Agni Purana· Agni Purāṇa
202
अध्याय 202 / 381

Adhyaya 202

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पूर्ण अध्याय पाठ23 श्लोक

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अध्याय २०२

श्लोक 1

पुष्पाध्यायकथनं अग्निर् उवाच पुष्पगन्धधूपदीपनैवेद्यैस्तुष्यते हरिः ।पुष्पाणि देवयोग्यानि ह्य् अयोग्यानि वदामि ते

puṣpādhyāyakathanaṃ agnir uvāca puṣpagandhadhūpadīpanaivedyaistuṣyate hariḥ / puṣpāṇi devayogyāni hy ayogyāni vadāmi te

हिन्दी अर्थ

३८२ » अग्निपुराण

English

Atimukta will also get the same fruit. The pdfald (flower) conveys one to the world of Visnu. One gets the world of Visnu with the karavlra (flowers). One becomes fortunate with japd (flowers).

अध्याय २०२

श्लोक 2

पुष्पं श्रेष्ठं मालती च तमालो भुक्तिमुक्तिमान् ।मल्लिका सर्वपापघ्नी यूथिका विष्णुलोकदा

puṣpaṃ śreṣṭhaṃ mālatī ca tamālo bhuktimuktimān / mallikā sarvapāpaghnī yūthikā viṣṇulokadā

हिन्दी अर्थ

महाव्रत अनन्त पुण्यका संचय करनेवाला है। फाल्गुनतक घृतका, चैत्रसे आषाढ़तक अगहनीके यह अभिलषित वस्तुकी प्राप्ति कराके उसे चावलका और श्रावणसे कार्तिकतक दुग्धका अक्षय बनाता है। भगवान् अनन्तके चरणकमल हवन करे। इस “अनन्त” व्रतके प्रभावसे आदिका पूजन करके रात्रिके समय तैलरहित ही युवनाश्चको मान्धाता पुत्ररूपमें प्राप्त हुए भोजन करे । भगवान् अनन्तके उद्देश्यसे मार्गशीर्षसे थे॥ १८--२३॥

English

One would reach the world of Visnu with the pdvanti, kubjaka and tagara (flowers). (One would reach) the world of Visnu with the karnikara. There would be destruction of sin with kurmfha.

अध्याय २०२

श्लोक 3

अतिमुक्तमयं तद्वत् पाटला विष्णुलोकदा ।करवीरैर् विष्णुलोकी जवापुष्पैश् च पुण्यवान्

atimuktamayaṃ tadvat pāṭalā viṣṇulokadā / karavīrair viṣṇulokī javāpuṣpaiś ca puṇyavān

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें “नक्षत्र-व्रतोंका वर्ण” नामक एक सौ छियानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

Atimukta likewise; Patala gives Vishnu's world; with oleander one reaches Vishnu's world, with hibiscus flowers one becomes meritorious;

अध्याय २०२

श्लोक 4

पावन्तीकुब्जकाद्यैश् च तगरैर् विष्णुलोकभाक् ।कर्णिकारैर् विष्णुलोकः करुण्ठैः पापनाशनं

pāvantīkubjakādyaiś ca tagarair viṣṇulokabhāk / karṇikārair viṣṇulokaḥ karuṇṭhaiḥ pāpanāśanaṃ

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं--वसिष्ठ अब मैं दिवस- सम्बन्धी ब्रतोंका वर्णन करता हूँ। सबसे पहले धेनुत्रत' के विषयमें बतलाता हूँ। जो मनुष्य विपुल स्वर्णराशिके साथ उभयमुखी गौका दान करता है और एक दिनतक पयोव्रतका आचरण करता है, वह परमपदको प्राप्त होता है। स्वर्णमय कल्पवृक्षका दान देकर तीन दिनतक ५ पयोव्रत' करनेवाला ब्रह्मपदको प्रास कर लेता है। इसे

English

with pavanti, kubjaka and the rest, and with tagara, one shares Vishnu's world; with karnikara Vishnu's world; with karunta, destruction of sin;

