Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 27 / 40

Adhyāya 27

अध्याय 27

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अध्याय २७

श्लोक 1

समा॑स्त्वाग्न ऋ॒तवो॑ वर्धयन्तु संवत्स॒रा ऋष॑यो॒ यानि॑ स॒त्या ।सं दि॒व्येन॑ दीदिहि रोच॒नेन॒ विश्वा॒ आ भा॑हि प्र॒दिश॒श्चत॑स्रः

samāstvāgna ṛtavo vardhayantu saṃvatsarā ṛṣayo yāni satyā | saṃ divyena dīdihi rocanena viśvā ā bhāhi pradiśaścatasraḥ

हिन्दी अर्थ

मासों, ऋतुओं व वर्षो कौ अनुकूलता हमें शारीरिक स्वास्थ्य दे। तत्तवद्रष्टा लोग हमारी बौद्धिक प्रगति का कारण बने। सत्य-व्यवहार हमारे मानस को पवित्र करे। इस प्रकार हम एक अलौकिक दीप्ति से चमकानेवाले बने ओर अपने चारों ओर प्रकाश १. ' अग्नि "प्रगतिशील जीवसेही प्रभु कहते है कि है अग्ने! तू सं इध्यस्व च

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE TWENTY-SEVENTH HALF-YEARS and Seasons strengthen thee, O Agni, the Years and all the Verities and Rishis! Flash forth with thy celestial effulgence: illumine all four regions of the heaven.

अध्याय २७

श्लोक 2

सं चे॒ध्यस्वा॑ग्ने॒ प्र च॑ बोधयैन॒मुच्च॑ तिष्ठ मह॒ते सौ॑भगाय ।मा च॑ रिषदुपस॒त्ता ते॑ अग्ने ब्र॒ह्माण॑स्ते य॒शस॑: सन्तु॒ मान्ये

saṃ cedhyasvāgne pra ca bodhayainamucca tiṣṭha mahate saubhagāya | mā ca riṣadupasattā te agne brahmāṇaste yaśasa: santu mānye

हिन्दी अर्थ

' अग्नि'प्रगतिशील जीव वह है जो चमकता है, चमकाता है, पुरुषार्थ से सोभाग्यशाली होता है। पड़ोसियों से मधुरता से वर्तता है, उसके घर मेँ ज्ञानी, यशस्वी पुरुषों का आना-जाना होता है। ऋषि---अग्निः। देवता-अग्निः। छन्दः--विराटत्रिष्टुप्। स्वरः-धैवतः।

English

Kindle thee, Agni, rake this man to knowledge: rise up erect for great and happy fortune. Agni, be those uninjured who adore thee, thy priests be glorious and none beside them!

अध्याय २७

श्लोक 3

त्वाम॑ग्ने वृणते ब्राह्म॒णा इ॒मे शि॒वो अ॑ग्ने सं॒वर॑णे भवा नः ।स॒प॒त्न॒हा नो॑ अभिमाति॒जिच्च॒ स्वे गये॑ गागृ॒ह्यप्र॑युच्छन्

tvāmagne vṛṇate brāhmaṇā ime śivo agne saṃvaraṇe bhavā naḥ | sapatnahā no abhimātijicca sve gaye gāgṛhyaprayucchan

हिन्दी अर्थ

हम ब्राह्मणों कै लिए वरणीय बनें। ब्राह्यणो से वृत होकर सबका कल्याण करनेवाले हो। कामक्रोधादि को नष्ट करे, अभिमान को जीते ओर इस शरीररूप गृह मे सदा सावधान होकर जागरित रहे। इटेवाग्नेऽअधिं धारया रयिं मा त्वा नि ऋन्पूर्वचितो निकारिणः!

English

The Brahmans present here elect thee, Agni: be thou propitious in our sanctuary. Slayer of rivals, Agni, quell our foemen: watch in thy house with care that never ceases.

अध्याय २७

श्लोक 4

इ॒है॒वाग्ने॒ अधि॑ धारया र॒यिं मा त्वा॒ नि क्र॑न्पूर्व॒चितो॑ निका॒रिण॑: ।क्ष॒त्रम॑ग्ने सु॒यम॑मस्तु॒ तुभ्य॑मुपस॒त्ता व॑र्धतां ते॒ अनि॑ष्टृतः

ihaivāgne adhi dhārayā rayiṃ mā tvā ni kranpūrvacito nikāriṇa: | kṣatramagne suyamamastu tubhyamupasattā vardhatāṃ te aniṣṭṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

हम राष्ट्र का रुपया, स्वदेशी का प्रयोग करते हुए, राष्ट्र में ही रखने का प्रयत्न करं। हम सच्चरित्र, शिष्टाचार व ज्ञान में" आगे बद्धकर यज्ञशील हों, संयम के द्वारा बल कौ साधना करें तथा हमारा कोई भी व्यवहार पड़ोसी की हिसा करनेवाला न हो। सजातानो सध्ययस्थाऽ एधि राज्ञा॑मग्ने विहव्यो दीदिदीह ॥९५॥

English

Even here do thou, O Agni, stablish wealth: let not oppressors injure thee by thinking of thee first. Light be thy task of ruling, Agni, with thy power: may he who worships thee wax strong, invincible.

अध्याय २७

श्लोक 5

क्ष॒त्रेणा॑ग्ने॒ स्वायु॒: सᳪ र॑भस्व मि॒त्रेणा॑ग्ने मित्र॒धेये॑ यतस्व ।स॒जा॒तानां॑ मध्यम॒स्था ए॑धि॒ राज्ञा॑मग्ने विह॒व्यो॒ दीदिही॒ह

kṣatreṇāgne svāyu: sa rabhasva mitreṇāgne mitradheye yatasva | sajātānāṃ madhyamasthā edhi rājñāmagne vihavyo dīdihīha

हिन्दी अर्थ

हमारे कार्य शक्तिशाली हो, हमारा सारा दिन एेसे कार्यो में बीते जो मित्रों का धारण करनेवाले हों, उनके परस्पर के ह्लगडों को हम निपटानेवाले बनें। राजाओं के भी पुकारने योग्य हों तथा देदीप्यमान जीवनवाले बने। १. है अग्ने=जीवन में आगे बने कं स्वभाववाले जीव! निहः=( निहन्तुन्) हिंसकवृत्तिवालों

English

Kind to the people, grasp thy power, O Agni: contend thou with the Friend by way of friendship. Placed, Agni, in the centre of our kinsmen, flash forth to be invoked by Kings around thee.

