Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 38 / 40

Adhyāya 38

अध्याय 38

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अध्याय ३८

श्लोक 1

दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्याम् ।आ द॒देऽदि॑त्यै॒ रास्ना॑ऽसि

devasya tvā savituḥ prasave'śvinorbāhubhyāṃ pūṣṇo hastābhyām | ā dade'dityai rāsnā'si

हिन्दी अर्थ

पत्नी के अन्द्र ये गुण होने चादि : (क) समङ्दारी, (ख) यज्लियवृत्ति, गतमन्त्र के विषय को अधिक स्पष्ट करते हुए कहते है कि ९. है पत्नि! तू अदित्यै स्वास्थ्य के लिए रास्ना=-कमरवबन्ध (हपतकसम) असि=है। पत्नी ‹ धर्मपत्नी" है। वह पति का यज्ञो से संयोग करनेवाली है, स्वयं यक्ञियवृक्तिवाली होती हु पति के

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE THIRTY-EIGHTH. BY impulse of God Savitar I take thee with arms of Asvins, with the Hands of Pûshan. A zone for Aditi art thou.

अध्याय ३८

श्लोक 2

इड॒ एह्यदि॑त॒ एहि॒ सर॑स्व॒त्त्येहि॑ ।असा॒वेह्यसा॒वेह्यसा॒वेहि॑

iḍa ehyadita ehi sarasvattyehi | asāvehyasāvehyasāvehi

हिन्दी अर्थ

पत्नी यज्ञिय जीवनवाली हो, जिससे विलास से स्वास्थ्य को समाप्त न कर दे। घर मे सब वस्तुओं को सुव्यवस्थित प्रकार से रखकर घरको सुन्दर बनाये। भोजन की ठीक व्यवस्था से सबके स्वास्थ्य को सिद्ध करे ओर उच्च लक्ष्यवाली बनकर शक्ति को १. अश्विभ्याम् प्राणापानों के लिए पिन्वस्व=तू अपने को प्रीणित कर, उत्साहित

English

Idâ, come hither. Aditi, come hither. Sarasvatî, come hither. Come hither, So-and-So. Come hither, So-and-So. Come hither, So-and-So.

अध्याय ३८

श्लोक 3

अदि॑त्यै॒ रास्ना॑ऽसीन्द्रा॒ण्या उ॒ष्णीष॑: ।पू॒षाऽसि॑ घ॒र्माय॑ दीष्व

adityai rāsnā'sīndrāṇyā uṣṇīṣa: | pūṣā'si gharmāya dīṣva

हिन्दी अर्थ

हम प्राणसाधना, ज्ञान, व जितेन्द्रियता के लिए सदा उत्साह धारण करे १. पिछले मन्त्र में प्राण, ज्ञान व जितेन्द्रियता कौ साधना का उल्लेख हुआ है। उस साधना मेँ सर्वप्रमुख सहायक वेदवाणी है। वेदवाणी को "गौ" भी कहते ै। इस वेदवाणीरूप गौ से मन्त्र का ऋषि "दीर्घतमा" कहता है कि यः=जो ते=तेरा स्तनः शशयः=(शशयः

English

Thou art a zone for Aditi, a diadem for Indrânî. Pûshan art thou. Spare some for the Gharma.

अध्याय ३८

श्लोक 4

अ॒श्विभ्यां॑ पिन्वस्व॒ सर॑स्वत्यै पिन्व॒स्वेन्द्रा॑य पिन्वस्व ।स्वाहेन्द्र॑व॒त् स्वाहेन्द्र॑व॒त् स्वाहेन्द्र॑व॒त्

aśvibhyāṃ pinvasva sarasvatyai pinvasvendrāya pinvasva | svāhendravat svāhendravat svāhendravat

हिन्दी अर्थ

वेदवाणीरूप गौ के स्तन का पान करके मैं ' क्रियाशील, मंगलमय, ज्ञनसम्पत्न, व वसुमान्" बनता हँ। सब वरणीय वसुओं को प्राप्त करता हूँ ओर विशाल हदय बनता हू। सूचना- वेद कौ शिक्षा मनुष्य को कहती है ९. "मनुर्भव! तू मनु बन, समज्लदार बन २. "माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः" भूमि को अपनी माता समञ्च। भूमि के एकदेश को

English

Overflow for the Asvins. Overflow for Sarasvatî. Overflow for Indra All-hail, what belongs to Indra! All-hail, what belongs to Indra! All-hail, what belongs to Indra!

