Agni Purana· Agni Purāṇa
174
अध्याय 174 / 381

Adhyaya 174

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अध्याय १७४

श्लोक 1

प्रायश्चित्तानि अग्निर् उवाच देवाश्रमार्चनादीनां प्रायश्चित्तन्तु लोपतः ।पूजालोपे चाष्टशतं जपेद्द्विगुणपूजनं

prāyaścittāni agnir uvāca devāśramārcanādīnāṃ prāyaścittantu lopataḥ / pūjālope cāṣṭaśataṃ japeddviguṇapūjanaṃ

हिन्दी अर्थ

होनेपर जो उसका अन्न खाता है, वह भी अशुद्ध हो जाता है। इसलिये अशौचयुक्त मनुष्यका अन्न भक्षण करनेपर 'कृच्छूब्रत' करे। जिस कुएँमें अपवित्र वस्तुसे युक्त हो चुका हो, उसका जल

English

If the sacred syllable or the materials get altered at the time of worship or in destroying the impediments due to the gods and mortals one should mutter the basic (syllable) and repeat again.

अध्याय १७४

श्लोक 2

पञ्चोपनिषदैर् मन्त्रैर् हुत्वा ब्राह्मणभोजनं ।सूतिकान्त्यजकोदक्यास्पृष्टे देवे शतं जपेत्(१)

pañcopaniṣadair mantrair hutvā brāhmaṇabhojanaṃ / sūtikāntyajakodakyāspṛṣṭe deve śataṃ japet(1)

हिन्दी अर्थ

पीनेपर श्रेष्ठ ब्राह्मणको तीन दिनतक उपवास रखना चाहिए। शूद्रको सभी प्रायश्चित्त एक चौथाई, वैश्यको दो चौथाई और क्षत्रियको तीन चौथाई करने चाहिए। ग्रामसूकर, गर्दभ, इष्ट,

English

(One should) repeat one hundred times if the pot is lost. If (the image of) the deity has fallen from the hand and got

अध्याय १७४

श्लोक 3

पञ्चोपनिषदैः पूजां द्विगुणं स्नानमेव च ।विप्रभोज्यं होमलोपे होमस्नानं तथार्चनं

pañcopaniṣadaiḥ pūjāṃ dviguṇaṃ snānameva ca / viprabhojyaṃ homalope homasnānaṃ tathārcanaṃ

हिन्दी अर्थ

शृगाल, वानर और काक-इनके मल-मूत्रका भक्षण करनेपर ब्राह्मण 'चान्द्रायण-ब्रत' करे। सूखा मांस, मृतक व्यक्तिके उद्देश्यसे दिया हुआ अन्न, करक तथा कच्चा मांस खानेवाले जीव, शूकर, उष्ट्र, शृगाल, वानर, काक, गौ, मनुष्य, अश्व, गर्दभ, छत्ता शाक, मुर्गे और हाथीका मांस खानेपर “तप्तकृच्छु 'से शुद्धि होती है। ब्रह्मचारी अमाश्राद्धमें भोजन, मधुपान अथवा लहसुन और

English

A kind of mixed caste.

अध्याय १७४

श्लोक 4

होमद्रव्ये मूषिकाद्यैर् भक्षिते कीटसंयुते ।तावन्मात्रं परित्यज्य प्रोक्ष्य देवादि पूजयेत्

homadravye mūṣikādyair bhakṣite kīṭasaṃyute / tāvanmātraṃ parityajya prokṣya devādi pūjayet

हिन्दी अर्थ

गाजरका भक्षण करनेपर 'प्राजापत्यकृच्छु' से पवित्र होता है। अपने लिये पकाया हुआ मांस, पेलुगव्य (अण्डकोषका मांस), पेयूष (ब्यायी हुई गौ आदि पशुओंका सात दिनके अंदरका

English

For a man who repents after doing a sin, the best expia¬ tion is to remember lord Hari.

