Vayu Purana· Vāyu Purāṇa
98
अध्याय 98 / 232

Adhyaya 98

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अध्याय ९८

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे व्यासतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम सप्तनवतितमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ९८ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेत्तु राजेन्द्र प्रभासेश्वरमुत्तमम् ।विख्यातं त्रिषु लोकेषु स्वर्गसोपानमुत्तमम्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe vyāsatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma saptanavatitamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 98 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchettu rājendra prabhāseśvaramuttamam / vikhyātaṃ triṣu lokeṣu svargasopānamuttamam

हिन्दी अर्थ

+ धनुश्चिह्वान्तगंतग्रन्थो ह. पुस्तके नास्ति । तदुपश्चुत्य तपसा सर्वे युक्ता: प्रचेतस: । मुखेश्यों वायुमग्नि घ ससुश्नुर्जातमन्यवः

English

On seeing his birth, the Fire-god spoke to Brahma: "It was I who held your Semen Virile. Hence may this second son be mine."

अध्याय ९८

श्लोक 2

युधिष्ठिर उवाच: प्रभासं तात मे ब्रूहि कथं जातं महाफलम् ।स्वर्गसोपानदं दृश्यं संक्षेपात् कथयस्व मे

yudhiṣṭhira uvāca: prabhāsaṃ tāta me brūhi kathaṃ jātaṃ mahāphalam / svargasopānadaṃ dṛśyaṃ saṃkṣepāt kathayasva me

हिन्दी अर्थ

उन्मुलानथ तान्वृक्षान्कृत्वा वायुरशोषयत् । तानग्निरदहृदूघो र एबमासीद्द्ग॒मक्षयः ३० द्रमक्षयमथो बुद्धवा किचिच्छेषेषु शाखिषु । उपगम्यात्रवोदेतान्राजा सोमः प्रचेतसः ३१ दृष्ट्वा प्रयोजन सर्व लोकसंतानकारणात् । कोप॑ त्यजत राजानः सर्व प्राचीनबहिषः (३२

English

The Fire-god was addressed by Brahma: "Let it be so". Hence, we have heard that all the descendants of Angiras are known as Agneyas.

अध्याय ९८

श्लोक 3

श्रीमार्कण्डेय उवाच: दुर्भगा रविपत्नी च प्रभानामेति विश्रुता ।तया चाराधितः शम्भुरुग्रेण तपसा पुरा

śrīmārkaṇḍeya uvāca: durbhagā ravipatnī ca prabhānāmeti viśrutā / tayā cārādhitaḥ śambhurugreṇa tapasā purā

हिन्दी अर्थ

तथा काट छाँट के वक्षों ने समस्त प्रृथ्वीमण्डल पर बढ़ बढ़कर माकाश तक छेंक लिया, जिससे प्रजाओं का विनाश होने लगा। उस चाक्षष मन्वब्तर में इस प्रकार प्रजाओं के ऊपर घोदथ विपत्ति आ गई, सारा आकाशमण्डल वृक्षों से घिर उठा, और दस सहन वर्ष तक प्रजाएँ निरचेष्ट पड़ी रहीं अर्थात् उन बेतरतीब बढ़े हुए वक्षों के काटने छाँटने का साहस उन्हें नहीं हुआ । तपोबल द्वारा प्रजाओं की इस घोर विपत्ति को चर्चा सुनकर सभी प्रचेताओं ने अति क्रुद्ध होकर अपने-अपने मुख से एक ही साथ वायु और अग्नि को छोड़ा ।२७-२६। वायु ने उन सभी बुक्षों को उखाड़ कर सुक्षा दिया और तब अग्नि ने उन सब को भस्म कर दिया-“इस प्रकार उन वृक्षों का विनाश हो मया । उन बढ़े हुये वृक्षों के विनाश हो जाने पर जब कहीं कहीं थोड़ी संख्या में कुछ वृक्ष शेष रह गये तब उन प्रचेताओं के समीप जाकर राजा सोंम ने कहा--'प्रचेता

English

When the Semen Virile was consigned to the holy fire for six more times by Brahma, the creator, the six Brahmas (sons of Brahma) were born. So it is heard.

अध्याय ९८

श्लोक 4

वायुभक्षा स्थिता वर्षं वर्षं ध्यानपरायणा ।ततस्तुष्टो महादेवः प्रभायाः पाण्डुनन्दन

vāyubhakṣā sthitā varṣaṃ varṣaṃ dhyānaparāyaṇā / tatastuṣṭo mahādevaḥ prabhāyāḥ pāṇḍunandana

हिन्दी अर्थ

गण ! लोगों को उत्पन्न होने वाली संततियों के नित्य आने वाले सभी प्रयोजनों को देखकर आप लोग क्रोध छोड़ दें, क्योंकि आप सब राजा हैं ओर बहिस् के पुत्र हैं।३०-३२। पृथ्वी पर शेष बचे हुये ये वक्ष अब नये वृक्षों को उत्पन्न करेंगे। अतः अग्नि और वायु को अब भाप लोग छान्‍्त कर दें। यह परम सुन्दर दिखाई पड़ने वाली रत्नभूत कश्या वृक्षों की है, भविष्य में घटित होनेवाली घटनाओं को जानकर

English

Marici was the first among them, born from the rays (of sacrificial fire). Since the (second) son was born in the Kratu (sacrifice), he is called Kratu.