अध्याय ३८

श्लोक 5

यस्ते॒ स्तन॑: शश॒यो यो म॑यो॒भूर्यो र॑त्न॒धा व॑सु॒विद्यः सु॒दत्र॑: ।येन॒ विश्वा॒ पुष्य॑सि॒ वार्या॑णि॒ सर॑स्वति॒ तमि॒ह धात॑वेऽकः । उ॒र्वन्तरि॑क्ष॒मन्वे॑मि

yaste stana: śaśayo yo mayobhūryo ratnadhā vasuvidyaḥ sudatra: | yena viśvā puṣyasi vāryāṇi sarasvati tamiha dhātave'kaḥ | urvantarikṣamanvemi

हिन्दी अर्थ

वेदाध्ययन से मनुष्य का जीवन वासनाओंं से बचता है, उसके अन्दर ँटकर खाने कौ वृत्ति उत्पन्न होती हे, ज्ञान बढता है ओर आनन्द का अनुभव होता है। आचार्य दयानन्द लिखते है कि प्रस्तुत मन्त्रों का विषय है “विवाह किये स्त्रीपुरुष क्या करे? ' प्रस्तुत मन्त्र मे पत्नी कहती है कि मैं १. समुद्राय सदा प्रसन्न रहनेवाले त्वा

English

That breast of thine, exhaustless, fount of pleasure, wealth-giver, treasure-finder, free-bestower, Wherewith thou rearest all things that are choicest,—bring that, Sarasvatî, that we may drain it. Throughout the spacious middle air I travel.

अध्याय ३८

श्लोक 6

गा॒य॒त्रं छन्दो॑ऽसि॒ त्रै॑ष्टुभं॒ छन्दो॑ऽसि॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्यां॑ त्वा॒ परि॑ गृह्णाम्य॒न्तरि॑क्षे॒णोप॑ यच्छामि ।इन्द्रा॑श्विना॒ मधु॑नः सार॒घस्य॑ घ॒र्मं पा॑त॒ वस॑वो॒ यज॑त॒ वाट् ।स्वाहा॒ सूर्य॑स्य र॒श्मये॑ वृष्टि॒वन॑ये

gāyatraṃ chando'si traiṣṭubhaṃ chando'si dyāvāpṛthivībhyāṃ tvā pari gṛhṇāmyantarikṣeṇopa yacchāmi | indrāśvinā madhunaḥ sāraghasya gharmaṃ pāta vasavo yajata vāṭ | svāhā sūryasya raśmaye vṛṣṭivanaye

हिन्दी अर्थ

हमारा जीवन नियमित हो जिससे हमारे एक-एक अङ्घ मेँ शक्ति के कारण १. पिछले मन्त्रं मे पति-पत्नी का उल्लेख हआ है। उन्हे इन मन्त्रो मे ' अश्विनो ' शब्द से स्मरण किया है। " अश्विनो" का अर्थ आचार्य ने ' सुशिक्षितौ स्त्रीपुरुषौ ' ओर ' भृगर्भविद्याविदौ स्त्रीपुरुषौ ' दिया हे। एेतरेय० १।९८। मेँ अश्विनो" अध्वर्यु" इन शब्दों मं स्पष्ट किया है कि

English

Thou art Gâyatra metre. Thou art Trishtup metre. With Heaven and Earth I grasp thee. With the Firmament I raise thee up. Indra and Asvins, drink ye the hot draught of sweet honey: sacrifice, ye Vasus. Vât! All-hail to the rain-winning beam of the Sun!

अध्याय ३८

श्लोक 7

स॒मु॒द्राय॑ त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑ सरि॒राय॑ त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑ ।अ॒ना॒धृ॒ष्याय॑ त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑ ऽप्रतिधृ॒ष्याय॑ त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑ ।अ॒व॒स्यवे॑ त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑ ऽशिमि॒दाय॑ त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑

samudrāya tvā vātāya svāhā sarirāya tvā vātāya svāhā | anādhṛṣyāya tvā vātāya svāhā 'pratidhṛṣyāya tvā vātāya svāhā | avasyave tvā vātāya svāhā 'śimidāya tvā vātāya svāhā

हिन्दी अर्थ

हम सदा सावधानी से कर्मो में लगे रहकर सोम का पान कररे। यह हमें हदयों का विजेता, स्वस्थ ओर बुद्धि व विद्या से सम्पन्न बनाएगा। ऋषि :--दीर्घतमाः। देवता-अश्िविनौ। छन्द: निचुदुष्णिक््। स्वरः-ऋषभः। १. अश्विना-कर्मो मे व्याप्त रहनेवाले पति-पत्नी घर्मम्-शरीर में शक्ति को बनाये

English

Thee with Svâhâ to Vâta the sea. Thee with Svâhâ to Vâta the flood. Thee with Svâhâ to Vâta the unconquerable. Thee with Svâhâ to Vâta the irresistible. Thee with Svâhâ to Vâta the protection-seeker. Thee with Svâhâ to Vâta the non-destructive.

