अध्याय १०४
श्लोक 1
प्रासादलक्षणं ईश्वर उवाच वक्ष्ये प्रासादसामान्यलक्षणं ते शिखध्वज ।चतुर्भागीकृते क्षेत्रे भित्तेर्भागेन विस्तरात्
prāsādalakṣaṇaṃ īśvara uvāca vakṣye prāsādasāmānyalakṣaṇaṃ te śikhadhvaja / caturbhāgīkṛte kṣetre bhitterbhāgena vistarāt
हिन्दी अर्थ
गोबरके गोले, सरसों, दही और जल--इन सबके द्वारा उसके शरीरको मलकर क्षारोदक आदिके क्रमसे नमस्कारसहित विद्येश्वरोंके नाम-मन्तरोद्वारा पूर्वोक्त कलशोंके जलसे शिष्यको स्नान करावे और शिष्य मन-ही-मन यह धारणा करे कि “मुझे अमृतसे नहलाया जा रहा है'
English
The adytum should be one-seventh of this. The pedes¬ tal (should be) a quarter of its extent. The pedestal should occupy the central part of the ground divided into five parts.