Agni Purana· Agni Purāṇa
218
अध्याय 218 / 381

Adhyaya 218

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अध्याय २१८

श्लोक 1

राजाभिषेककथनं अग्निर् उवाच पुष्करेण च रामाय राजधर्मं हि पृच्छते ।यथादौ कथितं तद्वद्वशिष्ट कथयामि ते

rājābhiṣekakathanaṃ agnir uvāca puṣkareṇa ca rāmāya rājadharmaṃ hi pṛcchate / yathādau kathitaṃ tadvadvaśiṣṭa kathayāmi te

हिन्दी अर्थ

देवियाँ तुम्हारी रक्षा करें और लवण, इक्षुरस, सुरा, घृत, दधि, दुग्ध तथा जलसे भरे हुए समुद्र तुम्हें शान्ति प्रदान करें। चारों समुद्र और नाना प्रकारके तीर्थ तुम्हारी रक्षा करें। पुष्कर, प्रयाग, प्रभास, नैमिषारण्य, गयाशीर्ष, ब्रह्मशिरतीर्थ, उत्तरमानस, कालोदक, नन्दिकुण्ड, पञ्चनदतीर्थ, भृगुतीर्थ,

English

I shall describe the duties of a king (foremost) among the host of other duties. The king should be the slayer of the enemy, protector of the subjects and administer justice properly.

अध्याय २१८

श्लोक 2

पुष्कर उवाच राजधर्मं प्रवक्ष्यामि सर्वस्मात् राजधर्मतः ।राजा भवेत्(१) शत्रुहन्ता प्रजापालः सुदण्डवान्

puṣkara uvāca rājadharmaṃ pravakṣyāmi sarvasmāt rājadharmataḥ / rājā bhavet(1) śatruhantā prajāpālaḥ sudaṇḍavān

हिन्दी अर्थ

तीर्थ, कालञ्जर, केदार, रुद्रकोटि, महातीर्थ वाराणसी, बदरिकाश्रम, द्वारका, श्रीशैल, पुरुषोत्तमतीर्थ, शालग्राम, वाराह, सिंधु और समुद्रके संगमका तीर्थ, फल्गुतीर्थ, विन्दुसर, करवीराश्रम, गङ्गानदी,

English

Made up of two lines intersecting at right angles having perpendi¬ cular lines in the clock-wise direction at the ends -of two linai.

अध्याय २१८

श्लोक 3

पालयिष्यति वः सर्वान् धर्मस्थान् व्रतमाचरेत् ।संवत्सरं स वृणुयात् पुरोहितमथ द्विजं(२)

pālayiṣyati vaḥ sarvān dharmasthān vratamācaret / saṃvatsaraṃ sa vṛṇuyāt purohitamatha dvijaṃ(2)

हिन्दी अर्थ

सरस्वती, शतद्रु, गण्डकी, अच्छोदा, विपाशा, वितस्ता, देविका नदी, कावेरी, वरुणा, निश्चिरा, इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें 'अभिषेक-सम्बन्धी मन्त्रोका वर्णन” नामक दो सौ उन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

V. 10.97. 1.

अध्याय २१८

श्लोक 4

मन्त्रिणश्चाखिलात्मज्ञान्महिषीं धर्मलक्षणां ।संवत्सरं नृपः काले ससम्भारो ऽभिषेचनं

mantriṇaścākhilātmajñānmahiṣīṃ dharmalakṣaṇāṃ / saṃvatsaraṃ nṛpaḥ kāle sasambhāro 'bhiṣecanaṃ

हिन्दी अर्थ

राजाके द्वारा अपने सहायकोंकी नियुक्ति और उनसे काम लेनेका ढंग

English

BV. 10.97.3.

