Agni Purana· Agni Purāṇa
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अध्याय 119 / 381

Adhyaya 119

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अध्याय ११९

श्लोक 1

महाद्वीपादि अग्निर् उवाच लक्षयोजनविस्तारं जम्बूद्वीपं समावृतम् ।१ शक्तिमानृक्षपर्वत इति घ॥ , छ॥ च ।शुक्तिमानृक्षपर्वत इति ज॥ २ नव भेदा भवन्त्यस्येति झ॥ ३ शक्तिमत इति ख॥ , ग॥ , घ॥ , झ॥ च :प् २२ लक्ष्ययोजनमनेन क्षीरोदेन समन्ततः

mahādvīpādi agnir uvāca lakṣayojanavistāraṃ jambūdvīpaṃ samāvṛtam / 1 śaktimānṛkṣaparvata iti gha.. , cha.. ca / śuktimānṛkṣaparvata iti ja.. 2 nava bhedā bhavantyasyeti jha.. 3 śaktimata iti kha.. , ga.. , gha.. , jha.. ca :p 22 lakṣyayojanamanena kṣīrodena samantataḥ

हिन्दी अर्थ

“भद्र' नामक प्रासादमें वीथियोंके समान ही 'द्वारवीथी' होती है; केवल वीथीका अग्रभाग द्वारवीथीमें नहीं होता है। श्रीजय' नामक प्रासादमें जो द्वारवीथी होती है, उसमें वीथीका पृष्ठभाग नहीं होता है। वीथीके पार्श्रभागोंको द्वारवीथीमें कम कर दिया जाय, तो उससे

English

The Jambudvipa extends to a lakh of yojanas. It is sur¬ rounded by the K§iroda (ocean) measuring one lakh yojanas.

अध्याय ११९

श्लोक 2

संवेष्ट्य क्षारमुदधिं प्लक्षद्वीपस् तथा स्थितः(१) ।सप्त मेधातिथेः पुत्राः प्लक्षद्वीपेश्वरास् तथा

saṃveṣṭya kṣāramudadhiṃ plakṣadvīpas tathā sthitaḥ(1) / sapta medhātitheḥ putrāḥ plakṣadvīpeśvarās tathā

हिन्दी अर्थ

उपलक्षित प्रासादकी भी ' भद्र' संज्ञा ही होती है। गर्भके विस्तारकी ही भाँति वीथीका भी विस्तार होता है। कहीं-कहीं उसके आधे या चौथाई भागके बराबर भी होता है। वीथीके आधे मानसे

English

They are Stabhaya, l§iira, Sukhodaya, Ananda, Siva, K$ema and Dhruva after whom the countries are named.

अध्याय ११९

श्लोक 3

स्याच्छान्तभयः शिशिरः सुखोदय इतः परः ।आनन्दश् च शिवः क्षेमो ध्रुवस्तन्नामवर्षकं

syācchāntabhayaḥ śiśiraḥ sukhodaya itaḥ paraḥ / ānandaś ca śivaḥ kṣemo dhruvastannāmavarṣakaṃ

हिन्दी अर्थ

उपवीथी आदिका निर्माण करना चाहिए। वह एक, दो या तीन पुरोंसे युक्त होता है। अब अन्य साधारण गृहोंके विषयमें बताया जाता है; गृहका वैसा स्वरूप हो तो वह सबकी समस्त कामनाओंको पूर्ण करनेवाला होता है। वह क्रमशः एक, दो, तीन, चार और आठ शालाओंसे युक्त होता है। एक शालावाले गृहकी शाला दक्षिणभागमें बनती है और उसका दरवाजा उत्तरकी ओर होता है।

English

Gomedha, Candra, Narada, Dundubhi, Somaka, Su- mana and Vaibhraja are the boundary mountains. The inhabi¬ tants are good.

