Agni Purana· Agni Purāṇa
168
अध्याय 168 / 381

Adhyaya 168

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अध्याय १६८

श्लोक 1

महापातकादिकथनम् पुष्कर उवाच दण्डं कुर्यान्नृपो नॄणां प्रायश्चित्तमकुर्वतां ।कामतो ऽकामतो वापि प्रायश्चित्तं कृतं चरेत्

mahāpātakādikathanam puṣkara uvāca daṇḍaṃ kuryānnṛpo nṝṇāṃ prāyaścittamakurvatāṃ / kāmato 'kāmato vāpi prāyaścittaṃ kṛtaṃ caret

हिन्दी अर्थ

एक दिन, एक रात और एक दिनका अशौच लगता है। मित्र, दामाद, पुत्रीके पुत्र, भानजे, साले और सालेके पुत्रके मरनेपर स्नानमात्र करनेका विधान है। नानी, आचार्य तथा नानाकी

English

The king should punish the men who do not perform atonement (for their own misdeeds). One should perform atonement (irrespective of the fact that the misdeed was done) with one's wilful desire or not.

अध्याय १६८

श्लोक 2

१ जातवेदोमुखैः सौरैर् इति ख॥ २ रिपुं हरेदिति ङ॥ , ञ॥ च :प् १६६ मत्तक्रुद्धातुराणां च न भुञ्जीत कदाचन ।महापातकिनां स्पृष्टं यच्च स्पृष्टमुदक्यया

1 jātavedomukhaiḥ saurair iti kha.. 2 ripuṃ harediti ṅa.. , ña.. ca :p 166 mattakruddhāturāṇāṃ ca na bhuñjīta kadācana / mahāpātakināṃ spṛṣṭaṃ yacca spṛṣṭamudakyayā

हिन्दी अर्थ

मृत्यु होनेपर तीन दिनका अशौच लगता है। दुर्भिक्ष (अकाल) पड़नेपर, समूचे राष्ट्रके ऊपर संकट आनेपर, आपत्ति-विपत्ति पड़नेपर तत्काल शुद्धि कही गयी है। यज्ञकर्ता, व्रतपरायण, ब्रह्मचारी, दाता तथा ब्रह्मवेत्ताकी तत्काल ही शुद्धि होती है। दान, यज्ञ, विवाह, युद्ध तथा देशव्यापी विप्लवके समय भी सद्यःशुद्धि ही बतायी गयी है। महामारी आदि उपद्रवमें मरे

English

One should never eat (food) from intoxicated, angry and sick men. (One should not eat food) touched by great sinners and that touched by a woman in her courses.

अध्याय १६८

श्लोक 3

गणान्नं गणिकान्नं च(१) वार्धुषेर्गायनस्य च ।अभिशप्तस्य षण्डस्य यस्याश्चोपपतिर्गृहे

gaṇānnaṃ gaṇikānnaṃ ca(1) vārdhuṣergāyanasya ca / abhiśaptasya ṣaṇḍasya yasyāścopapatirgṛhe

हिन्दी अर्थ

हुएका अशौच भी तत्काल ही निवृत्त हो जाता है। राजा, गौ तथा ब्राह्मणद्वारा मारे गये मनुष्योंकी और आत्मघाती पुरुषोंकी मृत्यु होनेपर भी तत्काल ही शुद्धि कही गयी है

English

A simple expiation of fasting etc.

अध्याय १६८

श्लोक 4

रजकस्य नृशंसस्य वन्दिनः कितवस्य च ।मिथ्यातपस्विनश् चैव चौरदण्डिकयोस् तथा(२)

rajakasya nṛśaṃsasya vandinaḥ kitavasya ca / mithyātapasvinaś caiva cauradaṇḍikayos tathā(2)

हिन्दी अर्थ

जो असाध्य रोगसे युक्त एवं स्वाध्यायमें भी असमर्थ है, उसके लिये भी तत्काल शुद्धिका ही विधान है। जिन महापापियोंके लिये अग्नि और जलमें प्रवेश कर जाना प्रायश्चित्त बताया गया है (उनका वह मरण आत्मघात नहीं है) । जो स्त्री अथवा पुरुष अपमान, क्रोध, स्नेह, तिरस्कार या भयके कारण गलेमें बन्धन (फाँसी) लगाकर किसी तरह प्राण त्याग देते हैं, उन्हें ' आत्मघाती '

English

Fast regulated according to the phases of the moon.

अध्याय १६८

श्लोक 5

कुण्डगोलस्त्रीजितानां वेदविक्रयिणस् तथा ।शैलूषतन्त्रवायान्नं कृतघ्नस्यान्नमेव च

kuṇḍagolastrījitānāṃ vedavikrayiṇas tathā / śailūṣatantravāyānnaṃ kṛtaghnasyānnameva ca

हिन्दी अर्थ

कहते हैं। वह आत्मघाती मनुष्य एक लाख वर्षतक अपवित्र नरकमें निवास करता है। जो अत्यन्त वृद्ध है, जिसे शौचाशौचका भी ज्ञान नहीं रह गया है, वह यदि प्राण त्याग करता है

English

An excellent brahmin who had drunk water from a well into which a five-nailed dead animal (had fallen) fir con¬ taining feces, should observe fast for three days.

