Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
179
अध्याय 179 / 232

Adhyaya 179

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अध्याय १७९

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे गङ्गावहकतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामाष्टसप्तत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १७९ मार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेत्तु राजेन्द्र गौतमेश्वरमुत्तमम् ।सर्वपापहरं तीर्थं त्रिषु लोकेषु विश्रुतम्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe gaṅgāvahakatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmāṣṭasaptatyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 179 mārkaṇḍeya uvāca: tato gacchettu rājendra gautameśvaramuttamam / sarvapāpaharaṃ tīrthaṃ triṣu lokeṣu viśrutam

हिन्दी अर्थ

ष्छद वायुपुराणम् वसुदेववच:ः भ्रुत्वा रूपं संहृतवान्प्रभुः। अनुज्नातः पिता त्वेन॑ नन्‍्दगोपगृहं गतः ॥

English

Yugandhara was Bhuti's son. Thus the descendants of Bhuti, the Bhautyas have been recounted. Ppsni had two sons,

अध्याय १७९

श्लोक 2

गौतमेन तपस्तप्तं तत्र तीर्थे युधिष्ठिर ।दिव्यं वर्षसहस्रं तु ततस्तुष्टो महेश्वरः

gautamena tapastaptaṃ tatra tīrthe yudhiṣṭhira / divyaṃ varṣasahasraṃ tu tatastuṣṭo maheśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

उग्रसेनमते तिष्ठन्यशोदाय तदा ददौ

English

Wherever the pious-souled great king Svaphalka stay¬ ed, no sickness or fear of drought oppressed the people.

अध्याय १७९

श्लोक 3

प्रणम्य शिरसा तत्र स्थापितः परमेश्वरः ।स्थापितो गौतमेनेशो गौतमेश्वर उच्यते

praṇamya śirasā tatra sthāpitaḥ parameśvaraḥ / sthāpito gautameneśo gautameśvara ucyate

हिन्दी अर्थ

तुल्यकालं तु गर्भिण्यौं यशोदा देवकी तथा। यशोदा नन्‍्दगोपस्य पत्नी सा नन्‍न्‍दगोपतेः. तें जात॑ रक्षमाणस्तु बसुदेवो महायशः। प्रादात्पुत्नं यशोदाये कन्यां तु जयूहे स्वयम् २०९

English

O excellent Brahmanas, once Indra did not shower rain in the realm of the lord, king of KasI, for three years.

अध्याय १७९

श्लोक 4

तत्र देवैश्च गन्धर्वैर् ऋषिभिः पितृदैवतैः ।सम्प्राप्ता ह्युत्तमा सिद्धिर् आराध्य परमेश्वरम्

tatra devaiśca gandharvair ṛṣibhiḥ pitṛdaivataiḥ / samprāptā hyuttamā siddhir ārādhya parameśvaram

हिन्दी अर्थ

अय॑ स गर्भो देवक्‍्या अस्मत्क्लेशास्हनिष्यति ..

English

He made the highly honoured Svaphalka stay there. Due to the presence of Svaphalka, Indra showered rain there.

अध्याय १७९

श्लोक 5

तत्र तीर्थे तु यः स्नात्वा पूजयेत् पितृदेवताः ।पूजयेत् परमीशानं सर्वपापैः प्रमुच्यते

tatra tīrthe tu yaḥ snātvā pūjayet pitṛdevatāḥ / pūjayet paramīśānaṃ sarvapāpaiḥ pramucyate

हिन्दी अर्थ

उग्रसेनात्मजे तां च कन्यामानकदन्दुभिः । निवेदयामास तदा कन्येति शुभलक्षणा क्‍ + स्वसायां तनयां कंसो जातां नेवावधारयत् । अथ तामपि दुष्टात्मा हा त्ससर्ज मुदाइन्वितः

English

Svaphalka married the daughter of the king of KasI. She was a praise-worthy (uncensured) lady named Gandml. Everyday she gifted a cow to a Brahmana. 1

अध्याय १७९

श्लोक 6

बहवस्तन्न जानन्ति विष्णुमायाविमोहिताः ।तत्र संनिहितं देवं शूलपाणिं महेश्वरम्

bahavastanna jānanti viṣṇumāyāvimohitāḥ / tatra saṃnihitaṃ devaṃ śūlapāṇiṃ maheśvaram

हिन्दी अर्थ

कला -3-५५-- -“ - “चरन७अममक+ का ५ पनना-न 3ल ६३ ० -र्रशवन-१- “त्नमननन-७+++»»न+ उन, नतपन ।प्नम्णा» मम» ५५५ ५)डनअक्घ०./० भर पमामाकरमु००००० मम यानमनगा वा -88»६५५३ ४०७० भवन ००००-०५. »...