अध्याय १७४

श्लोक 5

अङ्कुरार्पणमात्रन्तु छिन्नं भिन्नं परित्यजेत् ।अस्पृश्यैश् चैव संस्पृष्टे अन्यपात्रे तदर्पणं

aṅkurārpaṇamātrantu chinnaṃ bhinnaṃ parityajet / aspṛśyaiś caiva saṃspṛṣṭe anyapātre tadarpaṇaṃ

हिन्दी अर्थ

खिचड़ी, लप्सी, खीर, पूआ और पूरी, यज्ञ- सम्बन्धी संस्कार-रहित मांस, देवताके निमित्त रखा हुआ अन्न और हवि-इनका भक्षण करनेपर “ चान्द्रायण-व्रत' करनेसे शुद्धि होती है। गाय, भैंस और बकरीके दूधके सिवा अन्य पशुओंके दुग्धका परित्याग करना चाहिए। इनके भी ब्यानेके दस दिनके अंदरका दूध काममें नहीं लेना चाहिए। अग्निहोत्रको प्रज्वलित अग्निमें

English

The practice of cSndr&yatia or pardka or prdjipatya des¬ troys the sin. The repetition of the sacred syllables of the Sun, Ia (lord Siva), Sakti (consort of lord Siva), Sria (lord Vi§nu) and others would destroy the sin.

अध्याय १७४

श्लोक 6

देवमानुषविघ्नघ्नं पूजाकाले तथैव च ।मन्त्रद्रव्यादिव्यत्यासे मूलं जप्त्वा पुनर्जपेत्

devamānuṣavighnaghnaṃ pūjākāle tathaiva ca / mantradravyādivyatyāse mūlaṃ japtvā punarjapet

हिन्दी अर्थ

हवन करनेवाला ब्राह्मण यदि स्वेच्छापूर्वक जौ और गेहूँसे तैयार की हुई वस्तुओं, दूधके विकारों, वागषाड्गवचक्र आदि तथा तैल-घी आदि चिकने पदार्थासे संस्कृत बासी अन्नको खा

English

The sacred syllables of (lord) Nrsirhha (man-lion form of lord Visnu) consisting of twelve and eight letters etc. destroy sin. The reading and hearing etc. of Agneyapurdna (would also be expiation to remove all sins).

अध्याय १७४

श्लोक 7

कुम्भेनाष्टशतजपो देवे तु पतिते करात् ।भिन्ने नष्टे चोपवासः शतहोमाच्छुभं भवेत्(२)

kumbhenāṣṭaśatajapo deve tu patite karāt / bhinne naṣṭe copavāsaḥ śatahomācchubhaṃ bhavet(2)

हिन्दी अर्थ

ले तो उसे एक मासतक 'चान्द्रायणब्रत' करना चाहिए; क्योंकि वह दोष वीरहत्याके समान माना जाता है ब्रह्महत्या, सुरापान, चोरी, गुरुतल्पगमन--ये “महापातक' कहे गये हैं। इन पापोंके करनेवाले मनुष्योंका संसर्ग भी “महापातक' माना गया है। झूठको बढ़ावा देना, राजाके समीप किसीकी चुगली

English

Practising vows on the phases of the moon, weeks, asterisms, movement (of planets from one constellation to ano¬ ther), good periods of the day and period of Manu for the Sun, Ia, Sakti and others would destroy sins.

अध्याय १७४

श्लोक 8

१ शतं शहुनेदिति ख॥ , छ॥ च २ शतहोमाच्छुचिर्भवेदिति ख॥ , घ॥ , ञ॥ च :प् १९० कृते पापे ऽनुतापो वै यस्य पुंसः प्रजायते ।प्रायश्चित्तन्तु तस्यैकं हरिसंस्मरणं परं

1 śataṃ śahunediti kha.. , cha.. ca 2 śatahomācchucirbhavediti kha.. , gha.. , ña.. ca :p 190 kṛte pāpe 'nutāpo vai yasya puṃsaḥ prajāyate / prāyaścittantu tasyaikaṃ harisaṃsmaraṇaṃ paraṃ

हिन्दी अर्थ

करना, गुरुपर झूठा दोषारोपण-ये ' ब्रह्महत्या'के समान हैं। अध्ययन किये हुए वेदका विस्मरण, वेदनिन्दा, झूठी गवाही, सुहृदका वध, निन्दित अन्न एवं घृतका भक्षण-ये छः पाप सुरापानके

English

One who feels repentance after sin is done — for him the one atonement is the supreme remembrance of Hari.

