Agni Purana· Agni Purāṇa
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अध्याय 221 / 381

Adhyaya 222

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अध्याय २२१

श्लोक 1

राजधर्माः पुष्कर उवाच ग्रामस्याधिपतिं कुर्याद्दशग्रामाधिपं नृपः ।शतग्रामाधिपञ्चान्यं तथैव विषयेश्वरं

rājadharmāḥ puṣkara uvāca grāmasyādhipatiṃ kuryāddaśagrāmādhipaṃ nṛpaḥ / śatagrāmādhipañcānyaṃ tathaiva viṣayeśvaraṃ

हिन्दी अर्थ

तरह झपटकर शत्रुको विदीर्ण कर डाले, खरगोशकी भाँति छलाँगें भरते हुए अदृश्य हो जाय और सूअरकी भाँति दूढ़तापूर्वक प्रहार करे। राजा मोरकी भाँति विचित्र आकार धारण करे, घोड़ेके

English

(The asterisms) Ardra, Hasta, the four Aadha and the three Uttara* should be placed inside the central square as four pillars.

अध्याय २२१

श्लोक 2

तेषां भोगविभागश् च भवेत् कर्मानुरूपतः ।नित्यमेव तथा कार्यं तेषाञ्चारैः परीक्षणं

teṣāṃ bhogavibhāgaś ca bhavet karmānurūpataḥ / nityameva tathā kāryaṃ teṣāñcāraiḥ parīkṣaṇaṃ

हिन्दी अर्थ

समान दृढ़ भक्ति रखनेवाला हो और कोयलकी तरह मीठे वचन बोले। कौएकी तरह सबसे चौकन्ना रहे; रातमें ऐसे स्थानपर रहे, जो दूसरोंको मालूम न हो; जाँच या परख किये बिना भोजन और शय्याको ग्रहण न करे। अपरिचित स्त्रीके साथ समागम न करे; बेजान- पहचानकी नावपर न चढ़े। अपने राष्ट्रकी प्रजाको चूसनेवाला राजा राज्य और जीवन-दोनोंसे

English

Fortifications should be made thus. A belligerent com¬ ing from outside from the direction of lord (planet) (that presides over the day) and the asterisms (representing tlxat

अध्याय २२१

श्लोक 3

ग्रामे दोषान् समुत्पन्नान् ग्रामेशः प्रसमं नयेत् ।अशक्तो दशपालस्य स तु गत्वा निवेदयेत्

grāme doṣān samutpannān grāmeśaḥ prasamaṃ nayet / aśakto daśapālasya sa tu gatvā nivedayet

हिन्दी अर्थ

हाथ धो बैठता है। महाभाग! जैसे पाला हुआ बछड़ा बलवान् होनेपर काम करनेके योग्य होता है, उसी प्रकार सुरक्षित राष्ट्र राजाके काम आता है। यह सारा कर्म हैव और पुरुषार्थके अधीन है।

English

The POrv&t&a and Uttar&ai.

अध्याय २२१

श्लोक 4

श्रुत्वापि दशपालो ऽपि तत्र युक्तिमुपाचरेत् ।वित्ताद्याप्नोति राजा वै विषयात्तु सुरक्षितात्

śrutvāpi daśapālo 'pi tatra yuktimupācaret / vittādyāpnoti rājā vai viṣayāttu surakṣitāt

हिन्दी अर्थ

इनमें हैव तो अचिन्त्य है, किंतु पुरुषार्थमें कार्य करनेकी शक्ति है। राजाके राज्य, पृथ्वी तथा लक्ष्मीकी उत्पत्तिका एकमात्र कारण है -प्रजाका अनुराग। (अतः राजाको चाहिए कि वह सदा प्रजाको संतुष्ट रखे।) ॥ १७--३३॥

English

Hie Uttaraph&Igunl, Uttar&f&dha and Uttarapropada.