अध्याय १६८

श्लोक 6

कर्मारस्य निषादस्य चेलनिर्णेजकस्य च ।मिथ्याप्रव्रजितस्यान्नम्पुंश् चल्यास्तैलिकस्य च

karmārasya niṣādasya celanirṇejakasya ca / mithyāpravrajitasyānnampuṃś calyāstailikasya ca

हिन्दी अर्थ

तो उसका अशौच तीन दिनतक ही रहता है। उसमें (प्रथम दिन दाह), दूसरे दिन अस्थिसंचय, तीसरे दिन जलदान तथा चौथे दिन श्राद्ध करना चाहिए। जो बिजली अथवा अग्निसे मरते हैं, उनके अशौचसे सपिण्ड पुरुषोंको तीन दिनमें शुद्धि होती है। जो स्त्रियाँ पाखण्डका आश्रय

English

Sec note 2 on

अध्याय १६८

श्लोक 7

आरूढपतितस्यान्नं विद्विष्टान्नं च वर्जयेत् ।तथैव ब्राह्मणस्यान्नं ब्राह्मणेनानिमन्त्रितः

ārūḍhapatitasyānnaṃ vidviṣṭānnaṃ ca varjayet / tathaiva brāhmaṇasyānnaṃ brāhmaṇenānimantritaḥ

हिन्दी अर्थ

लेनेवाली तथा पतिघातिनी हैं, उनकी मृत्युपर अशौच नहीं लगता और न उन्हें जलाञ्जलि पानेका ही अधिकार होता है। पिता-माता आदिकी मृत्यु होनेका समाचार एक वर्ष बीत

English

Drinking water with milk and ghee once in tliree days for twelve days.

अध्याय १६८

श्लोक 8

ब्राह्मणान्नञ्च शूद्रेण नाद्याच्चैव निमन्त्रितः ।एषामन्यतमस्यान्नममत्या वा त्र्यहं क्षपेत्

brāhmaṇānnañca śūdreṇa nādyāccaiva nimantritaḥ / eṣāmanyatamasyānnamamatyā vā tryahaṃ kṣapet

हिन्दी अर्थ

जानेपर भी प्राप्त हो तो सवस्त्र स्नान करके उपवास करे और विधिपूर्वक प्रेतकार्यं (जलदान आदि) सम्पन्न करे जो कोई पुरुष जिस किसी तरह भी असपिण्ड शवको उठाकर ले जाय, वह वस्त्रसहित स्नान करके अग्निका स्पर्श करे और घी खा ले, इससे उसकी शुद्धि हो जाती है। यदि उस कुटुम्बका

English

An ancestral rite in which uncooked food is ofTcrcd,

अध्याय १६८

श्लोक 9

मत्या भुक्त्वा चरेत् कृच्छ्रं रेतोविण्मूत्रमेव च ।चण्डालश्वपचान्नन्तु भुक्त्वा चान्द्रायणं चरेत्

matyā bhuktvā caret kṛcchraṃ retoviṇmūtrameva ca / caṇḍālaśvapacānnantu bhuktvā cāndrāyaṇaṃ caret

हिन्दी अर्थ

वह अन्न खाता है तो दस दिनमें ही उसको शुद्धि होती है। यदि मृतकके घरवालोंका अन्न न खाकर उनके घरमें निवास भी न करे तो उसको एक ही दिनमें शुद्धि हो जायगी। जो द्विज अनाथ

English

Aland of fast for 12 days, eating food in the morning for the first

अध्याय १६८

श्लोक 10

अनिर्दिशं च प्रेतान्नं गवाघ्रातं तथैव च ।शूद्रोच्छिष्टं शुनोच्छिष्टं पतितान्नं तथैव च

anirdiśaṃ ca pretānnaṃ gavāghrātaṃ tathaiva ca / śūdrocchiṣṭaṃ śunocchiṣṭaṃ patitānnaṃ tathaiva ca

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणके शवको ढोते हैं, उन्हें पग-पगपर अश्वमेध यज्ञका फल प्राप्त होता है और स्नान करनेमात्रसे उनकी शुद्धि हो जाती है। शूद्रके शवका अनुगमन करनेवाला ब्राह्मण तीन दिनपर शुद्ध होता है। मृतक व्यक्तिके बन्धु-बान्धवोंके साथ बैठकर शोक-प्रकाश या विलाप करनेवाला द्विज उस एक दिन और एक रातमें स्वेच्छासे दान और श्राद्ध आदिका त्याग करे। यदि अपने

English

See note 2 on above.

