Agni Purana· Agni Purāṇa
230
अध्याय 230 / 381

Adhyaya 231

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पूर्ण अध्याय पाठ38 श्लोक

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अध्याय २३०

श्लोक 1

शकुनानि पुष्कर उवाच विशन्ति येन मार्गेण वायसा बहवः पुरं ।तेन मार्गेण रुद्धस्य पुरस्य ग्रहणं भवेत्

śakunāni puṣkara uvāca viśanti yena mārgeṇa vāyasā bahavaḥ puraṃ / tena mārgeṇa ruddhasya purasya grahaṇaṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

कृतज्ञता (उपकारको न भूलना), कुल (कुलीनता), तथा क्लेशसहनको क्षमता)-ये सम्पत्तिके हेतुभूत गुण हैं?

English

The sound 'come on*, (heard ) in front of the person under¬ taking a journey) is commendable, (while) that from behind is not (commendable).

अध्याय २३०

श्लोक 2

सेनायां यदि वासार्थे निविष्टो वायसो रुवन् ।वामो भयातुरस्त्रस्तो भयं वदति दुस्तरं(१)

senāyāṃ yadi vāsārthe niviṣṭo vāyaso ruvan / vāmo bhayāturastrasto bhayaṃ vadati dustaraṃ(1)

हिन्दी अर्थ

विस्तृत विषयरूपी वनमें दौड़ते हुए तथा निरङ्कुश होनेके कारण विप्रमाथी (विनाशकारी) इन्द्रियरूपी हाथीको ज्ञानमय अङ्कुशसे वशमें करे। काम, क्रोध, लोभ, हर्ष, मान और मद--

English

An inauspicious (augury) gets destroyed by the worship and invocation of lord Hari (Viu). If a second inauspicious augury is seen (while setting out) then one should re-enter the house.

अध्याय २३०

श्लोक 3

छायाङ्गवाहनोपानच्छत्रवस्त्रादिकुट्टने ।मृत्युस्तत्पूजने पूजा तदिष्टकरणे शुभं

chāyāṅgavāhanopānacchatravastrādikuṭṭane / mṛtyustatpūjane pūjā tadiṣṭakaraṇe śubhaṃ

हिन्दी अर्थ

ये 'षड्वर्ग' कहे गये हैं। राजा इनका सर्वथा त्याग कर दे। इन सबका त्याग हो जानेपर वह सुखी होता है राजाको चाहिए कि वह विनय-गुणसे सम्पन्न हो आन्वीक्षिकी (आत्मविद्या एवं तर्कविद्या),

English

In beating shadow, limb, vehicle, sandals, umbrella, cloth and the like, death; in worshipping them, honor; in doing what is desired, good.

अध्याय २३०

श्लोक 4

प्रोषितागमकृत्काकः कुर्वन् द्वारि गतागतं ।रक्तं दग्धं गृहे द्रव्यं क्षिपन्वह्निवेदकः

proṣitāgamakṛtkākaḥ kurvan dvāri gatāgataṃ / raktaṃ dagdhaṃ gṛhe dravyaṃ kṣipanvahnivedakaḥ

हिन्दी अर्थ

तथा दण्डनीति --इन चार विद्याओंका उनके विद्वानों तथा उन विद्याओंके अनुसार अनुष्ठान करनेवाले कर्मठ पुरुषोंके साथ बैठकर चिन्तन करे (जिससे लोकमें इनका सम्यक् प्रचार और प्रसार हो)।

English

A crow making the return of an absent one, going and coming at the door; one throwing red burnt substance in the house announces fire;

अध्याय २३०

श्लोक 5

न्यसेद्रक्तं पुरस्ताच्च निवेदयति बन्धनं ।पीतं द्रव्यं तथा रुक्म रूप्यमेव तु भार्गव

nyasedraktaṃ purastācca nivedayati bandhanaṃ / pītaṃ dravyaṃ tathā rukma rūpyameva tu bhārgava

हिन्दी अर्थ

१. बुद्धिके आठ गुण ये हैं --सुननेकी इच्छा, सुनना, ग्रहण करना, धारण करना (याद रखना), अर्थ-विज्ञान (विविध साध्य- साधनोंके स्वरूपका विवेक), ऊह (वितर्क), अपोह (अयुक्त-युक्तिका त्याग) तथा तत्त्वज्ञान (वस्तुके स्वभावका निर्णय) । जैसा कि कौटिल्यने कहा है --

English

one placing red in front announces bondage; yellow substance, gold or silver, Bhargava,

अध्याय २३०

श्लोक 6

यच्चैवोपनयेद् द्रव्यं तस्य लब्धिं विनिर्दिशेत् ।द्रव्यं वापनयेद्यत्तु तस्य हानिं विनिर्दिशेत्

yaccaivopanayed dravyaṃ tasya labdhiṃ vinirdiśet / dravyaṃ vāpanayedyattu tasya hāniṃ vinirdiśet