अध्याय २१८

श्लोक 5

कुर्यान्मृते नृपे नात्र कालस्य नियमः स्मृतः ।तिलैः सिद्धार्थकैः स्नानं सांवत्सरपुरोहितौ

kuryānmṛte nṛpe nātra kālasya niyamaḥ smṛtaḥ / tilaiḥ siddhārthakaiḥ snānaṃ sāṃvatsarapurohitau

हिन्दी अर्थ

पुष्कर कहते हैं- अभिषेक हो जानेपर उत्तम राजाके लिये यह उचित है कि वह उसे ब्राह्मण या क्षत्रियको, जो कुलीन और नीतिशास्त्रका ज्ञाता हो, अपना सेनापति बनाना चाहिए। द्वारपाल भी नीतिज्ञ होना चाहिए। इसी प्रकार दूतको भी मृदुभाषी, अत्यन्त बलवान्

English

AV. 5. 17,9.

अध्याय २१८

श्लोक 6

घोषयित्वा जयं राज्ञो राजा भद्रासने स्थितः ।अभयं घोषयेद् दुर्गान्मोचयेद्राज्यपालके

ghoṣayitvā jayaṃ rājño rājā bhadrāsane sthitaḥ / abhayaṃ ghoṣayed durgānmocayedrājyapālake

हिन्दी अर्थ

और सामर्थ्यवान् होना उचित है

English

BV. 10.103. 1.

अध्याय २१८

श्लोक 7

पुरोधसाभिषेकात् प्राक् कार्यैन्द्री शान्तिरेव च ।उपवास्यभिषेकाहे वेद्यग्नौ जुहुयान्मनून्(३)

purodhasābhiṣekāt prāk kāryaindrī śāntireva ca / upavāsyabhiṣekāhe vedyagnau juhuyānmanūn(3)

हिन्दी अर्थ

राजाको पान देनेवाला सेवक, स्त्री या पुरुष कोई भी हो सकता है। इतना अवश्य है कि उसे राजभक्त, क्लेश-सहिष्णु और स्वामीका प्रिय होना चाहिए। सांधिविग्रहिक (परराष्ट्रसचिव') उसे बनाना चाहिए, जो संधि, विग्रह, यान, आसन, द्वैधीभाव और समाश्रय इन छहों गुणोंका समय और अवसरके अनुसार उपयोग करनेमें निपुण हो। राजाकी रक्षा करनेवाला प्रहरी हमेशा

English

MS. 2. 6. 3.

अध्याय २१८

श्लोक 8

१ राजा हरिति छ॥ , ख॥ , घ॥ , ज॥ , ञ॥ , ट॥ च २ पुरोहितमथर्त्विजमिति ख॥ , घ॥ , छ॥ , ज॥ , ट॥ च ३ जुहुयादमूनिति ङ॥ :प् २९१ वैष्णवानैन्द्रमन्त्रांस्तु सावित्रीन् वैश्वदैवतान् ।सौम्यान् स्वस्त्ययनं शर्मायुष्याभयदान्मनून्

1 rājā hariti cha.. , kha.. , gha.. , ja.. , ña.. , ṭa.. ca 2 purohitamathartvijamiti kha.. , gha.. , cha.. , ja.. , ṭa.. ca 3 juhuyādamūniti ṅa.. :p 291 vaiṣṇavānaindramantrāṃstu sāvitrīn vaiśvadaivatān / saumyān svastyayanaṃ śarmāyuṣyābhayadānmanūn

हिन्दी अर्थ

हाथमें तलवार लिये रहे। सारथि सेना आदिके

English

Kh. S. 87. 9.

अध्याय २१८

श्लोक 9

अपराजिताञ्च कलसं वह्नेर्दक्षिणपार्श्वगं ।सम्पातवन्तं हैमञ्च पूजयेद्गन्धपुष्पकैः

aparājitāñca kalasaṃ vahnerdakṣiṇapārśvagaṃ / sampātavantaṃ haimañca pūjayedgandhapuṣpakaiḥ

हिन्दी अर्थ

राजाका हितैषी और चतुर होनेके साथ ही सदा रसोईघरमें उपस्थित रहना चाहिए। राजसभाके सदस्य धर्मके ज्ञाता हों। लिखनेका काम करनेवाला पुरुष कई प्रकारके अक्षरोंका ज्ञाता तथा हितैषी हो। द्वार-रक्षामें नियुक्त पुरुष ऐसे होने चाहिए, जो स्वामीके हितमें संलग्न हों और इस बातकी अच्छी तरह जानकारी रखें कि महाराज कब-कब उन्हें अपने पास बुलाते हैं। धनाध्यक्ष ऐसा मनुष्य

English

BV. 10.173. 4.