अध्याय २०२

श्लोक 5

पद्मैश् च केतकीभिश् च कुन्दपुष्पैः परा गतिः ।वाणपुष्पैर् वर्वराभिः कृष्णाभिर्हरिलोकभाक्

padmaiś ca ketakībhiś ca kundapuṣpaiḥ parā gatiḥ / vāṇapuṣpair varvarābhiḥ kṛṣṇābhirharilokabhāk

हिन्दी अर्थ

'कल्पवृक्ष-व्रत' कहा गया है। बीस पलसे अधिक स्वर्णकी पृथ्वीका निर्माण कराके दान दे और एक दिन पयोव्रतका अनुष्ठान करे। केवल दिनमें व्रत रखनेसे मनुष्य रुद्रलोकको प्राप्त होता

English

with lotuses, ketaki and kunda flowers the supreme goal; with vana flowers and black varvara one shares Hari's world;

अध्याय २०२

श्लोक 6

अशोकैस्तिलकैस्तद्वदटरूषभवैस् तथा ।मुक्तिभागी बिल्वपत्रैः शमीपत्रैः परा गतिः

aśokaistilakaistadvadaṭarūṣabhavais tathā / muktibhāgī bilvapatraiḥ śamīpatraiḥ parā gatiḥ

हिन्दी अर्थ

है। जो प्रत्येक पक्षकी तीन रात्रियोंमें एकभुक्त- व्रत' रखता है, वह दिनमें निराहार रहकर 'त्रिरात्र्रत' करनेवाला मनुष्य विपुल धन प्राप्त करता है। प्रत्येक मासमें तीन एकभुक्त नक्तव्रत करनेवाला गणपतिके सायुज्यको प्राप्त होता है। जो भगवान् जनार्दनके उद्देश्यसे 'त्रिरात्रब्रत'का अनुष्ठान करता है, वह अपने सौ कुलोंके साथ भगवान् श्रीहरिके वैकुण्ठधामको जाता है।

English

with ashoka, tilaka, likewise those from atarusha, one shares liberation; with bilva leaves, with shami leaves the supreme goal;

अध्याय २०२

श्लोक 7

विष्णुलोकी भृङ्गराजैस्तमालस्य दलैस् तथा ।तुलसी कृष्णगौराख्या कल्हारोत्पलकानि च

viṣṇulokī bhṛṅgarājaistamālasya dalais tathā / tulasī kṛṣṇagaurākhyā kalhārotpalakāni ca

हिन्दी अर्थ

व्रतानुरागी मनुष्य मार्गशीर्षके शुक्लपक्षको नवमीसे विधिपूर्वक त्रिरात्रव्रत प्रारम्भ करे। “नमो भगवते वासुदेवाय' मन्त्रका सहस्र अथवा सौ बार जप करे। अष्टमीको एकभुक्त (दिनमें एक बार

English

with bhringaraja and tamala leaves one reaches Vishnu's world; Tulasi, called black and white, kalhara and water lilies;

अध्याय २०२

श्लोक 8

पद्मं कोकनदं पुण्यं शताब्जमालया हरिः ।नीपार्जुनकदम्बैश् च(१) वकुलैश् च सुगन्धिभिः

padmaṃ kokanadaṃ puṇyaṃ śatābjamālayā hariḥ / nīpārjunakadambaiś ca(1) vakulaiś ca sugandhibhiḥ

हिन्दी अर्थ

भोजन करना) व्रत और नवमी, दशमी, एकादशीको उपवास करे। द्वादशीको भगवान् श्रीविष्णुका पूजन करे। यह ब्रत कार्तिकमें करना चाहिए। व्रतकी समासिपर ब्राह्मणोंको भोजन कराके, उन्हें वस्त्र, शय्या, आसन, छत्र, यज्ञोपवीत और पात्र दान करे। देते समय ब्राह्मणोंसे यह प्रार्थना करे-- इस दुष्कर व्रतके अनुष्ठानमें मेरे द्वारा जो त्रुटि हुई हो, आप लोगोंकी आज्ञासे वह परिपूर्ण

English

lotus, red lotus, holy; Hari with a garland of a hundred lotuses; with nipa, arjuna, kadamba and fragrant vakula;