अध्याय २७

श्लोक 6

अति॒ निहो॒ अति॒ स्रिधोऽत्यचि॑त्ति॒मत्यरा॑तिमग्ने ।विश्वा॒ ह्य॑ग्ने दुरि॒ता सह॒स्वाथा॒स्मभ्य॑ᳪ स॒हवी॑राᳪ र॒यिं दा॑:

ati niho ati sridho'tyacittimatyarātimagne | viśvā hyagne duritā sahasvāthāsmabhya sahavīrā rayiṃ dā:

हिन्दी अर्थ

- आचार्य ने विद्यार्थी के जीवन में ज्ञान (1९१०५५।९१९८) शिक्षा (०५८8- 1गा) व अर्जनक्षमता (सोभाग्य) को पैदा करना है। प्रत्यौहतामण्विनां मृत्युम॑स्मादेवानांमग्ने भिषजा शचीभिः ९॥ १. है वृहस्पतेः = ज्ञान के स्वामी आचार्य! आप अपने उपनीत इस शिष्य को

English

Past those who slay, past enemies, past thoughtless men, past those who hate,— Yes, Agni, drive away all woe and trouble: vouchsafe us opulence with men about us.

अध्याय २७

श्लोक 7

अ॒ना॒धृ॒ष्यो जा॒तवे॑दा॒ अनि॑ष्टृतो वि॒राडग्ने॑ क्षत्र॒भृद्दी॑दिही॒ह ।विश्वा॒ आशा॑: प्रमु॒ञ्चन्मानु॑षीर्भि॒यः शि॒वेभि॑र॒द्य परि॑ पाहि नो वृ॒धे

anādhṛṣyo jātavedā aniṣṭṛto virāḍagne kṣatrabhṛddīdihīha | viśvā āśā: pramuñcanmānuṣīrbhiyaḥ śivebhiradya pari pāhi no vṛdhe

हिन्दी अर्थ

हम सदा परलोक का ही ध्यान न करते रह जाँ, यमजनित मृत्यु से न डरते रहे, लोकापवाद के भय से मुक्त हों। प्राणापान ही हमारे वैद्य हो। उद्रयन्तम॑सस्परि स्वुः पण्य॑न्तऽ उत्त॑रम् । देवं देवत्रा सूर्यमग॑न्म ज्योतिरुत्तमम् ॥९०॥ १. गतमन्त्र के अनुसार सदा डरते न रहकर वयम्-हम उत् तमसः परि उत्कृष्ट

English

Holder of sway, shine here refulgent, Agni! invincible, unconquered Jâtavedas. Light all the regions, chasing human terrors: with happy helps guard us to-day for increase.

अध्याय २७

श्लोक 8

बृह॑स्पते सवितर्बो॒धयै॑न॒ᳪ सᳪशि॑तं चित्सन्त॒राᳪ सᳪ शि॑शाधि ।व॒र्धयै॑नं मह॒ते सौ॑भगाय॒ विश्व॑ एन॒मनु॑ मदन्तु दे॒वाः

bṛhaspate savitarbodhayaina saśitaṃ citsantarā sa śiśādhi | vardhayainaṃ mahate saubhagāya viśva enamanu madantu devāḥ

हिन्दी अर्थ

हम उत्कृष्ट प्रकृति का उत्तम प्रयोग करते हुए इससे ऊपर उदे, अपने प्रकाशमयरूप को देखते हुए ज्योत्तियो में सर्वोत्तम ज्योति परमात्मा के समीप पचने के लिए यत्नशील हो। वही हमारा लक्ष्य हो। ९. अस्य अग्नेः=इस उत् से उत्तर तथा उत्तर से उत्तम कौ ओर जानेवाले अग्नि कौ

English

Brihaspati, Savitar, give this man knowledge: sharpen him thoroughly though already sharpened. To great and high felicity exalt him: in him let all the Gods rejoice and triumph.

अध्याय २७

श्लोक 9

अ॒मु॒त्र॒भूया॒दध॒ यद्य॒मस्य॒ बृह॑स्पते अ॒भिश॑स्ते॒रमु॑ञ्चः ।प्रत्यौ॑हताम॒श्विना॑ मृ॒त्युम॑स्माद्दे॒वाना॑मग्ने भि॒षजा॒ शची॑भिः

amutrabhūyādadha yadyamasya bṛhaspate abhiśasteramuñcaḥ | pratyauhatāmaśvinā mṛtyumasmāddevānāmagne bhiṣajā śacībhiḥ

हिन्दी अर्थ

' आग्नि वह है जो यज्ञादि कार्यो को प्रसन्नता व मधुरता के साथ करता हे। सबकी प्रशंसा का पात्र होता हे, शोभनकारी, दीप्तिमान्, उत्पादक व विश्ववरणीय होता हे) प्रभु- प्राप्ति के साधन अच्छायमेति शव॑सा घृतेनेडानो वह्िर्नम॑सा। अग्निश्शस्तरचोऽअध्वरेषु प्रयत्सुं।। ९४॥

English

As thou, Brihaspati, from curse hast freed us, from dwelling yonder in the realm of Yama, The Asvins, Leeches of the Gods, O Agni, have chased Death far from us with mighty powers.

अध्याय २७

श्लोक 10

उद्व॒यं तम॑स॒स्परि॒ स्व: पश्य॑न्त॒ उत्त॑रम् ।दे॒वं दे॑व॒त्रा सूर्य॒मग॑न्म॒ ज्योति॑रुत्त॒मम्

udvayaṃ tamasaspari sva: paśyanta uttaram | devaṃ devatrā sūryamaganma jyotiruttamam

हिन्दी अर्थ

प्रभु की ओर जाने के लिए आवश्यक है कि (क) हम बलवान बनें, (ख) नैर्मल्य व दीप्तिवाले हौ, (ग) कार्यभार का उटठानेवाले हों, (घ) नम्र हों। १. सः=यह गत मन्त्र मे वर्णित साधनों का प्रयोग करके प्रभु के साथ अपना सम्पर्क स्थापित करनेवाला व्यक्ति अस्य अग्नेः=इस सर्वाग्रणी, सवबकौ उत्रतियोँ के साधक प्रभु कौ

English

Looking upon the loftier light, etc., as in XX. 21.