अध्याय ११९

श्लोक 4

मर्यादाशैलो गोमेधश् चन्द्रो नारददुन्द्भी ।सोमकः सुमनाः शैलो वैभ्राजास्तज्जनाः शुभाः

maryādāśailo gomedhaś candro nāradadundbhī / somakaḥ sumanāḥ śailo vaibhrājāstajjanāḥ śubhāḥ

हिन्दी अर्थ

यदि दो शालाएँ बनानी हों तो पश्चिम और पूर्वमें बनवाये और उनका द्वार आमने-सामने पूर्व- पश्चिमकी ओर रखे। चार शालाओंवाला गृह चार द्वरो और अलिन्दोंसे युक्त होनेके कारण सर्वतोमुख

English

There are seven principal rivers here. The inhabitants from Plaksa to Saka live for five thousand years and they adhere to righteous way of life adhering to the institutions of caste and stages of life.

अध्याय ११९

श्लोक 5

नद्यः प्रधानाः सप्तात्र प्लक्षाच्छाकान्तिकेषु च ।जीवनं पञ्चसास्रं धर्मो वर्णाश्रमात्मकः(२)

nadyaḥ pradhānāḥ saptātra plakṣācchākāntikeṣu ca / jīvanaṃ pañcasāsraṃ dharmo varṇāśramātmakaḥ(2)

हिन्दी अर्थ

होता है। वह गृहस्वामीके लिये कल्याणकारी है। पश्चिम दिशाकी ओर दो शालाएँ हों तो उस द्विशाल-गृहको “यमसूर्यक' कहा गया है। पूर्व तथा उत्तरकी ओर शालाएँ हों तो उस गृहकी “दण्ड' संज्ञा है तथा पूर्व-दक्षिणकी ओर दो शालाएँ हों तो वह गृह “वात' संज्ञक होता है। जिस तीन शालावाले गृहमें पूर्व दिशाकी ओर शाला न हो, उसे 'सुक्षेत्र' कहा गया है, वह

English

Vidruma, Hemalaila, Dyutimat, Puspavat, Kusesaya, Harisaila and Mandara are the boundary mountains.

अध्याय ११९

श्लोक 6

आर्यकाः कुरवश् चैव विविंशा भाविनश् च ते ।विप्राद्यास्तैश् च सोमो ऽर्च्यो द्विलक्षश्चाब्धिलक्षकः

āryakāḥ kuravaś caiva viviṃśā bhāvinaś ca te / viprādyāstaiś ca somo 'rcyo dvilakṣaścābdhilakṣakaḥ

हिन्दी अर्थ

बुद्धिदायक होता है

English

These are Damina]( Suiijah, Snebah and.Mandehfil

अध्याय ११९

श्लोक 7

मानेनेक्षुरसोदेन वृतो द्विगुणशाल्मलः ।वपुष्मतः सप्त पुत्राः शाल्मलेशास् तथाभवन्

mānenekṣurasodena vṛto dviguṇaśālmalaḥ / vapuṣmataḥ sapta putrāḥ śālmaleśās tathābhavan

हिन्दी अर्थ

यदि दक्षिण दिशामें कोई शाला न हो (और मत्स्यपुराणमें एकशाल, द्विशाल, त्रिशाल और चतुःशाल-गृहका परिचय इस प्रकार दिया है-जिसमें एक दिशामें एक ही

English

Surrounded by sugarcane-juice ocean by measure, twice as large is Shalmali; Vapushmat's seven sons became lords of Shalmali.

अध्याय ११९

श्लोक 8

श्वेतो ऽथ हरितश् चैव जीमूतो लोहितः क्रमात् ।वैद्युतो मानसश् चैव सुप्रभो नाम वर्षकः

śveto 'tha haritaś caiva jīmūto lohitaḥ kramāt / vaidyuto mānasaś caiva suprabho nāma varṣakaḥ

