Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
178
अध्याय 178 / 232

Adhyaya 178

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अध्याय १७८

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे भूतीश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम सप्तसप्तत्यधिकशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १७८ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेत्तु राजेन्द्र गङ्गावाहकमुत्तमम् ।नर्मदायां महापुण्यं भृगुतीर्थसमीपतः

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe bhūtīśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma saptasaptatyadhikaśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 178 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchettu rājendra gaṅgāvāhakamuttamam / narmadāyāṃ mahāpuṇyaṃ bhṛgutīrthasamīpataḥ

हिन्दी अर्थ

दूसरा नहीं था। उस पुरुषरत्न वसुदेव की कीति चन्द्रमा को चाँदनो की भाँति लोकमनोरजनी तथा विशद थी। वासुदेव के उपरान्त शूर के देव भाग नामक पुत्र उत्पन्न हुए थे। उनके-बाद देवश्रवा नामक पुत्र का जन्म हुआ था। इनके अतिरिक्त अनादृष्टि, कड, नन्‍्दन, भृज्जिन, श्याम, शमीक, और गण्ड्घ नामक पुत्र थे। चार सुन्दरी कन्याएं थीं।१४३-१४८। जिनके नाम पृथा, श्रुतवेदा, श्रवकीति और

English

Govinda (Kra'a) desire, it Though he was

अध्याय १७८

श्लोक 2

तत्र गङ्गा महापुण्या चचार विपुलं तपः ।पुरा वर्षशतं साग्रं परमं व्रतमास्थिता

tatra gaṅgā mahāpuṇyā cacāra vipulaṃ tapaḥ / purā varṣaśataṃ sāgraṃ paramaṃ vratamāsthitā

हिन्दी अर्थ

श्रतश्रवा थे, इनके अतिरिक्त राजाधिदेवी नामक कन्या भी थी ये पाँचों कन्याएं वीद पुत्रों को माताएं थीं । कुन्ति ने पृथा को अपनी कन्या बनाया था, ओर उसका पणिग्रहण पाण्डु ने किया था। निस्संतान राजा कुन्तिभोज को पिता ने प्रथा को दे दिया था कुन्तिभोज की पोषित पुत्री होने के कारण वह कुन ती नाम से विख्यात हुई कुरुवंशियों में वीर पाण्डू ने कुन्ती को स्त्री रूप में वरण किया था। पृथा ने उन पाण्डु के संयोग से अग्नि के समान परम तेजस्वी तीन पुत्रों को उत्पन्त किया था । उन तीन पुत्रों की बराबरी करनेवाला कोई महारथी पृथ्वी में नहीं था, वे इन्द्र के समान महान् पराक्रमशाली एवं वीर थे । पृथा ने धर्म के अंश से युधिष्ठिर नामक पुत्र को, मारत के अंश से बुकोदर (भीम) नामक पुत्र को तथा इस्द्र के अंश से घनञ्जय (अर्जुन) नामक पुत्र को उत्पन्न किया था। अश्विनीकुमारों के अंश से माद्रवती में तकुल और सहदेव

English

Jambavan, the king or bears.

अध्याय १७८

श्लोक 3

ध्यात्वा देवं जगद्योनिं नारायणमकल्मषम् ।आत्मानं परमं धाम सरित्सा जगतीपते

dhyātvā devaṃ jagadyoniṃ nārāyaṇamakalmaṣam / ātmānaṃ paramaṃ dhāma saritsā jagatīpate

हिन्दी अर्थ

माद्रवत्पां तु जनितवाश्विनाविति विश्ुतम् । नकुलः सहदेवश्व रूपसत्त्वगुणान्वितौ

English

He heard the voice of a young woman deep inside the great cave. O Brahmanas, the nurse had been playing with the infant son of Jambavan along with the jewel. The words "Ma rodih " (Do not cry) were uttered by her.

अध्याय १७८

श्लोक 4

ततो जनार्दनो देव आगत्येदमुवाच ह

tato janārdano deva āgatyedamuvāca ha

हिन्दी अर्थ

जज्ञे च श्रुतदेवायां तनयो बुद्धशशरमंण: । करूषाधिपतिर्वीरों दनन्‍्तवक़ो महाबलः 0१५४ कंकेय्यां श्रतकीर्त्या तु जज्ञे संतर्दनः पुन: । चेकितानबृहत्क्षत्रो तथवान्यों महाबलो पटुश्रवानुजस्तस्य रुजकन्यानुजस्तथा । पत्न्यस्तु वसुदेवस्थ त्रयोदश वराज्भूना: १५६ पौरबी रोहिणी चेव मदिरा चापरा तथा । तथव भव्रा वेशाखी देवकी सप्तमी तथा

English

The lion killed Prasena. The lion was killed by Jamba* van. O tender child, do not cry. This Svamantaka is for you.