अध्याय ३८

श्लोक 8

इन्द्रा॑य त्वा॒ वसु॑मते रु॒द्रव॑ते॒ स्वाहेन्द्रा॑य त्वाऽऽदि॒त्यव॑ते॒ स्वाहेन्द्रा॑य त्वाऽभिमाति॒घ्ने स्वाहा ।स॒वि॒त्रे त्व॑ ऋभु॒मते॑ विभु॒मते॒ वाज॑वते॒ स्वाहा॒ बृह॒स्पत॑ये त्वा वि॒श्वदे॑व्यावते॒ स्वाहा॑

indrāya tvā vasumate rudravate svāhendrāya tvā''dityavate svāhendrāya tvā'bhimātighne svāhā | savitre tva ṛbhumate vibhumate vājavate svāhā bṛhaspataye tvā viśvadevyāvate svāhā

हिन्दी अर्थ

हम शरीर मे सोम की रक्षा करें। यह सारे ब्रह्माण्ड को हमारे अनुकूल पिन्वस्व । धर्मासि सुधममिन्यस्मे नुम्णानिं धारय ब्रह्म॑ धारय कषत्रं धारय विषौ १. इषे=प्रेरणा के लिए पिन्वस्व (10 ५78€ ०) अपने को उत्साहित कर, अर्थात् तुद्धो प्रबल इच्छा हो कि भै प्रभु-प्रेरणा को सुननेवाला बनं २. ऊर्जे पिन्वस्व=-बल ओर

English

Thee with Svâhâ to Indra Lord of Vasus. Thee with Svâhâ to Indra Lord of Rudras. Thee with Svâhâ to Indra killer of foes. Thee with Svâhâ to Savitar attended by Ribhu, Vibhu, and Vâja. Thee with Svâhâ to Brihaspati beloved of all the Gods.

अध्याय ३८

श्लोक 9

य॒माय॒ त्वाऽङ्गि॑रस्वते पितृ॒मते॒ स्वाहा॑ ।स्वाहा॑ घ॒र्माय॒ स्वाहा॑ घ॒र्मः पि॒त्रे

yamāya tvā'ṅgirasvate pitṛmate svāhā | svāhā gharmāya svāhā gharmaḥ pitre

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु प्रेरणा को सुनकर, उस प्रेरणा को क्रिया मेँ परिणत करने की शक्तिवाले बने, ज्ञान-बल व धन तीनों का अपने में सुन्दर समन्वय करके अपने जीवन को स्वाहां पृष्णे शर॑से स्वाहा ग्राव॑भ्यः स्वाहां प्रतिरिवेभ्य॑ः। स्वाहां पितुभ्य॑ऽ ऊर्ध्वव॑रहिर्भ्यो घर्मपाव॑भ्यः स्वाहा दद्यावापृथिवीभ्याश स्वाहा विश्वेभ्यो देवेभ्यंः।। १५॥

English

Svâhâ to Yama attended by the Angirases, attended by the Fathers! Svâhâ to the Gharma! The Gharma for the Father!

अध्याय ३८

श्लोक 10

विश्वा॒ आशा॑ दक्षिण॒सद्विश्वा॑न् दे॒वानया॑डि॒ह ।स्वाहा॑कृतस्य घ॒र्मस्य॒ मधो॑: पिबतमश्विना

viśvā āśā dakṣiṇasadviśvān devānayāḍiha | svāhākṛtasya gharmasya madho: pibatamaśvinā

हिन्दी अर्थ

आचार्यो से ज्ञान प्राप्त करे। द्वितीय आश्रम में शक्ति की रक्षा के द्वारा, ब्रह्मचर्य-पालन के द्वारा उत्तम सन्तान को जन्म दे। तृतीयाश्रम मे शरीर व मस्तिष्क को पूर्णं स्वस्थ बनार्णं ओर चौथे आश्रम मेँ ज्ञान की दीप्ति को ओरों तक पर्ुचानेवाले बनें। प्रभु-स्तोताओं का सङ्क व प्रभु-प्राप्ति

English

Here hath he worshipped, seated south, all the sky-regions, all the Gods. Drink, Asvins, of the heated draught, the Svâhâ-consecrated mead.

अध्याय ३८

श्लोक 11

दि॒वि धा॑ इ॒मं य॒ज्ञमि॒मं य॒ज्ञं दि॒वि धा॑: ।स्वाहा॒ऽग्नये॑ य॒ज्ञिया॑य॒ शं यजु॑र्भ्यः

divi dhā imaṃ yajñamimaṃ yajñaṃ divi dhā: | svāhā'gnaye yajñiyāya śaṃ yajurbhyaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु-स्तोताओं के सद्धं में रहकर मै अपने ज्ञान को बदाऊँ ओर अन्ततः प्रभु का सङ्खी बनकर सव प्रकार के विनाश से ऊपर उट जाऊ असि रोच॑स्व देववीत॑मः। वि धूमम॑ग्नेऽअरूषं मियेन्द्य सृज प्र॑शस्त दर्शतम्।। ९७॥ १. इमं दिवम्इस प्रकाशमय जीवनवाले को अभिलक्ष्य करके महिमा-महनत्त्व

English

In heaven lay thou this sacrifice; lay thou this sacrifice in heaven. To sacrificial Agni hail! May bliss be ours from Yajus texts.

