अध्याय १३१
श्लोक 1
घातचक्रादिः ईश्वर उवाच प्रदक्षिणमकारादीन् स्वरान् पूर्वादितो लिखेत् ।चैत्राद्यं भ्रमणाच्चक्रं प्रतिपत् पूर्णिमा तिथिः
ghātacakrādiḥ īśvara uvāca pradakṣiṇamakārādīn svarān pūrvādito likhet / caitrādyaṃ bhramaṇāccakraṃ pratipat pūrṇimā tithiḥ
हिन्दी अर्थ
शिलापट्टपर लिखकर नीचे मुख करके पृथ्वीपर रख दे तो शत्रुका स्तम्भन होता है। ' ॐ०' 'हूं' 'सः' मन्त्रसे सम्पुटित नाम गोरोचन तथा कुङ्कुमसे आठ भूर्जपत्रोंपर लिखकर रखा जाय तो मृत्युका निवारण होता है। यह यन्त्र एक, पाँच और नौ बार लिखनेसे परस्पर प्रेम होता है। दो, छः या बारह बार लिखनेसे वियुक्त व्यक्तियोंका
English
If there are vowels at the beginning and the end, one should know (impending) death (if the vowels are) short and victory (if the vowels are) long.