अध्याय २२१

श्लोक 5

धनवान्धर्ममाप्नोति धनवान् काममश्नुते ।उच्छिद्यन्ते विना ह्य् अर्थैः(१) क्रिया ग्रीष्मे सरिद्यथा

dhanavāndharmamāpnoti dhanavān kāmamaśnute / ucchidyante vinā hy arthaiḥ(1) kriyā grīṣme saridyathā

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणे 'राजधर्मका कथन” नामक दो सौ पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

If the planets and asterisms at the innermost square are good, it is known that those remaining in the inner square would be victorious and defeat for that person coming (from outside).

अध्याय २२१

श्लोक 6

विशेषो नास्ति लोकेषे पतितस्याधनस्य च ।पतितान्न तु गृह्णन्ति दरिद्रो न प्रयच्छति

viśeṣo nāsti lokeṣe patitasyādhanasya ca / patitānna tu gṛhṇanti daridro na prayacchati

हिन्दी अर्थ

पुरुषार्थकी प्रशंसा; साम आदि उपायोंका प्रयोग तथा राजाकी विविध देवरूपताका प्रतिपादन पुष्कर कहते हैं- परशुरामजी! दूसरे शरीरसे श्रेष्ठ बतलाते हैं। हैव प्रतिकूल हो तो उसका उपार्जित किये हुए अपने ही कर्मका नाम 'हैव' पुरुषार्थसे निवारण किया जा सकता है तथा समझिये। इसलिये मेधावी पुरुष पुरुषार्थको ही पहलेके सात्त्विक कर्मसे पुरुषार्थके बिना भी

English

All things collected in the (month of) Vaiiakha (May- June) would become six-fold (worth) in eight months. In the same way, the grains such as barley and wheat (stocked) in the (months of) Jye?{ha (June-July) and Ajlia (July-August) (would fetch m ore ).

अध्याय २२१

श्लोक 7

धनहीनस्य भार्यापि नैका स्यादुपवर्तिनी(२) ।राष्ट्रपीडाकरो राजा नरके वसते चिरं

dhanahīnasya bhāryāpi naikā syādupavartinī(2) / rāṣṭrapīḍākaro rājā narake vasate ciraṃ

हिन्दी अर्थ

सिद्धि प्राप्त हो सकती है। भृगुनन्दन! पुरुषार्थ ही हैवकी सहायतासे समयपर फल देता है। हैव और पुरुषार्थ -ये दोनों मनुष्यको फल देनेवाले हैं। पुरुषार्थद्वारा की हुई कृषिसे वर्षाका योग प्राप्त

English

(Similarly) one would get (increased returns) in the month of Margalira (December-January) from ghee, oil etc. purchased in (the month of) Sravaa (August-September), apparels and grains in Alvina (October-November) and grains (purchased) in Karttika (November-December).

अध्याय २२१

श्लोक 8

नित्यं राज्ञा तथा भाव्यं गर्भिणी सहधर्मिणी ।यहा स्वं सुखमुत्सृज्य गर्भस्य सुखमावहेत्(३)

nityaṃ rājñā tathā bhāvyaṃ garbhiṇī sahadharmiṇī / yahā svaṃ sukhamutsṛjya garbhasya sukhamāvahet(3)

हिन्दी अर्थ

होनेपर समयानुसार फलकी प्राप्ति होती है। अतः धर्मानुष्ठानपूर्वक पुरुषार्थ करे; आलसी न बने और हैवका भरोसा करके बैठा न रहे॥ १--४॥ साम आदि उपायोंसे आरम्भ किये हुए सभी कार्य सिद्ध होते हैं। साम, दान, भेद, दण्ड,

English

(One would get) profit by the purchase of saffron and perfumes in Pusya (January-February), food grains in Magha (February-March) and perfumes in Phalguna (March- April). Thus the arghakdna (section on storing and selling of grains and goods) has been described.

