Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
19
अध्याय 19 / 40

Adhyāya 19

अध्याय 19

95 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ95 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय १९

श्लोक 1

स्वा॒द्वीं त्वा॑ स्वा॒दुना॑ ती॒व्रां ती॒व्रेणा॒मृता॑म॒मृते॑न । मधु॑मतीं॒ मधु॑मता सृ॒जामि॒ सᳪ सोमे॑न ।सोमो॑ऽस्य॒श्विभ्यां॑ पच्यस्व॒ सर॑स्वत्यै पच्य॒स्वेन्द्रा॑य सु॒त्राम्णे॑ पच्यस्व

svādvīṃ tvā svādunā tīvrāṃ tīvreṇāmṛtāmamṛtena | madhumatīṃ madhumatā sṛjāmi sa somena | somo'syaśvibhyāṃ pacyasva sarasvatyai pacyasvendrāya sutrāmṇe pacyasva

हिन्दी अर्थ

हम सोम को शरीर मे ही सुरक्षित कर। सोम कौ रक्षा करे लिए प्रभु का पूजन व कर्मो में व्याप्ति आवश्यश्क हे। प्रभु-स्मरणपूर्वक कर्मरत पुरुष सोम को वासनाओं से विनष्ट नहीं होने देता। १. गतमन्त्र में वर्णित स्रोमः=सोम वायोः=वायु के द्वारा पूतः=पवित्र होता है, अर्थात्

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], SWEET with the sweet, I sprinkle thee with Soma, strong with the strong, the nectar with the nectar, The honey-sweet with what is sweet as honey. Soma art thou. Get dressed for the Asvins. Get dressed for Sarasvatî. Get dressed for Indra the Good Deliverer.

अध्याय १९

श्लोक 2

परी॒तो षि॑ञ्च॒ता सु॒तᳪ सोमो॒ य उ॑त्त॒मᳪ ह॒विः ।द॒ध॒न्वा यो नर्यो॑ अ॒प्स्वन्तरा सु॒षाव॒ सोम॒मद्रि॑भिः

parīto ṣiñcatā suta somo ya uttama haviḥ | dadhanvā yo naryo apsvantarā suṣāva somamadribhiḥ

हिन्दी अर्थ

प्राणायाम के द्वारा सोम शरीर में ही गमनवाला होकर ऊर्ध्वं गमनवाला होता हे। ज्ानाग्नि के दीपन मे इसका व्यय होता है। इसके रक्षण से मनुष्य खूब क्रियामय जोवनवाला होता है ओर सदा प्रभु का मित्र बनता है १. प्रभु ' आभूति' से कहते है कि तेतर परिस्तरुतम्-शरीर में सर्वतः प्राप्त इस

English

Hence pour ye forth the flowing juice, Soma, best Sacrificial food. He who, man's friend, hath run within the waters hath with the pressing-stones poured out the Soma.

अध्याय १९

श्लोक 3

वा॒योः पू॒तः प॒वित्रे॑ण प्र॒त्यङ्क्सोमो॒ अति॑द्रुतः ।इन्द्र॑स्य॒ युज्य॒: सखा॑

vāyoḥ pūtaḥ pavitreṇa pratyaṅksomo atidrutaḥ | indrasya yujya: sakhā

हिन्दी अर्थ

श्रद्धा सोम को पवित्र करती हे, क्योंकि यह वासनाओं का निवारण करती है, हमें स्पूर्ति-सम्पतन व कर्मठ बनाती है तथा शक्तियों के विस्तार के लिए प्रेरित करती ठै। शुक्रेण देव देवता: पिपृग्धि रसेनान्नं यज॑मानाय धेहि ॥५॥ ९. सुतः = उत्पन्न हुञा सोमः यह सोम सुरया=( सुरा 10 ०ला11. 10 111€) शासन के

English

Purified by Vâyu's strainer, Soma that has passed away forward is Indra's proper friend. Purified by Vâyu's strainer, Soma that has passed away backward is Indra's proper friend.

अध्याय १९

श्लोक 4

पु॒नाति॑ ते परि॒स्रुत॒ᳪ सोम॒ᳪ सूर्य॑स्य दुहि॒ता ।वारे॑ण॒ शश्व॑ता॒ तना॑

punāti te parisruta soma sūryasya duhitā | vāreṇa śaśvatā tanā

हिन्दी अर्थ

हम रस व अन्न का सेवन करें। उससे उत्पन्न सोम हमारे ज्ञान, बल व तेज को बद्धाएगा, हमारी इच्दरियों की शक्ति का वर्धन करेगा, उल्लास का कारण बनेगा ओर हमें दिव्य गुणयुक्त जीवनवाला बनाएगा, अतः हम सोम को शरीर मेँ ही नियन्त्रित करें ( सुरया) । ऋषि :-आभूतिः। देवता- इन्द्रः। छन्द :-विराट्प्रक्रतिः। स्वरः-धेवतः॥

English

By means of this eternal sieve may Sûrya's Daughter purify The Soma that flows forth from thee.

अध्याय १९

श्लोक 5

ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं प॑वते॒ तेज॑ इन्द्रि॒यᳪ सुर॑या॒ सोम॑: सु॒त आसु॑तो॒ मदा॑य ।शु॒क्रेण॑ देव दे॒वता॑: पिपृग्धि॒ रसे॒नान्नं॒ यज॑मानाय धेहि

brahma kṣatraṃ pavate teja indriya surayā soma: suta āsuto madāya | śukreṇa deva devatā: pipṛgdhi rasenānnaṃ yajamānāya dhehi

हिन्दी अर्थ

प्रभु-उपासन हमारे जीवन में "मोद, आनन्द व महस्" को भरनेवाला होता है। १. गतमन्त्र में "प्रभु करे उपासन से 'महस्' की प्राप्ति होती है' एेसा कहा था। उसी का व्याख्यान प्रस्तुत मन्त्र मेँ करते है -तेजः असि-हे प्रभो! आप तेज के पुञ्ज हें, मूर्तिमान् तेज है। मयि-मुङ्ञमे तेजः=तेज का धेहि-आधान कीलजिए। मेरा यह अन्नमयकोश तेजस्वी

English

Soma with Wine, pressed; filtered for the banquet, cleanses priest, noble, brilliancy and vigour. God, with the Bright give Deities enjoyment: give food with flavour to the Sacrificer.

अध्याय १९

श्लोक 6

कु॒विद॒ङ्ग यव॑मन्तो॒ यवं॑ चि॒द्यथा॒ दान्त्य॑नुपू॒र्वं वि॒यूय॑ ।इ॒हेहै॑षां कृणुहि॒ भोज॑नानि॒ ये ब॒र्हिषो॒ नम॑ उक्तिं॒ यज॑न्ति ।उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽस्य॒श्विभ्यां॑ त्वा॒ सर॑स्वत्यै॒ त्वेन्द्रा॑य त्वा सु॒त्राम्ण॑ ए॒ष ते॒ योनि॒स्तेज॑से त्वा वी॒र्या॒य त्वा॒ बला॑य त्वा

kuvidaṅga yavamanto yavaṃ cidyathā dāntyanupūrvaṃ viyūya | ihehaiṣāṃ kṛṇuhi bhojanāni ye barhiṣo nama uktiṃ yajanti | upayāmagṛhīto'syaśvibhyāṃ tvā sarasvatyai tvendrāya tvā sutrāmṇa eṣa te yonistejase tvā vīryāya tvā balāya tvā

हिन्दी अर्थ

हम शक्ति-सम्पादन करके अपने को पापों व कष्टो से बचानेवाले हो। यदांपिपेष॑ मातर पुत्रः प्रमुदितो धय॑न्। एतत्तद॑ग्नेऽअनृणो भ॑वाम्यह॑तौ पितरौ १. गतमन्त्र के अनुसार शक्तिशाली बनकर उत्तम जीवनवाले माता-पिता उत्तम सन्तान को ही जन्म देते है। उस समय वे कहते है कि यदा=जव प्रमुदितः =प्रकृष्ट प्रसत्नतावाला,

English

What then? As men whose fields are full of barley, etc., as in X. 32. Taken upon a base art thou. I take thee for the Asvin Pair. Thee for Sarasvatî. Thee for Indra the Good Deliverer. This is thy home. For splendour thee. Thee for mans’ vigour. Thee for strength.

अध्याय १९

श्लोक 7

नाना॒ हि वां॑ दे॒वहि॑त॒ᳪ सद॑स्कृ॒तं मा सᳪ सृ॑क्षाथां पर॒मे व्यो॑मन् ।सुरा॒ त्वमसि॑ शु॒ष्मिणी॒ सोम॑ ए॒ष मा मा॑ हिᳪसी॒: स्वां योनि॑मावि॒शन्ती॑

nānā hi vāṃ devahita sadaskṛtaṃ mā sa sṛkṣāthāṃ parame vyoman | surā tvamasi śuṣmiṇī soma eṣa mā mā hisī: svāṃ yonimāviśantī

हिन्दी अर्थ

हम सदा उत्तम कर्मो मे व्यापृत रहकर प्राणापान कौ शक्ति से नीरोग लने तथा लान के द्वारा पवित्र बनें। यह नीरोगता व पवित्रता हमें सर्वाङ्धं सम्पूर्णं जौवनवाला १. पिक्छले मन्त्र मेँ देवों द्वारा यज्ञ-विस्तार का संकेत था। उसरी यज्ञ को जीवन में लाने करे लिए प्रस्तुत मन्त्र में कहते है कि दीश्चायै= (दीक्षायाः षष्ठ्यर्थ चतुर्थ ) त्रत ग्रहण का

English

For each of you is made a God-appointed place: so grant to me a portion in the highest sphere. Surâ the strong art thou. This here is Soma. Entering thine own place do me no mischief.

अध्याय १९

श्लोक 8

उ॒प॒या॒मगृ॑हीतो॒ऽस्याश्वि॑नं॒ तेज॑: सारस्व॒तं वी॒र्य॒मै॒न्द्रं बल॑म् ।ए॒ष ते॒ योनि॒र्मोदा॑य त्वा ऽऽन॒न्दाय॑ त्वा॒ मह॑से त्वा

upayāmagṛhīto'syāśvinaṃ teja: sārasvataṃ vīryamaindraṃ balam | eṣa te yonirmodāya tvā ''nandāya tvā mahase tvā

हिन्दी अर्थ

प्रभु कौ ओर चलनेवाले को सभी मास सुन्दर लगते है। महान् वीर वह है जो स्वयं भूखा रहकर भी ओरो को खिलाता है। आचार्य चरणों में रहनेवाला आत्म- नियन्त्रण व ज्ञान कौ साधना करता हे। १. तेरहवे मन्त्र मेँ का था कि “सोमक्रय' सोम का खरीदार बनने का निरूपक चि

English

Taken upon a base art thou. Splendour of Asvins, Sarasvatî's manly vigour, might of Indra. This is thy home. I take thee for enjoyment. I take thee for delight, take thee for greatness.

अध्याय १९

श्लोक 9

तेजो॑ऽसि॒ तेजो॒ मयि॑ धेहि वी॒र्य॒मसि वी॒र्यं मयि॑ धेहि बल॑मसि॒ बलं॒ मयि॑ धे॒ह्योजो॒ऽस्योजो॒ मयि॑ धेहि म॒न्युर॑सि म॒न्युं मयि॑ धेहि॒ सहो॑ऽसि॒ सहो॒ मयि॑ धेहि

tejo'si tejo mayi dhehi vīryamasi vīryaṃ mayi dhehi balamasi balaṃ mayi dhehyojo'syojo mayi dhehi manyurasi manyuṃ mayi dhehi saho'si saho mayi dhehi

हिन्दी अर्थ

सोम का क्रय तो उसने ही किया जिसने कि इसे अद्ध प्रत्यङ्ख में सिक्त करके रोगों का निवर्तक बनाया ओर आत्मशक्ति के विकास तथा ज्ञानवृद्धि के द्वारा परमात्मा-प्राप्ति का साधन बनाया। आखन्दी रूपध्राजासन्है वेद्य कुम्भी सुंराधानीं।

English

Thou art lustre: give me lustre, Thou art manly vigour: give me manly vigour. Thou art strength: give me strength. Thou art energy: give me energy. Thou art passion: Give me passion. Thou art conquering might: give me conquering might.

अध्याय १९

श्लोक 10

या व्या॒घ्रं विषू॑चिकोभौ॒ वृकं॑ च॒ रक्ष॑ति ।श्ये॒नं प॑त॒त्रिण॑ᳪ सि॒ᳪहᳪ सेमं पा॒त्वᳪह॑सः

yā vyāghraṃ viṣūcikobhau vṛkaṃ ca rakṣati | śyenaṃ patatriṇa siha semaṃ pātvahasaḥ

हिन्दी अर्थ

सोम को अपनी आसन्दी बनाकर हम राजा नें। इस सोमासन्दी से जीवन मै आनन्द का सञ्चार करे। ज्ञानी बनकर नियन्त्रित जीवनवाले हौं। उत्कृष्ट ज्ञानी बनकर सदा आत्मनिरीक्षण करे। कर्मो में लगे रहकर आधि-व्याधियों के वशमेंनहो। सन्तान माता-पिता कर अनुरूप

English

My she, Vishûchikâ, who guards these two, the tiger and the wolf, The lion and the wingd hawk, may she guard this man from distress.

अध्याय १९

श्लोक 11

यदा॑पि॒पेष॑ मा॒तरं॑ पु॒त्रः प्रमु॑दितो॒ धय॑न् । ए॒तत्तद॑ग्ने अनृ॒णो भ॑वा॒म्यह॑तौ पि॒तरौ॒ मया॑ ।स॒म्पृच॑ स्थ॒ सं मा॑ भ॒द्रेण॑ पृङ्क्त वि॒पृच॑ स्थ॒ वि मा॑ पा॒प्मना॑ पृङ्क्त

yadāpipeṣa mātaraṃ putraḥ pramudito dhayan | etattadagne anṛṇo bhavāmyahatau pitarau mayā | sampṛca stha saṃ mā bhadreṇa pṛṅkta vipṛca stha vi mā pāpmanā pṛṅkta

हिन्दी अर्थ

-सन्तान माता-पिता के अनुरूप होते है। ज्ञानी का ज्ञान सम्पन्न, निर्वासन का वासनाशुन्य ओर शक्तिसम्पत्त, सदगुणसम्पन्न का सद्गुणी तथा उन्नतिशील का उत्रतिशील ९.यत्-यदि अश्विनाप्राणापान अपेक्षित है तो आवश्यक है कि हम 'हविधरनिं' अग्निकुण्ड में हवि का आह्वान करें. अर्थात् घर में नियम से अग्निहोत्र कर। इससे

English

When, a delighted boy, I bruised my mother as I sucked her breast, Free from my debt, O Agni, I become thereby. My parents are by me unharmed. United are ye all: with bliss unite me. Parted are ye, keep me apart from evil.