अध्याय ९८

श्लोक 5

ईश्वर उवाच: कस्मात् संक्लिश्यसे बाले कथ्यतां यद्विवक्षितम् ।अहं हि भास्करो ऽप्येको नानात्वं नैव विद्यते

īśvara uvāca: kasmāt saṃkliśyase bāle kathyatāṃ yadvivakṣitam / ahaṃ hi bhāskaro 'pyeko nānātvaṃ naiva vidyate

हिन्दी अर्थ

मैंने अपनी किरणों द्वारा इसको बढ़ाया है, इसका नाम मारिषा है, व॒क्षों ने हो इसको उत्पन्न किया है। सोम के (मेरे) गर्भ में बढ़ते वाली यह खुन्दरी कन्या तुम सबों की स्त्री होगी। तुम लोगों के भाधे तेज से तथा मेरे आधे तेज से इसमें परम विद्वान दक्ष नामक प्रजापति उत्पन्न होगा। तुम सबों के ततः सोमस्य वचनाज्जगहुस्ते प्रचेतसः । संहत्य कोप॑ वृक्षेस्यः पत्नीं धर्मेण मारिषाम् ३७

English

"I am the third" (Aham-Trtlya), saying thus the third son was born. So he is called Atri. The fourth son was born with sharp pointed hairs. Hence he is remembered as Pulastya.

अध्याय ९८

श्लोक 6

प्रभोवाच: नान्यो देवः स्त्रियः शम्भो विना भर्त्रा क्वचित्प्रभो ।सगुणो निर्गुणो वापि धनाढ्यो वाप्यकिंचनः

prabhovāca: nānyo devaḥ striyaḥ śambho vinā bhartrā kvacitprabho / saguṇo nirguṇo vāpi dhanāḍhyo vāpyakiṃcanaḥ

हिन्दी अर्थ

ददौ स दश धर्माय कश्यपाय त्रयोदश । कालस्य मयने युक्ता: सप्तविशतिमिन्दवे ॥४ १ एभ्यो दत्त्वा ततोष्न्या वे चतस्नोरिष्टनेमिने । है चेव बाहुपुत्राय है चवाडिगरसे तथा ॥

English

The son born with long hairs is remembered as Pulaha. He who was born out of the Vasu (fire?) was called Vasuman. He is called Vasistha by those who know the truth, by the expounders of Vedas. Thus these six great sages are the mental sons of Brahma.

अध्याय ९८

श्लोक 7

प्रियो वा यदि वा द्वेष्यः स्त्रीणां भर्तैव दैवतम् ।दुर्भगत्वेन दग्धाहं सखीमध्ये सुरेश्वर ।भर्त्तर् यल्लब्धसौख्यास्मि तेन क्लिश्याम्यहं भृशम्

priyo vā yadi vā dveṣyaḥ strīṇāṃ bhartaiva daivatam / durbhagatvena dagdhāhaṃ sakhīmadhye sureśvara / bharttar yallabdhasaukhyāsmi tena kliśyāmyahaṃ bhṛśam

हिन्दी अर्थ

कन्यामेकां कृशाश्वाय तेम्यो5पत्यं निबोधत ४२ अन्तर चाक्षुषस्यात्र मनोः षष्ठ तु हीयते । सनोरवेबस्व॒तस्थापि सप्तभस्य प्रजापते: ॥ तासु देवा: खगा गावो नागा दितिजदानवाः। गन्धर्वाप्सरसश्चव जज्ञिरेबन्याश्च जातयः ४४

English

Gf. Brhad-devala V. 97-101 for the story of the births of Bhrgu, Angiras and Atri. Etymologies of these names also are borrowed therefrom though grammarians offer different derivations.

अध्याय ९८

श्लोक 8

ईश्वर उवाच: वल्लभा भास्करस्यैव मत्प्रसादाद्भविष्यसि

īśvara uvāca: vallabhā bhāskarasyaiva matprasādādbhaviṣyasi

हिन्दी अर्थ

ततः प्रभृति लोके5स्मिस्त्रजा मैथुनसंभवाः । संकल्पाइशंनात्स्पर्शात्पूवेंषां सृष्टिरुच्यते

English

They maintain the continunity of the worlds. These subjects are developed and nurtured by them. Hence Brahma s sons are mentioned as Prajapatis.

