Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 26 / 40

Adhyāya 26

अध्याय 26

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अध्याय २६

श्लोक 1

अ॒ग्निश्च॑ पृथि॒वी च॒ सन्न॑ते॒ ते मे॒ सं न॑मताम॒दो वा॒युश्चा॒न्तरि॑क्षं च॒ सन्न॑ते॒ ते मे॒ सं न॑मताम॒दआ॑दि॒त्यश्च द्यौश्च॒ सन्न॑ते॒ ते मे॒ सं न॑मताम॒द आप॑श्च॒ वरु॑णश्च॒ सन्न॑ते॒ ते मे॒ सं न॑मताम॒दः ।स॒प्त स॒ᳪसदो॑ अष्ट॒मी भू॑त॒साध॑नी । सका॑माँ॒२अध्व॑नस्कुरु सं॒ज्ञान॑मस्तु मे॒ऽमुना॑

agniśca pṛthivī ca sannate te me saṃ namatāmado vāyuścāntarikṣaṃ ca sannate te me saṃ namatāmada ādityaśca dyauśca sannate te me saṃ namatāmada āpaśca varuṇaśca sannate te me saṃ namatāmadaḥ | sapta sasado aṣṭamī bhūtasādhanī | sakāmā~2adhvanaskuru saṃjñānamastu me'munā

हिन्दी अर्थ

प्रभु मेरी इस इच्छा को पूर्णं करे कि मैं सभी के लिए वेदज्लान को देनेवाला बनूं। इस ज्लानयज्ञ से मै विद्धानों का प्रिय बनं। दक्षिणा को देनेवाले दक्षिणा देने में प्रसन्नता अनुभव कर ओर इस ज्ञानयज्ञ से मेँ प्रभु कौ आराधना करके प्रभु को प्राप्त करनेवाला बन! १. गतमन्त्र मे कहा था कि मैं वेदज्ञान का प्रचार करं। प्रचार के लिए आवश्यक ठै

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE TWENTY-SIXTH. AGNI and Prithivî, closely connected, may they bring low for me the boon I mention. Vâyu and Firmament, closely connected, may they, etc. Closely connected Dyaus and the Âditya, may they, etc. Closely connected Varuna and Waters, may they, etc. Lord of the seven communities and her who forms all beings, eighth, Make our ways full of pleasantness: may So-and-So and I agree.

अध्याय २६

श्लोक 2

यथे॒मां वाचं॑ कल्या॒णीमा॒वदा॑नि॒ जने॑भ्यः ।ब्र॒ह्म॒रा॒ज॒न्या॒भ्याᳪ शू॒द्राय॒ चार्या॑य च॒ स्वाय॒ चार॑णाय च ।प्रि॒यो दे॒वानां॒ दक्षि॑णायै दा॒तुरि॒ह भू॑यासम॒यं मे॒ काम॒: समृ॑ध्यता॒मुप॑ मा॒दो न॑मतु

yathemāṃ vācaṃ kalyāṇīmāvadāni janebhyaḥ | brahmarājanyābhyā śūdrāya cāryāya ca svāya cāraṇāya ca | priyo devānāṃ dakṣiṇāyai dāturiha bhūyāsamayaṃ me kāma: samṛdhyatāmupa mādo namatu

हिन्दी अर्थ

वेदज्लान की प्राप्ति के लिए हम जितेन्द्रिय, शक्तियों का विकास करनेवाले व बलशाली बनें। यह वेदज्ञान प्रभु के प्रकाश के लिए भी आवश्यक हेै। १. गतमन्त्र का ' गृत्समद ' प्रस्तुत मन्त्रों में “ रम्याक्षी :'=रमणीय ओखोवाला बनता हे। प्रभु का कुकछ-कुक आभास होने पर मानस आहवाद् का आंखों मँ बसना स्वाभाविक है। यह

English

That I to all the people may address this salutary speech, To priest and nobleman, Sûdra and Arya, to one of our own kin and to the stranger. Dear may I be to Gods and guerdon-giver. Fulfilled be this my hope: be that my portion!