अध्याय १९

श्लोक 12

दे॒वा य॒ज्ञम॑तन्वत भेष॒जं भि॒षजा॒ऽश्विना॑ ।वा॒चा सर॑स्वती भि॒षगिन्द्रा॑येन्द्रि॒याणि॒ दध॑तः

devā yajñamatanvata bheṣajaṃ bhiṣajā'śvinā | vācā sarasvatī bhiṣagindrāyendriyāṇi dadhataḥ

हिन्दी अर्थ

हमारा घ्र हविधनि हो, अग्नीध्र, एेन्द्रसदस् तथा पत्नीशाल हो। उसमें अग्निहोत्र, आचार्यो से ज्ञानोपार्जन, प्रभु का उपासन तथा गृह-सम्बन्धी कार्य उत्तमता खे सूचना पत्नीशालं गार्हपत्यः" शब्द से यह बात स्पष्ट है कि पत्नी का स्थान घर में है, उसे गृहकृत्यों मे निपुण बनकर घर के कार्यो को उत्तमता खे करना है।

English

The Asvins, the Physicians, Gods, stretched out the healing sacrifice, Sarasvatî with speech was a Physician, all with heroic powers investing Indra.

अध्याय १९

श्लोक 13

दी॒क्षायै॑ रू॒पᳪ शष्पा॑णि प्राय॒णीय॑स्य॒ तोक्मा॑नि ।क्र॒यस्य॑ रू॒पᳪ सोम॑स्य ला॒जाः सो॑मा॒ᳪशवो॒ मधु॑

dīkṣāyai rūpa śaṣpāṇi prāyaṇīyasya tokmāni | krayasya rūpa somasya lājāḥ somāśavo madhu

हिन्दी अर्थ

माता-पिता का उत्तम आचरण सन्तान को भी सच्चरित्र बनाता हे। ऋषि :-हैमवर्चिः। देवता-यजमानः। छन्दः-भुरिगुष्णिक्। स्वरः-ऋषभः।) १. पशुभिः=पशुओं से पशुन्=-पशुओं को आप्नोततिनप्राप्त करता है। यदि दौर्भाग्यवश माता-पिता में “कामः पशुः क्रोधः पशुः" इस उपनिषद् वाक्य के अनुसार काम-क्रोधादि

English

Symbols of Dîkshâ are grass buds, of Prâyanîya sprouts of corn, Of Soma-purchasing fried grains are symbols, Soma-shoots and meath.

अध्याय १९

श्लोक 14

आ॒ति॒थ्य॒रू॒पं मास॑रं महावी॒रस्य॑ न॒ग्नहु॑: ।रू॒पमु॑प॒सदा॑मे॒तत्ति॒स्रो रात्री॒: सुराऽऽसु॑ता

ātithyarūpaṃ māsaraṃ mahāvīrasya nagnahu: | rūpamupasadāmetattisro rātrī: surā''sutā

हिन्दी अर्थ

माता-पिता का पाशविक आचरण सन्तानो को पशुतुल्य बना देता हे। ऋषि:- हैमवर्चिः। देवता-सोमः। छन्द:- अनुष्टुप्। स्वरः--गान्धारः॥ धानाः करम्भः सक्तवः परीवापः पयो दधि। १. गतमन्त्रो का विषय “उत्तम सन्तान कौ प्राप्ति कैसे हो सकती ह ', यह था। अपनी

English

Âtithya's sign is Mâsara, the Gharma's symbol Nagnahu. Three nights with Surâ poured, this is the symbol of the Upasads.

अध्याय १९

श्लोक 15

सोम॑स्य रू॒पं क्री॒तस्य॑ परि॒स्रुत्परि॑ षिच्यते ।अ॒श्विभ्यां॑ दु॒ग्धं भे॑ष॒जमिन्द्रा॑यै॒न्द्रᳪ सर॑स्वत्या

somasya rūpaṃ krītasya parisrutpari ṣicyate | aśvibhyāṃ dugdhaṃ bheṣajamindrāyaindra sarasvatyā

हिन्दी अर्थ

हम हविष्य पदार्थो का ही सेवन करें, जिससे शुद्धान्तकरणोवाले हौ सकर। सक्तूनाश्शरूपं बरद॑रमुपवाकाः करम्भस्य ।॥ २२॥ १. गतमन्त्र मे धान आदि हविष्य अन्नं का वर्णन हु हे। प्रस्तुत मन्त्र मे उनमं स कुक के स्यानापन्न पदार्थो का उल्लेख करते है धानानाम् भृष्ट भुने हृए् यवो का रूपम्-

English

Emblem of purchased Soma is Parisrut, foaming drink effused: Indra's balm milked for Indra by the Asvins and Sarasvatî.

अध्याय १९

श्लोक 16

आ॒स॒न्दी रू॒पᳪ रा॑जासन्द्यै॒ वेद्यै॑ कु॒म्भी सु॑रा॒धानी॑ ।अन्त॑र उत्तरवे॒द्या रू॒पं का॑रोत॒रो भि॒षक्

āsandī rūpa rājāsandyai vedyai kumbhī surādhānī | antara uttaravedyā rūpaṃ kārotaro bhiṣak

हिन्दी अर्थ

हम मन्त्रवर्णित ' कुवल-गोधूम-बदर् व उपवाक ' का भोजनरूप में प्रयोग करे। पय॑सो रूपं यद्वां दध्नो रूपं कर्कन्धुंनि। ९. यत् यवाः त्ये जो जौ रै, वे पयसः रूपम्=दूध का स्थानापत्न भोजन है, २. दध्नः रूपम्=दही का स्थानापत्न भोजन कर्कन्धूनिस्थूल बदरी फल है ३. सोमस्य रूपम्-सोम

English

The Sacrificer's seat is the throne's symbol, the jar containing Surâ of the Altar. The mid-space is the northern Altar's symbol: the cloth for filtering is the physician.

अध्याय १९

श्लोक 17

वेद्या॒ वेदि॒: समा॑प्यते ब॒र्हिषा॑ ब॒र्हिरि॑न्द्रि॒यम् ।यूपे॑न॒ यूप॑ आप्यते॒ प्रणी॑तो अ॒ग्निर॒ग्निना॑

vedyā vedi: samāpyate barhiṣā barhirindriyam | yūpena yūpa āpyate praṇīto agniragninā

हिन्दी अर्थ

'यव-कर्कन्धु-वाजिन तथा आमिक्षा" ये हमारे प्रिय भोजन हौ। १. गतमन्त्रौ के अनुसार सात्विक अन्नो का सेवनकरने वाले “गुरु ओर शिष्य किस प्रकार अध्ययनाध्यापन करे" इस बात का प्रतिपादन करते हर् कहते हैँ कि है अध्यापक! आप आश्रावय (समन्तात् विद्योपदेशान् कुरु-द्०) सब प्रकार से विद्यार्थियों को ज्ञान का

English

Altar by Altar is produced, power, holy grass by holy grass. The stake is by the stake obtained, by Agni Agni carried forth.

अध्याय १९

श्लोक 18

ह॒वि॒र्धानं॒ यद॒श्विनाऽऽग्नी॑ध्रं॒ यत्सर॑स्वती ।इन्द्रा॑यै॒न्द्रᳪ सद॑स्कृ॒तं प॑त्नी॒शालं॒ गार्ह॑पत्यः

havirdhānaṃ yadaśvinā''gnīdhraṃ yatsarasvatī | indrāyaindra sadaskṛtaṃ patnīśālaṃ gārhapatyaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु-प्राप्ति के लिए ज्ञानवृद्धि तो आवश्यक है ही। जप से वासना को दूर करना भी आवश्यक है ओर सात्विक भोजनं से सोम का वर्धन करते हए अङ्ग-प्रत्यङ्ख की शक्ति को बढाना भी आवश्यक हे। वैशुवदेवसस्स्वत्या तृतीय॑माप्तर्सवंनम् । २६॥

English

The Asvins are the Soma store, Sarasvatî the sacred hearth. For Indra formed is Indra s seat, the Matrons' Hall, the house-lord's fire.

अध्याय १९

श्लोक 19

प्रै॒षेभि॑: प्रै॒षाना॑प्नोत्या॒प्रीभि॑रा॒प्रीर्य॒ज्ञस्य॑ ।प्र॒या॒जेभि॑रनुया॒जान् व॑षट्का॒रेभि॒राहु॑तीः

praiṣebhi: praiṣānāpnotyāprībhirāprīryajñasya | prayājebhiranuyājān vaṣaṭkārebhirāhutīḥ

हिन्दी अर्थ

९. आचार्य चरणों में "उपसद्" बनने का पहला लाभ यह है कि प्राणापान शक्ति देकर हमें स्वस्थ बनाते है (अश्विभ्यां, वसु) २. दूसरा लाभ यह है कि हम आसुरवृत्तियों का संहार करनेव्राले “रुद्र! बनकर प्रभु बनते है (इन्द्रस्य इति एन्द्रम्) ओर अन्त मे ३. सरस्वती कौ अराधना करते हए ज्ञान व दिव्य गुणों को बद्ाकर हम ' आदित्य

English

Orders he gains by orders, by Âprîs Âprîs of sacrifice, Post-offerings by fore-offerings, and by calls of Vashat Âhutis.

अध्याय १९

श्लोक 20

प॒शुभि॑: प॒शूना॑प्नोति पुरो॒डाशै॑र्ह॒वीᳪष्या ।छन्दो॑भिः सामिधे॒नीर्या॒ज्या॒भिर्वषट्का॒रान्

paśubhi: paśūnāpnoti puroḍāśairhavīṣyā | chandobhiḥ sāmidhenīryājyābhirvaṣaṭkārān

हिन्दी अर्थ

हों तथा हमारी उत्तम स्तुति का कारण बने। छन्दो के द्वारा मेरी वासनाओं का हिसन हो ओर इस वासना-संहार से मेरा जीवन साममय हो। यह शान्ति मेरे जीवनकाल का अवभृथ यज्ञान्त स्नान हो। इस शान्ति में मेरे जीवन कौ पूर्णं पवित्रता हो। इडा॑भिरर्भक्षानाप्नोति सूक्तवाकेनाशिष॑ः।

English

By victims he gains victims, by ground rice-cakes sacrificial food, By metres kindling-verses, and Vashat-calls by Inviting prayers.

अध्याय १९

श्लोक 21

धा॒नाः क॑र॒म्भः सक्त॑वः परीवा॒पः पयो॒ दधि॑ ।सोम॑स्य रू॒पᳪ ह॒विष॑ आ॒मिक्षा॒ वाजि॑नं॒ मधु॑

dhānāḥ karambhaḥ saktavaḥ parīvāpaḥ payo dadhi | somasya rūpa haviṣa āmikṣā vājinaṃ madhu

हिन्दी अर्थ

दिव्य गुणों के धारण, ज्ञान की प्राप्ति व शरीर कौ रोगों से पूर्णरक्षा के द्वारा सुरावन्तं बर्हिषदसुवीर' यज्ञःदिन्वन्ति महिषा नमोभिः । दधानाः सोमं दिवि देवतासु मदेमेन्द्रं यज॑मानाः स्वर्काः ।॥३२॥ १. गतमन्त्र के अनुसार सौत्रामणी यज्ञ के करनेवाले महिषा-(मह् पूजायाम्) पूजा कौ

English

Grain roasted, gruel, barley-meal, grains of rice roasted, milk and curd Are types of Soma: mingled milk, sweet whey, of sacrificial food.

अध्याय १९

श्लोक 22

धा॒नाना॑ᳪ रू॒पं कुव॑लं परीवा॒पस्य॑ गो॒धूमा॑: ।सक्तू॑नाᳪ रू॒पं बद॑रमुप॒वाका॑: कर॒म्भस्य॑

dhānānā rūpaṃ kuvalaṃ parīvāpasya godhūmā: | saktūnā rūpaṃ badaramupavākā: karambhasya

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु का उपासन करे। प्रभु--उपासन के लिए चित्तवृत्ति को ठीक रखने के उदेश्य से सात्विक अन्न का सेवन करे। ओर उस रस के द्वारा सुरया-आत्मनियन्त्रण के साथ सुतस्य सोमस्य उत्पन्न किये गये सोम (वीर्यशक्ति) का शुष्मः=शत्र-णोषक बल है तेनउस सोम के बल से यजमानम्प्रभ

English

Type of parched corn is jujube-fruit; wheat of the roasted grains of rice; Jujube the type of barley-meal, and Indra-grains of gruel-groats.

अध्याय १९

श्लोक 23

पय॑सो रू॒पं यद्यवा॑ द॒ध्नो रू॒पं क॒र्कन्धू॑नि ।सोम॑स्य रू॒पं वाजि॑नᳪ सौ॒म्यस्य॑ रू॒पमा॒मिक्षा॑

payaso rūpaṃ yadyavā dadhno rūpaṃ karkandhūni | somasya rūpaṃ vājina saumyasya rūpamāmikṣā

हिन्दी अर्थ

हम ओषधियों के सेवन से सोम को शरीर में उत्पन्न करे। आत्मनियन्त्रण के द्वारा इस सोम कौ रक्षा करे। यह सुरक्षित सोम हमें आनन्द से प्रीणित करे। हमें यह प्रभु के मेलवाला (यजमान ) , जानी (सरस्वती ) , दीर्घजीवी (अश्विनौ ) , शक्तिसम्पन्न इन्द्रियोवाला (इन्द्र) तथा दोषदहनपूर्वक आगे बदनेवाला (अग्नि) बनाता है

English

By sacrificial texts are gained the Grahas, and by the Grahas lauds and laud-arrangements. By metres are obtained Ukthas and praise-songs, and by the Sâma-chant the Avabhritha.

अध्याय १९

श्लोक 24

आ श्रा॑व॒येति॑ स्तो॒त्रिया॑: प्रत्याश्रा॒वो अनु॑रूपः ।यजेति॑ धाय्यारू॒पं प्र॑गा॒था ये॑यजाम॒हाः

ā śrāvayeti stotriyā: pratyāśrāvo anurūpaḥ | yajeti dhāyyārūpaṃ pragāthā yeyajāmahāḥ

हिन्दी अर्थ

प्राणायाम कौ साधना वीर्य की केवल रक्षा ही नहीं करती, अपितु उस वीर पुरुष को अभिमान का शिकार भी नदीं होने देती। ज्ान-प्राप्ति मे लगना" उस वीर्य का सदव्यय करके आत्मशक्ति को बद्ानेवाला होता हेै। १. यत्- जो रसिनः=रसवाले जीवन को माधुर्य से भरनेवाले सुतस्य =जभिषुत (उत्पतन)

English

The Strophe is the cry, Bid hear? the answer is the antistrophe. Sacrifice! is the Dhâyyâ's form, Pragâthas’ the Yajâmahas.