English

It is said that she remained in the womb of her mother for many hundreds of years. She did not come out. The father said to her even as she was in the womb, "Be bom quickly. Welfare unto you. Wherefore do you stay there? Remaining in the womb itself the girl said, I shall be ben n if a cow is given everyday. O Father, do you desire it? me father said, "So be it" and fulfilled her desire.

अध्याय १७९

श्लोक 7

ब्रह्मचारी तु यो भूत्वा तत्र तीर्थे नरेश्वर ।स्नात्वार्चयेन् महादेवं सो ऽश्वमेधफलं लभेत्

brahmacārī tu yo bhūtvā tatra tīrthe nareśvara / snātvārcayen mahādevaṃ so 'śvamedhaphalaṃ labhet

हिन्दी अर्थ

निवेदन किया कि है प्रभो ! आप अपने इस रूप को समाप्त कीजिये। है तात ! मैं कंस से बहुत भीत हँ-- यही इतना निवेदन आप से कर रहा हूँ, मेरे ज्येष्ठ पुत्रों को जो देखने में अद्भुत सौन्दर्यशाली थे, उसने मार डाला है।२०२-२०१। वसुदेव की ऐसी बातें सुनकर महामहिमामय भगवान् ने अपने दिव्यस्वरूप को समेट लिया। पिता वसुदेव जी ने भगवान् की आज्ञा से उन्हें नश्दगोप के घर पहुँचाकर उग्रसेन कौ सम्मति से यश्योदा की गोद में दे दिया । उस समय संयोगतः देवकी और यशोदा--दोनों गभवंती थीं, यशोदा नन्‍्दगोप की पत्नी थी। जिस रात्रि को वृष्णिकुलोडारक भगवान् कृष्ण प्रादुर्भूत हुए थे उसी रात में यशोदा ने भी एक कश्या को जन्म दिया था । महान् यशस्वी वसुदेव जी पुत्र रूप भगवान को भली भाँति गोदी में छिपाकर यशोदा को दे आये ओर उनकी कश्या को अपने घर उठा लाये २ ०६-२०५।

English

Akrura is remembered as her son. He was munificent, a performer of Yajnas, learned, heroic and fond of guests. Svaphalka himself was very liberal in giving Daksina.

अध्याय १७९

श्लोक 8

ब्रह्मचारी तु यो भूत्वा तर्पयेत् पितृदेवताः ।पूजयेत् परमीशानं सर्वपापैः प्रमुच्यते

brahmacārī tu yo bhūtvā tarpayet pitṛdevatāḥ / pūjayet paramīśānaṃ sarvapāpaiḥ pramucyate

हिन्दी अर्थ

नन्‍्दगोप को भगवान् कृष्ण को समर्पित कर बसुदेव ने कहा कि आप मेरी रक्षा करें, तुम्हारा यह पुत्र सब का कल्याण करनेवाला है एवं यदुबंधियों का उद्धारक होगा, यह देवकी का वह चिरअभिलषित गर्भ है, जो हम लोगों के समस्त क्षलेशों को दूर करेगा।! इस प्रकार नन्दगोप के गृह से लौटकर आनकदुन्दुभि बसुदेव जी ने उम्रसेन के पुत्र कंस के हाथों में अपित करते हुए कहा कि यही शुभ लक्षण सम्पन्न कन्या उत्पन्न

English

Svaphalka had other sons also—Upamangu, Mangu, Mrdura, Arimejaya, Giriraksa, Yaksa, _ Sat ™g h " a > Arimardana, Dharmabhrt, Srstacaya, Vargamoca, Ava Prativaha. He had a beautiful daughter Vasudcva also.

