Agni Purana· Agni Purāṇa
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अध्याय 171 / 381

Adhyaya 171

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अध्याय १७१

श्लोक 1

प्रायश्चित्तानि पुष्कर उवाच प्रायश्चित्तं रहस्यादि वक्ष्ये शुद्धिकरं पर ।पौरुषेण तु सूक्तेन मासं जप्यादिनाघहा

prāyaścittāni puṣkara uvāca prāyaścittaṃ rahasyādi vakṣye śuddhikaraṃ para / pauruṣeṇa tu sūktena māsaṃ japyādināghahā

हिन्दी अर्थ

जिसका सपिण्डीकरण-श्राद्ध वर्ष पूर्ण होनेसे पहले हो जाता है, उसके लिये एक वर्षतक ब्राह्मणको सान्नोदक कुम्भदान देते रहना चाहिए। एक वर्षतक प्रतिमास मृत्यु-तिथिको एकोद्दिष्ट

English

I shall describe certain subtle expiations which are highly purificatory. One's sins would get destroyed by the repe¬ tition of the purusasuktdS for a month.

अध्याय १७१

श्लोक 2

मुच्यते पातकैः सर्वैर् जप्त्वा त्रिरघमर्षणं ।वेदजप्याद्वायुयमाद् गायत्र्या व्रततो ऽद्यहा(१)

mucyate pātakaiḥ sarvair japtvā triraghamarṣaṇaṃ / vedajapyādvāyuyamād gāyatryā vratato 'dyahā(1)

हिन्दी अर्थ

करना चाहिए। फिर प्रत्येक वर्षमै एक बार क्षयाहतिथिको एकोद्दिष्ट करना उचित है। प्रथम एकोहिष्ट तो मरनेके बाद ग्यारहवें दिन किया जाता है। सभी श्राद्धोंमें पिण्डोंको गाय, बकरे अथवा लेनेकी इच्छावाले ब्राह्मणको दे देना चाहिए। अथवा उन्हें अग्निमें या अगाध जलमें डाल देना चाहिए। जबतक ब्राह्मणलोग भोजन करके वहाँसे उठ न जाये, तबतक उच्चिष्ट

English

By the repetition of the aghamarsana thrice one gets free from all sins. The repetition of the vedic (mantras) such as the (hymns of) vayti,yama and gdyatri and the observance of the vow destroys all sins.

अध्याय १७१

श्लोक 3

मुण्डनं सर्वकृच्छ्रेषु स्नानं होमो हरेर्यजिः ।उत्थितस्तु दिवा तिष्ठेदुपविष्टस् तथा निशि

muṇḍanaṃ sarvakṛcchreṣu snānaṃ homo hareryajiḥ / utthitastu divā tiṣṭhedupaviṣṭas tathā niśi

हिन्दी अर्थ

स्थानपर झाडू न लगाये। श्राद्धमें हविष्यान्नके

English

P.V. X. 90. la.

अध्याय १७१

श्लोक 4

एतद्वीरासनं प्रोक्तं कृच्छ्रकृत्तेन पापहा ।अष्टभिः प्रत्यहं ग्रासैर् यतिचान्द्रायणं स्मृतं

etadvīrāsanaṃ proktaṃ kṛcchrakṛttena pāpahā / aṣṭabhiḥ pratyahaṃ grāsair yaticāndrāyaṇaṃ smṛtaṃ

हिन्दी अर्थ

दानसे एक मासतक और खीर देनेसे एक वर्षतक पितरोंकी तृप्ति बनी रहती है। भाद्रपद कृष्णा त्रयोदशीको, विशेषतः मघा नक्षत्रका योग होनेपर जो कुछ पितरोंके निमित्त दिया जाता है, वह अक्षय होता है। एक चतुर्दशीको छोड़कर प्रतिपदासे अमावास्यातककी चौदह तिथियोंमें श्राद्धदान करनेवाला पुरुष क्रमशः इन चौदह फलोंको पाता है-रूपशीलयुक्त कन्या, बुद्धिमान्

English

This is called the Virasana; one who does Krichchhra is a sin-destroyer. With eight mouthfuls a day the ascetic's Chandrayana is remembered;