अध्याय २१८

श्लोक 10

प्रदक्षिणावर्तशिखस्तप्तजाम्बूनदप्रभः ।रथौघमेघनिर्घोषो विधूमश् च हुताशनः

pradakṣiṇāvartaśikhastaptajāmbūnadaprabhaḥ / rathaughameghanirghoṣo vidhūmaś ca hutāśanaḥ

हिन्दी अर्थ

हो, जो रत्न आदिकी परख कर सके और धन बढ़ानेके साधनोंमें तत्पर रहे। राजवैद्यको आयुर्वेदका पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। इसी प्रकार गजाध्यक्षको भी गजविद्यासे परिचित होना आवश्यक है।

English

With flame turning to the right, bright as molten gold, with sound like a mass of chariots and clouds, smokeless is the fire;

अध्याय २१८

श्लोक 11

अनुलोमः सुगन्धश् च स्वस्तिकाकारसन्निभः ।प्रसन्नार्चिर्महाज्वालः स्फुलिङ्गरहितो हितः

anulomaḥ sugandhaś ca svastikākārasannibhaḥ / prasannārcirmahājvālaḥ sphuliṅgarahito hitaḥ

हिन्दी अर्थ

हाथी-सवार परिश्रमसे थकनेवाला न हो। घोड़ोंका अध्यक्ष अश्वविद्याका विद्वान् होना चाहिए। दुर्गके अध्यक्षको भी हितैषी एवं बुद्धिमान् होना आवश्यक है। शिल्पी अथवा कारीगर वास्तुविद्याका ज्ञाता हो। जो मशीनसे हथियार चलाने, हाथसे शस्त्रोंका प्रयोग करने, शस्त्रको न छोड़ने, छोड़े हुए शस्त्रको रोकने या निवारण करनेमें तथा युद्धको कलामें कुशल और राजाका हित चाहनेवाला हो,

English

favorable, fragrant, shaped like a swastika, of clear flame, great-flamed, free of sparks, beneficial;

अध्याय २१८

श्लोक 12

न व्रजेयुश् च मध्येन मार्जारमृगपक्षिणः ।पर्वताग्रमृदा तावन्मूर्धानं शोधयेन्नृपः

na vrajeyuś ca madhyena mārjāramṛgapakṣiṇaḥ / parvatāgramṛdā tāvanmūrdhānaṃ śodhayennṛpaḥ

हिन्दी अर्थ

उसे ही अस्त्राचार्यके पदपर नियुक्त करना चाहिए । रनिवासका अध्यक्ष वृद्ध पुरुषको बनाना चाहिए। पचास वर्षकी स्त्रियाँ और सत्तर वर्षके बूढ़े पुरुष अन्तःपुरके सभी कार्योमें लगाये जा सकते हैं।

English

cats, deer and birds should not pass through the middle. The king should purify his head with earth from a mountain peak,

अध्याय २१८

श्लोक 13

वल्मीकाग्रमृदा कर्णौ वदनं केशवालयात् ।इन्द्रालयमृदा(१) ग्रीवां हृदयन्तु नृपाजिरात्

valmīkāgramṛdā karṇau vadanaṃ keśavālayāt / indrālayamṛdā(1) grīvāṃ hṛdayantu nṛpājirāt

हिन्दी अर्थ

शस्त्रागारमें ऐसे पुरुषको रखना चाहिए, जो सदा सजग रहकर पहरा देता रहे। भृत्योंके कार्योंको समझकर उनके लिये तदनुकूल जीविकाका प्रबन्ध करना उचित है। राजाको चाहिए कि वह उत्तम, मध्यम और निकृष्ट कार्योका विचार करके उनमें ऐसे ही पुरुषोंको नियुक्त करे। पृथ्वीपर विजय चाहनेवाला भूपाल हितैषी सहायकोंका संग्रह करे। धर्मके कार्योमें धर्मात्मा पुरुषोंको, युद्धमें