अध्याय १९

श्लोक 25

अ॒र्ध॒ – ऋ॒चैरु॒क्थाना॑ᳪ रू॒पं प॒दैरा॑प्नोति नि॒विद॑: ।प्र॒ण॒वै: श॒स्त्राणा॑ᳪ रू॒पं पय॑सा॒ सोम॑ आप्यते

ardha – ṛcairukthānā rūpaṃ padairāpnoti nivida: | praṇavai: śastrāṇā rūpaṃ payasā soma āpyate

हिन्दी अर्थ

१. सोमरक्षा का प्रकार यह है कि हम कर्मो में लगे रहे, ज्ञान प्राप्त करें ओर प्रभु के नाम का जप करें। २. रक्षित सोम (क) हमारे जीवन को मधुर बनाएगा, (ख) मन को शिव बनाएगा (रसिनः) तथा (ग) हमारे मस्तिष्क को ज्ञान- दीप्त करेगा (राजानम्) । १. गतमन््र के अनुसार सोम का रक्षण करनेवाले युवक व युवति रसमय व मधुर

English

By verse-halves comes the Ukthas’ type, Nivids by Padas he obtains. The type of Sastras is obtained by Pranavas, Soma by milk.

अध्याय १९

श्लोक 26

अ॒श्विभ्यां॑ प्रातः सव॒नमिन्द्रे॑णै॒न्द्रं माध्यं॑न्दिनम् ।वै॒श्व॒दे॒वᳪ सर॑स्वत्या तृ॒तीय॑मा॒प्तᳪ सव॑नम्

aśvibhyāṃ prātaḥ savanamindreṇaindraṃ mādhyaṃndinam | vaiśvadeva sarasvatyā tṛtīyamāpta savanam

हिन्दी अर्थ

हम पिता-पितामह व प्रपितामहो को वानप्रस्थाश्रमो से समय-समय पर घ्र मे आमन्त्रित करे। उनका अन्नादि द्वारा सत्कार करे। उनसे उपदेश व प्रेरणा लेकर अपने १. गततमन्त्र के अनुसार पितृश्राद्ध करनेवाला प्रार्थना करता है कि मा-=मुञ्धे सोम्यासः = अत्यन्त सौम्य--शान्त स्वभाववाले पितरः=यै पिता पुनन्तु-पवित्र करें। उनके जीवन कौ

English

Gained by the Asvins is the morn's libation, Indra's libation of mid-day by Indra. Sarasvatî obtains the third outpouring, the offering sacred to the Visve Devas.

अध्याय १९

श्लोक 27

वा॒य॒व्यै॒र्वाय॒व्या॒न्याप्नोति॒ सते॑न द्रोणकल॒शम् ।कु॒म्भीभ्या॑मम्भृ॒णौ सु॒ते स्था॒लीभि॑ स्था॒लीरा॑प्नोति

vāyavyairvāyavyānyāpnoti satena droṇakalaśam | kumbhībhyāmambhṛṇau sute sthālībhi sthālīrāpnoti

हिन्दी अर्थ

में पितरों की प्रेरणाओं से व उनके आचरण से अपने जीवन को शुद्ध बनाऊं 3, शुद्ध जीवनवाला बनकर पूरे सौ वर्षं तक चलनेवाला बनँ। ' पवित्रशतायुष्य' ही मेरा दीर्घायुष्य के तीन साधन ९ अग्ने टे परमात्मन्! आयूँषि आयुष्य के पावक कर्मों को ही पवसे=( पावयसे

English

By Vâyu cups he gains the cups of Vâyu, and by the basket gains the vat for Soma. By the two jars he gains two cleansing-vessels, and by the cooking-pot the pot for cooking.

अध्याय १९

श्लोक 28

यजु॑र्भिराप्यन्ते॒ ग्रहा॒ ग्रहै॒ स्तोमा॑श्च॒ विष्टु॑तीः ।छन्दो॑भिरुक्थाश॒स्त्राणि॒ साम्ना॑वभृ॒थ आ॑प्यते

yajurbhirāpyante grahā grahai stomāśca viṣṭutīḥ | chandobhirukthāśastrāṇi sāmnāvabhṛtha āpyate

हिन्दी अर्थ

दीर्घजीवन के लिए आवश्यक है कि १. क्रियाशील बना जाए (पवसे) २. व्रीहि व दधि आदि अन्न-रसों काही प्रयोग किया जाए ३. दुष्ट-सद्खं से दूर रहा जाए। पुनन्तु मा देवजनाः पुनन्तु मन॑सा धियंः। पुनन्तु विश्वां भूतानि जात॑वेदः पुनीहि मा ।३९॥

English

He gains by vow of fasting Consecration, by Consecration gains the priestly guerdon.

अध्याय १९

श्लोक 29

इडा॑भिर्भ॒क्षाना॑प्नोति सूक्तवा॒केना॒शिष॑: ।शं॒युना॑ पत्नीसंया॒जान्त्स॑मिष्टय॒जुषा॑ स॒ᳪस्थाम्

iḍābhirbhakṣānāpnoti sūktavākenāśiṣa: | śaṃyunā patnīsaṃyājāntsamiṣṭayajuṣā sasthām

हिन्दी अर्थ

१. देवजन मुञ्जे पवित्र करें। २. विचारपूर्वक किये गये कर्म मुञ्ञे पवित्र करें ३. पृथिवी आदि भूत मुदे पवित्र करे ४. सर्वज्ञ प्रभु मुदे पवित्र करे। ज्ञान-शक्ति व कर्मसंकल्प पवित्रैण पुनीहि मा शक्रेण देव दीद्य॑त् । अग्ने क्रत्वा रतुं २।।५ रनु ॥४०॥।

English

Draughts he obtains by pouring out libations, and wishes by the utterance of praises, By Samyu he obtains Patnîsamyâjas, and Consummation by Samishtayajus.

अध्याय १९

श्लोक 30

व्र॒तेन॑ दी॒क्षामा॑प्नोति दी॒क्षया॑ऽऽप्नोति॒ दक्षि॑णाम् ।दक्षि॑णा श्र॒द्धामा॑प्नोति श्र॒द्धया॑ स॒त्यमा॑प्यते

vratena dīkṣāmāpnoti dīkṣayā''pnoti dakṣiṇām | dakṣiṇā śraddhāmāpnoti śraddhayā satyamāpyate

हिन्दी अर्थ

सोम मुञ्ञे नीरोग करके स्वास्थ्य कौ दीप्ति दे। सर्वव्यापक प्रभु के सामीप्य को अनुभव करके मै पापों से बचँ। प्रभु नाम-स्मरण मेरी ढाल बन जाए। उभाभ्यौं देव सवितः पवित्रैण स्वेन॑ च । मां पुनीहि विरुवत॑;॥। ४३॥ ९. टे देव=सब दिव्य गुणों के पुञ्ज तथा जानदीप्त प्रभो! है सवितः =सत्कर्मो मे सतत

English

He gains by priestly guerdon faith: by faith comes knowledge of the truth.

अध्याय १९

श्लोक 31

ए॒ताव॑द्रू॒पं य॒ज्ञस्य॒ यद्दे॒वैर्ब्रह्म॑णा कृ॒तम् ।तदे॒तत्सर्व॑माप्नोति य॒ज्ञे सौ॑त्राम॒णी सु॒ते

etāvadrūpaṃ yajñasya yaddevairbrahmaṇā kṛtam | tadetatsarvamāpnoti yajñe sautrāmaṇī sute

हिन्दी अर्थ

-लान व कर्म मेरे जीवन कौ पवित्र करनेवाले हों। मेँ पक्षी के समान दरतो ज्ञान व कर्म मेरे पंख हां। ये मुदे ऊपर ले-जानेवाले हो। वैश्वदेवी पुनती देव्यागाद्यस्यांमिमा बह्वघ्स्तन्त्रो वीतपष्ठाः । ९. वैश्वदेवी =( विश्वेभ्यः देवेभ्यः आगता द० ) सब देवताओं के लिए प्राप्त होनैवाली

English

So far the type of sacrifice was formed by Brahma, and the Gods. All this he gains, when juice is shed, in the Santrâmanî sacrifice.

अध्याय १९

श्लोक 32

सुरा॑वन्तं बर्हि॒षद॑ᳪ सु॒वीरं॑ य॒ज्ञᳪ हि॑न्वन्ति महि॒षा नमो॑भिः ।दधा॑ना॒: सोमं॑ दि॒वि दे॒वता॑सु॒ मदे॒मेन्द्रँ॒ यज॑मानाः स्व॒र्काः

surāvantaṃ barhiṣada suvīraṃ yajña hinvanti mahiṣā namobhiḥ | dadhānā: somaṃ divi devatāsu mademendra~ yajamānāḥ svarkāḥ

हिन्दी अर्थ

वेदवाणी ' वैश्वदेवी पुनती-देवी ' हे। इसमे स्नान कर शरीर का प्रक्षालन हो जाने से लोग चमक उठते है। इकट्ठे होने पर इसी कौ चर्चा करते हँ। धनं के कभी दास तेषौ लोकः स्वधा नमो यज्ञो देवेषु कल्पताम्।। ४५। ९. ये-जो हमारे पितरः=पिता- पितामह प्रपितामह आदि समानाः सुख-दुःख में

English

The rite with sacred grass, wine, store of heroes, the mighty ones speed on with adorations. May we, sweet-singing sacrificers, setting Soma mid Gods in heaven, give joy to Indra.

अध्याय १९

श्लोक 33

यस्ते॒ रस॒: सम्भृ॑त॒ ओष॑धीषु॒ सोम॑स्य॒ शुष्म॒: सुर॑या सु॒तस्य॑ ।तेन॑ जिन्व॒ यज॑मानं॒ मदे॑न॒ सर॑स्वतीम॒श्विना॒विन्द्र॑म॒ग्निम्

yaste rasa: sambhṛta oṣadhīṣu somasya śuṣma: surayā sutasya | tena jinva yajamānaṃ madena sarasvatīmaśvināvindramagnim

हिन्दी अर्थ

१. "पितर ' शब्द से कहलाने योग्य व्यक्ति वे है जो (क) समचित्त स्थितप्रल है। (ख) समान विज्ञानवाले है। (ग) नियन्त्रण के संसार मेँ विचरते हं, अर्थात् ब्रती जीवनवाले है। २. इन पितरों को (क) उत्तम यश प्राप्त होता है। (ख) धारण के लिए आवश्यक अन्न दुर्लभ नहीं होता। (ग) इनमें नमन कौ वृत्ति होती है अथवा इन्दं सब

English

Agni, thou poorest life: send down upon us food and vigorous strength. Drive thou misfortune far away.

अध्याय १९

श्लोक 34

यम॒श्विना॒ नमु॑चेरासु॒रादधि॒ सर॑स्व॒त्यसु॑नोदिन्द्रि॒याय॑ ।इ॒मं तᳪ शु॒क्रं मधु॑मन्त॒मिन्दु॒ᳪ सोम॒ᳪ राजा॑नमि॒ह भ॑क्षयामि

yamaśvinā namucerāsurādadhi sarasvatyasunodindriyāya | imaṃ ta śukraṃ madhumantamindu soma rājānamiha bhakṣayāmi

हिन्दी अर्थ

इस संसार में मनुष्यों के लिए दो ही मार्ग हे। १. ज्ञान की अपरिपक्व अवस्था में 'पितृयाण' है, जिससे आगे चलकर सकाम यज्ञो को करते हुए हम अभ्युदय का साधन करते है तथा २. ज्ञान के परिपक्व होने पर मनुष्य "देवयान ' मार्ग से चलता है। इसमे उन्ीं यज्ञो कौ वे निष्काम होकर कर्तव्य बुद्धि से करते हैँ ओर निःश्रेयस को सिद्ध

English

That which Sarasvatî poured out for Indra, by Asvins brought from Namuchi the demon, This flowing drop, brilliant and full of sweetness, I drink and feed on here, the King, the Soma.

अध्याय १९

श्लोक 35

यदत्र॑ रि॒प्तᳪ र॒सिन॑: सु॒तस्य॒ यदिन्द्रो॒ अपि॑ब॒च्छची॑भिः ।अ॒हं तद॑स्य॒ मन॑सा शि॒वेन॒ सोम॒ᳪ राजा॑नमि॒ह भ॑क्षयामि

yadatra ripta rasina: sutasya yadindro apibacchacībhiḥ | ahaṃ tadasya manasā śivena soma rājānamiha bhakṣayāmi

हिन्दी अर्थ

पितरों की विशेषतार्प ये हैवे स्वस्थ हें (अङ्धिरसः) , सदाचारी है (नवग्वाः) स्थिरवृत्ति के है (अथर्वाण), सदज्ञान से परिपक्व विचारोवाले है ( भृगवः) तथा सौम्य (विनीत) हे। ठम सव इन पितरों की सुमति व सौमनस में स्थित हो। तेभिर्यमः स॑दरराणो हवीश्ष्युान्चुशद्धिः प्रतिकाममंततु॥॥५९॥

English

Whatever portion of the savoury fluid is clinging here, what Indra drank with powers, That drop thereof with pure and holy spirit I drink and feed upon, the King, the Soma.

अध्याय १९

श्लोक 36

पि॒तृभ्य॑: स्वधा॒यिभ्य॑: स्व॒धा नम॑: पिताम॒हेभ्य॑: स्वधा॒यिभ्य॑: स्व॒धा नम॒: प्रपि॑तामहेभ्यः स्वधा॒यिभ्य॑: स्व॒धा नम॑: ।अक्ष॑न् पि॒तरो ऽमी॑मदन्त पि॒तरो ऽती॑तृपन्त पि॒तर॒: पित॑र॒: शुन्ध॑ध्वम्

pitṛbhya: svadhāyibhya: svadhā nama: pitāmahebhya: svadhāyibhya: svadhā nama: prapitāmahebhyaḥ svadhāyibhya: svadhā nama: | akṣan pitaro 'mīmadanta pitaro 'tītṛpanta pitara: pitara: śundhadhvam

हिन्दी अर्थ

हम भोजन वह करर, जिसकी शरीर को आवश्यकता हे। उसे सदा प्रसत्रतापूर्वक ही खाँं। हमारा भोजन यस्लशोष हो, हविरूप हो। उत्तेजक भोजनां से हम वचने का प्रयत्न करे। सदा सोम का पान करनेवाले, शक्ति की रक्षा करनेवाले बने। तव प्रणीती पितरो नऽइन्दो देवेषु रल्र॑मभजन्त॒ धीरां: ।॥५२॥

English

To Fathers who claim Svadhâ be Svadhâ and homage! To Grandfathers who claim Svadhâ be Svadhâ and homage! To Great-grandfathers who claim Svadhâ be Svadhâ and homage! The Fathers have eaten. The Fathers have rejoiced. The Fathers have been satisfied, Fathers, be ye purified.

