Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
215
अध्याय 215 / 232

Adhyaya 215

2 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय २१५

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे श्रीकपालतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम चतुर्दशोत्तरद्विशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय २१५ श्रीमार्कण्डेय उवाच: शृङ्गितीर्थं ततो गच्छेन् मोक्षदं सर्वदेहिनाम् ।मृतानां तत्र राजेन्द्र मोक्षप्राप्तिर्न संशयः

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe śrīkapālatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma caturdaśottaradviśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 215 śrīmārkaṇḍeya uvāca: śṛṅgitīrthaṃ tato gacchen mokṣadaṃ sarvadehinām / mṛtānāṃ tatra rājendra mokṣaprāptirna saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

चतुविशतिसाहल्न शौकरं परमादूभुतम् । एकाशीतिसह॒ल्लाणि स्कम्दमुक्त सुविस्तृतम् १० एवमष्टादशोक्तानि पुराणानि बृहन्ति च। पुराणेष्वेषु बहुवो धर्मास्ते विनिरूपिताः ३११ रागिणां च विरागाणां यतीनां ब्रह्मचारिणाम् । गुहस्थानां वनस्थानां स्त्रीशुद्राणां विशिषतः ब्राह्मणक्षत्रियविशां ये च संकरजातयः । गड्भगद्या या महानदयो यज्ञव्रततपांसि च ३१३

English

lie narrated it to the sages after going to their Satra in the Naimisa forest. It is due to.his favour, O excellent sages, that the story of the origin and dissolution of the living

अध्याय २१५

श्लोक 2

तत्रैव पिण्डदानेन पित्ःणाम् अनृणो भवेत् ।तेन पुण्येन पूतात्मा लभेद् गाणेश्वरीं गतिम्

tatraiva piṇḍadānena pitḥṇām anṛṇo bhavet / tena puṇyena pūtātmā labhed gāṇeśvarīṃ gatim

हिन्दी अर्थ

को इतिहास, उपक्रम एवं उपसंहारादि समेत हम लोगों को सम्पूर्णतया बतला चुके । अत्यस्त स्पष्ट रीति से आप ने चौदह सहस्र इलोकों में वर्णित मात्स्य महापुराण को बतलाया, उतनी ही संख्या वाले भविष्य महापुराण को भी आपने बतलाया, भविष्य में मत्स्य की अपेक्षा पाँच सो श्लोक अधिक हैं। उसके बाद आपने परम रमणीय नव सहलन इलोकों में पूर्ण मार्कण्डेय पुराण का वर्णन किया ।१-४६। उसके उपराब्श्

English

Conclusion of the Satra (sacrificial session) and the completion of the narration of the Purana synchronised. The author exhorts the later audience of the Purana to perform sacrifices and go to heaven just as the sages in Naimisaranya did formerly.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 215
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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