अध्याय ३८

श्लोक 12

अश्वि॑ना घ॒र्मं पा॑त॒ᳪ हार्द्वा॑न॒मह॑र्दि॒वाभि॑रू॒तिभि॑: ।तन्त्रा॒यिणे॒ नमो॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॑म्

aśvinā gharmaṃ pāta hārdvānamahardivābhirūtibhi: | tantrāyiṇe namo dyāvāpṛthivībhyām

हिन्दी अर्थ

हम अपने जीवन को उत्तम बनाकर लोकहित के दृष्टिकोण से बड़ी मधुरतापूर्वक ज्ञान के फैलानेवाले बने। पिछले मन्त्र मे महिमा कौ प्राप्ति का संकेत था। इस महिमा की प्राप्ति के लिए शरीर की त्रिलोकी का ठीक होना बड़ा आवश्यक है। उसके ठीक होने के लिए शरीर में

English

Drink, Asvins, with your daily helps, the Gharma, strengthener of hearts. To him who draweth out the thread be homage, and to Heaven and Earth.

अध्याय ३८

श्लोक 13

अपा॑ताम॒श्विना॑ घ॒र्ममनु॒ द्यावा॑पृथि॒वी अ॑मᳪसाताम् ।इहै॒व रा॒तय॑: सन्तु

apātāmaśvinā gharmamanu dyāvāpṛthivī amasātām | ihaiva rātaya: santu

हिन्दी अर्थ

राजा ज्ञानी व शक्तिशाली हो। प्रजा धर्म से राजा का अनुगमन करे। परिणामतः राष्ट में दुरित नहीं होते ओर प्रजाओं का जीवन स्तुत्य होता हे। १. ऋतस्य = ( ऋत यन्ञ-नि° ८।६) यज्ञ का नाभिः केन्द्र, अर्थात् यज्ञरूप केन्द्र चतुःस्रक्ति =' धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष इन चारों पुरुषार्थो को सिद्ध करनेवाला है। खक्ति"

English

The Gharma have the Asvins drunk: with Heaven and Earth have they agreed. Here, verily, be their boons bestowed.

अध्याय ३८

श्लोक 14

इ॒षे पि॑न्वस्वो॒र्जे पि॑न्वस्व॒ ब्रह्म॑णे पिन्वस्व क्ष॒त्राय॑ पिन्वस्व॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्यां॑ पिन्वस्व ।धर्मा॑सि सु॒धर्मामे॑न्य॒स्मे नृ॒म्णानि॑ धारय॒ ब्रह्म॑ धारय क्ष॒त्रं धा॑रय॒ विशं॑ धारय

iṣe pinvasvorje pinvasva brahmaṇe pinvasva kṣatrāya pinvasva dyāvāpṛthivībhyāṃ pinvasva | dharmāsi sudharmāmenyasme nṛmṇāni dhāraya brahma dhāraya kṣatraṃ dhāraya viśaṃ dhāraya

हिन्दी अर्थ

यज्ञ के निम्न लाभ है ९. इससे धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष चारो पुरुषार्थो कौ सिद्धि होती है। २. यह हमारी शवित्तयों का विस्तार करते हए शतायु बनाता है। ३. इससे हम शरीर, मन व मस्तिष्क तीनों के स्वास्थ्य को प्राप्त करके पूर्णं जीवनवाले होते है ४, हमसे द्वेष व कुटिलता दूर रहती है।

English

Overflow for food. Overflow for energy. Overflow for the Priesthood. Overflow for the Nobility. Overflow for Heaven and Earth. Thou, O duteous one, art Duty. Innocent one, in us establish manly powers; establish the People.