अध्याय १९

श्लोक 37

पु॒नन्तु॑ मा पि॒तर॑: सो॒म्यास॑: पु॒नन्तु॑ मा पिताम॒हाः पु॒नन्तु॒ प्रपि॑तामहाः । प॒वित्रे॑ण श॒तायु॑षा ।पु॒नन्तु॑ मा पिताम॒हाः पु॒नन्तु॒ प्रपि॑तामहाः । प॒वित्रे॑ण श॒तायु॑षा॒ विश्व॒मायु॒र्व्य॒श्नवै

punantu mā pitara: somyāsa: punantu mā pitāmahāḥ punantu prapitāmahāḥ | pavitreṇa śatāyuṣā | punantu mā pitāmahāḥ punantu prapitāmahāḥ | pavitreṇa śatāyuṣā viśvamāyurvyaśnavai

हिन्दी अर्थ

आचार्य व पितर मिलकर युवक सन्तानं मेँ रमणीय गुणों का आधान करा्। त्वया हि न॑ः पितर; सोम पूर्वे कर्मणि चक्रुः प॑वमान धीरः। १. है सोम=शान्तात्मन्! आचार्य! नः= हमारे पूर्वे-हमसे पूर्वं काल में होनैवाले धीराः=धीमान् व ध्यानवान्, धैर्यशाली पितरः =पितर हि=निश्चय से त्वया=तुङ्ञसे, अर्थात् आपके निर्देशों

English

Cleanse me the Fathers who enjoy Soma! Grandfathers make me clean! May Great-grandfathers cleanse me with a sieve that brings a century. May my Grandfathers cleanse me, may my Great-grand-fathers make me clean. With sieve that brings a century may I obtain full length of life.

अध्याय १९

श्लोक 38

अग्न॒ आयू॑ ᳪषि पवस॒ आ सु॒वोर्ज॒मिषं॑ च नः ।आ॒रे बा॑धस्व दु॒च्छुना॑म्

agna āyū ṣi pavasa ā suvorjamiṣaṃ ca naḥ | āre bādhasva ducchunām

हिन्दी अर्थ

आचार्य व माता-पिता का प्रयत्न हमें जानोज्ज्वल व स्वस्थ-शरीरवाला बनाए्। हम स्वार्थं की वृत्ति से ऊपर उठे रहें, कभी धन के दास न बनें। त्र्िंषद् पितरों का स्वागत ९. बर्हिषद := पवित्र हदय में स्थित होनेवाले पिततरः=पितरो! ऊतीचरक्षण के हेतु से

English

Cleanse me the companies of Gods!

अध्याय १९

श्लोक 39

पु॒नन्तु॑ मा देवज॒ना॑: पु॒नन्तु॒ मन॑सा॒ धिय॑: ।पु॒नन्तु॒ विश्वा॑ भू॒तानि॒ जात॑वेदः पुनी॒हि मा॑

punantu mā devajanā: punantu manasā dhiya: | punantu viśvā bhūtāni jātavedaḥ punīhi mā

हिन्दी अर्थ

हम समय-समय पर पितरों को आमन्त्रित करे। वे हमारे रक्षण के लिए हमारे समीप आने की कृपा करें। हम उनके लिए पवित्र हव्य पदार्थो को प्राप्त करारप। उनकी उत्तम प्रेरणाओं से हमारी व्याधियोँ व आधियाँ दूर हों ओर हम निष्पाप बने। ९. अहम्=मै सुविदत्रान्-उत्तम ज्ञान से रक्षा करनेवाले पितृन्=पितरो को - ज्ञानदाता

English

May thoughts with spirit make me clean. Cleanse me all things that be! Do thou, O Jâtavedas, make me clean.

अध्याय १९

श्लोक 40

प॒वित्रे॑ण पुनीहि मा शु॒क्रेण॑ देव॒ दीद्य॑त् ।अग्ने॒ क्रत्वा॒ क्रतूँ॒१ रनु॑

pavitreṇa punīhi mā śukreṇa deva dīdyat | agne kratvā kratū~1 ranu

हिन्दी अर्थ

हमें उन पितरों का, ज्ञानप्रद आचार्यो का सम्पर्क सदा प्राप्त हो जो हमें इस अविनाशी सृष्टि-प्रलय-चक्र का लान देनेवाले हों ओर जिनका खान-पान अत्यन्त सात्विक हे। उत्तम ज्ञान देकर ये हमारा जण करते है। ९. बर्हिष्येषु =( वर्हिषु उत्तमेषु-द०) हृदयो को वासनाशन्य बनाने में उत्तम प्रियेषु=तृप्ति

English

Purify me, O Agni, God, refulgent with thy pure bright sieve, With powers according to thine own.

अध्याय १९

श्लोक 41

यत्ते॑ प॒वित्र॑म॒र्चिष्यग्ने॒ वित॑तमन्त॒रा ।ब्रह्म॒ तेन॑ पुनातु मा

yatte pavitramarciṣyagne vitatamantarā | brahma tena punātu mā

हिन्दी अर्थ

उत्तम सात्विक लान से हृदयो को निर्वासन बनानेवाले सौम्य पितर हमसे आमन्त्रित होकर यहाँ आँ ओर हमें अपने सदुपदेशों से प्रीणित करे। आ य॑न्तु नः पितरः सोम्यासो ऽग्निष्वात्ताः पथिभिर्देवयानैः । अस्मिन् यज्ञे स्वधया मदन्तो ऽधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्त्वस्मान्।।५८॥।

English

O Agni, may the cleansing sieve, diffused through all thy fiery glow, Holy devotion, make me clean.

अध्याय १९

श्लोक 42

पव॑मान॒: सो अ॒द्य न॑: प॒वित्रे॑ण॒ विच॑र्षणिः ।यः पोता॒ स पु॑नातु मा

pavamāna: so adya na: pavitreṇa vicarṣaṇiḥ | yaḥ potā sa punātu mā

हिन्दी अर्थ

ज्ञान दें जो ज्ञान हमे इस जीवन मे वासनाओं से सुरक्षित करे। सुप्रणीतयः- उत्तम प्रणयन करनेवाले अग्निष्वात्ताः पितरऽ एह ग॑च्छत॒ सदःसदः सदत सुप्रणीतयः । ९. डे अग्निष्वात्ताः=अग्नि आदि पदार्थो के विज्ञान को सम्यक् ग्रहण करनेवाले

English

May Pavamâna with his sieve, Guest of all tribes, cleanse us to-day, He who is Cleanser make us clean.

अध्याय १९

श्लोक 43

उ॒भाभ्यां॑ देव सवितः प॒वित्रे॑ण स॒वेन॑ च ।मां पु॑नीहि वि॒श्वत॑:

ubhābhyāṃ deva savitaḥ pavitreṇa savena ca | māṃ punīhi viśvata:

हिन्दी अर्थ

हम विज्ञान मे निपुण पितरों के सदुपदेशों से सुनीति के मार्गं पर चलते हए वासनाओं को जीते ओर अपने प्राणों को सबल बनार्ँ। प्रक्रतिवित् व ब्रह्मवित् ( ४७८5 ७१त ४ त+27070551८5 ) का पण्डित येऽअग्निष्वात्ता येऽअनंग्निष्वात्ता मध्य दिवः स्वधयां मादयंन्ते।

English

Savitar, God, by both of these, libation, purifying power, Purify me on every side.

अध्याय १९

श्लोक 44

वै॒श्व॒दे॒वी पु॑न॒ती दे॒व्यागा॒द्यस्या॑मि॒मा ब॒ह्व्य॒स्त॒न्वो॑ वी॒तपृ॑ष्ठाः ।तया॒ मद॑न्तः सध॒मादे॑षु व॒यᳪ स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम्

vaiśvadevī punatī devyāgādyasyāmimā bahvyastanvo vītapṛṣṭhāḥ | tayā madantaḥ sadhamādeṣu vaya syāma patayo rayīṇām

हिन्दी अर्थ

प्रकृतिविज्ञान व ब्रह्यस्लान में निपुण ज्ञानी लोग प्रभु से प्राप्त असुनीतितप्राणविद्या को हमें भी प्राप्त कराण, जिससे हम अपने जीवनो को तदनुसार चलाते हुए दीर्घं बना पार्णे। अग्निष्वात्तानुतुमतों हवामहे नाराशसे सोमपीथं यञऽआशुः। ९. अग्निष्वात्तान्ग्रहण कौ है अग्नि आदि पदार्थो कौ विद्या जिन्होने उन ऋतुमतः=प्रशस्त

English

Dear to all Gods hath come the cleansing Goddess, she who contains these many smooth-backed figures. Through her may we in sacrificial banquets taking our pleasure be the lords of riches.

अध्याय १९

श्लोक 45

ये स॑मा॒नाः सम॑नसः पि॒तरो॑ यम॒राज्ये॑ ।तेषाँ॑ल्लो॒कः स्व॒धा नमो॑ य॒ज्ञो दे॒वेषु॑ कल्पताम्

ye samānāḥ samanasaḥ pitaro yamarājye | teṣā~llokaḥ svadhā namo yajño deveṣu kalpatām

हिन्दी अर्थ

हम अग्नि आदि सव पदार्थो के विज्ञान मे कुशल बनकर ऋतु करे अनुसार भोजनादि क्रियाओं को करते हुए नरहित करे प्रशंसनीय कर्मो को करनेवाले बनें। इस नाराशंस के निमित्त सोमपान करे, अर्थात् शरीर मे सोम कौ रक्षा करे। आच्या जानु दक्षिणतो निषद्येमं यज्ञमभि गुंणीत विष्व ।

English

The Fathers who in Yama's realm are equal and unanimous— Their world is Svadhâ, reverence. To Gods let sacrifice be paid.

अध्याय १९

श्लोक 46

ये स॑मा॒नाः सम॑नसो जी॒वा जी॒वेषु॑ माम॒काः ।तेषा॒ᳪ श्रीर्मयि॑ कल्पताम॒स्मिँल्लो॒के श॒तᳪ समा॑:

ye samānāḥ samanaso jīvā jīveṣu māmakāḥ | teṣā śrīrmayi kalpatāmasmi~lloke śata samā:

हिन्दी अर्थ

उपहूत पितर हमसे समादृत होकर हमें उत्तम कर्मो का उपदेश दें ओर हमारे व्यवहार मे अन्ञानवश रह गई कमी को क्षमा करे। प्रातःकाल का स्वाध्याय १. (क) अरूणीनाम्तप्रातःकाल की अरुण किरणौ कौ उपस्थे-गोद में आसीनासः=वेठे

English

Equals, unanimous, my folk yet living among those who live— On me be set their glory through a hundred years in this our world.

अध्याय १९

श्लोक 47

द्वे सृ॒ती अ॑शृणवं पितॄ॒णाम॒हं दे॒वाना॑मु॒त मर्त्या॑नाम् ।ताभ्या॑मि॒दं विश्व॒मेज॒त्समे॑ति॒ यद॑न्त॒रा पि॒तरं॑ मा॒तरं॑ च

dve sṛtī aśṛṇavaṃ pitṝṇāmahaṃ devānāmuta martyānām | tābhyāmidaṃ viśvamejatsameti yadantarā pitaraṃ mātaraṃ ca

हिन्दी अर्थ

आचार्यो से प्रकृति के सव देवों का ज्ञान प्राप्त करके, इनमे उस प्रभु की महिमा को देखता हुआ मैं उस प्रभु से अपना सम्बन्ध बना पाङ योऽअग्निः कव्यवाहनः पितृन्यक्ष॑दृतावृध॑ः । १. गत मन्त्र के अनुसार आचार्य से ज्ञान प्राप्त करके विद्यार्थी भी ज्ञानी बना हेै।

English

I have heard mention of two several pathways, way of the Fathers, way of Gods and mortals. On these two roads each moving creature travels, each thing between the Father and the Mother.

अध्याय १९

श्लोक 48

इ॒दᳪ ह॒विः प्र॒जन॑नं मे अस्तु॒ दश॑वीर॒ᳪ सर्व॑गणᳪ स्व॒स्तये॑ ।आ॒त्म॒सनि॑ प्रजा॒सनि॑ पशु॒सनि॑ लोक॒सन्य॑भय॒सनि॑ ।अ॒ग्निः प्र॒जां ब॑हु॒लां मे॑ करो॒त्वन्नं॒ पयो॒ रेतो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त

ida haviḥ prajananaṃ me astu daśavīra sarvagaṇa svastaye | ātmasani prajāsani paśusani lokasanyabhayasani | agniḥ prajāṃ bahulāṃ me karotvannaṃ payo reto asmāsu dhatta

हिन्दी अर्थ

हम आचार्यो से कव्य=सब सत्यविद्याओं के प्रतिपादक ज्ञान को ग्रहण करे। इसे आचार्यो को सुनाकर सब प्रजाओं में उस ज्ञान को देनेवाले वनें। हमारा "कल्य! ! हव्य' हो जाए, प्रजाओं में आहुति के योग्य हो जाप्। प्रादा: पितुभ्य॑ः स्वधया तेऽअंक्षन्नद्धि त्वं देव प्रय॑ता हवीश्छषिं ।॥६६॥

English

May this my sacrifice bring store of children, with ten brave sons, full-companied, for welfare— Life-winning, winning offspring, winning cattle, winning this world of ours and peace and safety. May Agni make nay progeny abundant. Do ye confer food, milk, and wanly vigour.

अध्याय १९

श्लोक 49

उदी॑रता॒मव॑र॒ उत्परा॑स॒ उन्म॑ध्य॒माः पि॒तर॑: सो॒म्यास॑: ।असुं॒ य ई॒युर॑वृ॒का ऋ॑त॒ज्ञास्ते नो॑ऽवन्तु पि॒तरो॒ हवे॑षु

udīratāmavara utparāsa unmadhyamāḥ pitara: somyāsa: | asuṃ ya īyuravṛkā ṛtajñāste no'vantu pitaro haveṣu

हिन्दी अर्थ

हम "पूर्व" अर्थात् विद्यावयोवृद्ध "उपर ' =विषयों से उपरत "पार्थिवे रजसि आनिषत्ता'-अग्नि मे यज्ञ-यागादि करनेवाले तथा उत्तम धर्मरूप बलवाले पितरों का अन्नाद से सत्कार करनेवाले बने। ९. अधअवब यथा-जेसे नः-ठमारे पितरः =पितर परासः=जो उत्कृष्ट है विद्या आदि

English

May they ascend, the lowest, highest, midmost, the Fathers who deserve a share of Soma. May Fathers who have gained the world of spirits, gentle and righteous, aid us when we call them.

