अध्याय ९६
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे नारायणीतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम पञ्चनवतितमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ९६ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेत्तु राजेन्द्र तीर्थं कोटीश्वरं परम् ।ऋषिकोटिः समायाता यत्र वै कुरुनन्दन
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe nārāyaṇītīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma pañcanavatitamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 96 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchettu rājendra tīrthaṃ koṭīśvaraṃ param / ṛṣikoṭiḥ samāyātā yatra vai kurunandana
हिन्दी अर्थ
चाहिए ।१ २५-१२७। देवता, पितर, ऋषि और मनु गण सभी मत्रों के साथ ऊध्व लोक को गमन करते हैं, और उन्हीं मंत्रों के साथ पुनः इहलोक में वापस आते हैं । सभी देवगण इस मत्यलोक से पशुकल्प पयेन््त पुनः पर्याप्त समय व्यतीत होने पर जन्म ग्रहण करते हैं,........ 9...) अवश्य घटित होनेवाले विधि के विधान से सम्बन्ध रख वे रागादि वश हो दोषपूर्ण जन्म का दशशन करते हैं, अर्थात् विधिवश उन्हें भी
English
To Anga, Sunltha bore a single child Vena. Due to the misdemeanour of Vena, there was a great indignant commotion.