English

ears with earth from an anthill top, face with earth from Keshava's temple, neck with earth from Indra's temple, heart with earth from the king's courtyard;

अध्याय २१८

श्लोक 14

करिदन्तोद्धृतमृदा दक्षिणन्तु तथा भुजं ।वृषशृङ्गोद्धृतमृदा वामञ्चैव तथा भुजं

karidantoddhṛtamṛdā dakṣiṇantu tathā bhujaṃ / vṛṣaśṛṅgoddhṛtamṛdā vāmañcaiva tathā bhujaṃ

हिन्दी अर्थ

शूरवीरोंको और धनोपार्जनके कार्योमें अर्थकुशल व्यक्तियोंको लगावे। इस बातका ध्यान रखे कि सभी कायाँमें नियुक्त हुए पुरुष शुद्ध आचार-

English

the right arm with earth raised by an elephant's tusk, likewise the left arm with earth raised by a bull's horn;

अध्याय २१८

श्लोक 15

सरोमृदा तथा पृष्ठमुदरं सङ्गमान् मृदा ।नदीतटद्वयमृदा पार्श्वे संशोधयेत्तथा(२)

saromṛdā tathā pṛṣṭhamudaraṃ saṅgamān mṛdā / nadītaṭadvayamṛdā pārśve saṃśodhayettathā(2)

हिन्दी अर्थ

स्त्रियोंकी देख-भालमें नपुंसकोंको नियुक्त करे। कठोर कर्मोमें तीखे स्वभाववाले पुरुषोंको लगावे । तात्पर्यं यह कि राजा धर्म-अर्थ अथवा कामके साधनमें जिस पुरुषको जहाँके लिये शुद्ध एवं उपयोगी समझे, उसकी वहीँ नियुक्ति करे। निकृष्ट श्रेणीके कामोंमें बैसे ही पुरुषोंको लगावे ।

English

the back with earth from a lake, the belly with earth from a confluence, the sides with earth from both river banks;

अध्याय २१८

श्लोक 16

वेश्याद्वारमृदा राज्ञः कटिशौचं विधीयते ।यज्ञस्थानात्तथैवोरू गोस्थानाज्जानुनी तथा

veśyādvāramṛdā rājñaḥ kaṭiśaucaṃ vidhīyate / yajñasthānāttathaivorū gosthānājjānunī tathā

हिन्दी अर्थ

वह मन्त्री, जिसको दूसरे देशके राजाओंसे सुलहकी बातचीत करने या युद्ध छेड़नेका अधिकार दिया गया हो।

English

for the king the cleansing of the waist is prescribed with earth from a courtesan's door; the thighs from a sacrifice place, the knees from a cow-pen;

अध्याय २१८

श्लोक 17

अश्वस्थानात्तथा जङ्घे रथचक्रमृदाङ्घ्रिके ।मूर्धानं पञ्चगव्येन भद्रासनगतं नृपं

aśvasthānāttathā jaṅghe rathacakramṛdāṅghrike / mūrdhānaṃ pañcagavyena bhadrāsanagataṃ nṛpaṃ

हिन्दी अर्थ

राजाके लिये उचित है कि वह तरह-तरहके उपायोंसे मनुष्योंकी परीक्षा करके उन्हें यथायोग्य कार्योमें नियोजित करे। मन्त्रीसे सलाह ले, कुछ व्यक्तियोंको यथोचित वृत्ति देकर हाथियोंके जंगलमें तैनात करे तथा उनका पता लगाते रहनेके लिये कई उत्साही अध्यक्षोंको नियुक्त करे। जिसको जिस काममें निपुण देखे, उसको उसीमें लगावे और बाप-दादोंके समयसे चले आते हुए भृत्योंको

English

the shanks from a horse-stall, the feet with earth of a chariot wheel; the king seated on a Bhadrasana, the head with pancha-gavya.