अध्याय १९

श्लोक 50

अङ्गि॑रसो नः पि॒तरो॒ नव॑ग्वा॒ अथ॑र्वाणो॒ भृग॑वः सो॒म्यास॑: ।तेषां॑ व॒यᳪ सु॑म॒तौ य॒ज्ञिया॑ना॒मपि॑ भ॒द्रे सौ॑मन॒से स्या॑म

aṅgiraso naḥ pitaro navagvā atharvāṇo bhṛgavaḥ somyāsa: | teṣāṃ vaya sumatau yajñiyānāmapi bhadre saumanase syāma

हिन्दी अर्थ

हम उन ज्ञानी पितरों का सम्पर्कं प्राप्त करं जो गुणों से उत्कृष्ट है, वयोवृद्ध हे, यज्ञादि कर्मो में व्याप्त जीवनवाले हें, पवित्र ज्ञान-किरणो को प्राप्त है, उक्थो का शंसन करनेवाले, पार्थिव भोगों से ऊपर उवे हए तथा ज्ञान की किरणो को अनावृत करनेवाले है। १- गतमन्त्र के अनुसार “अआग्नि' से प्रार्थना करते हुए कहते हैँ कि उशशन्तः-कामना

English

Our Fathers are Angirases, Navagvas, Atharvans, Bhrigus, who deserve the Soma. May these the holy look on us with favour: may we enjoy their gracious loving-kindness.

अध्याय १९

श्लोक 51

ये न॒: पूर्वे॑ पि॒तर॑: सो॒म्यासो॑ऽनूहि॒रे सो॑मपी॒थं वसि॑ष्ठाः ।तेभि॑र्य॒मः स॑ररा॒णो ह॒वीᳪष्यु॒शन्नु॒शद्भि॑: प्रतिका॒मम॑त्तु

ye na: pūrve pitara: somyāso'nūhire somapīthaṃ vasiṣṭhāḥ | tebhiryamaḥ sararāṇo havīṣyuśannuśadbhi: pratikāmamattu

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु-प्राप्ति कौ प्रबल कामनावाले हों। प्रभु को हदयों मे धारण करें, इसी उदेश्य से ज्ञान को समिद्ध करे। ज्ञानप्रद पितरों के सम्पर्क को प्राप्त करके हवि के खाने का पाठ पदं। यह हवि ही हमारा प्रभुपूजन बन जाएगी। १. गतमन्त्र के अनुसार पितरों के सम्पर्क में रहकर पुरुष अपने जीवन को यज्ञमय

English

Our ancient Fathers who deserve the Soma, who came, most noble, to our Soma banquet— With these let Yama, yearning with the yearning, rejoicing eat our offerings at his pleasure.

अध्याय १९

श्लोक 52

त्वᳪ सो॑म॒ प्र चि॑कितो मनी॒षा त्वᳪ रजि॑ष्ठ॒मनु॑ नेषि॒ पन्था॑म् ।तव॒ प्रणी॑ती पि॒तरो॑ न इन्दो दे॒वेषु॒ रत्न॑मभजन्त॒ धीरा॑:

tva soma pra cikito manīṣā tva rajiṣṭhamanu neṣi panthām | tava praṇītī pitaro na indo deveṣu ratnamabhajanta dhīrā:

हिन्दी अर्थ

कर्मो में लगे रहने से मनुष्य आसुरवृत्तियों का शिकार नहीं होता। ऋतेन॑ सत्यपि द्दियं विपान॑शुक्रमन्धसऽ इन्द्र॑स्येद्धिययिदं पयो ऽमृतं मधुं ॥७२॥ १. गतमन्त्र के अनुसार क्रियाशीलता के द्वारा वासनाओं से ऊपर उठ जाने पर शरीर मे सोम सुरक्षित रहता है ओर यह सोमः=सोम राजा (राज् दीप्तौ) उसके जीवन को दीप्त

English

Thou, Soma, art preeminent for wisdom: along the straightest path thou art our leader. Our prudent Fathers by thy wisdom, Soma, dealt out among the Gods their share of treasure.

अध्याय १९

श्लोक 53

त्वया॒ हि न॑: पि॒तर॑: सोम॒ पूर्वे॒ कर्मा॑णि च॒क्रुः प॑वमान॒ धीरा॑: ।व॒न्वन्नवा॑तः परि॒धीँ१ रपो॑र्णु वी॒रेभि॒रश्वै॑र्म॒घवा॑ भवा नः

tvayā hi na: pitara: soma pūrve karmāṇi cakruḥ pavamāna dhīrā: | vanvannavātaḥ paridhī~1 raporṇu vīrebhiraśvairmaghavā bhavā naḥ

हिन्दी अर्थ

सोम की रक्षा करनेवाला व्यक्ति सरल वृत्ति व स्वभाव का बनता हे। इसके जीवन मे व्यर्थं की चिन्तां उत्पत्र नहीं होती, इसीलिए यह दीर्घजीवी बनता हे। इसके जीवन में सत्य तथा माधुर्य होता दे। सूचना-' ऋतेन ' का अर्थ "यज्ञ से" भी है। यह सोम हममे यक्िय वृत्ति को उत्पन्न

English

For our sage Fathers, Soma Pavamâna, of old performed by thee their sacred duties. Fighting unvanquished, open the enclosures: enrich us with large gifts of steeds and heroes.

अध्याय १९

श्लोक 54

त्वᳪ सो॑म पि॒तृभि॑: संविदा॒नोऽनु॒ द्यावा॑पृथि॒वी आ त॑तन्थ ।तस्मै॑ त इन्दो ह॒विषा॑ विधेम व॒यᳪ स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम्

tva soma pitṛbhi: saṃvidāno'nu dyāvāpṛthivī ā tatantha | tasmai ta indo haviṣā vidhema vaya syāma patayo rayīṇām

हिन्दी अर्थ

हम प्र्ञापूर्वक कर्मो में लगे रहने के द्वारा सोम का शरीर मेँ रक्षण करनेवाले ऋतेन सत्यमिं दियं विपान॑रशुक्रमन्ध॑सऽ इन्द्रस्येद्ियमिदं पयो ऽमुतं मधु।।७४॥ १. शुचिषत् ( पवित्रेषु विद्वत्सु सीदति-- द०) पवित्र जीवनवाले विद्वानों के सम्पर्क मे रहनेवाला, उन्हीं के सङ्क में बैठने-उठनेवाला हसः=( ठन्ति पाप्मानम्) सत्सङ् द्वारा पापों

English

Associate with the Fathers thou, O Soma, hast spread thyself abroad through earth and heaven. So with oblation let us serve thee, Indu, and so let us become the lords of riches.

अध्याय १९

श्लोक 55

बर्हि॑षदः पितर ऊ॒त्य र्वागि॒मा वो॑ ह॒व्या च॑कृमा जु॒षध्व॑म् ।त आ ग॒ताव॑सा॒ शन्त॑मे॒नाथा॑ न॒: शं योर॑र॒पो द॑धात

barhiṣadaḥ pitara ūtya rvāgimā vo havyā cakṛmā juṣadhvam | ta ā gatāvasā śantamenāthā na: śaṃ yorarapo dadhāta

हिन्दी अर्थ

शरीर मे सोम की रक्षा के लिए हम सत्सङ्ख के द्वारा आसुरवृत्ति को नष्ट करे। प्राणसाधना करर तथा ज्ञान की रुचिवाले हों। ऋतेन॑ सत्यम द्धियं विपानर्शुक्रमन्ध॑सऽडन्द्रस्येद्धिययिदं पयो ऽमृतं मधु॥।७५॥ ९. परिस्ुतः=( सर्वतः खुतः पक्वात्-द० ) सब प्रकार से परिपक्व अच्नात्-(यवादे:- द० )

English

Fathers who sit on sacred grass, come help us: these offerings we have made for you; accept them. So come to us with most auspicious favour, and give us health and strength without a trouble.

अध्याय १९

श्लोक 56

आऽहं पि॒तॄन्त्सु॑वि॒दत्राँ॑२ अवित्सि॒ नपा॑तं च वि॒क्रम॑णं च॒ विष्णो॑: ।ब॒र्हि॒षदो॒ ये स्व॒धया॑ सु॒तस्य॒ भज॑न्त पि॒त्वस्त इ॒हाग॑मिष्ठाः

ā'haṃ pitṝntsuvidatrā~2 avitsi napātaṃ ca vikramaṇaṃ ca viṣṇo: | barhiṣado ye svadhayā sutasya bhajanta pitvasta ihāgamiṣṭhāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रजा का रक्षक राजा परिपक्व अन्नं का सेवन करता हुआ उत्पन्न सारभूत सोम का शरीर मे पान करता है, तभी यह प्रजाओं को क्षतो से वचानैवाला व प्रजाओं का वर्धन करनेवाला होता है। ब्रह्मचर्येण राजा राष्ट विरक्षतिब्रह्यचर्य से ही राजा राष्ट् कौ रेतः मूत्रं ( प्रजापति क्री राष्ट् कोदो भटे)

English

I have attained the gracious-minded Fathers, have gained a son and progeny from Vishnu. They who enjoy pressed juices with oblation, seated on sacred grass, come oftenest hither.

अध्याय १९

श्लोक 57

उप॑हूताः पि॒तर॑: सो॒म्यासो॑ बर्हि॒ष्ये॒षु नि॒धिषु॑ प्रि॒येषु॑ ।त आ ग॑मन्तु॒ त इ॒ह श्रु॑व॒न्त्वधि॑ ब्रुवन्तु॒ ते॑ऽवन्त्व॒स्मान्

upahūtāḥ pitara: somyāso barhiṣyeṣu nidhiṣu priyeṣu | ta ā gamantu ta iha śruvantvadhi bruvantu te'vantvasmān

हिन्दी अर्थ

चुना जाने पर राष्ट के सिंहासन पर वैठता हुजा राजा प्रजा मे शक्ति व गति का आधान करता है। प्रजा को वश में रखता हुआ यह शब्रुशोषक शक्ति से युक्त होता है। विकास के द्वारा राष्ट कौ उन्नति के आवरणों को दूर करता है। राष्ट पर आनेवाली आपत्तियों से राष्ट को वचाता है।

English

May they, the Fathers, worthy of the Soma, invited to their favourite oblations Laid on the sacred grass, come nigh and listen: may they be gracious unto us and bless us.

अध्याय १९

श्लोक 58

आ य॑न्तु नः पि॒तर॑: सो॒म्यासो॑ऽग्निष्वा॒त्ताः प॒थिभि॑र्देव॒यानै॑: ।अ॒स्मिन् य॒ज्ञे स्व॒धया॒ मद॒न्तोऽधि॑ ब्रुवन्तु॒ ते॒ऽवन्त्व॒स्मान्

ā yantu naḥ pitara: somyāso'gniṣvāttāḥ pathibhirdevayānai: | asmin yajñe svadhayā madanto'dhi bruvantu te'vantvasmān

हिन्दी अर्थ

राजा राष्ट् में सत्यासत्य का ठीक विवेचन करनेवाला होता है तथा प्रजा में सत्य के प्रति श्रद्धा व अनृत के प्रति अश्रद्धा को उत्पन्न करने के लिए यत्नशील होता है। वेदेन रूपे व्य॑पिबत्सुतासुतौ प्रजापतिः । ऋतेन॑ सत्यमिं द्दरियं विपानःशुक्रमन्ध॑स्रऽ इन्द्रस्येद्धियमिदः पयो ऽमृतं मधु ॥।७८॥

English

May they our Fathers whom the flames have tasted, worthy of Soma, come on God-ward pathways. Enjoying at this sacrifice their portion, may they be gracious unto us and bless us.

अध्याय १९

श्लोक 59

अग्नि॑ष्वात्ताः पितर॒ एह ग॑च्छत॒ सद॑: – सदः सदत सुप्रणीतयः ।अ॒त्ता ह॒वीᳪषि॒ प्रय॑तानि ब॒र्हिष्यथा॑ र॒यिᳪ सर्व॑वीरं दधातन

agniṣvāttāḥ pitara eha gacchata sada: – sadaḥ sadata supraṇītayaḥ | attā havīṣi prayatāni barhiṣyathā rayi sarvavīraṃ dadhātana

हिन्दी अर्थ

परिपक्व अन्न के रसो से उत्पन्न वीर्य मनुष्य-शरीर मेँ सुरक्षित होकर उसका आप्यायन करनेवाला होता है ओर उसे शान्त बनाता हे। अश्विनं यज्ञश्संविता सर॑स्वतीन्द्र॑स्य रूपं वरूणो भिषज्यन् ॥८०॥ ९. गतमन्त्रो मे राजा के राष्ट को सुरक्षित करने, उसमें न्याय-व्यवस्था को ठीक रखने

English

Fathers whom Agni's flames have tasted, come ye nigh: ye kindly leaders, take ye each your proper place. Eat sacrificial food presented on the grass: grant riches with a multitude of hero sons.

अध्याय १९

श्लोक 60

ये अ॑ग्निष्वा॒त्ता ये अन॑ग्निष्वात्ता॒ मध्ये॑ दि॒वः स्व॒धया॑ मा॒दय॑न्ते ।तेभ्य॑: स्व॒राडसु॑नीतिमे॒तां य॑थाव॒शं त॒न्वं॒ कल्पयाति

ye agniṣvāttā ye anagniṣvāttā madhye divaḥ svadhayā mādayante | tebhya: svarāḍasunītimetāṃ yathāvaśaṃ tanvaṃ kalpayāti

हिन्दी अर्थ

१. राजा राष्ट में कुटीर उद्योग की इस प्रकार व्यवस्था करे कि लोगों के जीवन में आर्थिक समस्यां उत्पन्न न हों। २. जीवनयज्ञ के उत्तम सञ्चालन करे लिए प्राणापान कौ शक्ति का वर्धन हो, निर्माण की वृत्ति हो तथा विज्ञान कौ वृद्धि हो। ३. ्र्प्या, द्वेष, मात्सर्य आदि के अभाव से सभी नीरोग व सुरूप हो।

English

For those who, burnt with fire or not cremated, joy in their portion in the midst of heaven, May the Self-Ruler form the world of spirits and this their body as his pleasure wills it.