अध्याय २२१

श्लोक 9

१ विना ह्य् अर्थमिति घ॥ , ञ॥ च २ नैव स्याद्वशवर्तिनीति ख॥ , ट॥ च ।नैव स्याद्वशवर्तिनीति घ॥ , ज॥ , ञ॥ च ३ सुखमाहरेदिति ज॥ , ट॥ च :प् ३०९ किं यज्ञैस्तपसा तस्य प्रजा यस्य न रक्षिताः ।सुरक्षिताः प्रजा यस्य स्वर्गस्तस्य गृहोपमः

1 vinā hy arthamiti gha.. , ña.. ca 2 naiva syādvaśavartinīti kha.. , ṭa.. ca / naiva syādvaśavartinīti gha.. , ja.. , ña.. ca 3 sukhamāharediti ja.. , ṭa.. ca :p 309 kiṃ yajñaistapasā tasya prajā yasya na rakṣitāḥ / surakṣitāḥ prajā yasya svargastasya gṛhopamaḥ

हिन्दी अर्थ

बतलाये गये हैं। इनका परिचय सुनिये। तथ्य और अतथ्य--दो प्रकारका 'साम' कहा गया है। उनमें 'अतथ्य साम' साधु पुरुषोंके लिये कलंकका ही कारण होता है। अच्छे कुलमें

English

If there are vowels at the beginning and the end, one should know (impending) death (if the vowels are) short and victory (if the vowels are) long.

अध्याय २२१

श्लोक 10

अरक्षिताः प्रजा यस्य नरकं तस्य मन्दिरं ।राजा षड्भागमादत्ते सुकृताद्दुष्कृतादपि

arakṣitāḥ prajā yasya narakaṃ tasya mandiraṃ / rājā ṣaḍbhāgamādatte sukṛtādduṣkṛtādapi

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न, सरल, धर्मपरायण और जितेन्द्रिय पुरुष सामसे ही वशमें होते हैं। अतथ्य सामके द्वारा तो राक्षस भी वशीभूत हो जाते हैं। उनके किये हुए उपकारोंका वर्णन भी उन्हें वशमें करनेका अच्छा उपाय है। जो लोग आपसमें द्वेष रखनेवाले तथा कुपित, भयभीत एवं अपमानित हैं, उनमें भेदनीतिका प्रयोग करे और उन्हें अत्यन्त भय दिखावे। अपनी ओरसे उन्हें आशा दिखावे तथा जिस दोषसे वे

English

I shall describe Naracakra (the figure of a man) consisting of asterisms. A human figure is drawn first and the asterisms are arranged (in order).

अध्याय २२१

श्लोक 11

धर्मागमो रक्षणाच्च पापमाप्नोत्यरक्षणात् ।सुभगा विटभीतेव राजवल्लभतस्करैः

dharmāgamo rakṣaṇācca pāpamāpnotyarakṣaṇāt / subhagā viṭabhīteva rājavallabhataskaraiḥ

हिन्दी अर्थ

दूसरे लोग डरते हों, उसीको प्रकट करके उनमें भेद डाले । शत्रुके कुटुम्बमें भेद डालनेवाले पुरुषकी रक्षा करनी चाहिए। सामन्तका क्रोध बाहरी कोप है तथा मन्त्री, अमात्य और पुत्र आदिका क्रोध

English

I shall (now) describe the Jayacakra (the circle of victory). One should draw letters a to ha. One should draw thirteen lines (on a plane) and six lines obliquely.

अध्याय २२१

श्लोक 12

भक्ष्यमाणाः प्रजा रक्ष्याः कायस्थैश् च विशेषतः ।रक्षिता तद्भयेभ्यस्तु राज्ञो भवति सा प्रजा(१)

bhakṣyamāṇāḥ prajā rakṣyāḥ kāyasthaiś ca viśeṣataḥ / rakṣitā tadbhayebhyastu rājño bhavati sā prajā(1)

हिन्दी अर्थ

भीतरी क्रोधके अन्तर्गत है; अतः पहले भीतरी कोपको शान्त करके सामन्त आदि शत्रुओंके बाह्य कोपको जीतनेका प्रयत्न करे॥ ५--११॥ सभी उपायोंमें “दान' श्रेष्ठ माना गया है। दानसे इस लोक और परलोक --दोनोंमें सफलता प्राप्त होती है। ऐसा कोई भी नहीं है, जो दानसे वशमें न हो जाता हो। दानी मनुष्य ही परस्पर सुसंगठित

English

The subjects who are being devoured are to be protected, especially from clerks; protected from their fear, those subjects are the king's.