अध्याय २०२

श्लोक 9

किंशुकैर् मुनिपुष्पैस्तु गोकर्णैर् नागकर्णकैः ।सन्ध्यापुष्पैर् बिल्वतकै रञ्जनीकेतकीभवैः(२)

kiṃśukair munipuṣpaistu gokarṇair nāgakarṇakaiḥ / sandhyāpuṣpair bilvatakai rañjanīketakībhavaiḥ(2)

हिन्दी अर्थ

हो जाय।' यह 'त्रिरात्रब्रत' करनेवाला इस लोकमें भोगोंका उपभोग करके मृत्युके पश्चात् भगवान् श्रीविष्णुके सांनिध्यको प्राप्त करता है॥ १--११॥

English

with kimshuka, muni-flowers, gokarna, nagakarna, sandhya flowers, bilvataka, ranjani, ketaki-born,

अध्याय २०२

श्लोक 10

कुष्माण्डतिमिरोत्थैश् च कुशकाशशरोद्भवैः ।द्यूतादिभिर्मरुवकैः पत्रैरन्यैः सुगन्धिकैः

kuṣmāṇḍatimirotthaiś ca kuśakāśaśarodbhavaiḥ / dyūtādibhirmaruvakaiḥ patrairanyaiḥ sugandhikaiḥ

हिन्दी अर्थ

अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले कार्तिकब्रतके विषयमै कहता हूँ। दशमीको पञ्चगव्यका प्राशन करके एकादशीको उपवास करे। इस ब्रतके पालनमें कार्तिके शुक्लपक्षको द्वादशीको श्रीविष्णुका पूजन करनेवाला मनुष्य विमानचारी देवता होता है। चेत्रमें त्रिरात्रव्रत करके केवल रात्रिके समय भोजन करनेवाला एवं ब्रतकी समासिमें पाँच बकरियोंका दान देनेवाला

English

kushmanda, timira-born, those from kusha, kasha and reed, dyuta and the rest, maruvaka, and other fragrant leaves —

अध्याय २०२

श्लोक 11

भुक्तिमुक्तिः पापहानिर्भक्त्या सर्वैस्तु तुष्यति ।स्वर्णलक्षाधिकं पुष्पं माला कोटिगुणाधिका

bhuktimuktiḥ pāpahānirbhaktyā sarvaistu tuṣyati / svarṇalakṣādhikaṃ puṣpaṃ mālā koṭiguṇādhikā

हिन्दी अर्थ

सुखी होता है। कार्तिकके शुक्लपक्षको घष्ठीसे आरम्भ करके तीन दिनतक केवल दुग्ध पीकर रहे। फिर तीन दिनतक उपवास करे। इसे ' माहेन्द्रकृच्छु' कहा जाता है । कार्तिकके शुक्लपक्षको एकादशीको

English

enjoyment, liberation and loss of sin; he is pleased by all with devotion. A flower is more than a lakh of gold; a garland a crore-fold more;

अध्याय २०२

श्लोक 12

स्ववने ऽन्यवने पुष्पैस्त्रिगुणं वनजैः फलं(३) ।विशीर्णैर्नार्चयेद्विष्णुन्नाधिकाङ्गैर्न मोटितैः

svavane 'nyavane puṣpaistriguṇaṃ vanajaiḥ phalaṃ(3) / viśīrṇairnārcayedviṣṇunnādhikāṅgairna moṭitaiḥ

हिन्दी अर्थ

आरम्भ करके ' पञ्चरात्रत्रत' करे। प्रथम दिन दुग्धपान करे, दूसरे दिन दधिका आहार करे, फिर तीन दिन क्रमशः यवकी लपसी, शाक, दधि, दुग्ध, घृत उपवास करे। यह अर्थप्रद ' भास्करकृच्छ' कहलाता और जल-इन वस्तुओंका आहार करे। इसे है। शुक्लपक्षकी पञ्चमीसे आरम्भ करके छ: दिनतक 'सांतपनकृच्छु' कहा गया है॥ १२--१६॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें 'दिवस-सम्बन्धी व्रतका वर्णन” नामक

English

in one's own grove or another's grove, with forest-grown flowers the fruit is threefold. One should not worship Vishnu with scattered, over-limbed or crushed flowers;