अध्याय १९

श्लोक 61

अ॒ग्नि॒ष्वा॒त्तानृ॑तु॒मतो॑ हवामहे नाराश॒ᳪसे सो॑मपी॒थं य आ॒शुः ।ते नो॒ विप्रा॑सः सु॒हवा॑ भवन्तु व॒यᳪ स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम्

agniṣvāttānṛtumato havāmahe nārāśase somapīthaṃ ya āśuḥ | te no viprāsaḥ suhavā bhavantu vaya syāma patayo rayīṇām

हिन्दी अर्थ

प्रज्ञापूर्वक कर्मो से हमारे शरीर की कान्ति बनी रहती है। २. हमारे जीवन मे सूर्यं के समान ानज्योति हो, चन्द्र के समान मानस आह्वाद हो तथा अग्नि के समान शरीर में शक्ति कौ उष्णता हो। ३. शाष्प, तोक्म व लाजा प्रयोग खे हमारे लोम, त्वचा व अस्थि मज्जानं मासरैः कारोतरेण दध॑तो गवौ त्वचि।।८२॥

English

We call the Agnishvâttas, true to seasons, those who drank Soma in the Nârâsamsa. Prompt to give ear to us be they, the sages, and then let us be lords of wealth and treasure.

अध्याय १९

श्लोक 62

आच्या॒ जानु॑ दक्षिण॒तो नि॒षद्ये॒मं य॒ज्ञम॒भि गृ॑णीत॒ विश्वे॑ ।मा हि॑ᳪसिष्ट पितर॒: केन॑ चिन्नो॒ यद्व॒ आग॑: पुरु॒षता॒ करा॑म

ācyā jānu dakṣiṇato niṣadyemaṃ yajñamabhi gṛṇīta viśve | mā hisiṣṭa pitara: kena cinno yadva āga: puruṣatā karāma

हिन्दी अर्थ

प्राणापान वैद्य हैँ, लान से अन्तःसौन्दर्य प्राप्त होता हे। सदा प्रसन्न रहने से अस्थि, मज्जा आदि टीक रहते है। उत्तमता से कर्मो मे लगे रहने से मनुष्य ज्ञान कौ १. सरस्वती =जलान की अधिदेवता मनसा-मनन- संकल्प से तथा नासत्याभ्याम् प्राणापाना के द्वारा पेशलम् लचकीले, कोमल (5०१), सूखे काठ कौ भांति न अकडे हए, वसु

English

Bowing the bended knee and seated southward, accept ye, all, this sacrifice with favour. Injure us not for any sin, O Fathers, which we through human frailty have committed.

अध्याय १९

श्लोक 63

आसी॑नासो अरु॒णीना॑मु॒पस्थे॑ र॒यिं ध॑त्त दा॒शुषे॒ मर्त्या॑य ।पु॒त्रेभ्य॑: पितर॒स्तस्य॒ वस्व॒: प्र य॑च्छत॒ त इ॒होर्जं॑ दधात

āsīnāso aruṇīnāmupasthe rayiṃ dhatta dāśuṣe martyāya | putrebhya: pitarastasya vasva: pra yacchata ta ihorjaṃ dadhāta

हिन्दी अर्थ

(क) हमें ज्ञानपूर्वक आहार विहार करना चादिए, (ख) विचारशील उत्तम संकल्पवाला होना चाहिए. (ग) प्राणापान की शक्ति का वर्धन करना चाहिए, (घ) शरीर की उन्नति के लिए पक्वान्नं के रस का ग्रहण करना चाहिए तथा (ङ) त्यागवृत्तिवाला व धर्यशील बनकर नीरोग व विकसित शरीरवाला बनना चाहिए्।

English

Lapped in the bosom of the purple Mornings give riches to the man who brings oblation. Grant to his sons a portion of your treasure, and, present, give us energy, ye Fathers.

अध्याय १९

श्लोक 64

यम॑ग्ने कव्यवाहन॒ त्वं चि॒न्मन्य॑से र॒यिम् ।तन्नो॑ गी॒र्भिः श्र॒वाय्यं॑ देव॒त्रा प॑नया॒ युज॑म्

yamagne kavyavāhana tvaṃ cinmanyase rayim | tanno gīrbhiḥ śravāyyaṃ devatrā panayā yujam

हिन्दी अर्थ

(क) दूध के प्रयोग से वीर्यशक्ति को उत्सन्न करे. (ख) आत्म- नियन्त्रण व गतिशीलता से उस शक्ति की रक्षा करे (ग) अमति व दुर्मित कौ अपने से दूर करें, (घ) आमाशय-नाडी (आन्त्र) व पक्वाशय में प्रविष्ट अन्न के उपादेयांश को अपने समीप रक्खे तथा मलरूप हेयांश को अपने से दूर करं, जिससे पूर्णं स्वास्थ्य कौ प्राप्त कर सक।

English

O Agni Kavyavâhana, cause us to praise before the Gods, As our associate meet for lauds, wealth which e’en thou reputest wealth.

अध्याय १९

श्लोक 65

यो अ॒ग्निः क॑व्य॒वाह॑नः पि॒तॄन् यक्ष॑दृता॒वृध॑: ।प्रेदु॑ ह॒व्यानि॑ वोचति दे॒वेभ्य॑श्च पि॒तृभ्य॒ आ

yo agniḥ kavyavāhanaḥ pitṝn yakṣadṛtāvṛdha: | predu havyāni vocati devebhyaśca pitṛbhya ā

हिन्दी अर्थ

(क) जितेन्द्रिय पुरुष शरीर को स्वस्थ्य, हदय को सत्यमय तथा मस्तिष्क को निर्माणात्मक विचारोँवाला बनाता है, (ख) ईर्प्यादि से ऊपर उठकर यह अपने यकृत्, क्लोम व मसानों को विकृत नहीं होने देता (ग) वायव्य पदार्थो के प्रयोग से पित्त को संयत ९. गतमन्त्र के "सुत्रामा इन्द्र' कौ मधु-मधुरगुणान्विति अन्न को पिन्वमानाः=सेवन

English

May Agni, Kavya-bearer, who hath worshipped Fathers true to Law. Announce to Gods and Fathers these our sacrificial offerings.

अध्याय १९

श्लोक 66

त्वम॑ग्न ईडि॒तः क॑व्यवाह॒नावा॑ड्ढ॒व्यानि॑ सुर॒भीणि॑ कृ॒त्वी ।प्रादा॑: पि॒तृभ्य॑: स्व॒धया॒ ते अ॑क्षन्न॒द्धि त्वं दे॑व॒ प्रय॑ता ह॒वीᳪषि॑

tvamagna īḍitaḥ kavyavāhanāvāḍḍhavyāni surabhīṇi kṛtvī | prādā: pitṛbhya: svadhayā te akṣannaddhi tvaṃ deva prayatā havīṣi

हिन्दी अर्थ

(क) जिस समय हमारी ओते अन्न का ठीक परिपाक करेगी, (ख) गुदा आदि इन्द्रियो मल के दूरीकरण से रक्षिका होगी, (ग) धमनिर्योँ रुधिरादि का ठीक पूरण करेगी (घ) प्लीहा अविकृत होकर हमारे उत्थान का कारण बनेगा, (ङ) नाभि सब शक्तियों च प्रज्ञानों का आधार बनेगी ओर (च) उदर रुधिरादि का निर्माण करेगा, तभी हम

English

Thou. Agni Kavya-bearer, when entreated, didst bear the offerings which thou madest fragrant, And gayest to the Fathers who did eat them with Svadhâ. Eat, thou God, the gifts we bring thee.

अध्याय १९

श्लोक 67

ये चे॒ह पि॒तरो॒ ये च॒ नेह याँश्च॑ वि॒द्म याँ२ उ॑ च॒ न प्र॑वि॒द्म ।त्वं वे॑त्थ॒ यति॒ ते जा॑तवेदः स्व॒धाभि॑र्य॒ज्ञँ सुकृ॑तं जुषस्व

ye ceha pitaro ye ca neha yā~śca vidma yā~2 u ca na pravidma | tvaṃ vettha yati te jātavedaḥ svadhābhiryajña~ sukṛtaṃ juṣasva

हिन्दी अर्थ

‹ कुम्भ" अर्थात् अपने अन्दर शक्ति व आनन्द का पूरण करनेवाले के सब अङ्क सुन्दर होते हैँ। मुख ओर सिर तो उत्कृष्ट होते ही है, इसकी जिह्वा व इसके प्राणापान -पवित्र होते है। इसके मुख मे सरस्वती का निवास होता है। इसकौ मलशोधक इदर्यो भी मलशोधन के द्वारा इसे बलवान् बनाती हे।

English

Thou, Jâtavedas, knowest well the number of Fathers who are here and who are absent, Of Fathers whom we know and whom we know not. Accept the sacrifice arranged with portions.

अध्याय १९

श्लोक 68

इ॒दं पि॒तृभ्यो॒ नमो॑ अस्त्व॒द्य ये पूर्वा॑सो॒ य उप॑रास ई॒युः ।ये पार्थि॑वे॒ रज॒स्या निष॑त्ता॒ ये वा॑ नू॒नᳪ सु॑वृ॒जना॑सु वि॒क्षु

idaṃ pitṛbhyo namo astvadya ye pūrvāso ya uparāsa īyuḥ | ye pārthive rajasyā niṣattā ye vā nūna suvṛjanāsu vikṣu

हिन्दी अर्थ

मनुष्य को चाहिए कि प्राणशक्ति के साथ ज्ञान का भी वर्धन करे। बकरी के दूध तथा ठीक पके ठव्य पदार्थो के सेवन से तेजस्वी बरने। अत्न के ग्रहण के साथ गुणों को भी ग्रहण करे। सुन्दर वस्त्रौ के साथ शब्द भी सुन्दर बोले। इसकी शक्ति इसे स्वास्थ्य का सौन्दर्य प्राप्त कराये। कपडे बहुत तंग न पहने।

English

Now let us pay this homage to the Fathers, to those who passed of old and those who followed, Those who have rested in the earthly region and those who dwell among the Mighty Races.

अध्याय १९

श्लोक 69

अधा॒ यथा॑ नः पि॒तर॒: परा॑सः प्र॒त्नासो॑ अग्न ऋ॒तमा॑शुषा॒णाः ।शुचीद॑य॒न् दीधि॑तिमुक्थ॒शास॒: क्षामा॑ भि॒न्दन्तो॑ अरु॒णीरप॑ व्रन्

adhā yathā naḥ pitara: parāsaḥ pratnāso agna ṛtamāśuṣāṇāḥ | śucīdayan dīdhitimukthaśāsa: kṣāmā bhindanto aruṇīrapa vran

हिन्दी अर्थ

हम अपना रक्षण करे। उत्तमत्ता में स्पर्धावाले हो। सदा नासिका से श्वास लेते हुए शक्ति का वर्धन कर। आचार्य से उक्त का अनुवाद करते हुए ज्ञान को बाण तथा इन्द्रियों, मन व बुद्धि की स्थिरता से नाडी- संस्थान को ठीक रक्खे, प्राणापान का वर्धन करर तथा हदय को वासनाशन्य बनाएं।

English

As in the days of old our ancient Fathers speeding the work of holy worship, Agni! Sought pure light and devotion, singing praises, they cleft the ground and made red Dawns apparent.

अध्याय १९

श्लोक 70

उ॒शन्त॑स्त्वा॒ नि धी॑मह्यु॒शन्त॒: समि॑धीमहि ।उ॒शन्नु॑श॒त आ व॑ह पि॒तॄन् ह॒विषे॒ अत्त॑वे

uśantastvā ni dhīmahyuśanta: samidhīmahi | uśannuśata ā vaha pitṝn haviṣe attave

हिन्दी अर्थ

जितेन्द्रिय पुरुष-(क) क्रिया के द्वारा शक्तिशाली होता है, (ख) कानों से खदा ज्ञान की वाणियों को सुनता है, (ग) प्राणापान के द्वारा शुद्ध वायु के ग्रहण से नीरोग बनता है, (घ) जौ आदि सात्विक अत्रं के प्रयोग से इसका हदय वासनाशून्य होता है, (ङ) इसका मन इसके मन;प्रसाद को प्रकट करता है ओर (च) यह उत्साहमय सारभूत

English

Right gladly do we set thee down, right gladly make thee burn and glow. Gladly bring yearning Fathers nigh to eat the food of sacrifice.

अध्याय १९

श्लोक 71

अ॒पां फेने॑न॒ नमु॑चे॒: शिर॑ इ॒न्द्रोद॑वर्तयः ।विश्वा॒ यदज॑य॒ स्पृध॑:

apāṃ phenena namuce: śira indrodavartayaḥ | viśvā yadajaya spṛdha:

हिन्दी अर्थ

उपासक अस्तेय धर्म का पालन करता है। भरपूर युवावस्था मे भी विषयों का परिग्रही नहीं बनता। ज्ञान के कारण यशस्वी व श्रीसम्पन्न कार्यो कौ ही करता हे। इसका ज्ञान इसे अहिसक बनाता दहै। यह दीप्त होता हे, वीर्यसम्पत्त अङ्गौवाला होता हे। शतस्रानम् जायुः "प्रसाद-प्रकाश-प्रभाव'

English

Indra, with waters’ foam didst thou wrench off the head of Namuchi, Subduing all contending hosts.

अध्याय १९

श्लोक 72

सोमो॒ राजा॒मृत॑ᳪ सु॒त ऋ॑जी॒षेणा॑जहान्मृ॒त्युम् ।ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॑ᳪ शु॒क्रमन्ध॑स॒ इन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृतं॒ मधु॑

somo rājāmṛta suta ṛjīṣeṇājahānmṛtyum | ṛtena satyamindriyaṃ vipāna śukramandhasa indrasyendriyamidaṃ payo'mṛtaṃ madhu

हिन्दी अर्थ

जितेन्द्रिय पुरुष अपने अङ्कं को आत्मा में स्थापित करने का प्रयत्न करता है, प्राणापान-शक्ति की वृद्धि से नीरोग होता है, ज्ञान व योगाद्धों से प्रभु से मेल करता हे, सौ वर्ष तक जीता ठै, प्रसन्न रहता हे, ज्योतिर्मय व विषयों के पीक्ठे न मरनेवाला होता हे। कर्मो मे रख व उसका त्नाभ

English

King Soma, pressed, the Drink of Life, left Death behind with Soma-dregs. By Law came truth and Indra-power, the pure bright drinking-off of juice. The power of Indra was this sweet immortal milk.

अध्याय १९

श्लोक 73

अ॒द्भ्यः क्षी॒रं व्य॑पिब॒त् क्रुङ्ङा॑ङ्गिर॒सो धि॒या ।ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॑ᳪ शु॒क्रमन्ध॑स॒ इन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृतं॒ मधु॑

adbhyaḥ kṣīraṃ vyapibat kruṅṅāṅgiraso dhiyā | ṛtena satyamindriyaṃ vipāna śukramandhasa indrasyendriyamidaṃ payo'mṛtaṃ madhu

हिन्दी अर्थ

पशुओं का दूध, यज्ञशेष अन्न व शहद के प्रयोग से मै अमरत=नीरोग बनं। चुद्धि की तीव्रता से ज्ञानी बनकर ( विनीत बनूँ)। ठीक अन्नं का प्रयोग मुड्े शक्तिशाली लनाये। यह ' अमृत- सोम -इन्दु' ही राजा बनने के -योग्य है। इस राजा के वर्णन से ही अगले

English

The Snipe of Angiras by thought from out the waters drank up milk. By Law came truth, etc., as in 72.