अध्याय १७१

श्लोक 5

प्रातश् चतुर्भिः सायञ्च शिशुचान्द्रायणं स्मृतं ।यथाकथञ्चित् पिण्डानाम् चत्वारिंशच्छतद्वयं

prātaś caturbhiḥ sāyañca śiśucāndrāyaṇaṃ smṛtaṃ / yathākathañcit piṇḍānām catvāriṃśacchatadvayaṃ

हिन्दी अर्थ

खेतीमें लाभ, व्यापारमें लाभ, दो खुर और एक खुरवाले पशु, ब्रह्मतेजसे सम्पन्न पुत्र, सुवर्ण, रजत, कुप्यक (त्रपु-सीसा आदि), जातियोंमें

English

four in the morning and evening is the child's Chandrayana remembered; in any way two hundred and forty mouthfuls

अध्याय १७१

श्लोक 6

मासेन भक्षयेदेतत् सुरचान्द्रायणं चरेत् ।त्र्यहमुष्णं पिवेदापस्त्यहमुष्णं पयः पिवेत्

māsena bhakṣayedetat suracāndrāyaṇaṃ caret / tryahamuṣṇaṃ pivedāpastyahamuṣṇaṃ payaḥ pivet

हिन्दी अर्थ

मारे गये हों, उन्हींके लिये उस चतुर्दशी तिथिको श्राद्ध प्रदान किया जाता है। स्वर्ग, संतान, ओज, परम गति, धन, विद्या, चिकित्सामें सफलता, कुप्य (त्रपु-सीसा आदि), गौ, बकरी, भेड़, अश्व तथा आयु-इन सत्ताईस प्रकारके काम्य पदार्थोंको क्रमशः वही पाता है, जो कुत्तिकासे

English

one should eat in a month — that is the divine Chandrayana. Three days hot water, three days hot milk, three days hot ghee, three days air —

अध्याय १७१

श्लोक 7

त्र्याहमुष्णं घृतं पीत्वा वायुभक्षो भवेत् त्र्यहं ।तप्तकृच्छ्रमिदं प्रोक्तं शीतैः शीतं प्रकीर्तितं

tryāhamuṣṇaṃ ghṛtaṃ pītvā vāyubhakṣo bhavet tryahaṃ / taptakṛcchramidaṃ proktaṃ śītaiḥ śītaṃ prakīrtitaṃ

हिन्दी अर्थ

लेकर भरणीपर्यन्त प्रत्येक नक्षत्रमें विधिपूर्वक श्राद्ध करता है तथा आस्तिक, श्रद्धालु एवं मद- मात्सर्य आदि दोषोंसे रहित होता है। वसु, रुद्र और आदित्य-ये तीन प्रकारके पितर श्राद्धके

English

this is called Taptakrichchhra; with cold things, cold. Krichchhra-atikrichchhra with milk for twenty-one days;

अध्याय १७१

श्लोक 8

कृच्छ्रातिकृच्छ्रं पयसा दिवसानेकविंशतिं ।गोमूत्रं गोमयं क्षीरं दधि सर्पिः कुशोदकं

kṛcchrātikṛcchraṃ payasā divasānekaviṃśatiṃ / gomūtraṃ gomayaṃ kṣīraṃ dadhi sarpiḥ kuśodakaṃ

हिन्दी अर्थ

पितरोंको तृप्त करते हैं। जब पितर तृप्त होते हैं तब वे मनुष्योंको आयु, प्रजा, धन, विद्या, स्वर्ग, मोक्ष, सुख तथा राज्य प्रदान करते हैं इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें 'श्राद्धकल्पका वर्णन” नामक एक सौ तिरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

cow-urine, cow-dung, milk, curds, ghee, kusha water; one night's fast is called Krichchhra Shantapana;

अध्याय १७१

श्लोक 9

१ जपतो ऽवधहेति ख॥ , घ॥ , ज॥ च :प् १८० एकरात्रोपवासश् चकृच्छ्रं शान्तपनं स्मृतं ।एतच्च प्रत्याभ्यस्तं महाशान्तपनं स्मृतं

1 japato 'vadhaheti kha.. , gha.. , ja.. ca :p 180 ekarātropavāsaś cakṛcchraṃ śāntapanaṃ smṛtaṃ / etacca pratyābhyastaṃ mahāśāntapanaṃ smṛtaṃ

हिन्दी अर्थ

नवग्रह-सम्बन्धी हवनका वर्णन

English

repeated three times is called Mahashantapana; repeated by three days each is called Atishantapana.

