Agni Purana· Agni Purāṇa
219
अध्याय 219 / 381

Adhyaya 219

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अध्याय २१९

श्लोक 1

अभिषेकमन्त्राः पुष्कर उवाच राजदेवाद्यभिषेकमन्त्रान्वक्ष्ये ऽघमर्दनान् ।कुम्भात् कुशोदकैः सिञ्चेत्तेन सर्वं हि सिद्ध्यति

abhiṣekamantrāḥ puṣkara uvāca rājadevādyabhiṣekamantrānvakṣye 'ghamardanān / kumbhāt kuśodakaiḥ siñcettena sarvaṃ hi siddhyati

हिन्दी अर्थ

चेष्टा करे। बिना पूछे राजाके सामने कोई बात न कहे; किंतु आपत्तिके समय ऐसा करनेमें कोई हर्ज नहीं है। राजा प्रसन्न हो तो वह सेवकके विनययुक्त वचनको मानता है, उसकी प्रार्थनाको

English

I shall describe the sacred syllables for the anointment of a king or god which would destroy sins. One would acawn- plish everything by sprinkling water from the pot with the kuSa,

अध्याय २१९

श्लोक 2

सुरास्त्वामभिषिञ्चन्तु ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः ।वासुदेवः सङ्कर्षणः प्रद्युम्नश्चानिरुद्धकः

surāstvāmabhiṣiñcantu brahmaviṣṇumaheśvarāḥ / vāsudevaḥ saṅkarṣaṇaḥ pradyumnaścāniruddhakaḥ

हिन्दी अर्थ

स्वीकार करता है। प्रेमी सेवकको किसी रहस्य- स्थान (अन्तःपुर) आदिमें देख ले तो भी उसपर शङ्का-संदेह नहीं करता है। वह दरबारमें आये तो राजा उसकी कुशल पूछता है, उसे बैठनेके लिये आसन देता है। उसकी चर्चा सुनकर वह प्रसन्न होता है। वह कोई अप्रिय बात भी कह दे तो वह बुरा नहीं मानता, उलटे प्रसन्न होता है। उसको दी हुई छोटी-मोटी वस्तु भी राजा

English

Literally means helpful, denotes the Avmi kum&ras, the celestial physicians.

अध्याय २१९

श्लोक 3

भवन्तु विजयायैते इन्द्राद्या दशदिग्गताः ।रुद्रो धर्मो मनुर्दक्षो रुचिः श्रद्धा च सर्वदा

bhavantu vijayāyaite indrādyā daśadiggatāḥ / rudro dharmo manurdakṣo ruciḥ śraddhā ca sarvadā

हिन्दी अर्थ

बड़े आदरसे ले लेता है और बातचीतमें उसे याद रखता है। उक्त लक्षणोंसे राजा अनुरक्त है या विरक्त यह जानकर अनुरक्त राजाको सेवा करे। इसके विपरीत जो विरक्त है, उसका साथ

English

May the swan, the bull, the lion and the buffalo, (respectively the vehicles) of Brahma, iSahkara, Durga and God of Death guard you.

अध्याय २१९

श्लोक 4

भृगुरत्रिर्वसिष्ठश् च सनकश् च सनन्दनः ।सनत्कुमारो ऽङ्गिराश् च पुलस्त्यः पुलहः क्रतुः

bhṛguratrirvasiṣṭhaś ca sanakaś ca sanandanaḥ / sanatkumāro 'ṅgirāś ca pulastyaḥ pulahaḥ kratuḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापृराणमें 'अनुजीविवृत्त-कथन' नामक दो सौ इक्कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ राजाके दुर्ग, कर्तव्य तथा साध्वी स्त्रीके धर्मका वर्णन । पुष्कर कहते हैं-- अब मैं दुर्ग बनानेके और शूद्रोंकी संख्या अधिक होनी चाहिए। दुर्ग

English

(May) Uccaihsravas, the lord of the horses, (lord) Dhanvantari, Kaustubha, the foremost among the conches, always (proect) the mace, spear and the disc.

अध्याय २१९

श्लोक 5

मरीचिः कश्यपः पान्तु प्रजेशाः पृथिवीपतिः ।प्रभासुरा वहिर्षद अग्निष्वात्ताश् च पान्तु ते

marīciḥ kaśyapaḥ pāntu prajeśāḥ pṛthivīpatiḥ / prabhāsurā vahirṣada agniṣvāttāś ca pāntu te

हिन्दी अर्थ

अथवा सुदृढ़ एवं विशाल किले)-में निवास दुर्गमें थोड़े-से ब्राह्मणोंका भी रहना आवश्यक करना चाहिए। साथ रहनेवाले मनुष्योंमें वैश्यों है। राजाके रहनेके लिये वही देश श्रेष्ठ माना गया

English

May Nandaka, Dharma, the governor of conduct, Citragupta, the wieldcr of the punishing rod, Pihgala, Mrtyu ldeath) and Kalaka (the regulator of time) protect the weapons.

अध्याय २१९

श्लोक 6

क्रव्यादाश्चोपहूताश् च आज्यपाश् च सुकालिनः ।अग्निभिश्चाभिषिञ्चन्तु लक्ष्म्याद्या धर्मवल्लभाः

kravyādāścopahūtāś ca ājyapāś ca sukālinaḥ / agnibhiścābhiṣiñcantu lakṣmyādyā dharmavallabhāḥ

हिन्दी अर्थ

है, जहाँ बहुत-से काम करनेवाले लोग (किसान- मजदूर) रहते हों, जहाँ पानीके लिये वर्षाकी राह नहीं देखनी पड़ती हो, नदी-तालाब आदिसे ही पर्याप्त जल प्राप्त होता रहता हो। जहाँ शत्रु पीड़ा न दे सकें, जो फल-फूल और धन-धान्यसे सम्पन्न हो, जहाँ शत्रु-सेनाकी गति न हो सके और सर्प तथा लुटेरोंका भी भय न हो। बलवान् राजाको निम्नाङ्कित छः प्रकारके दुर्गोमेंसे किसी

English

Phonetics, the texts laying down rules for sacrificial acts, grammar,, etymology, metrics and astrontnny.

अध्याय २१९

श्लोक 7

आदित्याद्याः कश्यपस्य बहुपुत्रस्य(१) वल्लभाः ।कृशाश्वस्याग्निपुत्रस्य भार्याश्चारिष्ठनेमिनः

ādityādyāḥ kaśyapasya bahuputrasya(1) vallabhāḥ / kṛśāśvasyāgniputrasya bhāryāścāriṣṭhaneminaḥ

हिन्दी अर्थ

एकका आश्रय लेकर निवास करना चाहिए।

English

The texts dealing with the interpretation of vedic texts.

अध्याय २१९

श्लोक 8

अश्विन्याद्याश् च चन्द्रस्य पुलहस्य(२) तथा प्रियाः ।भूता च कपिशा दंष्ट्री सुरसा सरमा दनुः

aśvinyādyāś ca candrasya pulahasya(2) tathā priyāḥ / bhūtā ca kapiśā daṃṣṭrī surasā saramā danuḥ

हिन्दी अर्थ

जलदुर्ग और पर्वतदुर्ग-ये ही छः' प्रकारके दुर्ग हैं । इनमें पर्वतदुर्ग सबसे उत्तम है। वह शत्रुओंके लिये अभेद्य तथा रिपुवर्गका भेदन करनेवाला है। दुर्ग ही राजाका पुर या नगर है। वहाँ हाट-बाजार तथा देवमन्दिर आदिका होना आवश्यक है। जिसके चारों ओर यन्त्र लगे हों, जो अस्त्र- शस्त्रोंस भरा हो, जहाँ जलका सुपास हो तथा जिसके सब ओर पानीसे भरी खाइयाँ हों, वह

English

Invite philosophic texts.

अध्याय २१९

श्लोक 9

श्येनी भासी तथा क्रौञ्ची धृतराष्ट्री शुकी तथा ।पत्न्यस्त्वामभिषिञ्चन्तु अरुणश्चार्कसारथिः

śyenī bhāsī tathā krauñcī dhṛtarāṣṭrī śukī tathā / patnyastvāmabhiṣiñcantu aruṇaścārkasārathiḥ

हिन्दी अर्थ

दुर्ग उत्तम माना गया है

English

Vaiioavite {diilostphical texts.