अध्याय २०२

श्लोक 13

काञ्चनारैस्तथोन्मत्तैर्गिरिकर्णिकया तथा ।१ मुक्तिभागो कदम्बैश्चेति ङ॥ २ रजनीकेतकीभवैरिति ख॥ , ङ॥ , छ॥ , ज॥ च ३ जलजैः फलमिति ङ॥ :प् २४१ कुटजैः शाल्मलीयैश् च(१) शिरीषैर् नरकादिकं

kāñcanāraistathonmattairgirikarṇikayā tathā / 1 muktibhāgo kadambaiśceti ṅa.. 2 rajanīketakībhavairiti kha.. , ṅa.. , cha.. , ja.. ca 3 jalajaiḥ phalamiti ṅa.. :p 241 kuṭajaiḥ śālmalīyaiś ca(1) śirīṣair narakādikaṃ

हिन्दी अर्थ

एक सौ सत्तानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

with kanchanara, likewise unmatta, girikarnika, kutaja, shalmali and shirisha — hell and the like.

अध्याय २०२

श्लोक 14

सुगन्धैर्ब्रह्मपद्मैश् च(२) पुष्पैर्नीलोत्पलैर्हरिः(३) ।अर्कमन्दारधुस्तूरकुसुमैरर्च्यते हरः

sugandhairbrahmapadmaiś ca(2) puṣpairnīlotpalairhariḥ(3) / arkamandāradhustūrakusumairarcyate haraḥ

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं- मुनिश्रेष्ठ! अब मैं मास-ब्रतोंका वर्णन करूँगा, जो भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले हैं। आषाढ़से प्रारम्भ होनेवाले चातुर्मास्यमें अभ्यङ्ग (मालिश और उबटन)-का त्याग करे। इससे मनुष्य उत्तम बुद्धि प्राप्त करता है। वैशाखमेँ पुष्परेणुतकका परित्याग करके गोदान करनेवाला राज्य प्रास करता है। एक मास उपवास रखकर गोदान करनेवाला इस भीमव्रतके

English

With fragrant Brahma-lotuses and with blue-lotus flowers, Hari; with arka, mandara and dhattura flowers Hara is worshipped;

अध्याय २०२

श्लोक 15

कुटजैः कर्कटीपुष्पैः केतकीन्न शिवे ददेत् ।कुष्माण्डनिम्बसम्भूतं पैशाचं गन्धवर्जितं

kuṭajaiḥ karkaṭīpuṣpaiḥ ketakīnna śive dadet / kuṣmāṇḍanimbasambhūtaṃ paiśācaṃ gandhavarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

प्रभावसे श्रीहरिस्वरूप हो जाता है। आघाढ्से प्रारम्भ होनेवाले चातुर्मास्यमें नियमपूर्वक प्रात:स्नान करनेवाला विष्णुलोकको जाता है। माघ अथवा चैत्र मासकी तृतीयाको गुड्-धेनुका दान दे, इसे

English

one should not give kutaja, karkati flowers or ketaki to Shiva; what is born of kushmanda or neem is demonic and fragrance-less.

अध्याय २०२

श्लोक 16

अहिंसा इन्द्रियजयः(४) क्षान्तिर्ज्ञानं(५) दया श्रुतं ।भावाष्तपुष्पैः सम्पूज्य देवान् स्याद् भुक्तिमुक्तिभाक्

ahiṃsā indriyajayaḥ(4) kṣāntirjñānaṃ(5) dayā śrutaṃ / bhāvāṣtapuṣpaiḥ sampūjya devān syād bhuktimuktibhāk

हिन्दी अर्थ

'गुड्व्रत' कहा गया है। इस महान् व्रतका अनुष्ठान करनेवाला शिवस्वरूप हो जाता है। मार्गशीर्ष आदि मासोंमें ' नक्तब्रत' (रात्रिमें एक बार भोजन) करनेवाला विष्णुलोकका अधिकारी होता है। “एकभुक्त व्रत'का पालन करनेवाला उसी प्रकार पृथक् रूपसे द्वादशीव्रतका भी पालन करे। “फलब्रत' करनेवाला चातुर्मास्यमें फलोंका त्याग करके उनका दान करे

English

Non-violence, victory over the senses, forbearance, knowledge, compassion, learning — having worshipped the gods with flowers of feeling one gains enjoyment and liberation.