अध्याय २६

श्लोक 3

बृह॑स्पते॒ अति॒ यद॒र्यो अर्हा॑द् द्यु॒मद्वि॒भाति॒ क्रतु॑म॒ज्जने॑षु ।यद्दी॒दय॒च्छव॑स ऋतप्रजात॒ तद॒स्मासु॒ द्रवि॑णं धेहि चि॒त्रम् ।उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि॒ बृह॒स्पत॑ये त्वै॒ष ते॒ योनि॒र्बृह॒स्पत॑ये त्वा

bṛhaspate ati yadaryo arhād dyumadvibhāti kratumajjaneṣu | yaddīdayacchavasa ṛtaprajāta tadasmāsu draviṇaṃ dhehi citram | upayāmagṛhīto'si bṛhaspataye tvaiṣa te yonirbṛhaspataye tvā

हिन्दी अर्थ

प्रभु-प्राप्ति के लिए वीर्य की रक्ष ओर सोम का पान आवश्यक है। इसके ५ है, वासनाओं से बचना व प्रभु का स्तवन करना। वेदज्ञान भी प्रभु प्राप्ति के लिए १. गतमन्त्र के ही भाव को परिवर्तित शब्दों में रम्याक्षि इस प्रकार प्रकट करता है--हे इन्द्र परमैश्वर्यशाली प्रभो! वृत्रहन्= ज्ञान के आवरणभूत काम को विध्वस्त करनेवाले प्रभो!

English

Give us, Brihaspati, that wondrous treasure, that which exceeds the merit of the foeman, Which shines among the folk effectual, splendid, that, Son of Law, which is with might refulgent. Taken upon a base art thou. Thee for Brihaspati. This is thy home. Thee for Brihaspati,

अध्याय २६

श्लोक 4

इन्द्र॒ गोम॑न्नि॒हा या॑हि॒ पिबा॒ सोम॑ᳪ शतक्रतो । वि॒द्यद्भि॒र्ग्राव॑भिः सु॒तम् ।उ॒प॒या॒मगृ॑हीतो॒ऽसीन्द्रा॑य त्वा॒ गोम॑त ए॒ष ते॒ योनि॒रिन्द्रा॑य त्वा॒ गोम॑ते

indra gomannihā yāhi pibā soma śatakrato | vidyadbhirgrāvabhiḥ sutam | upayāmagṛhīto'sīndrāya tvā gomata eṣa te yonirindrāya tvā gomate

हिन्दी अर्थ

प्रभु कौ प्राप्ति के लिए सोम की रक्षा आवश्यक है, उस सोमरक्षा के लिए हम वेद्लान को प्राप्त करनेवाले बनें ओर प्रभु का स्तवन करनेवाले हों। वेदज्ञान भी प्रभु की प्राप्ति के लिए साधन होता हे। वैश्वानर प्रभु का आराधन

English

Come hither, Indra, rich in kine! Drink Soma, Lord of Hundred Powers, Effused by braying pressing-stones. Taken upon a base art thou. Thee for Indra, rich in kine. This is thy home. Thee for Indra, rich in kine.

अध्याय २६

श्लोक 5

इन्द्रा या॑हि वृत्रह॒न्पिबा॒ सोम॑ᳪ शतक्रतो । गोम॑द्भि॒र्ग्राव॑भिः सु॒तम् ।उ॒प॒या॒मगृ॑हीतो॒ऽसीन्द्रा॑य त्वा॒ गोम॑त ए॒ष ते॒ योनि॒रिन्द्रा॑य त्वा॒ गोम॑ते

indrā yāhi vṛtrahanpibā soma śatakrato | gomadbhirgrāvabhiḥ sutam | upayāmagṛhīto'sīndrāya tvā gomata eṣa te yonirindrāya tvā gomate

हिन्दी अर्थ

हम वैश्वानर प्रभु का आराधन कररे। वे यम-नियमों से गृहीत होते है। वेदज्ञान प्रभु प्राप्ति का साधन बनता हे। १. गतमन्त्र का प्रादुराक्िन्प्रभु के दर्शनवाला व्यक्ति सारी वासनाओं का संहार करनेवाला बनता है, अतएव कुत्स" हो जाता है। (कुथ हिसायाम्)। कुत्स प्रार्थना करता

English

O Indra, Vritra-slayer, come. Drink Soma, Lord of Hundred Powers, Expressed with stones whose wealth is kine. Taken upon a base art thou, etc., as in verse 4.