अध्याय २७

श्लोक 11

ऊ॒र्ध्वा अ॑स्य स॒मिधो॑ भवन्त्यू॒र्ध्वा शु॒क्रा शो॒चीᳪष्य॒ग्नेः ।द्यु॒मत्त॑मा सु॒प्रती॑कस्य सू॒नोः

ūrdhvā asya samidho bhavantyūrdhvā śukrā śocīṣyagneḥ | dyumattamā supratīkasya sūnoḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु-सम्पर्क से हम प्रभु की महिमा को प्राप्त करे। सात्विक अन्न के सेवन से मानस आह्लाद का लाभ करे। उत्तम निवासवाले, ज्ञानी व धनों का खुब दान करनेवाले होँ। द्वारो देवीरन्व॑स्य विश्वे व्रता द॑दन्तेऽअग्नेः। उरुव्यच॑सो धाम्ना पत्य॑मानाः॥ ९६॥ १. गतमन्त्र के अनुसार प्रभु की महिमा को अपने साथ सम्पृक्तं करनेवाले अस्य

English

Uplifted are the brands that are his fuel: lofty and brilliant are the flames of Agni, Splendidly bright of the Son fair of aspect.

अध्याय २७

श्लोक 12

तनू॒नपा॒दसु॑रो वि॒श्ववे॑दा दे॒वो दे॒वेषु॑ दे॒वः ।प॒थो अ॑नक्तु॒ मध्वा॑ घृ॒तेन॑

tanūnapādasuro viśvavedā devo deveṣu devaḥ | patho anaktu madhvā ghṛtena

हिन्दी अर्थ

अग्नि" को देवों की अनुकूलता प्राप्त होती है, ये त्रतों को धारण करते है, व्यापक मनोवृत्तिवाले व तेजस्विता से एश्वर्यशाली होते है। यज्ञ क्री अहिंसकता ( अध्वरता) तेऽअ॑स्य योष॑णे दिव्ये न योनाऽ उषासानक्तां। इमं यज्ञम॑वतामध्वरं न॑:।। ९७॥

English

He cometh hitherward with power and fatness, the luminous, implored with adoration.

अध्याय २७

श्लोक 13

मध्वा॑ य॒ज्ञं न॑क्षसे प्रीणा॒नो नरा॒शᳪसो॑ अग्ने ।सु॒कृद्दे॒वः स॑वि॒ता वि॒श्ववा॑रः

madhvā yajñaṃ nakṣase prīṇāno narāśaso agne | sukṛddevaḥ savitā viśvavāraḥ

हिन्दी अर्थ

हम घरों में दिन-रात यज्ञ करनेवाले हों। ये यज्ञ हमारे लिए अर्िंसरक बने। हमें अहिसित करके ये हमारे फ़लने-फलनै का कारण वनँ। हैव्या होताराऽ ऊर्ध्वम॑ध्वरं नो ऽग्नेर्जिह्वामभि गुणीतम्। कृणुतं नः स्विष्टिम्॥ ९८॥ १. है प्राणापानो! हैव्या होतारा-प्राणापान नः-हमारे अध्वरम्=हिसा न करनेवालै यज्ञ

English

With mead to sacrifice thou comest, Agni, earnest as friendly- minded Narâsamsa, and Savitar righteous God who brings all blessings.

अध्याय २७

श्लोक 14

अच्छा॒यमे॑ति॒ शव॑सा घृ॒तेने॑डा॒नो वह्नि॒र्नम॑सा ।अ॒ग्निᳪ स्रुचो॑ अध्व॒रेषु॑ प्र॒यत्सु॑

acchāyameti śavasā ghṛteneḍāno vahnirnamasā | agni sruco adhvareṣu prayatsu

हिन्दी अर्थ

मेरे जीवन में "यज्ञिय अन्न", "मानस शक्ति" व 'सूर्यसम देदीप्यमान ज्ञान' तीनों का महत्त्वपूर्णं स्थान हो। १. जीवन के उत्थान मे धन का भी महत्त्वपूर्ण स्थान हे, अतः अग्नि=प्रगतिशील जीव इस मन्त्र में प्रार्थना करता टे कि त्वष्टा -देवशिल्पी-सवब धनो का निर्माण करनेवाला प्रभु

English

While rites proceed the ladles move to Agni.

अध्याय २७

श्लोक 15

स य॑क्षदस्य महि॒मान॑म॒ग्नेः स ईं॑ म॒न्द्रा सु॑प्र॒यस॑: ।वसु॒श्चेति॑ष्ठो वसु॒धात॑मश्च

sa yakṣadasya mahimānamagneḥ sa īṃ mandrā suprayasa: | vasuścetiṣṭho vasudhātamaśca

हिन्दी अर्थ

प्रभु हमे धन दे, वह धन जो कार्यसाधकः है, शक्ति की रक्षा करनेवाला है, अभूतपूर्व है, बहत का निवासक है ओर उत्तम वीर्यवान् बनाता है। प्रभु हमे वह धनदं जो वन॑स्पते ऽव॑ सृजा ररा॑णस्त्मनां देवेषु । अन्निर्हव्यश॑मिता स्रंदयाति ॥२९॥ १. प्रभु प्रस्तुत मन्त्र के ऋषि प्रजापति से कहते है, है वनस्पते (वन संभक्ति) सम्भजनीय

English

Let him pay worship to this Agni's greatness, daintily fed: he verily gives enjoyments: The wisest Vasu he, and best wealth giver.

अध्याय २७

श्लोक 16

द्वारो॑ दे॒वीरन्व॑स्य॒ विश्वे॑ व्र॒ता द॑दन्ते अ॒ग्नेः ।उ॒रु॒व्यच॑सो॒ धाम्ना॒ पत्य॑मानाः

dvāro devīranvasya viśve vratā dadante agneḥ | uruvyacaso dhāmnā patyamānāḥ

हिन्दी अर्थ

-हम धनों को देवों को देनेवाले बनें। यज्ञो मे हव्य पदार्थो का प्रयोग करके वायुमण्डल को रोगकृमिशून्य करते हुए प्रजापति बने। अग्ने स्वाहां कृणुहि जातवेद ऽइन्द्राय हव्यम्। विश्वेदेवा हविरिदं जुषन्ताम्॥ २२॥ १. अग्ने=हे प्रगतिशील जीव! स्वाहा कृणुहि = अग्नये स्वाहा ' आदि स्वाहाकार मन्त्रों

English

Widely expansive, ruling by foundation, the Doors divine— and, after, all— Preserve this Agni's holy works.

अध्याय २७

श्लोक 17

ते अ॑स्य॒ योष॑णे दि॒व्ये न योना॑ उ॒षासा॒नक्ता॑ ।इ॒मं य॒ज्ञमव॑तामध्व॒रं न॑:

te asya yoṣaṇe divye na yonā uṣāsānaktā | imaṃ yajñamavatāmadhvaraṃ na:

हिन्दी अर्थ

-हम धन को कमाण ओर उस धन को देवयज्ञ, ब्रह्मन्न व अतिथि आदि यज्ञो १. पीवो अन्नाः = (पुष्टात्नम् यस्य) पुष्टिकम अन्नवाला, अर्थात् जो सदा पौष्टिक अन्न का ही सेवन करता है, जिसके भोजन का मापक पौष्टिकता है, नकि स्वाद। २. रयिवृधः धन का वर्धन करनेवाला, संसार यात्रा के लए आवश्यक धन जुटानेवाला ३. सुमेधाः =उत्तम

English

May Dawn and Night protect—his heavenly Consorts—in a his home this our sacrificial worship.