हिन्दी अर्थ

“शुश्रूषाश्रवणग्रहणधारणविज्ञानोहापोहतत््वाभिनिवेशाः प्रज्ञागुणाः ' (कौटि० अर्थ० ६। १। ९६) २. उत्साहके सूचक चार गुण हैं-दक्षता (आलस्यका अभाव), शीघ्रकारिता, अमर्ष (अपमानको न सह सकना) तथा शौर्य। ३. यहाँ धारणशीलता बुद्धिसे और दक्षता उत्साहसे सम्बन्ध रखनेवाले गुण हैं; अतः इनका वहां अन्तर्भाव हो सकता था; तथापि इनका जो पृथक् उपादान हुआ है, वह इन गुणोंकी प्रधानता सूचित करनेके लिये है।

English

whatever substance it brings, one should declare the gain of that; what substance it carries away, one should declare the loss of that.

अध्याय २३०

श्लोक 7

पुरतो धनलब्धिः स्यादाममांसस्य छर्दने ।भूलब्धिः स्यान् मृदः क्षेपे राज्यं रत्नार्पणे महत्

purato dhanalabdhiḥ syādāmamāṃsasya chardane / bhūlabdhiḥ syān mṛdaḥ kṣepe rājyaṃ ratnārpaṇe mahat

हिन्दी अर्थ

' आन्वीक्षिकी 'से आत्मज्ञान एवं वस्तुके यथार्थ स्वभावका बोध होता है। धर्म और अधर्मका ज्ञान ' वेदत्रयी "पर अवलम्बित है, अर्थ और अनर्थ 'वार्ता'के सम्यक् उपयोगपर निर्भर हैं तथा न्याय और अन्याय “दण्डनीति 'के समुचित प्रयोग और अप्रयोगपर आधारित हैं

English

In front, wealth would be gained when it vomits raw flesh; land gained when it throws clay; great kingdom when it offers jewels.

अध्याय २३०

श्लोक 8

यातुः काको ऽनुकूलस्तु क्षेमः कर्मक्षमो भवेत् ।न त्वर्थसाधको ज्ञेयः प्रतिकूलो भयावहः

yātuḥ kāko 'nukūlastu kṣemaḥ karmakṣamo bhavet / na tvarthasādhako jñeyaḥ pratikūlo bhayāvahaḥ

हिन्दी अर्थ

किसी भी प्राणीको हिंसा न करना-कष्ट न पहुँचाना, मधुर वचन बोलना, सत्यभाषण करना, बाहर और भीतरसे पवित्र रहना एवं शौचाचारका पालन करना, दीनोंके प्रति दयाभाव रखना तथा

English

A crow favorable to one who is going is safe and fit for the work; but the contrary should not be known as accomplishing the purpose, it brings fear.

अध्याय २३०

श्लोक 9

सम्मुखे ऽभ्येति विरुवन् यात्राघातकरो भवेत् ।वामः काकः स्मृतो धन्यो दक्षिणो ऽर्थविनाशकृत्(२)

sammukhe 'bhyeti viruvan yātrāghātakaro bhavet / vāmaḥ kākaḥ smṛto dhanyo dakṣiṇo 'rthavināśakṛt(2)

हिन्दी अर्थ

क्षमा (निन्दा आदिको सह लेना)-ये चारों वर्णो तथा आश्रमोंके सामान्य धर्म कहे गये हैं। राजाको चाहिए कि वह प्रजापर अनुग्रह करे और सदाचारके पालनमें संलग्न रहे। मधुर वाणी, दीनोंपर दया, देश-कालकी अपेक्षासे सत्पात्रको दान, दीनों और शरणागतोंकी रक्षा” तथा सत्पुरुषोंका सङ्ग-ये सत्पुरुषोंके आचार हैं। यह आचार प्रजासंग्रहका उपाय है, जो लोकमें प्रशंसित होनेके

English

One approaching in front crying causes the journey's failure. A crow on the left is remembered as fortunate; on the right, destroying wealth;

अध्याय २३०

श्लोक 10

१ दुष्करमिति ख॥ , छ च २ दक्षिणो ऽन्नविनाशकृदिति ग॥ , घ॥ , ञ॥ च :प् ३३९ वामो ऽनुलोमगः श्रेष्ठो मध्यमो दक्षिणः स्मृतः ।प्रतिलोमगतिर्वामो गमनप्रतिषेधकृत्

1 duṣkaramiti kha.. , cha ca 2 dakṣiṇo 'nnavināśakṛditi ga.. , gha.. , ña.. ca :p 339 vāmo 'nulomagaḥ śreṣṭho madhyamo dakṣiṇaḥ smṛtaḥ / pratilomagatirvāmo gamanapratiṣedhakṛt

हिन्दी अर्थ

कारण श्रेष्ठ है तथा भविष्यमें भी अभ्युदयरूप फल देनेवाला होनेके कारण हितकारक है। यह शरीर मानसिक चिन्ताओं तथा रोगोंसे घिरा हुआ है। आज या कल इसका विनाश निश्चित है।

English

on the left going with the grain is best; the right is remembered as middling; moving against the grain on the left prohibits going.