अध्याय ९८

श्लोक 9

पार्वत्युवाच: अप्रमाणं भवद्वाक्यं भास्करो ऽपि करिष्यति ।वृथा क्लेशो भवेदस्याः प्रभायाः परमेश्वर

pārvatyuvāca: apramāṇaṃ bhavadvākyaṃ bhāskaro 'pi kariṣyati / vṛthā kleśo bhavedasyāḥ prabhāyāḥ parameśvara

हिन्दी अर्थ

तेजोबल के कारण एवं अग्नि द्वारा अग्नि के समान परम तेजस्वी हो वह इस जलकर नष्ट हुई बसुधा का तथा सारी प्रजाओं का पालन पोषण करेगा ३३-३६। चन्द्रमा के ऐसा करने पर प्रचेताओं ने वज्षों पर से अपना क्रोध हटा लिया और धर्मंपूर्वक मारिया को पत्नी रूप में वरण किया तदनस्तर उन सबों ने मावसतिक संकल्प से मारिषा में गर्भाधान किया । उन दस प्रचेताओं के अंश से मारिषा में दक्ष नामक प्रजापति उत्पन्न हुए, जो चन्द्रमा के अंथ के कारण परम पराक्रमी तथा महान तेजस्वी थे । प्राचीन काल में सर्वप्रथम उन दक्ष ने केवल मानसिक संकल्प से प्रजा सृष्टि की, स्त्री-पुरुष सम्भोग द्वारा नहीं ।३७-३९। उन दक्ष ने पहले अचरों को, घरों को, द्विपदों (मनुष्यों) को तथा चतुष्पदों को मानसिक संकल्प द्वारा उत्पन्न कर तदनन्तर स्त्रियों की सृष्टि की । उनमें से दस धर्म को, तेरह कश्यप को, तथा समय के विभाजन में नियुक्त सत्ताईस

English

Others called Pitrs were created by these great sages alone. The seven groups of sages are well known in the world, viz. Maricas,Bhargavas, Ahgirasas, Paulastyas, Paulahas, Vasisthas and Atreyas; these groups of Pitrs are well-known in the world.

अध्याय ९८

श्लोक 10

उमावाक्यान् महेशानध्यातस्तिमिरनाशनः ।आगतो गगनाद्भानुर्नर्मदोत्तररोधसि

umāvākyān maheśānadhyātastimiranāśanaḥ / āgato gaganādbhānurnarmadottararodhasi

हिन्दी अर्थ

कन्याओं को चन्द्रमा को दिया। इन सब को देने के बाद चाह कन्याओं को भरिष्टनेमि को, दो बाहुपन्न को, दो अज्जिरा को तथा एक कृशाश्व को दिया। अब उनके पुत्र-पौत्रादिकों का विवरण सुनिये

English

These three Ganas have been briefly mentioned before: They are Apurvas (Rare), Prakdsas (Brilliant) and Jyolifmaiitas (Illuminated ones).

अध्याय ९८

श्लोक 11

भानुरुवाच: आहूतो ऽस्मि कथं देव ह्यघासुरनिषूदन

bhānuruvāca: āhūto 'smi kathaṃ deva hyaghāsuraniṣūdana

हिन्दी अर्थ

इस अवधि में छठवाँ चाक्षुष नामक मन्वन्तर व्यतीत हो गया और सातव प्रजापति वेबस्वत मनु का भी' कार्यकाल समाप्त हुआ। उन दक्ष की कन्याओं में देवता, पक्षी, नाग, देत्य दानव, गस्धवं, अप्सरायें, एवं अन्यान्य जातियाँ उत्पन्न हुईं इसके उपरान्त इस पृथ्वी लोक में प्रजाएँ सम्भोग के ढ्वारा उत्पन्न होने लगीं । उनके पूर्व उत्पसन होने वालों की सृष्टि संकल्प, दर्शन एवं स्पर्श से होतो कही जाती है देवानां दानवानां च देवर्षोणां च ते शुभ: संभवः कथित: पूर्व दक्षस्य च महात्मनः

English

Their king is lord Yama and they have wiped off their sins by their (religious) observances. There are other Prajapatis also. Listen to them attentively.

अध्याय ९८

श्लोक 12

ईश्वर उवाच: प्रभां पालय भो भानो संतोषेण परेण हि

īśvara uvāca: prabhāṃ pālaya bho bhāno saṃtoṣeṇa pareṇa hi

हिन्दी अर्थ

ज्येष्ठथ' कानिष्ठ्यमप्येषां पूर्व नासीद्विजोत्तमाः । तप एवं गरीयोभूत्प्रभावश्चेव कारणमू.

English

There are other Prajapatis many in number, viz. Kardama, Kasyapa, Sesa (?), Vikranta, Susruvas, Bahuputra, Kumara, Vivasvan, Sucilravas, Pracetas, Aristanemi, Bahula and many others. 1

अध्याय ९८

श्लोक 13

उमोवाच: प्रभाया मन्दिरे नित्यं स्थीयतां हिमनाशन ।अग्रपत्नी समस्तानां भार्याणां क्रियतां रवे

umovāca: prabhāyā mandire nityaṃ sthīyatāṃ himanāśana / agrapatnī samastānāṃ bhāryāṇāṃ kriyatāṃ rave