अध्याय १७४

श्लोक 9

चान्द्रायणं पराको वा प्राजापत्यमघौघनुत् ।सूर्येशशक्तिश्रीशदिमन्त्रजप्यमघौघनुत्

cāndrāyaṇaṃ parāko vā prājāpatyamaghaughanut / sūryeśaśaktiśrīśadimantrajapyamaghaughanut

हिन्दी अर्थ

समान माने गये हैं। धरोहरका अपहरण, मनुष्य, घोड़े, चाँदी, भूमि और हीरे आदि रत्नोंकी चोरी सुवर्णकी चोरीके समान मानी गयी है। सगोत्रा पुत्रवधू इनमें वीर्यपात करना ' गुरुपत्नीगमन'के समान माना गया है। गोवध, अयोग्य व्यक्तिसे यज्ञ कराना, परस्त्रीगमन, अपनेको बेचना तथा गुरु, माता, पिता, पुत्र, स्वाध्याय एवं अग्निका परित्याग,

English

Chandrayana, Paraka or Prajapatya removes floods of sin; repetition of mantras of the Sun, Ishvara, Shakti, Shri-Lord and the like removes floods of sin.

अध्याय १७४

श्लोक 10

गायत्रीप्रणवस्तोत्रमन्त्रजप्यमघान्तकं ।काद्यैर् आवीजसंयुक्तैर् आद्यैर् आद्यैस्तदन्तकैः

gāyatrīpraṇavastotramantrajapyamaghāntakaṃ / kādyair āvījasaṃyuktair ādyair ādyaistadantakaiḥ

हिन्दी अर्थ

परिवेत्ता अथवा परिवित्ति होना-इन दोनोंमेंसे किसीको कन्यादान करना और इनका यज्ञ कराना, कन्याको दूषित करना, ब्याजसे जीविका-निर्वाह, ब्रतभङ्ग, सरोवर, उद्यान, स्त्री एवं पुत्रको बेचना,

English

Recitation of the Gayatri, Om, hymns and mantras ends sin; with those beginning with Ka joined with seeds, the first and first with their endings;

अध्याय १७४

श्लोक 11

सूर्येशशक्तिश्रीशादिमन्त्राः कोट्यधिकाः पृथक् ।ॐह्रीमाद्याश् चतुर्थ्यन्ता नमोन्ताः सर्वकामदाः

sūryeśaśaktiśrīśādimantrāḥ koṭyadhikāḥ pṛthak / oṃhrīmādyāś caturthyantā namontāḥ sarvakāmadāḥ

हिन्दी अर्थ

समयपर यज्ञोपवीत ग्रहण न करना, बान्धवोंका त्याग, वेतन लेकर अध्यापन-कार्य करना, वेतनभोगी गुरुसे पढ़ना, न बेचनेयोग्य वस्तुको बेचना, सुवर्ण आदिकी खानका काम करना, विशाल यन्त्र चलाना, लता, गुल्म आदि ओषधियोंका नाश, स््त्रियोंके द्वारा जीविका उपार्जित करना, नित्य-नैमित्तिक कर्मका उल्लङ्घन, लकड़ीके लिये हरे-भरे वृक्षको काटना, अनेक स््त्रियोंका संग्रह,

English

the mantras of Sun, Ishvara, Shakti, Shri-Lord and others are over a crore, separately; "Om Hrim" beginning, ending in the dative, ending in "namah," give all desires.