अध्याय १७९

श्लोक 9

तत्र तीर्थे तु यो दानं भक्त्या दद्याद् द्विजातये ।तदक्षयफलं सर्वं नात्र कार्या विचारणा

tatra tīrthe tu yo dānaṃ bhaktyā dadyād dvijātaye / tadakṣayaphalaṃ sarvaṃ nātra kāryā vicāraṇā

हिन्दी अर्थ

हुई है। अपनी बहन देवकी में कन्या की उत्पत्ति सुनकर दुष्टात्मा कंस ने कुछ भी ध्यान नहीं दिया, और अत्यस्त प्रसन्‍न होकर उसे भी छोड़ दिया । वह मृढ़ यह कहने लगा कि यदि कभ्या ही उत्पन्न हुई है तो उसे मरी दी समझना चाहिए ।२०६-२१२१। इस प्रकार कंस द्वारा छोड़ दिये जाने पर वह कन्या वृष्णिगह में सत्कार पूव॑क पुशत्रवल्परिपाल्यान्तो देवा देवात्यथा तदा (? ) तामेव विधिनोत्पन्नामाहुः कन्या प्रजापतिमू

English

Akrura begot of UgrasenI two sons who delighted the family. They were Deva and Anupadcva. They were equal to

अध्याय १७९

श्लोक 10

मासे चाश्वयुजे राजन् कृष्णपक्षे चतुर्दशीम् ।स्नात्वा तत्र विधानेन दीपकानां शतं ददेत्

māse cāśvayuje rājan kṛṣṇapakṣe caturdaśīm / snātvā tatra vidhānena dīpakānāṃ śataṃ dadet

हिन्दी अर्थ

एकादशा तु जन्ञे वे रक्षार्थ केशवस्य ह्। तां वे सर्वे सुमनसः पुजयिष्यन्ति यादवाः ॥

English

A popular etymology of the name 'Gandim'.

अध्याय १७९

श्लोक 11

पूजयित्वा महादेवं गन्धपुष्पादिभिर् नरः ।मुच्यते सर्वपापेभ्यो मृतः शिवपुरं व्रजेत्

pūjayitvā mahādevaṃ gandhapuṣpādibhir naraḥ / mucyate sarvapāpebhyo mṛtaḥ śivapuraṃ vrajet

हिन्दी अर्थ

देवदेयो दिव्यवपु: कृष्ण: संरक्षितोष्नया क्‍ २१५ शुणुध्व॑ वे यथा कंसः पुत्रानानकदुन्दुमेः । जाताञजाताड्शिशुन्सर्वाल्निष्पिपेष बुथामतिः

English

The daughter ( Samika and Balabharhis.

अध्याय १७९

श्लोक 12

अष्टम्यां च चतुर्दश्यां कार्त्तिक्यां तु विशेषतः ।उपोष्य प्रयतो भूत्वा घृतेन स्नापयेच्छिवम्

aṣṭamyāṃ ca caturdaśyāṃ kārttikyāṃ tu viśeṣataḥ / upoṣya prayato bhūtvā ghṛtena snāpayecchivam

हिन्दी अर्थ

उक्त हि किल देवक्‍्या वसुदेवस्य धीमतः। सारथ्यं कृतवान्कंसो युवराजस्तदाध्भवत्

English

Vrsti was iS ' aK

अध्याय १७९

श्लोक 13

पञ्चगव्येन मधुना दध्ना वा शीतवारिणा ।स च सर्वस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोति मानवः

pañcagavyena madhunā dadhnā vā śītavāriṇā / sa ca sarvasya yajñasya phalaṃ prāpnoti mānavaḥ

हिन्दी अर्थ

ततो5न्तरिक्षे बागासोदि्व्या भूतस्य कस्यचित् । कंसो यथा सदा भीतः पुष्कला लोकसाक्षिणी यामेतां वहसे कंस रथेन परकारणात् । अस्या यः सप्तमों गर्भ: स ते मृत्युभेविष्यति १२२१

English

HU »« Vfdanodat.dundubhi.'