अध्याय २६

श्लोक 6

ऋ॒तावा॑नं वैश्वान॒रमृ॒तस्य॒ ज्योति॑ष॒स्पति॑म् । अज॑स्रं घ॒र्ममी॑महे ।उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि वैश्वान॒राय॑ त्वै॒ष ते॒ योनि॑र्वैश्वान॒राय॑ त्वा

ṛtāvānaṃ vaiśvānaramṛtasya jyotiṣaspatim | ajasraṃ gharmamīmahe | upayāmagṛhīto'si vaiśvānarāya tvaiṣa te yonirvaiśvānarāya tvā

हिन्दी अर्थ

प्रभु हमारे स्तोत्ररूप वाहनों पर आरुढ हो हमें प्राप्त होते हैँ ओर हमारी रक्षा करते है। उस वैश्वानर प्रभु कौ प्राप्ति के लिए वेदज्ञान साधन बनता ठै। अग्निऋषिः पव॑मानः पाञ्च॑जन्यः पुरोर्हितः। तमीं महे महागयम्। उपयामगुहीतो ऽस्यग्नयें त्वा वर्च'सऽएष ते योनिरग्नये त्वा वर्चसे।। ९॥

English

Vaisvânara the righteous One, the Lord of sacrifice and light, The heat that wasteth not, we seek. Taken upon a base art thou. Thee for Vaisvânara. This is thy home: thee for Vaisvânara.

अध्याय २६

श्लोक 7

वै॒श्वा॒न॒रस्य॑ सुम॒तौ स्या॑म॒ राजा॒ हि कं॒ भुव॑नानामभि॒श्रीः ।इ॒तो जा॒तो विश्व॑मि॒दं वि च॑ष्टे वैश्वान॒रो य॑तते॒ सूर्ये॑ण ।उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि वैश्वान॒राय॑ त्वै॒ष ते॒ योनि॑र्वैश्वान॒राय॑ त्वा

vaiśvānarasya sumatau syāma rājā hi kaṃ bhuvanānāmabhiśrīḥ | ito jāto viśvamidaṃ vi caṣṭe vaiśvānaro yatate sūryeṇa | upayāmagṛhīto'si vaiśvānarāya tvaiṣa te yonirvaiśvānarāya tvā

हिन्दी अर्थ

उत्तम निवासवाला ओर शक्तिशाली वह बनता है जो प्रभु को अपना घर बनाता है। वेद उस तेजोमय अग्निरूप प्रभु की प्राप्ति के लिए साधन है। १. गतमन्त्रों के अनुसार प्रभु को महागय=महान् गृह समञ्जनेवाले ओर अतएव उत्तम निवासवाले "वसिष्ठ" कहते हैँ कि महान्=वे प्रभु श्रेष्ठ टै (मह पूजायाम्) पूजनीय है।

English

Still in Vaisvânara's grace may we continue: yea, he is King Supreme o’er all things living. Sprung hence to life upon this All he looketh. Vaisvânara hath rivalry with Sûrya. Taken upon a base art thou, etc., as in verse 6.

अध्याय २६

श्लोक 8

वै॒श्वा॒न॒रो न ऊ॒तय॒ आ प्र या॑तु परा॒वत॑: । अ॒ग्निरु॒क्थेन॒ वाह॑सा ।उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि वैश्वान॒राय॑ त्वै॒ष ते॒ योनि॑र्वैश्वान॒राय॑ त्वा

vaiśvānaro na ūtaya ā pra yātu parāvata: | agnirukthena vāhasā | upayāmagṛhīto'si vaiśvānarāya tvaiṣa te yonirvaiśvānarāya tvā

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु-उपासन के लिए उसी प्रकार प्रेमवाले हों जैसेकि गौ बडे के प्रति जाने के लिए प्रेमवाली होती हे। प्रभु ही हमारे सब दुःखों के नाशक है अग्निहोत्र-सन्ध्या- दान १. प्रभु कहते है कि यत्-जो भी वाहिष्ठम्-सर्वोत्तम प्राप्त करने योग्य वस्तु है तत्=

English

Hitherward come Vaisvânara to succour us from far away, Agni through laud that brings him near! Taken upon a base, etc, as in verse 6.