हिन्दी अर्थ

शाला (कमरा) हो और अन्य दिशाओंमें कोई कमरा न होकर बरामदा मात्र हो, वह 'एकशाल-गृह' है। इसी तरह दो दिशाओंमें दो कमरे और तीन दिशाओंमें तीन कमरे तथा चारों दिशाओमें चार कमरे होनेपर उन घरोंको क्रमशः 'द्विशाल', 'त्रिशाल' और ' चतुःशाल' कहते हैं। चतुःशाल-गृहमें चारों ओर कमरे एवं चारों ओर दरवाजे होते हैं और वे द्वार आमने-सामने बने होते हैं। अत: वह सर्वतोमुखगृह है और उसका नाम 'सर्वतोभद्र' है। यह देवालय तथा नृपालय दोनोंमें शुभ होता है । पश्चिममें द्वार न हो (और अन्य तीन

English

Shveta, Harita, Jimuta, Lohita in order, Vaidyuta, Manasa and Suprabha were named the regions.

अध्याय ११९

श्लोक 9

द्विगुणो द्विगुणेनैव सुरोदेन समावृतः ।कुमुदश्चानलश् चैव(३) तृतीयस्तु वलाहकः

dviguṇo dviguṇenaiva surodena samāvṛtaḥ / kumudaścānalaś caiva(3) tṛtīyastu valāhakaḥ

हिन्दी अर्थ

दिशाओंमें हो) तो उस गृहका विशेष नाम है--' नन्द्यावर्त ' । यदि दक्षिण दिशामें ही द्वार हो तो उस भवनका नाम है-- वर्धमान ' । पूर्व- अन्य दिशाओंमें हो) तो उस घरकी 'विशाल' संज्ञा है । वह कुलक्षयकारी तथा अत्यन्त भयदायक होता है। जिसमें पश्चिम दिशामें ही शाला न बनी हो, उस विशाल गृहको 'पक्षघ्न' कहते हैं। वह

English

Twice as large, surrounded by a sea of liquor likewise twice; Kumuda, Anala, and third Valahaka,

अध्याय ११९

श्लोक 10

द्रोणः कंको ऽथ(४) महिषः ककुद्मान् सप्त निम्नगाः ।कपिलाश्चारुणाः पीताः कृष्णाःस्युर्ब्राह्मणादयः

droṇaḥ kaṃko 'tha(4) mahiṣaḥ kakudmān sapta nimnagāḥ / kapilāścāruṇāḥ pītāḥ kṛṣṇāḥsyurbrāhmaṇādayaḥ

हिन्दी अर्थ

पुत्र-हानिकारक तथा बहुत-से शत्रुओंका उत्पादक होता है। अब मैं पूर्वादि दिशाओंके क्रमसे 'ध्वज' आदि आठ गृहोंका वर्णन करता हूँ।

English

Drona, Kanka, then Mahisha, Kakudman — seven rivers; Kapila, Aruna, Pita, Krishna — the Brahmins and others.

अध्याय ११९

श्लोक 11

वायुरूपं यजन्ति स्म सुरोदेनायमावृतः(५) ।१ द्वीपस् तथा स्मृत इति झ॥ २ वर्णाश्रमात्मज इति ख॥ , घ॥ , ज॥ च ३ कुमुदश्चोन्नतश् चैवेति ख॥ , ग॥ , घ॥ , ङ॥ च ४ कर्को ऽथेति क॥ ५ सुरोदेन समावृत इति घ॥ :प् २३ ज्योतिष्मतः कुशेशाः स्युरुद्गिजो धेनुमान् सुतः

vāyurūpaṃ yajanti sma surodenāyamāvṛtaḥ(5) / 1 dvīpas tathā smṛta iti jha.. 2 varṇāśramātmaja iti kha.. , gha.. , ja.. ca 3 kumudaśconnataś caiveti kha.. , ga.. , gha.. , ṅa.. ca 4 karko 'theti ka.. 5 surodena samāvṛta iti gha.. :p 23 jyotiṣmataḥ kuśeśāḥ syurudgijo dhenumān sutaḥ