अध्याय १७८

श्लोक 5

विष्णुरुवाच: तपसा तव तुष्टो ऽहं मत्पादाम्बुजसम्भवे ।मत्तः किमिच्छसे देवि ब्रूहि किं करवाणि ते

viṣṇuruvāca: tapasā tava tuṣṭo 'haṃ matpādāmbujasambhave / mattaḥ kimicchase devi brūhi kiṃ karavāṇi te

हिन्दी अर्थ

धुगन्धिवंनराजी च॒ दे 'चान्ये परिचारिके । रोहिणी पोरबी चव वाल्मीकस्या5४त्समजाइभवत्

English

(The words were clearly audible.) As soon as every¬ thing was made clear by those words, he entered the cave. He had already seen Prasena (lying dead) torn to pieces very near that cave.

अध्याय १७८

श्लोक 6

गङ्गोवाच: त्वत्पादकमलाद्भ्रष्टा गङ्गा सहचरा विभो ।यदृच्छया त्रिलोकेश वन्द्यमाना दिवौकसैः

gaṅgovāca: tvatpādakamalādbhraṣṭā gaṅgā sahacarā vibho / yadṛcchayā trilokeśa vandyamānā divaukasaiḥ

हिन्दी अर्थ

दुदंभ दमन शुश्र॑ पिण्डारककुशीतकों । चित्रां नाम कुमारी च रोहिण्यष्टो व्यजायत ॥१६रे पौत्रो रामस्य जज्ञाते विज्ञाता निशितोत्सुकी । पाश्वी च पाश्वेनन्‍्दी च शिशु: सत्यधुतिस्तथा सन्दवाह्योईथ रामाणगिरिको गिर एवं च्। शुक्लगुल्मेति गुल्मश्व दरिद्रान्तक एवं च १६५

English

Quickly entering the cave of the bear, the liberal- minded lord saw Jambavan, the king of bears.

अध्याय १७८

श्लोक 7

नृपो भगीरथस् तस्मात् तपः कृत्वा सुदुष्करम् ।समाराध्य जगन्नाथं शङ्करं लोकशङ्करम्

nṛpo bhagīrathas tasmāt tapaḥ kṛtvā suduṣkaram / samārādhya jagannāthaṃ śaṅkaraṃ lokaśaṅkaram

हिन्दी अर्थ

नामक दो पुत्र रत्मों की उत्पत्ति हुई ये दोनों पुत्र परम स्वरूपवान् एवं सत्त्वगूणशाली थे /४६-१५४। वद्धशर्मा में श्रतदेवा में करूष देश के अधिपति वीर महाबलश्ञाली दन्तवक्र को उत्पन्न किया । केकयदेश की राजमहिषी श्रतकीर्ति में सन्‍्तदंन नामक पुत्र की उत्पत्ति हुई, उसके अतिरिक्त चेकितान ओर बूह॒र्त्कत्र नामक दो अन्य महाबलशाली पुत्र भी उसके उत्पन्न हुए ! अवन्ति देश के अधीश्वर विन्द और अनुविन्द--ये दोनों भाई भी उसी

English

Vasudeva fought with Jambavan in his cave. For twentyone days Govinda had a hand to hand fight (with him).

अध्याय १७८

श्लोक 8

अवतारयामास हि मां पृथिव्यां धरणीधर ।मया वै युवयोर् वाक्यादवतारः कृतो भुवि

avatārayāmāsa hi māṃ pṛthivyāṃ dharaṇīdhara / mayā vai yuvayor vākyādavatāraḥ kṛto bhuvi

हिन्दी अर्थ

के पत्र थे । श्रुतश्र॒बा से चेदि देश का स्वामी शिशुपाल का जन्म हुआ ।१५५-१५७। बह शिशुपाल राज्षि दर्ंघोष का पुत्र था, उसके पोरुष की पर्याप्त प्रसिद्धि थी। वह पूर्व जन्म में शत्रुमदंन दक्षग्रीव रावण केबूप में उत्पन्त हुआ था पटुश्रवाँ अनुज और रुजकन्या अनुजा थी। वसुदेव की तेरह परम सुन्दरी स्त्रियाँ थीं उनके नाम थे, पौरबी, रोहिणी, अपरा, मदिरा, भद्रा, वेशाखी और देवकी । ये सात पटरानियाँ थीं। सुगन्धि और वनराजी ये दो परिचारिकाएँ थीं। रोहिणी ओर पोरवी--थरे दोनों वाल्मीक की कन्याएँ थीं। सब से बड़ी पत्नी रोहिणी महाभाग्यशालिनी आनकदुन्दुि वंसुदेव की परम प्रिया थीं, उनके संयोग से सबसे बड़े पुत्र बलराम को तथा अन्य सारण, निषव, दुदंम, दमन, शुभ्र, पिण्डारक, कुछीतक तामक आठ पुत्रों को एवं चित्रा मामक एक कुमारी को उत्पन्न किया ।१५८-१६३। बलराम के दो निशित ओर उत्सुक नामक विख्यात पुत्र

English

When Krsna entered the cave, the attendants of Vasu¬ deva returned to Dvaravati and reported (to others) that Krsna (also) was killed.