अध्याय २१८

श्लोक 18

अभिषिञ्चेदमात्यानां चतुष्टयमथो घटैः ।१ चन्द्रालयमृदेति ज॥ २ सरोमृदेत्यादिः संशोधयेत्तथेत्यन्तः पाठः ज॥ पुस्तके नास्ति :प् २९२ पूर्वतो हेमकुम्भेन घृतपूर्णेन ब्राहणः

abhiṣiñcedamātyānāṃ catuṣṭayamatho ghaṭaiḥ / 1 candrālayamṛdeti ja.. 2 saromṛdetyādiḥ saṃśodhayettathetyantaḥ pāṭhaḥ ja.. pustake nāsti :p 292 pūrvato hemakumbhena ghṛtapūrṇena brāhaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

सभी तरहके कार्योमें नियुक्त करे। केवल उत्तराधिकारीके कार्योमें उनकी नियुक्ति नहीं करे; क्योंकि वहाँ वे सब-के-सब एक समान हैं । जो लोग दूसरे राजाके आश्रयसे हटकर अपने

English

Then the four ministers should anoint with pots: from the east with a golden pot full of ghee, the Brahmin;

अध्याय २१८

श्लोक 19

रूप्यकुम्भेन याम्ये च क्षीरपूर्णेन क्षत्रियः ।दध्ना च ताम्रकुम्भेन वैश्यः पश्चिमगेन च

rūpyakumbhena yāmye ca kṣīrapūrṇena kṣatriyaḥ / dadhnā ca tāmrakumbhena vaiśyaḥ paścimagena ca

हिन्दी अर्थ

पास शरण लेनेको इच्छासे आवें, वे दुष्ट हों या होनेपर उनका विश्वास न करे और उनकी जीविकावृत्तिको अपने ही अधीन रखे। जो लोग दूसरे देशोंसे अपने पास आये हों, उनके विषयमें गुप्तचरोंद्वारा सभी बातें जानकर उनका यथावत्

English

from the south with a silver pot full of milk, the Kshatriya; with a copper pot with curds, the Vaishya, from the west;

अध्याय २१८

श्लोक 20

मृण्मयेन जलेनोदक् शूद्रामात्यो ऽभिषिचयेत् ।ततो ऽभिषेकं नृपतेर्बह्वृचप्रवरो द्विजः

mṛṇmayena jalenodak śūdrāmātyo 'bhiṣicayet / tato 'bhiṣekaṃ nṛpaterbahvṛcapravaro dvijaḥ

हिन्दी अर्थ

सत्कार करे। शत्रु, अग्नि, विष, साँप और

English

from the north the Shudra minister should anoint with water in a clay pot. Then the consecration of the king, the Rigvedic best Brahmin,

अध्याय २१८

श्लोक 21

कुर्वीत मधुना विप्रश्छन्दोगश् च कुशोदकैः ।सम्पातवन्तं कलशं तथा गत्वा पुरोहितः

kurvīta madhunā vipraśchandogaś ca kuśodakaiḥ / sampātavantaṃ kalaśaṃ tathā gatvā purohitaḥ

हिन्दी अर्थ

दूसरी ओर, इनमें दुष्ट भृत्योंको ही अधिक भयंकर समझना चाहिए। राजाको चारचक्षु होना उचित है। अर्थात् उसे गुप्तचरोंद्वारा सभी बातें देखनी-उनको जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। इसलिये वह हमेशा सबकी देख-भालके लिये गुप्तचर तैनात किये रहे। गुप्तचर ऐसे हों, जिन्हें दूसरे लोग पहचानते न हों, जिनका स्वभाव

English

the Chhandoga Brahmin with honey and kusha water should perform; the priest, having gone to the pot holding the stream,

अध्याय २१८

श्लोक 22

विधाय वह्निरक्षान्तु सदस्येषु यथाविधि ।राजश्रियाभिषेके च ये मन्त्राः परिकीर्तिताः

vidhāya vahnirakṣāntu sadasyeṣu yathāvidhi / rājaśriyābhiṣeke ca ye mantrāḥ parikīrtitāḥ

हिन्दी अर्थ

शान्त एवं कोमल हो तथा जो परस्पर एक- दूसरेसे भी अपरिचित हों। उनमें कोई वैश्यके रूपमें हो, कोई मन्त्र-तन्त्रमें कुशल, कोई ज्यौतिषी, कोई वैद्य, कोई संन्यास-वेषधारी और कोई

