अध्याय ११९
श्लोक 1
महाद्वीपादि अग्निर् उवाच लक्षयोजनविस्तारं जम्बूद्वीपं समावृतम् ।१ शक्तिमानृक्षपर्वत इति घ॥ , छ॥ च ।शुक्तिमानृक्षपर्वत इति ज॥ २ नव भेदा भवन्त्यस्येति झ॥ ३ शक्तिमत इति ख॥ , ग॥ , घ॥ , झ॥ च :प् २२ लक्ष्ययोजनमनेन क्षीरोदेन समन्ततः
mahādvīpādi agnir uvāca lakṣayojanavistāraṃ jambūdvīpaṃ samāvṛtam / 1 śaktimānṛkṣaparvata iti gha.. , cha.. ca / śuktimānṛkṣaparvata iti ja.. 2 nava bhedā bhavantyasyeti jha.. 3 śaktimata iti kha.. , ga.. , gha.. , jha.. ca :p 22 lakṣyayojanamanena kṣīrodena samantataḥ
हिन्दी अर्थ
“भद्र' नामक प्रासादमें वीथियोंके समान ही 'द्वारवीथी' होती है; केवल वीथीका अग्रभाग द्वारवीथीमें नहीं होता है। श्रीजय' नामक प्रासादमें जो द्वारवीथी होती है, उसमें वीथीका पृष्ठभाग नहीं होता है। वीथीके पार्श्रभागोंको द्वारवीथीमें कम कर दिया जाय, तो उससे
English
The Jambudvipa extends to a lakh of yojanas. It is sur¬ rounded by the K§iroda (ocean) measuring one lakh yojanas.