अध्याय २१९

श्लोक 10

आयतिर् नियतीरात्रिर् निद्रा लोकस्थितौ स्थिताः ।उमा मेना शची पान्तु धूमोर् नानिरृतिर्जये

āyatir niyatīrātrir nidrā lokasthitau sthitāḥ / umā menā śacī pāntu dhūmor nānirṛtirjaye

हिन्दी अर्थ

अब मैं राजाकी रक्षाके विषयमें कुछ निवेदन करूँगा--राजा पृथ्वीका पालन करनेवाला है, अतः विष आदिसे उसको रक्षा करनी चाहिए। शिरीष वृक्षको जड़, छाल, पत्ता, फूल और फल-इन पाँचौं अङ्गोंको गोमूत्रमें पीसकर सेवन करनेसे विषका निवारण होता है । शतावरी, गुडुचि और चौंराई विषका नाश करनेवाली है। कोषातकी (कड़वी तरोई), कह्वारी (करियारी),

English

Ayati, Niyati, Ratri, Nidra, established in the world's order; Uma, Mena, Shachi protect; Dhumorna, Nirriti in victory;

अध्याय २१९

श्लोक 11

गौरी शिवा च ऋद्धिश् च वेला चैव नड्वला ।अशिक्नी च(३) तथा ज्योत्स्ना देवपत्न्यो वनस्पतिः

gaurī śivā ca ṛddhiś ca velā caiva naḍvalā / aśiknī ca(3) tathā jyotsnā devapatnyo vanaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मी, चित्रपटोलिका (कड्वी परोरी), मण्डूकपर्णी (ब्राह्मीका एक भेद), वाराहीकन्द, आँवला,

English

Gauri, Shiva, Riddhi, Vela, Nadvala, Ashikni and Jyotsna, the gods' wives, Vanaspati;

अध्याय २१९

श्लोक 12

महाकल्पश् च कल्पश् च मन्वन्तरयुगानि च ।१ देवपुत्रस्येति ज॥ २ पुलस्त्यस्येति ग॥ , घ॥ , ज॥ च ३ असिता चेति ङ॥ :प् २९५ संवत्सराणि वर्षाणि पान्तु त्वामयनद्वयं

mahākalpaś ca kalpaś ca manvantarayugāni ca / 1 devaputrasyeti ja.. 2 pulastyasyeti ga.. , gha.. , ja.. ca 3 asitā ceti ṅa.. :p 295 saṃvatsarāṇi varṣāṇi pāntu tvāmayanadvayaṃ

हिन्दी अर्थ

दवाएँ विष दूर करनेवाली हैं । विषनाशक माणिक्य और मोती आदि रत्न भी विषका निवारण करनेवाले हैं'॥ ७--१०॥ राजाको वास्तुके लक्षणोंसे युक्त दुर्गमें रहकर

English

Mahakalpa, Kalpa, Manvantaras and Yugas, years and seasons — may the two solstices protect you;

अध्याय २१९

श्लोक 13

ऋतवश् च तथा मासा पक्षा रात्र्यहनी तथा ।सन्ध्यातिथिमुहूर्ताच्च कालस्यावयवाकृतिः

ṛtavaś ca tathā māsā pakṣā rātryahanī tathā / sandhyātithimuhūrtācca kālasyāvayavākṛtiḥ

हिन्दी अर्थ

तथा दान करना चाहिए। देवताके धन आदिका अपहरण करनेसे राजाको एक कल्पतक नरकमें रहना पड़ता है। उसे देवपूजामें तत्पर रहकर देवमन्दिरोंका निर्माण कराना चाहिए। देवालयोंकी

English

seasons, months, fortnights, night and day, twilights, tithis, muhurtas — the forms of the limbs of Time;

अध्याय २१९

श्लोक 14

सूर्याद्याश् च ग्रहाः पान्तु मनुः स्वायम्भुवादिकः ।स्वायम्भुवः स्वारोचिष औत्तमिस्तामसो मनुः

sūryādyāś ca grahāḥ pāntu manuḥ svāyambhuvādikaḥ / svāyambhuvaḥ svārociṣa auttamistāmaso manuḥ

हिन्दी अर्थ

रक्षा और देवताओंकी स्थापना भी राजाका कर्तव्य है। देवविग्रह मिट्टीका भी बनाया जाता है। मिट्टीसे काठका, काठसे ईंटका, ईंटसे पत्थरका और पत्थरसे सोने तथा रत्नका बना हुआ विग्रह पवित्र माना गया है। प्रसन्नतापूर्वक देवमन्दिर बनवानेवाले पुरुषको भोग और मोक्षको प्राप्ति होती है। देवमन्दिरमें चित्र बनवावे, गाने-बजाने

English

the Sun and the planets protect you, and the Manus beginning with Svayambhuva: Svayambhuva, Svarochisha, Uttami, Tamasa Manu,

अध्याय २१९

श्लोक 15

रैवतश्चाक्षुषः षष्ठो वैवस्वत इहेरितः ।सावर्णो ब्रह्मपुत्रश् च धर्मपुत्रश् च रुद्रजः

raivataścākṣuṣaḥ ṣaṣṭho vaivasvata iheritaḥ / sāvarṇo brahmaputraś ca dharmaputraś ca rudrajaḥ

हिन्दी अर्थ

१. बालूसे भरी हुई मरुभूमिको ' धन्वदुर्ग' कहते हैं ।ग्रीष्मकालमें वह शत्रुओंके लिये दुर्गम होता है। जमीनके अन्दर जो निवास

English

Raivata, the sixth Chakshusha, here Vaivasvata is declared; Savarna, Brahma's son, Dharma's son, Rudra-born,

अध्याय २१९

श्लोक 16

दक्षजो रौच्यभौत्यौ च मनवस्तु चतुर्दश ।विश्वभुक् च विपश्चिच्च सुचित्तिश् च शिखी विभुः

dakṣajo raucyabhautyau ca manavastu caturdaśa / viśvabhuk ca vipaścicca sucittiś ca śikhī vibhuḥ

हिन्दी अर्थ

करनेयोग्य स्थान बनवाया जाता है, उसे ' महीदुर्ग' कहते हैं। अपने निवास-स्थानके चारों ओर अस्त्र-शस्त्रोंसे सुसज्जित भारी सेनाका होना 'नरदुर्ग' कहा गया है। दूरतक घने वृक्षों और पानीसे घिरे हुए प्रदेशों अथवा दुर्गम पर्वतमालाओंसे घिरे हुए स्थानको क्रमशः 'वृक्षदुर्ग', 'जलदुर्ग' एवं ' पर्वतदुर्ग' कहा जाता है। २. यहाँ लिखी हुई दवाओंका प्रयोग किसी अच्छे वैद्यकी सलाह लिये बिना नहीं करना चाहिए; क्योंकि यहाँ संक्षेपमें औषधोंका नाममात्र बताया गया है। सेवन-विधि आयुर्वेदके अन्य ग्रन्थोंमें देखनी चाहिए। उपर्युक्त दवाओंमें शतावरीकी जड़, गुरुचिकी लत्ती और चौराईकी जड़का विषनिवारणके लिये उपयोग किया जाता है। कोषातकी या कड़वी तरोईका फल, बीज इस कार्यके लिये उपयोगी है। एक वैद्यका कहना है कि कड़वी तरोईका दो बीज पावभर दूधमें अच्छी तरह निचोड़े और उसे छानकर पी ले तो वमन और विरेचन--

English

Daksha-born, Raucya and Bhautya — the fourteen Manus; Vishvabhuk, Vipashchit, Suchitti, Shikhi, Vibhu,

अध्याय २१९

श्लोक 17

मनोजवस्तथौजस्वी बलिरद्भुतशान्तयः ।वृषश् च ऋतधामा च दिवस्पृक् कविरिन्द्रकः

manojavastathaujasvī baliradbhutaśāntayaḥ / vṛṣaś ca ṛtadhāmā ca divaspṛk kavirindrakaḥ

हिन्दी अर्थ

दोनों होते हैं और तबतक होते रहते हैं, जबतक कि पेटके अंदरका दोष पूर्णरूपसे निकल नहीं जाता। करियारी भी एक प्रकारका विष है और 'विषस्य विषमौषधम्'के अनुसार उपयोगमें लाया जाता है। ब्राह्मीकी गुणकारिता तो प्रसिद्ध ही है। कड़वी परोरीको भी “त्रिदोषगरनाशनम्' बताया गया है । इस कार्यमें इसका मूल ही ग्राह्य है। वाराहीकन्द संजीवनकारी औषधोंमें गिना गया है । यह अष्टवर्गमें प्रतिनिधि ओषधिके रूपमें गृहीत है। श्री और वृद्धि नामक दवाके स्थानपर इसका उपयोग किया जाता है। विष-निवारणके कार्यमें इसका

English

Manojava, Ojasvi, Bali, Adbhuta, Shanti, Vrisha, Ritadhama, Divaspriksh, Kavi, Indraka;

अध्याय २१९

श्लोक 18

रेवन्तश् च कुमारश् च तथा वत्सविनायकः

revantaś ca kumāraś ca tathā vatsavināyakaḥ /

हिन्दी अर्थ

मूल ग्राह्य है। इसी प्रकार आँवलेका फल, भाँगकी पत्ती और बकुचीके फल विष दूर करनेके लिये उपयोगी होते हैं। विषनाशक रसोंमें मोती और माणिक्य आदिका ग्रहण है। आयुर्वेदोक्त रीतिसे तैयार किया हुआ इनका भस्म विधिपूर्वक सेवन करनेसे लाभकारी होता है। आदिका प्रबन्ध करे, दर्शनीय वस्तुओंका दान दे तथा तेल, घी, मधु और दूध आदिसे देवताको नहलावे तो मनुष्य स्वर्गलोकमें जाता है । ब्राह्मणोंका पालन और सम्मान करे; उनका धन न छीने।

English

Revanta and Kumara, and Vatsa-vinayaka.