अध्याय २२१

श्लोक 13

अरक्षिता सा भवति तेषामेवेह भोजनं ।दुष्टसम्मर्दनं कुर्याच्छास्त्रोक्तं करमाददेत्(२)

arakṣitā sā bhavati teṣāmeveha bhojanaṃ / duṣṭasammardanaṃ kuryācchāstroktaṃ karamādadet(2)

हिन्दी अर्थ

रहनेवाले लोगोंमें भी भेद डाल सकता है। साम, दान और भेद-इन तीनोंसे जो कार्य न सिद्ध हो सके, उसे “दण्ड 'के द्वारा सिद्ध करना चाहिए। दण्डमें सब कुछ स्थित है। दण्डका अनुचित

English

Unprotected, they become the food of those same people here. One should crush the wicked and take the tax prescribed in the scriptures;

अध्याय २२१

श्लोक 14

कोषे प्रवेशयेदर्धं नित्यञ्चार्धं द्विजे ददेत्(३) ।निधिं द्विजोत्तमः प्राप्य गृह्णीयात्सकलं तथा

koṣe praveśayedardhaṃ nityañcārdhaṃ dvije dadet(3) / nidhiṃ dvijottamaḥ prāpya gṛhṇīyātsakalaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

प्रयोग अपना ही नाश कर डालता है। जो दण्डके योग्य नहीं हैं, उनको दण्ड देनेवाला, तथा जो दण्डनीय हैं, उनको दण्ड न देनेवाला राजा नष्ट हो जाता है। यदि राजा दण्डके द्वारा सबकी रक्षा न करे तो देवता, हैत्य, नाग, मनुष्य, सिद्ध, भूत और पक्षी-ये सभी अपनी मर्यादाका उल्लङ्घन कर जायँ। चूँकि यह उद्दण्ड पुरुषोंका दमन करता और अदण्डनीय पुरुषोंको दण्ड देता है,

English

one should put half into the treasury and always give half to a Brahmin. A best Brahmin finding a treasure may take it all;

अध्याय २२१

श्लोक 15

चतुर्थमष्टमं भागं तथा षोडशमं द्विजः ।वर्णक्रमेण दद्याच्च निधिं पात्रे तु धर्मतः

caturthamaṣṭamaṃ bhāgaṃ tathā ṣoḍaśamaṃ dvijaḥ / varṇakrameṇa dadyācca nidhiṃ pātre tu dharmataḥ

हिन्दी अर्थ

इसलिये दमन और दण्डके कारण विद्वान् पुरुष इसे 'दण्ड' कहते हैं

English

a quarter, an eighth, a sixteenth — a twice-born should give in order of castes the treasure to a worthy person by dharma.

अध्याय २२१

श्लोक 16

अनृतन्तु वदन् दण्ड्यः(४) सुवित्तस्यांशमष्टमं ।प्रणष्टस्वामिकमृक्थं राजात्र्यब्दं निधापयेत्

anṛtantu vadan daṇḍyaḥ(4) suvittasyāṃśamaṣṭamaṃ / praṇaṣṭasvāmikamṛkthaṃ rājātryabdaṃ nidhāpayet

हिन्दी अर्थ

जब राजा अपने तेजसे इस प्रकार तप रहा हो कि उसको ओर देखना कठिन हो जाय, तब वह “सूर्यवत्' होता है। जब वह दर्शन देनेमात्रसे जगत्को प्रसन्न करता है, तब ' चन्द्रतुल्य' माना जाता है। राजा अपने गुप्तचरोंके द्वारा समस्त संसारमें व्याप्त रहता है, इसलिये वह “वायुरूप' है तथा दोष देखकर दण्ड देनेके कारण 'सर्वसमर्थ यमराज' के समान माना गया है। जिस समय वह खोटी बुद्धिवाले

English

One speaking falsely should be fined an eighth of his good wealth. Property whose owner is lost the king should deposit for three years;

अध्याय २२१

श्लोक 17

अर्वाक् त्र्यब्दाद्धरेत् स्वामी परेण नृपतिर्हरेत् ।ममेदमिति यो ब्रूयात् सो ऽर्थयुक्तो यथाविधि

arvāk tryabdāddharet svāmī pareṇa nṛpatirharet / mamedamiti yo brūyāt so 'rthayukto yathāvidhi

