Agni Purana· Agni Purāṇa
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अध्याय 232 / 381

Adhyaya 233

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अध्याय २३२

श्लोक 1

षाड्गुण्यं पुष्कर उवाच सामभेदौ मया प्रोक्तौ दानदण्डौ तथैव च ।दण्डः स्वदेशे कथितः परदेशे व्रवीमि ते

ṣāḍguṇyaṃ puṣkara uvāca sāmabhedau mayā proktau dānadaṇḍau tathaiva ca / daṇḍaḥ svadeśe kathitaḥ paradeśe vravīmi te

हिन्दी अर्थ

हो, जो राजाके अपने ही जनपदमें जन्मे हों, युद्धकुशल हों और कुशल सैनिकोंके साथ रहते हों, नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंसे सम्पन्न हों, जिन्हें नाना प्रकारके युद्धोंमें विशेष कुशलता प्राप्त हो तथा जिनके दलमें बहुत-से योद्धा भरे हों, जिन सैनिकोंद्वारा अपनी सेनाके घोड़े और हाथियोंकी आरती उतारी जाती हो, जो परदेश- निवास, युद्धसम्बन्थी आयास तथा नाना प्रकारके

English

An army would take possession of a city that is under siege by that way through which many crows enter that city.

अध्याय २३२

श्लोक 2

१ शत्रुं जिहीर्षुरुच्छिन्द्यादिति घ॥ , ञ॥ च :प् ३४५ प्रकाशश्चाप्रकाशश् च द्विविधो दण्ड उच्यते ।लुण्ठनं ग्रामघातश् च शस्यघातो ऽग्निदीपनं

1 śatruṃ jihīrṣurucchindyāditi gha.. , ña.. ca :p 345 prakāśaścāprakāśaś ca dvividho daṇḍa ucyate / luṇṭhanaṃ grāmaghātaś ca śasyaghāto 'gnidīpanaṃ

हिन्दी अर्थ

क्लेश सहन करनेके अभ्यासी हों तथा जिन्होंने युद्धमें बहुत श्रम किया हो, जिनके मनमें दुविधा न हो तथा जिनमें अधिकांश क्षत्रिय जातिके लोग हों, ऐसी सेना या सैनिक दण्डनीतिवेत्ताओंके

English

It indicates unfordable fear if a crow taking its abode in the place of the army goes about cawing with agitation and fear.

अध्याय २३२

श्लोक 3

प्रकाशो ऽथ विषं वह्निर्विविधैः पुरुषैर् बधः ।दूषणञ्चैव साधूनामुदकानाञ्च दूषणं

prakāśo 'tha viṣaṃ vahnirvividhaiḥ puruṣair badhaḥ / dūṣaṇañcaiva sādhūnāmudakānāñca dūṣaṇaṃ

हिन्दी अर्थ

मतमें श्रेष्ठ है ॥ ३१--३३॥ जो त्याग (अलोभ एवं दूसराँके लिये सब कुछ उत्सर्ग करनेका स्वभाव), विज्ञान (सम्पूर्ण शास्त्रोंमें प्रवीणता) तथा सत्त्व (विकारशून्यता )-- इन गुणोंसे सम्पन्न, महापक्ष (महान् आश्रय एवं

English

If (the crow) pecks at the shadow, body, vehicle, shoes, umbrella and clothes and other things (of a person, it indicates) death (for that person). If it honours (the person, he) will be honoured. If it gives something that it is fond of, (it augurs) good.

अध्याय २३२

श्लोक 4

दण्डप्रणयणं प्रोक्तमुपेक्षां शृणु भार्गव ।यदा मन्यते नृपती रणे न मम विग्रहः

daṇḍapraṇayaṇaṃ proktamupekṣāṃ śṛṇu bhārgava / yadā manyate nṛpatī raṇe na mama vigrahaḥ

हिन्दी अर्थ

बहुसंख्यक बन्धु आदिके वर्गसे सम्पन्न), प्रियंवद (मधुर एवं हितकर वचन बोलनेवाला), आयतिक्षम (सुस्थिर स्वभाव होनेके कारण भविष्यकालमें भी साथ देनेवाला), अद्वैध (दुविधामें न रहनेवाला)

English

(If a crow) vomits raw flesh in front (of a house) there would be gain of wealth. (There would be) gain of land if (a piece of) earth is thrown. (There would be gain of kingdom if a great gem is cast.

