Agni Purana· Agni Purāṇa
233
अध्याय 233 / 381

Adhyaya 234

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अध्याय २३३

श्लोक 1

प्रात्यहिकराजकर्म पुष्कर उवाच अजस्रं कर्म वक्ष्यामि दिनं प्रति यदाचरेत् ।द्विमुहूर्तावशेषायां रात्रौ निद्रान्त्यजेन्नृपः

prātyahikarājakarma puṣkara uvāca ajasraṃ karma vakṣyāmi dinaṃ prati yadācaret / dvimuhūrtāvaśeṣāyāṃ rātrau nidrāntyajennṛpaḥ

हिन्दी अर्थ

अपने पक्षकी अवस्था शोचनीय हो तो अपने ९. अदृष्टनर, १०. आदिष्ट, ११. आत्मामिष, १२. कल्याणके लिये संधि कर लेनी चाहिए। उपग्रह, १३. परिक्रय, १४. उच्छिन्न, १५. परदूषण १. कपाल, २. उपहार, ३. संतान, ४. संगत, तथा १६. स्कन्धोपनेय-ये संधिके सोलह भेद ५. उपन्यास, ६. प्रतीकार, ७. संयोग, ८. पुरुषान्तर, बतलाये गये हैं। जिसके साथ संधि की जाती

English

One should avoid undertaking journey under ( the in¬ fluence of) vipat {t3ra)t naidhana, pratyari, as well as the janma, the ganda and the void lunar day.

अध्याय २३३

श्लोक 2

वाद्यवन्दिस्वनैर् गीतैः पश्येद् गूढांस्ततो नरान् ।विज्ञायते न ये लोकास्तदीया इति केनचित्

vādyavandisvanair gītaiḥ paśyed gūḍhāṃstato narān / vijñāyate na ye lokāstadīyā iti kenacit

हिन्दी अर्थ

इन सोलह संधियोंका परिचय इस प्रकार है-- १. समान शक्ति तथा साधनवाले दो राजाओंमें जो बिना किसी शर्तके संधि की जाती है, उसे 'समसंधि' या 'कपालसंधि' कहते हैं। 'कपालसंधि' उसका नाम इसलिये हुआ कि वह दो कपालोंको जोड्नेके समान है। दो कपालोंके योगसे घडा बनता है। यदि एक कपाल फूट जाय और उसके स्थानपर दूसरा कपाल जोड़ा जाय तो वह बाहरसे जुड़ा हुआ दीखनेपर भी भीतरसे पूरा-पूरा नहीं जुड़ता। इसी तरह जो संधि समान शक्तिशाली पुरुषोंमें स्थापित होती है, वह कुछ कालके लिये कामचलाऊ ही होती है। हृदयका

English

The north and the east are said to be having the same virtues. In the same way the west and south are of the same virtues.

अध्याय २३३

श्लोक 3

आयव्ययस्य श्रवणं ततः कार्यं यथाविधि ।वेगोत्सर्गं ततः कृत्वा राजा स्नानगृहं व्रजेत्

āyavyayasya śravaṇaṃ tataḥ kāryaṃ yathāvidhi / vegotsargaṃ tataḥ kṛtvā rājā snānagṛhaṃ vrajet

हिन्दी अर्थ

मेल न होनेके कारण वह टिक नहीं पाती।

English

One should not cross the obstacle that has risen from the north-west to the south-east. Sundays, Mondays and Saturdays are not auspicious (for a journey).

अध्याय २३३

श्लोक 4

स्नानं कुर्यान्नृपः पश्चाद्दन्तधावनपूर्वकं ।कृत्वा सन्ध्यान्ततो जप्यं वासुदेवं प्रपूजयेत्

snānaṃ kuryānnṛpaḥ paścāddantadhāvanapūrvakaṃ / kṛtvā sandhyāntato japyaṃ vāsudevaṃ prapūjayet

हिन्दी अर्थ

२. संधेयकी इच्छाके अनुसार पहले ही द्रव्य आदिका उपहार देनेके बाद जो उसके साथ संधि की जाती है, वह उपहार- संधि कही गयी है। ३. कन्यादान देकर जो संधि की जाती है, वह संतानहेतुक होनेके कारण संतानसंधि कहलाती है।

English

One should march on an expedition after meditating on lord Hari for victory if the omens and other things are good.