हिन्दी अर्थ

हाथी और काक-ये ही आठोंके नाम हैं।) पूर्व-दिशामें स्नान और अनुग्रह (लोगोंसे कृपापूर्वक मिलने)-के लिये घर बनावे। अग्निकोणमें उसका रसोईघर होना चाहिए। दक्षिण दिशामें रस-क्रिया तथा शय्या (शयन)-के लिये घर बनाना चाहिए। नै्ऋत्यकोणमें शस्त्रागार रहे । पश्चिम दिशामें धन- रत्न आदिके लिये कोषागार रखे। वायव्यकोणमें सम्यक् अन्नागार स्थापित करे। उत्तर दिशामें धन

English

They worshipped the form of Vayu; this is surrounded by the liquor sea. Jyotishmat's sons were lords of Kusha: Udbhija, Dhenuman,

अध्याय ११९

श्लोक 12

द्वैरथो लंवनो धैर्यः कपिलश् च प्रभाकरः ।विप्राद्या दधिमुख्यास्तु ब्रह्मरूपं यजन्ति ते

dvairatho laṃvano dhairyaḥ kapilaś ca prabhākaraḥ / viprādyā dadhimukhyāstu brahmarūpaṃ yajanti te

हिन्दी अर्थ

और पशुओंको रखे तथा ईशानकोणमें दीक्षाके लिये उत्तम भवन बनवावे। गृहस्वामीके हाथसे नापे हुए गृहका जो पिण्ड है, उसकी लंबाई- चौड़ाईके हस्तमानको तिगुना करके उसमें आठ-

English

Dvairatha, Lamvana, Dhairya, Kapila and Prabhakara; the Brahmins and others with Dadhimukhya worship the form of Brahma.

अध्याय ११९

श्लोक 13

विद्रुमो(१) हेमशैलश् च द्युतिमान् पुष्पवांस् तथा ।कुशेशयो हरिः शैलो वर्षार्थं मन्दराचलः

vidrumo(1) hemaśailaś ca dyutimān puṣpavāṃs tathā / kuśeśayo hariḥ śailo varṣārthaṃ mandarācalaḥ

हिन्दी अर्थ

से भाग दे। उस भागका जो शेष हो, तदनुसार यह ध्वज आदि आय स्थित होता है। उसीसे ध्वजादि-काकान्त आयका ज्ञान होता है। दो, उसके अनुसार शुभाशुभ फल हो। यदि मध्य (पाँचवें) और अन्तिम (काक)-में गृहको स्थिति हुई तो वह गृह सर्वनाशकारी होता है। इसलिये आठ भागोंको छोड़कर नवम भागमें बना हुआ

English

Vidruma, Hemashaila, Dyutiman, Pushpavan; Kusheshaya, Hari, Shaila, and for rains the Mandara mountain.

अध्याय ११९

श्लोक 14

वेष्टितो ऽयं घृतोदेन क्रौञ्चद्वीपेन सो ऽप्यथ ।क्रौञ्चेश्वराः द्युतिमतः पुत्रास्तन्नामवर्षकाः

veṣṭito 'yaṃ ghṛtodena krauñcadvīpena so 'pyatha / krauñceśvarāḥ dyutimataḥ putrāstannāmavarṣakāḥ

हिन्दी अर्थ

गृह शुभकारक होता है। उस नवम भागमें ही मण्डप उत्तम माना गया है। उसकी लंबाई- चौड़ाई बराबर रहे अथवा चौड़ाईसे लंबाई दुगुनी

English

This is surrounded by a ghee ocean and by Krauncha island; the lords of Krauncha are Dyutimat's sons, regions named for them:

अध्याय ११९

श्लोक 15

कुशलो मनोनुगश्चोष्णः प्रधानो ऽथान्धकारकः ।मुनिश् च दुन्दुभिः सप्त सप्त शैलाश् च निम्नगाः(२)

kuśalo manonugaścoṣṇaḥ pradhāno 'thāndhakārakaḥ / muniś ca dundubhiḥ sapta sapta śailāś ca nimnagāḥ(2)