अध्याय २१९

श्लोक 19

त्वामभिषिञ्चन्तु सुरमुख्याः समागताः ।नासत्यौ देवभिषजौ ध्रुवाद्या वसवो ऽष्ट च

tvāmabhiṣiñcantu suramukhyāḥ samāgatāḥ / nāsatyau devabhiṣajau dhruvādyā vasavo 'ṣṭa ca

हिन्दी अर्थ

यदि राजा ब्राह्मणका एक सोना, एक गौ अथवा एक अंगुल जमीन भी छीन ले, तो उसे महाप्रलय होनेतक नरकमें डूबे रहना पड़ता है। ब्राह्मण सब प्रकारके पापोंमें प्रवृत्त तथा दुराचारी

English

May the chief gods assembled consecrate you: the Ashvins, physicians of the gods, the Vasus beginning with Dhruva, the eight,

अध्याय २१९

श्लोक 20

दश चाङ्गिरसो वेदास्त्वाभिषिञ्चन्तु सिद्धये ।आत्मा ह्य् आयुर्मनो दक्षो मदः प्राणस्तथैव च

daśa cāṅgiraso vedāstvābhiṣiñcantu siddhaye / ātmā hy āyurmano dakṣo madaḥ prāṇastathaiva ca

हिन्दी अर्थ

हो तो भी उससे द्वेष नहीं करना चाहिए। ब्राह्मणकी हत्यासे बढ़कर भारी पाप दूसरा कोई नहीं है। महाभाग ब्राह्मण चाहें तो जो देवता नहीं हैं, उन्हें भी देवता बना दें और देवताको भी देवपदसे नीचे उतार दें; अतः सदा ही उनको नमस्कार करना चाहिए ॥ ११-१७ ३॥

English

the ten Angirasas, the Vedas — may they consecrate you for success. Atman, Ayu, Manas, Daksha, Mada, Prana likewise,

अध्याय २१९

श्लोक 21

हविष्मांश् च गरिष्ठश् च ऋतः सत्यश् च पान्तु वः ।क्रतुर्दक्षो वसुः सत्यः कालकामो धुरिर्जये

haviṣmāṃś ca gariṣṭhaś ca ṛtaḥ satyaś ca pāntu vaḥ / kraturdakṣo vasuḥ satyaḥ kālakāmo dhurirjaye

हिन्दी अर्थ

यदि राजाके अत्याचारसे ब्राह्मणीको रुलाई आ जाय तो वह उसके कुल, राज्य तथा प्रजा-- सबका नाश कर डालती है। इसलिये धर्मपरायण राजाको उचित है कि वह साध्वी स्त्रियोंका

English

Havishman, Garishtha, Rita, Satya — may they protect you; Kratu, Daksha, Vasu, Satya, Kalakama, Dhuri in victory,

अध्याय २१९

श्लोक 22

पुरूरवा माद्रवाश् च विश्वेदेवाश् च रोचनः ।अङ्गारकाद्याः सूर्यस्त्वान्निरृतिश् च तथा यमः

purūravā mādravāś ca viśvedevāś ca rocanaḥ / aṅgārakādyāḥ sūryastvānnirṛtiś ca tathā yamaḥ

हिन्दी अर्थ

पालन करे। स्त्रीको घरके काम-काजमें चतुर और प्रसन्न होना चाहिए। वह घरके प्रत्येक सामानको साफ-सुथरा रखे; खर्च करनेमें खुले हाथवाली न हो। कन्याको उसका पिता जिसे दान कर दे, वही उसका पति है। अपने पतिको उसे सदा सेवा करनी चाहिए । स्वामीको मृत्यु हो जानेपर ब्रह्मचर्यका पालन करनेवाली स्त्री

English

Pururavas, Madrava, Vishvedevas, Rochana; Angaraka and the rest, the Sun, Nirriti and Yama,

अध्याय २१९

श्लोक 23

अजैकपादहिर्व्रध्रो धूमकेतुश् च रुद्रजाः(१) ।१ रुद्रका इति ग॥ , घ॥ , ङ॥ , ञ॥ च :प् २९६ भरतश् च तथा मृत्युः कापालिरथ किङ्किणिः

ajaikapādahirvradhro dhūmaketuś ca rudrajāḥ(1) / 1 rudrakā iti ga.. , gha.. , ṅa.. , ña.. ca :p 296 bharataś ca tathā mṛtyuḥ kāpāliratha kiṅkiṇiḥ

हिन्दी अर्थ

स्वर्गलोकमें जाती है। वह दूसरेके घरमें रहना पसंद न करे और लड़ाई-झगड़ेसे दूर रहे। जिसका पति परदेशमें हो, वह स्त्री श्रृद्धार न करे, सदा अपने स्वामीके हितचिन्तनमें लगी

English

Ajaikapad, Ahirbudhnya, Dhumaketu, the Rudra-born; Bharata and Mrityu, Kapali and Kinkini;

अध्याय २१९

श्लोक 24

भवनो भावनः पान्तु स्वजन्यः स्वजनस् तथा(१) ।क्रतुश्रवाश् च मूर्धा च याजनो ऽभ्युशनास् तथा

bhavano bhāvanaḥ pāntu svajanyaḥ svajanas tathā(1) / kratuśravāś ca mūrdhā ca yājano 'bhyuśanās tathā

हिन्दी अर्थ

रहकर देवताओंकी आराधना करे। केवल मङ्गलके लिये सौभाग्यचिहके रूपमें दो-एक आभूषण धारण किये रहे। जो स्त्री स्वामीके मरनेपर उसके साथ ही चिताकी आगमें प्रवेश कर जाती है, उसे भी स्वर्गलोककी प्राप्ति होती है। लक्ष्मीको पूजा और घरकी सफाई आदि रखना गृहिणीका मुख्य कार्य है। कार्तिककी द्वादशीको विष्णुकी पूजा करके बछड़ेसहित गौका दान करना चाहिए।

English

Bhavana, Bhavana protect; Svajanya and Svajana; Kratushrava, Murdha, Yajana, and Abhyushanas;

अध्याय २१९

श्लोक 25

प्रसवश्चाव्ययश् चैव दक्षश् च भृगवः सुराः ।मनो ऽनुमन्ता प्राणश् च नवोपानश् च वीर्यवान्

prasavaścāvyayaś caiva dakṣaś ca bhṛgavaḥ surāḥ / mano 'numantā prāṇaś ca navopānaś ca vīryavān

हिन्दी अर्थ

सावित्रीने अपने सदाचार और व्रतके प्रभावसे पतिको मृत्युसे रक्षा की थी। मार्गशीर्ष शुक्ला सप्तमीको सूर्यकी पूजा करनेसे स्त्रीको पुत्रोंको प्राप्ति होती है; इसमें तनिक भी अन्यथा विचार करनेकी

English

Prasava and Avyaya, Daksha, the Bhrigus, the gods; Mana, Anumanta, Prana, Navopana and Viryavan;

अध्याय २१९

श्लोक 26

वीतिहोत्रो नयः साध्यो हंसो नारायणो ऽवतु ।विभुश् चैव प्रभुश् चैव देवश्रेष्ठा जगद्धिताः

vītihotro nayaḥ sādhyo haṃso nārāyaṇo 'vatu / vibhuś caiva prabhuś caiva devaśreṣṭhā jagaddhitāḥ

हिन्दी अर्थ

आवश्यकता नहीं है इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें 'दुर्ग-सम्पत्ति-वर्णन तथा नारीधर्मका कथन” नामक दो सौ बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

Vitihotra, Naya, Sadhya, Hamsa, Narayana protect; Vibhu and Prabhu, best of gods, benefactors of the world;

अध्याय २१९

श्लोक 27

धाता मित्रो ऽर्यमा पूषा शक्रो ऽथ वरुणो भगः ।त्वष्टा विवस्वान् सविता विष्णुर्द्वादश भास्कराः

dhātā mitro 'ryamā pūṣā śakro 'tha varuṇo bhagaḥ / tvaṣṭā vivasvān savitā viṣṇurdvādaśa bhāskarāḥ

हिन्दी अर्थ

ाष्ट्रकी रक्षा तथा प्रजासे कर लेने आदिके विषयमें विचार

English

Dhatri, Mitra, Aryaman, Pusha, Shakra, Varuna, Bhaga, Tvashtri, Vivasvan, Savitri, Vishnu — twelve Suns;