अध्याय २३०

श्लोक 11

निवेदयति यात्रार्थमभिप्रेतं गृहे गतः(१) ।एकाक्षरचरणस्त्वर्कं वीक्षमाणो भयावहः

nivedayati yātrārthamabhipretaṃ gṛhe gataḥ(1) / ekākṣaracaraṇastvarkaṃ vīkṣamāṇo bhayāvahaḥ

हिन्दी अर्थ

ऐसी दशामें इसके लिये कौन राजा धर्मके विपरीत आचरण करेगा ? राजाको चाहिए कि वह अपने लिये सुखको इच्छा रखकर दीन-दुखी लोगोंको पीड़ा न दे; क्योंकि सताया जानेवाला दीन-दुखी मनुष्य दुःखजनित क्रोधके द्वारा अत्याचारी राजाका विनाश

English

Having gone into the house, it announces the intended purpose of the journey. One standing on one foot looking at the sun brings fear;

अध्याय २३०

श्लोक 12

कोटरे वासमानश् च महानर्थकरो भवेत् ।न शुभस्तूषरे काकः पङ्काङ्कः स तु शस्यते

koṭare vāsamānaś ca mahānarthakaro bhavet / na śubhastūṣare kākaḥ paṅkāṅkaḥ sa tu śasyate

हिन्दी अर्थ

कर डालता है। अपने पूजनीय पुरुषको जिस तरह सादर हाथ जोड़ा जाता है, कल्याणकामी राजा दुष्टजनको उससे भी अधिक आदर देते हुए हाथ जोड़े। (तात्पर्य यह है कि दुष्टको सामनीतिसे

English

dwelling in a hollow it makes great ill. A crow on barren ground is not good; but one with mud-marks is praised;

अध्याय २३०

श्लोक 13

अमेध्यपूर्णवदनः काकः सर्वार्थसाधकः(२) ।ज्ञेयाः पतत्रिणो ऽन्ये ऽपि काकवद् भृगुनन्दन

amedhyapūrṇavadanaḥ kākaḥ sarvārthasādhakaḥ(2) / jñeyāḥ patatriṇo 'nye 'pi kākavad bhṛgunandana

हिन्दी अर्थ

ही वशमें किया जा सकता है।) साधु सुहदों तथा दुष्ट शत्रुओंके प्रति भी सदा प्रिय वचन ही बोलना चाहिए। प्रियवादी 'देवता' कहे गये हैं और कटुवादी 'पशु' बाहर और भीतरसे शुद्ध रहकर राजा आस्तिकता (ईश्वर तथा परलोकपर विश्वास)-द्वारा अन्त:करणको पवित्र बनाये और सदा देवताओंका पूजन करे। गुरुजनोंका देवताओंके समान ही

English

a crow with a mouth full of impure things accomplishes all aims. Other birds too are to be known like the crow, son of Bhrigu.

अध्याय २३०

श्लोक 14

स्कन्धावारापसव्यस्थाः श्वानो विप्रविनाशकाः ।इन्द्रस्थाने नरेन्द्रस्य पुरेशस्य तु गोपुरे

skandhāvārāpasavyasthāḥ śvāno vipravināśakāḥ / indrasthāne narendrasya pureśasya tu gopure

हिन्दी अर्थ

सम्मान करे तथा सुहृदोंको अपने तुल्य मानकर उनका भलीभाँति सत्कार करे। वह अपने ऐश्वर्यकी रक्षा एवं वृद्धिके लिये गुरुजनोंको प्रतिदिन प्रणामद्वारा अनुकूल बनाये। अनूचान (साङ्गवेदके

English

Dogs on the left in the camp destroy Brahmins. In Indra's place of a king, in the city-gate of the town-lord,

अध्याय २३०

श्लोक 15

अन्तर्गृहे गृहेशस्य मरणाय भवेद्भषन् ।यस्य जिघ्रति वामाङ्गं तस्य स्यादर्थसिद्धये

antargṛhe gṛheśasya maraṇāya bhavedbhaṣan / yasya jighrati vāmāṅgaṃ tasya syādarthasiddhaye