हिन्दी अर्थ

पूर्वसे पश्चिमकी ओर तथा उत्तरसे दक्षिणकी ओर बाजारमें ही गृहपङ्कि देखी जाती है। एक- एक भवनके लिये प्रत्येक दिशामें आठ-आठ द्वार हो सकते हैं। इन आठौं द्वारोंके क्रमशः फल भी पृथक्-पृथक् कहे जाते हैं। भय, नारीको चपलता, जय, वृद्धि, प्रताप, धर्म, कलह तथा निर्धनता-- ये पूर्ववर्ती आठ द्वारोंक अवश्यम्भावी फल हैं।

English

Kushala, Manonuga, Ushna, Pradhana, Andhakaraka, Muni and Dundubhi — seven and seven mountains and rivers.

अध्याय ११९

श्लोक 16

क्रौञ्चश् च वाम्नश् चैव तृतीयश्चान्धकारकः(३) ।देववृत् पुण्डरीकश् च दुन्दुभिर्द्विगुणो मिथः

krauñcaś ca vāmnaś caiva tṛtīyaścāndhakārakaḥ(3) / devavṛt puṇḍarīkaś ca dundubhirdviguṇo mithaḥ

हिन्दी अर्थ

दवारसे रहित होनेपर उसका नाम 'स्वस्तिक' होता है और उत्तर द्वारसे रहित होनेपर 'रुचक'। जब किसी एक दिशामें शाला (कमरा) ही न हो तो बह “त्रिशाल-गृह' है। इसके भी कई भेद हैं। जिस मकानके भीतर उत्तर दिशामें कोई शाला न हो, वह त्रिशाल-गृह “ धान्यक' कहलाता है। वह मनुष्योंके लिये क्षेमकारक, वृद्धिकारक तथा बहुपुत्र-फलदायक होता है। यदि पूर्व-दिशामें शाला न हो तो उस त्रिशाल-गृहको ' सुक्षेत्र' कहते हैं। यह धन, यश और आयुको देनेवाला तथा शोक और मोहका नाश करनेवाला होता है। यदि

English

Krauncha, Vamana, and third Andhakaraka, Devavrit, Pundarika and Dundubhi, each twice the other.

अध्याय ११९

श्लोक 17

द्वीपा द्वीपेषु ये शैला यथा द्वीपानि ते तथा ।पुष्कराः पुष्कला धन्यास्तीर्था(४) विप्रादयो हरिम्

dvīpā dvīpeṣu ye śailā yathā dvīpāni te tathā / puṣkarāḥ puṣkalā dhanyāstīrthā(4) viprādayo harim

हिन्दी अर्थ

दक्षिण-दिशामें शाला न हो तो उसको 'विशाल' कहा गया है। वह मनुष्योंके लिये कुलक्षयकारी होता है तथा उसमें सब प्रकारके रोगोंका भय बना रहता है। यदि पश्चिम-दिशामें कोई शाला न हो तो उस त्रिशाल-गृहको 'पक्षघ्न' कहते हैं। वह मित्र, भाई-बन्धु तथा पुत्रोंका मारक होता है और उसमें सब प्रकारके भय प्राप्त होते रहते हैं। अब द्विशाल-घरका फल बताते हैं-दक्षिण-पश्चिम दिशाओंमें ही दो शालाएँ हों (और अन्य दो दिशाओंमें न हों) तो वह द्विशाल-गृह, धन-धान्यफलदायक, मानवोंके क्षेमकी वृद्धि करनेवाला तथा पुत्ररूप फल देनेवाला है। यदि केवल पश्चिम और उत्तर दिशाओंमें ही दो शालाएँ हों तो उस गृहको “यमसूर्य' कहते हैं। वह राजा और अग्निका भय देनेवाला है तथा मनुष्योंके कुलका संहार करनेवाला होता है। यदि उत्तर और पूर्वमें ही दो शालाएँ हों तो उस गृहका नाम 'दण्ड' है। जहाँ “दण्ड' हो, वहाँ अकाल-मृत्युका भय