अध्याय १६८

श्लोक 11

तप्तकृच्छ्रं प्रकुर्वीत अशौचे कृच्छ्रमाचरेत् ।अशौचे यस्य यो भुङ्क्ते सोप्यशुद्धस् तथा भवेत्

taptakṛcchraṃ prakurvīta aśauce kṛcchramācaret / aśauce yasya yo bhuṅkte sopyaśuddhas tathā bhavet

हिन्दी अर्थ

शूद्रका मरण हो जाय तो तीन दिनपर घरके बर्तन-भाँड़े निकाल फेंके और सारी भूमि लीप दे, तब शुद्धि होती है। सजातीय व्यक्तियोंके रहते हुए ब्राह्मण-शवको शूद्रके द्वारा न उठवाये।

English

The nulk of the cow within seven days after calving.

अध्याय १६८

श्लोक 12

मृतपञ्चनखात् कूपादमेध्येन सकृद्युतात् ।१ गणानां गणिकानाञ्चेति ङ॥ , ञ॥ च २ चौरदाम्भिकयोस्तथेति ञ॥ :प् १६७ अपः पीत्वा त्र्यहं तिष्ठेत् सोपवासो द्विजोत्तमः

mṛtapañcanakhāt kūpādamedhyena sakṛdyutāt / 1 gaṇānāṃ gaṇikānāñceti ṅa.. , ña.. ca 2 cauradāmbhikayostatheti ña.. :p 167 apaḥ pītvā tryahaṃ tiṣṭhet sopavāso dvijottamaḥ

हिन्दी अर्थ

मुर्देको नहलाकर नूतन वस्त्रसे ढक दे और फूलोंसे उसका पूजन करके श्मशानकी ओर ले जाय। मुर्देको नंगे शरीर न जलाये। कफनका कुछ हिस्सा फाड़कर श्मशानवासीको दे देना उस समय सगोत्र पुरुष शवको उठाकर

English

Food consisting of wheat flour, rice and sesamum not prepared for any religious purpose.

अध्याय १६८

श्लोक 13

सर्वत्र शूद्रे पादः स्याद् द्वित्रयं वैश्यभूपयोः(१) ।विड्वराहखरोष्ट्राणां गोमायोः कपिकाकयोः

sarvatra śūdre pādaḥ syād dvitrayaṃ vaiśyabhūpayoḥ(1) / viḍvarāhakharoṣṭrāṇāṃ gomāyoḥ kapikākayoḥ

हिन्दी अर्थ

चितापर चढ़ावे। जो अग्निहोत्री हो, उसे विधिपूर्वक तीन अग्नियों (आहवनीय, गार्हपत्य और दाक्षिणाग्नि) द्वारा दग्ध करना चाहिए। जिसने अग्निको स्थापना नहीं की हो, परंतु उपनयन-

English

Rice boiled with milk or sugar.

अध्याय १६८

श्लोक 14

प्राश्य मूत्रपुरीषाणि द्विजश्चान्द्रायणं चरेत् ।शुष्काणि जग्ध्वा मांसानि(२) प्रेतान्नं करकाणि च

prāśya mūtrapurīṣāṇi dvijaścāndrāyaṇaṃ caret / śuṣkāṇi jagdhvā māṃsāni(2) pretānnaṃ karakāṇi ca

हिन्दी अर्थ

संस्कारसे युक्त हो, उसका एक अग्नि (आहवनीय) द्वारा दाह करना चाहिए तथा अन्य साधारण मनुष्योंका दाह लौकिक अग्निसे करना चाहिए । असौ स्वर्गाय लोकाय स्वाहा।' इस मन्त्रको पढ़कर पुत्र अपने पिताके शवके मुखमें अग्नि प्रदान करे। फिर प्रेतके नाम और गोत्रका उच्चारण करके बान्धवजन एक-एक बार जल-

English

Neglecting the VedaSy censuring the VedaSy bearing fake witness, killing of a friend, eating forbidden food and clarified butter are the six equivalents to the drinking of wine.

अध्याय १६८

श्लोक 15

क्रव्यादशूकरोष्ट्राणां गोमायोः कपिकाकयोः ।गोनराश्वखरोष्ट्राणां छत्राकं ग्रामकुक्कुटं

kravyādaśūkaroṣṭrāṇāṃ gomāyoḥ kapikākayoḥ / gonarāśvakharoṣṭrāṇāṃ chatrākaṃ grāmakukkuṭaṃ

हिन्दी अर्थ

दान करें। इसी प्रकार नाना तथा आचार्यके मरनेपर भी उनके उद्देश्यसे जलाञ्जलिदान करना अनिवार्य है। परंतु मित्र, ब्याही हुई बेटी-बहन आदि, भानजे, श्वशुर तथा ऋत्विजूके लिये भी

English

The stealing of the entrusted such as a man, horse, silver, land, gems like diamond are remembered to be equiva¬ lent to the stealing of gold.