हिन्दी अर्थ

अध्येता) की-सी चेष्टाओंद्वारा विद्यावृद्ध सत्पुरुषोंका साम्मुख्य प्राप्त करे। सुकृतकर्म (यज्ञादि पुण्यकर्म तथा गन्ध-पुष्पादि-समर्पण) -द्वारा देवताओंको अपने अनुकूल करे। सद्भाव (विश्वास)-द्ठारा मित्रका हृदय जीते, सम्भ्रम (विशेष आदर)-से बान्धवों (पिता और माताके कुलोंके बड़े-बूढ़ों)-को अनुकूल बनाये। स्त्रीको प्रेमसे तथा भृत्यवर्गको दानसे वशमें करे। इनके अतिरिक्त जो बाहरी

English

barking inside the house of the house-lord it would mean death. Whose left side it smells, that brings success of purpose;

अध्याय २३०

श्लोक 16

भयाय दक्षिणं चाङ्गं तथा भुजमदक्षिणं ।यात्राघातकरो यातुर्भवेत् प्रतिमुखागतः

bhayāya dakṣiṇaṃ cāṅgaṃ tathā bhujamadakṣiṇaṃ / yātrāghātakaro yāturbhavet pratimukhāgataḥ

हिन्दी अर्थ

लोग हैं, उनके प्रति अनुकूलता दिखाकर उनका

English

the right side and the left arm bring fear; coming facing the traveler it causes the journey's failure;

अध्याय २३०

श्लोक 17

मार्गावरोधको मार्गे चौरान् वदति भार्गव ।अलाभो ऽस्थिमुखः पापो रज्जुचीरमुखस् तथा

mārgāvarodhako mārge caurān vadati bhārgava / alābho 'sthimukhaḥ pāpo rajjucīramukhas tathā

हिन्दी अर्थ

दूसरे लोगोंके कृत्योंकी निन्दा या आलोचना न करना, अपने वर्ण तथा आश्रमके अनुरूप धर्मका निरन्तर पालन, दीनोंके प्रति दया, सभी लोक-व्यवहारोंमें सबके प्रति मीठे वचन बोलना, अपने अनन्य मित्रका प्राण देकर भी उपकार करनेके लिये उद्यत रहना, घरपर आये हुए मित्र या अन्य सज्जनोंको भी हदयसे लगाना-उनके प्रति अत्यन्त स्नेह एवं आदर प्रकट करना,

English

obstructing the way, it says of thieves on the road, Bhargava. Bone in mouth: no gain and sin; likewise a rope or rag in mouth;

अध्याय २३०

श्लोक 18

सोपानत्कमुखो धन्यो मांसपूर्णमुखो ऽपि च ।अमङ्गल्यमुखद्रव्यं केशञ्चैवाशुभं तथा

sopānatkamukho dhanyo māṃsapūrṇamukho 'pi ca / amaṅgalyamukhadravyaṃ keśañcaivāśubhaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

आवश्यकता हो तो उनके लिये यथाशक्ति धन देना, लोगोंके कटु व्यवहार एवं कठोर वचनको

English

with sandals in mouth it is fortunate, also with mouth full of meat. An inauspicious thing in the mouth and hair are inauspicious likewise;

अध्याय २३०

श्लोक 19

अवमूत्र्याग्रतो याति यस्य तस्य भयं भवेत् ।यस्यावमूत्र्य व्रजति शुभं देशन्तथा द्रुमं

avamūtryāgrato yāti yasya tasya bhayaṃ bhavet / yasyāvamūtrya vrajati śubhaṃ deśantathā drumaṃ

हिन्दी अर्थ

यहाँ यह प्रश्न होता है कि 'शरणागतोंकी रक्षा तो दयाका ही कार्य है, अतः दयासे ही वह सिद्ध है, फिर उसका अलग कथन क्यों किया गया?! इसके उत्तरमें निवेदन है कि दयाके दो भेद हैं-उत्कृष्टा' और ' अनुत्कृष्टा।' इनमें जो उत्कृष्टा दया है, उसके द्वारा दीनोंका उद्धार होता है और अनुत्कृष्टा दयासे उपगत या शरणागतकी रक्षा की जाती है-यही सूचित करनेके लिये उसका अलग प्रतिपादन किया गया है।

English

one who urinates and goes in front of someone — fear for him; one who urinates and goes for someone, a good place or tree,

अध्याय २३०

श्लोक 20

१ नन्वर्थसाधक इत्य् आदिः, गृहे गत इत्य् अन्तःः पाठः ट॥ पुस्तके नास्ति २ कोटरे इत्य् आदिः सर्वार्थसाधक इत्य् अन्तः पाठः ट॥पुस्तके नास्ति :प् ३४० मङ्गलञ्च तथा द्रव्यं तस्य स्यादर्थसिद्धये ।श्ववच्च राम विज्ञेयास् तथा वै जम्बुकादयः

