन्हीं से योग की साज्ोपाड् दिक्षा प्राप्ति की थी उनके पुत्र परम विद्वान् पुष्य हुए । पुष्य के पुत्र श्र्वसन्धि नाम से विख्यात हुए, उनके पुत्र सुदर्शन हुये, सुदर्शन से अग्निवर्ण की उत्पत्ति हुई। भरिन वर्ण के पुत्र ज्ीध्र नाम से विख्यात हुए, शौध्रक के बुत्र मनु कहे जाते हैं । मनु योग मार्ग का अवलम्ब करके कलाप नामक ग्राम में निवास करते थे, परम ऐश्वर्य-

English

Hari&jandra's son was Rohita, the powerful. Harita, wasRohita's son. Cancu is called Harita (son of Harita).

अध्याय १६१

श्लोक 2

वासुकिस्तक्षको घोरः सार्प ऐरावतस्तथा ।कालियश्च महाभागः कर्कोटकधनंजयौ

vāsukistakṣako ghoraḥ sārpa airāvatastathā / kāliyaśca mahābhāgaḥ karkoṭakadhanaṃjayau

हिन्दी अर्थ

शाली ये मनु उन्नीसवें युग में क्षत्रिय धर्म के पुनः प्रवरतंक रूप में प्रसिद्ध हुए ।३२०८-२१०। मनु के पुत्र प्रधुश्रत थे उनके पुत्र सुसधि हुए । सुसंधि के मषे नामक पुत्र हुए, जिनका दुसरा नाम सहस्वान भी था। सहस्वान के पुत्र राजा विश्वुतवान् के नाम से प्रसिद्ध हुए । उन राजा विश्वुतवान् के पृत्र राजा वृहद्दल हुए । इक्ष्वाकु के वंश में उत्पन्न होनेवाले प्रायः यही राजागण स्मरण किये जाते हैं, जो इस वंश के प्रमुख राजा थे, उनका वर्णन

English

Vijaya and Sudeva were the sons of Cancu. Since he was the conqueror of all Ksatriyas, he is remembered as Vijaya.

अध्याय १६१

श्लोक 3

शङ्खचूडो महातेजा धृतराष्ट्रो वृकोदरः ।कुलिको वामनश्चैव तेषां ये पुत्रपौत्रिणः

śaṅkhacūḍo mahātejā dhṛtarāṣṭro vṛkodaraḥ / kuliko vāmanaścaiva teṣāṃ ye putrapautriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रधान रूप से कर दिया गया है। भदिति के पुत्र विवस्वान् की इस सृष्ठि विवरण का जो भली भाँति पाठ करता है, वह सन्‍्तति वाला होता है तथा विवस्वान् के पुत्र मनु का सान्निध्य प्राप्त करता है। प्रजाओं की पुष्टि देनेवाले श्राद्धों में पुजनीय पितरगण एवं देवगण का वह वृत्तान्त जो पढ़ता है, वह पाप विहीन, रजोगुण' रहित, अविनाशशील एबं दीर्घायु वाला होता है । यदि: अपुत्री है तो उसे पूत्र की प्राप्ति होती है, दीर्घायु मिलती है, और अन्त में परम गति प्राप्ति होती है ।२११-२१५। क्‍

English

Ruruka was his son. He was a king, a great expert in matters pertaining to religion and wealth. Hrtaka (or Dhrtaka) was the son of Ruruka and Bahu was born of him.

अध्याय १६१

श्लोक 4

तत्र तीर्थे महापुण्ये तपस्तप्त्वा सुदुष्करम् ।भुञ्जन्ति विविधान्भोगान्क्रीडन्ति च यथासुखम्

tatra tīrthe mahāpuṇye tapastaptvā suduṣkaram / bhuñjanti vividhānbhogānkrīḍanti ca yathāsukham

हिन्दी अर्थ

-नास्त्यधंमिद क. ग. घ. छह. पुस्तकेषु ।

English

The king (viz. Bahu) who was addicted to vice was

अध्याय १६१

श्लोक 5

तत्र तीर्थे तु यः स्नात्वा तर्पयेत् पितृदेवताः ।वाजपेयफलं तस्य पुरा प्रोवाच शङ्करः

tatra tīrthe tu yaḥ snātvā tarpayet pitṛdevatāḥ / vājapeyaphalaṃ tasya purā provāca śaṅkaraḥ

हिन्दी अर्थ

लेअस्पव्वस्तम्नन्यव्य॑ ध्वव्की से ्वस्न् अनुजस्य विकुक्षेस्तु निमेबंशं निबोधत । योडइसो निवेशयामास परं देवपुरोपसम् १ जप्रन्तमिति विख्यातं गौतमस्याइश्रमाभितः । यस्यान्ववाये जज्ञे व जनकादषिसत्तमात् २ नेमिर्नाम सुधर्मात्मा सर्वसत्वनमस्कृतः । आसीत्पुत्रों महाराज्ञ इक्ष्वाकोभूरितेजसः:

English

Even in that righteous Satyayuga that king was not very virtuous. Sagara was born as the son of Bahu. He was bom with a body containing poison in the hermitage of Bhrgu. He was saved by Turva (Aurva).

अध्याय १६१

श्लोक 6

स्नातानां सर्पतीर्थे तु नराणां भुवि भारत ।सर्पवृश्चिकजातिभ्यो न भयं विद्यते क्वचित्

snātānāṃ sarpatīrthe tu narāṇāṃ bhuvi bhārata / sarpavṛścikajātibhyo na bhayaṃ vidyate kvacit

हिन्दी अर्थ

अरण्पां मथ्यमानायां प्रादुभतो महायशा: नामना सिथिरितिख्यातों जननाज्जनको5भवत् ५

English

After obtaining the missile pertaining to Fire-god from Bhargava, the king Sagara went over the whole of the earth and killed Talajanghas along with Haihayas.

