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अध्याय 19 · धारणाओं से परे
अष्टावक्र गीता, श्लोक 19.6
समीक्षा आवश्यक
मूल संस्कृत
क्व दूरं क्व समीपं वा बाह्यं क्वाभ्यन्तरं क्व वा । क्व स्थूलं क्व च वा सूक्ष्मं स्वमहिम्नि स्थितस्य मे ॥ ६ ॥
IAST लिप्यंतरण
kva dūraṃ kva samīpaṃ vā bāhyaṃ kvābhyantaraṃ kva vā | kva sthūlaṃ kva ca vā sūkṣmaṃ svamahimni sthitasya me || 6 ||
पदच्छेद और प्रमुख शब्दार्थ
क्व, दूरम्, क्व, समीपम्, वा, बाह्यम्, क्व, आभ्यन्तरम्, क्व, वा, क्व, स्थूलम्, क्व, च, वा, सूक्ष्मम्, स्व-महिम्नि, स्थितस्य, मे
- क्व दूरम् क्व समीपम्
- दूर कहाँ, समीप कहाँ
- बाह्यम् क्व आभ्यन्तरम्
- बाहर कहाँ, भीतर कहाँ
- क्व स्थूलम् क्व सूक्ष्मम्
- स्थूल कहाँ, सूक्ष्म कहाँ
- स्व-महिम्नि स्थितस्य मे
- अपनी महिमा में स्थित मेरे लिए
शाब्दिक हिन्दी अर्थ
अपनी महिमा में स्थित मेरे लिए दूर और समीप कहाँ, बाहर और भीतर कहाँ, स्थूल और सूक्ष्म कहाँ?
पुस्तकानुसार हिन्दी भावार्थ
दूरी, दिशा और शरीर के मोटे-पतले नाम एक श्लोक में आते हैं। जनक स्थान के भेद को अपनी महिमा में नहीं पाते। इस श्लोक की टीका का पृष्ठ इस सत्र में फिर नहीं देखा गया।
सरल हिन्दी में समझें
कोई चीज़ दूर लगती है, कोई पास। कोई बात बाहर की लगती है, कोई भीतर की। शरीर स्थूल कहा जाता है और विचार सूक्ष्म।
जनक कहते हैं कि अपनी महिमा में ये भेद कहाँ ठहरते हैं।
शरीर की भूख, दूरी पर खड़े व्यक्ति की सुरक्षा, और पास बैठे व्यक्ति की देखभाल इस प्रश्न से नहीं मिटती।
गहरी दार्शनिक व्याख्या
1. दूर और समीप स्थान के दो छोर हैं। 2. बाह्य और आभ्यन्तर अनुभव को बाहर-भीतर बाँटते हैं। 3. स्थूल और सूक्ष्म शरीर और विचार की प्रचलित जोड़ी है। 4. तीनों जोड़े एक ही वाक्य में इसलिए हैं कि सभी माप हैं। 5. स्वमहिमन् इन मापों का केंद्र नहीं बनता। वह इनसे पूछता है। 6. माप छोड़ने का अर्थ सड़क, भूख या दूरी की उपेक्षा नहीं है।
आत्मा के शरीर तक सीमित न होने की पहचान का अर्थ स्वास्थ्य, सुरक्षा, विश्राम या आवश्यक उपचार की उपेक्षा को उचित ठहराना नहीं है। यह शिक्षा जगत् की स्वतंत्र और स्थायी सत्ता पर प्रश्न उठाती है; यह व्यावहारिक अनुभव को नकारती नहीं, और दुख की उपेक्षा करने की अनुमति नहीं देती।
उदाहरण से समझें: जैसे आकाश में पास का बादल और दूर का बादल दोनों बादल हैं, आकाश न पास होता है न दूर। यह उदाहरण श्लोक का शाब्दिक अनुवाद नहीं, बल्कि उसकी शिक्षा को समझाने का माध्यम है।
आज की जिंदगी से उदाहरण
कोई व्यक्ति दूर बैठे माता-पिता को फ़ोन करता है और पास की थाली भी देखता है। दूर-पास उसके प्रेम का माप नहीं रहता। (यह आधुनिक उदाहरण है, श्लोक का हिस्सा नहीं।)
आज की पीढ़ी के लिए संदेश: दूर और भीतर के शब्द उपयोग करें। शरीर की भूख और अपने लोगों की दूरी की उपेक्षा उन शब्दों से न करें।
सामान्य गलतफहमी
स्थूल कहाँ है, इसका अर्थ शरीर की थकान, भोजन या उपचार को न देखना नहीं है।
जीवन में प्रयोग, आत्मचिंतन और छोटा अभ्यास
जीवन में प्रयोग: आज एक दूर के व्यक्ति को एक संक्षिप्त समाचार दें और अपना एक भोजन समय पर लें। (दिन में)
आत्मचिंतन प्रश्न: क्या मैं भीतर और सूक्ष्म को श्रेष्ठ मानकर शरीर और पास बैठे लोगों को छोटा कर रहा हूँ?
छोटा अभ्यास: तीन मिनट बैठकर पैरों का भार महसूस करें। स्थूल को तुच्छ न कहें। फिर एक लंबी साँस छोड़ें।
एक पंक्ति में सार: अपनी महिमा में मेरे लिए दूर, समीप, बाहर, भीतर, स्थूल और सूक्ष्म कहाँ हैं?
English
Translation: Where are far and near, outer and inner, gross and subtle, for me established in my own majesty?
Simple explanation: Distance and the gross body are questioned as owners of identity. Hunger, care, and actual distance remain.
विषय और संबंधित श्लोक
- दूर-समीप
- बाह्य-आभ्यन्तर
- स्थूल-सूक्ष्म
- स्वमहिमन्
- श्लोक 19.5: क्व स्वप्नः क्व सुषुप्ति
- श्लोक 19.7: क्व मृत्युर्जीवितं वा
स्रोत और सत्यापन
समीक्षा आवश्यक
संपादकीय टिप्पणी: मूल श्लोक सार्वजनिक अष्टावक्रगीता के नवदश क्रम से। इस सत्र में पुस्तक का स्कैन नहीं देखा गया। समीक्षा आवश्यक।