अध्याय २७

श्लोक 18

दै॑व्या॒ होतारा ऊ॒र्ध्वम॑ध्व॒रं नो॒ऽग्नेर्जु॒ह्वाम॒भि गृ॑णीतम् ।कृ॒णु॒तं न॒: स्वि॒ष्टम्

daivyā hotārā ūrdhvamadhvaraṃ no'gnerjuhvāmabhi gṛṇītam | kṛṇutaṃ na: sviṣṭam

हिन्दी अर्थ

प्रभु की अध्यक्षता में प्रकृति से सम्बद्ध यह सृष्टि होती है। प्रभु देवोंके भी देव हैँ, उस प्रभु के प्रति समर्पण से हम प्रभु कौ पूजा करनेवाले हो। १. वायो-(वा गतिगन्धन्योः) सम्पूर्ण संसार को गति देनेवाले व॒ सब आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त करनेवाले प्रभो! याभिः नियुद्िः-जिन नियुत् नामक अश्वो से

English

Ye two celestial Hotars, greet with praises this lofty rite of ours, the tongue of Agni. Cause that our sacrifice be well conducted.

अध्याय २७

श्लोक 19

ति॒स्रो दे॒वीर्ब॒र्हिरेदᳪ स॑द॒न्त्विडा॒ सर॑स्वती॒ भार॑ती ।म॒ही गृ॑णा॒ना

tisro devīrbarhireda sadantviḍā sarasvatī bhāratī | mahī gṛṇānā

हिन्दी अर्थ

(क) प्रभु हमें उत्तम इन्द्रियरूप अश्वं को प्राप्त करां (ख) हम घरों में यज्ञशील व दान देनेवाले बनें, (ग) हमें पालक धन प्राप्त हों, (घ) उस धन को प्राप्त हों, जो हमे वीर बनाये, हमारी जञानेन््रियों व कर्मेन्द्रियं को उत्तम करे। अथवा हमे वह धन चाहिए जिससे हमारे सन्तान वीर हों ओर हमारा घर गौवों व अश्वों से भरा-पूरा हो।

English

Upon this grass three Goddesses be seated, Idâ, Sarasvatî, Bhâratî the Mighty glorified with song.

अध्याय २७

श्लोक 20

तन्न॑स्तु॒रीप॒मद्भु॑तं पुरु॒क्षु त्वष्टा॑ सु॒वीर्य॑म् ।रा॒यस्पोषं॒ वि ष्य॑तु॒ नाभि॑म॒स्मे

tannasturīpamadbhutaṃ purukṣu tvaṣṭā suvīryam | rāyaspoṣaṃ vi ṣyatu nābhimasme

हिन्दी अर्थ

(क) है प्रभो! आपकी कृपा से हम जीवनयज्ञ मे शतवर्षपर्यन्त प्रसत्नतापूर्वक कार्य की क्षमतावाली इन्द्रियों को प्राप्त करें। (ख) आप हमे यज्ञ मे आनन्द को अनुभव करनेवाला बनाइए, हमारी रुचि यज्ञप्रवण हो, (ग) यज्ञो से हमारी स्थिति उत्तम हो ओर ९. गत मान्त्र का ऋषि वसिष्ठ! प्रस्तुत मन्त्र में आनन्द का अनुभव करता हुआ

English

This our productive wondrous flow may Tvashtar pour down on this man's kin, and wealth and heroes.

अध्याय २७

श्लोक 21

वन॑स्प॒तेऽव॑ सृजा॒ ररा॑ण॒स्त्मना॑ दे॒वेषु॑ ।अ॒ग्निर्ह॒व्यᳪ श॑मि॒ता सू॑दयाति

vanaspate'va sṛjā rarāṇastmanā deveṣu | agnirhavya śamitā sūdayāti

हिन्दी अर्थ

हम शुद्ध जीवनवाले बनकर प्रभु को प्राप्त हो। जान प्रचार के कार्य में अत्यन्त माधुर्य को बनाये रक्खें। सोम की रक्षा के लिए प्रभु-प्राप्ति कौ प्रबल कामनावाले हों। पुरूमीढ का प्रभु-स्तवन वायुरं गरेगा यज्ञप्रीः साकं गन्मन॑सा यज्ञम् । शिवो नियुद्भिः शिवाभिः॥३९॥

English

Vanaspatî, presenting of thyself, send God-ward! Let Agni, Immolator, season our oblation.

अध्याय २७

श्लोक 22

अग्ने॒ स्वाहा॑ कृणुहि जातवेद॒ इन्द्रा॑य ह॒व्यम् ।विश्वे॑ दे॒वा ह॒विरि॒दं जु॑षन्ताम्

agne svāhā kṛṇuhi jātaveda indrāya havyam | viśve devā haviridaṃ juṣantām

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो! आप हमें सव शक्तियों के विकास से युक्त शरीररूप रथ प्राप्त कराइषए्, हमारे इद्दरियरूप अश्व भी उत्तम हों, वे वासनां के शिकार न हों, जिससे हम शक्ति को सुरक्षित कर सके। तिसभिंश्च वह॑से त्रिःखतां च नियुद्धिंर्वायविह ता वि मुञ्च ।३३॥

English

Pay sacrifice to Indra, Jâtavedas Agni! with Hail! All Gods accept the gift we offer!

अध्याय २७

श्लोक 23

पीवो॑ अन्ना रयि॒वृध॑: सुमे॒धाः श्वे॒तः सि॑षक्ति नि॒युता॑मभि॒श्रीः ।ते वा॒यवे॒ सम॑नसो॒ वि त॑स्थु॒र्विश्वेन्नर॑: स्वप॒त्यानि॑ चक्रुः

pīvo annā rayivṛdha: sumedhāḥ śvetaḥ siṣakti niyutāmabhiśrīḥ | te vāyave samanaso vi tasthurviśvennara: svapatyāni cakruḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभुकृपा से हमारे शरीर में तेतीस देवों का उत्तम निवास हो, उस उत्तम त्वष्टा के जामाता क्रा रक्षण ९. गतमन्त्र के अनुसार जब हमारे शरीर मे तेतीस देव नियुतौं के रूप पे रह रे होगे तब हमारा अग-प्रत्यंग सबल, स्वस्थ व सुन्दर बन जाएगा ओर हम प्रस्तुत मन्त्र के ऋषि

English

Wise, bright, arranger of his teams, he seeketh men with rich food whose treasures are abundant. They have stood firm of one accord with Vâyu: yea, the men wrought all noble operations.