अध्याय २३२

श्लोक 5

अनर्थायानुबन्धः स्यात् सन्धिना च तथा भवेत् ।सामलब्धास्पदञ्चात्र दानञ्चार्थक्षयङ्करं

anarthāyānubandhaḥ syāt sandhinā ca tathā bhavet / sāmalabdhāspadañcātra dānañcārthakṣayaṅkaraṃ

हिन्दी अर्थ

तथा उत्तम कुलमें उत्पन्न हो-ऐसे पुरुषको अपना मित्र बनाये। मित्रके आनेपर दूरसे ही अगवानीमें जाना, स्पष्ट एवं प्रिय वचन बोलना तथा सत्कारपूर्वक मनोवाञ्छित वस्तु देना--ये मित्रसंग्रहके तीन प्रकार हैं। धर्म, काम और अर्थको प्राप्ति-ये मित्रसे मिलनेवाले तीन प्रकारके फल हैं। चार प्रकारके मित्र जानने चाहिए-औरस (माता-पिताके सम्बन्धसे

English

If the crow (flies) favourably to the person who under¬ takes a journey it bids welfare and he would be able to accomp¬ lish his task. But if (it flies) against him it should be known that the task would not be accomplished and would cause fear.

अध्याय २३२

श्लोक 6

भेददण्डानुबन्धः स्यात्तदोपेक्षां समाश्रयेत् ।न चायं मम शक्नोति किञ्चित् कर्तुमुपद्रवं

bhedadaṇḍānubandhaḥ syāttadopekṣāṃ samāśrayet / na cāyaṃ mama śaknoti kiñcit kartumupadravaṃ

हिन्दी अर्थ

युक्त), मित्रताके सम्बन्धसे बँधा हुआ, कुलक्रमागत तथा संकटसे बचाया हुआ। सत्यता (झूठ न बोलना), अनुराग और दुःख-सुखमें समानरूपसे भाग लेना-ये मित्रके गुण हैं॥ ३४--३७॥

English

If the crow comes cawing loudly against (the person) it would be an impediment to the journey. A crow on the left IS considered to be benefleial and causing destruction of the task if on the right.

अध्याय २३२

श्लोक 7

न चाहमस्य शक्नोमि तत्रोपेक्षां समाश्रयेत् ।अवज्ञोपहतस्तत्र राज्ञा कार्यो रिपुर्भवेत्

na cāhamasya śaknomi tatropekṣāṃ samāśrayet / avajñopahatastatra rājñā kāryo ripurbhavet

हिन्दी अर्थ

अब मैं अनुजीवी (राजसेवक) जनोंके बर्तावका वर्णन करूँगा। सेवकोचित गुणोंसे सम्पन्न पुरुष राजाका सेवन करे। दक्षता (कौशल तथा शीघ्रकारिता), भद्रता (भलमनसाहत या लोकप्रियता), दृढ़ता (सुस्थिर स्नेह एवं कर्मोमें हृढ़तापूर्वक लगे रहना), क्षमा (निन्दा आदिको सहन करना), क्लेशसहिष्णुता (भूख-प्यास आदिके क्लेशको सहन करनेकी क्षमता), संतोष, शील और

English

(If the crow flies) on the left in the direction (of the person undertaking a journey), it is excellent and medium if ■ on the right. (If it flies) against the direction of the traveller on the left, it would cause impediment to the movement.

अध्याय २३२

श्लोक 8

मायोपायं प्रवक्ष्यामि उत्पातैर् अनृतैश् चरत् ।शत्रोरुद्वेजनं शत्रोः शिविरस्थस्य पक्षिणः

māyopāyaṃ pravakṣyāmi utpātair anṛtaiś carat / śatrorudvejanaṃ śatroḥ śivirasthasya pakṣiṇaḥ

हिन्दी अर्थ

उत्साह --ये गुण अनुजीवीको अलंकृत करते

English

If the crow comes to the house when the traveller is beginning to move it should be known that he can set out. (If a crow) stands on one leg and looks at the sun with a single eye it causes fear.