अध्याय १७४

श्लोक 12

नृसिंहद्वादशाष्टार्णमालामन्त्राद्यघौघनुत् ।आग्नेयस्य पुराणस्य पठनं श्रवणादिकं

nṛsiṃhadvādaśāṣṭārṇamālāmantrādyaghaughanut / āgneyasya purāṇasya paṭhanaṃ śravaṇādikaṃ

हिन्दी अर्थ

स्त्री-निन्दकोंका संसर्ग, केवल अपने स्वार्थके लिये सम्पूर्ण-कमोंका आरम्भ करना, निन्दित अन्नका भोजन, अग्निहोत्रका परित्याग, देवता, ऋषि और पितरोंका ऋण न चुकाना, असत्

English

The Narasimha twelve-syllable and eight-syllable garland-mantras remove floods of sin; reading and hearing the Agneya Purana and the like.

अध्याय १७४

श्लोक 13

द्विविद्यारूपको विष्णुरग्निरूपस्तु गीयते ।परमात्मा देवमुखं सर्ववेदेषु गीयते

dvividyārūpako viṣṇuragnirūpastu gīyate / paramātmā devamukhaṃ sarvavedeṣu gīyate

हिन्दी अर्थ

शास्त्रोंको पढ़ना, दुःशीलपरायण होना, व्यसनमें आसक्ति, धान्य, धातु और पशुओंको चोरी, मद्यपान करनेवाली नारीसे समागम, स्त्री, शूद्र, वैश्य अथवा क्षत्रियका वध करना एवं नास्तिकता ये सब “उपपातक” हैं। ब्राह्मणको प्रहार करके रोगी बनाना, लहसुन और मद्य आदिको सूँघना, भिक्षासे निर्वाह करना, गुदामैथुन--ये सब ' जाति- भ्रंशकर पातक' बतलाये गये हैं। गर्दभ, घोड़ा,

English

Vishnu is sung as of the form of the two knowledges, of the form of fire; the Supreme Self, the mouth of the gods, is sung in all the Vedas.

अध्याय १७४

श्लोक 14

प्रवृत्तौ तु निवृत्तौ तु इज्यते भुक्तिमुक्तिदः(१) ।अग्निरूपस्य विष्णोर्हि हवनं ध्यानमर्चनं

pravṛttau tu nivṛttau tu ijyate bhuktimuktidaḥ(1) / agnirūpasya viṣṇorhi havanaṃ dhyānamarcanaṃ

हिन्दी अर्थ

उँट, मृग, हाथी, भेंड, बकरी, मछली, सर्प और नेबला-इनमेंसे किसीका वध 'संकरीकरण' कहलाता है। निन्दित मनुष्योंसे धनग्रहण, वाणिज्यवृत्ति, शूद्रको सेवा एवं असत्य-भाषण --

English

He is worshipped in engagement and in withdrawal, giver of enjoyment and liberation. Oblation, meditation and worship of Vishnu in fire form,

अध्याय १७४

श्लोक 15

जप्यं स्तुतिश् च प्रणतिः शारीराशेषाघौघनुत् ।दशस्वर्णानि दानानि धान्यद्वादशमेव च

japyaṃ stutiś ca praṇatiḥ śārīrāśeṣāghaughanut / daśasvarṇāni dānāni dhānyadvādaśameva ca

हिन्दी अर्थ

ये “अपात्रीकरण पातक' माने जाते हैं। कृमि और कोटोंका वध, मद्ययुक्त भोजन, फल, काष्ठ और पुष्पकी चोरी तथा धैर्यका परित्याग ये “मलिनीकरण पातक' कहलाते हैं॥ २४--४० ॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें महापातक आदिका वर्णन” नामक एक सौ अड़सठवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

repetition, praise and bowing remove floods of all bodily sin. Ten golden gifts and the twelve grain gifts,

अध्याय १७४

श्लोक 16

तुलापुरुषमुख्यानि महादानानि षोडश ।अन्नदानानि मुख्यानि सर्वाण्यघहराणि हि

tulāpuruṣamukhyāni mahādānāni ṣoḍaśa / annadānāni mukhyāni sarvāṇyaghaharāṇi hi

हिन्दी अर्थ

ब्रह्महत्या आदि विविध पापोंके प्रायश्चित्त

English

sixteen great gifts led by the Tulapurusha; the foremost gifts of food all remove sin.