अध्याय २०२

श्लोक 17

अहिंसा प्रथमं पुष्पं पुष्पमिन्द्रियनिग्रहः ।सर्वपुष्पं दया भूते पुष्पं शान्तिर्विशिष्यते

ahiṃsā prathamaṃ puṣpaṃ puṣpamindriyanigrahaḥ / sarvapuṣpaṃ dayā bhūte puṣpaṃ śāntirviśiṣyate

हिन्दी अर्थ

श्रावणसे प्रारम्भ होनेवाले चातुर्मास्यमें व्रतोंके अनुष्ठानसे व्रतकर्ता सब कुछ प्राप्त कर लेता है। चातुर्मास्य-ब्रतोंका इस प्रकार विधान करे आषाढके शुक्लपक्षकी एकादशीको उपवास रखे।

English

Non-violence is the first flower; restraint of the senses a flower; compassion for beings the flower of all; peace is the most distinguished flower;

अध्याय २०२

श्लोक 18

शमः पुष्पं तपः पुष्पं ध्यानं पुष्पं चसप्तमं ।सत्यञ्चैवाष्टमं पुष्पमेतैस्तुष्यति केशवः

śamaḥ puṣpaṃ tapaḥ puṣpaṃ dhyānaṃ puṣpaṃ casaptamaṃ / satyañcaivāṣṭamaṃ puṣpametaistuṣyati keśavaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रायः आषाढ्में प्राप्त होनेवाली कर्क-संक्रान्तिमें श्रीहरिका पूजन करे और कहे--' भगवन्! मैंने आपके सम्मुख यह व्रत ग्रहण किया है। केशव! आपकी प्रसन्नतासे इसकी निर्विघ्न सिद्धि हो। देवाधिदेव जनार्दन! यदि इस व्रतके ग्रहणके अनन्तर इसकी अपूर्णतामें ही मेरी मृत्यु हो जाय, तो आपके कृपा-प्रसादसे यह व्रत सम्पूर्ण हो।'

English

calm a flower, austerity a flower, meditation the seventh flower, and truth the eighth flower; with these Keshava is pleased.

अध्याय २०२

श्लोक 19

एतैरेवाष्टभिः पुष्पैस्तुष्यत्येवार्चितो हरिः ।पुष्पान्तराणि सन्त्यत्र वाह्यानि मनुजोत्तम

etairevāṣṭabhiḥ puṣpaistuṣyatyevārcito hariḥ / puṣpāntarāṇi santyatra vāhyāni manujottama

हिन्दी अर्थ

व्रत करनेवाला द्विज मांस आदि निषिद्ध वस्तुओं और तेलका त्याग करके श्रीहरिका यजन करे। एक दिनके अन्तरसे उपवास रखकर त्रिरात्रत्रत करनेवाला विष्णुलोकको प्राप्त होता है। “चान्द्रायण

English

Hari worshipped with just these eight flowers is pleased. There are other, external flowers here, best of men;

अध्याय २०२

श्लोक 20

भक्त्या दयान्वितैर्विष्णुः पूजितः परितुष्यति(६) ।वारुणं सलिलं पुष्पं सौम्यं घृतपयोदधि

bhaktyā dayānvitairviṣṇuḥ pūjitaḥ parituṣyati(6) / vāruṇaṃ salilaṃ puṣpaṃ saumyaṃ ghṛtapayodadhi

हिन्दी अर्थ

व्रत' करनेवाला विष्णुलोकका और “मौन व्रत' करनेवाला मोक्षका अधिकारी होता है । ' प्राजापत्य व्रत' करनेवाला स्वर्गलोकको जाता है । सत्तू और यवका भक्षण करके, दुग्ध आदिका आहार करके, अथवा पञ्चगव्य एवं जल पीकर कृच्छुत्रतोंका अनुष्ठान करनेवाला स्वर्गको प्राप्त होता है। शाक, मूल और फलके आहारपूर्वक कृच्छूब्रत करनेवाला मनुष्य वैकुण्ठको जाता है। मांस और रसका