अध्याय २६

श्लोक 9

अ॒ग्निरृषि॒: पव॑मान॒: पाञ्च॑जन्यः पु॒रोहि॑तः । तमी॑महे महाग॒यम् ।उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽस्य॒ग्नये॑ त्वा॒ वर्च॑स ए॒ष ते॒ योनि॑र॒ग्नये॑ त्वा॒ वर्च॑से

agnirṛṣi: pavamāna: pāñcajanyaḥ purohitaḥ | tamīmahe mahāgayam | upayāmagṛhīto'syagnaye tvā varcasa eṣa te yoniragnaye tvā varcase

हिन्दी अर्थ

१. हम उत्तम घृत व ओषधद्रव्यों से अग्निहोत्र करे। २. ज्ञानरूप धनवाले बनकर प्रभु का अर्चन करे। ३. सदा धनों व अन्नो का दान करनेवाले बने। ९. प्रभु की अर्चना से ज्ञान का प्रकाश तो प्राप्त होता ही है, प्रभु की शक्ति भी हममें प्रवाहित होती है ओर हम ‹ भारद्वाज ' बनते है, अपने मे शक्ति को भरनेवाले। इस भारद्वाज

English

Agni is Pavamâna, Sage, the Tribe-Priest of the Races Five: To him of mighty wealth we pray. Taken upon a base art thou. Thee for lustre. This is thy home. Thee for lustre.

अध्याय २६

श्लोक 10

म॒हाँ२ इन्द्रो॒ वज्र॑हस्तः षोड॒शी शर्म॑ यच्छतु । हन्तु॑ पा॒प्मानं॒ योऽस्मान्द्वेष्टि॑ ।।उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि महे॒न्द्राय॑ त्वै॒ष ते॒ योनि॑र्महे॒न्द्राय॑ त्वा

mahā~2 indro vajrahastaḥ ṣoḍaśī śarma yacchatu | hantu pāpmānaṃ yo'smāndveṣṭi || upayāmagṛhīto'si mahendrāya tvaiṣa te yonirmahendrāya tvā

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु-सम्पर्क में आकर वेदवाणियों का श्रवण करें ओर सोम कौ रक्षा यज्ञ त प्रजा-परिपाल्नन ऋतवस्ते यज्ञं वि त॑न्वन्तु मासां रक्षन्तु ते हविंः। संवत्सरस्तै यज्ञं द॑धातु नः प्रजां च परि पातु नः॥९४॥

English

May mighty Indra, thunder-armed, may Shodasî protect us well, and slay the wicked man who hateth us. Taken upon a base art thou. Thee for Mahendra. This is thy home. Thee for Mahendra.

अध्याय २६

श्लोक 11

तं वो॑ द॒स्ममृ॑ती॒षहं॒ वसो॑र्मन्दा॒नमन्ध॑सः ।अ॒भि व॒त्सं न स्वस॑रेषु धे॒नव॒ इन्द्रं॑ गी॒र्भिर्न॑वामहे

taṃ vo dasmamṛtīṣahaṃ vasormandānamandhasaḥ | abhi vatsaṃ na svasareṣu dhenava indraṃ gīrbhirnavāmahe

हिन्दी अर्थ

हम प्रत्येक ऋतु मे यज्ञशील बनें, सदा दानपूर्वक अदन करनेवाले हों, सारा वर्षं हमारा यज्ञ अविच्छिन्न चलता रहे ओर यह यज्ञ प्रजा का परिपालन करनेवाला हो। १. गतमन्त्र में प्रतिपादित यज्ञादि उत्तम कर्मो की वृत्ति जीवन में तभी बनती हे, जब प्रस्तुत मन्त्र के अनुसार उत्तम गुरुओं कौ समीपता, प्रभुभक्त व स्तोताओं का संग प्राप्त होता

English

As cows low to their calves in stalls so with our songs we glorify This Indra, e’en your wondrous God who checks assault, who joys in the delicious juice.