अध्याय २७

श्लोक 24

रा॒ये नु यं ज॒ज्ञतू॒ रोद॑सी॒मे रा॒ये दे॒वी धि॒षणा॑ धाति दे॒वम् ।अध॑ वा॒युं नि॒युत॑: सश्चत॒ स्वा उ॒त श्वे॒तं वसु॑धितिं निरे॒के

rāye nu yaṃ jajñatū rodasīme rāye devī dhiṣaṇā dhāti devam | adha vāyuṃ niyuta: saścata svā uta śvetaṃ vasudhitiṃ nireke

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो! आप "एकमेवाद्वितीयम् ' इन शब्दों के अनुसार एक ही अद्वितीय हो। आप हमें सशक्त कर्मद्दरियो को, शक्ति को व उत्तम ज्ञानेन्द्रिय को प्राप्त कराडए। कऋषिः--शंयुर्बार्दस्पत्यः। देवता-इन्द्रः। छन्दः-निचृदनुष्टुप्। स्वरः गान्ारः। त्वामिच्ि हवांमहे सातौ वाज॑स्य कारव॑ः।

English

The God whom both these worlds brought forth for riches, whom heavenly Dhishanâ for our wealth appointeth— His team of harnessed horses waits on Vâyu and, foremost, on the radiant treasure-holder.

अध्याय २७

श्लोक 25

आपो॑ ह॒ यद्बृ॑ह॒तीर्विश्व॒माय॒न् गर्भं॒ दधा॑ना ज॒नय॑न्तीर॒ग्निम् ।ततो॑ दे॒वाना॒ᳪ सम॑वर्त॒तासु॒रेक॒: कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

āpo ha yadbṛhatīrviśvamāyan garbhaṃ dadhānā janayantīragnim | tato devānā samavartatāsureka: kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो! आपकी कृपा से हम (क) शक्ति प्राप्त करें (ख) वासना- संग्राम मे विजय हों। ३. इन्द्रियरूप घोडौं को लक्ष्यस्थान पर पहँचानेवाले बने। ङात्रुओं का धर्षण त विजय १. है प्रभो! सः त्वम्-वे आप जोकि चित्रः-अन्दुत है, जिनके समान न कोई है ओर

English

With thy yoked teams in hundreds and in thousands come to our sacrifice and solemn worship.

अध्याय २७

श्लोक 26

यश्चि॒दापो॑ महि॒ना प॒र्यप॑श्य॒द्दक्षं॒ दधा॑ना ज॒नय॑न्तीर्य॒ज्ञम् ।यो दे॒वेष्वधि॑ दे॒व एक॒ आसी॒त् कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

yaścidāpo mahinā paryapaśyaddakṣaṃ dadhānā janayantīryajñam | yo deveṣvadhi deva eka āsīt kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो! हमें उत्तम ज्लानेन्दियाँ व कर्मन्िर्योँ प्राप्त कराइए। हमें वह शक्ति ९. गतमन्त्र के अनुसार उत्तम ज्तानेन्दरियो, कर्मेन्द्रियों व शरीर को प्राप्त करके यह “वामदेव "सुन्दर दिव्य गुणोवाला बनता है ओर प्रभु-स्तवन करते हए कहता है कि चित्रः= वह ज्ञान देनेवाले अद्धुत परमात्मा कया ऊती=किस कल्याणकारक रक्षण के द्वारा नः

English

Who in his might surveyed the floods enclosing productive force and generating Worship, He who is God mid Gods, and none beside him—What God shall we adore with our oblation?

अध्याय २७

श्लोक 27

प्र याभि॒र्यासि॑ दा॒श्वाᳪस॒मच्छा॑ नि॒युद्भि॑र्वायवि॒ष्टये॑ दुरो॒णे ।नि नो॑ र॒यिᳪ सु॒भोज॑सं युवस्व॒ नि वी॒रं गव्य॒मश्व्यं॑ च॒ राध॑:

pra yābhiryāsi dāśvāsamacchā niyudbhirvāyaviṣṭaye duroṇe | ni no rayi subhojasaṃ yuvasva ni vīraṃ gavyamaśvyaṃ ca rādha:

हिन्दी अर्थ

प्रभु का रक्षण व मास, ऋतु आदि के परिवर्तन से शक्ति का वर्धन-ये दोनों हमारे लिए कल्याणकर हे। ऋषि :ः-वामदेवः। देवता-इन्द्रः। छन्दः-निचुद्गायत्री। स्वरः षड्जः। कस्त्वा सत्यो मदानां मध्हिष्ठो मत्स॒दन्ध॑सः । दृढा चिदारुजे वसुं॥४०॥

English

The teams wherewith thou seekest him who offers, within his house, O Vâyu, to direct him, Therewith send wealth to us with full enjoyment, a hero son and gifts of kine and horses.

अध्याय २७

श्लोक 28

आ नो॑ नि॒युद्भि॑: श॒तिनी॑भिरध्व॒रᳪ स॑ह॒स्रिणी॑भि॒रुप॑ याहि य॒ज्ञम् ।वायो॑ अ॒स्मिन्त्सव॑ने मादयस्व यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभि॒: सदा॑ नः

ā no niyudbhi: śatinībhiradhvara sahasriṇībhirupa yāhi yajñam | vāyo asmintsavane mādayasva yūyaṃ pāta svastibhi: sadā naḥ

हिन्दी अर्थ

वे अनिर्वचनीय, आनन्दमय, सत्यस्वरूप, सर्वाधिक आनन्द के दाता प्रभु सोमरक्षा के द्वारा हमारे जीवन को उल्लास से युक्त करते है। वे कठोर स्वर्णादि धनँ कौ बँट-बोँटकर सबके लिए देते हे। ९. है प्रभो! आप नः सखीनाम्-हम मित्रं के अभि-आभिमुख्येन के अविता=उत्तम

English

O Vâyu, make thee glad at this libation. Preserve us evermore, ye Gods, with blessings.