अध्याय २१९

श्लोक 28

एकज्योतिश् च द्विज्योतिस्त्रिश् चतुर्ज्योतिरेव च ।एकशक्रो द्विशक्रश् च त्रिशक्रश् च महाबलः

ekajyotiś ca dvijyotistriś caturjyotireva ca / ekaśakro dviśakraś ca triśakraś ca mahābalaḥ

हिन्दी अर्थ

पुष्कर कहते हैं- (राज्यका प्रबन्ध इस प्रकार करना चाहिए) राजाको प्रत्येक गाँवका एक-एक अधिपति नियुक्त करना चाहिए। फिर दस-दस गाँवोंका तथा सौ-सौ गाँवोंका अध्यक्ष नियुक्त करे। सबके ऊपर एक ऐसे पुरुषको नियुक्त करे, जो समूचे राष्ट्रका शासन कर सके। उन सबके कार्योके अनुसार उनके लिये पृथक्- पृथक् भोग (भरण-पोषणके लिये वेतन आदि)-

English

Ekajyoti, Dvijyoti, Trijyoti, Chaturjyoti; Ekashakra, Dvishakra, Trishakra, the greatly strong;

अध्याय २१९

श्लोक 29

इन्द्रश् च मेत्यादिशतु ततः प्रतिमकृत्तथा ।मितश् च सम्मितश् चैव अमितश् च महाबलः

indraś ca metyādiśatu tataḥ pratimakṛttathā / mitaś ca sammitaś caiva amitaś ca mahābalaḥ

हिन्दी अर्थ

का विभाजन करना चाहिए तथा प्रतिदिन गुप्तचरोंके द्वारा उनके कार्योंकी देख-भाल एवं परीक्षण करते रहना चाहिए। यदि गाँवमें कोई दोष उत्पन्न हो -कोई मामला खड़ा हो तो ग्रामाधिपतिको

English

Indra and Meti, Pratimakrit, Mita and Sammita, Amita, the greatly strong;

अध्याय २१९

श्लोक 30

ऋतजित् सत्यजिच्चैव सुषेणः सेनजित्तथा ।अतिमित्रो ऽनुमित्रश् च पुरुमित्रो ऽपराजितः

ṛtajit satyajiccaiva suṣeṇaḥ senajittathā / atimitro 'numitraś ca purumitro 'parājitaḥ

हिन्दी अर्थ

उसे शान्त करना चाहिए। यदि वह उस दोषको दूर करनेमें असमर्थ हो जाय तो दस गाँवोंके अधिपतिके पास जाकर उनसे सब बातें बतावे। पूरी रिपोर्ट सुनकर वह दस गाँवका स्वामी उस दोषको मिटानेका उपाय करे

English

Ritajit, Satyajit, Sushena, Senajit; Atimitra, Anumitra, Purumitra, Aparajita;

अध्याय २१९

श्लोक 31

ऋतश् च ऋतवाग् धाता विधाता(२) धारणो ध्रुवः ।विधारणो महातेजा वासवस्य परः सखा

ṛtaś ca ṛtavāg dhātā vidhātā(2) dhāraṇo dhruvaḥ / vidhāraṇo mahātejā vāsavasya paraḥ sakhā

हिन्दी अर्थ

जब राष्ट्र भलीभाँति सुरक्षित होता है, तभी राजाको उससे धन आदिकी प्राप्ति होती है। धनवान् धर्मका उपार्जन करता है, धनवान् ही कामसुखका उपभोग करता है। जैसे गर्मीमें

English

Rita and Ritavak, Dhata, Vidhata, Dharana, Dhruva, Vidharana, of great splendor, the supreme friend of Vasava;

अध्याय २१९

श्लोक 32

ईदृक्षश्चाप्यदृक्षश् च(३) एतादृगमिताशनः ।क्रीडितश् च सदृक्षश् च सरभश् च महातपाः

īdṛkṣaścāpyadṛkṣaś ca(3) etādṛgamitāśanaḥ / krīḍitaś ca sadṛkṣaś ca sarabhaś ca mahātapāḥ

हिन्दी अर्थ

नदीका पानी सूख जाता है, उसी प्रकार धनके बिना सब कार्य चौपट हो जाते हैं। संसारमें पतित और निर्धन मनुष्योमें कोई विशेष अन्तर नहीं है। लोग पतित मनुष्यके हाथसे कोई वस्तु नहीं लेते और दरिद्र अपने अभावके कारण स्वयं ही नहीं दे पाता। धनहीनकी स्त्री भी उसको आज्ञाके अधीन नहीं रहती; अतः राष्ट्रको पीड़ा पहुँचानेवाला -उसे कंगाल बनानेवाला राजा अधिक

English

Idriksha, Adriksha, Etadrik, Amitashana, Kridita, Sadriksha, Sarabha, of great austerity;

अध्याय २१९

श्लोक 33

१ सुजनस्तथेति ख॥ , घ॥ च २ विश्वात्मेति ङ॥ ३ ईदृक्षश्चान्यदृक्षश्चेति छ॥ :प् २९७ धर्ता धुर्यो धुरिर्भीम अभिमुक्तः क्षपात्सह(१) ।धृतिर्वसुरनाधृष्यो(२) रामः कामो जयो विराट्

1 sujanastatheti kha.. , gha.. ca 2 viśvātmeti ṅa.. 3 īdṛkṣaścānyadṛkṣaśceti cha.. :p 297 dhartā dhuryo dhurirbhīma abhimuktaḥ kṣapātsaha(1) / dhṛtirvasuranādhṛṣyo(2) rāmaḥ kāmo jayo virāṭ

हिन्दी अर्थ

कालतक नरकमें निवास करता है। जैसे गर्भवती पत्नी अपने सुखका खयाल छोड़कर गर्भके बच्चेको सुख पहुँचानेकी चेष्टा करती है, उसी प्रकार राजाको भी सदा प्रजाको रक्षाका ध्यान

English

Dharta, Dhurya, Dhuri, Bhima, Abhimukta, Kshapatsaha, Dhriti, Vasu, Anadhrishya, Rama, Kama, Jaya, Virat —

अध्याय २१९

श्लोक 34

देवा एकोनपञ्चाशन्मरुतस्त्वामवन्तु ते ।चित्राङ्गदश्चित्ररथः चित्रसेनश् च वै कलिः

devā ekonapañcāśanmarutastvāmavantu te / citrāṅgadaścitrarathaḥ citrasenaś ca vai kaliḥ

हिन्दी अर्थ

रखना चाहिए। जिसकी प्रजा सुरक्षित नहीं है, उस राजाके यज्ञ और तपसे क्या लाभ? जिसने प्रजाकी भलीभाँति रक्षा की है, उसके लिये स्वर्गलोक अपने घरके समान हो जाता है। जिसकी प्रजा अरक्षित-अवस्थामें कष्ट उठाती है, उस राजाका निवासस्थान है-नरक। राजा अपनी प्रजाके पुण्य और पापमेंसे भी छठा भाग ग्रहण करता है। रक्षा करनेसे उसको प्रजाके धर्मका

English

the forty-nine Maruts, gods, protect you. Chitrangada, Chitraratha, Chitrasena and Kali,

अध्याय २१९

श्लोक 35

उर्णायुरुग्रसेनश् च धृतराष्ट्रश् च नन्दकः ।हाहा हूहूर्नारदश् च विश्वावसुश् च तुम्बुरुः

urṇāyurugrasenaś ca dhṛtarāṣṭraś ca nandakaḥ / hāhā hūhūrnāradaś ca viśvāvasuś ca tumburuḥ

हिन्दी अर्थ

अंश प्राप्त होता है और रक्षा न करनेसे वह लोगोंके पापका भागी होता है। जैसे परस्त्रीलम्पट दुराचारी पुरुषोंसे डरी हुई पतिव्रता स्त्रीको रक्षा करना धर्म है, उसी प्रकार राजाके प्रिय व्यक्तियों,

English

Urnayu, Ugrasena, Dhritarashtra and Nandaka, Haha, Huhu, Narada, Vishvavasu and Tumburu —

अध्याय २१९

श्लोक 36

एते त्वामभिषिञ्चन्तु गन्धर्वा विजयाय ते ।पान्तु ते कुरुपा मुख्या दिव्याश्चाप्सरसाङ्गणाः

ete tvāmabhiṣiñcantu gandharvā vijayāya te / pāntu te kurupā mukhyā divyāścāpsarasāṅgaṇāḥ

हिन्दी अर्थ

चोरों और विशेषतः राजकीय कर्मचारियोंके द्वारा चूसी जाती हुई प्रजाको रक्षा करनी चाहिए। उनके भयसे रक्षित होनेपर प्रजा राजाके काम आती है। यदि उसकी रक्षा नहीं की गयी तो वह पूर्वोक्त मनुष्योंका ही ग्रास बन जाती है। इसलिये