अध्याय २३२

श्लोक 9

स्थूलस्य तस्य पुच्छस्थां कृत्वोल्कां विपुलां द्विज ।विसृजेच्च ततश् चैवमुल्कापातं प्रदर्शयेत्

sthūlasya tasya pucchasthāṃ kṛtvolkāṃ vipulāṃ dvija / visṛjecca tataś caivamulkāpātaṃ pradarśayet

हिन्दी अर्थ

सेवक यथासमय न्यायपूर्वक राजाकी सेवा करे; दूसरेके स्थानपर जाना, क्रूरता, उद्दण्डता या असभ्यता और ईर्ष्या--इन दोषोंको वह त्याग दे। जो पद या अधिकारमें अपनेसे बड़ा हो, उसका विरोध करके या उसकी बात काटकर राजसभामें न बोले। राजाके गुप्त कर्मों तथा

English

(If a crow) makes its habitat in a hollow of a tree there would be great misfortune. A crow (seen) in the saline soil is not for good. But (the same seen) as having its wings with mud is commendable.

अध्याय २३२

श्लोक 10

एवमन्ये दर्शनीया उत्पाता बहवो ऽपि च ।उद्वेजनं तथा कुर्यात् कुहकैर् विविधैर् द्विषां

evamanye darśanīyā utpātā bahavo 'pi ca / udvejanaṃ tathā kuryāt kuhakair vividhair dviṣāṃ

हिन्दी अर्थ

कि वह अपने प्रति स्नेह रखनेवाले स्वामीसे ही जीविका प्राप्त करनेकी चेष्टा करे; जो राजा विरक्त हो-सेवकसे घृणा करता हो, उसे सेवक

English

Acrow (sm ) as having its mouth full of excreta accom*

अध्याय २३२

श्लोक 11

सांवत्सरास्तापसाश् च नाशं ब्रूयुः प्ररस्य च ।जिगीषुः पृथिवीं राजा तेन चोद्वेजयेत् परान्

sāṃvatsarāstāpasāś ca nāśaṃ brūyuḥ prarasya ca / jigīṣuḥ pṛthivīṃ rājā tena codvejayet parān

हिन्दी अर्थ

यदि राजा अनुचित कार्यमें प्रवृत्त हो तो उसे मना करना और यदि न्याययुक्त कर्ममें संलग्न हो तो उसमें उसका साथ देना-यह थोड़ेमें बन्धु, मित्र और सेवकोंका श्रेष्ठ आचार बताया गया है राजा मेघकी भाँति समस्त प्राणियोंको आजीविका प्रदान करनेवाला हो। उसके यहाँ आयके जितने द्वार (साधन) हों, उन सबपर वह

English

The lowing of the cows should be known as auguring fear for the master. (If a cow lows) in the night it would be indi¬ cating fear from thieves. (If it) wails (it forebodes) death.

अध्याय २३२

श्लोक 12

देवतानां प्रसादश् च कीर्तनीयः परस्य तु ।आगतन्नो ऽमित्रबलं प्रहरध्वमभीतवत्

devatānāṃ prasādaś ca kīrtanīyaḥ parasya tu / āgatanno 'mitrabalaṃ praharadhvamabhītavat

हिन्दी अर्थ

विश्वस्त एवं जाँचे-परखे हुए लोगोंको नियुक्त करे। (जैसे सूर्य अपनी किरणोंद्वारा पृथ्वीसे जल लेता है, उसी प्रकार राजा उन आयुक्त पुरुषोंद्वारा धन ग्रहण करे)

English

If a bull bellows in the night it would be for the welfare of the master. A bull let loose in the night would confer victory on the king.