अध्याय १७८

श्लोक 9

वैष्णवीमिति मां मत्वा जनः सर्वाप्लुतो मयि ।ये वै ब्रह्मणो लोके ये च वै गुरुतल्पगाः

vaiṣṇavīmiti māṃ matvā janaḥ sarvāpluto mayi / ye vai brahmaṇo loke ye ca vai gurutalpagāḥ

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न हुए, जो वसुदेव के पोत्र थे इनके अतिरिक्त पाश्वीं, पाइवेनन्दी, शिशु, सत्यधृति, मन्दवाह्मय, रामाण, गिरिंक, गिर, शुल्कगुल्म, गुल्मदरिद्वान्तक नामक पुत्र भी बलराम के थे। इनसे बड़ी पाँच कुमारियाँ भी थी,

English

After defeating the powerful Jambavan, Vasudeva won the hand of his daughter Jambavatl with the permission of the king of bears.

अध्याय १७८

श्लोक 10

त्यागिनः पितृमातृभ्यां ये च स्वर्णहरा नराः ।गोघ्ना ये मनुजा लोके तथा ये प्राणिहिंसकाः

tyāginaḥ pitṛmātṛbhyāṃ ye ca svarṇaharā narāḥ / goghnā ye manujā loke tathā ye prāṇihiṃsakāḥ

हिन्दी अर्थ

भद्रबाहुभंद्ररथों भद्रकल्पस्तथव च। सुपाश्चकः कीतिसांश्व रोहिताश्वश्व भव्वजः १६८ चित्रोपचित्रे कस्ये च स्थित: पुष्टिरथापरः । मदिरायाः सुता छोते सुदेवो5थ बिजज्षिरे (१७०

English

It was to clear himself that the lord took the Syaman- taka jewel. Consoling the king of bears, he came out of the

अध्याय १७८

श्लोक 11

अगम्यागामिनो ये च ह्यभक्ष्यस्य च भक्षकाः ।ये चानृतप्रवक्तारो ये च विश्वासघातकाः

agamyāgāmino ye ca hyabhakṣyasya ca bhakṣakāḥ / ye cānṛtapravaktāro ye ca viśvāsaghātakāḥ

हिन्दी अर्थ

वेशार्यां समदाच्छौरिः पुत्रं कौशिकमुत्तमम् । देवकयां जज्ञिरे शौरिः सुषणः कोतिसानपि

English

Madhusudana (Krsna) thereafter duly married the <rirl Jambavati. Janardana got himself acquitted of the false

अध्याय १७८

श्लोक 12

देवब्राह्मणवित्तानां हर्तारो ये नराधमाः ।देवब्रह्मगुरुस्त्रीणां ये च निन्दाकरा नराः

devabrāhmaṇavittānāṃ hartāro ye narādhamāḥ / devabrahmagurustrīṇāṃ ye ca nindākarā narāḥ

हिन्दी अर्थ

तदयो भद्गसेनश्र यज़ुदायश्र पत्चमः । षष्ठो भव्रविदेकस्य कंसः सर्वाञज्जघान तान् अथ तस्पामवस्थायामायुष्सान्संबभुव हू। लोकनाथः परुनविष्णुः पुर्वकृष्ण: प्रजापति

English

Therefore <he uy Whv

अध्याय १७८

श्लोक 13

ब्रह्मशापप्रदग्धा ये ये चैवात्महनो द्विजाः ।भ्रष्टानशनसंन्यासनियतव्रतचारिणः

brahmaśāpapradagdhā ye ye caivātmahano dvijāḥ / bhraṣṭānaśanasaṃnyāsaniyatavratacāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

अनुजाता5भवत्कृष्णा सुभद्रा भव्रभाषिणी । कृष्णा सुभद्वेति पुनव्यस्याता वृष्णिनंदिनी

English

AkraapiP 8 not be

अध्याय १७८

श्लोक 14

तथैवापेयपेयाश्च ये च स्वगुरुनिन्दकाः ।निषेधका ये दानानां पात्रदानपराङ्मुखाः

tathaivāpeyapeyāśca ye ca svagurunindakāḥ / niṣedhakā ye dānānāṃ pātradānaparāṅmukhāḥ

हिन्दी अर्थ

सुभद्रायां रथी पार्थादभिमन्युरजायत । वसुदेवस्य भार्यासु महाभागासु सप्तसु ॥। उनके नाम सुनिये । अचिष्मती, सुनर्वा, सुरसा, सुवचा और शतबला उतके नाम थे। ये पाँचों परम

English

Should you be attacked b) Jv ~ my...