अध्याय १६८

श्लोक 16

मांसं जग्ध्वा कुञ्जरस्य तप्तकृच्छ्रेण शुद्ध्यति ।आमश्राद्धे तथा भुक्त्वा ब्रह्मचारी मधु त्वदन्

māṃsaṃ jagdhvā kuñjarasya taptakṛcchreṇa śuddhyati / āmaśrāddhe tathā bhuktvā brahmacārī madhu tvadan

हिन्दी अर्थ

जलदान करना अपनी इच्छापर निर्भर है। पुत्र अपने पिताके लिये दस दिनोंतक प्रतिदिन 'अपो नः शोशुचद् अयम्' इत्यादि पढ़कर जलाझलि दे। ब्राह्मणको दस पिण्ड, क्षत्रियको बारह पिण्ड, वैश्यको पंद्रह पिण्ड और शूद्रको तीस पिण्ड देनेका विधान है। पुत्र हो या पुत्री अथवा और कोई, वह पुत्रकी भाँति मृत व्यक्तिको पिण्ड दे

English

Cohabiting with consanguineous girls, (women) of low caste, wife etc. of the son of a friend are known to be equivalent to cohabiting with the wife of the preceptor.

अध्याय १६८

श्लोक 17

लशुनं गुञ्जनं चाद्यात् प्राजापत्यादिना शुचिः(३) ।भुक्त्वा चान्द्रायणं कुर्यान् मांसञ्चात्मकृतन्तथा

laśunaṃ guñjanaṃ cādyāt prājāpatyādinā śuciḥ(3) / bhuktvā cāndrāyaṇaṃ kuryān māṃsañcātmakṛtantathā

हिन्दी अर्थ

शवका दाह-संस्कार करके जब घर लौटे तो मनको वशमें रखकर द्वापर खड़ा हो दाँतसे नीमको पत्तियाँ चबाये। फिर आचमन करके अग्नि, जल, गोबर और पीली सरसोंका स्पर्श

English

A dsily to the fire.

अध्याय १६८

श्लोक 18

पेलुगव्यञ्च पेयूषं तथा श्लेष्मातकं मृदं ।वृथाकृशरसंयावपायसापूपशष्कुलीः

pelugavyañca peyūṣaṃ tathā śleṣmātakaṃ mṛdaṃ / vṛthākṛśarasaṃyāvapāyasāpūpaśaṣkulīḥ

हिन्दी अर्थ

करे। तत्पश्चात् पहले पत्थरपर पैर रखकर धीरे- धीरे घरमें प्रवेश करे। उस दिनसे बन्धु- बान्धवोंको क्षार नमक नहीं खाना चाहिए, मांस त्याग देना चाहिए। सबको भूमिपर शयन करना चाहिए। वे स्नान करके खरीदनेसे प्राप्त हुए अन्नको खाकर रहें। जो प्रारम्भमें दाह-संस्कार करे, उसे दस दिनोंतक सब कार्य करना चाहिए। अन्य अधिकारी पुरुषोंके अभावमें ब्रह्मचारी ही

English

See note 2 on

अध्याय १६८

श्लोक 19

अनुपाकृटमांसानि देवान्नानि हवींषि च ।गवाञ्च महिषीणां च वर्जयित्वा तथाप्यजां

anupākṛṭamāṃsāni devānnāni havīṃṣi ca / gavāñca mahiṣīṇāṃ ca varjayitvā tathāpyajāṃ

हिन्दी अर्थ

पिण्डदान और जलाञ्जलि-दान करे। जैसे सपिण्डोंके लिये यह मरणाशौचकी प्रापि बतायी गयी है, उसी प्रकार जन्मके समय भी पूर्ण शुद्धिकी इच्छा रखनेवाले पुरुषोंको अशौचकी प्राप्ति होती है।

English

Meat not prepared for rite, offerings for gods and oblations; of cows and buffaloes, avoiding goats too,

अध्याय १६८

श्लोक 20

सर्वक्षीराणि वर्ज्याणि तासाञ्चैवाप्यन्निर्दशं ।शशकः शल्यकी गोधा खड्गः कूर्मस्तथैव च

sarvakṣīrāṇi varjyāṇi tāsāñcaivāpyannirdaśaṃ / śaśakaḥ śalyakī godhā khaḍgaḥ kūrmastathaiva ca

हिन्दी अर्थ

मरणाशौच तो सभी सपिण्ड पुरुषोंको समानरूपसे प्राप्त होता है; किंतु जननाशौचकी अस्पृश्यता विशेषतः माता-पिताको ही लगती है। इनमें भी माताको ही जन्मका विशेष अशौच लगता है, वही स्पर्शके अधिकारसे वञ्चित होती है। पिता तो स्नान करनेमात्रसे शुद्ध (स्पर्श करने योग्य) हो जाता है॥ ५७--६१॥