हिन्दी अर्थ

इमां विसृष्टि यो बेद चाक्षुपस्प चराचरम् । प्रजानामायुरुत्तीर्ण : स्वरगंलोके महीयते ५२ एष सर्ग: समाख्यातश्राक्षुपस्थ समासत: । इत्येते घड्विसर्गा हि क्रान्ता मन्वन्तरात्मकाः ॥ ऋषियां ने कहा--सूतजी ! देवताओं, दानवों तथा देवियों की उत्पत्ति तुमने महात्मा दक्ष की उत्पत्ति के पूर्व बतलाई है और प्रजापति दक्ष का जन्म प्राण से बतलाया है, उस महातपस्वी ने फिर किस प्रकार प्रचेताओं के पुत्र होने का गौरब्पूर्ण पद प्राप्त किया--हम लोगों के इस सन्देह को तुम दूर करो, तथा यह भी बतलाओ कि वह चन्द्रमा का दोहित्र (नाती) होकर फिर उसका इबशुर कंसे हुमा

English

Kusoccayas and Valakhilyas had become great sages. They had the speed of the mind. They could go anywhere. They became Emperors.

अध्याय ९८

श्लोक 14

भानुरुवाच: एवं देवि करिष्यामि तव वाक्यं वरानने ।एतच्छ्रुत्वा प्रभाहूता प्रत्युवाच महेश्वरम्

bhānuruvāca: evaṃ devi kariṣyāmi tava vākyaṃ varānane / etacchrutvā prabhāhūtā pratyuvāca maheśvaram

हिन्दी अर्थ

सूत ने कहा--ऋषिवरयंव॒न्द ! यह जन्म और निरोध (विनाश वा निवृत्ति) सर्वंदा स्वंक्षामान्य जीवों में हुभा करते हैं, ऋषिगण तथा विद्वान लोग इस विषय में कभी मोह को नहीं प्राप्त होते । है द्विजगण ! ये दक्षादि प्रजापति गण प्रत्येक युग में उत्पन्न होते रहते हैं ओर फिर से वे विनाश को प्राप्त हो जाते हैं-इस

English

The groups of sages called Vaikhanasas are honoured by Brahmanas. They were born of the sacred ashes. They are engaged in penance and learning.

अध्याय ९८

श्लोक 15

प्रभोवाच: स्वांशेन स्थीयतां देव मन्मथारे उमापते ।एकांशः स्थाप्यतामत्र तीर्थस्योन्मीलनाय च

prabhovāca: svāṃśena sthīyatāṃ deva manmathāre umāpate / ekāṃśaḥ sthāpyatāmatra tīrthasyonmīlanāya ca

हिन्दी अर्थ

भाव नहीं रहा है, केवल तफ्स्या ही इनकी महत्त्वपूर्ण मानी जाती थी तथा इनके व्यक्तिगत प्रभाव ही इनकी महत्ता के कारण होते रहे। चाक्षुष भनु की इस चराचर सृष्टि-वृत्तान्त को जो व्यक्ति भली भाँति जानता है बह अपनी सारी आयु सुखपूर्वंक समाप्त कर अन्त में स्वर्ग लोक में पुजित होता है ।४६-५२। चाक्षुष मन्वन्तर की सृष्टि सक्षेप में वर्णत कर चुका। इस उपर्युक्त छ मल्वन्तरों का, जो स्वायम्भुव मनु से आरम्भ कर चाक्षष मनु के अन्त तक चलते हैं, सक्षेप में क्रमिक वर्णन किया जा चुका । है द्विजवर्यबुल्द ! इन सृष्टि वृत्तान्तों को अपनी जानकारी के अनुसार मैं आप लोगों को बतला चुका, इनका विस्तारपूवंक वर्णन बेबस्वत मन्वन्तर के समान

English

The handsome Asvinas were born of his ears. The pure ones born of the eyes are known as Ak$arajas.

अध्याय ९८

श्लोक 16

श्रीमार्कण्डेय उवाच: सर्वदेवमयं लिङ्गं स्थापितं तत्र पाण्डव ।प्रभासेश इति ख्यातं सर्वलोकेषु दुर्लभम्

śrīmārkaṇḍeya uvāca: sarvadevamayaṃ liṅgaṃ sthāpitaṃ tatra pāṇḍava / prabhāseśa iti khyātaṃ sarvalokeṣu durlabham

हिन्दी अर्थ

अनन्ता नातिरिक्ताश्व सब सर्गा विवस्वतः । आरोग्यायुः प्रमाणेन धर्मंत: कामतोथेतः ॥

English

The elder Prajapatis were born of his vessels. The sages were born of the hair pores in the skin and the sweat dirt.

अध्याय ९८

श्लोक 17

अन्यानि यानि तीर्थानि काले तानि फलन्ति वै ।प्रभासेशस्तु राजेन्द्र सद्यः कामफलप्रदः

anyāni yāni tīrthāni kāle tāni phalanti vai / prabhāseśastu rājendra sadyaḥ kāmaphalapradaḥ

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमहापुराणे वायुप्रोक्ते पृथुवंशानुकीत॑नं नाम त्रिषष्टितमोध्थ्याय: सप्तमे त्वथ पर्याये मनोबेंवस्व॒तस्थ ह । सारीचास्कश्यपादेवा जज्ञिरे परसर्षयः

English

From his tears and cry were born the terrible mouths Niryasas (?), the junctions of fortnights, years, days and nights and the terrible light of Pitrs.