अध्याय १९

श्लोक 74

सोम॑म॒द्भ्यो व्य॑पिब॒च्छन्द॑सा ह॒ᳪसः शु॑चि॒षत् ।ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॑ᳪ शु॒क्रमन्ध॑स॒ इन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृतं॒ मधु॑

somamadbhyo vyapibacchandasā hasaḥ śuciṣat | ṛtena satyamindriyaṃ vipāna śukramandhasa indrasyendriyamidaṃ payo'mṛtaṃ madhu

हिन्दी अर्थ

मधुर व्यवहारवाले हो। (ङ) सोम कौ रक्षा करनेवाले ब उसका शरीर में ठीक परिपाक करनेवाले हों, जिससे उनकी प्राणापान शक्ति बनी रहे, वे उत्तम ज्ञान को प्राप्त करनेवाले ओर अन्त में सूक्ष्म बुद्धि द्वारा प्रभु का दर्शन करनेवाले हों। १. गतमन्त्र के अनुसार सोम का शरीर में रक्षण व परिपाक करते हए ये पति-पत्नी

English

The Hamsa throned in light drank up by metre Soma from the floods. By Law, etc.

अध्याय १९

श्लोक 75

अन्ना॑त्परि॒स्रुतो॒ रसं॒ ब्रह्म॑णा॒ व्य॑पिबत् क्ष॒त्रं पय॒: सोमं॑ प्र॒जाप॑तिः ।ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॑ᳪ शु॒क्रमन्ध॑स॒ इन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृतं॒ मधु॑

annātparisruto rasaṃ brahmaṇā vyapibat kṣatraṃ paya: somaṃ prajāpatiḥ | ṛtena satyamindriyaṃ vipāna śukramandhasa indrasyendriyamidaṃ payo'mṛtaṃ madhu

हिन्दी अर्थ

-श्रद्धा सोम को पवित्र करती हे, क्योंकि यह वासनाओं का निवारण करती है, हमें स्पूर्ति-सम्पतन व कर्मठ बनाती है तथा शक्तियों के विस्तार के लिए प्रेरित करती ठै। शुक्रेण देव देवता: पिपृग्धि रसेनान्नं यज॑मानाय धेहि ॥५॥ ९. सुतः = उत्पन्न हुञा सोमः यह सोम सुरया=( सुरा 10 ०ला11. 10 111€) शासन के

English

Prajâpati by Brahma drank the essence from the foaming food, the princely power, milk, Soma juice. By Law, etc.

अध्याय १९

श्लोक 76

रेतो॒ मूत्रं॒ वि ज॑हाति॒ योनिं॑ प्रवि॒शदि॑न्द्र॒यिम् । गर्भो॑ ज॒रायु॒णाऽऽवृ॑त॒ उल्बं॑ जहाति॒ जन्म॑ना ।ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॑ᳪ शु॒क्रमन्ध॑स॒ इन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृतं॒ मधु॑

reto mūtraṃ vi jahāti yoniṃ praviśadindrayim | garbho jarāyuṇā''vṛta ulbaṃ jahāti janmanā | ṛtena satyamindriyaṃ vipāna śukramandhasa indrasyendriyamidaṃ payo'mṛtaṃ madhu

हिन्दी अर्थ

हम यव आदि सात्विक भोजनों खे पवित्र विचारोवाले हौकर प्रभु का उपासन करे। वे प्रभु " कुविदज् ' है, शक्तिशाली गति देनेवाले है। प्रभु के सम्पर्क सेमे भी तेज, वीर्य व बल को प्राप्त करता ह। सूचना-' कुवित् इति बल नाम । कुवित् बल वाचक टै, सम्भवतः यही शब्द विकृत

English

The generative part enters the yoni: it leaves aside the retas and the mûtra. The caul-invested embryo leaves by its birth the covering folds. By Law, etc.

अध्याय १९

श्लोक 77

दृ॒ष्ट्वा रू॒पे व्याक॑रोत् सत्यानृ॒ते प्र॒जाप॑तिः । अश्र॑द्धा॒मनृ॒तेऽद॑धाच्छ्र॒द्धाᳪ स॒त्ये प्र॒जाप॑तिः ।ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॑ᳪ शु॒क्रमन्ध॑स॒ इन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृतं॒ मधु॑

dṛṣṭvā rūpe vyākarot satyānṛte prajāpatiḥ | aśraddhāmanṛte'dadhācchraddhā satye prajāpatiḥ | ṛtena satyamindriyaṃ vipāna śukramandhasa indrasyendriyamidaṃ payo'mṛtaṃ madhu

हिन्दी अर्थ

पति-पत्नी अपने-अपने कार्यक्ेत्र का ग्रहण करके प्रभु-स्मरणपूर्वक अपने कार्यो को करेगे तो घर सचमुच "आभूति' का घ्र बनेगा, जो सब दुष्टिकोणों से फूला-फला है (आ भूति)। वहं स्वास्थ्य होगा, सुसन्तान होगी. सम्पत्ति होगी ओर इन सबसे बदकर वर्ह " सत्य' होगा।

English

Viewing both forms Prajâpati gave truth and falsehood different shapes. Prajâpati assigned the lack of faith to falsehood, faith to truth. By Law, etc.

अध्याय १९

श्लोक 78

वेदे॑न रू॒पे व्य॑पिबत् सुतासु॒तौ प्र॒जाप॑तिः ।ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॑ᳪ शु॒क्रमन्ध॑स॒ इन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृतं॒ मधु॑

vedena rūpe vyapibat sutāsutau prajāpatiḥ | ṛtena satyamindriyaṃ vipāna śukramandhasa indrasyendriyamidaṃ payo'mṛtaṃ madhu

हिन्दी अर्थ

मेरा अत्रमयकोश तेजस्वी हो, प्राणमयकोश वीर्यवान् हो। मनोमयकोश में मे बल व ओज को धारण करूं। मेरा विज्ञानमयकोश मन्यु जान से परिपूर्णं हो, ओर सहस् को अपनाकर मेँ आनन्दमयकोशवाला बनू। श्येनं प॑तत्त्िण॑सिश्टःसेमं पात्वश्टंसः।॥॥९०॥

English

By holy lore Prajâpati drank up both forms, pressed and unpressed. By Law, etc.

अध्याय १९

श्लोक 79

दृ॒ष्ट्वा प॑रि॒स्रुतो॒ रस॑ᳪ शु॒क्रेण॑ शु॒क्रं व्य॑पिबत् पय॒: सोमं॑ प्र॒जाप॑तिः ।ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॑ᳪ शु॒क्रमन्ध॑स॒ इन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृतं॒ मधु॑

dṛṣṭvā parisruto rasa śukreṇa śukraṃ vyapibat paya: somaṃ prajāpatiḥ | ṛtena satyamindriyaṃ vipāna śukramandhasa indrasyendriyamidaṃ payo'mṛtaṃ madhu

हिन्दी अर्थ

हम शक्तिसम्पन्न बनकर स्वस्थ, प्रमुदित सन्तान को जन्म दे। उन सन्तानं को सद्गुणो से संपृक्त करें तथा विगुणो से विपृक्त करक पितृऋण से अनृण हो। देवा यज्ञम॑तन्वत भेषजं भिषजाश्विना १. गतमन्त्र में अपने को भद्र से संपृक्त करने व पाप से विपृक्त करने का उल्लेख हे।

English

Seeing the farming liquor's sap, Prajâpati with the bright drank nut the bright the milk, the Soma juice. By Law, etc.

अध्याय १९

श्लोक 80

सीसे॑न॒ तन्त्रं॒ मन॑सा मनी॒षिण॑ ऊर्णासू॒त्रेण॑ क॒वयो॑ वयन्ति ।अ॒श्विना॑ य॒ज्ञᳪ स॑वि॒ता सर॑स्व॒तीन्द्र॑स्य रू॒पं वरु॑णो भिष॒ज्यन्

sīsena tantraṃ manasā manīṣiṇa ūrṇāsūtreṇa kavayo vayanti | aśvinā yajña savitā sarasvatīndrasya rūpaṃ varuṇo bhiṣajyan

हिन्दी अर्थ

दीक्षित व्यक्ति शष्पभोजन का व्रत लेता हे, प्रकृष्ट जीवन बितानेवाला नव प्ररूढ यवों के प्रयोग का निश्चय करता है ओर सोम के क्रय (प्राप्ति) की इच्छावाला सोम का सौदागर बनने कौ कामनावाला " लाजा, सोमांशु व मधु! का प्रयोग करता हे। १. "अत सातत्यगमने से बनकर अतिथि" शब्द प्रभु कौ ओर निरन्तर चलनेवाले का

English

Wise, with mind, lead, and thread of wool the sages twine an amulet. Sarasvatî, Savitar, Varuna, the Asvins span sacrifice and healed his form for Indra.

अध्याय १९

श्लोक 81

तद॑स्य रू॒पम॒मृत॒ᳪ शची॑भिस्त॒स्रो द॑धुर्दे॒वता॑: सᳪररा॒णाः ।लोमा॑नि॒ शष्पै॑र्बहु॒धा न तोक्म॑भि॒स्त्वग॑स्य मा॒ᳪसम॑भव॒न्न ला॒जाः

tadasya rūpamamṛta śacībhistasro dadhurdevatā: sararāṇāḥ | lomāni śaṣpairbahudhā na tokmabhistvagasya māsamabhavanna lājāḥ

हिन्दी अर्थ

(क) आचार्यो का एक ही कार्यो कि वे ज्ञान देने में लगे रहें, (ख) विद्यार्थियों का भी एक ही कार्यदहौ कि वे उस ज्ञान को अपने साथ सङ्कत करने का प्रयत्न अर्धऽऋचैरुक्थानाश्शररूपं पहैरराप्नोति निविदः ९. अर्धऋचैः- मन्त्र भाग से उक्थानाम्प्रवचनों का रूपम्-सोन्दर्य आप्नोतिनप्राप्त

English

This his immortal shape with mighty powers three Deities bestowing gifts compounded. His hair they made with sprouts of grass and barley, and roasted grain with skin and flesh supplied him.

अध्याय १९

श्लोक 82

तद॒श्विना॑ भि॒षजा॑ रु॒द्रव॑र्तनी॒ सर॑स्वती वयति॒ पेशो॒ अन्त॑रम् ।अस्थि॑ म॒ज्जानं॒ मास॑रैः कारोत॒रेण॒ दध॑तो॒ गवां॑ त्व॒चि

tadaśvinā bhiṣajā rudravartanī sarasvatī vayati peśo antaram | asthi majjānaṃ māsaraiḥ kārotareṇa dadhato gavāṃ tvaci

हिन्दी अर्थ

हम वायु की भाँति क्रियाशील व बुराइयों का संहार करनेवाले बने, संविभागपूर्वक कार्यो को करते हए हम गतिशील व षोडशकला सम्पूर्णं देहवाले हों। आनन्दमयता से हम महान् बनें, स्थिरता को अपनार्। रषिः-हैमवर्चिः। देवता-यज्ञः। छन्दः-अनुष्टुप्। स्वरः गान्धारः।।

English

His inner shape Sarasvatî arranges and, borne on bright paths, the Physician Asvins: With Mâsaras and sieve his bone and marrow, as on the Oxen's hide they lay the liquor.

अध्याय १९

श्लोक 83

सर॑स्वती॒ मन॑सा पेश॒लं वसु॒ नास॑त्याभ्यां वयति दर्श॒तं वपु॑: ।रसं॑ परि॒स्रुता॒ न रोहि॑तं न॒ग्नहु॒र्धीर॒स्तस॑रं॒ न वेम॑

sarasvatī manasā peśalaṃ vasu nāsatyābhyāṃ vayati darśataṃ vapu: | rasaṃ parisrutā na rohitaṃ nagnahurdhīrastasaraṃ na vema

हिन्दी अर्थ

हमारा भोजन अन्न, फल, शाक व दूध्हो। हम सत्य से सव इष्टकार्यो कौ सिद्ध करे। शान्ति से गृहस्थ में यज्ञो का सेवन करे। इन सम्यक् कृत यज्ञो के द्वारा स्थितप्रज्ञता व ब्राह्मीस्थिति को प्राप्त करे। दर्षिणा श्रद्धा्माप्नोति श्रद्धयां सत्यमांप्यते ॥॥३०॥

English

By thought Sarasvatî with both Nâsatyas forms lovely treasure and a beauteous body. Like shuttle through the loom the steady ferment mixes the red juice with the foaming spirit.

अध्याय १९

श्लोक 84

पय॑सा शु॒क्रम॒मृतं॑ ज॒नित्र॒ᳪ सुर॑या॒ मूत्रा॑ज्जनयन्त॒ रेत॑: ।अपाम॑तिं दुर्म॒तिं बाध॑माना॒ ऊव॑ध्यं॒ वात॑ᳪ स॒ब्वं तदा॒रात्

payasā śukramamṛtaṃ janitra surayā mūtrājjanayanta reta: | apāmatiṃ durmatiṃ bādhamānā ūvadhyaṃ vāta sabvaṃ tadārāt

हिन्दी अर्थ

- प्राणायाम कौ साधना वीर्य की केवल रक्षा ही नहीं करती, अपितु उस वीर पुरुष को अभिमान का शिकार भी नदीं होने देती। ज्ान-प्राप्ति मे लगना" उस वीर्य का सदव्यय करके आत्मशक्ति को बद्ानेवाला होता हेै। १. यत्- जो रसिनः=रसवाले जीवन को माधुर्य से भरनेवाले सुतस्य =जभिषुत (उत्पतन)

English

By milk they generated bright immortal, productive seed, by Surâ seed from urine, Chasing afar folly and ill intention, crude food and wind and meat that loads the stomach.