अध्याय २३२

श्लोक 13

एवं ब्रूयाद्रणे प्राप्ते भग्नाः सर्वे परे इति ।क्ष्वेडाः किलकिलाः कार्या वाच्यः शत्रुर्हतस् तथा

evaṃ brūyādraṇe prāpte bhagnāḥ sarve pare iti / kṣveḍāḥ kilakilāḥ kāryā vācyaḥ śatrurhatas tathā

हिन्दी अर्थ

(जिन्हें उन-उन कर्मोके करनेका अभ्यास हुए हों तथा जिनके ऊपर जाने-समझे हुए गणक आदि करणवर्गकी नियुक्ति कर दी गयी हो तथा) जो उद्योगसे सम्पन्न हों, ऐसे ही लोगोंको सम्पूर्ण कर्मोमें अध्यक्ष बनाये। खेती, व्यापारियोंके उपयोगमें

English

The cows belonging to a person that were given as gift (mdicate) security (if found) eating (as they wish). (The cows) that had withheld showing affection to the calves are known to be (indicating) miscarriage (in the family).

अध्याय २३२

श्लोक 14

देवाज्ञावृंहितो राजा सन्नद्धः समरं प्रति ।इन्द्रजालं प्रवक्ष्यामि इन्द्रं कालेन दर्शयेत्

devājñāvṛṃhito rājā sannaddhaḥ samaraṃ prati / indrajālaṃ pravakṣyāmi indraṃ kālena darśayet

हिन्दी अर्थ

आनेवाले स्थल और जलके मार्ग, पर्वत आदि दुर्ग, सेतुबन्ध (नहर एवं बाँध आदि), कुञ्जरबन्धन (हाथी आदिके पकड्नेके स्थान), सोने-चाँदी आदिको खानें, वनमें उत्पन्न सार-दारु आदि

English

(The cows) that pound the earth with their feet and arc frightened bring fear. (The cows) that have wet skin, hor¬ ripilation and earth stuck to the horns are auspicious.

अध्याय २३२

श्लोक 15

चतुरङ्गं बलं राजा सहायार्थं दिवौकसां ।बलन्तु दर्शयेत् प्राप्तं रक्तवृष्टिञ्चेन्द्रपौ

caturaṅgaṃ balaṃ rājā sahāyārthaṃ divaukasāṃ / balantu darśayet prāptaṃ raktavṛṣṭiñcendrapau

हिन्दी अर्थ

(साखू, शीशम आदि)-की निकासीके स्थान तथा शून्य स्थानोंको बसाना-आयके इन आठ द्वारोंको ' अष्टवर्ग' कहते हैं। अच्छे आचार-व्यवहारवाला राजा इस अष्टवर्गकी निरन्तर रक्षा करे आयुक्तक (रक्षाधिकारी राजकर्मचारी), चोर, शत्रु, राजाके प्रिय सम्बन्धी तथा राजाके लोभ-- इन पाँचोंसे प्रजाजनोंको पाँच प्रकारका भय प्राप्त होता है। इस भयका निवारण करके राजा उचित

English

The tumbling down of the umbrella at the time of a travel or during the war on account of adverse asterisms and planetary conditions or the wind blowing against (the forces) forebodes fear.

अध्याय २३२

श्लोक 16

छिन्नानि रिपुशीर्षाणि प्रासादाग्रेषु दर्शयेत्(१) ।षाड्गुण्यं सम्प्रवक्ष्यामि तद्वरौ सन्धिविग्रहौ

chinnāni ripuśīrṣāṇi prāsādāgreṣu darśayet(1) / ṣāḍguṇyaṃ sampravakṣyāmi tadvarau sandhivigrahau

हिन्दी अर्थ

समयपर प्रजासे कर ग्रहण करे। राज्यके दो भेद हैं बाह्य और आभ्यन्तर। राजाका अपना शरीर ही ' आभ्यन्तर राज्य है तथा राष्ट्र या जनपदको “बाह्य राज्य' कहा गया है। राजा इन दोनोंकी

English

Contended men and favourable planets are the charac¬ teristics for (foreboding) victory. The warriors being attacked by the crows and demons (forebodes) the destruction of the army. The east, west, north-east and north are the excellent and auspicious directions.

अध्याय २३२

श्लोक 17

सन्धिश् च विग्रहश् चैव यानमासनमेव च ।द्वैधीभावः संशयश् च षड्गुणाः परिकीर्तिताः

sandhiś ca vigrahaś caiva yānamāsanameva ca / dvaidhībhāvaḥ saṃśayaś ca ṣaḍguṇāḥ parikīrtitāḥ

हिन्दी अर्थ

जो पापी राजाके प्रिय होनेपर भी राज्यको हानि पहुँचा रहे हों, वे दण्डनीय हैं। राजा उन सबको दण्ड दे तथा विष आदिसे अपनी रक्षा करे। स्त्रियोंपर, पुत्रोंपर तथा शत्रुओंपर कभी इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणे 'राजधर्मकथन ' नामक दो सौ उनतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

Peace, war, march, halt, dual policy and seeking refuge — the six measures are declared.