अध्याय १७८

श्लोक 15

ऋतुघ्ना ये स्वपत्नीनां पित्रोः सेहपरा न हि ।बान्धवेषु च दीनेषु करुणा यस्य नास्ति वै

ṛtughnā ye svapatnīnāṃ pitroḥ sehaparā na hi / bāndhaveṣu ca dīneṣu karuṇā yasya nāsti vai

हिन्दी अर्थ

बुद्धिमानू सारण की पुत्रियाँ थीं। भद्गाब्व, भद्रगुष्ति, भद्वविद्य, भव्बाहु, भद्वरथ, भद्गकल्प, सुपाद्यक, कीतिमान् रोहिताश्व, भद्रज, दुर्मद ओर अभिभूत--ये रोहिणी से उत्पन्न होनेवाले पुत्र पोनत्रादिकों के नाम कहे गये हैं। ननन्‍्द, उपनन्द; मित्र, कुक्षिमित्र, चल, पुष्टि और सुदेव ये पुत्रगण तथा चित्रा और उपचित्रा नामक दो कन्याएँ--मदिरा की सन्ततियाँ कही गयी हैं ।!६४-१७०। उपबिम्ब, बिम्ब, सह्तवदन्त

English

After offering (obsequies such as) the water libations

अध्याय १७८

श्लोक 16

क्षेत्रसेतुविभेदी च पूर्वमार्गप्रलोपकः ।नास्तिकः शास्त्रहीनस्तु विप्रः सन्ध्याविवर्जितः

kṣetrasetuvibhedī ca pūrvamārgapralopakaḥ / nāstikaḥ śāstrahīnastu vipraḥ sandhyāvivarjitaḥ

हिन्दी अर्थ

भर महौजा--ये चार महाबलशाली एवं विख्यात पुत्र भद्रा के थे । वसुदेव ने वेशाखी में परम घोग्य कौशिक नामक पुत्र को उत्पन्न किया। देवकी में सुषेण, कौतिमानू, तदय, भद्बसेन, यजुदाय ओर भद्वविद् नामक छ पुत्रों को उत्पन्न किया था, इन सब को कंस ने मार डाला। ऐसो स्थिति में प्रजापति लोकनायक भगवान् विष्णु आयुध्मान् कृष्ण के रूप में सातवीं बार उत्बन्न हुए, उनके पदचात् सुन्दर बोलनेवाली सुभद्रा उत्पन्न हुई, इन्हीं वृष्णिनन्दिनी सुभद्रा का नाम बाद में कृष्णा विख्यात हुआ । कुंष्णा के गर्भ से अर्जुन ने महान् घोर अभिमन्यु को उत्पन्न किया । वसुदेव की महाभाग्यशालिनी सातों स्त्रियों में अन्य जो शूर पुत्र हुए, उनके नाम सुनिये ।३७१-१७६। सहदेवा में वसुदेब के संयोग से परमवीर भयासख नामक पुत्र की उत्पत्ति हुई ।

English

Hastening back to Dvaraka, the glorious slayer of Madhu spoke these words to his elder brother Balarama ( Haliti — one armed with ploughshare).

अध्याय १७८

श्लोक 17

अहुताशी ह्यसंतुष्टः सर्वाशी सर्वविक्रयी ।कदर्या नास्तिकाः क्रूराः कृतघ्ना ये द्विजायः

ahutāśī hyasaṃtuṣṭaḥ sarvāśī sarvavikrayī / kadaryā nāstikāḥ krūrāḥ kṛtaghnā ye dvijāyaḥ

हिन्दी अर्थ

अतोषस्प सहदेवायां श्रो जज्ञे मयासखः । शाइगंदेबाजनत्तम्बुं शोरी जज्ने कुलोह्हम्

English

"Prasena was killed by the lion, Satrajit was killed by Satadhanvan (all for the sake of the jewel, Syamantaka). I seek that Syamantaka (as the legal owner). O Lord, strike him.;

अध्याय १७८

श्लोक 18

पैशुन्या रसविक्रेयाः सर्वकालविनाकृताः ।स्वगोत्रां परगोत्रां वा ये भुञ्जन्ति द्विजाधमाः

paiśunyā rasavikreyāḥ sarvakālavinākṛtāḥ / svagotrāṃ paragotrāṃ vā ye bhuñjanti dvijādhamāḥ

हिन्दी अर्थ

उपसडूगं बसुं चापि तनयौ देवरक्षितो । एवं दश सुतास्तस्य कंसस्तानप्यघातयत् १७८ विजयं रोचनं चेव वर्धभान तथेव च। एतान्‍्सर्वान्महाभागानृपदेवा व्यजायत . + स्वगाहव महात्मानं वृकदेवी त्वजायत । आगाही च स्वसा चेव सुरूपा शिशिरायिणी

English

Then a tumultuous fight ensued between Bhoja and Krsna. Satadhanva (i.c. Bhoja) could not sec Akrura anywhere round.

