अध्याय १३२
श्लोक 1
सेवाचक्रं ईश्वर उवाच सेवाचक्रं प्रवक्ष्यामि लाभालाभानुसूचकं(२) ।पिता माता तथा भ्राता दम्पती च विशेषतः
sevācakraṃ īśvara uvāca sevācakraṃ pravakṣyāmi lābhālābhānusūcakaṃ(2) / pitā mātā tathā bhrātā dampatī ca viśeṣataḥ
हिन्दी अर्थ
(धान्य काटने तथा घरमें रखनेका मुहूर्त ) रेवती, हस्त, मूल, श्रवण, पूर्वाफाल्गुनी, अनुराधा, मघा, मृगशिरा-इन नक्षत्रोंमें तथा मकर लग्नमें धान्य-छेदन-( धान काटनेका) मुहूर्त शुभ होता है और हस्त, चित्रा, पुनर्वसु, स्वाती, रेवती तथा श्रवणादि तीन नक्षत्रोंमें भी धान्य- छेदन शुभ है। स्थिर लग्न तथा बुध, गुरु, शुक्रवारोंमें, भरणी, पुनर्वसु, मघा, ज्येष्ठा, तीनों
English
I shall describe the Sevdcakra that indicates the gain or loss from the father, mother, brother, husband or wife.