हिन्दी अर्थ

दुष्टजनको अपने कोपसे दग्ध करता है, उस समय साक्षात् ' अग्निदेव'का रूप होता है तथा जब ब्राह्मणोंको दान देता है, उस समय उस दानके कारण वह धनाध्यक्ष 'कुबेर-तुल्य' हो जाता है।

English

before three years the owner may take it; after, the king takes it. One who says "this is mine," in accordance with rule,

अध्याय २२१

श्लोक 18

सम्पाद्य रूपसङ्ख्यादीन् स्वामी तद् द्रव्यमर्हति ।१ सत्प्रजा इति घ॥ , ञ॥ च २ सुभगा विटभीतेवेत्यादिः, करमाददेदित्यन्तः पाठः झ॥ पुस्तके नास्ति ३ द्विजे ऽर्पयेदिति ञ॥ , ट॥ च ४ अमृतं वदतो ग्राह्यमिति ट॥ :प् ३१० बालदायादिकमृक्थं(१) तावद्राजानुपालयेत्

sampādya rūpasaṅkhyādīn svāmī tad dravyamarhati / 1 satprajā iti gha.. , ña.. ca 2 subhagā viṭabhītevetyādiḥ, karamādadedityantaḥ pāṭhaḥ jha.. pustake nāsti 3 dvije 'rpayediti ña.. , ṭa.. ca 4 amṛtaṃ vadato grāhyamiti ṭa.. :p 310 bāladāyādikamṛkthaṃ(1) tāvadrājānupālayet

हिन्दी अर्थ

धारा बरसानेके कारण वह 'वरुण' माना गया है। भूपाल अपने ' क्षमा' नामक गुणसे जब सम्पूर्ण जगतूको धारण करता है, उस समय ' पृथ्वीका स्वरूप' जान पड़ता है तथा उत्साह, मन्त्र और प्रभुशक्ति आदिके द्वारा वह सबका पालन करता है, इसलिये साक्षात् “भगवान् विष्णु' का स्वरूप है ॥ १७--२०॥

English

having established the form, number and so on, the owner deserves that property. The king should protect the property of a minor heir

अध्याय २२१

श्लोक 19

यावत्स्यात्स समावृत्तो यावद्वातीतशैशवः ।बालपुत्रासु चैवं स्याद्रक्षणं निष्कलासु च

yāvatsyātsa samāvṛtto yāvadvātītaśaiśavaḥ / bālaputrāsu caivaṃ syādrakṣaṇaṃ niṣkalāsu ca

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें "सामादि उपायोका कथन” नामक दो सौ छन्बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

until he has returned or until childhood is past. So too for the minor-son women and the childless,

अध्याय २२१

श्लोक 20

पतिव्रतासु च स्त्रीषु विधबास्वातुरासु च ।जीवन्तीनान्तु तासां ये संहरेयुः स्ववान्धवाः

pativratāsu ca strīṣu vidhabāsvāturāsu ca / jīvantīnāntu tāsāṃ ye saṃhareyuḥ svavāndhavāḥ

हिन्दी अर्थ

अपराधोंके अनुसार दण्डके प्रयोग पुष्कर कहते हैं-- राम ! अब मैं दण्डनीतिका प्रयोग बतलाऊँगा, जिससे राजाको उत्तम गति प्राप्त होती है। तीन जौका एक ' कृष्णल' समझना चाहिए, पाँच कृष्णलका एक “माष' होता है,

English

for chaste women, widows and the afflicted. Those relatives who seize the property of these while living,

अध्याय २२१

श्लोक 21

ताञ्छिष्याच्चौरदण्डेन धार्मिकः पृथिवीपतिः ।सामान्यतो हृतञ्चौरैस्तद्वै दद्यात् स्वयं नृपः

tāñchiṣyāccauradaṇḍena dhārmikaḥ pṛthivīpatiḥ / sāmānyato hṛtañcauraistadvai dadyāt svayaṃ nṛpaḥ