अध्याय ९८

श्लोक 18

माघमासे सिते पक्षे सप्तम्यां च विशेषतः ।अश्वं यः स्पर्शयेत् तत्र यथोक्तब्राह्मणे नृप

māghamāse site pakṣe saptamyāṃ ca viśeṣataḥ / aśvaṃ yaḥ sparśayet tatra yathoktabrāhmaṇe nṛpa

हिन्दी अर्थ

जान लेना चाहिए । वैवस्वत मनु के सभी सृष्टि कार्य आरोग्य, आयु, धर, अर्थ एवं काम सभी दृष्टियों से अनन्त तथा दूसरे सर्गों के समान ही हैं, जो असूया (ग्रुणों में दोषारोपण करने की प्रवृत्ति) भाव को छोड़कर इसको पढ़ता है वह आरोग्य, आयु, धम्म, अर्थ एवं काम इन सभी मनोरथों को प्राप्त करता है। अब सम्श्रति वर्तमान महात्मा वैवस्वत के सृष्टि क्रम का यथावसर और संक्षेप बिस्तार में वर्णन कर रहा हूं,

English

Raudra they say is the blood. Lohita is remembered as gold. That should be known as Maitra also. The smoke is remembered as animals.

अध्याय ९८

श्लोक 19

इन्द्रत्वं प्राप्यते तेन भास्करस्याथवा पदम् ।स्नात्वा परमया भक्त्या दानं दद्याद् द्विजातये

indratvaṃ prāpyate tena bhāskarasyāthavā padam / snātvā paramayā bhaktyā dānaṃ dadyād dvijātaye

हिन्दी अर्थ

श्री बायुमहापुराण में पृथु-बंशानुकीतंन नामक तिरसठवाँ अध्याय समाप्त ॥६३॥। बैवस्वत मन्वन्तर की सृष्टि का वर्णन

English

Different Puranas give different lists of Prajapatis. For example, the lists in Mbh., Mt. P. or Garuda differ from our text (and Bd. P) and inter se.

अध्याय ९८

श्लोक 20

गोप्रदाता लभेत्स्वर्गं सत्यलोकं वरेश्वर ।सर्वाङ्गसुन्दरीं शुभ्रां क्षीरिणीं तरुणीं शुभाम्

gopradātā labhetsvargaṃ satyalokaṃ vareśvara / sarvāṅgasundarīṃ śubhrāṃ kṣīriṇīṃ taruṇīṃ śubhām

हिन्दी अर्थ

खूतजी ने कहा- ऋषिवृन्द ! सातवें वेवस्वत नामक मन्वत्तर में मरीचि-पुत्र कश्यप से देवताओं एवं महर्षियों की उत्पत्ति हुईं ।१। उसमें आदित्यगण, वंसुगण, रुद्रगण, साध्यगण, विश्वेदेवगण, मरुद्गण, भ्ृगरुपुत्र

English

The flames are Rudras and Adityas. Divine human beings were born of the burning coal and the flame.

अध्याय ९८

श्लोक 21

सवत्सां घण्टासंयुक्तां कांस्यपात्रावदोहिनीम् ।ददते ये नृपश्रेष्ठ न ते यान्ति यमालयम्

savatsāṃ ghaṇṭāsaṃyuktāṃ kāṃsyapātrāvadohinīm / dadate ye nṛpaśreṣṭha na te yānti yamālayam

हिन्दी अर्थ

आदित्या बसवो रुद्रा: साध्या विश्वे मरुद्गणा:। भृगवोड्धिरसश्चेव ह्ष्टो देवगणाः स्मृता: भृगोस्तु भागंबो देवो ह्यज्िरोडछझूगिरसः सुतः । वेवस्वतेउन्तरे ह्यस्मिश्नित्यं ते छन्दजाः सुरा: ॥ “एते४पि च गसिष्यन्ति महतः कालपर्ययात्

English

Brahma born of Brahman is the primordial being in the world. Requesting (for the hand of) a virgin, the sages told him who bestowed everything:

अध्याय ९८

श्लोक 22

अथ यः परया भक्त्या स्नानं देवस्य कारयेत् ।स प्राप्नोति परं लोकं यावदाभूतसम्प्लवम्

atha yaḥ parayā bhaktyā snānaṃ devasya kārayet / sa prāpnoti paraṃ lokaṃ yāvadābhūtasamplavam

हिन्दी अर्थ

त्रलोक्ये यानि सत्त्वानि गतिमन्त्यबलानि च। अभिभूयावतिष्ठन्ते धर्म: कारणरपि ८

English

"Brahma, the eldest among Suras, is delighted with Devas. These lords will be giving birth to all the subjects.