1 nanvarthasādhaka ity ādiḥ, gṛhe gata ity antaḥḥ pāṭhaḥ ṭa.. pustake nāsti 2 koṭare ity ādiḥ sarvārthasādhaka ity antaḥ pāṭhaḥ ṭa..pustake nāsti :p 340 maṅgalañca tathā dravyaṃ tasya syādarthasiddhaye / śvavacca rāma vijñeyās tathā vai jambukādayaḥ

हिन्दी अर्थ

भी सहन करना, अपनी समृद्धिके अवसरोंपर होना), बन्धुजनोंके साथ अटूट सम्बन्ध बनाये निर्विकार रहना (हर्ष या दर्पके वशीभूत न रखना, सज्जनोंके प्रति चतुरश्रता (अवक्र-- होना), दूसरोंके अभ्युदयपर मनमें ईर्ष्या या सरलभावसे उनका समाराधन), उनकी हार्दिक जलन न होना, दूसरोंको ताप देनेवाली बात न सम्मतिके अनुसार कार्य करना --ये महात्माओंके

English

and an auspicious object, is for his success. Jackals and the like, Rama, are to be known like the dog.

अध्याय २३०

श्लोक 21

भयाय स्वामिनि ज्ञेयमनिमित्तं रुतङ्गवां ।निशि चौरभयाय स्याद्विकृतं मृत्यवे तथा

bhayāya svāmini jñeyamanimittaṃ rutaṅgavāṃ / niśi caurabhayāya syādvikṛtaṃ mṛtyave tathā

हिन्दी अर्थ

बोलना, मौनव्रतका आचरण (अधिक वाचाल न आचार हैं॥ १९--२२॥ इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें “रामोक्तनीतिका वर्णन” नामक दो सौ अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ श्रीरामकी राजनीति

English

A cry of cows without cause is to be known as fear for the master; at night it is for fear of thieves; distorted, for death;

अध्याय २३०

श्लोक 22

शिवाय स्वामिनो रात्रौ बलीवर्दो नदन् भवेत् ।उत्सृष्टवृषभो राज्ञो विजयं सम्प्रयच्छति

śivāya svāmino rātrau balīvardo nadan bhavet / utsṛṣṭavṛṣabho rājño vijayaṃ samprayacchati

हिन्दी अर्थ

श्रीराम कहते हैं-- लक्ष्मण! स्वामी (राजा), माण्डलिक राजाओंको वशमें किये रहना), दृढ़भक्तिता अमात्य (मन्त्री), राष्ट्र (जनपद), दुर्ग (किला), (सुदृढ़ अनुराग), दीर्घदर्शिता (दीर्घकालमें घटित कोष (खजाना), बल (सेना) और सुहत् (मित्रादि)-- होनेवाली बातोंका अनुमान कर लेना), उत्साह, ये राज्यके परस्पर उपकार करनेवाले सात अङ्ग शुद्धचित्तता, स्थूललक्षता (अत्यन्त मनस्वी होना),

English

a bellowing bull at night for the master's welfare; a bull set free gives the king victory.

अध्याय २३०

श्लोक 23

अभयं भक्षयन्त्यश् च गावो दत्तास् तथा स्वकाः ।त्यक्तस्नेहाः स्ववत्सेषु गर्भक्षयकरा मताः

abhayaṃ bhakṣayantyaś ca gāvo dattās tathā svakāḥ / tyaktasnehāḥ svavatseṣu garbhakṣayakarā matāḥ

हिन्दी अर्थ

कहे गये हैं। राज्यके अङ्गोंमें राजा और मन्त्रीके विनीतता (जितेन्द्रियता) और धार्मिकता-ये बाद राष्ट्र प्रधान एवं अर्थका साधन है, अतः अच्छे आभिगामिक' गुण हैं ॥ २--४ 5 ॥ उसका सदा पालन करना चाहिए। (इन आङ्गोंमें जो सुप्रसिद्ध कुलमें उत्पन्न, क्रूरतारहित, गुणवान् पूर्व-पूर्व अङ्ग परको अपेक्षा श्रेष्ठ हैं।) ॥ १६ ॥ पुरुषोंका संग्रह करनेवाले तथा पवित्र (शुद्ध) हों, कुलीनता, सत्त्व (व्यसन और अभ्युदयमें भी ऐसे लोगोंको आत्मकल्याणकी इच्छा रखनेवाला निर्विकार रहना), युवावस्था, शील (अच्छा राजा अपना परिवार बनाये

English

Cows eating fearlessly, and given or one's own, who have lost affection for their calves, are considered abortive;