अध्याय २३२

श्लोक 18

पणबन्धः स्मृतः सन्धिरपकारस्तु विग्रहः ।जिगीषोः शत्रुविषये यानं यात्राभिधीयते

paṇabandhaḥ smṛtaḥ sandhirapakārastu vigrahaḥ / jigīṣoḥ śatruviṣaye yānaṃ yātrābhidhīyate

हिन्दी अर्थ

श्रीराम कहते हैं- राजाको चाहिए कि वह मुख्य द्वादश राजमण्डलका चिन्तन करे। १. अरि,

English

Peace is remembered as a bond by stake; war is injury; the conqueror's march into the enemy's region is called yana;

अध्याय २३२

श्लोक 19

विग्रहेण स्वके देशे स्थितिरासनमुच्यते ।बलार्धेन प्रयाणन्तु द्वैधीभावः स उच्यते

vigraheṇa svake deśe sthitirāsanamucyate / balārdhena prayāṇantu dvaidhībhāvaḥ sa ucyate

हिन्दी अर्थ

तथा ५. अरिमित्रमित्र-ये क्रमशः विजिगीषुके सामनेवाले राजा कहे गये हैं। विजिगीषुके पीछे क्रमशः चार राजा होते हैं, जिनके नाम इस प्रकार हैं-१. पाष्णिग्राह, उसके बाद २. आक्रन्द, तदनन्तर इन दोनोंके आसार अर्थात् ३.

English

staying in one's own country while at war is called asana; marching with half the force is called dvaidhibhava;

अध्याय २३२

श्लोक 20

उदासीनो मध्यगो वा संश्रयात्संशयः स्मृतः ।समेन सन्धिरन्वेष्यो ऽहीनेन च बलीयसा

udāsīno madhyago vā saṃśrayātsaṃśayaḥ smṛtaḥ / samena sandhiranveṣyo 'hīnena ca balīyasā

हिन्दी अर्थ

विजिगीषु-दोनोंके राज्यसे जिसकी सीमा मिलती है, वह राजा “मध्यम' कहा गया है। अरि और

English

taking refuge with a neutral or middle king is called samshraya. Peace should be sought with an equal, and with a stronger one not inferior;

अध्याय २३२

श्लोक 21

हीनेन विग्रहः कार्यः स्वयं राज्ञा बलीयसा ।तत्रापि शुद्धपार्ष्णिस्तु बलीयांसं समाश्रयेत्

hīnena vigrahaḥ kāryaḥ svayaṃ rājñā balīyasā / tatrāpi śuddhapārṣṇistu balīyāṃsaṃ samāśrayet

हिन्दी अर्थ

संगठित हो गये हों तो मध्यम राजा कोष और सेना आदिकी सहायता देकर इन दोनोंपर अनुग्रह करनेमें समर्थ होता है और यदि ये परस्पर संगठित न हों तो वह मध्यम राजा पृथक्-पृथक् या बारी-बारीसे इन दोनोंका वध करनेमें समर्थ होता है। इन सबके मण्डलसे बाहर जो अधिक

English

war should be made by the king himself with an inferior; and with a stronger one, one whose rear is clean should take refuge.