अध्याय ९८

श्लोक 23

दौर्भाग्यं नाशमायाति स्नानमात्रेण पाण्डव ।तत्र तीर्थे तु यो भक्त्या कन्यादानं प्रयच्छति

daurbhāgyaṃ nāśamāyāti snānamātreṇa pāṇḍava / tatra tīrthe tu yo bhaktyā kanyādānaṃ prayacchati

हिन्दी अर्थ

भूत भव्य भविष्य तत्स्मृत॑ कत्रय॑ द्विजे:। भूलोको5य॑ स्मृतो भूमिरन्तरिक्ष भूवं स्पृतम् ॥ एवं अगिरापूत्र --ये आठ देवगण स्मरण किये जाते हैं।२। इनमें आदित्यगण, मरुदगण और रुद्रगण-ये कश्यप के पृत्र हैं। साध्यगण, वसुगण एवं विष्वेदेबगण--ये तीन गण धर्म के पुत्र कहे गये हैं । भूगु के भागव एवं अंगिरा के अंगिरस गण पुत्र हैं, इस वेवस्वत मन्वन्तर में ये सुर गण 8न्‍्दों से उत्पन्न होने वाले कहे गये हैं। महाप्रलय पयन्त ये लोग भी सृष्टि के कार्यों के साथ चलेंगे अर्थात् महाप्रलय पयंन्त इनकी भी सत्ता विद्यमान

English

All of them are Prajapatis. All of them are sages. These rites will uphold these worlds with his grace.

अध्याय ९८

श्लोक 24

ब्राह्मणाय विवाहेन दापयेत् पाण्डुनन्दन ।समानवयसे देया कुलशीलधनैस्तथा

brāhmaṇāya vivāhena dāpayet pāṇḍunandana / samānavayase deyā kulaśīladhanaistathā

हिन्दी अर्थ

रहेगी ३-४। यह शुभ वर्तमान देव-'द्धति मरीचिनन्दत कश्यप के वंशधरों का जानना चाहिए, इन सबों का स्वामी इन्द्र साम्प्रत नामक महाबलशाली है। अतीत, भविष्यत् तथा वर्तमान कालीन जो मन्वन्तरों के इन्द्रगण हैं, वे सभी लक्षणों में एक समान हैं। वे सब के सब भूत, भविष्यत् तथा वर्तमान काल के स्वामी हैं, सहस्र भाँखोंवाले तथा पुरन्दर हैं, मघवान् हैं, श्वड़ी हैं, तथा वज्ञ धारण करनेवाले हैं। सभी सो यज्ञों को पूर्ण

English

They have developed couples increasing your splend¬ our. Among Devas there are learned ones in Vedas. All the saintly kings are also such.

अध्याय ९८

श्लोक 25

ये ददन्ते महाराज ह्यपि पातकसंयुताः ।तेषां पापानि लीयन्ते ह्युदके लवणं यथा

ye dadante mahārāja hyapi pātakasaṃyutāḥ / teṣāṃ pāpāni līyante hyudake lavaṇaṃ yathā

हिन्दी अर्थ

करनेवाने तथा व्यक्तिगत सेकड़ों गुण-समूहों से उत्पन्न हैं !५-७॥ तीनों लोकों में जितने भी शक्तिशाली, गतिमान् अथवा निबल प्राणी हैं, इन्द्र उन सबों से--धर्मादि कार्यों में भी--बढ़े-चढ़े रहते हैं। तेज से, तप से, बुद्धि से, बल, शास्त्रीय ज्ञान तथा पराक्रम से वे सभी प्राणियाँ में श्रेष्ठ होते हैं । वे जिस प्रकार अत्यन्त प्रभावशाली तथा भूत, भविष्य एवं वर्तमान के स्वामी होते हैं, उन सब का वर्णन मैं कर रहा हें, सुनिये ।८-९॥ ब्राह्मणों ने भूत, भव्य एवं भविष्य--थे तीन लोक बताये हैं। भूलोक यह प्रथ्वी तथा अन्तरिक्ष (आकादमण्डल) भुवल्ञोक स्मरण

English

All of them are devoted to the Vedic Mantras. They have been born out of the attributes of Prajapatis. The infinite Brahman is the Truth and the greatest penance.

अध्याय ९८

श्लोक 26

स्वामिद्रोहकृतं पापं निक्षेपस्यापहारिणि ।मित्रघ्ने च कृतघ्ने च कूटसाक्ष्यसमुद्भवम्

svāmidrohakṛtaṃ pāpaṃ nikṣepasyāpahāriṇi / mitraghne ca kṛtaghne ca kūṭasākṣyasamudbhavam

हिन्दी अर्थ

इदमधे नास्ति क. पुस्तके ।

English

O lord, all of us are your own children, the Brahman (Vedas), the Brahmanas and all the worlds including the mobile and the immobile beings.