English

all milks are to be avoided, and their food within ten days. Hare, porcupine, iguana, rhinoceros and tortoise

अध्याय १६८

श्लोक 21

भक्ष्याः पञ्चनखाः प्रोक्ताः परिशेषाश् च वर्जिताः ।पाठीनरोहितान्मत्स्यान् सिंहतुण्डांश् च भक्षयेत्

bhakṣyāḥ pañcanakhāḥ proktāḥ pariśeṣāś ca varjitāḥ / pāṭhīnarohitānmatsyān siṃhatuṇḍāṃś ca bhakṣayet

हिन्दी अर्थ

पुत्रका जन्म होनेके दिन निश्चय ही श्राद्ध करना चाहिए। वह दिन श्राद्ध-दान तथा गौ, सुवर्ण आदि और सस्त्रका दान करनेके लिये उपयुक्त माना गया है। मरणका अशौच मरणके

English

are declared edible five-nailed; the rest are forbidden. One may eat pathina and rohita fish and sinhatunda;

अध्याय १६८

श्लोक 22

यवगोधूमजं सर्वं पयसश् चैव विक्रियाः ।वागषाड्गवचक्रादीन् सस्नेहमुषितं तथा

yavagodhūmajaṃ sarvaṃ payasaś caiva vikriyāḥ / vāgaṣāḍgavacakrādīn sasnehamuṣitaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

साथ और सूतकका सूतकके साथ निवृत्त होता है। दोनोंमें जो पहला अशौच है, उसीके साथ दूसरेकी भी शुद्धि होती है। जन्माशौचमें मरणाशौच हो अथवा मरणाशौचमें जन्माशौच हो जाय तो मरणाशौचके अधिकारमें जन्माशौचको भी निवृत्त मानकर अपनी शुद्धिका कार्य करना चाहिए। जन्माशौचके साथ मरणाशौचकी निवृत्ति नहीं होती। यदि एक समान दो अशौच हों (अर्थात्

English

everything made of barley and wheat and milk-products; Vagasha, Gavacha and others, and food kept with oil.

अध्याय १६८

श्लोक 23

१ द्वितीयं वैश्यशूद्रयोरेति क॥ , ख॥ , ङ॥ , ञ॥ च २ शुष्काणि दग्धमंसानि इति ङ॥ ३ प्राजापत्याद्द्विजः शुचिरिति ख॥ :प् १६८ अग्निहोत्रपरीद्धाग्निर्ब्राह्मणः कामचारतः ।चान्द्रायणं चरेन्मासं वीरवध्वासनं हितं

1 dvitīyaṃ vaiśyaśūdrayoreti ka.. , kha.. , ṅa.. , ña.. ca 2 śuṣkāṇi dagdhamaṃsāni iti ṅa.. 3 prājāpatyāddvijaḥ śuciriti kha.. :p 168 agnihotraparīddhāgnirbrāhmaṇaḥ kāmacārataḥ / cāndrāyaṇaṃ carenmāsaṃ vīravadhvāsanaṃ hitaṃ

हिन्दी अर्थ

जन्म-सूतकमें जन्म-सूतक और मरणाशौचमें मरणाशौच पड़ जाय) तो प्रथम अशौचके साथ दूसरेको भी समाप्त कर देना चाहिए और यदि असमान अशौच हो (अर्थात् जन्माशौचमें मरणाशौच

English

A Brahmin with Agnihotra fire who acts at will should perform a month's Chandrayana; sitting at the hero's... is beneficial.

अध्याय १६८

श्लोक 24

ब्रह्महत्या सुरापानं स्तेयं गुर्वङ्गनागमः ।महान्ति पातकान्याहुः संयोगश् चैव तैः सह

brahmahatyā surāpānaṃ steyaṃ gurvaṅganāgamaḥ / mahānti pātakānyāhuḥ saṃyogaś caiva taiḥ saha

हिन्दी अर्थ

और मरणाशौचमें जन्माशौच हो) तो द्वितीय देवल-स्मृतिमें लिखा है कि 'चाण्डालकी अग्नि, अपवित्र अग्नि, सूतिका-गृहकी अग्नि, पतितके घरकी अग्नि तथा चिताकी अग्नि-इन्हें शिष्ट पुरुषको नहीं ग्रहण करना चाहिए।' अतः लौकिक अग्नि लेते समय उपर्युक्त अग्नियोंको त्याग देना चाहिए । ' चाण्डालाग्निरमेध्याग्निः सूतिकाग्निश्च कर्हिचित्। पतिताग्निश्चिताग्निश्च न शिष्टग्रहणोचिताः ॥'

English

Brahmin-killing, drinking liquor, stealing, going to a teacher's wife — they call these great sins, and association with them.