English

having duly arranged the fire's protection among the assembly, those mantras declared for the king's prosperity-consecration;

अध्याय २१८

श्लोक 23

तैस्तु दद्यान्महाभाग ब्राह्मणानां स्वनैस् तथा ।ततः पुरोहितो गच्छेद्वेदिमूलन्तदेव तु(१)

taistu dadyānmahābhāga brāhmaṇānāṃ svanais tathā / tataḥ purohito gacchedvedimūlantadeva tu(1)

हिन्दी अर्थ

बलाबलका विचार करनेवाले व्यक्तिके रूपमें हो। राजाको चाहिए कि किसी एक गुप्तचरकी बातपर विश्वास न करे। जब बहुतोंके मुखसे एक तरहको बात सुने, तभी उसे विश्वसनीय समझे । भृत्योंके हृदयमें राजाके प्रति अनुराग है या विरक्ति, किस मनुष्यमें कौन-से गुण तथा अवगुण हैं, कौन शुभचिन्तक हैं और कौन अशुभ चाहनेवाले-अपने भृत्यवर्गको वशमें रखनेके

English

with them, great one, one should give, along with Brahmins' chanting. Then the priest should go to the base of the altar;

अध्याय २१८

श्लोक 24

शतच्छिद्रेण पात्रेण सौवर्णेनाभिषेचयेत् ।या ओषधीत्योषधीभीरथेत्युक्त्वेति गन्धकैः

śatacchidreṇa pātreṇa sauvarṇenābhiṣecayet / yā oṣadhītyoṣadhībhīrathetyuktveti gandhakaiḥ

हिन्दी अर्थ

लिये राजाको ये सभी बातें जाननी चाहिए। वह ऐसा कर्म करे, जो प्रजाका अनुराग बढ़ानेवाला हो। जिससे लोगोंके मनमें विरक्ति हो, ऐसा कोई काम न करे। प्रजाका अनुराग बढानेवाली

English

one should anoint with a hundred-holed golden vessel, saying "Ya oshadhih," "oshadhibhih," "ratha," with scents,

अध्याय २१८

श्लोक 25

पुष्पैः पुष्पवतीत्येव ब्राह्मणेति च वीजकैः(२) ।रत्नैर् आशुः शिशानश् च ये देवाश् च कुशोदकैः

puṣpaiḥ puṣpavatītyeva brāhmaṇeti ca vījakaiḥ(2) / ratnair āśuḥ śiśānaś ca ye devāś ca kuśodakaiḥ

हिन्दी अर्थ

लक्ष्मीसे युक्त राजा ही वास्तवमें राजा है। वह सब लोगोंका रञ्जन करने --उनकी प्रसन्नता बढ़ानेके कारण ही 'राजा' कहलाता है॥ १३--२४॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें 'राजाकी सहायसम्पत्तिका वर्णन' नामक दो सौ बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

"pushpavatih" with flowers, "brahmana" with seeds, "ashuh shishanah" with jewels, "ye devah" with kusha water.

अध्याय २१८

श्लोक 26

यजुर्वेद्यथर्ववेदी(३) गन्धद्वारेति संस्पृशेत् ।शिरः कण्ठं रोचनया सर्वतीर्थोदकैर् द्विजाः

yajurvedyatharvavedī(3) gandhadvāreti saṃspṛśet / śiraḥ kaṇṭhaṃ rocanayā sarvatīrthodakair dvijāḥ

हिन्दी अर्थ

दो सौ इक्कीसवाँ अध्याय अनुजीवियोंका राजाके प्रति कर्तव्यका वर्णन

English

The Yajurvedi and Atharvavedi should touch him with "Gandhadvara"; the head and throat with gorochana, the twice-born with waters of all holy places,

अध्याय २१८

श्लोक 27

गीतवाद्यादिनिर्घोषैश्चामरव्यजनादिभिः ।सर्वौषधिमयं कुम्भं धारयेयुर्नृपाग्रतः

gītavādyādinirghoṣaiścāmaravyajanādibhiḥ / sarvauṣadhimayaṃ kumbhaṃ dhārayeyurnṛpāgrataḥ

हिन्दी अर्थ

पुष्कर कहते हैं-- भृत्यको राजाकी आज्ञाका उसी प्रकार पालन करना चाहिए, जैसे शिष्य गुरुकी और साध्वी स्त्रियाँ अपने पतिकी आज्ञाका पालन करती हैं। राजाको बातपर कभी आक्षेप न करे, सदा ही उसके अनुकूल और प्रिय वचन बोले। यदि कोई हितकी बात बतानी हो और

English

with the sound of song and instruments, with chowries and fans and the like; they should hold the pot made of all herbs before the king.