अध्याय ९८

श्लोक 27

तद्ग्रामोद्यानभेदोत्थं परदारनिषेवणम् ।वार्द्धुषिकस्य यत्पापं यत्पापं स्तेयसम्भवम्

tadgrāmodyānabhedotthaṃ paradāraniṣevaṇam / vārddhuṣikasya yatpāpaṃ yatpāpaṃ steyasambhavam

हिन्दी अर्थ

ध्यायता पुत्रकामेण ब्रह्मणाउग्रे विभाषितम् । भ्रिति व्याह॒तं पूर्व भूलोंकोयमभत्तदा ११ भूसत्तायां स्मृतों धातुस्तथाइसों लोकदशने । भतत्वाहृर्श नत्वाच्च भूलोको5यमभृत्ततः अतोथ्य॑ प्रथमो लोको भूतत्वाद्भद्विज: स्मृतः

English

Beginning with Marlci and including all the sages, we Devas are thinking about and longing for children by your (blessings)".

अध्याय ९८

श्लोक 28

कूपभेदोद्भवं यच्च बैडालव्रतधारिणः ।दाम्भिकं वृक्षच्छेदोत्थं विवाहस्य निषेधजम्

kūpabhedodbhavaṃ yacca baiḍālavratadhāriṇaḥ / dāmbhikaṃ vṛkṣacchedotthaṃ vivāhasya niṣedhajam

हिन्दी अर्थ

भूतेइस्मिन्भवदित्युक्तं द्वितीय॑ ब्रह्मणा पुनः । भवत्युत्पद्ममनेन कालशब्दो5यमुच्यते

English

(Siita said) O highly blessed ones, Devas along with sages identifying (themselves) with the abodes and the time are born in this family during the Yajna.

अध्याय ९८

श्लोक 29

आरामस्थतरुच्छेदमगम्यागमनोद्भवम् ।स्वभार्यात्यजने यच्च परभार्यासमीहनात्

ārāmasthatarucchedamagamyāgamanodbhavam / svabhāryātyajane yacca parabhāryāsamīhanāt

हिन्दी अर्थ

भवनात्तु भुवलोको निरुक्तज्ञनिरुच्यते । अन्तरिक्ष भुवस्तस्माद्वितोयो लोक उच्यते उत्पन्ने तु भूवलकि तृतीय ब्रह्मणा पुनः । भव्येति व्याहृतं यस्मा:ड्ू व्यो लोकस्तदा5भवत् १५ अनागते भव्य इति शब्द एब विभाव्यते । तस्माउूव्यो हासों लोको नामतस्तु दिवं स्‍्पृतम्॒

English

In that very form, they may not establish these sub¬ jects. They may be stabilised from the beginning till the end of the Yugas.

अध्याय ९८

श्लोक 30

ब्रह्मस्वहरणे यच्च गरदे गोविघातिनि ।विद्याविक्रयणोत्थं च संसर्गाद्यच्च पातकम्

brahmasvaharaṇe yacca garade govighātini / vidyāvikrayaṇotthaṃ ca saṃsargādyacca pātakam

हिन्दी अर्थ

स्व॒रित्युक्तं तृतीयोडन्यो भाव्यो लोकस्तदाउभवत् । भाव्य इत्येष धातुर्वे भाव्ये काले विभाव्यते

English

Then the preceptor of the world (Brahma), without any further thought, spoke—"O Devas, it was after deciding like this that the subjects had been created by me. There is no doubt about this. These sages have been born in your race".

अध्याय ९८

श्लोक 31

श्वबिडालवधाद्घोरं सर्पशूद्रोद्भवं तथा ।भूमिहर्तुश्च यत्पापं भूमिहारिणि चैव हि

śvabiḍālavadhādghoraṃ sarpaśūdrodbhavaṃ tathā / bhūmihartuśca yatpāpaṃ bhūmihāriṇi caiva hi

हिन्दी अर्थ

भ्रितोय॑ं स्पृता भूमिरन्तरिक्ष भव स्मृतम् । दिव्य स्मृतं तथा भाव्यं तअलोक्यस्यष संग्रहः १८ त्रेलोक्ययुक्त्व्याहारेस्तिख्रो व्याहृतयो5भवन् । नाथ इत्येष धातु्वे धातुज्ञ: पालने स्मृतः १६ किया गया है। स्वगंलोक भव्य नाम से स्मरण किया गया है, उनके लक्षणों को बतला रहा हूं । पुन्र उत्पन्न करने की इच्छा से ब्रह्मा ने ध्यानावस्थित होकर सर्वप्रथम 'भूः” इस अक्षर का उच्चारण किया, उसी समय यह भूलोक हुआ । भू धातु का सत्ता अर्थात् विद्यमान रहने अर्थ में प्रयोग होता है तथा लोक-दर्शंन, (लोगों के देखने योग्य) भर्थ में भी उसकी प्रसिद्धि है, विद्यमान रहने एवं लोगों के दृष्टिगोचर होने के कारण यह भूमि

English

Among them I shall recount in detail and in proper sequence the race of Bhygu, the ancient noble soul and the first Prajapati.