अध्याय २६

श्लोक 12

यद्वाहि॑ष्ठं॒ तद॒ग्नये॑ बृ॒हद॑र्च विभावसो ।महि॑षीव॒ त्वद्र॒यिस्त्वद्वाजा॒ उदी॑रते

yadvāhiṣṭhaṃ tadagnaye bṛhadarca vibhāvaso | mahiṣīva tvadrayistvadvājā udīrate

हिन्दी अर्थ

-हमें गुरुओ का सान्निध्य प्राप्त हो, स्तोताओं की संगत मे हम उट बैठे ओर जानपूर्वक् कर्मो में लगे रहें तो हमारा जीवन अधिकाधिक पूर्ण होता जाएगा। जीवन कौ पूर्णता से हम 'वत्स', प्रभु के प्रिय, इस मन्त्र के ऋषि बनेमे। सात्त्विक पदार्थो का सेवन

English

Agni's is the most fetching song. Shine mightily, thou rich in light! Like the Chief Consort of a King, riches and strength proceed from thee.

अध्याय २६

श्लोक 13

एह्यू॒ षु ब्रवा॑णि॒ तेऽग्न॑ इ॒त्थेत॑रा॒ गिर॑: ।ए॒भिर्व॑र्धास॒ इन्दु॑भिः

ehyū ṣu bravāṇi te'gna itthetarā gira: | ebhirvardhāsa indubhiḥ

हिन्दी अर्थ

हम जितना सोम का रक्षण करेगे उतना ही उत्कृष्ट हमारा विकास होगा, प्रकाशमय जीवन विताते हए हम उत्तम सात्विक पार्थिव पदार्थो को ग्रहण करेगे. परिणामतः हमें उदात्त सुख व महनीय कीर्ति व धन प्राप्त होगा। १. गतमन्त्र के अनुसार ' महीयवः' = उत्कृष्ट धन को प्राप्त करनेवाले अमहीयु से प्रभु

English

Come, here, O Agni, will I sing verily other songs to thee, And with these drops shalt thou grow strong.

अध्याय २६

श्लोक 14

ऋ॒तव॑स्ते य॒ज्ञं वि त॑न्वन्तु॒ मासा॒ रक्ष॑न्तु ते॒ हवि॑: ।सं॒व॒त्स॒रस्ते॑ य॒ज्ञं द॑धातु नः प्र॒जां च॒ परि॑ पातु नः

ṛtavaste yajñaṃ vi tanvantu māsā rakṣantu te havi: | saṃvatsaraste yajñaṃ dadhātu naḥ prajāṃ ca pari pātu naḥ

हिन्दी अर्थ

हमारा धन “इन्द्र, यज्यु, वरुण व मरुतो" के लिए हो। १. ' अमहीयु ' प्रार्थना करता है-अर्यः=सब धनो का स्वामी प्रभु एना=इन विश्वानि =सब मानुषाणाम् मनुष्यों के, अर्थात् विचारशील पुरुषों के लिए हितकर द्युम्नानि=धनों को हमारे लिए आ= (आनयतु) प्राप्त कराए। प्रभुकृपा से हम उन सब धनो को प्राप्त करनेवाले

English

The Seasons spread thy sacrifice! the Mouths protect thine offering! May the Year guard our sacrifice for thee and keep our children safe.

अध्याय २६

श्लोक 15

उ॒प॒ह्व॒रे गि॑री॒णाᳪ स॑ङ्ग॒मे च॑ न॒दी॒ना॑म् ।धि॒या विप्रो॑ अजायत

upahvare girīṇā saṅgame ca nadīnām | dhiyā vipro ajāyata

हिन्दी अर्थ

हमारी वृत्ति यज्ञिय हो। यज्ञो से हमें सब प्रकार का पोषण प्राप्त हो। अग्ने पत्नीरिहा व॑ह देवानामुशतीरुप । त्वष्ट॑रश्सोम॑पीतये ॥ २०॥ १. प्रस्तुत मन्त्रों का ऋषि ' मेधातिथि" है, यह निरन्तर बुद्धि की ओर अग्रसर हो रहा हे (मेधाम् अतति) अथवा यह सदा बुद्धिपूर्वक ही संसार मे चलता है (मेधया अतति )।

English

There where the mountains downward slope, there by the meeting of the streams The sage was manifest with song.