English

The islands, and the mountains in the islands, as the islands so those; the Brahmins and others worship Hari at Pushkara, Pushkala and Dhanya sacred places;

अध्याय ११९

श्लोक 18

यजन्ति क्रौञ्चद्वीपस्तु दधिमण्डोदकावृतः ।संवृतः शाकद्वीपेन हव्याच्छाकेश्वराः सुताः

yajanti krauñcadvīpastu dadhimaṇḍodakāvṛtaḥ / saṃvṛtaḥ śākadvīpena havyācchākeśvarāḥ sutāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रास होता है तथा शत्रुओंकी ओरसे भी भयकी प्राप्ति होती है। पूर्व और दक्षिण दिशाओंमें ही शाला होनेसे जो द्विशाल-गृह निर्मित हुआ है, उसकी ' धन' या ' बात' संज्ञा है। वह शस्त्रभय तथा पराभव देनेवाला होता है । पूर्व-पश्चिममें दो शालाएँ हों तो उसको ' चुल्ली ' संज्ञा है। वह मृत्युकी सूचक है । वह गृह स्त्रियोंके लिये वैधव्यकारक तथा अनेक भयदायक है । उत्तर-दक्षिणमें ही दो शालाएँ हों तो वह भी मनुष्यके लिये भयदायक है । (द्रष्टव्य अध्याय २५४ के श्लोक सं० १ से १३ तक।)

English

Krauncha island is surrounded by a curd-whey ocean; surrounded by Shaka island, whose lords of Shaka are the sons of Havya:

अध्याय ११९

श्लोक 19

जलदश् च कुमारश् च सुकुमारो मणीवकः ।कुशोत्तरथो मोदाकी द्रुमस्तन्नामवर्षकाः

jaladaś ca kumāraś ca sukumāro maṇīvakaḥ / kuśottaratho modākī drumastannāmavarṣakāḥ

हिन्दी अर्थ

अपराजितपृच्छा (विश्वकर्म-शास्त्र ६४ वें सूत्र)-के अनुसार पूर्वादि दिशाओंमें प्रदक्षिणक्रमसे रहनेवाले ध्वज आदिका उल्लेख इस प्रकार मिलता है-- तथा पुत्रकी प्रापि-ये दक्षिण दिशाके आठ द्वारोंके पश्चिम द्वारके फल हैं। रोग, मद, आर्ति, मुख्यता, फल हैं। आयु, संन्यास, सस्य, धन, शान्ति, अर्थ, आयु, कृशता और मान--ये क्रमश: उत्तर अर्थनाश, शोषण, भोग एवं संतानकी प्राप्ति--ये दिशाके द्वारके फल हैं॥ ३४--३८॥

English

Jalada and Kumara, Sukumara, Manivaka, Kushottara, Modaki, Druma — regions named for them.

अध्याय ११९

श्लोक 20

उदयाख्यो जलधरो रैवतः श्यामकोद्रकौ ।आम्विकेयस् तथा रम्यः केशरी सप्त निम्नगाः

udayākhyo jaladharo raivataḥ śyāmakodrakau / āmvikeyas tathā ramyaḥ keśarī sapta nimnagāḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें “नगरगृह आदिकी वास्तु-प्रतिडा-विधिका वर्णन” नामक एक सौ पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

Udaya, Jaladhara, Raivata, Shyamaka, Kodraka, Ambikeya, Ramya, Keshari — seven rivers.