English

may these Gandharvas consecrate you for your victory; may the chief Kurupas and the divine hosts of Apsarases protect you:

अध्याय २१९

श्लोक 37

अनवद्या सुकेशी च मेनकाः सह जन्यया(३) ।क्रतुस्थला घृताची च विश्वाची पुञ्जिकस्थला

anavadyā sukeśī ca menakāḥ saha janyayā(3) / kratusthalā ghṛtācī ca viśvācī puñjikasthalā

हिन्दी अर्थ

राजा दुष्टोंका दमन करे और शास्त्रमें बताये अनुसार प्रजासे कर ले। राज्यकी आधी आय सदा खजानेमें रख दिया करे और आधा ब्राह्मणको दे दे। श्रेष्ठ ब्राह्मण उस निधिको पाकर सब-का-

English

Anavadya and Sukeshi, the Menakas with Janya, Kratusthala, Ghritachi, Vishvachi, Punjikasthala,

अध्याय २१९

श्लोक 38

प्रम्लोचा चोर्वशी रम्भा पञ्चचूडा तिलोत्तमा ।चित्रलेखा लक्ष्मणा च पुण्डरीका च वारुणी

pramlocā corvaśī rambhā pañcacūḍā tilottamā / citralekhā lakṣmaṇā ca puṇḍarīkā ca vāruṇī

हिन्दी अर्थ

सब अपने हाथमें ले ले और उसमेंसे चौथा, आठवाँ तथा सोलहवाँ भाग निकालकर क्रमशः क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रको दे। धनको धर्मके अनुसार सुपात्रके हाथमें ही देना चाहिए। झूठ बोलनेवाले मनुष्यको दण्ड देना उचित है। राजा उसके धनका आठवाँ भाग दण्डके रूपमें ले ले। जिस धनका स्वामी लापता हो, उसे राजा तीन वर्षोतक अपने अधिकारमें रखे। तीन वर्षके

English

Pramlocha, Urvashi, Rambha, Panchachuda, Tilottama, Chitralekha, Lakshmana, Pundarika and Varuni.

अध्याय २१९

श्लोक 39

प्रह्लादो विरोचनो ऽथ बलिर्वाणो ऽथ तत्सुताः ।एते चान्ये ऽभिषिञ्चन्तु दानवा राक्षसास् तथा

prahlādo virocano 'tha balirvāṇo 'tha tatsutāḥ / ete cānye 'bhiṣiñcantu dānavā rākṣasās tathā

हिन्दी अर्थ

पहले यदि धनका स्वामी आ जाय तो वह उसे ले सकता है। उससे अधिक समय बीत जानेपर राजा स्वयं ही उस धनको ले ले। जो मनुष्य (नियत समयके भीतर आकर) “यह मेरा धन

English

Prahlada, Virochana, Bali, Bana and their sons — may these and other Danavas and Rakshasas consecrate you;

अध्याय २१९

श्लोक 40

हेतिश् चैव प्रहेतिश् च विद्युत्स्फुर्जथुरग्रकाः ।यक्षः सिद्धार्मकः पातु माणिभद्रश् च नन्दनः

hetiś caiva prahetiś ca vidyutsphurjathuragrakāḥ / yakṣaḥ siddhārmakaḥ pātu māṇibhadraś ca nandanaḥ

हिन्दी अर्थ

है'—एऐसा कहकर उसका अपनेसे सम्बन्ध बतलाता है, वह विधिपूर्वक (राजाके सामने जाकर) उस धनका रूप और उसको संख्या बतलावे। इस प्रकार अपनेको स्वामी सिद्ध कर देनेपर वह उस धनको पानेका अधिकारी होता है। जो धन छोटे बालकके हिस्सेका हो, उसको राजा तबतक रक्षा करता रहे, जबतक कि उसका समावर्तन-संस्कार न हो जाय, अथवा जबतक उसको बाल्यावस्था न

English

Heti and Praheti, Vidyut, Sphurjathu, Agraka; may the Yaksha Siddharthaka protect, and Manibhadra, Nandana;

अध्याय २१९

श्लोक 41

पिङ्गाक्षो द्युतिमांश् चैव पुष्पवन्तो जयावहः ।शङ्खः पद्मश् च मकरः कच्छपश् च निधिर्जये

piṅgākṣo dyutimāṃś caiva puṣpavanto jayāvahaḥ / śaṅkhaḥ padmaś ca makaraḥ kacchapaś ca nidhirjaye

हिन्दी अर्थ

निवृत्त हो जाय। इसी प्रकार जिनके कुलमें कोई न हो और उनके बच्चे छोटे हों, ऐसी स्त्रियोंकी भी रक्षा आवश्यक है॥ ४--१९॥

English

Pingaksha, Dyutiman, Pushpavanta, Jayavaha; Shankha, Padma, Makara, Kachchhapa — the treasures in victory.

अध्याय २१९

श्लोक 42

पिशाचा ऊर्ध्वकेशाद्या भूता भूम्यादिवासिनः ।महाकालं पुरस्कृत्य नरसिंहञ्च मातरः

piśācā ūrdhvakeśādyā bhūtā bhūmyādivāsinaḥ / mahākālaṃ puraskṛtya narasiṃhañca mātaraḥ

हिन्दी अर्थ

हों तो उनकी रक्षा भी इसी प्रकार करनी चाहिए। यदि उनके जीते-जी कोई बन्धु-बान्धव उनके धनका अपहरण करें तो धर्मात्मा राजाको उचित है कि उन बान्धवोंको चोरका दण्ड दे। यदि साधारण चोरोंने प्रजाका धन चुराया हो तो राजा स्वयं उतना धन प्रजाको दे तथा जिन्हें

English

Pishachas such as Urdhvakesha, and the beings who dwell on earth and the rest; placing Mahakala before, and Narasimha, the Mothers;

अध्याय २१९

श्लोक 43

१ अभिमुक्तः क्षमासहेति ङ॥ २ अनाधृष्त इति ग॥ , घ॥ ,ञ॥ च ३ सह कन्ययेति ज॥ :प् २९८ गुहः स्कन्दो विशाखस्त्वान्नैगमेयो ऽभिषिञ्चतु ।डाकिन्यो याश् च योगिन्यः खेचरा भूचराश् च याः

1 abhimuktaḥ kṣamāsaheti ṅa.. 2 anādhṛṣta iti ga.. , gha.. ,ña.. ca 3 saha kanyayeti ja.. :p 298 guhaḥ skando viśākhastvānnaigameyo 'bhiṣiñcatu / ḍākinyo yāś ca yoginyaḥ khecarā bhūcarāś ca yāḥ

हिन्दी अर्थ

चोरोंसे रक्षा करनेका काम सौंपा गया हो, उनसे चुराया हुआ धन राजा वसूल करे। जो मनुष्य चोरी न होनेपर भी अपने धनको चुराया हुआ बताता हो, वह दण्डनीय है; उसे राज्यसे बाहर

English

may Guha, Skanda, Vishakha, Naigameya consecrate you; Dakinis and Yoginis, sky-goers and earth-goers;

अध्याय २१९

श्लोक 44

गरुडश्चारुणः पान्तु सम्पातिप्रमुखाः खगाः ।अनन्ताद्या महानागाः शेषवासुकितक्षकाः

garuḍaścāruṇaḥ pāntu sampātipramukhāḥ khagāḥ / anantādyā mahānāgāḥ śeṣavāsukitakṣakāḥ

हिन्दी अर्थ

निकाल देना चाहिए। यदि घरका धन घरवालोंने ही चुराया हो तो राजा अपने पाससे उसको न दे। अपने राज्यके भीतर जितनी दूकानें हों, उनसे उनकी आयका बीसवाँ हिस्सा राजाको टैक्सके रूपमें लेना चाहिए। परदेशसे माल मँगानेमें जो खर्च और नुकसान बैठता हो, उसका ब्यौरा बतानेवाला बीजक देखकर तथा मालपर दिये जानेवाले टैक्सका विचार करके प्रत्येक व्यापारीपर

English

Garuda and Aruna protect, birds headed by Sampati; Ananta and the great nagas, Shesha, Vasuki, Takshaka,

अध्याय २१९

श्लोक 45

ऐरावतो महापद्मः कम्बलाश्वतरावुभौ ।शङ्खः कर्कोटकश् चैव धृतराष्ट्रो धनञ्जयः

airāvato mahāpadmaḥ kambalāśvatarāvubhau / śaṅkhaḥ karkoṭakaś caiva dhṛtarāṣṭro dhanañjayaḥ

हिन्दी अर्थ

कर लगाना चाहिए, जिससे उसको लाभ होता रहे--वह घाटेमें न पड़े। आयका बीसवाँ भाग ही राजाको लेना चाहिए। यदि कोई राजकर्मचारी इससे अधिक वसूल करता हो तो उसे दण्ड देना