हिन्दी अर्थ

साठ कृष्णल (अथवा बारह माष) ' आधे कर्ष'के बराबर बताये गये हैं। सोलह माषका एक 'सुवर्ण' माना गया है। चार सुवर्णका एक “निष्क और दस निष्कका एक 'धरण' होता

English

the righteous king should punish with a thief's punishment. What is carried off by thieves in general the king himself should restore;

अध्याय २२१

श्लोक 22

चौररक्षाधिकारिभ्यो राजापि हृतमाप्नुयात् ।अहृते यो हृतं ब्रूयान्निःसार्यो दण्ड्य एव सः

caurarakṣādhikāribhyo rājāpi hṛtamāpnuyāt / ahṛte yo hṛtaṃ brūyānniḥsāryo daṇḍya eva saḥ

हिन्दी अर्थ

है। यह ताँबे, चाँदी और सोनेका मान बताया गया है परशुरामजी ! ताँबेका जो 'कर्ष' होता है, उसे विद्वानोंने ' कार्षिक' और 'कार्षापण' नाम दिया है। ढाई सौ पण (पैसे) “प्रथम साहस' दण्ड माना गया है, पाँच सौ पण 'मध्यम साहस' और

English

the king too may recover what was taken from those charged with guarding against thieves. One who claims theft where none was taken should be expelled and fined;

अध्याय २२१

श्लोक 23

न तद्राज्ञा प्रदातव्यं गृहे यद् गृहगैर् हृतं ।स्वराष्ट्रपण्यादादद्याद्राजा विंशतिमं द्विज

na tadrājñā pradātavyaṃ gṛhe yad gṛhagair hṛtaṃ / svarāṣṭrapaṇyādādadyādrājā viṃśatimaṃ dvija

हिन्दी अर्थ

है। चोरोंके द्वारा जिसके धनकी चोरी नहीं हुई है तो भी जो चोरीका धन वापस देनेवाले राजाके पास जाकर झूठ ही यह कहता है कि “मेरा इतना धन चुराया गया है', उसके कथनको

English

the king should not give what was taken by household members in the house. The king should take a twentieth of goods from his own country, twice-born;

अध्याय २२१

श्लोक 24

शुल्कांशं परदेशाच्च क्षयव्ययप्रकाशकं ।ज्ञात्वा सङ्कल्पयेच्छुल्कं लाभं वणिग्यथाप्नुयात्

śulkāṃśaṃ paradeśācca kṣayavyayaprakāśakaṃ / jñātvā saṅkalpayecchulkaṃ lābhaṃ vaṇigyathāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

असत्यता सिद्ध होनेपर उससे उतना ही धन दण्डके रूपमें वसूल करना चाहिए। जो मनुष्य चोरीमें गये हुए धनके विपरीत जितना धन बतलाता है, अथवा जो जितना झूठ बोलता है -- उन दोनोंसे राजाको दण्डके रूपमें दूना धन वसूल करना चाहिए; क्योंकि वे दोनों ही धर्मको नहीं जानते। झूठी गवाही देनेवाले क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र-इन तीनों वर्णोको कठोर दण्ड देना

English

the toll portion from other countries, making known loss and expense; having known, he should fix the toll so the merchant gets profit;

अध्याय २२१

श्लोक 25

विंशांशं लाभमादद्याद्दण्डनीयस्ततो ऽन्यथा ।स्त्रीणां प्रव्रजितानाञ्च(२) तरशुल्कं विवर्जयेत्

viṃśāṃśaṃ lābhamādadyāddaṇḍanīyastato 'nyathā / strīṇāṃ pravrajitānāñca(2) taraśulkaṃ vivarjayet

हिन्दी अर्थ

चाहिए; किंतु ब्राह्मणको केवल राज्यसे बाहर कर देना उचित है। उसके लिये दूसरे किसी दण्डका विधान नहीं है। धर्मज्ञ! जिसने धरोहर हड़प ली हो, उसपर धरोहरके रूपमें रखे हुए

English

he should take a twentieth of profit; otherwise he is to be punished. One should avoid ferry-tolls on women and renunciants;