अध्याय १७८

श्लोक 19

ते मां प्राप्य विमुच्यन्ते पापसङ्घैः सुसंचितैः ।तत्पापक्षारतप्ताया न शर्म मम विद्यते

te māṃ prāpya vimucyante pāpasaṅghaiḥ susaṃcitaiḥ / tatpāpakṣārataptāyā na śarma mama vidyate

हिन्दी अर्थ

सप्तमं देवकोपुत्र सुनासा सुघुवे भुवम् । गवेषणं सहाभागं सह्ग्रामे चित्रयोधिनम् १८१ श्राढदेवं पुरा येन वन विरचितं द्विजा सेव्यायामददाच्छोरिः पुत्र कोशिकमव्ययम् १८२ सुगन्धीव (न्धव) नराजी च शौरेरास्तां परिग्रहः । पुण्डुश्व कपिलेश्वेव वसुदेवात्मजो हि तो ॥ तयोराजा5भवत्पुण्डः कपिलस्तु वर्न ययौ

English

Hence (Bhoja) became frightened and thought of running away. Bhoja's mare was a divine one named Vijnata- hfdaya (that which understood the heart or mental feeling of the rider). She had a speed of a hundred Yojanas. It was seated on this mare that he fought with Kr§na. On his speedy mare Bhoja went a hundred Yojanas away. On seeing the quick motion of the chariot, Krsna harassed Satadhanvan. Then the mare became extremely exhausted. O Brahmanas, the vital airs

अध्याय १७८

श्लोक 20

तथा कुरु जगन्नाथ यथाहं शर्म चाप्नुयाम् ।एवमुक्तस्तु देवेशस्तुष्टः प्रोवाच जाह्नवीम्

tathā kuru jagannātha yathāhaṃ śarma cāpnuyām / evamuktastu deveśastuṣṭaḥ provāca jāhnavīm

हिन्दी अर्थ

तस्थां समभवद्वीरों वसुदेवात्मजों बली। राजा नाम निषादोउसो प्रथमः स धनु्धेरः विल्यातो देवरातस्य महाभागः सुतोषभवत् । पण्डितानां मं प्राहुदेंबभवसमुखडू वम्

English

"O mighty-armed one, stay here. The defects of the horses (mares) have been observed by me. I shall go on foot and bring away the excellent jewel Syamanlaka".

अध्याय १७८

श्लोक 21

विष्णुरुवाच: अहमत्र वसिष्यामि गङ्गाधरसहायवान् ।प्रविशस्व सदा रेवां त्वमत्रैव च मूर्तिना

viṣṇuruvāca: ahamatra vasiṣyāmi gaṅgādharasahāyavān / praviśasva sadā revāṃ tvamatraiva ca mūrtinā

हिन्दी अर्थ

अस्मकयां लभले पुश्रमनादृष्टि यशस्विनम् । निवतें: शक्रशत्रुध्न श्राद्धवदेव सहाबलम् ॥ै१८६

English

Going on foot alone, Acyuta, the knower of great mira¬ culous weapons, killed Satadhanvan, the king of Mithila.

अध्याय १७८

श्लोक 22

मम पादतलं प्राप्य वह त्रिपथगामिनि ।यदा बहूदककाले नर्मदाजलसंभृता

mama pādatalaṃ prāpya vaha tripathagāmini / yadā bahūdakakāle narmadājalasaṃbhṛtā

हिन्दी अर्थ

शाड़' देवा के गर्भ से तम्बु नामक पुत्र की उत्पत्ति हुई। शौरी ने कुलोद्रह कौ उत्पन्न किया। उपसज्भ, वसु, देव, रक्षित, विजय, रोचन और वर्धमान नामक महाभाग्यशाली पुत्रों को उपदेवा ने उत्पन्न किया । वसुदेव के इन दस पुत्रों को भी कंस ने मारा डाला था। बुकदेवी ने महात्मा स्वगाहव को उत्पन्त किया। इसी बंकदेवी का नामान्तर आगाही, स्वसा, सुरुपा और शिक्षिरायणी भी था ।१७७-१८०। सुन्दर नासिकावाली देवको ते महाभाग्यशाली, संग्राम भूमि में विचित्र युद्ध करनेवाले गवेषण नामक पुत्र को उत्पत्न किया, जो उनके सातवें पुत्र ख्वात हुए । द्विजव॒न्द ! इम्हीं गवेषण ने पूृवकाल में वनप्रान्त में श्राउदेव को रचना की थी। वसुदेव ते संब्या नामक अपनी एक अन्य पत्ती में कौशिक नामक परम पराक्रमशाली पुत्र को उत्पस्व किया था सुगन्‍्धी और बनराजी नामक जों दो अन्य स्त्रियाँ वसुदेव की थीं उनसे पुण्ड और कपिल नामक दो पुत्रों की

English

He could not see the Syamantaka (on his person) even after killing the mighty Bhoja. When Krsna returned, the bearer of ploughshare (i.e. Rama) asked him, "Give me the jewel".