English

Airavata, Mahapadma, both Kambala and Ashvatara, Shankha, Karkotaka, Dhritarashtra, Dhananjaya,

अध्याय २१९

श्लोक 46

कुमुदैर् आवणौ पद्मः पुष्पदन्तो ऽथ वामनः ।सुप्रतीको ऽञ्जनो नागाः पान्तु त्वां सर्वतः सदा

kumudair āvaṇau padmaḥ puṣpadanto 'tha vāmanaḥ / supratīko 'ñjano nāgāḥ pāntu tvāṃ sarvataḥ sadā

हिन्दी अर्थ

उचित है । स्त्रियों और साधु-संन्यासियोंसे नावकी उतराई (सेवा) नहीं लेनी चाहिए। यदि मल्लाहोंकी गलतीसे नावपर कोई चीज नुकसान हो जाय तो वह मल्लाहोंसे ही दिलानी चाहिए। राजा शूकधान्यका' छठा भाग और शिम्बिधान्यका' आठवाँ भाग करके रूपमें ग्रहण करे। इसी प्रकार जंगली फल-मूल आदिमेंसे देश-कालके अनुरूप उचित कर लेना चाहिए। पशुओंका पाँचवाँ और

English

Kumuda, Aravana, Padma, Pushpadanta and Vamana, Supratika, Anjana — may the nagas always protect you on all sides.

अध्याय २१९

श्लोक 47

पैतामहस् तथा हंसो वृषभः शङ्करस्य च ।दुर्गासिंहश् च पान्तु त्वां यमस्य महिषस् तथा

paitāmahas tathā haṃso vṛṣabhaḥ śaṅkarasya ca / durgāsiṃhaś ca pāntu tvāṃ yamasya mahiṣas tathā

हिन्दी अर्थ

सुवर्णका छठा भाग राजाके लिये ग्राह्य है। गन्ध,

English

The grandfather's swan, Shankara's bull, Durga's lion and Yama's buffalo protect you;

अध्याय २१९

श्लोक 48

उच्चैःश्रवाश्चाश्वपतिस् तथा धन्वन्तरिः सदा ।कौस्तुभः शङ्कराजश् च वज्रं शूलञ्च चक्रकं

uccaiḥśravāścāśvapatis tathā dhanvantariḥ sadā / kaustubhaḥ śaṅkarājaś ca vajraṃ śūlañca cakrakaṃ

हिन्दी अर्थ

बाँस, वेणु, चर्म, बाँसको चीरकर बनाये हुए टोकरे तथा पत्थरके बर्तनोंपर और मधु, मांस एवं घीपर भी आमदनीका छठा भाग ही कर लेना उचित है ब्राह्मणोंसे कोई प्रिय वस्तु अथवा कर नहीं लेना चाहिए। जिस राजाके राज्यमें श्रोत्रिय ब्राह्मण भूखसे कष्ट पाता है, उसका राज्य बीमारी, अकाल और लुटेरोंसे पीड़ित होता

English

Uchchaihshravas, the horse-lord, Dhanvantari always, Kaustubha, Shankharaja, the thunderbolt, trident and discus;

अध्याय २१९

श्लोक 49

नन्दको ऽस्त्राणि रक्षन्तु धर्मश् च व्यवसायकः ।चित्रगुप्तश् च दण्डश् च पिङ्गलो मृत्युकालकौ

nandako 'strāṇi rakṣantu dharmaś ca vyavasāyakaḥ / citraguptaś ca daṇḍaś ca piṅgalo mṛtyukālakau

हिन्दी अर्थ

रहता है। अतः ब्राह्मणकी विद्या और आचरणको जानकर उसके लिये अनुकूल जीविकाका प्रबन्ध करे तथा जैसे पिता अपने औरस पुत्रका पालन करता है, उसी प्रकार राजा विद्वान् और सदाचारी

English

Nandaka — may the weapons guard, and Dharma, Vyavasayaka, Chitragupta and Danda, Pingala, Death and Kala.

अध्याय २१९

श्लोक 50

बालखिल्यादिमुनयो व्यासवाल्मीकिमुख्यकाः ।पृथुर्दिलीपो भरतो दुष्यन्तः शक्रजिद्वली(१)

bālakhilyādimunayo vyāsavālmīkimukhyakāḥ / pṛthurdilīpo bharato duṣyantaḥ śakrajidvalī(1)

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणकी सर्वथा रक्षा करे। जो राजासे सुरक्षित होकर प्रतिदिन धर्मका अनुष्ठान करता है, उस ब्राह्मणके धर्मसे राजाकी आयु बढ़ती है तथा उसके राष्ट्र एवं खजानेकी भी उन्नति होती है। शिल्पकारोंको चाहिए कि महीनेमें एक दिन बिना पारिश्रमिक लिये केवल भोजन स्वीकार करके राजाका काम करें। इसी प्रकार दूसरे लोगोंको भी, जो राज्यमें रहकर अपने शरीरके

English

Sages beginning with Balakhilya, chiefly Vyasa and Valmiki; Prithu, Dilipa, Bharata, Dushyanta, Shakrajit, the strong;

अध्याय २१९

श्लोक 51

मल्लः ककुत्स्थश्चानेन युवनाश्वो जयद्रथः ।मान्धाता मुचुकुन्दश् च पान्तु त्वाञ्च पुरूरवाः

mallaḥ kakutsthaścānena yuvanāśvo jayadrathaḥ / māndhātā mucukundaś ca pāntu tvāñca purūravāḥ

हिन्दी अर्थ

परिश्रमसे जीविका चलाते हैं, महीनेमें एक दिन राजाका काम करना चाहिए॥ ३० --३४॥

English

Malla, Kakutstha, Anena, Yuvanashva, Jayadratha, Mandhata, Muchukunda and Pururavas protect you.

अध्याय २१९

श्लोक 52

वास्तुदेवाः पञ्चविंशत्तत्त्वानि विजयाय ते ।रुक्मभौमः शिलाभौमः पतालो नीलमूर्तिकः(२)

vāstudevāḥ pañcaviṃśattattvāni vijayāya te / rukmabhaumaḥ śilābhaumaḥ patālo nīlamūrtikaḥ(2)

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणे “राजधर्मका कथन” नामक दो सौ तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ अन्तःपुरके सम्बन्धमें राजाके कर्त्तव्य; स्त्रीकी विरक्ति और अनुरक्तिकी परीक्षा तथा सुगन्धित पदार्थोके सेवनका प्रकार पुष्कर कहते हैं- अब मैं अन्तःपुरके विषयमें पुरुषार्थ 'त्रिवर्ग' कहलाते हैं । इनको एक-दूसरेके विचार करूँगा। धर्म, अर्थ और काम-ये तीन द्वारा रक्षा करते हुए स्त्रीसहित राजाओंको इनका

English

The Vastu gods, the twenty-five principles, for your victory: Rukmabhauma, Shilabhauma, Patala, Nilamurtika,

अध्याय २१९

श्लोक 53

१ शत्रुजिद्वलो इति क॥ , ख॥ च २ नीलमृत्तिक इति ख॥ , घ॥ , छ॥ , ज॥ , ञ॥ , ट॥ च ।नीलमूर्धज इति ङ॥ :प् २९९ पीतरक्तः क्षितिश् चैव श्वेतभौमो रसातलं ।भूल्लोको ऽथ भुवर्मुख्या जम्वूद्वीपादयः श्रिये

1 śatrujidvalo iti ka.. , kha.. ca 2 nīlamṛttika iti kha.. , gha.. , cha.. , ja.. , ña.. , ṭa.. ca / nīlamūrdhaja iti ṅa.. :p 299 pītaraktaḥ kṣitiś caiva śvetabhaumo rasātalaṃ / bhūlloko 'tha bhuvarmukhyā jamvūdvīpādayaḥ śriye

हिन्दी अर्थ

१. 'शूकथान्य' वह अन्न है, जिसके दाने बालों या सीकोंसे लगते हैं -जैसे गेहूँ, जौ आदि। २. वह अन्न, जिसके पौधेमें फली (छीमी) लगती हो जैसे चना, मटर आदि।

English

Pitaraktaka, Kshiti, Shvetabhauma, Rasatala; Bhurloka and Bhuvar chiefly, Jambudvipa and the rest for prosperity.