अध्याय १७१

श्लोक 10

त्र्यहाभ्यस्तमथैकैकमतिशान्तपनं स्मृतं ।कृच्छ्रं पराकसञ्ज्ञं स्याद्द्वादशाहमभोजनं

tryahābhyastamathaikaikamatiśāntapanaṃ smṛtaṃ / kṛcchraṃ parākasañjñaṃ syāddvādaśāhamabhojanaṃ

हिन्दी अर्थ

पुष्कर कहते हैं-- परशुरामजी ! लक्ष्मी, शान्ति, पुष्टि, वृद्धि तथा आयुकी इच्छा रखनेवाले वीर्यवान् पुरुषको ग्रहोंकी भी पूजा करनी चाहिए। सूर्य, केतु--इन नवग्रहोंकी क्रमशः स्थापना करनी चाहिए। सूर्यकी प्रतिमा ताँबेसे, चन्द्रमाकी रजत (या स्फटिकसे), मङ्गलकी लाल चन्दनसे, बुधकी सुवर्णसे, गुरुकी सुवर्णसे, शुक्रकी रजतसे,

English

Krichchhra called Paraka is twelve days of fasting; one meal repeated three days, then night meal, then unasked;

अध्याय १७१

श्लोक 11

एकभक्तं त्र्यहाभ्यस्तं क्रमान्नक्तमयाचितं ।प्राजापत्यमुपोष्यान्ते पादः स्यात् कृच्छ्रपादकः

ekabhaktaṃ tryahābhyastaṃ kramānnaktamayācitaṃ / prājāpatyamupoṣyānte pādaḥ syāt kṛcchrapādakaḥ

हिन्दी अर्थ

शनिकी लोहेसे तथा राहु-केतुकी सीसेसे बनाये; इससे शुभकी प्राप्ति होती है। अथवा वस्त्रपर उन-उनके रंगके अनुसार वर्णकसे उनका चित्र अङ्कित कर लेना चाहिए। अथवा मण्डल बनाकर

English

Prajapatya, having fasted at the end, a quarter is Krichchhrapada. With fruits a month, Phala-krichchhra; with bilva Shri-krichchhra;

अध्याय १७१

श्लोक 12

फलैर् मासं फलं कृच्छ्रं बिल्वैः श्रीक्च्छ्र ईरितः ।पद्माक्षैः स्यादामलकैः पुष्पकृच्छ्रं तु पुष्पकैः

phalair māsaṃ phalaṃ kṛcchraṃ bilvaiḥ śrīkcchra īritaḥ / padmākṣaiḥ syādāmalakaiḥ puṣpakṛcchraṃ tu puṣpakaiḥ

हिन्दी अर्थ

उनमें गन्ध (चन्दन-कुङ्कुम आदि) -से ग्रहोंकी आकृति बना ले। ग्रहोंके रंगके अनुसार ही उन्हें फूल और वस्त्र भी देने चाहिए। सबके लिये गन्ध, बलि, धूप और गुग्गुल देना चाहिए। प्रत्येक ग्रहके लिये ( अग्निस्थापनपूर्वक) समन्त्रक चरुका होम करना चाहिए। ' आकृष्णेन रजसा० ' (यजु० ३३।४३) इत्यादि सूर्य देवताके, “इमं देवाः०' (यजु० ९।४०; १०। १८) इत्यादि

English

with lotus seeds or amalaka; with flowers Pushpa-krichchhra; with leaves Patra-krichchhra; with water Toya-krichchhra;

अध्याय १७१

श्लोक 13

पत्रकृच्छ्रन्तथा पत्रैस्तोयकृच्छ्रं जलेन तु ।मूलकृच्छ्रन्तथा मूलैर् दृध्न क्षीरेण तक्रतः

patrakṛcchrantathā patraistoyakṛcchraṃ jalena tu / mūlakṛcchrantathā mūlair dṛdhna kṣīreṇa takrataḥ

