अध्याय १२६
श्लोक 1
नक्षत्रनिर्णयः ईश्वर उवाच वक्ष्याम्यृक्षात्मकं पिण्डं शुभाशुभविबुद्धये ।यस्मिन्नृक्षे भवेत् सूर्यस्तदादौ त्रीणि मूर्धनि(१)
nakṣatranirṇayaḥ īśvara uvāca vakṣyāmyṛkṣātmakaṃ piṇḍaṃ śubhāśubhavibuddhaye / yasminnṛkṣe bhavet sūryastadādau trīṇi mūrdhani(1)
हिन्दी अर्थ
त्रयोदशीको श्राद्ध करनेसे अपनी जातिमें श्रेष्ठता प्राप्त होती है। चतुर्दशीको उसीका श्राद्ध किया जाता है, जिसका शस्त्रद्वारा वध हुआ है। अमावास्याको सम्पूर्ण मृत व्यक्तियोंके लिये श्राद्ध “जो दशार्णदेशके वनमें सात व्याध थे, वे कालंजर गिरिपर मृग हुए, शरद्वीपमें चक्रवाक हुए तथा मानस सरोवरमें हंस हुए। वे ही अब कुरुक्षेत्रमें वेदोंके पारंगत विद्वान् ब्राह्मण हुए हैं।
English
The presence of the natal star on the head or at the face indicates acquisition of kingdom. (Its location) on the eyes (indicates) fortune and lustre. (Its location) at the heart (indi¬ cates) acquisition of wealth.