अध्याय २१८
श्लोक 1
राजाभिषेककथनं अग्निर् उवाच पुष्करेण च रामाय राजधर्मं हि पृच्छते ।यथादौ कथितं तद्वद्वशिष्ट कथयामि ते
rājābhiṣekakathanaṃ agnir uvāca puṣkareṇa ca rāmāya rājadharmaṃ hi pṛcchate / yathādau kathitaṃ tadvadvaśiṣṭa kathayāmi te
हिन्दी अर्थ
देवियाँ तुम्हारी रक्षा करें और लवण, इक्षुरस, सुरा, घृत, दधि, दुग्ध तथा जलसे भरे हुए समुद्र तुम्हें शान्ति प्रदान करें। चारों समुद्र और नाना प्रकारके तीर्थ तुम्हारी रक्षा करें। पुष्कर, प्रयाग, प्रभास, नैमिषारण्य, गयाशीर्ष, ब्रह्मशिरतीर्थ, उत्तरमानस, कालोदक, नन्दिकुण्ड, पञ्चनदतीर्थ, भृगुतीर्थ,
English
I shall describe the duties of a king (foremost) among the host of other duties. The king should be the slayer of the enemy, protector of the subjects and administer justice properly.