अध्याय २३०

श्लोक 24

भूमिं पादैर् विनिघ्नन्त्यो दीना भीता भयावहाः ।आर्द्राङ्ग्यो हृष्टरोमाश् च शृगलग्नमृदः शुभाः

bhūmiṃ pādair vinighnantyo dīnā bhītā bhayāvahāḥ / ārdrāṅgyo hṛṣṭaromāś ca śṛgalagnamṛdaḥ śubhāḥ

हिन्दी अर्थ

स्वभाव), दाक्षिण्य (सबके अनुकूल रहना या वाग्मी (उत्तम वक्ता-ललित, मधुर एवं उदारता), शीघ्रकारिता (दीर्घसूत्रताका अभाव), अल्पाक्षरोंद्वारा ही बहुत-से अर्थोका प्रतिपादन अविसंवादिता (वाकूछलका आश्रय लेकर परस्पर करनेवाला), प्रगल्भ (सभामें सबको निगृहीत विरोधी बातें न करना), सत्य (मिथ्याभाषण न करके निर्भय बोलनेवाला), स्मृतिमान्! (स्वभावतः

English

beating the ground with feet, wretched, frightened, they bring fear; wet-bodied, bristling, with clay on the horns, auspicious.

अध्याय २३०

श्लोक 25

महिष्यादिषु चाप्येतत् सर्वं वाच्यं विजानता ।आरोहणं तथान्येन सपर्याणस्य(१) वाजिनः

mahiṣyādiṣu cāpyetat sarvaṃ vācyaṃ vijānatā / ārohaṇaṃ tathānyena saparyāṇasya(1) vājinaḥ

हिन्दी अर्थ

करना), वृद्धसेवा (विद्यावृद्धोंको सेवामें रहना किसी बातको न भूलनेवाला), उदग्र (ऊँचे और उनकी बातोंको मानना), कृतज्ञता (किसीके कदवाला), बलवान् (शारीरिक बलसे सम्पन्न उपकारको न भुलाकर प्रत्युपकारके लिये उद्यत एवं युद्ध आदिमें समर्थ), वशी (जितेन्द्रिय), रहना), हैवसम्पन्नता (प्रबल पुरुषार्थसे हैवको दण्डनेता (चतुरङ्गिणी सेनाका समुचित रीतिसे भी अनुकूल बना लेना), बुद्धि (शुश्रूषा आदि आठ संचालन करनेमें समर्थ), निपुण (व्यबहारकुशल), गुणोंसे युक्त प्रज्ञा), अक्षुद्रपरिवारता (दुष्ट परिजनोंसे कृतविद्य (शास्त्रीयविद्यासे सम्पन्न), स्ववग्रह युक्त न होना), शक्यसामन्तता (आसपासके (प्रमादसे अनुचित कर्ममें प्रवृत्त होनेपर वहाँसे

English

All this the knowing one should declare for buffaloes and the like. Mounting by another of a saddled horse,

अध्याय २३०

श्लोक 26

जलोपवेशनं नेष्टं भूमौ च परिवर्तनं ।विपत्करन्तुरङ्गस्य सुप्तं वाप्यनिमित्ततः

jalopaveśanaṃ neṣṭaṃ bhūmau ca parivartanaṃ / vipatkaranturaṅgasya suptaṃ vāpyanimittataḥ

हिन्दी अर्थ

१. इन गुणोंसे युक्त राजा सबके लिये अभिगम्य -मिलने योग्य होता है। २. स्मृति बुद्धिका गुण है, जिसकी गणना आभिगामिक गुणोंमें हो चुकी है। उसका पुनः यहाँ ग्रहण उसकी श्रेष्ठता और अनिवार्यता सूचित करनेके लिये है।

English

sitting in water and rolling on the ground are not wanted; sleeping without cause brings calamity to the horse;

अध्याय २३०

श्लोक 27

यवमोदकयोर्द्वेषस्त्वकस्माच्च न शस्यते ।वदनाद्रुधिरोत्पत्तिर्वेपनं न च शस्यते

yavamodakayordveṣastvakasmācca na śasyate / vadanādrudhirotpattirvepanaṃ na ca śasyate

हिन्दी अर्थ

(शत्रुआंद्वारा छेड़े गये युद्धादिके कष्टको दूढ़तापूर्वक सहन करनेमें समर्थ-सहसा आत्मसमर्पण न करनेवाला), सर्वदृष्टप्रतिक्रिय (सब प्रकारके संकटोंके निवारणके अमोघ उपायको तत्काल जान लेनेवाला), परच्छिद्रान्ववेक्षी (गुप्तचर आदिके द्वारा शत्रुओंके छिद्रोंके अन्वेषणमें प्रयत्नशील), संधिविग्रहतत्त्ववित् (अपनी तथा शत्रुको अवस्थाके बलाबल-भेदको जानकर संधि-विग्रह आदि छहों

English

sudden dislike of barley and modaka is not praised; blood from the mouth and trembling are not praised.