अध्याय २७

श्लोक 29

नि॒युत्वा॑न्वाय॒वा ग॑ह्य॒यᳪ शु॒क्रो अ॑यामि ते ।गन्ता॑सि सुन्व॒तो गृ॒हम्

niyutvānvāyavā gahyaya śukro ayāmi te | gantāsi sunvato gṛham

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु के सखा व स्तोता बनें, हमें प्रभुरक्षण प्राप्त होगा। यज्ञायज्ञा वोऽअग्नयें गिरागिरा च दक्ष॑से। प्रप्र॑ वयममुतं जातवेदसं प्रियं यित्रं न शःसिषम् ॥।४२।॥ ९. गतमन्त्र के अनुसार प्रभु का सखा व स्तोता बनकर प्रभु का रक्षण प्राप्त करनेवाला

English

Drawn by thy team, O Vâyu, come: to thee is offered this, the pure. Thou visitest the presser's house.

अध्याय २७

श्लोक 30

वायो॑ शु॒क्रो अ॑यामि ते॒ मध्वो॒ अग्रं॒ दिवि॑ष्टिषु ।आ या॑हि॒ सोम॑पीतये स्पा॒र्हो दे॑व नि॒युत्व॑ता

vāyo śukro ayāmi te madhvo agraṃ diviṣṭiṣu | ā yāhi somapītaye spārho deva niyutvatā

हिन्दी अर्थ

प्रभु अमृत हें, यज्ञो दारा उन्नत होते हए हम भौ अमर बनने का प्रयत्न करे। प्रभु जातवेदाः है, प्रभु से दी गई इन ज्ञान की वाणि से ठम भी अपनी योग्यता को बढ्ानेवाले ों। संक्षेप में ' अमृत व जातवेदाः" बनकर ही हम शयु '=शान्ति को प्राप्त होनैवाले होगे। १. गतमन्त्र मेँ "गिरागिरा च दक्षसे ' इस वाक्य में जिस ज्ञान की वाणी का उल्लेख था,

English

Vâyu, the bright is offered thee, best of the meath at holy rites. Come thou to drink the Soma juice, God longed-for, on thy team-drawn car.

अध्याय २७

श्लोक 31

वा॒युर॑ग्रे॒गा य॑ज्ञ॒प्रीः सा॒कं ग॒न्मन॑सा य॒ज्ञम् ।शि॒वो नि॒युद्भि॑: शि॒वाभि॑:

vāyuragregā yajñaprīḥ sākaṃ ganmanasā yajñam | śivo niyudbhi: śivābhi:

हिन्दी अर्थ

हम ऋग्, यजुः साम व अथर्वरूप चारों वाणियों से चतुष्पाद् धर्म का सेवन करे। ऋचाओं द्वारा प्राप्त विन्लान हमारे एश्वर्य को बद्धाए्, यजु: में प्रतिपादित यज्ञ हमारी पवित्रता का कारण बनें। साम द्वारा की गई उपासना हमारे बल व प्राण का वर्धन करनेवाली हो तथा अथर्व के उपदेश से वाचस्पति बनकर हम इस शरीर व जगत् मे अपने

English

Lover of worship, leader, come Vâyu with thought, to sacrifice, Propitious with propitious teams!

अध्याय २७

श्लोक 32

वायो॒ ये ते॑ सह॒स्रिणो॒ रथा॑स॒स्तेभि॒रा ग॑हि ।नि॒युत्वा॒न्त्सोम॑पीतये

vāyo ye te sahasriṇo rathāsastebhirā gahi | niyutvāntsomapītaye

हिन्दी अर्थ

प्रभुकृपा से हमारा जीवन पाञ्चों भृतो, ज्ञानेन्द्रियों, कर्मेन्द्रियों व प्राणो के दृष्टिकोण से पूर्ण हो। सब काल-विभाग हमें शक्ति देनेवाले हों। उत्तम गतिवाले होकर हम अपनी शक्ति को फैलानेवाले बनें। स्वस्थ व ज्ञानी बनकर प्रभु-संग से रसमय-जीवनवाले होकर मर्यादामय जीवनवाले हों।

English

With all the thousand chariots that are thine, O Vâyu, come to us, Team-drawn, to drink the Soma juice.

अध्याय २७

श्लोक 33

एक॑या च द॒शभि॑श्च स्वभूते॒ द्वाभ्या॑मि॒ष्टये॑ विᳪश॒ती च॑ ।ति॒सृभि॑श्च॒ वह॑से त्रि॒ᳪशता॑ च नि॒युद्भि॑र्वायवि॒ह ता वि मु॑ञ्च

ekayā ca daśabhiśca svabhūte dvābhyāmiṣṭaye viśatī ca | tisṛbhiśca vahase triśatā ca niyudbhirvāyaviha tā vi muñca

हिन्दी अर्थ

हम दुष्टाचारणों को त्यागे, जिससे उत्तम धन ओर वीर सन्तानो से युक्त हो अनाधृष्यो जातवेदाऽअनिष्टृतो विराडग्ने श्षत्रभृदींदिदीह। १. है अग्नेप्रगतिशील जीव! इह इस कर्म में वर्तमान हृआ-हआ तू. अर्थात् गतमन्त्र के अनुसार उत्तम मार्ग मेँ चलता हआ तू विषवाः आशाः=सब दिशाओं को दीदिहिनप्रकाशमय

English

Come thou with one, and ten, O Self-Existent! with two unto the sacrifice, and twenty. Three are the teams and thirty which convey thee. O Vâyu, in this place unyoke thy coursers.

अध्याय २७

श्लोक 34

तव॑ वायवृतस्पते॒ त्वष्टु॑र्जामातरद्भुत ।अवा॒ᳪस्या वृ॑णीमहे

tava vāyavṛtaspate tvaṣṭurjāmātaradbhuta | avāsyā vṛṇīmahe

हिन्दी अर्थ

प्रभुभक्त अपने सुन्दर जीवन से प्रभु के यश का वर्धन करनेवाला होता हे। वह क्रोधादि से धर्षित नहीं होता, ज्ञानी बनता हे, रोगों से अहिसित होता है, चमकता हे, बल का धारण करता है, सब दिशाओं को चमकानेवाला बनता हे, मनुष्य के जीवन में अआनेवाले भयो से ऊपर उठता है, शिव भावनाओं से युक्त होता है।

English

Wonderful Vâyu, Lord of Truth, thou who art Tvashtar's Son in-law, Thy saving succour we elect.

