अध्याय १२८
श्लोक 1
कोटचक्रम् ईअवर उवाच कोटचक्रं प्रवक्ष्यामि चतुरस्रं पुरं लिखेत् ।चतुरस्रं पुनर्मध्ये तन्मध्ये चतुरस्रकम्
koṭacakram īavara uvāca koṭacakraṃ pravakṣyāmi caturasraṃ puraṃ likhet / caturasraṃ punarmadhye tanmadhye caturasrakam
हिन्दी अर्थ
क्रमसे दसगुने बड़े हैं। महत्तत्वको भी आवृत करके प्रधान (प्रकृति) स्थित है। वह अनन्त है; क्योंकि उसका कभी अन्त नहीं होता। इसीलिये उसकी कोई संख्या अथवा माप नहीं है। मुने! वह सम्पूर्ण जगतका कारण है । उसे ही ' अपरा प्रकृति ' कहते हैं उसमें ऐसे-ऐसे असंख्य ब्रह्माण्ड उत्पन्न हुए हैं। जैसे काठमें अग्नि और तिलमें तेल रहता है, उसी प्रकार प्रधानमें स्वयंप्रकाश चेतनात्मा
English
The zodiacal signs Aries etc. (should be assigned) to the directions east etc. (in the three squares) which are the symbols of the three nSdis (tubular organs in the body). The (asterism) Krttika (is located) in the east and the (asterism) Alle§a in the south-east.