अध्याय २१८

श्लोक 28

तं पश्येद्दर्पणं राजा घृतं वै मङ्गलादिकं ।अभ्यर्च्य विष्णुं ब्रह्माणमिन्द्रादींश् च ग्रहेश्वरान्(४)

taṃ paśyeddarpaṇaṃ rājā ghṛtaṃ vai maṅgalādikaṃ / abhyarcya viṣṇuṃ brahmāṇamindrādīṃś ca graheśvarān(4)

हिन्दी अर्थ

वह सुननेमें अप्रिय हो तो उसे एकान्तमें राजासे कहना चाहिए। किसी आयके काममें नियुक्त होनेपर राजकोय धनका अपहरण न करे; राजाके सम्मानको उपेक्षा न करे। उसकी वेश-भूषा और

English

The king should look at the mirror, ghee and auspicious things; having worshipped Vishnu, Brahma, Indra and the other planet-lords,

अध्याय २१८

श्लोक 29

१ वेदिमूलन्तथैव तु इरि ख॥ २ दीपकैर् इति ङ॥ ३ यजुर्वेद्यथ ऋग्वेदी इति ङ॥ ४ ग्रहादिकानिति ख॥ , ग॥ , घ॥ च :प् २९३ व्याघ्रचर्मोत्तरां शय्यामुपविष्टः पुरोहितः ।मधुपर्कादिकं दत्त्वा पट्टबन्धं प्रकारयेत्

1 vedimūlantathaiva tu iri kha.. 2 dīpakair iti ṅa.. 3 yajurvedyatha ṛgvedī iti ṅa.. 4 grahādikāniti kha.. , ga.. , gha.. ca :p 293 vyāghracarmottarāṃ śayyāmupaviṣṭaḥ purohitaḥ / madhuparkādikaṃ dattvā paṭṭabandhaṃ prakārayet

हिन्दी अर्थ

बोल-चालकी नकल करना उचित नहीं है। अन्तःपुरके सेवकोंके अध्यक्षका कर्त्तव्य है कि

English

the priest, seated on a bed covered with tiger skin, having given madhuparka and the like, should have the fillet tied;

अध्याय २१८

श्लोक 30

राज्ञोमुकुटबन्धञ्च पञ्चचर्मोत्तरं ददेत् ।ध्रुवाद्यैर् इति च विशेद् वृषजं वृषदंशजं

rājñomukuṭabandhañca pañcacarmottaraṃ dadet / dhruvādyair iti ca viśed vṛṣajaṃ vṛṣadaṃśajaṃ

हिन्दी अर्थ

वह ऐसे पुरुषोंक साथ न बैठे, जिनका राजाके साथ वैर हो तथा जो राजदरबारसे अपमानपूर्वक निकाले गये हों। भृत्यको राजाकी गुप्त बातोंको दूसरोंपर प्रकट नहीं करना चाहिए। अपनी कोई

English

the crown-binding of the king, and he should give a five-skin covering; with "Dhruva" and the rest one should enter —

अध्याय २१८

श्लोक 31

द्वीपिजं सिंहजं व्याघ्रजातञ्चर्म तदासने ।अमात्यसचिवादींश् च प्रतीहारः प्रदर्शयेत्

dvīpijaṃ siṃhajaṃ vyāghrajātañcarma tadāsane / amātyasacivādīṃś ca pratīhāraḥ pradarśayet