English

Vishnu worshipped with devotion and compassion is satisfied. Water is the Varuna flower; ghee, milk and curd the Soma;

अध्याय २०२

श्लोक 21

प्राजापत्यं तथान्नादि आग्नेयं धूपदीपकं ।फलपुष्पादिकञ्चैव वानस्पत्यन्तु पञ्चमं

prājāpatyaṃ tathānnādi āgneyaṃ dhūpadīpakaṃ / phalapuṣpādikañcaiva vānaspatyantu pañcamaṃ

हिन्दी अर्थ

परित्याग करके जौका भोजन करनेवाला श्रीहरिके सांनिध्यको प्राप्त करता है

English

food and the like is Prajapati's; incense and lamp are Agni's; fruits, flowers and the like the Vanaspatya, fifth;

अध्याय २०२

श्लोक 22

पार्थिवं कुशमूलाद्यं वायव्यं गन्धचन्दनं ।१ शाल्मलिजैश्चेति ख॥ , ग॥ , ङ॥ च २ सुगन्धैः पत्रपुष्पैश्चेति ङ॥ ३ पूज्यो नीलोत्पलैर्हरिरिति ख॥ , ग॥ , ङ॥ , ज॥ च ४ अहिंसा इन्द्रियययम इति ग॥ ५ क्षान्तिर्दानमिति ख॥ ६ अहिंसा प्रथमं पुष्पमित्यादिः, पूजितः परितुष्यति इत्य् अन्तः पाठः ख॥ , ग॥ , घ॥ , ङ॥ , छ॥ , ज॥ , ञ॥ , ट॥ पुस्तकेषु नास्ति :प् २४२ श्रद्धाख्यं विष्णुपुष्पञ्च सर्वदा चाष्टपुष्पिकाः

pārthivaṃ kuśamūlādyaṃ vāyavyaṃ gandhacandanaṃ / 1 śālmalijaiśceti kha.. , ga.. , ṅa.. ca 2 sugandhaiḥ patrapuṣpaiśceti ṅa.. 3 pūjyo nīlotpalairhaririti kha.. , ga.. , ṅa.. , ja.. ca 4 ahiṃsā indriyayayama iti ga.. 5 kṣāntirdānamiti kha.. 6 ahiṃsā prathamaṃ puṣpamityādiḥ, pūjitaḥ parituṣyati ity antaḥ pāṭhaḥ kha.. , ga.. , gha.. , ṅa.. , cha.. , ja.. , ña.. , ṭa.. pustakeṣu nāsti :p 242 śraddhākhyaṃ viṣṇupuṣpañca sarvadā cāṣṭapuṣpikāḥ

हिन्दी अर्थ

अब मैं “कौमुदव्रत'का वर्णन करूँगा। आश्विनके शुक्लपक्षकी एकादशीको उपवास रखे । द्वादशीको श्रीविष्णुके अङ्गोंमें चन्दनादिका अनुलेपन करके कमल और उत्पल आदि पुष्पोंसे उनका पूजन करे। तदनन्तर तिल-तैलसे परिपूर्ण दीपक और घृतसिद्ध पक्कान्नका नैवेद्य समर्पित करे। श्रीविष्णुको मालतीपुष्पोंको माला भी निवेदन करे

English

the root of kusha and the like is earthly; scent and sandal is Vayu's; the flower called faith of Vishnu; always the eight flowers;

अध्याय २०२

श्लोक 23

आसनं मूर्तिपञ्चाङ्गं(१) विष्णुर्वा चाष्टपुष्पिकाः ।विष्णोस्तु वासुदेवाद्यैरीशानाद्यैः शिवस्य वा

āsanaṃ mūrtipañcāṅgaṃ(1) viṣṇurvā cāṣṭapuṣpikāḥ / viṣṇostu vāsudevādyairīśānādyaiḥ śivasya vā

हिन्दी अर्थ

नमो वासुदेवाय' इस मन्त्रसे व्रतका विसर्जन करे। इस प्रकार ' कौमुदव्रत'का अनुष्ठान करनेवाला

English

seat, the five-limbed image, or Vishnu, the eight flowers; for Vishnu with Vasudeva and the rest, or for Shiva with Ishana and the rest.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 202
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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