अध्याय २६

श्लोक 16

उ॒च्चा ते॑ जा॒तमन्ध॑सो दि॒वि सद्भूम्या द॑दे ।उ॒ग्रᳪ शर्म॒ महि॒ श्रव॑:

uccā te jātamandhaso divi sadbhūmyā dade | ugra śarma mahi śrava:

हिन्दी अर्थ

आगे बद्ने का अभिप्राय है जीवन में दिव्य गुणों को आमन्त्रित करना। दिव्य गुणों कौ प्राप्ति के लिए सोमरक्षा आवश्यक है। सोम को शरीर में ही व्याप्त करने के लिए हम त्वष्टा बनें, सदा ज्ञान कौ प्राप्ति करनेवाले तथा क्रियाशील जीवनवाले हो। सोम रक्चा का साधन व साध्य

English

High is thy juice's birth: though sat in heaven, on earth it hath obtained Strong sheltering power and great renown.

अध्याय २६

श्लोक 17

स न॒ इन्द्रा॑य॒ यज्य॑वे॒ वरु॑णाय म॒रुद्भ्य॑: ।व॒रि॒वो॒वित्परि॑ स्रव

sa na indrāya yajyave varuṇāya marudbhya: | varivovitpari srava

हिन्दी अर्थ

(क) हमारी वेदादि के प्रवचनों से यज्ञादि उत्तम कर्मो में प्रवृत्ति हो, (ख) इसके परिणामरूप भोगवृत्ति व वासनाओं से बचकर हम सोम का पान करनेवाले बनें, (ग) इस सोमपान से हमारे जीवन मे रमणीय वस्तुओं का धारण होगा। हमारे शरीर, मन व १. गतमन्त्र के सोमपान का ही उल्लेख करते हुए कहते हैं द्रविणोदाः =धन का दान

English

Finder of room and freedom, flow for Indra, meet for worship, flow For Varuna and the Marut host.

अध्याय २६

श्लोक 18

ए॒ना विश्वा॑न्य॒र्य आ द्यु॒म्नानि॒ मानु॑षाणाम् ।सिषा॑सन्तो वनामहे

enā viśvānyarya ā dyumnāni mānuṣāṇām | siṣāsanto vanāmahe

हिन्दी अर्थ

दान दे, भोगवृत्ति से बचें ओर सोम कौ रक्षा करे। प्रसंगवश प्रतिष्ठा पानेवाले हो। हमें नेताओं से इसी प्रकार की प्रेरणां प्राप्त होती रहे। अस्मिन्यज्ञे बर्हिष्या निषद्या दधिष्वेमं जठरऽ इन्दुमिन्द्र ॥ २३॥ १. गतमन्त्र की समाप्ति पर नेता की प्रेरणा के अनुसार चलने का संकेत है। नेता कौ

English

Striving to win, with him we gain all wealth of the ungodly one, Yea, all the glories of mankind.

अध्याय २६

श्लोक 19

अनु॑ वीरै॒रनु॑ पुष्यास्म॒ गोभि॒रन्वश्वै॒रनु॒ सर्वे॑ण पु॒ष्टैः ।अनु॒ द्विप॒दाऽनु॒ चतु॑ष्पदा व॒यं दे॒वा नो॑ य॒ज्ञमृ॑तु॒था न॑यन्तु

anu vīrairanu puṣyāsma gobhiranvaśvairanu sarveṇa puṣṭaiḥ | anu dvipadā'nu catuṣpadā vayaṃ devā no yajñamṛtuthā nayantu

हिन्दी अर्थ

सोम (वीर्य) ही हमारी सर्वं उन्नतियों का साधन है। इसकी रक्षा के लिए आवश्यक है कि (क) हम अन्तर्मुखी वृत्ति बनार्प् (अर्वाङ् एहि), (ख) मन को सदा वासनाशून्य व निर्मल बनाए रक्खें, (ग) किसी क्षण प्रमाद में न चले जारण (शश्वत्तमम्) (घ) सदा यज्ञादि उत्तम कर्मो मे लगे रहे, (ङ) हम अपने हदय को वासनाशून्य बनाने

English

May we be prosperous with brave sons, cattle, horses, each wish of ours, and varied blessings, With quadrupeds, and with the men about us. May the Gods guide our sacrifice in season.

