अध्याय १४३
श्लोक 1
कुब्जिकापूजा ईश्वर उवाच कुब्जिकाक्रमपूजाञ्च(१) वक्ष्ये सर्वार्थसाधनीं ।यया जिताः सुरा देवैः शस्त्राद्यैर् आज्यसंयुतैः
kubjikāpūjā īśvara uvāca kubjikākramapūjāñca(1) vakṣye sarvārthasādhanīṃ / yayā jitāḥ surā devaiḥ śastrādyair ājyasaṃyutaiḥ
हिन्दी अर्थ
( सर्पाकार राहुचक्रका फल -- ) मुखवाले सात नक्षत्रोंमें संग्राम करनेसे मरण होता है, स्कन्धवाले सात नक्षत्रॉमें युद्ध करनेसे पराजय होती है, पेटवाले सात नक्षत्रोंमें युद्ध करनेसे सम्मान तथा विजयको प्राप्ति होती है, कटिवाले नक्षत्रॉमें संग्राम करनेसे शत्रुओंका हरण होता है, पुच्छवाले नक्षत्रमें संग्राम करनेसे कीर्ति होती है और राहुसे दृष्ट नक्षत्रमें संग्राम करनेसे मृत्यु होती
English
I shall describe the mode of worship of (goddess) Kub- jika that accomplishes all comforts. (It is only by such worship) the celestials had conquered the demons together with their weapons and kingdom.