अध्याय ३८

श्लोक 15

स्वाहा॑ पू॒ष्णे शर॑से॒ स्वाहा॒ ग्राव॑भ्यः स्वाहा॑ प्रतिर॒वेभ्य॑: ।स्वाहा॑ पि॒तृभ्य॑ ऊ॒र्ध्वब॑र्हिर्भ्यो घर्म॒पाव॑भ्य॒: स्वाहा॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॒ᳪ स्वाहा॒ विश्वे॑भ्यो दे॒वेभ्य॑:

svāhā pūṣṇe śarase svāhā grāvabhyaḥ svāhā pratiravebhya: | svāhā pitṛbhya ūrdhvabarhirbhyo gharmapāvabhya: svāhā dyāvāpṛthivībhyā svāhā viśvebhyo devebhya:

हिन्दी अर्थ

हम शरीर मे सोम की रक्षा करे। इससे अपना वर्धन व आप्यायन करके हम ओरों का वर्धन करनेवाले बने। गतमन्त्र मै घर्म-रक्षा द्वारा अपना वर्धन करके ओसरो के हित में प्रवृत्त होने का उल्लेख ह। यह ओसरो के हित में प्रवृत होनेवाला व्यक्ति ९. अचिक्रदत्-शब्द करता है, ओरो को

English

All-hail to Pûshan, to the milk's skin! All-hail to the press-stones! All-hail to their echoes! All-hail to the Fathers who are above the grass, who drink the Gharma! All-hail to Heaven and Earth! All-hail to the All-Gods!

अध्याय ३८

श्लोक 16

स्वाहा॑ रु॒द्राय॑ रु॒द्रहू॑तये॒ स्वाहा॒ सं ज्योति॑षा॒ ज्योति॑: ।अह॑: के॒तुना॑ जुषताᳪ सु॒ज्योति॒र्ज्योति॑षा॒ स्वाहा॑ ।रात्रि॑: के॒तुना॑ जुषताᳪ सु॒ज्योति॒र्ज्योति॑षा॒ स्वाहा॑ ।मधु॑ हु॒तमिन्द्र॑तमे अ॒ग्नाव॒श्याम॑ ते देव॒ घर्म॒ नम॑स्ते अस्तु॒ मा मा॑ हिᳪसीः

svāhā rudrāya rudrahūtaye svāhā saṃ jyotiṣā jyoti: | aha: ketunā juṣatā sujyotirjyotiṣā svāhā | rātri: ketunā juṣatā sujyotirjyotiṣā svāhā | madhu hutamindratame agnāvaśyāma te deva gharma namaste astu mā mā hisīḥ

हिन्दी अर्थ

घर्म की रक्षा से स्वयं बदढकर ओरों को बद्धानेवाला "दीर्घतमा! स्लान का उपदेश करता है ओर इस प्रकार सबके दुःखों को दूर करने के लिए यत्नशील होता हे। ऋषि:--दीर्घतमाः। देवता-आपः। छन्दः-निचुदनुष्टुप्। स्वरः-गान्धारः। गतमन्त्र की भावना के अनुसार जब हम द्वेष व कुटिलता से दूर होकर् (२०) अपना

English

All-hail to Rudra invoked by worshippers! All-hail! Let light combine with light. May Day together with his sheen, fair-lighted with his light, accept. All hail! May Night together with her sheen, fair-lighted with her light, accept. All-hail! May we enjoy the mead offered in most Indra-like Agni. Homage to thee, divine Gharma! Do not thou injure me.

अध्याय ३८

श्लोक 17

अ॒भीमं म॑हि॒मा दिवं॒ विप्रो॑ बभूव स॒प्रथा॑: ।उ॒त श्रव॑सा पृथि॒वीᳪ सᳪ सी॑दस्व म॒हाँ२ अ॑सि॒ रोच॑स्व देव॒वीत॑मः

abhīmaṃ mahimā divaṃ vipro babhūva saprathā: | uta śravasā pṛthivī sa sīdasva mahā~2 asi rocasva devavītamaḥ

हिन्दी अर्थ

हम द्वेष की भावना से शून्य होकर सदा सबके हित की भावना से ओत-प्रोत मनवाले बनकर भोजन कररे। नि्द्रेष मनसे होनेवाला खान-पान हितकर परिणामवाला होता हे, तो द्वेषी मन भोजन को भी अहितकर कर देता है। उद्वयन्तम॑सस्परि स्वुः पश्य॑न्द्ऽ उन्त॑रम्। देवं देवत्रा सूर्यमग॑न्म ज्योक्तिरुत्तमम्॥ २४॥

English

Thy far-spread majesty, instinct with wisdom, hath surpassed this heaven, And, with its glorious fame, the earth. Seat thee, for thou art mighty: shine, best entertainer of the Gods. Worthy of sacred food, praised Agni! loose the smoke ruddy and beautiful to see.