हिन्दी अर्थ

कुशलता दिखाकर राजाको विशेष सम्मानित एवं प्रसन्न करना चाहिए। यदि राजा कोई गुप्त बात सुनावें तो उसे लोगोंमें प्रकाशित न करे। यदि वे दूसरेको किसी कामके लिये आज्ञा दे रहे हों तो स्वयं ही उठकर कहे --' महाराज! मुझे आदेश दिया जाय, कौन-सा काम करना है, मैं उसे करूँगा।' राजाके दिये हुए वस्त्र-आभूषण तथा रत्न आदिको सदा धारण किये रहे। बिना

English

hide of bull, of a bull-biter, of leopard, lion or tiger on the seat. The door-keeper should show the ministers, counselors and the rest;

अध्याय २१८

श्लोक 32

गोजाविगृहदानाद्यैः सांवत्सरपुरोहितौ ।पूजयित्वा द्विजान् प्रार्च्य ह्य् अन्यभूगोन्नमुख्यकैः

gojāvigṛhadānādyaiḥ sāṃvatsarapurohitau / pūjayitvā dvijān prārcya hy anyabhūgonnamukhyakaiḥ

हिन्दी अर्थ

आज्ञाके दरवाजेपर अथवा और किसी अयोग्य स्थानपर, जहाँ राजाकी दृष्टि पड़ती हो, न बैठे। जँभाई लेना, थूकना, खाँसना, क्रोध प्रकट करना, खाटपर बैठना, भौंहें टेढ़ी करना, अधोवायु

English

with gifts of cows, goats, sheep and houses, having honored the year-priest and priest, having worshipped Brahmins with land, cattle, grain and other chief gifts,

अध्याय २१८

श्लोक 33

वह्निं प्रदक्षिणीकृत्य गुरुं नत्वाथ पृष्ठतः ।वृषमालभ्य गां वत्सां पूजयित्वाथ मन्त्रितं

vahniṃ pradakṣiṇīkṛtya guruṃ natvātha pṛṣṭhataḥ / vṛṣamālabhya gāṃ vatsāṃ pūjayitvātha mantritaṃ

हिन्दी अर्थ

छोड़ना तथा डकार लेना आदि कार्य राजाके निकट रहनेपर न करे। उनके सामने अपना गुण प्रकट करनेके लिये दूसरोंको ही युक्तिपूर्वक नियुक्त करे। शठता, लोलुपता, चुगली, नास्तिकता, नीचता तथा चपलता --इन दोषोंका राजसेवकोंको सदा त्याग करना चाहिए। पहले स्वयं प्रयत्न करके आपनेमें वेदविद्या एवं शिल्पकलाको योग्यताका सम्पादन करे। उसके बाद अपना धन

English

having circled the fire, bowed to the teacher, then from behind having touched the bull, having worshipped the cow and calf with mantras,

अध्याय २१८

श्लोक 34

अश्वमारुह्य नागञ्च पूजयेत्तं समारुहेत् ।परिभ्रमेद्राजमार्गे बलयुक्तः प्रदक्षिणं

aśvamāruhya nāgañca pūjayettaṃ samāruhet / paribhramedrājamārge balayuktaḥ pradakṣiṇaṃ

हिन्दी अर्थ

बढ़ानेकी चेष्टा करनेवाले पुरुषको अभ्युदयके

English

mounting a horse and worshipping the elephant, he should mount it; the king with his forces should circle on the royal road;

अध्याय २१८

श्लोक 35

पुरं विशेच्च दानाद्यैः प्रार्च्य सर्वान् विसर्जयेत्

puraṃ viśecca dānādyaiḥ prārcya sarvān visarjayet

हिन्दी अर्थ

लिये राजाकी सेवामें प्रवृत्त होना चाहिए। उनके प्रिय पुत्र एवं मन्त्रियोंको सदा नमस्कार करना उचित है। केवल मन्त्रियोंके साथ रहनेसे राजाका अपने ऊपर विश्वास नहीं होता; अतः उनके हार्दिक अभिप्रायके अनुकूल सदा प्रिय कार्य करे। राजाके स्वभावको समझनेवाले पुरुषके लिये उचित है कि वह विरक्त राजाको त्याग दे और अनुरक्त राजासे ही आजीविका प्राप्त करनेकी

English

he should enter the city, honor all with gifts and the like, and dismiss them.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 218
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.