हिन्दी अर्थ

चन्द्रमाके, ' अग्निमूर्धा दिवः ककुत्०' (यजु० १३। १४) इत्यादि मङ्गलके, उद्बुध्यस्व० (यजु० १५।५४; १८।६१) इत्यादि बुधके, ' बृहस्पते

English

with roots Mula-krichchhra; with curd, milk, buttermilk; a month of Vayavya-krichchhra by eating food in a handful;

अध्याय १७१

श्लोक 14

मासं वायव्यकृच्छ्रं स्यात्पाणिपूरान्नभोजनात् ।तिलैर् द्वादशरात्रेण कृच्छ्रमाग्नेयमार्तिनुत्

māsaṃ vāyavyakṛcchraṃ syātpāṇipūrānnabhojanāt / tilair dvādaśarātreṇa kṛcchramāgneyamārtinut

हिन्दी अर्थ

बृहस्पतिके, ' अन्नात्परिश्रुतो ० ' (यजु० १९।७५) इत्यादि शुक्रके, 'शं नो देवीः० ' (यजु० ३६। १२) इत्यादि शनैश्चरके, “काण्डात् काण्डात्० ' (यजु० १३।२०) इत्यादि राहुके और 'केतुं कृण्वन्नकेतवे ' (यजु० २९ । ३७) इत्यादि केतुके

English

with sesame for twelve nights the Agneya-krichchhra, destroyer of pain; for a fortnight a handful of parched grain, and the Brahmakurcha;

अध्याय १७१

श्लोक 15

पाक्षं प्रसृत्या लाजानां ब्रह्मकूर्चं तथा भवेत् ।उपोषितश् चतुर्दृश्यां पञ्चदश्यामनन्तरं

pākṣaṃ prasṛtyā lājānāṃ brahmakūrcaṃ tathā bhavet / upoṣitaś caturdṛśyāṃ pañcadaśyāmanantaraṃ

हिन्दी अर्थ

आदि ग्रहोंकी समिधाएँ हैं। सूर्य आदि ग्रहोंमेंसे प्रत्येकके लिये एक सौ आठ या अट्ठाईस बार मधु, घी, दही अथवा खीरकी आहुति देनी चाहिए। गुड़ मिलाया हुआ भात, खीर, हविष्य

English

having fasted on the fourteenth, on the fifteenth thereafter one should eat the five cow-products, then haviṣya; having done so twice a month a man is freed from all sins.

अध्याय १७१

श्लोक 16

पञ्चगव्यं समश्नीयाद्धविष्याशीत्यनन्तरं ।मासेन द्विर् नरः कृत्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते

pañcagavyaṃ samaśnīyāddhaviṣyāśītyanantaraṃ / māsena dvir naraḥ kṛtvā sarvapāpaiḥ pramucyate

हिन्दी अर्थ

(मुनि-अन्न), दूध मिलाया हुआ साठीके चावलका माष (उड़द) मिलाया हुआ भात और खिचड़ी- इनका ग्रहके क्रमानुसार विद्वान् पुरुष ब्राह्मणके लिये भोजन दे। अपनी शक्तिके अनुसार यथाप्राप्त वस्तुओंसे ब्राह्मणका विधिपूर्वक सत्कार करके

English

Desiring prosperity, nourishment, or heaven, for destruction of sin, devoted to worship of the gods, the Krichchhra-doer is a sharer of all.

अध्याय १७१

श्लोक 17

श्रीकामः पुष्टिकामश् च स्वर्गकामो ऽघनष्टये ।देवताराधनपरः कृच्छ्रकारी स सर्वभाक्

śrīkāmaḥ puṣṭikāmaś ca svargakāmo 'ghanaṣṭaye / devatārādhanaparaḥ kṛcchrakārī sa sarvabhāk

हिन्दी अर्थ

उनके लिये क्रमशः धेनु, शङ्क, बैल, सुवर्ण, वस्त्र, अश्व, काली गौ, लोहा और बकरा-ये वस्तुएँ दक्षिणामें दे। ये ग्रहोंकी दक्षिणाएँ बतायी गयी हैं। जिस-जिस पुरुषके लिये जो ग्रह अष्टम आदि दुष्ट

English

Desiring prosperity, nourishment, or heaven, for destruction of sin, devoted to worship of the gods, the Krichchhra-doer is a sharer of all.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 171
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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