अध्याय १७८

श्लोक 23

प्रावृट्कालं समासाद्य भविष्यति जलाकुला ।प्लाव्योभयतटं देवी प्राप्य मामुत्तरस्थितम्

prāvṛṭkālaṃ samāsādya bhaviṣyati jalākulā / plāvyobhayataṭaṃ devī prāpya māmuttarasthitam

हिन्दी अर्थ

उत्पत्ति हुई । वसुदेव के इन दोनों पुत्रों में पुण्ड् राजा हुए और कपिल वन को चले गये ॥१८१-१८३। वसुदेव का एक परम बलवान् निषाद नामक पुत्र और था, जो धनुर्धारियों में अभ्रगण्य एवं परम पुरुषार्थी राजा था। देवरात का पुत्र परम यशस्वी एवं महाभाग्यशाली था। पण्डित लोग उसे देवश्रवा के नाम से जानते हैं। निवर्त ने अस्मकी से परमयशस्वी अनादुष्टि नामक पुत्र को उत्पन्न किया। इसी प्रकार महाबलवान् श्राद्धदेव और शक्र-

English

"I don't have it", said Krsna. Then the infuriated Rama repeatedly cried "Fie upon you", and spoke to Janar-

अध्याय १७८

श्लोक 24

प्लावयिष्यति तोयेन यदा शङ्खं करे स्थितम् ।तदा पर्वशतोद्युक्तं वैष्णवं पर्वसंज्ञितम्

plāvayiṣyati toyena yadā śaṅkhaṃ kare sthitam / tadā parvaśatodyuktaṃ vaiṣṇavaṃ parvasaṃjñitam

हिन्दी अर्थ

दत्र॒घ्त भामक दो पुत्र ओर हुए । यही श्राद्धदेव निषध जाति के मूल पुरुष थे और यही निषादों द्वारा पोषित आजायत श्राद्धदेवों निषधादियंतः श्रुतः । एकलव्यों महावीयों निषाद: परिवर्धितः १८७ गण्ड्यायानपत्याय कृष्णस्तुष्टोददात्सुतो । चारदेष्णं च साम्बं च कृतास्त्रौ शस्तलक्षणोी

English

"I tolerate it (and excuse you) as you are my brother. Welfare unto you. I am going. I have nothing to do with Dvaraka nor with you nor with the Vrsnis."

अध्याय १७८

श्लोक 25

न तेन सदृशं किंचिद्व्यतीपातादिसंक्रमम् ।अयने द्वे च न तथा पुण्यात्पुण्यतरं यथा

na tena sadṛśaṃ kiṃcidvyatīpātādisaṃkramam / ayane dve ca na tathā puṇyātpuṇyataraṃ yathā

हिन्दी अर्थ

तन्तिजस्तन्तिमालश्र स्वपुत्नी फनकस्य तु । वस्तावनेस्त्वपुत्राय बसुदेवः प्रतापवान् ॥

English

Then Rama, the suppressor of enemies, entered Mithila. With all desirable presents, the king of Mithila himself wel¬

अध्याय १७८

श्लोक 26

तस्मिन्पर्वणि देवेशि शङ्खं संस्पृश्य मानवः ।स्नानमाचरते तोये मिश्रे गाङ्गेयनार्मदे

tasminparvaṇi deveśi śaṅkhaṃ saṃspṛśya mānavaḥ / snānamācarate toye miśre gāṅgeyanārmade

हिन्दी अर्थ

तपाश्य कोधनुश्रेव विरजा: श्यामसज्जिमों । अनपत्योडभवच्छामः श्यामकस्तु वन ययो ॥ देवदेवो महातेजा: पूर्व कृष्ण: प्रजापति: । बिहारार्थ मनुष्येषु जज्ने नारायणः प्रभुः १६२ देवक्यां वसुदेवेन तपसा पुष्करेक्षण: । चतुर्बाहुस्तु संजज्ञे विव्यरूपः क्षियाइन्वितः .

English

In the meantime Babhru (Akrura), the foremost among the intelligent ones, performed unimpededly different kinds of Yajnas.

अध्याय १७८

श्लोक 27

पुण्यं त्वशेषपुण्यानां मङ्गलानां च मङ्गलम् ।विष्णुना विधृतो येन तस्माच्छान्तिः प्रचक्रमे

puṇyaṃ tvaśeṣapuṇyānāṃ maṅgalānāṃ ca maṅgalam / viṣṇunā vidhṛto yena tasmācchāntiḥ pracakrame

हिन्दी अर्थ

प्रकाशों भगवान्योगी क़ष्णो मानुषमागतः । अव्यक्तो व्यक्तलिद्भस्थः स एवं भगवान्पध्रभुः

English

In the performance of these Yajnas (which continued)

अध्याय १७८

श्लोक 28

तत्रान्तं पापसङ्घस्य ध्रुवमाप्नोति मानवः ।शङ्खोद्धारे नरः स्नात्वा तर्पयेत् पितृदेवताः

tatrāntaṃ pāpasaṅghasya dhruvamāpnoti mānavaḥ / śaṅkhoddhāre naraḥ snātvā tarpayet pitṛdevatāḥ