अध्याय १६८

श्लोक 25

अनृते च समुत्कर्षो राजगामि च पैशुनं ।गुरोश्चालीकनिर्बन्धः समानं ब्रह्महत्यया(१)

anṛte ca samutkarṣo rājagāmi ca paiśunaṃ / guroścālīkanirbandhaḥ samānaṃ brahmahatyayā(1)

हिन्दी अर्थ

अशौचके साथ प्रथमको निवृत्त करना चाहिए -- ऐसा धर्मराजका कथन है। मरणाशौचके भीतर दूसरा मरणाशौच आनेपर वह पहले अशौचके साथ निवृत्त हो जाता है। गुरु अशौचसे लघु

English

False boasting, informing the king, and false insistence on the teacher's — equal to killing a Brahmin.

अध्याय १६८

श्लोक 26

ब्रह्मोज्झ्यवेदनिन्दा च कौटसाक्ष्यं सुहृद्बधः ।गर्हितान्नाज्ययोर्जग्धिः(२) सुरापानसमानि षट्

brahmojjhyavedanindā ca kauṭasākṣyaṃ suhṛdbadhaḥ / garhitānnājyayorjagdhiḥ(2) surāpānasamāni ṣaṭ

हिन्दी अर्थ

अशौच बाधित होता है; लघुसे गुरु अशौचका बाध नहीं होता। मृतक अथवा सूतकमें यदि अन्तिम रात्रिके मध्यभागमें दूसरा अशौच आ पड़े तो उस शेष समयमें ही उसको भी निवृत्ति हो जानेके कारण सभी सपिण्ड पुरुष शुद्ध हो जाते हैं। यदि रात्रिके अन्तिम भागमें दूसरा

English

Forgetting the Veda, blaming the Veda, false witness, killing a friend, eating forbidden food — six equal to drinking liquor.

अध्याय १६८

श्लोक 27

निक्षेपस्यापहरणं नराश्वरजतस्य च ।भूमिवज्रमणीनाञ्च रुक्मस्तेयसमं स्मृतं

nikṣepasyāpaharaṇaṃ narāśvarajatasya ca / bhūmivajramaṇīnāñca rukmasteyasamaṃ smṛtaṃ

हिन्दी अर्थ

अशौचकी निवृत्ति होती है तथा यदि अन्तिम रात्रि बिताकर अन्तिम दिनके प्रातःकाल अशौचान्तर

English

Taking a deposit, stealing men, horses and silver, land, diamonds and jewels is remembered as equal to stealing gold.

अध्याय १६८

श्लोक 28

रेतःसेकः स्वयोन्याषु कुमारीष्वन्त्यजासु च ।सख्युः पुत्रस्य च(३) स्त्रीषु गुरुतल्पसमं विदुः

retaḥsekaḥ svayonyāṣu kumārīṣvantyajāsu ca / sakhyuḥ putrasya ca(3) strīṣu gurutalpasamaṃ viduḥ

हिन्दी अर्थ

सपिण्डोंकी शुद्धि होती है। दोनों ही प्रकारके अशौचोंमें दस दिनोंतक उस कुलका अन्न नहीं खाया जाता है। अशौचमें दान आदिका भी अधिकार नहीं रहता। अशौचमें किसीके यहाँ भोजन करनेपर प्रायश्चित्त करना चाहिए। अनजानमें भोजन करनेपर पातक नहीं लगता, जान-बूझकर खानेवालेको एक दिनका अशौच प्राप्त होता है

English

Casting seed in one's own sisters, virgins, low-caste women, and a friend's or son's wives — they know it equal to the teacher's bed.

अध्याय १६८

श्लोक 29

गोबधो ऽयाज्य संयाज्यं पारदार्यात्मविक्रियः ।गुरुमातृपितृत्यागः स्वाध्ययाग्न्योः सुतस्य च

gobadho 'yājya saṃyājyaṃ pāradāryātmavikriyaḥ / gurumātṛpitṛtyāgaḥ svādhyayāgnyoḥ sutasya ca

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणे 'जनन-मरणके अशौचका वर्णन” नामक एक सौ अद्वावनवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

Cow-killing, sacrificing for the unfit, adultery, selling oneself, abandoning teacher, mother or father, study and fire and son,

अध्याय १६८

श्लोक 30

परिवित्तितानुजेन परिवेदनमेव च ।तयोर्दानञ्च कन्यायास्तयोरेव च याजनं

parivittitānujena parivedanameva ca / tayordānañca kanyāyāstayoreva ca yājanaṃ

हिन्दी अर्थ

असंस्कृत आदिकी शुद्धि पुष्कर कहते हैं- मृतकका दाह-संस्कार हुआ हो या नहीं, यदि श्रीहरिका स्मरण किया जाय तो उससे उसको स्वर्ग और मोक्ष दोनोंको प्राप्ति हो सकती है।' मृतककी हड्डियोंको