अध्याय १७४

श्लोक 18

तिथिवारर्क्षसङ्क्रान्तियोगमन्वादिकालके ।ब्रतादि सूर्येशशक्तिश्रीशादेरघघातनं(२)

tithivārarkṣasaṅkrāntiyogamanvādikālake / bratādi sūryeśaśaktiśrīśāderaghaghātanaṃ(2)

हिन्दी अर्थ

पुष्कर कहते हैं- अब मैं आपको इन सब पापोंके प्रायश्चित्त बतलाता हुँ । ब्रह्महत्या करनेवाला अपनी शुद्धिके लिये भिक्षाका अन्न भोजन करते हुए एवं मृतकके सिरकी ध्वजा धारण करके, वनमें कुटी बनाकर, बारह वर्षतक निवास करे।

English

On lunar day, weekday, star, transit, yoga and Manvantara-beginnings, vows and the like of the Sun, Ishvara, Shakti, Shri-Lord and others destroy sin.

अध्याय १७४

श्लोक 19

गङ्गा गया प्रयागश् च काश्ययोध्या ह्य् अवम्तिका ।१ प्रवृत्तैस्तु निवृत्तैस्तु इज्यते भुक्तिमुक्तिद इति घ॥ , ङ॥ , झ॥ , ञ॥ च २ अघनाशनमिति ग॥ :प् १९१ कुरुक्षेत्रं पुष्करञ्च नैमिषं पुरुषोत्तमः

gaṅgā gayā prayāgaś ca kāśyayodhyā hy avamtikā / 1 pravṛttaistu nivṛttaistu ijyate bhuktimuktida iti gha.. , ṅa.. , jha.. , ña.. ca 2 aghanāśanamiti ga.. :p 191 kurukṣetraṃ puṣkarañca naimiṣaṃ puruṣottamaḥ

हिन्दी अर्थ

अथवा नीचे मुख करके धधकती हुई आगमें तीन बार गिरे। अथवा अश्वमेधयज्ञ या स्वर्गपर विजय प्रास करानेवाले गोमेध यज्ञका अनुष्ठान करे। अथवा किसी एक वेदका पाठ करता हुआ सौ

English

Ganga, Gaya, Prayaga, Kashi, Ayodhya and Avanti, Kurukshetra, Pushkara, Naimisha, Purushottama,

अध्याय १७४

श्लोक 20

शालग्रामप्रभासाद्यं तीर्थञ्चघोघघातकं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिरिति ध्यानमघौघनुत्

śālagrāmaprabhāsādyaṃ tīrthañcaghoghaghātakaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotiriti dhyānamaghaughanut

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणको दान कर दे। महापातको मनुष्य इन व्रतोंसे अपना पाप नष्ट कर डालते हैं गोवध करनेवाला एवं उपपातकी एक मासतक यवपान करके रहे। वह सिरका मुण्डन कराकर उस गौका चर्म ओढ़े हुए गोशालामें निवास करे। दिनके चतुर्थ प्रहरमें लवणहीन अन्नका नियमित

English

Shalagrama, Prabhasa and the rest, sacred places that destroy floods of sin; "I am Brahman, supreme light" — this meditation removes floods of sin.

अध्याय १७४

श्लोक 21

पुराणं ब्रह्म चाग्नेयं ब्रह्मा विष्णुर्महेश्वरः ।अवताराः सर्वपूजाः प्रतिष्ठाप्रतिमादिकं

purāṇaṃ brahma cāgneyaṃ brahmā viṣṇurmaheśvaraḥ / avatārāḥ sarvapūjāḥ pratiṣṭhāpratimādikaṃ

हिन्दी अर्थ

भोजन करे। फिर दो महीनोंतक इन्द्रियोंको वशमें करके नित्य गोमूत्रसे स्नान करे। दिनमें गौओंके पीछे-पीछे चले और खड़े होकर उनके खुरोंसे उड़ती हुई धूलिका पान करे। व्रतका

