अध्याय १२७
श्लोक 1
नानाबलानि ईश्वर उवाच(२) विष्कुम्भे घटिकास्तिस्रः शूले पञ्च विवर्जयेत्(३) ।षट् षट्(४) गण्डे ऽनिगण्डे च नव व्याद्यातवज्रयोः
nānābalāni īśvara uvāca(2) viṣkumbhe ghaṭikāstisraḥ śūle pañca vivarjayet(3) / ṣaṭ ṣaṭ(4) gaṇḍe 'nigaṇḍe ca nava vyādyātavajrayoḥ
हिन्दी अर्थ
उदयगिरि, जलधर, रैवत, श्याम, कोद्रक, आम्बिकेय और सुरम्य पर्वत केसरी-ये सात वहाँके मर्यादापर्वत हैं तथा सात ही वहाँकी प्रसिद्ध नदियाँ हैं । मग, मगध, मानस्य और मन्दग--ये वहाँके ब्राह्मण आदि वर्ण हैं, जो सूर्यरूपधारी भगवान् नारायणकी आराधना करते हैं। शाकद्वीप क्षीरसागरसे घिरा हुआ है। क्षीरसागर पुष्करद्वीपसे परिवेष्टित है। वहाँके अधिकारी
English
One should avoid all undertakings when the whole day is ruled by both parigha and vyatlpdta (obstacles) and the undertaking of any journey or commencing a battle on the day ruled by vaidhrta (obstacle).