English

the younger marrying before the elder, and marrying of such, and giving a maiden to them, and officiating for them,

अध्याय १६८

श्लोक 31

कन्याया दूषणञ्चैव वार्धुष्यं व्रतलोपनं ।तडागारामदाराणामपत्यस्य च विक्रियः

kanyāyā dūṣaṇañcaiva vārdhuṣyaṃ vratalopanaṃ / taḍāgārāmadārāṇāmapatyasya ca vikriyaḥ

हिन्दी अर्थ

गङ्गाजीके जलमें डालनेसे उस प्रेत (मृत व्यक्ति)- का अभ्युदय होता है। मनुष्यको हड्डी जबतक गङ्गाजीके जलमें स्थित रहती है, तबतक उसका स्वर्गलोकमें निवास होता है।' आत्मत्यागी तथा

English

defiling a maiden, usury, breaking a vow, selling a tank, garden, wife and child,

अध्याय १६८

श्लोक 32

व्रात्यता बान्धवत्यागो भृताध्यापनमेव च ।भृताच्चाध्ययनादानमविक्रेयस्य विक्रयः

vrātyatā bāndhavatyāgo bhṛtādhyāpanameva ca / bhṛtāccādhyayanādānamavikreyasya vikrayaḥ

हिन्दी अर्थ

पतित मनुष्योंके लिये यद्यपि पिण्डोदक-क्रियाका विधान नहीं है तथापि गङ्ाजीके जलमें उनकी हड्डियोंका डालना भी उनके लिये हितकारक ही है। उनके उद्देश्यसे दिया हुआ अन्न और जल आकाशमें लीन हो जाता है। पतित प्रेतके प्रति महान् अनुग्रह करके उसके लिये 'नारायण- बलि' करनी चाहिए। इससे वह उस अनुग्रहका

English

being a Vratya, abandoning kin, teaching for hire, studying from a hired teacher, selling the unsellable,

अध्याय १६८

श्लोक 33

१ समानि ब्रह्महत्ययेति ख॥ , ङ॥ , ञ॥ च २ गर्हितानामन्नजग्धिरिति ङ॥ ३ सख्युः सुतस्य चेति ङ॥ :प् १६९ सर्वाकारेष्वधीकारो महायन्त्रप्रवर्तनं ।हिंसौषधीनां स्त्र्याजीवः क्रियालङ्गनमेव च

1 samāni brahmahatyayeti kha.. , ṅa.. , ña.. ca 2 garhitānāmannajagdhiriti ṅa.. 3 sakhyuḥ sutasya ceti ṅa.. :p 169 sarvākāreṣvadhīkāro mahāyantrapravartanaṃ / hiṃsauṣadhīnāṃ stryājīvaḥ kriyālaṅganameva ca

हिन्दी अर्थ

१. 'संस्कृतस्यासंस्कृतस्य स्वर्गो मोक्षो हरिस्मृतेः ।'

English

taking authority in all mines, operating great machines, injury to herbs, living on women, transgressing rites,

अध्याय १६८

श्लोक 34

इन्धनार्थमशुष्काणां दुमाणाञ्चैव पातनं ।योषितां ग्रहणञ्चैव स्त्रीनिन्दकसमागमः

indhanārthamaśuṣkāṇāṃ dumāṇāñcaiva pātanaṃ / yoṣitāṃ grahaṇañcaiva strīnindakasamāgamaḥ

हिन्दी अर्थ

फल भोगता है। कमलके सदूश नेत्रवाले भगवान् नारायण अविनाशी हैं, अतः उन्हें जो कुछ अर्पण किया जाता है, उसका नाश नहीं होता। भगवान् जनार्दन जीवका पतनसे त्राण (उद्धार) करते हैं, इसलिये वे ही दानके सर्वोत्तम पात्र हैं

English

felling green trees for fuel, abduction of women, association with slanderers of women,

अध्याय १६८

श्लोक 35

आत्मार्थञ्च क्रियारम्भो निन्दितान्नदनन्तथा ।अनाहिताग्नितास्तेयमृणानाञ्चानपक्रिया

ātmārthañca kriyārambho ninditānnadanantathā / anāhitāgnitāsteyamṛṇānāñcānapakriyā

हिन्दी अर्थ

निश्चय ही नीचे गिरनेवाले जीवोंको भी भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले एकमात्र श्रीहरि ही हैं। “सम्पूर्ण जगत्के लोग एक-न-एक दिन मरनेवाले हैं '--यह विचारकर सदा अपने सच्चे

English

rites for one's own sake, eating forbidden food, not keeping the sacred fire, theft, not repaying debts,

अध्याय १६८

श्लोक 36

असच्छास्त्राधिगमनं दौःशील्यं व्यसनक्रिया ।धान्यकुप्यपशुस्तेयं मद्यपस्त्रीनिषेवणं

asacchāstrādhigamanaṃ dauḥśīlyaṃ vyasanakriyā / dhānyakupyapaśusteyaṃ madyapastrīniṣevaṇaṃ