अध्याय ३८

श्लोक 18

या ते॑ घर्म दि॒व्या शुग्या गा॑य॒त्र्याᳪ ह॑वि॒र्धाने॑ ।सा त॒ आ प्या॑यतां॒ निष्टया॑यतां॒ तस्यै॑ ते॒ स्वाहा॑ ।या ते॑ घर्मा॒न्तरि॑क्षे॒ शुग्या त्रि॒ष्टुभ्याग्नी॑ध्रे ।सा त॒ आ प्या॑यतां॒ निष्टया॑यतां॒ तस्यै॑ ते॒ स्वाहा॑ ।या ते॑ घर्म पृथि॒व्याᳪ शुग्या जग॑त्याᳪ सद॒स्या॒ ।सा त॒ आ प्या॑यतां॒ निष्टया॑यतां॒ तस्यै॑ ते॒ स्वाहा॑

yā te gharma divyā śugyā gāyatryā havirdhāne | sā ta ā pyāyatāṃ niṣṭayāyatāṃ tasyai te svāhā | yā te gharmāntarikṣe śugyā triṣṭubhyāgnīdhre | sā ta ā pyāyatāṃ niṣṭayāyatāṃ tasyai te svāhā | yā te gharma pṛthivyā śugyā jagatyā sadasyā | sā ta ā pyāyatāṃ niṣṭayāyatāṃ tasyai te svāhā

हिन्दी अर्थ

हम प्रकृति के सौन्दर्य को समञ्जते हुए, उसका यथायोग- उचित उपयोग करते हए, प्रकृति से ऊपर उटठे। उससे ऊपर उठकर आत्मस्वरूप का चिन्तन करे। आत्म-चिन्तन करते हुए हम उस सर्वोत्तम ज्योति देवों के भी देव परमात्मा का दर्शन करें। प्रभु के तेज क्रा धारण

English

Gharma, that heavenly light of thine in Gâyatrî, in the Soma-store,— May it increase and be confirmed for thee, that light. Gharma, that light of thine in air, in Trishtup, in the sacred hearth,— May it increase and be confirmed for thee, that light. Gharma, that light of thine on earth, in Jagatî, of the priest's shed,— May that increase and be confirmed for thee, that light.

अध्याय ३८

श्लोक 19

क्ष॒त्रस्य॑ त्वा प॒रस्पा॑य॒ ब्रह्म॑णस्त॒न्वं॒ पाहि ।विश॑स्त्वा॒ धर्म॑णा व॒यमनु॑ क्रामाम सुवि॒ताय॒ नव्य॑से

kṣatrasya tvā paraspāya brahmaṇastanvaṃ pāhi | viśastvā dharmaṇā vayamanu krāmāma suvitāya navyase

हिन्दी अर्थ

प्रभुभक्त वर्धमान, ज्ञानी व तेजस्वी बनता हे। दीर्घतमा कहता है कि यावती द्यावापृथिवी =जबतक ये द्युलोक ओर पृथिवीलोक है च ओर यावत्-जवबतक सप्त सिन्धवः सातो समुद्र वितस्थिरे-विशेषरूप से अपनी मर्यादा मे स्थित है तावन्तम्-उतने समय तक इन्द्र-हे परमैश्वर्यशाली प्रभो! ते ग्रहम् आपके

English

Thee for the sure protection of the Nobles. Guard thou from injury the Brahman's body. We follow thee in interest of the People, for the renewal of our peace and comfort.

अध्याय ३८

श्लोक 20

चतु॑: स्रक्ति॒र्नाभि॑रृ॒तस्य॑ स॒प्रथा॒: स नो॑ वि॒श्वायु॑: स॒प्रथा॒: स न: स॒र्वायु॑: स॒प्रथा॑: ।अप॒ द्वेषो॒ अप॒ ह्वरो॒ऽन्यव्र॑तस्य सश्चिम

catu: sraktirnābhirṛtasya saprathā: sa no viśvāyu: saprathā: sa na: sarvāyu: saprathā: | apa dveṣo apa hvaro'nyavratasya saścima

हिन्दी अर्थ

प्रभु-उपासक कौ आत्मशक्ति "दक्षता, कर्मसंकल्प, ज्ञान व तेज' से युक्त यह मन्त्र इस अध्याय का अन्तिम मन्त्र हे। इसमे मनुष्य अपने को समर्पण के लिए सन्नद्ध करता हे। शुद्ध सात्विक भोजन से जीवन को प्रारम्भ करता है, जिससे सात्विक मनवाला बनकर “अग्निह्त '= प्रभु-अर्पित' हो सके। यह कहता है कि १. पयसः = सर्वाङ्ग

English

Square, far-spread is the sacrifice's navel: it spreads for us wide, full of all existence, spreads wide for us full of complete existence. We turn against the hate and guiles of him who keeps an alien law.