हिन्दी अर्थ

नारायणो यतश्नक्र प्रभवं चाव्ययों हि सः। देवो नारायणोभूत्वा हरिरासीत्सनातनः १६४ महावलशाली एकलव्य के नाम से भी विस्यात हुए। भगवान् कृष्ण ने प्रसन्‍त होकर सब्ततिहीन प्रण्डूष को चारदेष्ण और साम्ब मामक दो पुत्र प्रदान किये थे, जो शस्त्रास्त्रवेत्ता और प्रसंशनीय गरुणोंवाले थे। कनक के तन्तिज और तन्तिमाल नामक दो पुत्र थे, प्रतापशाली वसुदेव ने इन दोनों पुत्रों को पुत्रविहीन वास्तावल्ि के हाथों समर्पित किया, सौति ने वीरपुत्र शौरि और कौशिक को उसे समपित किया था ।(८४-१८९। उसी वंश में

English

These Yajnas of that noble-souled (King) became famous by the name "Akrura Yajha". Much food and wealth was given as Daksina. All of them fulfilled the cherished

अध्याय १७८

श्लोक 29

तृप्तास्ते द्वादशाब्दानि सिद्धिं च सार्वकामिकीम् ।गङ्गावहे तु यः श्राद्धं शङ्खोद्धारे प्रदास्यति

tṛptāste dvādaśābdāni siddhiṃ ca sārvakāmikīm / gaṅgāvahe tu yaḥ śrāddhaṃ śaṅkhoddhāre pradāsyati

हिन्दी अर्थ

तपा, क्रोघनु विरजा, एयाम भर सृड्जिम नामक पुत्र उत्पन्त हुए थे, इनमें से इ्याम को कोई सन्तान नहीं थी, जिससे वह वन को चला गश्ा था। वह भोजत्व की निन्‍दा करता था, उसे राजषि की उपाधि प्राप्त हुई थी । जो ब्राह्मण नियमपुवंक भगवान् कृष्ण के इस जन्मवत्तान्त को दूसरे को सुताता है अथवा पढ़ता है, वह महान सुख की प्राप्ति करता है। प्रजापति, महान् तेजस्वी देवदेव त्रभु भगवान् नारायण विहार

English

When (Akrura), the lord (the most prominent) of

अध्याय १७८

श्लोक 30

तेन पिण्डप्रदानेन नृत्यन्ति पितरस्तथा ।शङ्खोद्धारे नरः स्नात्वा पूजयेद् बलकेशवौ

tena piṇḍapradānena nṛtyanti pitarastathā / śaṅkhoddhāre naraḥ snātvā pūjayed balakeśavau

हिन्दी अर्थ

करने के लिये मनुष्य योनि में कष्ण के रूप में अवतरित होते हैं। वे कमलनेत्र, दिव्यस्वरूप चतुर्भुज भगवान् अपनी समस्त कान्ति से समन्वित होकर वसुदेव की परम तपस्या के फलस्वरूप देवकी के गर्भ में उत्पन्न होते हैं ।(६०-१६३। वे परम प्रकाशमान भगवान् ही योगेश्वर कृष्ण रूप में प्रादुर्भूत होते हैं, वे परम प्रभु भगवान अव्यक्त स्वरूपवाले निराधार एवं व्यक्त स्वरूपवाले साकार“-दोनों ही हैं । वे नारायण भगवान् कृष्ण अव्ययात्मा एवं समह्त चराचर सृष्टि के विधायक हैं। वे ही नारायण रूप में

English

After knowing by means of his Yogic power that the

अध्याय १७८

श्लोक 31

रात्रौ जागरणं कृत्वा शुद्धो भवति जाह्नवि ।यत्त्वं लोककृतं कर्म मन्यसे भुवि दुःसहम्

rātrau jāgaraṇaṃ kṛtvā śuddho bhavati jāhnavi / yattvaṃ lokakṛtaṃ karma manyase bhuvi duḥsaham

हिन्दी अर्थ

वस्तावनेरिति संग्रदानार्थं घष्ठों । +नायथं इलोको घ. पुस्तके ।

English

<c O honourable Lord, please hand over to me the jewel which has come into your possession. Please do nothing ignoble unto me.

अध्याय १७८

श्लोक 32

तस्मिन्पर्वणि तत्सर्वं तत्र स्नात्वा व्यपोहय ।एवमुक्त्वा नरश्रेष्ठ विष्णुश्चान्तरधीयत

tasminparvaṇi tatsarvaṃ tatra snātvā vyapohaya / evamuktvā naraśreṣṭha viṣṇuścāntaradhīyata

हिन्दी अर्थ

देवो विष्णुरिति ख्यातः शक्लादवरजो5भवत् १९६ प्रसादजं यस्य विभोरदित्या: पुत्रकारणम्। वधार्थ सुरशत्रूणां देत्यदानवरक्षसाम् १६७ ययातिवंशजस्थाथ वसुदेवस्य धीमतः । कुल पुण्य यतः कर्म भेजे नारायणः प्रभुः १६८ सागराः समकम्पन्त चेलुश्व धरणीधरा: । जज्वलुश्चाग्निहोत्राणि जायमाने जनादंने शिवाश्च प्रववर्वाता: प्रशान्‍्तमभवद्रजः । ज्योतीष्यभ्यधिक रेजुर्जायमाने जनादंने ॥

English

The anger raging in my heart for the last sixty years has become great and deep-rooted. A long time has elapsed by now." Then at the instance of Krsna, Babhru, the highly in-* telligent one, handed over the jewel without any demur in the assembly of all the Sattvatas.