अध्याय २७

श्लोक 35

अ॒भि त्वा॑ शूर नोनु॒मोऽदु॑ग्धा इव धे॒नव॑: ।ईशा॑नम॒स्य जग॑तः स्व॒र्दृश॒मीशा॑नमिन्द्र त॒स्थुष॑:

abhi tvā śūra nonumo'dugdhā iva dhenava: | īśānamasya jagataḥ svardṛśamīśānamindra tasthuṣa:

हिन्दी अर्थ

प्रगतिशील जीव की इन्द्रियो शक्तियों से चमकती ठै, इसकी मानस पवित्रतां, इसका ज्ञान अत्यन्त दीप्त होते ै। इस प्रकार शरीर व चमकते हुए मस्तिष्कवाला यह अग्नि चचमकते हुए मुखवाला व प्रसन्नवदन होता हे। तनूनपादसुरो विश्ववैदा देवो देवेषुं देवः । पथो अनक्तु मध्वा घृतेन॑ ॥९२॥

English

Like kine unmilked we call aloud, Hero, to thee and sing thy praise, Looker on heavenly light, Lord of this moving world, Lord, Indra! of what moveth not.

अध्याय २७

श्लोक 36

न त्वावाँ॑२ अ॒न्यो दि॒व्यो न पार्थि॑वो॒ न जा॒तो न ज॑निष्यते ।अ॒श्वा॒यन्तो॑ मघवन्निन्द्र वा॒जिनो॑ ग॒व्यन्त॑स्त्वा हवामहे

na tvāvā~2 anyo divyo na pārthivo na jāto na janiṣyate | aśvāyanto maghavannindra vājino gavyantastvā havāmahe

हिन्दी अर्थ

हम शरीर को स्वस्थ व प्राणशक्ति-सम्पन्न बना, ज्ञानी व धनी बनें, देववृत्ति- वाले. देवों के भी देव बनें। हमारे व्यवहार मुधर, निर्मल व समञ्जदारी को लिये हए हो। मध्वां यज्ञं न॑क्षसे प्रीणानो नराशद्सो अग्ने। सुकृद्ेवः सविता विरुववारः।। ९३॥। १. मध्वा माधुर्य से यज्ञम्-अपने श्रेष्ठतम कर्मो को नक्षसे=तू व्याप्त करता है अथवा

English

None other like to thee, of earth or of the heavens, hath been or ever will be born. Desiring horses, Indra, Bounteous Lord! and kine, as men of might we call on thee.

अध्याय २७

श्लोक 37

त्वामिद्धि हवा॑महे सा॒तौ वाज॑स्य का॒रव॑: ।त्वां वृ॒त्रेष्वि॑न्द्र॒ सत्प॑तिं॒ नर॒स्त्वां काष्ठा॒स्वर्व॑तः

tvāmiddhi havāmahe sātau vājasya kārava: | tvāṃ vṛtreṣvindra satpatiṃ narastvāṃ kāṣṭhāsvarvataḥ

हिन्दी अर्थ

हम में यज्तियवृत्ति हो, हमारी जिह्वा प्रभु का नामोच्चारण करे ओर हमारी तिस्रो देवीर्बर्हिरेद रसंद न्त्विडा सर॑स्वती भार॑ती । मही गरंणाना।।९९॥ ९. ' अग्नि ' प्रगतिशील जीव प्रभु से प्रार्थना करता है कि है प्रभो! आपकी कृपा से तिस्रः देवीःतये तीन देविर्यो, दिव्य भावनां इदं बर्हिः =इस मेरे वासनाशुन्य हृदय में

English

That we may win us wealth and power, we poets call on only thee. In war men call on thee, Indra! the hero's Lord, in the steed's race-course call on thee.

अध्याय २७

श्लोक 38

स त्वं न॑श्चित्र वज्रहस्त धृष्णु॒या म॒ह स्त॑वा॒नो अ॑द्रिवः ।गामश्व॑ᳪ र॒थ्य॒मिन्द्र॒ सं कि॑र स॒त्रा वाजं॒ न जि॒ग्युषे॑

sa tvaṃ naścitra vajrahasta dhṛṣṇuyā maha stavāno adrivaḥ | gāmaśva rathyamindra saṃ kira satrā vājaṃ na jigyuṣe

हिन्दी अर्थ

' वसिष्ठ" का अपना जीवन उत्तम होता है. वह सन्तानो को भी उत्तम बनाता है। यह अत्न का पौष्टिकता के दृष्टिकोण से सेवन करता है, धन का उचित वर्धन करनेवाला होता है, उत्तम बुद्धिवाला, क्रियाशीलता से अपना वर्धन करनेवाला, जञानेन्धियों व कर्मेन्द्रिय को शोभायुक्त बनानेवाला होता है। यही इसकी "उपासना" होती है

English

As such, O Wonderful, whose hand holds thunder, praised as mighty, Caster of the Stone! Pour on us boldly, Indra, kine and chariot-steeds ever to be the conqueror's strength.

अध्याय २७

श्लोक 39

कया॑ नश्चि॒त्र आ भु॑वदू॒ती स॒दावृ॑ध॒: सखा॑ ।कया॒ शचि॑ष्ठया वृ॒ता

kayā naścitra ā bhuvadūtī sadāvṛdha: sakhā | kayā śaciṣṭhayā vṛtā

हिन्दी अर्थ

' वसिष्ठ" अपने मस्तिष्क व शरीर दोनों को स्वस्थ बनाता है, अपनी बुद्धि व वाणी को व्यवहारकुशल करता है ओर इस प्रकार धन का अर्जन करता है, परन्तु इस धनार्जन को करते हए भी अध्यात्मवृत्ति का बना रहता है ओर इस धन का दान करके प्रभु काही बन जाता है। उस प्रभु को ही सब धनों का दाता व वर्धन करनेवाला मानता है)

English

What succour will he bring to us, wonderful, ever-prospering Friend? With what most mighty company?

अध्याय २७

श्लोक 40

कस्त्वा॑ स॒त्यो मदा॑नां॒ मᳪहि॑ष्ठो मत्स॒दन्ध॑सः ।दृ॒ढा चि॑दा॒रुजे॒ वसु॑

kastvā satyo madānāṃ mahiṣṭho matsadandhasaḥ | dṛḍhā cidāruje vasu

हिन्दी अर्थ

सृष्टि के मूल व्यापक तत्त्व मे प्रभु गर्भरूप से स्थित न होते तो उस मूलतत्त्व से अग्नि आदि देवों कौ उत्पत्ति ही न होती। वे प्रभु ही इन सूर्यादि देवों के देवत्व का कारण है। उस अनिर्वचनीय महिमावाले देव के प्रति हम समर्पण द्वारा आराधना प्रभु की अध्यक्षता यें

English

What, genuine and most liberal draught will spirit thee with juice to burst Open e’en strongly-guarded wealth

अध्याय २७

श्लोक 41

अ॒भी षु ण॒: सखी॑नामवि॒ता ज॑रितॄ॒णाम् ।श॒तं भ॑वास्यू॒तये॑

abhī ṣu ṇa: sakhīnāmavitā jaritṝṇām | śataṃ bhavāsyūtaye

हिन्दी अर्थ

(क) प्रभु हमे उत्तम इनद्दरियाश्व प्राप्त करार, (ख) हम शुद्ध जीवनवाले बनकर प्रभु को प्राप्त करें, (ग) प्रभु यज्ञशील व शक्ति सम्पादन करनेवाले को प्राप्त होते है। आ याहि सोम॑पीतये स्पार्हो देव नियुत्व॑ता।॥ ३०॥ १. गतमन्त्र का " गृत्समद ' जब लोकहित में प्रवृत्त होता टै तब वह " पुरुमीढ '= बहुत पर

English

Do thou who art protector of us thy friends who praise thee With hundred aids approach us.