अध्याय २३२

श्लोक 22

आसीनः कर्मविच्छेदं शक्तः कर्तुं रिपोर्यदा ।अशुद्धपार्ष्णिश्चासीत विगृह्य वसुधाधिपः

āsīnaḥ karmavicchedaṃ śaktaḥ kartuṃ riporyadā / aśuddhapārṣṇiścāsīta vigṛhya vasudhādhipaḥ

हिन्दी अर्थ

बलशाली या अधिक सैनिकशक्तिसे सम्पन्न राजा है, उसकी 'उदासीन' संज्ञा है। विजिगीषु, अरि

English

When one sitting is able to cut off the enemy's operations, one with unclean rear should sit, after making war, the lord of the earth;

अध्याय २३२

श्लोक 23

अशुद्धपार्ष्णिर्बलवान् द्वैधीभावं समाश्रयेत् ।बलिना विगृहीतस्तु(२) यो ऽसन्देहेन पार्थिवः

aśuddhapārṣṇirbalavān dvaidhībhāvaṃ samāśrayet / balinā vigṛhītastu(2) yo 'sandehena pārthivaḥ

हिन्दी अर्थ

राजा इनपर अनुग्रहमात्र कर सकता है और यदि ये संगठित न होकर पृथक्-पृथक् हों तो वह 'उदासीन' इन सबका वध कर डालनेमें समर्थ हो जाता है और आसन आदिके विषयमें बता रहा हूँ। किसी बलवान् राजाके साथ युद्ध ठन जानेपर यदि

English

the strong with an unclean rear should resort to the dual policy. The king who is attacked by a strong one without doubt

अध्याय २३२

श्लोक 24

संश्रयस्तेन वक्तव्यो गुणानामधमो गुणः ।१ प्रासादाग्रे प्रदर्शयेदिति ट॥ २ विगृहीतस्तु इति ख॥ :प् ३४७ बहुक्षयव्ययायासं(१) तेषां यानं प्रकीर्तितं

saṃśrayastena vaktavyo guṇānāmadhamo guṇaḥ / 1 prāsādāgre pradarśayediti ṭa.. 2 vigṛhītastu iti kha.. :p 347 bahukṣayavyayāyāsaṃ(1) teṣāṃ yānaṃ prakīrtitaṃ

हिन्दी अर्थ

यदि विजयकी इच्छा रखनेवाले राजाको नौ हजार योजनके क्षेत्रफलवाले चक्रवर्ति-क्षेत्रपर विजय प्राप्त करना हो, तो उसे अपने

English

should resort to refuge — the lowest of the measures. Their march involves much loss, expense and effort;

अध्याय २३२

श्लोक 25

बहुलाभकरं पश्चात्तदा राजा समाश्रयेत्(२) ।सर्वशक्तिविहीनस्तु तदा कुर्यात्तु संश्रयं

bahulābhakaraṃ paścāttadā rājā samāśrayet(2) / sarvaśaktivihīnastu tadā kuryāttu saṃśrayaṃ

हिन्दी अर्थ

आगेके पाँच तथा पीछेके चार राजाओंकी ओर ध्यान देना होगा। इसी तरह अगल-बगलके उस राज्यपर भी विचार करना होगा, जिसकी सीमा अपने राज्यसे तथा शत्रुके राज्यसे भी मिलती होगी; ऐसे राज्यकी “मध्यम' संज्ञा है। इस सम्पूर्ण मण्डलसे बाहर जो प्रबल राज्य या राजा है -उसकी संज्ञा 'उदासीन' है । विजिगीषुके सामनेके जो पाँच राज्य हैं, उनके नामोंका क्रमश: इस प्रकार व्यवहार होगा--(१) शत्रु-राज्य, (२) मित्र-राज्य, (३) शत्रुके मित्रका राज्य, (४) मित्रके मित्रका राज्य तथा (५) शत्रुके मित्रके मित्रका राज्य। विजिगीषुके पीछेके जो चार राज्य हैं, वे क्रमशः --१. पार्णिग्राह, २. आक्रन्द, ३. पार्ण्णिग्राहासार, ४. आक्रन्दासार-इन नामोंसे व्यवहत होंगे। विजिगीषुसहित इन सबकी संख्या बारह होती है। सम्भावनात्मक संख्या दी गयी है। यदि विजिगीषु इससे अधिकके क्षेत्रको अपनी विजयका लक्ष्य बनाता है तो इसी ढंगसे अन्य राज्य भी इसी मण्डलमें परिगणित होंगे और द्वादशकी जगह अधिक राजमण्डल भी हो सकते हैं। नीचे द्वादशात्मक राजमण्डलका एक परिचयात्मक क्रम दिया जाता है--

English

then afterward, bringing much gain, the king should take it up; one deprived of all power should then seek refuge.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 232
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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