अध्याय २३०

श्लोक 28

क्रीडन् वैकः कपोतैश् च सारिकाभिर्मृतिं वदेत् ।साश्रुनेत्रो जिह्वया च पादलेही विनष्टये(२)

krīḍan vaikaḥ kapotaiś ca sārikābhirmṛtiṃ vadet / sāśrunetro jihvayā ca pādalehī vinaṣṭaye(2)

हिन्दी अर्थ

गुणोंके प्रयोगके ढंग और अवसरको ठीक-

English

Playing with pigeons or mynas, it would foretell death. With tears in the eyes and licking the feet with the tongue, for destruction;

अध्याय २३०

श्लोक 29

वामपादेन च तथा विलिखंश् च वसुन्धरां ।स्वपेद्वा वामपार्श्वेन दिवा वा न शुभप्रदः

vāmapādena ca tathā vilikhaṃś ca vasundharāṃ / svapedvā vāmapārśvena divā vā na śubhapradaḥ

हिन्दी अर्थ

उसके प्रयोगको सर्वथा गुप्त रखनेवाला), देशकालविभागवित् (किस प्रकारको सेना किस देश और किस कालमें विजयिनी होगी-इत्यादि बातोंको विभागपूर्वक जाननेवाला), आदाता सम्यगर्थानाम् (प्रजा आदिसे न्यायपूर्वक धन लेनेवाला), विनियोक्ता (धनको उचित एवं उत्तम कार्यमें लगानेवाला), पात्रवित् (सत्पात्रका ज्ञान

English

likewise scratching the earth with the left foot, or sleeping on the left side by day, is not auspicious;

अध्याय २३०

श्लोक 30

भयाय स्यात् सकृन्मूत्री तथा निद्राविलाननः ।१ सपर्यार्हस्येति साधुः २ विनाशकृदिति ज॥ , ट॥ च :प् ३४१ आरोहणं न चेद्दद्यात् प्रतीपं वा गृहं व्रजेत्

bhayāya syāt sakṛnmūtrī tathā nidrāvilānanaḥ / 1 saparyārhasyeti sādhuḥ 2 vināśakṛditi ja.. , ṭa.. ca :p 341 ārohaṇaṃ na ceddadyāt pratīpaṃ vā gṛhaṃ vrajet

हिन्दी अर्थ

(मान) और चपलता (बिना विचारे कार्य कर बैठना) -इन दोषोंसे दूर रहनेवाला, परोपताप (दूसरोंको पीड़ा देना), पैशुन्य (चुगली करके मित्रोंमें परस्पर फूट डालना), मात्सर्य (डाह),

English

a once-urinating and sleepy-faced one means fear; if it does not allow mounting or goes home backward,

अध्याय २३०

श्लोक 31

यात्राविघातमाचष्टे वामपार्श्वं तथा स्पृशन् ।हेषमाणः शत्रुयोधं पादस्पर्शी जयावहः

yātrāvighātamācaṣṭe vāmapārśvaṃ tathā spṛśan / heṣamāṇaḥ śatruyodhaṃ pādasparśī jayāvahaḥ

हिन्दी अर्थ

ईर्ष्या (दूसरोंके उत्कर्षको न सह सकना) और अनृतः (असत्यभाषण)-इन दुर्गुणोंको लाँघ जानेवाला, वृद्धजनोंके उपदेशको मानकर चलनेवाला, श्लक्ष्ण (मधुरभाषी), मधुरदर्शन (आकृतिसे सुन्दर एवं सौम्य दिखायी देनेवाला), गुणानुरागी (गुणवानोंके

English

it announces obstruction of the journey, touching its left side; neighing at enemy warriors, touching the foot, brings victory.

अध्याय २३०

श्लोक 32

ग्रामे व्रजति नागश्चेन् मैथुनं देशहा भवेत् ।प्रसूता नागवनिता मत्ता चान्ताय भूपतेः

grāme vrajati nāgaścen maithunaṃ deśahā bhavet / prasūtā nāgavanitā mattā cāntāya bhūpateḥ

हिन्दी अर्थ

बात कहनेवाला) राजा श्रेष्ठ है। इस प्रकार यहाँ राजाके आत्मसम्पत्ति-सम्बन्धी गुण (उसके स्वरूपके

English

If an elephant goes mating in a village it would destroy the country; a female elephant that has given birth and is in rut, for the king's end;

अध्याय २३०

श्लोक 33

आरोहणं न चेद्दद्यात् प्रतीपं वा गृहं व्रजेत् ।मदं वा वारणो जह्याद्राजघातकरो भवेत्

ārohaṇaṃ na ceddadyāt pratīpaṃ vā gṛhaṃ vrajet / madaṃ vā vāraṇo jahyādrājaghātakaro bhavet

हिन्दी अर्थ

उपपादक गुण) बताये गये हैं उत्तम कुलमें उत्पन्न, बाहर-भीतरसे शुद्ध, शौर्य-सम्पन्न, आन्वीक्षिकी आदि विद्याओंको जाननेवाले, स्वामिभक्त तथा दण्डनीतिका समुचित प्रयोग जाननेवाले लोग राजाके सचिव (अमात्यः)

English

if it does not allow mounting or goes home backward, or the elephant lets out rut, it becomes a king-killer.

