अध्याय २१६
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे शृङ्गितीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम पञ्चदशोत्तरद्विशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय २१६ श्रीमार्कण्डेय उवाच: अषाढीतीर्थम् आगच्छेत् ततो भूपालनन्दन ।कामिकं रूपमास्थाय स्थितो यत्र महेश्वरः
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe śṛṅgitīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma pañcadaśottaradviśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 216 śrīmārkaṇḍeya uvāca: aṣāḍhītīrtham āgacchet tato bhūpālanandana / kāmikaṃ rūpamāsthāya sthito yatra maheśvaraḥ
हिन्दी अर्थ
अठारह सहसख्र सहस्र ब्रह्मवंबतं का वर्णन आपने किया । बारह सहन एक सौ इलोकों का ब्रह्माण्ड पुराण, अठारह सहस्न इलोकों का भागवत महापुराण, दस सहष्त इलोंकों का ब्रह्म पुराण, दस सहस्त श्लोकों का वामन पुराण, छः सौ अधिक दस सहस्न एलोकों का आदि पुराण, तेईस सहस्न (?) श्लोकों का वायुपुराण, तेईस सहख्न का नारदीय पुराण, उन्नीस सहस्न का बेनतेय (ग़रुड) पुराण, पचपत सहस्न का पद्म पुराण, सत्रह सह का मनोहर कूमें पुराण, चौबीस सहंख्न परमादुभुत कथाओं से सुगूंफित शोौकर (वाराह) पुराण, परम विस्तृत इक्यासी सहल्न श्लोकों में ग्रथित स्कनन््द पुराण आपने बतलाया । इस्र प्रकार परम विस्तृत अठा रह पुराणों का गान आप ने किया । उन पुराणों में बहुतेरे धर्मों का निरूपण किया गया है ॥५-१ १। रागी, विरागी, यती, ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ, स्त्री, शूद्र, विशेषतया ब्राह्मण, क्षत्रिय, बेश्य, अन्यास्य
English
A brief review of the main Padas (Sections) of the Purana.