अध्याय ३८

श्लोक 21

घर्मै॒तत्ते॒ पुरी॑षं॒ तेन॒ वर्ध॑स्व॒ चा च॑ प्यायस्व ।व॒र्धि॒षी॒महि॑ च व॒यमा च॑ प्यासिषीमहि

gharmaitatte purīṣaṃ tena vardhasva cā ca pyāyasva | vardhiṣīmahi ca vayamā ca pyāsiṣīmahi

हिन्दी अर्थ

उल्लिखित अर्थ से स्पष्ट है कि गोदूध शक्तिवर्धक है, नीरोगता देनेवाला हे, जितेन्द्रिय बनने में सहायक है, रक्षण कौ वृत्ति को बद्धानेवाला है, जीवन की प्रत्येक क्रिया मे माधुर्य को उपजाता है। इस दूध का सेवन करनेवाले हम उत्तम मनोवृतिवाले बनकर प्रभु के प्रति अपना अर्पण करनेवाले बनें। हम “ अग्निहुत' हो।

English

This, Gharma! is thy liquid store. Swell out and wax in strength thereby. May we too grow in strength and wax to greatness.

अध्याय ३८

श्लोक 22

अचि॑क्रद॒द्वृषा॒ हरि॑र्म॒हान्मि॒त्रो न॑ दर्श॒तः ।सᳪ सूर्ये॑ण दिद्युतदुद॒धिर्नि॒धिः

acikradadvṛṣā harirmahānmitro na darśataḥ | sa sūryeṇa didyutadudadhirnidhiḥ

हिन्दी अर्थ

हमारे जीवन के तीन सूत्र हों-हम ९. प्रभु कौ आज्ञा में २. प्रयत्न से ३. पोषण के ही लिए वस्तुओं का ग्रहण करे। इडऽ एह्यदिंतऽ एहि सर॑स्वत्येदिं । असावेह्यसावेद्यसावेहि।। २॥ संसार यात्रा का सुखमय बीतना बहुत कु पत्नी पर निर्भर करता हे। प्रस्तुत मन्त्र में

English

Loudly the tawny Stallion neighed, mighty, like Mitra fair to see. Together with the Sun the sea, the store shone out with flashing light.

अध्याय ३८

श्लोक 23

सु॒मि॒त्रि॒या न॒ आप॒ ओष॑धयः सन्तु दुर्मित्रि॒यास्तस्मै॑ सन्तु॒ योऽस्मान् द्वेष्टि॒ यं च॑ व॒यं द्वि॒ष्मः

sumitriyā na āpa oṣadhayaḥ santu durmitriyāstasmai santu yo'smān dveṣṭi yaṃ ca vayaṃ dviṣmaḥ

हिन्दी अर्थ

पति ' प्रसन्न-शान्त, न दबनेवाला, न दबानेवाला, वासनाओं से ऊपर उट कर्मो को कभी न छोड्नेवाला, वायु कौ भांति सदा क्रियाशील ' होना चाहिए। १. इन्द्राय जितेन्द्रिय वसुमते रुद्रवते त्वा= वसुमान् ओर रुद्रवान् आपके लिए स्वाहा मै अपना त्याग करती हं वसुमान् वह है जिसने अपने शरीर में उस--उस स्थान पर देवों

English

To us let Waters and let Plants be friendly; to him who hates us, whom we hate, unfriendly.

अध्याय ३८

श्लोक 24

उद्व॒यं तम॑स॒स्परि॒ स्व: पश्य॑न्त॒ उत्त॑रम् ।दे॒वं दे॑व॒त्रा सूर्य॒मग॑न्म॒ ज्योति॑रुत्त॒मम्

udvayaṃ tamasaspari sva: paśyanta uttaram | devaṃ devatrā sūryamaganma jyotiruttamam

हिन्दी अर्थ

पति जितेन्द्रिय, पूर्णं स्वस्थ, प्रभुभक्त, ज्ञान का आदान करनेवाला, निरभिमानी , धन का सत्य व पुरुषार्थ से अर्जन करनेवाला, उदार हदय, शक्तिशाली , ब्रह्मनिष्ठ व दिव्य १. यमायसव इन्द्रियों का नियमन करनेवाले अङ्कगिरस्वते=एक-एक अद्घ मे रसवाले पितृमते त्वाउत्तम पितृत्व की शक्तिवाले तेरे लिए स्वाहा=मै अपना समर्पण करती

English

Looking upon the loftier light above the darkness we have come To Sûrya, God among the Gods, the light that is most excellent.