अध्याय ९८

श्लोक 32

मा ददस्वेति यत्पापं गोवह्निब्राह्मणेषु च ।तत्पापं याति विलयं कन्यादानेन पाण्डव

mā dadasveti yatpāpaṃ govahnibrāhmaṇeṣu ca / tatpāpaṃ yāti vilayaṃ kanyādānena pāṇḍava

हिन्दी अर्थ

भूलोक नाम से प्रसिद्ध हुईं। यही कारण है कि ब्राह्मणो ने इसे विद्यमान होने के कारण प्रथम लोक माना है ।१०-१२। इस भूलोक के आविर्भाव हो जाने पर ब्रह्मा-ने फिर 'भवत्' ऐसा दूसरा उच्चारण किया। उत्पन्न (उच्चारित) होने वाले इस भवत् शब्द के द्वारा वर्तमान काल में होने वाले का अवगम (बोध) होता है, निरुक्‍त) के जानने वाले लोग भवन (होने वाले) इस शब्द से भुवलोंक की निरुक्ति करते हैं। अतः अन्तरिक्ष

English

Bhrgu had two unequalled, excellent and auspicious wives of noble families. One was the daughter ofHiranyakasipu, famous by the name 'Divya' and the other was the fair-com- plexioned daughter of Puloman, named Pauloml. Divyabore to Bhrgu the planet Sukra (Venus) who was the preceptor of Dcvas and Asuras, who was the son of Kavi, and was known as Kavya, Sukra and Usanas. He was the most excellent among the knowers of Vedas. Sukra's wife named Ahgl was the mental daughter of the Soma-drinking Pitfs and very famous. She gave birth to four sons.

अध्याय ९८

श्लोक 33

स गत्वा भास्करं लोकं रुद्रलोके शुभे व्रजेत् ।क्रीडते रुद्रलोकस्थो यावद् इन्द्राश्चतुर्दश

sa gatvā bhāskaraṃ lokaṃ rudraloke śubhe vrajet / krīḍate rudralokastho yāvad indrāścaturdaśa

हिन्दी अर्थ

. द्वितीय भुवलोंक के नाम से कहा जाता.है। १३-१४। भृवलोंक के आविर्भूत हो जाने पर ब्रह्मा ने भव्य' इस तृतीय शब्द का उच्चारण किया, जिससे भव्यलोक का अविर्भाव हुआ यह भव्य हब्द भविष्यत्काल के अर्थ में जाता है, इसी से यह लोक भव्य लोक हुआ, नाम से यह दिव (स्वर्ग) लोक से. स्मरण किया जाता है; तदन- स्‍्तर ब्रह्मा ने अन्य तीसरे 'स्वः' इस शब्द का उच्चारण किया, जिससे भाव्य लोक का प्रादुर्भाव हुआ । भाव्य इस धातु का भविष्यत्काल के अथे में प्रयोग होता है। यह भूमि भूलोक के अर्थ में, अन्तरिक्ष भुवलोक के अर्थ में तथा स्वगलोक भाव्य लोक के अर्थ में कहे गये हैं--यही तीनों लोकों के सपृह हैं ।१५-१५। इन्हीं तीनों लोकों के सयुक्त उच्चारणों से तीनों (भू: भुवः स्व:) महाव्याहृतियाँ हुईं । धातु के जानने वाले लोग नाथ धातु

English

He was endowed with Brahman's splendour and the most excellent among the knowers of Brahman. Sukia begot four sons of her, viz. Tvastr, Varutrin, Sanda and Amaika. They resembled the sun and in their prowess they were equal to Brahma.

अध्याय ९८

श्लोक 34

सर्वपापक्षये जाते शिवे भवति भावना ।एतद्व्रजति यस्तीर्थं प्रभासं पाण्डुनन्दन

sarvapāpakṣaye jāte śive bhavati bhāvanā / etadvrajati yastīrthaṃ prabhāsaṃ pāṇḍunandana

हिन्दी अर्थ

१. प्रकृति-प्रत्यय गादि अवयबों के अर्थ को निचोड़ कर एक अर्थ को प्रतिपादन करने वाला वेद का एक अडद्भ अथवा व्याकरण ।

English

Ranjana, Prthurasmi and the scholarly Brhadgiras were the sons of Varutrin. They were devoted to Brahman and became the priests of Suras. They approached Manu with the motive of spoiling sacrificial rites. On seeing Dharma being violated, Indra spoke to Manu:

अध्याय ९८

श्लोक 35

सर्वतीर्थफलं प्राप्य सो ऽश्वमेधफलं लभेत् ।गोप्रदानं महापुण्यं सर्वपापक्षयं परम् ।प्रशस्तं सर्वकालं हि चतुर्दश्यां विशेषतः

sarvatīrthaphalaṃ prāpya so 'śvamedhaphalaṃ labhet / gopradānaṃ mahāpuṇyaṃ sarvapāpakṣayaṃ param / praśastaṃ sarvakālaṃ hi caturdaśyāṃ viśeṣataḥ

हिन्दी अर्थ

५४५ द वायुपुराणम् यस्माद्यूतस्य लोकस्य भव्यस्य भवतस्तदा । लोकत्रयस्य नाथास्ते तस्मादिय्धा दिजे: स्मृताः

English

"I would rather have the sacrifice performed through you than through these". On hearing these words of Indra, they fled from that place.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vayu Purana — Chapter 98
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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