अध्याय १७८

श्लोक 33

तदाप्रभृति तत्तीर्थं गङ्गावाहकमुत्तमम् ।ब्रह्माद्यैरृषिभिस्तात पारम्पर्यक्रमागतैः

tadāprabhṛti tattīrthaṃ gaṅgāvāhakamuttamam / brahmādyairṛṣibhistāta pāramparyakramāgataiḥ

हिन्दी अर्थ

(सवंदा एक रूप) सर्वेशक्तिसम्पन्न हरि हैं। जो सृष्टि के आदिम काल में आदिपुरुष प्रजापति ब्रह्मा की सृष्टि करते हैं। वे यादवनन्दन कूष्ण ही अदिति के पुत्र रूप में प्रादर्भूत होकर देवदेव विष्णु एवं इन्द्र के छोटे भाई उपेन्द्र के नाम से भी विल्यात होते हैं। वे ही सर्वक्षक्तिमान् अपने अनुग्रह से देवताओं के शत्र देत्यों-दानवों और रफ्षसों के विताश के लिये अदिति के पुत्र के रूप में प्रादुर्भूत होते

English

The suppressor of enemies (Krsna) obtained the jewel from Babhru in a straightforward manner. With a delighted mind, he gave it back to Babhru again.

अध्याय १७८

श्लोक 34

तत्र तीर्थे तु यः स्नात्वा भक्तिभावेन भारत ।गङ्गातीर्थे तु स स्नातः समस्तेषु न संशयः

tatra tīrthe tu yaḥ snātvā bhaktibhāvena bhārata / gaṅgātīrthe tu sa snātaḥ samasteṣu na saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

हैं ।(६४-१६७। शाजधि वयाति के वंश में समुत्पन्न परम बुद्धिमान् वसुदेव का कुल परम पवित्र हुआ जिसमें भगवान् नारायण स्वयं प्रादर्भत होकर लौकिक कर्मों के. अनुष्ठान में प्रवत्त हुए । जिस समय वे भगवान जनाद॑न उत्पन्न हुए, उस समय सागर काँपने लगे, पर्वत हिलने लगे, अग्निहोत्र स्वयमेव प्रज्बलित हो उठे मजुलकारी शीतल मन्द सुगंध वायु बहने लगी, धूल का उड़ना शान्त हो गया, इसी प्रकार भगवान् जनाद॑न के उत्पन्न होनेपर सूर्य चन्द्रमा ग्रह नक्षत्रादि ज्योतिष्पुझ्जों का प्रताप अकिक निश्नचर उठा जिस शुभ वेला में भगवान् जनादंन उत्पन्न हुए उस समय अभिजित् नामक नक्षत्र था, जयन्ती नामक रात्रि थी भर विजय नामक मुह्॒तें था ।१६८-२०१। अव्यक्त, शाइवत, प्रभु, नारावत, भगवान् हरि अपने सुन्दर नेत्रों से प्रजाओं को मोहित करते हुए जिस समय प्रादर्भूत हुए उस समय इन्द्र ने आकाश से पुष्प की बृष्टि की

English

The son of GandinI (i.e. Akrura) obtained Syamantaka, the excellent jewel handed over by Krsna. Wearing it (round his neck) he shone like the Sun. He who knows this story of the false accusation and the subsequent excellent clearance of the Lord will by no means become a victim of false accusation.

अध्याय १७८

श्लोक 35

तत्र तीर्थे मृतानां तु नराणां भावितात्मनाम् ।अनिवर्तिका गतिस्तेषां विष्णुलोकात्कदाचन

tatra tīrthe mṛtānāṃ tu narāṇāṃ bhāvitātmanām / anivartikā gatisteṣāṃ viṣṇulokātkadācana

हिन्दी अर्थ

और सहल्नों की संख्या में एकत्र हो होकर गन्धवों और मह्षियों ने मांगलिक गानों से मधुसुदन की स्तुति की । वसुदेव ने रात्रि के समय श्रीवत्स चिह्न से विभषित्, अन्यान्य दिव्य लक्षणों से अलंकृत अधोक्षज (जिनके स्वरूप का साक्षात्कार इन्द्रियों से नहीं होता) भगवान् को पुत्र रूप में समृत्पन्त देखा ओर

English

From the youngest son Animitra (? Anamitra) of Vr?ni Sini was born. His son was Satyaka who was truthful in speech and endowed with truthful temperament. The son of Satyaka (Satyaki) was Yuyudhana and his son was Bhuti.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 178
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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