अध्याय १७९

श्लोक 14

भक्त्या तु पूजयेत् पश्चात् स लभेत् फलमुत्तमम् ।बिल्वपत्रैरखण्डैश्च पुष्पैरुन्मत्तकोद्भवैः

bhaktyā tu pūjayet paścāt sa labhet phalamuttamam / bilvapatrairakhaṇḍaiśca puṣpairunmattakodbhavaiḥ

हिन्दी अर्थ

जीवन बिताते हुए दिनानुदिन बढ़ने लगी । पुत्र को भाँति उसकी पालना होने लगी । देवगण अपने में उसकी उत्पत्ति की चर्चा करने लगे । उन्होंने प्रजापति ब्रह्मा से उस कन्या के बारे में विस्तार पूर्वक सब बातें बतलायीं शोर यह कहा कि केशव की रक्षा के लिये यह भगवती एकादशा स्वयं प्रादुर्भूत हुई हैं, उसकी यादव गण प्रसन्न मन से पूजा करेंगे । दिव्यदेहधारी देवदेव भगवान् कृष्ण इसी भगवती एकादल्षा द्वारा सुरक्षित

English

(Partially defective) With his white-livened retinue the king who was like Ahuka, marched towards the eastern' direction displaying (accompanied by) one million and eighty youthful horses (cavalry). He surpassed Bhoja twentyiOne thousand elephants the ropes of which (elephants) were made of gold and silver (wires?). An equal number o

अध्याय १७९

श्लोक 15

कुशापामार्गसहितैः कदम्बद्रोणजैरपि ।मल्लिकाकरवीरैश्च रक्तपीतैः सितासितैः

kuśāpāmārgasahitaiḥ kadambadroṇajairapi / mallikākaravīraiśca raktapītaiḥ sitāsitaiḥ

हिन्दी अर्थ

हैं ।२१३-२१५॥। द » द ऋषिवृन्द बोले--सृतजी ! भोजबंशीय राजा कंस ने किस कारण से वसुदेव के छोटे-छोटे पुत्रों का संहार किया--इसे विस्तार पृर्वंक हम लोगों से बतलाइये ।२१६॥। द सूत बोले--ऋषिव॒ुन्द ! जिस कारण से मूर्ख कंस आनकदुन्दुभि वसुदेव के उत्पन्न होनेवाले समस्त पुत्रों का तुरन्त संहार कर देता था ओर जिस भय के कारण महाबाहु भगवान् कृष्ण उत्पन्न होते ही दूसरी जगह पहुंचाये गये, और गोभों के बीच में जिस प्रकार पुरुषोत्तम गोविन्द का पालन पोषण हुआ उस सारी कथा को हम आप लोगों से बतला रहें हैं, सुनिये । ऐसा कहा जाता है कि जब कंस युवराज था, तय वसुहैव ओर देवकी का रथ हाँका करता था। एक बार जब कि वह रथ हाँक रहा था

English

AlHT, records 'Nandanodaka-dundubhi' as his name, According to the genealogy on of AlHT, Ahuka is the son o

अध्याय १७९

श्लोक 16

पुष्पैरन्यैर्यथालाभं यो नरः पूजयेच्छिवम् ।नैरन्तर्येण षण्मासं यो ऽर्चयेद् गौतमेश्वरम् ।सर्वान्कामानवाप्नोति मृतः शिवपुरं व्रजेत्

puṣpairanyairyathālābhaṃ yo naraḥ pūjayecchivam / nairantaryeṇa ṣaṇmāsaṃ yo 'rcayed gautameśvaram / sarvānkāmānavāpnoti mṛtaḥ śivapuraṃ vrajet

हिन्दी अर्थ

आकाश से एक ऐसी देवी वाणी किसी भूत के मुख से सुनाई पड़ी, जिसके कारण कंस सदा भीत रहने लगा । वह दिव्य वाणी कठोर स्वर से सुनाई पड़ी थी, सभी लोगों ने उसे सुना था। वह देवी वाणी इस द प्रकार की थों, 'कंस ! जिसे प्रेम वश अथवा वसुदेव को प्रसन्न करने के लिये रथ पर चढ़ाकर घ॒माते

English

Ahuka gave his sisterAhuki toAhukandha. Adaughter and two sons were born to Ahukandha*.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 179
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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