अध्याय २६

श्लोक 20

अग्ने॒ पत्नी॑रि॒हा व॑ह दे॒वाना॑मुश॒तीरुप॑ ।त्वष्टा॑र॒ᳪ सोम॑पीतये

agne patnīrihā vaha devānāmuśatīrupa | tvaṣṭāra somapītaye

हिन्दी अर्थ

हमे विद्वान् लोग प्राप्त हों. उनके सदुपदेश को सुनकर हम आनन्दमय मनोवृत्तिवाले बनें, कर्तव्यो को प्रीतिपूर्वक करे, सोमरक्ा द्वारा ज्ञान को दीप्त करते हुए दिव्य गुणोवाले बनें, शक्तियों का विकास करें तथा प्रकृष्ट ज्ञानेन्दरियो , कर्मेन्द्रिय व प्राणोवाले बने। १. प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि ' मधुच्छन्दा ' है=अत्यन्त उत्तम इच्छावाला। यह सोम को

English

O Agni, bring thou hitherward the yearning Consorts of the Gods Bring Tvashtar to the Soma-draught.

अध्याय २६

श्लोक 21

अ॒भि य॒ज्ञं गृ॑णीहि नो॒ ग्नावो॒ नेष्ट॒: पिब॑ ऋ॒तुना॑ ।त्वᳪ हि र॑त्न॒धा असि॑

abhi yajñaṃ gṛṇīhi no gnāvo neṣṭa: piba ṛtunā | tva hi ratnadhā asi

हिन्दी अर्थ

हम सोम कौ रक्षा करे। यह हमारी वाणी व वृत्ति को सुधर बनाएगा, हम सदा प्रसन्न रहेगे, यह हमारे शरीर, मन व बुद्धि के स्वास्थ्य का रक्षण करेगा। १. मधुच्छन्दा यह समञ्लता है कि यह सोम रक्षोहाच=रोगकृमियों का नाशक हे। रोगकृमियों के नाश के द्वारा जैसे यह शरीर के रोगों का नाश करता है, उसी प्रकार यह

English

O Neshtar girt by Dames, accept our sacrifice: with Ritu drink, For thou art he who giveth wealth.

अध्याय २६

श्लोक 22

द्र॒वि॒णो॒दाः पि॑पीषति जु॒होत॒ प्र च॑ तिष्ठत ।ने॒ष्ट्रादृ॒तुभि॑रिष्यत

draviṇodāḥ pipīṣati juhota pra ca tiṣṭhata | neṣṭrādṛtubhiriṣyata

हिन्दी अर्थ

सोम रोगकृमियों का नाशक है, राक्षसीवृत्तियों को दूर करता है, सम्पूर्ण विज्ञान का साधन बनता है। शरीर में व्याप्त होकर यह शरीर को लोहे का बना हआ अत्यन्त डव त्रना देता है ओर उस वजतुल्य दृढ शरीर में प्रभु के साथ सहस्थिति को प्राप्त नोट- शरीर को यहाँ द्रोण कहा है, यह सोम का पात्र है। "द्रु गतौ' से बनकर यह

English

He with the Ritus fain would drink, Wealth-river, from the Neshtar's bowl. Begin, pay offerings: hasten ye.

अध्याय २६

श्लोक 23

तवा॒यᳪ सोम॒स्त्वमेह्य॒र्वाड् श॑श्वत्त॒मᳪ सु॒मना॑ अ॒स्य पा॑हि ।अ॒स्मिन् य॒ज्ञे ब॒र्हिष्या नि॒षद्या॑ दधि॒ष्वेमं ज॒ठर॒ इन्दु॑मिन्द्र

tavāya somastvamehyarvāḍ śaśvattama sumanā asya pāhi | asmin yajñe barhiṣyā niṣadyā dadhiṣvemaṃ jaṭhara indumindra

हिन्दी अर्थ

मे शरीर, हदय व मस्तिष्क के स्वास्थ्य को सिद्ध करू। वीर्यरक्षा व त्रतों का बन्धन मुञ्चे पूर्ण स्वस्थ बनाये। मेँ ज्ञानेद्धियो, मन व बुद्धि से प्रभु का साक्षात्कार करं, वाणी से लोगों को आकृष्ट करनेवाला बनँ। मेरी सब क्रियाँ सफल हों तथा प्रभुस्मरण के ज्लानयनज्ञ सरे प्रभु का आराधन हम प्रभु को वैश्वानररूप में देखें, हम स्वयं भी सब मनुष्यों का हित करनेवाले बनें। प्रभु का दर्शन करनेवाला इस संसार में भोगों में नहीं उलञ्जता, उन्नति-पथ पर निरन्तर आगे बढता है ओर प्रभु उसकी सहायता करते हे। यह वेदज्ञान उसे प्रभु-प्राप्ति के योग्य वैश्वानरो न॑ऽऊतयऽआा प्र यांतु परावतः । अग्निरुक्थेन वाहसा।

English

Come unto us, ye swift to listen!

