अध्याय २३२
श्लोक 1
षाड्गुण्यं पुष्कर उवाच सामभेदौ मया प्रोक्तौ दानदण्डौ तथैव च ।दण्डः स्वदेशे कथितः परदेशे व्रवीमि ते
ṣāḍguṇyaṃ puṣkara uvāca sāmabhedau mayā proktau dānadaṇḍau tathaiva ca / daṇḍaḥ svadeśe kathitaḥ paradeśe vravīmi te
हिन्दी अर्थ
हो, जो राजाके अपने ही जनपदमें जन्मे हों, युद्धकुशल हों और कुशल सैनिकोंके साथ रहते हों, नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंसे सम्पन्न हों, जिन्हें नाना प्रकारके युद्धोंमें विशेष कुशलता प्राप्त हो तथा जिनके दलमें बहुत-से योद्धा भरे हों, जिन सैनिकोंद्वारा अपनी सेनाके घोड़े और हाथियोंकी आरती उतारी जाती हो, जो परदेश- निवास, युद्धसम्बन्थी आयास तथा नाना प्रकारके
English
An army would take possession of a city that is under siege by that way through which many crows enter that city.