हिन्दी अर्थ

सहायक धर्मका अनुष्ठान करना चाहिए। पतिव्रता पत्नीको छोड़कर दूसरा कोई बन्धु-बान्धव मरकर भी मरे हुए मनुष्यके साथ नहीं जा सकता; क्योंकि यमलोकका मार्ग सबके लिये अलग- अलग है। जीव कहीं भी क्यों न जाय, एकमात्र धर्म ही उसके साथ जाता है। जो काम कल

English

study of false scripture, bad conduct, addictions, theft of grain, base metals and cattle, drinking liquor and serving women,

अध्याय १६८

श्लोक 37

स्त्रीशूद्रविट्क्षत्रबधो नास्तिक्यञ्चोपपातकं ।ब्राह्मणस्य रुजः कृत्यं घ्रातिरघ्रेयमद्ययोः

strīśūdraviṭkṣatrabadho nāstikyañcopapātakaṃ / brāhmaṇasya rujaḥ kṛtyaṃ ghrātiraghreyamadyayoḥ

हिन्दी अर्थ

'मरनेवाला मनुष्य मरनेके समय यदि भगवन्नामका उच्चारण या भगवत्स्मरण कर ले, तब तो उसे भगवत्प्राप्ति अवश्य होती है; परंतु यदि उसके उद्देश्यसे भगवत्स्मरण किया जाय तो उससे भी उसको स्वर्ग और मोक्ष सुलभ हो सकते हैं।'

English

killing a woman, Shudra, Vaishya or Kshatriya, atheism — these are minor sins. Hurting a Brahmin, smelling the unsmellable and liquor,

अध्याय १६८

श्लोक 38

जैंभं पुंसि च मैथुन्यं जातिभ्रंशकरं स्मृतं ।श्वखरोष्ट्रमृगेन्द्राणामजाव्योश् चैव मारणं(१)

jaiṃbhaṃ puṃsi ca maithunyaṃ jātibhraṃśakaraṃ smṛtaṃ / śvakharoṣṭramṛgendrāṇāmajāvyoś caiva māraṇaṃ(1)

हिन्दी अर्थ

करना है, उसे आज ही कर ले; जिसे दोपहर बाद करना है, उसे पहले ही पहरमें कर ले; क्योंकि मृत्यु इस बातकी प्रतीक्षा नहीं करती कि इसका कार्य पूरा हो गया है या नहीं ? मनुष्य खेत-बारी, बाजार-हाट तथा घर-द्वारमें फँसा होता है, उसका मन अन्यत्र लगा होता है; इसी दशामें जैसे असावधान भेड़को सहसा भेड़िया आकर उठा ले जाय, वैसे ही मृत्यु उसे लेकर

English

crookedness, and intercourse with a man are remembered as causing loss of caste. Killing dogs, asses, camels, deer, goats and sheep

अध्याय १६८

श्लोक 39

सङ्कीर्णकरणं ज्ञेयं मीनाहिनकुलस्य च ।निन्दितेभ्यो धनादानं बाणिज्यं शूद्रसेवनं

saṅkīrṇakaraṇaṃ jñeyaṃ mīnāhinakulasya ca / ninditebhyo dhanādānaṃ bāṇijyaṃ śūdrasevanaṃ

हिन्दी अर्थ

चल देती है। कालके लिये न तो कोई प्रिय है, न द्वेषका पात्र॥ ६--१०॥

English

causes mixing of castes; also of fish, snake and mongoose; accepting wealth from the censured, trade, serving a Shudra

अध्याय १६८

श्लोक 40

अपात्रीकरणं ज्ञेयमसत्यस्य च भाषणं ।कृमिकीटवयोहत्या मद्यानुगतभोजनं

apātrīkaraṇaṃ jñeyamasatyasya ca bhāṣaṇaṃ / kṛmikīṭavayohatyā madyānugatabhojanaṃ

हिन्दी अर्थ

आयुष्य तथा प्रारब्धकर्म क्षीण होनेपर वह हठात् जीवको हर ले जाता है। जिसका काल नहीं आया है, वह सैकड़ों बाणोंसे घायल होनेपर भी नहीं मरता तथा जिसका काल आ पहुँचा है, वह कुशके अग्रभागसे ही छू जाय तो भी जीवित

English

cause unworthiness; speaking untruth, killing worms, insects and birds, eating after drinking liquor,

अध्याय १६८

श्लोक 41

फलैधःकुसुमस्तेयमधैर् यञ्च मलावहं

phalaidhaḥkusumasteyamadhair yañca malāvahaṃ //

हिन्दी अर्थ

नहीं रहता। जो मृत्युसे ग्रस्त है, उसे औषध और

English

stealing fruits, fuel and flowers — these bring impurity.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 168
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.