अध्याय ११९

श्लोक 21

१ रुद्राभ इति क॥ ।विक्रम इति ख॥ , छ॥ च २ कुशल इत्य् आदिः, निम्नगा इत्य् अन्तः पाठो झ॥ पुस्तके नास्ति ३ तृतीयश्चानुकारक इति घ॥ , झ॥ च ४ पुष्कलावत्यां तीर्था इति घ॥ :प् २४ मगा मगधमनस्या(१) मन्दगाश् च द्विजातयः(२) ।यजन्ति सूर्यरूपं तु(३) शाकः क्षीराब्धिना वृतः

1 rudrābha iti ka.. / vikrama iti kha.. , cha.. ca 2 kuśala ity ādiḥ, nimnagā ity antaḥ pāṭho jha.. pustake nāsti 3 tṛtīyaścānukāraka iti gha.. , jha.. ca 4 puṣkalāvatyāṃ tīrthā iti gha.. :p 24 magā magadhamanasyā(1) mandagāś ca dvijātayaḥ(2) / yajanti sūryarūpaṃ tu(3) śākaḥ kṣīrābdhinā vṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

नगर आदिके वास्तुका वर्णन भगवान् महेश्वर कहते हैं-- कार्तिकेय! अब मैं राज्यादिकी अभिवृद्धिके लिये नगर-वास्तुका वर्णन करता हूँ। नगर-निर्माणके लिये एक योजन या आधी योजन भूमि ग्रहण करे। वास्तु-नगरका

English

The Magas, Magadhas, Manasyas and Mandagas, twice-born, worship the form of the Sun; Shaka is surrounded by the milk ocean.

अध्याय ११९

श्लोक 22

पुष्करेणावृतः सो ऽपि द्वौ पुत्रौ सवनस्य च ।मसावीतो धातकिश् च वर्षे द्वे नामचिह्निते(४)

puṣkareṇāvṛtaḥ so 'pi dvau putrau savanasya ca / masāvīto dhātakiś ca varṣe dve nāmacihnite(4)

हिन्दी अर्थ

पूजन करके उसको प्राकारसे संयुक्त करे। ईशादि तीस पदोंमें सूर्यके सम्मुख पूर्वद्वार, गन्धर्वके समीप दक्षिणद्वार, वरुणके निकट पश्चिमद्वार और सोमके समीप उत्तरद्वार बनाना चाहिए। नगरमें

English

Surrounded by Pushkara, there are two sons of Savana: Masavita and Dhataki, two regions marked with names.

अध्याय ११९

श्लोक 23

एको ऽद्रिर्मानसाख्यो ऽत्र मध्यतो वलयाकृतिः ।योजनानां सहस्राणि विस्तारोच्छ्रायतः समः

eko 'drirmānasākhyo 'tra madhyato valayākṛtiḥ / yojanānāṃ sahasrāṇi vistārocchrāyataḥ samaḥ

हिन्दी अर्थ

चौड़े-चौड़े बाजार बनाने चाहिए। नगरद्वार छः हाथ चौड़ा बनाना चाहिए, जिससे हाथी आदि सुखपूर्वक आ-जा सकें। नगर छिन्नकर्ण, भग्न तथा अर्धचन्द्राकार नहीं होना चाहिए। वज्र- सूचीमुख नगर भी हितकर नहीं है। एक, दो या तीन द्वारोंसे युक्त धनुषाकार वञ्रनागाभ नगरका निर्माण शान्तिप्रद है

English

One mountain called Manasa is here in the middle, ring-shaped; thousands of yojanas in breadth and height equal;

अध्याय ११९

श्लोक 24

जीवनं दशसाहस्रं सुरैर् ब्रह्मात्र पूज्यते ।स्वादूदकेनोदधिना वेष्टितो द्वीपमानतः

jīvanaṃ daśasāhasraṃ surair brahmātra pūjyate / svādūdakenodadhinā veṣṭito dvīpamānataḥ

हिन्दी अर्थ

नगरके आग्नेयकोणमें स्वर्णकारोंको बसावे, दक्षिण दिशामें नृत्योपजीविनी वाराङ्गनाओंके भवन हों। नैऋत्यकोणमें नट, कुम्भकार तथा केवट आदिके आवास-स्थान होने चाहिए। पश्चिममें

English

life ten thousand years; Brahma is worshipped here by the gods. Surrounded by the sweet-water sea by measure of the island;