अध्याय २२१

श्लोक 26

तरेषु दासदोषेण नष्टं दासांस्तु दापयेत् ।शूकधान्येषु षड्भागं शिम्बिधान्ये तथाष्टमं

tareṣu dāsadoṣeṇa naṣṭaṃ dāsāṃstu dāpayet / śūkadhānyeṣu ṣaḍbhāgaṃ śimbidhānye tathāṣṭamaṃ

हिन्दी अर्थ

वस्त्र आदिको कोमतके बराबर दण्ड लगाना चाहिए; ऐसा करनेसे धर्मकी हानि नहीं होती। जो धरोहरको नष्ट करा देता है, अथवा जो धरोहर रखे बिना ही किसीसे कोई वस्तु माँगता है --उन दोनोंको चोरके समान दण्ड देना

English

in ferries, loss through the fault of servants the servants should make good. A sixth of bearded grains, an eighth of pod grains,

अध्याय २२१

श्लोक 27

राजा वन्यार्थमादद्याद्देशकालानुरूपकं ।पञ्चषड्भागमादद्याद् राजा पशुहिरण्ययोः

rājā vanyārthamādadyāddeśakālānurūpakaṃ / pañcaṣaḍbhāgamādadyād rājā paśuhiraṇyayoḥ

हिन्दी अर्थ

चाहिए; या उनसे दूना जुर्माना वसूल करना चाहिए। यदि कोई पुरुष अनजानमें दूसरेका धन बेच देता है तो वह (भूल स्वीकार करनेपर) निर्दोष माना गया है; परंतु जो जान-बूझकर अपना

English

the king should take for the forest, according to place and time. A fifth or sixth the king should take of animals and gold;

अध्याय २२१

श्लोक 28

गन्धौषधिरसानाञ्च पुष्पमूलफलस्य च ।१ बालदायादिकं युक्तमिति ख॥ , ग॥ , घ॥ , ञ॥ च २ स्त्रीणाञ्चैव द्विजातीनामिति ट॥ :प् ३११ पत्रशाकतृणानाञ्च वंशवैणवचर्मणां

gandhauṣadhirasānāñca puṣpamūlaphalasya ca / 1 bāladāyādikaṃ yuktamiti kha.. , ga.. , gha.. , ña.. ca 2 strīṇāñcaiva dvijātīnāmiti ṭa.. :p 311 patraśākatṛṇānāñca vaṃśavaiṇavacarmaṇāṃ

हिन्दी अर्थ

बताते हुए दूसरेका सामान बेचता है, वह चोरके समान दण्ड पानेका अधिकारी है। जो अग्रिम मूल्य लेकर भी अपने हाथका काम बनाकर न दे, वह भी दण्ड देनेके ही योग्य है। जो देनेकी प्रतिज्ञा करके न दे, उसपर राजाको सुवर्ण (सोलह माष)-का दण्ड लगाना चाहिए। जो मजदूरी लेकर काम न करे, उसपर आठ कृष्णल जुर्माना लगाना चाहिए। जो असमयमें भृत्यका

English

of scents, herbs and juices, of flowers, roots and fruits, of leaves, vegetables and grass, of bamboo, cane and hides,

अध्याय २२१

श्लोक 29

वैदलानाञ्च भाण्डानां सर्वस्याश्ममयस्य च ।षड्भागमेव चादद्यान् मधुमांसस्य सर्पिषः

vaidalānāñca bhāṇḍānāṃ sarvasyāśmamayasya ca / ṣaḍbhāgameva cādadyān madhumāṃsasya sarpiṣaḥ

हिन्दी अर्थ

त्याग करता है, उसपर भी उतना ही दण्ड लगाना चाहिए। कोई वस्तु खरीदने या बेचनेके बाद जिसको कुछ पश्चात्ताप हो, वह धनका स्वामी दस दिनके भीतर दाम लौटाकर माल ले

English

of split things and vessels and everything made of stone — a sixth he should take, and of honey, meat and ghee.