अध्याय २६

श्लोक 24

अ॒मेव॑ नः सुहवा॒ आ हि गन्त॑न॒ नि ब॒र्हिषि॑ सदतना॒ रणि॑ष्टन ।अथा॑ मन्दस्व जुजुषा॒णो अन्ध॑स॒स्त्वष्ट॑र्दे॒वेभि॒र्जनि॑भिः सु॒मद्ग॑णः

ameva naḥ suhavā ā hi gantana ni barhiṣi sadatanā raṇiṣṭana | athā mandasva jujuṣāṇo andhasastvaṣṭardevebhirjanibhiḥ sumadgaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु "महान्, इन्द्र, वज्रहस्त व षोडशी हैँ", वे हमारा कल्याण करते हेँ। हमारे पाप को नष्ट कर सभी को हमारे प्रति प्रीतियुक्तं करते हैँ। हम वेदज्ञान द्वारा प्रभु को पाने १. प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि "नोधा '=नवधा स्तुति को धारण करनेवाला अथवा स्तुति क द्वारा आत्मधारण करनेवाला कहता है कि तं इन्द्रम्-उस परमैश्वर्यशाली प्रभु को गीर्भिः=इन

English

as at home, upon the sacred grass sit and enjoy yourselves. And, Tvashtar, well content be joyful in the juice with Gods and Goddesses in gladsome company.

अध्याय २६

श्लोक 25

स्वादि॑ष्ठया॒ मदि॑ष्ठया॒ पव॑स्व सोम॒ धार॑या ।इन्द्रा॑य॒ पात॑वे सु॒तः

svādiṣṭhayā madiṣṭhayā pavasva soma dhārayā | indrāya pātave sutaḥ

हिन्दी अर्थ

- हम प्रत्येक ऋतु मे यज्ञशील बनें, सदा दानपूर्वक अदन करनेवाले हों, सारा वर्षं हमारा यज्ञ अविच्छिन्न चलता रहे ओर यह यज्ञ प्रजा का परिपालन करनेवाला हो। १. गतमन्त्र में प्रतिपादित यज्ञादि उत्तम कर्मो की वृत्ति जीवन में तभी बनती हे, जब प्रस्तुत मन्त्र के अनुसार उत्तम गुरुओं कौ समीपता, प्रभुभक्त व स्तोताओं का संग प्राप्त होता --हमें गुरुओ का सान्निध्य प्राप्त हो, स्तोताओं की संगत मे हम उट बैठे ओर जानपूर्वक् कर्मो में लगे रहें तो हमारा जीवन अधिकाधिक पूर्ण होता जाएगा। जीवन कौ पूर्णता से हम 'वत्स', प्रभु के प्रिय, इस मन्त्र के ऋषि बनेमे। सात्त्विक पदार्थो का सेवन

English

In sweetest and most gladdening stream flow pure, O Soma, on thy way, Pressed out for Indra, for his drink.

अध्याय २६

श्लोक 26

र॒क्षो॒हा वि॒श्वच॑र्षणिर॒भि योनि॒मयो॑हते ।द्रोणे॑ स॒धस्थ॒मास॑दत्

rakṣohā viśvacarṣaṇirabhi yonimayohate | droṇe sadhasthamāsadat

हिन्दी अर्थ

- हमारी वृत्ति यज्ञिय हो। यज्ञो से हमें सब प्रकार का पोषण प्राप्त हो। अग्ने पत्नीरिहा व॑ह देवानामुशतीरुप । त्वष्ट॑रश्सोम॑पीतये ॥ २०॥ १. प्रस्तुत मन्त्रों का ऋषि ' मेधातिथि" है, यह निरन्तर बुद्धि की ओर अग्रसर हो रहा हे (मेधाम् अतति) अथवा यह सदा बुद्धिपूर्वक ही संसार मे चलता है (मेधया अतति )।

English

Fiend-queller, Friend of all men, he hath in the vat attained unto His place, his iron-fashioned home.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 26
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.