अध्याय ३८

श्लोक 25

एधो॑ऽस्येधिषी॒महि॑ स॒मिद॑सि॒ तेजो॑ऽसि॒ तेजो॒ मयि॑ धेहि

edho'syedhiṣīmahi samidasi tejo'si tejo mayi dhehi

हिन्दी अर्थ

हम भोजन को भी यज्ञ का रूप दे दे। परिणामतः हम "दक्षिण ' बनेंगे. हमारी सभी आशा पूरी होगी, दिव्य गुणों से हमारा मेल होगा। दिवि धा॑ऽ डमं यज्ञमिमं यज्ञं दिवि धाः। स्वाहाग्नये यज्ञियाय शं यजुभ्यः॥ ९९॥ १. है प्रभो! दिवि=ज्ञान के प्रकाशवाले इस पुरुष में इमं यनज्ञम्-इस यज्ञ को धाः=

English

A brand art thou, fain would we thrive, Fuel art thou, and splendour: Give me splendour,

अध्याय ३८

श्लोक 26

याव॑ती॒ द्यावा॑पृथि॒वी याव॑च्च स॒प्त सिन्ध॑वो वितस्थि॒रे ।तव॑न्तमिन्द्र ते॒ ग्रह॑मू॒र्जा गृ॑ह्णा॒म्यक्षि॑तं॒ मयि॑ गृह्णा॒म्यक्षि॑तम्

yāvatī dyāvāpṛthivī yāvacca sapta sindhavo vitasthire | tavantamindra te grahamūrjā gṛhṇāmyakṣitaṃ mayi gṛhṇāmyakṣitam

हिन्दी अर्थ

हमारे जीवन मे ज्ञान व यज्ञ दोनों का सुन्दर समन्वय हो। हम यज्ञिय अग्नि के लिए अपना त्याग कररे। ' देवपूजा, संगतिकरण व दान ' रूप यज्ञ हमारे जीवन कौ शान्ति १. है अश्विना कर्मो मे शीघ्रता से व्यापनेवाले पति-पत्नियो। अहर्दिवाभिः ऊतिभिः दिनरात के रक्षणो से इस हा्द्वानम्-( हृदं वनति ५11८) ५15 111 1८1) हदय को

English

Far as the heaven and earth are spread in compass, far as the Seven Rivers are extended, So vast thy cup which I with strength am taking, Indra, unharmed in me, uninjured ever.

अध्याय ३८

श्लोक 27

मयि॒ त्यदि॑न्द्रि॒यं बृ॒हन्मयि॒ दक्षो॒ मयि॒ क्रतु॑: ।घ॒र्मस्त्रि॒शुग्वि रा॑जति वि॒राजा॒ ज्योति॑षा स॒ह ब्रह्म॑णा॒ तेज॑सा स॒ह

mayi tyadindriyaṃ bṛhanmayi dakṣo mayi kratu: | gharmastriśugvi rājati virājā jyotiṣā saha brahmaṇā tejasā saha

हिन्दी अर्थ

शरीर मे सोमपान के द्वारा १. हमारा मस्तिष्क ज्ञान से उज्ज्वल हो। हम यथोचित मार्ग पर चलते हए अपने प्राणों कौ रक्षा करें तथा यज्ञमय जीवनवाले हो। २. हमारे मन निर्मल हों, उसमें काम- क्रोध ओर लोभ कौ समाप्ति होकर परमेश्वर का प्रतिष्ठापन हो। ३. हमारे शरीर स्वस्थ व क्रियामय हों जिससे इस संसार मे हमारा निवास उत्तम हो।

English

In me be that great hero power, in me be strength and mental force: The Gharma shines with triple light, with lustre fulgent far away, with holy lore, with brilliancy.

अध्याय ३८

श्लोक 28

पय॑सो॒ रेत॒ आभृ॑तं॒ तस्य॒ दोह॑मशीम॒ह्युत्त॑रामुत्तरा॒ᳪ समा॑म् ।त्विष॑: सं॒वृक् क्रत्वे॒ दक्ष॑स्य ते सुषु॒म्णस्य॑ ते सुषुम्णाग्निहु॒तः ।इन्द्र॑पीतस्य प्र॒जाप॑तिभक्षितस्य॒ मधु॑मत॒ उप॑हूत॒ उप॑हूतस्य भक्षयामि

payaso reta ābhṛtaṃ tasya dohamaśīmahyuttarāmuttarā samām | tviṣa: saṃvṛk kratve dakṣasya te suṣumṇasya te suṣumṇāgnihutaḥ | indrapītasya prajāpatibhakṣitasya madhumata upahūta upahūtasya bhakṣayāmi

हिन्दी अर्थ

मै सतत साधना के द्वारा प्रभु को अपने अन्दर ग्रहण करूं, जिससे मुञ्े बल व प्राणशक्ति प्राप्त हो ओर भै क्षीणता से बच सकू। गतमन्त्र मेँ वर्णित प्रभु का ग्रहण भँ इसलिए करता हूँ कि १. मयिचमुञ्चमें त्यत् =उस प्रसिद्ध इन्द्रियम्=इन्द्र की शक्ति उत्पन्न होती हे। उपासना से इन्द्र की शक्ति का विकास

English

Brought hither is the seed of milk. Through each succeeding year may we enjoy the bliss of draining it. Invited, I enjoy a share of that which hath been offered me, the savoury draught by Indra drunk and tasted by Prajâpati.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 38
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.