अध्याय २१९

श्लोक 54

उत्तराः कुरवः पान्तु रम्या हिरण्यकस् तथा(१) ।भद्राश्वः केतुमालश् च वर्षश् चैव वलाहकः

uttarāḥ kuravaḥ pāntu ramyā hiraṇyakas tathā(1) / bhadrāśvaḥ ketumālaś ca varṣaś caiva valāhakaḥ

हिन्दी अर्थ

rT NNN NM आशा व वी वी वी वी वी व वी की की की जी वी 4 सेवन करना चाहिए। “त्रिवर्ग' एक महान् वृक्षके समान है। 'धर्म' उसकी जड़, “अर्थ” उसकी शाखाएँ और 'काम' उसका फल है। मूलसहित उस वृक्षको रक्षा करनेसे ही राजा फलका भागी

English

May Uttara Kuru protect, and lovely Hiranyaka; Bhadrashva, Ketumala, Varsha and Valahaka,

अध्याय २१९

श्लोक 55

हरिवर्षः किम्पुरुष इन्द्रद्वीपः कशेरुमान् ।ताम्रवर्णो गभस्तिमान् नागद्वीपश् च सौम्यकः

harivarṣaḥ kimpuruṣa indradvīpaḥ kaśerumān / tāmravarṇo gabhastimān nāgadvīpaś ca saumyakaḥ

हिन्दी अर्थ

हो सकता है। राम! स्त्रियाँ कामके अधीन होती हैं, उन्हींके लिये रत्नोंका संग्रह होता है। विषयसुखकी इच्छा रखनेवाले राजाको स्त्रियोंका सेवन करना चाहिए, परंतु अधिक मात्रामें नहीं। आहार, मैथुन

English

Harivarsha, Kimpurusha, Indradvipa, Kasherumat, Tamravarna, Gabhastiman, Nagadvipa and Saumyaka,

अध्याय २१९

श्लोक 56

गन्धर्वो वरुणो यश् च नवमः पान्तु राज्यदाः ।हिमवान् हेमकूटश् च निषधो नील एव च

gandharvo varuṇo yaś ca navamaḥ pāntu rājyadāḥ / himavān hemakūṭaś ca niṣadho nīla eva ca

हिन्दी अर्थ

और निद्रा--इनका अधिक सेवन निषिद्ध है; क्योंकि इनसे रोग उत्पन्न होता है । उन्हीं स्त्रियोंका सेवन करे अथवा पलंगपर बैठावे, जो अपनेमें अनुराग रखनेवाली हों। परंतु जिस स्त्रीका आचरण दुष्ट हो, जो अपने स्वामीकी चर्चा भी पसंद नहीं करती, बल्कि उनके शत्रुओंसे एकता स्थापित करती है, उदण्डतापूर्वक गर्व धारण किये रहती है, चुम्बन करनेपर अपना मुँह पोंछती या धोती

English

Gandharva, Varuna and the ninth — may they protect, giving kingdom. Himavan, Hemakuta, Nishadha and Nila,

अध्याय २१९

श्लोक 57

श्वेतश् च शृङवान् मेरुर्माल्यवान् गन्धमादनः ।महेन्द्रो मलयः सह्यः शक्तिमानृक्षवान् गिरिः

śvetaś ca śṛṅavān merurmālyavān gandhamādanaḥ / mahendro malayaḥ sahyaḥ śaktimānṛkṣavān giriḥ

हिन्दी अर्थ

है, स्वामीकी दी हुई वस्तुका अधिक आदर नहीं करती, पतिके पहले सोती है, पहले सोकर भी उनके जागनेके बाद ही जागती है, जो स्पर्श करनेपर अपने शरीरको कँपाने लगती है, एक-

English

Shveta, Shringavan, Meru, Malyavan, Gandhamadana, Mahendra, Malaya, Sahya, Shaktiman, Rikshavan mountain,

अध्याय २१९

श्लोक 58

विन्ध्यश् च पारिपात्रश् च गिरयः शान्तिदास्तु ते ।ऋग्वेदाद्याः षडङ्गानि इतिहासपुराणकं

vindhyaś ca pāripātraś ca girayaḥ śāntidāstu te / ṛgvedādyāḥ ṣaḍaṅgāni itihāsapurāṇakaṃ

हिन्दी अर्थ

एक अङ्गपर अवरोध उपस्थित करती है, उनके प्रिय वचनको भी बहुत कम सुनती है और सदा उनसे पराङ्मुख रहती है, सामने जाकर कोई वस्तु दी जाय, तो उसपर दृष्टि नहीं डालती, अपने जघन (कटिके अग्रभाग)-को अत्यन्त छिपाने -- पतिके स्पर्शसे बचानेकी चेष्टा करती है, स्वामीको देखते ही जिसका मुँह उतर जाता है, जो उनके मित्रोंसे भी विमुख रहती है, वे जिन-जिन

English

Vindhya and Pariyatra — may these mountains give you peace. The Rigveda and the rest, the six limbs, history and Purana,

अध्याय २१९

श्लोक 59

आयुर्वेदश् च गन्धर्वधनुर्वेदोपवेदकाः ।शिक्षा कल्पो व्याकरणं निरुक्तं ज्योतिषाङ्गतिः

āyurvedaś ca gandharvadhanurvedopavedakāḥ / śikṣā kalpo vyākaraṇaṃ niruktaṃ jyotiṣāṅgatiḥ

हिन्दी अर्थ

स्त्रियोंके प्रति अनुराग रखते हैं, उन सबकी ओरसे जो मध्यस्थ (न अनुरक्त न विरक्त) दिखायी देती है तथा जो शृङ्गारका समय उपस्थित जानकर भी भृङ्गार-धारण नहीं करती, वह स्त्री

English

Ayurveda, the Gandharva-veda, Dhanurveda and Upavedas; Shiksha, Kalpa, Vyakarana, Nirukta, Jyotisha;

अध्याय २१९

श्लोक 60

छन्दोगानि च वेदाश् च मीमांसा न्यायविस्तरः ।धर्मशास्त्रं पुराणञ्च विद्या ह्य् एताश् चतुर्दश

chandogāni ca vedāś ca mīmāṃsā nyāyavistaraḥ / dharmaśāstraṃ purāṇañca vidyā hy etāś caturdaśa

हिन्दी अर्थ

'विरक्त' है। उसका परित्याग करके अनुरागिणी स्त्रीका सेवन करना चाहिए। अनुरागवती स्त्री स्वामीको देखते ही प्रसन्नतासे खिल उठती है, दूसरी ओर मुख किये होनेपर भी कनखियोंसे उनकी ओर देखा करती है, स्वामीको निहारते देख अपनी चञ्चल दृष्टि अन्यत्र हटा ले जाती है, परंतु पूरी तरह हटा नहीं पाती तथा भृगुनन्दन!

English

Chandas and the Vedas, Mimamsa, the expanse of Nyaya, Dharmashastra and Purana — these are the fourteen knowledges.

अध्याय २१९

श्लोक 61

साङ्ख्यं योगः पाशुपतं वेदा वै पञ्चरात्रकं ।कृतान्तपञ्चकं ह्य् एतद् गायत्री च शिवा तथा

sāṅkhyaṃ yogaḥ pāśupataṃ vedā vai pañcarātrakaṃ / kṛtāntapañcakaṃ hy etad gāyatrī ca śivā tathā

हिन्दी अर्थ

अपने गुप्त आङ्गोंको भी वह कभी-कभी व्यक्त कर देती है और शरीरका जो अंश सुन्दर नहीं है, उसे प्रयत्नपूर्वक छिपाया करती है, स्वामीके देखते-देखते छोटे बच्चेका आलिङ्गन और चुम्बन

English

Sankhya, Yoga, Pashupata, the Vedas, Pancharatra — these are the five systems; and Gayatri and Shiva,

अध्याय २१९

श्लोक 62

दुर्गा विद्या च गान्धारी पान्तु त्वां शान्तिदाश् च ते ।लवणेक्षुसुरासर्पिदधिदुग्धजलाब्धयः

durgā vidyā ca gāndhārī pāntu tvāṃ śāntidāś ca te / lavaṇekṣusurāsarpidadhidugdhajalābdhayaḥ

हिन्दी अर्थ

करने लगती है, बातचीतमें भाग लेती और सत्य बोलती है, स्वामीका स्पर्श पाकर जिसके अंगोंमें रोमाञ्च और स्वेद प्रकट हो जाते हैं, जो उनसे अत्यन्त सुलभ वस्तु ही माँगती है और स्वामीसे थोड़ा पाकर भी अधिक प्रसन्नता प्रकट करती है, उनका नाम लेते ही आनन्दविभोर हो जाती तथा विशेष आदर करती है, स्वामीके पास अपनी अंगुलियोंके चिहसे युक्त फल भेजा करती है तथा

English

Durga, Vidya and Gandhari protect you, and may they give you peace. Salt, sugarcane, liquor, ghee, curd, milk and water oceans —

अध्याय २१९

श्लोक 63

चत्वारः सागराः पान्तु तीर्थानि विविधानि च ।१ हैरण्यकस्तथेति घ॥ , ङ॥ , ज॥ च ।हिरण्मयश्तथेति छ॥ :प् ३०० पुष्करश् च प्रयागश् च प्रभासो नैमिषः परः

catvāraḥ sāgarāḥ pāntu tīrthāni vividhāni ca / 1 hairaṇyakastatheti gha.. , ṅa.. , ja.. ca / hiraṇmayaśtatheti cha.. :p 300 puṣkaraś ca prayāgaś ca prabhāso naimiṣaḥ paraḥ