अध्याय १६१

श्लोक 7

मृतो भोगवतीं गत्वा पूज्यमानो महोरगैः ।नागकन्यापरिवृतो महाभोगपतिर्भवेत्

mṛto bhogavatīṃ gatvā pūjyamāno mahoragaiḥ / nāgakanyāparivṛto mahābhogapatirbhavet

हिन्दी अर्थ

+ मिथिर्नाम महाबोरयों येनासों सिथिला3भवत् । राजासो जनको नाम जनकाच्चाप्युदावसु: बेवस्वत मनु के बंश का वर्णन

English

The unerring king repudiated the Dharma (code of

अध्याय १६१

श्लोक 8

मार्गशीर्षस्य मासस्य कृष्णपक्षे च याष्टमी ।सोपवासः शुचिर्भूत्वा लिङ्गं सम्पूरयेत् तिलैः ।यथाविभवसारेण गन्धपुष्पैः समर्चयेत्

mārgaśīrṣasya māsasya kṛṣṇapakṣe ca yāṣṭamī / sopavāsaḥ śucirbhūtvā liṅgaṃ sampūrayet tilaiḥ / yathāvibhavasāreṇa gandhapuṣpaiḥ samarcayet

हिन्दी अर्थ

सूत बोले--ऋषिव॒न्द तदनन्तर विकुक्षि के अनुज राजा निमि के वंश का वर्णन सुनिये । इन॑ राजा निमि ने गौतम के आश्रम के चारों ओर जयन्त नामक परम सुन्दर एक पुर की स्थापना की थी, जो देवपुर के समान मनोहर एवं रम्य था । उन्हीं निमि के वंश में ऋषि सत्तम जनक से नेमि नामक परम धर्मात्मा राजा उत्पन्न हुआ, जो सभी द्वारा नमस्करणीय था । ।१-२२। परम तेजस्वी महाराज इक्ष्वाकु से जो पुत्र उत्पन्न

English

Plow was the king Sagara (Sa-gara) born with poison (inside)? Why did the infuriated unerring.king repudi¬ ate the traditional holy rites of those powerful Ksatriyas such as the Sakas and others?

अध्याय १६१

श्लोक 9

एवं विधाय विधिवत्प्रणिपत्य क्षमापयेत् ।तस्य यत्फलमुद्दिष्टं तच्छृणुष्व नरेश्वर

evaṃ vidhāya vidhivatpraṇipatya kṣamāpayet / tasya yatphalamuddiṣṭaṃ tacchṛṇuṣva nareśvara

हिन्दी अर्थ

हुआ, वह मह॒षि वसिष्ठ के शाप से विदेह (शरीर रहित) हो गया । विदेह के अरणी के तीन पर्बों के मंधन करने द से महान् तेजस्वी मिथि नामक पुत्र हुये, मिथि नाम से ही उनकी खुयाति हुई, इस प्रकार के जनन (उत्पत्ति) होने के कारण उनका जनक नाम भी प्रसिद्ध हुआ वे मिथि परम बलवान् राजा थे, उन्हीं के नाम पर मिथिला- पुरी की ख्याति हुई इसी राजा जनक से राजा उदावसु की उत्पत्ति हुई ।३-६। उदावसु से धर्मात्मा राजा नन्दि ८०२ वायुपुराणमभ्

English

These five clans, viz. Yavanas, Paradas, Kambojas, Pahlavas, (and Sakas) attacked him.

अध्याय १६१

श्लोक 10

तिलास्तत्र च यत्संख्याः पत्रपुष्पफलानि च ।तावत् स्वर्गपुरे राजन्मोदते कालमीप्सितम्

tilāstatra ca yatsaṃkhyāḥ patrapuṣpaphalāni ca / tāvat svargapure rājanmodate kālamīpsitam

हिन्दी अर्थ

सुकेतो रपि धर्मात्मा देवरातों महाबलः। देवरातस्य धर्मात्मा बृहदुत्थ इति श्रुति: ८

English

His kingdom was plundered and taken by these powerful leading Ksatriyas. King Bahu whose realm was seized, renounced the world. Accompanied by his wife the righteous- souled king entered the forest and performed penance. After some time the king once went to fetch water. Due to advancing years and weakness he died midway.

अध्याय १६१

श्लोक 11

ततः स्वर्गात्परिभ्रष्टो जायते विमले कुले ।सुरूपः सुभगश्चैव धनकोटिपतिर्भवेत्

tataḥ svargātparibhraṣṭo jāyate vimale kule / surūpaḥ subhagaścaiva dhanakoṭipatirbhavet

हिन्दी अर्थ

सुधृतेरपि धर्मात्मा धुष्टकेतु: परंतपः। धुष्टकेतुसुतश्राषि हय॑श्वों नाम विश्वुतः १० हयश्वस्य सरुः पुत्नो मरोः पुत्र: प्रतित्वकः । प्रतित्वकस्य धर्मात्मा राजा कीतिरथः सुतः पुत्र: कीतिरथस्यापि देवमोढ इति श्रुतः। देवभीढस्य विबुधो विद्युधस्थ सुतो धृतिः

English

His wife Yadavl who was pregnant then, followed him. Poison had been administered to her by her co-wife with a desire to kill the foetus.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 161
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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