अध्याय २७

श्लोक 42

य॒ज्ञा-य॑ज्ञा वो अ॒ग्नये॑ गि॒रा-गि॑रा च॒ दक्ष॑से ।प्र-प्र॑ व॒यम॒मृतं॑ जा॒तवे॑दसं प्रि॒यं मि॒त्रं न श॑ᳪसिषम्

yajñā-yajñā vo agnaye girā-girā ca dakṣase | pra-pra vayamamṛtaṃ jātavedasaṃ priyaṃ mitraṃ na śasiṣam

हिन्दी अर्थ

प्रभु कौ आराधना के लिए हम यज्ञशील होँ। ' यज्ञप्रीः" प्रभु को हम यज्ञ से १. प्रभु का स्तवन करता हुआ गृत्समद प्रार्थना करता है-वायो=हे सम्पूर्ण संसार के सञ्चालक प्रभो! ये-जो ते=आपके सहस्िणः=(स+हस्) प्रसन्नता से युक्त रथासः शरीररूपं रथ है तेथिः=उनके साथ आगहि हमें प्राप्त होए, अर्थात् आपकी कृपा से हम

English

Sing to your Agni with each song, at every sacrifice, for strength. Come, let us praise the Wise and Everlasting God even as a well-belovd Friend.

अध्याय २७

श्लोक 43

पा॒हि नो॑ अग्न॒ एक॑या पा॒ह्युत द्वि॒तीय॑या ।पा॒हि गी॒र्भिस्ति॒सृभि॑रूर्जां पते पा॒हि च॑त॒सृभि॑र्वसो

pāhi no agna ekayā pāhyuta dvitīyayā | pāhi gīrbhistisṛbhirūrjāṃ pate pāhi catasṛbhirvaso

हिन्दी अर्थ

संसार के सञ्चालक, सृष्टि-नियमों के स्वामी स्वाध्यायशील कौ बुद्धि का निर्माण करनेवाले उस अनुपम प्रभु के रक्षण हमें प्राप्त हों। १. गतमन्त्र का अंगिरस प्रभु-स्तवन करता हआ अपने जीवन को सुन्दर बनाता हेतो यह उत्तम निवासवाला ' वसिष्ठ ' हो जाता है ओर प्रभु से प्रार्थना करता है कि ठे शूर-ठमारे

English

Protect us, Agni, through the first, protect us through the second hymn. Protect us through three hymns, O Lord of Power and Might; through four hymns, Vasu! guard thou us.

अध्याय २७

श्लोक 44

ऊ॒र्जो नपा॑त॒ᳪ स हि॒नायम॑स्म॒युर्दाशे॑म ह॒व्यदा॑तये ।भुव॒द्वाजे॑ष्ववि॒ता भुव॑द्वृ॒ध उ॒त त्रा॒ता त॒नूना॑म्

ūrjo napāta sa hināyamasmayurdāśema havyadātaye | bhuvadvājeṣvavitā bhuvadvṛdha uta trātā tanūnām

हिन्दी अर्थ

वसिष्ठ इसीलिए वसिष्ठ है कि वह यौवन से ही प्रभु-स्तवन मे लगा है। वह चराचर का आधार प्रभु को ही जानता है, प्रभु को सूर्य के समान देदीप्यमान रूप मे देखता है। १. प्रभु का उपासन करता हआ वसिष्ट! शान्त जीवनवाला बनता है, अतः "शयु! हो जाता हे। यह ऊँचा ज्ञानी बनता हे, अतः ' बार्हस्पत्य" कहलाता है। यह कहता है कि हे

English

The Son of Strength; for is he not our Friend? Let us serve him for offering our gifts. In battles may he be our help and strengthener, yea, be the saviour of our lives.

अध्याय २७

श्लोक 45

सं॒व॒त्स॒रो॒ऽसि परिवत्स॒रो॒ऽसीदावत्स॒रो॒ऽसीद्वत्स॒रो॒ऽसि वत्स॒रो॒ऽसि ।उ॒षस॑स्ते कल्पन्तामहोरा॒त्रास्ते॑ कल्पन्तामर्धमा॒सास्ते॑ कल्पन्तां मा॒सास्ते कल्पन्तामृ॒तव॑स्ते कल्पन्ताᳪ संवत्स॒रस्ते॑ कल्पताम् । प्रेत्या॒ एत्यै॒ सं चाञ्च॒ प्र च॑ सारय ।सुप॒र्ण॒चिद॑सि॒ तया॑ दे॒वत॑याऽङ्गिर॒स्वद् ध्रु॒व: सी॑द

saṃvatsaro'si parivatsaro'sīdāvatsaro'sīdvatsaro'si vatsaro'si | uṣasaste kalpantāmahorātrāste kalpantāmardhamāsāste kalpantāṃ māsāste kalpantāmṛtavaste kalpantā saṃvatsaraste kalpatām | pretyā etyai saṃ cāñca pra ca sāraya | suparṇacidasi tayā devatayā'ṅgirasvad dhruva: sīda

हिन्दी अर्थ

हम अपने कर्मोसेप्रभु को प्रीणित कर। वे हमारा भला-ही-भला चाहते है। उनके प्रति हम अपना अर्पण करदे, वे वासना-संग्राम मे हमारी रक्षा करेगे, हमारी वृद्धि का कारण होगे, हमें आधि-व्याधियों से बचार्णेगे। तयां देवत्त॑याङ्धिर् स्वद् श्रुवः सींद।।४५॥

English

Thou art Samvatsara; thou art Parivatsara; thou art Idâvatsara; thou art Idvatsara; thou art Vatsara. Prosper thy Dawns! Prosper thy Day-and-Nights! Prosper thy Half-months, Months, Seasons, and Years! Combine them for their going and their coming, and send then forward on their ordered courses. In eagle's shape thou art piled up and layered. With that divinity, Angiras-like, lie steady.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 27
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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