अध्याय ११९

श्लोक 25

ऊनातिरिक्तता चापां समुद्रेषु न जायते ।उदयास्तमनेष्विन्दोः पक्षयोः शुक्लकृष्णयोः

ūnātiriktatā cāpāṃ samudreṣu na jāyate / udayāstamaneṣvindoḥ pakṣayoḥ śuklakṛṣṇayoḥ

हिन्दी अर्थ

रथकार, आयुधकार और खड्ग-निर्माताओंका निवास हो। नगरके वायव्यकोणमें मद्य-विक्रेता, कर्मकार तथा भूत्योंका निवेश करे। उत्तर दिशामें ब्राह्मण, यति, सिद्ध और पुण्यात्मा पुरुषोंको बसावे ईशानकोणमें फलादिका विक्रय करनेवाले एवं वणिग्-जन निवास करें। पूर्व दिशामें सेनाध्यक्ष

English

in the oceans no deficiency or excess of water arises. At the rising and setting of the moon, in the bright and dark fortnights,

अध्याय ११९

श्लोक 26

दशोत्तराणि पञ्चैव(५) अङ्गुलानां शतानि वै ।अपां वृद्धिक्षयौ दृष्टौ सामुद्रीणां(६) महामुने

daśottarāṇi pañcaiva(5) aṅgulānāṃ śatāni vai / apāṃ vṛddhikṣayau dṛṣṭau sāmudrīṇāṃ(6) mahāmune

हिन्दी अर्थ

रहें। आग्नेयकोणमें विविध सैन्य, दक्षिणमें स्त्रियोंको ललित कलाको शिक्षा देनेवाले आचायाँ तथा नै्ऋत्यकोणमें धनुर्धर सैनिकोंको रखे। पश्चिममें महामात्य, कोषपाल एवं कारीगरोंको, उत्तरमें

English

five hundred and ten fingers, the increase and decrease of the oceans' waters is seen, O great sage.

अध्याय ११९

श्लोक 27

स्वादूदका बहुगुणा(७) भूर्हैमी जन्तुवर्जिता ।लोकालोकस्ततः शैलो योजनायुतविस्तृतः

svādūdakā bahuguṇā(7) bhūrhaimī jantuvarjitā / lokālokastataḥ śailo yojanāyutavistṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

दण्डाधिकारी, नायक तथा द्विजोंको; पूर्वमें क्षत्रियोंको, दक्षिणमें वैश्योंको, पश्चिममें शूद्रोंको, विभिन्न दिशाओंमें वैद्योंको और अश्रों तथा सेनाको चारों ओर रखे राजा पूर्वमें गुप्तचरों, दक्षिणमें श्मशान, पश्चिममें गोधन और उत्तरमें कृषकोंका निवेश करे। म्लेच्छोंको दिक्कोणोंमें स्थान दे अथवा ग्रामोंमें स्थापित करे। पूर्वद्वारपर लक्ष्मी एवं कुबेरकी

English

Sweet-watered, of many qualities, a golden land free of creatures; then the Lokaloka mountain, extending ten thousand yojanas.

अध्याय ११९

श्लोक 28

लोकालोकस्तु तमसावृतो ऽथाण्डकटाहतः ।भूमिः साण्डकटाहेन पञ्चाशत्कोटिविस्तरा(८)

lokālokastu tamasāvṛto 'thāṇḍakaṭāhataḥ / bhūmiḥ sāṇḍakaṭāhena pañcāśatkoṭivistarā(8)

हिन्दी अर्थ

स्थापना करे। जो उन दोनोंका दर्शन करते है, उन्हें लक्ष्मी (सम्पत्ति)-की प्राप्ति होती है। पश्चिममें निर्मित देवमन्दिर पूर्वाभिमुख, पूर्व दिशामें स्थित पश्चिमाभिमुख तथा दक्षिण दिशाके

English

Lokaloka is covered with darkness; then the shell of the egg; the earth with the egg-shell is fifty crores in extent.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 119
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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