अध्याय १९

श्लोक 85

इन्द्र॑: सु॒त्रामा॒ हृद॑येन स॒त्यं पु॑रो॒डाशे॑न सवि॒ता ज॑जान ।यकृ॑त् क्लो॒मानं॒ वरु॑णो भिष॒ज्यन् मत॑स्ने वाय॒व्यैर्न मि॑नाति पि॒त्तम्

indra: sutrāmā hṛdayena satyaṃ puroḍāśena savitā jajāna | yakṛt klomānaṃ varuṇo bhiṣajyan matasne vāyavyairna mināti pittam

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो! मुञ्धे ज्ञानशक्ति तथा उत्तम कर्मों के संकल्पो द्वारा पवित्र कौजिए। १. "परमात्मा क्या है? ' इस प्रश्न का उत्तर यही है कि वह ज्योतिरूप हैँ मानो वह ज्ञानाग्नि की प्रसृत ज्वाला है। उस न्योतीरूप प्रभु से ' वैखानस! प्रार्थना करता है कि हे अग्ने-ज्ञानाग्निरूप प्रभो! यत्-जो पवित्रं ब्रह्मसव पवित्रताओं का साधनभूत ज्ञान ते-आपके

English

Heart with his heart Indra Good Guardian gendered: with rice-cake Savitar gave truth its being. Varuna, doctoring the lungs and liver, forms, as with Vâyu cups, the gall and kidneys.

अध्याय १९

श्लोक 86

आ॒न्त्राणि॑ स्था॒लीर्मधु॒ पिन्व॑माना॒ गुदा॒: पात्रा॑णि सु॒दुघा॒ न धे॒नुः ।श्ये॒नस्य॒ पत्रं॒ न प्ली॒हा शची॑भिरास॒न्दी नाभि॑रु॒दरं॒ न मा॒ता

āntrāṇi sthālīrmadhu pinvamānā gudā: pātrāṇi sudughā na dhenuḥ | śyenasya patraṃ na plīhā śacībhirāsandī nābhirudaraṃ na mātā

हिन्दी अर्थ

ज्ञान मेरे जीवन को उज्ज्वल कर दे। १. स: पवमानः=वह शोधक सोम अद्य=-आज नः= हमे पुनातु पवित्र करे। हमारे शरीर के रोगों को नष्ट करके हमें स्वास्थ्य कौ दीप्ति देनेवाला हो। २. विचर्षणिः = वह तगण5ञ जड (कृत) को देखनेवाला परमात्मा पवित्रेण पवित्र करनेवाले ज्ञान से माचमुञ्े

English

Cooking-pots pouring honey were the entrails: like a well-milking cow the pans were bowels. A hawk's wing was the spleen: through mighty powers the stool as mother was navel and belly.

अध्याय १९

श्लोक 87

कु॒म्भो व॑नि॒ष्ठुर्ज॑नि॒ता शची॑भि॒र्यस्मि॒न्नग्रे॒ योन्यां॒ गर्भो॑ अ॒न्तः ।प्ला॒शिर्व्य॑क्तः श॒तधा॑र॒ उत्सो॑ दु॒हे न कु॒म्भी स्व॒धां पि॒तृभ्य॑:

kumbho vaniṣṭhurjanitā śacībhiryasminnagre yonyāṃ garbho antaḥ | plāśirvyaktaḥ śatadhāra utso duhe na kumbhī svadhāṃ pitṛbhya:

हिन्दी अर्थ

मुद्धे उत्तम पैतृक संस्कार प्राप्त हो। जीवित पितरों का जीवन मेरे जीवन के लिए आदर्श बने ओर मैं अपने जीवन को अधिकाधिक श्रीसम्न्न बनाऊँ। द्वे सृतीऽअंशृणवं पितृणामहं देवानामुत मत्यौनाम्। ९. मर्त्यानाम्-मनुष्यों के अहम्-मैने दवे सृती-दो मार्ग अशृणवम्=सुने ै। एक तो

English

The pitcher was the father of the rectum by powers, the womb which first contained the infant. Plain was the hundred-streaming fount as penis: the jar poured forth libations to the Father.

अध्याय १९

श्लोक 88

मुख॒ᳪ सद॑स्य॒ शिर॒ इत् सते॑न जि॒ह्वा प॒वित्र॑म॒श्विना॒सन्त्सर॑स्वती ।चप्पं॒ न पा॒युर्भि॒षग॑स्य॒ वालो॑ व॒स्तिर्न शेपो॒ हर॑सा तर॒स्वी

mukha sadasya śira it satena jihvā pavitramaśvināsantsarasvatī | cappaṃ na pāyurbhiṣagasya vālo vastirna śepo harasā tarasvī

हिन्दी अर्थ

पिता-पितामह व प्रपितामह सभी हमें समय-समय पर उत्तम प्रेरणा प्राप्त कराके अपने क्रियात्मक उदाहरण से स्वस्थ, निर्लोभ व सत्यज्ञान परिपूर्ण बनने के लि तेषौ वयश्सुमतौ यज्ञियानामपि भद्रे सौमनसे स्याम ॥५०॥ टै। बडे स्वस्य हे, पूर्वं मन्त्र के शब्दों मे प्राणशक्ति-सम्यन्न है। २. नवग्वा-अतएव नवम

English

His face the basket, thence his head; the strainer his tongue, his mouth Sarasvatî and Asvins. The Chapya was his rump, his leech the filter, the bladder was his penis keen with ardour.

अध्याय १९

श्लोक 89

अ॒श्विभ्यां॒ चक्षु॑र॒मृतं॒ ग्रहा॑भ्यां॒ छागे॑न॒ तेजो॑ ह॒विषा॑ शृ॒तेन॑ ।पक्ष्मा॑णि गो॒धूमै॒: कुव॑लैरु॒तानि॒ पेशो॒ न शु॒क्रमसि॑तं वसाते

aśvibhyāṃ cakṣuramṛtaṃ grahābhyāṃ chāgena tejo haviṣā śṛtena | pakṣmāṇi godhūmai: kuvalairutāni peśo na śukramasitaṃ vasāte

हिन्दी अर्थ

१. हम आचार्यो के निर्देशों के अनुसार कर्मो को करनेवाले हों। २. वासनाओं का पराजय करें ३. शक्तिसम्पत्न इन्द्रियों से यज्ञात्मक कर्मो के करनेवाले होँ। ९. है सोम=शान्तात्मन् आचार्य! त्वम्=-आप पित्तृभिः=मेरे संरक्षकं के साथ संविदानः = सम्यक् एेकमत्यवाले होते हुए संज्ञानवाले होते हए द्यावापृथिवी अनु-मस्तिष्क व शरीर

English

Asvins with both cups made his eye immortal, the goat and cooked oblation gave it keenness. With wheat eyelashes and with jujube eyebrows they clothe as ’twere a black and brilliant figure.

अध्याय १९

श्लोक 90

अवि॒र्न मे॒षो न॒सि वी॒र्या॒य प्रा॒णस्य॒ पन्था॑ अ॒मृतो॒ ग्रहा॑भ्याम् ।सर॑स्वत्युप॒वाकै॑र्व्या॒नं नस्या॑नि ब॒र्हिर्बद॑रैर्जजान

avirna meṣo nasi vīryāya prāṇasya panthā amṛto grahābhyām | sarasvatyupavākairvyānaṃ nasyāni barhirbadarairjajāna

हिन्दी अर्थ

- आचार्य व माता-पिता का प्रयत्न हमें जानोज्ज्वल व स्वस्थ-शरीरवाला बनाए्। हम स्वार्थं की वृत्ति से ऊपर उठे रहें, कभी धन के दास न बनें। त्र्िंषद् पितरों का स्वागत ९. बर्हिषद := पवित्र हदय में स्थित होनेवाले पिततरः=पितरो! ऊतीचरक्षण के हेतु से

English

The sheep, the ram to give his nostril vigour. the immortal path of breath by both libations. By Indra-grains and sacrificial jujubes Sarasvatî produced through-breath and nose hairs.

अध्याय १९

श्लोक 91

इन्द्र॑स्य रू॒पमृ॑ष॒भो बला॑य॒ कर्णा॑भ्या॒ᳪ श्रोत्र॑म॒मृतं॒ ग्रहा॑भ्याम् ।यवा॒ न ब॒र्हिर्भ्रु॒वि केस॑राणि क॒र्कन्धु॑ जज्ञे॒ मधु॑ सार॒घं मुखा॑त्

indrasya rūpamṛṣabho balāya karṇābhyā śrotramamṛtaṃ grahābhyām | yavā na barhirbhruvi kesarāṇi karkandhu jajñe madhu sāraghaṃ mukhāt

हिन्दी अर्थ

्ान की किरणों मेँ ही निवास करनेवाले ज्ञानी पितरों से ज्ञान प्राप्त करके हम बल व प्राणशक्ति का धारण करनेवाले बनेँ। यम॑ग्ने कव्यवाहन त्वं चिन्मन्यसे रयिम् । तन्नो गीर्भिः श्रवाय्यः देवत्रा प॑नया युज॑म् ॥ ६४॥

English

The hull for strength made Indra's form: the immortal bearing for both his ears by two libations. Barley and sacred grass composed his eyebrows: from his mouth came the jujube and sweet honey.

अध्याय १९

श्लोक 92

आ॒त्मन्नु॒पस्थे॒ न वृक॑स्य॒ लोम॒ मुखे॒ श्मश्रू॑णि॒ न व्या॑घ्रलो॒म ।केशा॒ न शी॒र्षन्यश॑से श्रियै॒ शिखा॑ सि॒ᳪहस्य॒ लोम॒ त्विषि॑रिन्द्रि॒याणि॑

ātmannupasthe na vṛkasya loma mukhe śmaśrūṇi na vyāghraloma | keśā na śīrṣanyaśase śriyai śikhā sihasya loma tviṣirindriyāṇi

हिन्दी अर्थ

हम उत्कृष्ट ज्ञान को धारण करे। २. उसे बड मिठास के साथ लोगों तक पहँचाँ ३. आचार्यो को , पितरों को सात्विक अन्न देनेवाले हों। स्वयं भी पवित्र, प्रयत्नार्जित हव्य पदार्थो को ही खार्णे। स्वदेशा व विदे के विद्धान् हमें विद्वानों का आदर करना चाहिए चाहे वे स्वदेश के हों चाहे विदेश के। चाहे वै हमारे परिचित हों चाहे अपरिचित। इतना जानना पर्याप्त है कि उनका जीवन पवित्र है या नहीं। यदि वे "यति" संयत जीवनवाले है. तो वे हमारे लिए आदरणीय ही है ९. अद्य=आज पितृभ्यः ज्ञानप्रद पितरों के लिए इदं नमः अस्तु यह सत्कार व अन्न

English

Hair of the wolf was on his waist and body: the beard upon his face was hair of tigers. Lions hair were his locks, for fame and beauty, worn on his head, his crest and sheen and vigour.

अध्याय १९

श्लोक 93

अङ्गा॑न्या॒त्मन् भि॒षजा॒ तद॒श्विना॒त्मान॒मङ्गै॒: सम॑धा॒त् सर॑स्वती ।इन्द्र॑स्य रू॒पᳪ श॒तमा॑न॒मायु॑श्च॒न्द्रेण॒ ज्योति॑र॒मृतं॒ दधा॑नाः

aṅgānyātman bhiṣajā tadaśvinātmānamaṅgai: samadhāt sarasvatī | indrasya rūpa śatamānamāyuścandreṇa jyotiramṛtaṃ dadhānāḥ

हिन्दी अर्थ

-हम "पूर्व" अर्थात् विद्यावयोवृद्ध "उपर ' =विषयों से उपरत "पार्थिवे रजसि आनिषत्ता'-अग्नि मे यज्ञ-यागादि करनेवाले तथा उत्तम धर्मरूप बलवाले पितरों का अन्नाद से सत्कार करनेवाले बने। ९. अधअवब यथा-जेसे नः-ठमारे पितरः =पितर परासः=जो उत्कृष्ट है विद्या आदि

English

The Asvins, Leeches, joined his limbs and body, Sarasvatî put limbs and frame together, Giving the form and vital power of Indra, hundredfold, deathless and delightful lustre.

अध्याय १९

श्लोक 94

सर॑स्वती॒ योन्यां॒ गर्भ॑म॒न्तर॒श्विभ्यां॒ पत्नी॒ सुकृ॑तं बिभर्ति ।अ॒पाᳪ रसे॑न॒ वरु॑णो॒ न साम्नेन्द्र॑ᳪ श्रि॒यै ज॒नय॑न्न॒प्सु राजा॑

sarasvatī yonyāṃ garbhamantaraśvibhyāṃ patnī sukṛtaṃ bibharti | apā rasena varuṇo na sāmnendra śriyai janayannapsu rājā

हिन्दी अर्थ

पति व पत्नी शक्तिशाली व प्रसन्न मनवाले हों। शरीरपोषक अन्न के सेवन से सव उन्नत्तियों को सिद्ध करे। अङ्क -प्रत्यङ्क का स्वरूप ९. अस्य=इस--गतमन्त्र के " कुम्भ" का मुखम्-मुख सत्-उत्कृष्ट होता हे। (सत् इति -‹ कुम्भ" अर्थात् अपने अन्दर शक्ति व आनन्द का पूरण करनेवाले के सब अङ्क सुन्दर होते हैँ। मुख ओर सिर तो उत्कृष्ट होते ही है, इसकी जिह्वा व इसके प्राणापान -पवित्र होते है। इसके मुख मे सरस्वती का निवास होता है। इसकौ मलशोधक इदर्यो भी मलशोधन के द्वारा इसे बलवान् बनाती हे।

English

Sarasvatî, as Consort of the Asvins, bears in her womb the nobly fashioned Infant. King Varuna with waters’ wealthy essence begetting Indra in the floods for glory.

अध्याय १९

श्लोक 95

तेज॑: पशू॒नाᳪ ह॒विरि॑न्द्रि॒याव॑त् परि॒स्रुता॒ पय॑सा सार॒घं मधु॑ ।अ॒श्विभ्यां॑ दु॒ग्धं भि॒षजा॒ सर॑स्वत्या सुतासु॒ताभ्या॑म॒मृत॒: सोम॒ इन्दु॑:

teja: paśūnā havirindriyāvat parisrutā payasā sāraghaṃ madhu | aśvibhyāṃ dugdhaṃ bhiṣajā sarasvatyā sutāsutābhyāmamṛta: soma indu:

हिन्दी अर्थ

१. गृहिणी को चाह कि गृहकार्यो को करती हई प्रभु में निवास करे। २. सब गृहसभ्यों के लिए उत्तम सात्विक अन्न को सिद्ध करके प्राप्त कराए। ३. कर्मो मे लगे रहने से ईर्ष्या द्वेष से ऊपर रहे। ४. शान्ति व उपासना से प्रभु के तेजोऽश को आपने में धारण करे। ५५. व्यवस्थित कर्मो से चमक उठे ओर प्रजाओं मं राजा बनने क्के योग्य हो।

English

Splendour of victims, powerful oblation, honey and meath with milk and foaming liquor, Healing Sarasvatî effused, and Asvins; from pressed and unpressed Soma, deathless Indu.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 19
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.