अध्याय २३०

श्लोक 34

वामं दक्षिणपादेन पादमाक्रमते शुभः ।दक्षिणञ्च तथा दन्तं परिमार्ष्टि करेण च

vāmaṃ dakṣiṇapādena pādamākramate śubhaḥ / dakṣiṇañca tathā dantaṃ parimārṣṭi kareṇa ca

हिन्दी अर्थ

होने चाहिए॥ ११ ३ ॥

English

One that treads the left foot with the right is auspicious; and wipes the right tusk with the trunk.

अध्याय २३०

श्लोक 35

वृषो ऽश्वः कुञ्जरो वापि रिपुसैन्यगतो ऽशुभः ।खण्डमेघातिवृष्ट्या तु सेना नाशमवाप्नुयात्

vṛṣo 'śvaḥ kuñjaro vāpi ripusainyagato 'śubhaḥ / khaṇḍameghātivṛṣṭyā tu senā nāśamavāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

जिसे अन्यायसे हटाना कठिन न हो, जिसका जन्म उसी जनपदमें हुआ हो, जो कुलीन (ब्राह्मण आदि), सुशील, शारीरिक बलसे सम्पन्न, उत्तम वक्ता, सभामें निर्भीक होकर बोलनेवाला, शास्त्ररूपी नेत्रसे युक्त, उत्साहवान् (उत्साहसम्बन्धी त्रिविधः गुण-शौर्य, अमर्ष एवं दक्षतासे सम्पन्न), प्रतिपत्तिमान् (प्रतिभाशाली, भय आदिके अवसरोंपर उनका तत्काल प्रतिकार करनेवाला), स्तब्धता

English

A bull, horse or elephant gone to the enemy's army is inauspicious. By excessive rain in broken clouds the army would meet destruction;

अध्याय २३०

श्लोक 36

प्रतिकूलग्रहर्क्षात्तु तथा सम्मुखमारुतात्(१) ।यात्राकाले रणे वापि छत्रादिपतनं भयं

pratikūlagraharkṣāttu tathā sammukhamārutāt(1) / yātrākāle raṇe vāpi chatrādipatanaṃ bhayaṃ

हिन्दी अर्थ

(मान) और चपलतासे रहित, मैत्र (मित्रोंके अर्जन एवं संग्रहमें कुशल), शीत-उष्ण आदि क्लेशोंको सहन करनेमें समर्थ, शुचि (उपधाद्वारा परीक्षासे प्रमाणित हुई शुद्धिसे सम्पन्न), सत्य

English

by adverse planets and stars and by wind from the front, at the time of a journey or in war, the fall of umbrella and the like is fear;

अध्याय २३०

श्लोक 37

हृष्टा नराश्चानुलोमा ग्रहा वै जयलक्षणं ।काकैर् योधाभिभवनं क्रव्याद्भिर्मण्डलक्षयः

hṛṣṭā narāścānulomā grahā vai jayalakṣaṇaṃ / kākair yodhābhibhavanaṃ kravyādbhirmaṇḍalakṣayaḥ

हिन्दी अर्थ

(झूठ न बोलना), सत्त्व (व्यसन और अभ्युदयमें भी निर्विकार रहना), धैर्य, स्थिरता, प्रभाव तथा आरोग्य आदि गुणोंसे सम्पन्न, कृतशिल्प (सम्पूर्ण कलाओंके अभ्याससे सम्पन्न), दक्ष (शीघ्रतापूर्वक कार्यसम्पादनमें कुशल), प्रज्ञावान् (बुद्धिमान्),

English

men glad and planets in the favorable direction are the sign of victory; by crows the warriors' defeat, by flesh-eaters the destruction of the circle.

अध्याय २३०

श्लोक 38

प्राचीपश्चिमकैशानी शौम्या प्रेष्ठा शुभा च दिक्

prācīpaścimakaiśānī śaumyā preṣṭhā śubhā ca dik

हिन्दी अर्थ

(स्वामीके प्रति अविचल अनुराग रखनेवाला) तथा किसीसे वैर न रखनेवाला और दूसरोंद्वारा किये गये विरोधको शान्त कर देनेवाला पुरुष राजाका बुद्धिसचिव एवं कर्मसचिव होना

English

East, west, northeast, north and the beloved direction are auspicious.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 230
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.