हिन्दी अर्थ

स्वामीको भेजी हुई कोई वस्तु पाकर उसे आदरपूर्वक छातीसे लगा लेती है, अपने आलिंगनोंद्वारा मानो स्वामीके शरीरपर अमृतका लेप कर देती है, स्वामीके सो जानेपर सोती और पहले ही जग

English

may the four oceans protect, and holy places of many kinds: Pushkara and Prayaga, Prabhasa, Naimisha the best,

अध्याय २१९

श्लोक 64

गयाशीर्षो ब्रह्मशिरस्तीर्थमुत्त्रमानसं ।कालोदको नन्दिकुण्डस्तीर्थं पञ्चनदस् तथा

gayāśīrṣo brahmaśirastīrthamuttramānasaṃ / kālodako nandikuṇḍastīrthaṃ pañcanadas tathā

हिन्दी अर्थ

जाती है तथा स्वामीके ऊरुओंका स्पर्श करके उन्हें सोतेसे जगाती है राम! दहीको मलाईके साथ थोड़ा-सा कपित्थ (कैथ)-का चूर्ण मिला देनेसे जो घी तैयार होता है, उसकी गन्ध उत्तम होती है। घी, दूध आदिके साथ जौ, गेहूँ आदिके आरेका मेल होनेसे उत्तम

English

Gayashirsha, Brahmashira, the holy Uttara Manasa, Kalodaka, Nandikunda, Panchanada the holy place,

अध्याय २१९

श्लोक 65

भृगुतीर्थं प्रभासञ्च तथा चामरकण्टकं ।जम्बुमार्गश् च विमलः कपिलस्य तथाश्रमः

bhṛgutīrthaṃ prabhāsañca tathā cāmarakaṇṭakaṃ / jambumārgaś ca vimalaḥ kapilasya tathāśramaḥ

हिन्दी अर्थ

खाद्य-पदार्थ तैयार होता है। अब भिन्न-भिन्न ्रव्योंमें गन्ध छोड्नेका प्रकार दिखलाया जाता है।

English

Bhriguthirtha, Prabhasa and Amarakantaka, Jambumarga, Vimala, and Kapila's hermitage,

अध्याय २१९

श्लोक 66

गङ्गाद्वारकुशावर्तौ विन्ध्यको नीलपर्वतः ।वराहपर्वतश् चैव तीर्थङ्कणखलं तथा

gaṅgādvārakuśāvartau vindhyako nīlaparvataḥ / varāhaparvataś caiva tīrthaṅkaṇakhalaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

धूपन और वासन ये आठ प्रकारके कर्म बतलाये गये हैं। कपित्थ, बिल्व, जामुन, आम और करवीरके पछ्लवोंसे जलको शुद्ध करके उसके द्वारा जो किसी द्रव्यको धोकर या अभिषिक्त करके पवित्र किया जाता है, वह उस द्रव्यका 'शौचन' (शोधन अथवा पवित्रीकरण) कहलाता

English

Gangadvara, Kushavarta, Vindhyaka, Nila mountain, Varahaparvata, and the holy Kanakhala,

अध्याय २१९

श्लोक 67

कालञ्जरश् च केदारो रुद्रकोटिस्तथैव च ।वाराणसी महातीर्थं वदर्याश्रम एव च

kālañjaraś ca kedāro rudrakoṭistathaiva ca / vārāṇasī mahātīrthaṃ vadaryāśrama eva ca

हिन्दी अर्थ

है। इन पल्लवोंके अभावमें कस्तूरीमिश्रित जलके द्वारा द्रव्योंकी शुद्धि होती है। नख, कूट, घन

English

Kalanjara and Kedara and Rudrakoti likewise, Varanasi the great holy place, and Badari ashrama,

अध्याय २१९

श्लोक 68

द्वारका श्रीगिरिस्तीर्थं तीर्थञ्च पुरुषोत्तमः ।शालग्रामोथ वाराहः सिन्धुसागरसङ्गमः

dvārakā śrīgiristīrthaṃ tīrthañca puruṣottamaḥ / śālagrāmotha vārāhaḥ sindhusāgarasaṅgamaḥ

हिन्दी अर्थ

(शिलाजीत), जल, कुमकुम (केसर), लाक्षा (लाह), चन्दन, अगुरु, नीरद, सरल, देवदारु, कपूर, कान्ता, वाल (सुगन्धबाला), कुन्दुरुक, गुग्गुल, श्रीनिवास और करायल--ये धूपके इक्कीस द्रव्य हैं। इन इक्कीस धूप-द्रव्योंमेंसे अपनी इच्छाके अनुसार दो-दो द्रव्य लेकर उनमें करायल मिलावे। फिर सबमें नख (एक प्रकारका सुगन्धद्रव्य), पिण्याक (तिलकी खली) और मलय-चन्दनका

English

Dvaraka, Shrigiri, and the holy Purushottama, Shalagrama, Varaha, the confluence of Sindhu and the sea,

अध्याय २१९

श्लोक 69

फल्गुतीर्थं विन्दुसरः करवीराश्रमस् तथा ।नद्यो गङ्गासरस्वत्यः शतदुर्गण्डकी तथा

phalgutīrthaṃ vindusaraḥ karavīrāśramas tathā / nadyo gaṅgāsarasvatyaḥ śatadurgaṇḍakī tathā

हिन्दी अर्थ

चूर्ण मिलाकर सबको मधुसे युक्त करे। इस प्रकार अपने इच्छानुसार विधिवत् तैयार किये हुए धूपयोग होते हैं। त्वचा (छाल), नाड़ी (डंठल), फल, तिलका तेल, केसर, ग्रन्थिपर्वा, शैलेय, तगर,

English

Phalgu-tirtha, Bindusaras, and Karaviraashrama; rivers Ganga, Sarasvati, Shatadru, Gandaki,

अध्याय २१९

श्लोक 70

अच्छोदा च विपाशा च वितस्ता देविका नदी ।कावेरी वरुणा चैव निश् चरा गोमती नदी

acchodā ca vipāśā ca vitastā devikā nadī / kāverī varuṇā caiva niś carā gomatī nadī

हिन्दी अर्थ

विष्णुक्रान्ता, चोल, कर्पूर, जटामांसी, मुरा, कूट-- ये सब स््रानके लिये उपयोगी द्रव्य हैं। इन ्रव्योंमेंसे अपनी इच्छाके अनुसार तीन द्रव्य लेकर उनमें कस्तूरी मिला दे। इन सबसे मिश्रित जलके द्वारा यदि स्नान करे तो वह कामदेवको बढ़ानेवाला होता है। त्वचा, मुरा, नलद--इन सबको समान मात्रामें लेकर इनमें आधा सुगन्धबाला मिला दे। फिर इनके द्वारा स्नान करनेपर शरीरसे कमलकी-

English

Achchhoda and Vipasha, Vitasta, the Devika river, Kaveri, Varuna and Nishchara, the Gomati river,

अध्याय २१९

श्लोक 71

पारा चर्मण्वती रूपा मन्दाकिनी महानदी ।तापी पयोष्णी वेणा च गौरी वैतरणी तथा

pārā carmaṇvatī rūpā mandākinī mahānadī / tāpī payoṣṇī veṇā ca gaurī vaitaraṇī tathā

हिन्दी अर्थ

सी गन्ध उत्पन्न होती है। इनके ऊपर यदि तेल लगाकर स्त्रान करे तो शरीरका रंग कुमकुमके समान हो जाता है। यदि उपर्युक्त द्रव्योँमे आधा तगर मिला दिया जाय तो शरीरसे चमेलीके

English

Para, Charmanvati, Rupa, Mandakini, Mahanadi, Tapi, Payoshni, Vena, Gauri and Vaitarani,

अध्याय २१९

श्लोक 72

गोदावरी भीमरथी तुङ्गभद्रा प्रणी तथा ।चन्द्रभागा शिवा गौरी अभिषिञ्चन्तु पान्तु वः(१)

godāvarī bhīmarathī tuṅgabhadrā praṇī tathā / candrabhāgā śivā gaurī abhiṣiñcantu pāntu vaḥ(1)

हिन्दी अर्थ

फूलकी भाँति सुगन्ध आती है। उनमें ट्व्यामक नामवाली औषध मिला देनेसे मौलसिरीके फूलोंकी- सी मनोहारिणी सुगन्ध प्रकट होती है। तिलके तेलमें मंजिष्ठ, तगर, चोल, त्वचा, व्याघ्रनख, नख और गन्धपत्र छोड़ देनेसे बहुत ही सुन्दर और

English

Godavari, Bhimarathi, Tungabhadra, Prani, Chandrabhaga, Shiva, Gauri — may they consecrate and protect you.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 219
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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