English

The Purana, Brahman and the Agneya; Brahma, Vishnu, Maheshvara; avatars; all worship; installation of images and the rest;

अध्याय १७४

श्लोक 22

ज्योतिःशास्त्रपुराणानि स्मृतयस्तु तपोव्रतं(१) ।अर्थशास्त्रञ्च सर्गाद्या आयुर्वेदो धनुर्मतिः

jyotiḥśāstrapurāṇāni smṛtayastu tapovrataṃ(1) / arthaśāstrañca sargādyā āyurvedo dhanurmatiḥ

हिन्दी अर्थ

पूर्णरूपसे अनुष्ठान करके एक बैलके साथ दस गौओंका दान करे। यदि इतना न दे सके तो वेदवेत्ता ब्राह्मणोंको अपना सर्वस्व-दान कर दे। यदि रोकनेसे गौ मर जाय तो एक चौथाई प्रायश्चित्त, बाँधनेके कारण मर जाय तो आधा प्रायश्चित्त, जोतनेके कारण मर जाय तो तीन पाद

English

astronomy, Puranas, Smritis, austerity and vows; the science of wealth, creation and the rest, Ayurveda, archery;

अध्याय १७४

श्लोक 23

शिक्षा छन्दो व्याकरणं निरुक्तञ्चाभिधानकं ।कल्पो न्यायश् च मीमांसा ह्य् अन्यत् सर्वं हरिः प्रभुः

śikṣā chando vyākaraṇaṃ niruktañcābhidhānakaṃ / kalpo nyāyaś ca mīmāṃsā hy anyat sarvaṃ hariḥ prabhuḥ

हिन्दी अर्थ

प्रायश्चित्त करना चाहिए। वन, दुर्गम स्थान, ऊबड़- खाबड़ भूमि और भयप्रद स्थानमें गौको मृत्यु हो जाय तो चौथाई प्रायश्चित्तका विधान है। आभूषणके लिये गलेमें घण्टा बाँधनेसे गौकी मृत्यु हो तो

English

phonetics, meter, grammar, etymology, lexicon, ritual, logic and Mimamsa — all else, Hari is the Lord.

अध्याय १७४

श्लोक 24

एके द्वयोर्यतो यस्मिन् यः सर्वमिति वेद यः ।तं दृष्ट्वान्यस्य पापानि विनश्यन्ति हरिश् च सः

eke dvayoryato yasmin yaḥ sarvamiti veda yaḥ / taṃ dṛṣṭvānyasya pāpāni vinaśyanti hariś ca saḥ

हिन्दी अर्थ

आधा प्रायश्चित्त करे। दमन करने, बाँधने, रोकने, गाड़ीमें जोतने, खूँटे, रस्सी अथवा फंदेमें बाँधनेपर यदि गौकी मृत्यु हो जाय तो तीन चरण प्रायश्चित्त करे। यदि गौका सींग अथवा हड्डी टूट न हो जाय, तबतक जौकी लप्सी खाकर रहे और गोमती विद्याका जप करे, गौकी स्तुति एवं गोमतीका स्मरण करे। यदि बहुत-से मनुष्योंके

English

He in whom the two are one, who knows all — seeing him, the sins of another perish; and he is Hari.

अध्याय १७४

श्लोक 25

विद्याष्टादशरूपश् च सूक्ष्मः स्थूलो ऽपरो हरिः ।ज्योतिः सदक्षरं ब्रह्म परं विष्णुश् च निर्मलः

vidyāṣṭādaśarūpaś ca sūkṣmaḥ sthūlo 'paro hariḥ / jyotiḥ sadakṣaraṃ brahma paraṃ viṣṇuś ca nirmalaḥ

हिन्दी अर्थ

अलग गोहत्याका एक-एक पाद प्रायश्चित्त करें।

English

Hari is of the form of the eighteen knowledges, subtle, gross, and other; light, true imperishable Brahman, supreme Vishnu, stainless.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 174
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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