अध्याय २२१

श्लोक 30

म्रियन्नपि न चादद्याद् ब्राह्मणेभ्यस् तथा करं ।यस्य राज्ञस्तु विषये श्रोत्रियः सीदति क्षुधा

mriyannapi na cādadyād brāhmaṇebhyas tathā karaṃ / yasya rājñastu viṣaye śrotriyaḥ sīdati kṣudhā

हिन्दी अर्थ

सकता है। (अथवा खरीददारको ही यदि माल पसंद न आवे तो वह दस दिनके भीतर उसे लौटाकर दाम ले सकता है।) दस दिनसे अधिक हो जानेपर यह आदान-प्रदान नहीं हो सकता। अनुचित आदान-प्रदान करनेवालेपर राजाको छः सौका दण्ड लगाना चाहिए

English

Even dying he should not take a tax from Brahmins. In whose king's land a Shrotriya suffers from hunger,

अध्याय २२१

श्लोक 31

तस्य सीदति तद्राष्ट्रं व्याधिदुर्भिक्षतस्करैः ।श्रुतं वृत्तन्तु विज्ञाय वृत्तिं तस्य प्रकल्पयेत्

tasya sīdati tadrāṣṭraṃ vyādhidurbhikṣataskaraiḥ / śrutaṃ vṛttantu vijñāya vṛttiṃ tasya prakalpayet

हिन्दी अर्थ

जो वरके दोषोंको न बताकर किसी कन्याका वरण करता है, उसको वचनद्वारा दी हुई कन्या भी नहीं दी हुईके ही समान है। राजाको चाहिए कि उस व्यक्तिपर दो सौका दण्ड लगावे। जो

English

that kingdom suffers from disease, famine and thieves. Having known his learning and conduct, he should arrange his livelihood;

अध्याय २२१

श्लोक 32

रक्षेच्च सर्वतस्त्वेनं पिता पुत्रमिवौरसं ।संरक्ष्यमणो राज्ञा यः कुरुते धर्ममन्वहं

rakṣecca sarvatastvenaṃ pitā putramivaurasaṃ / saṃrakṣyamaṇo rājñā yaḥ kurute dharmamanvahaṃ

हिन्दी अर्थ

एकको कन्या देनेकी बात कहकर फिर दूसरेको दे डालता है, उसपर राजाको उत्तम साहस (एक हजार पण)-का दण्ड लगाना चाहिए। वाणीद्वारा कहकर उसे कार्य-रूपमें सत्य करनेसे निस्संदेह पुण्यकी प्राप्ति होती है। जो किसी वस्तुको एक जगह देनेकी प्रतिज्ञा करके उसे लोभवश दूसरेके

English

he should protect him on all sides like a father an own son. Protected by the king, whoever does dharma daily,

अध्याय २२१

श्लोक 33

तेनायुर्वर्धते राज्ञो द्रविणं राष्ट्रमेव च ।कर्म कुर्युर् नरेन्द्रस्य मासेनैकञ्च(१) शिल्पिनः

tenāyurvardhate rājño draviṇaṃ rāṣṭrameva ca / karma kuryur narendrasya māsenaikañca(1) śilpinaḥ

हिन्दी अर्थ

हाथ बेच देता है, उसपर छः सौका दण्ड लगाना चाहिए। जो ग्वाला मालिकसे भोजन-खर्च और वेतन लेकर भी उसकी गाय उसे नहीं लौटाता, अथवा अच्छी तरह उसका पालन-पोषण नहीं

English

by that the king's life, wealth and kingdom increase. Craftsmen should do one month's work for the king,

अध्याय २२१

श्लोक 34

भुक्तमात्रेण ये चान्ये स्वशरीरोपजीयिनः

bhuktamātreṇa ye cānye svaśarīropajīyinaḥ //

हिन्दी अर्थ

करता, उसपर राजा सौ सुवर्णका दण्ड लगावे। गाँवके चारों ओर सौ धनुषके घेरेमें तथा नगरके चारों ओर दो सौ या तीन सौ धनुषके घेरेमें खेती करनी चाहिए, जिसे खड़ा हुआ ऊँट न देख सके। जो खेत चारों ओरसे घेरा न गया हो, उसको फसलको किसीके द्वारा नुकसान पहुँचनेपर दण्ड नहीं दिया जा सकता। जो भय दिखाकर दूसरोंके घर, पोखरे, बगीचे अथवा खेतको

English

and others who live by their own bodies, with only a meal in return.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 221
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.