अध्याय २३३

श्लोक 5

वह्नौ पवित्रान् जुहुयात् तर्पयेदुदकैः पितॄन् ।१ बहुक्षयव्ययायामिति ख॥ , छ॥ , ट॥ च २ आसीनः कर्मविच्छेदमित्यादिः, राजा समाश्रयेदित्यन्तः पाठः ज॥ पुस्तके नास्ति :प् ३४८ दद्यात्सकाञ्चीं धेनुं द्विजाशीर्वादसंयुतः

vahnau pavitrān juhuyāt tarpayedudakaiḥ pitṝn / 1 bahukṣayavyayāyāmiti kha.. , cha.. , ṭa.. ca 2 āsīnaḥ karmavicchedamityādiḥ, rājā samāśrayedityantaḥ pāṭhaḥ ja.. pustake nāsti :p 348 dadyātsakāñcīṃ dhenuṃ dvijāśīrvādasaṃyutaḥ

हिन्दी अर्थ

४. चौथी संगतसंधि कही गयी है, जो सत्पुरुषोंके साथ मैत्रीपूर्वक स्थापित होती है । इसमें देने-लेनेकी कोई शर्त नहीं होती। उसमें दोनों पक्षोंके अर्थ (कोष) और प्रयोजन (कार्य) समान होते हैं। परस्पर अत्यन्त विश्वासके साथ दोनोंके हदय एक हो जाते हैं। उस दशामें दोनों अपना खजाना एक-दूसरेके लिये खोल देते हैं और दोनों एक-दूसरेके प्रयोजनकी सिद्धिके लिये समानरूपसे प्रयत्नशील होते हैं। यह संधि जीवनपर्यन्त सुस्थिर रहती है। सब संधियोंमें इसीका स्थान ऊँचा है। जैसे टूटे हुए सुवर्णके टुकड़ोंको

English

This and the foHowii; three are some of the eleven divisions of a day- called karaoas.

अध्याय २३३

श्लोक 6

अनुलिप्तो ऽलङ्कृतश् च मुखं पश्येच्च दर्पणे ।ससुवर्णे धृते राजा शृणुयाद्दिवसादिकं

anulipto 'laṅkṛtaś ca mukhaṃ paśyecca darpaṇe / sasuvarṇe dhṛte rājā śṛṇuyāddivasādikaṃ

हिन्दी अर्थ

गलाकर जोड़ा जाय तो वे पूर्णरूपसे जुड़ जाते हैं, उसी तरह संगतसंधिमें दोनों पक्षोंकी संगति अटूर हो जाती है। इसीलिये इसे सुवर्णसंधि या काञ्चनसंधि भी कहते हैं। यह सम्पत्ति और विपत्तिमें भी, कैसे ही कारण क्यों न हों, उनके द्वारा अभेद्य रहती है। ५. भविष्यमें कल्याण करनेवाली एकार्थसिद्धिके उद्देश्ये जो संधि की जाय, अर्थात् अमुक शत्रु हम दोनोंको हानि पहुँचानेवाला है, अतः हम दोनों मिलकर उसका उच्छेद करें, इससे हम दोनोंको समानरूपसे लाभ होगा -एऐसा उपन्यास (उल्लेख) करके जो संधि की जाय, उसे उपन्यास कहा गया है।

English

This and die next three are the astral Indications.

अध्याय २३३

श्लोक 7

औषधं भिषजोक्तं च मङ्गलालम्भनञ्चरेत् ।पश्चेद् गुरुं तेन दत्ताशीर्वदो ऽथ व्रजेत्सभां

auṣadhaṃ bhiṣajoktaṃ ca maṅgalālambhanañcaret / paśced guruṃ tena dattāśīrvado 'tha vrajetsabhāṃ

हिन्दी अर्थ

६. मैंने पहले इसका उपकार किया है, संकटकालमें इसे सहायता दी है, अब यह ऐसे ही अवसरपर मेरी भी सहायता करके उस उपकारका बदला चुकायेगा-इस उद्देश्यसे जो संधि की जाती है, अथवा मैं इसका उपकार करता हूँ, यह मेरा भी उपकार करेगा -इस अभिप्रायसे जो संधि स्थापित की जाती है, उसका नाम प्रतीकारसंधि है-जैसे श्रीराम और सुग्रीवकी संधि।

English

One should destroy all those who obstruct (the normal course) of the seven constituents of a kingdom. Efforts should be made by the king to make all these circles develop.

अध्याय २३३

श्लोक 8

तत्रस्थो ब्राह्मणान् पश्येदमात्यान्मन्त्रिणस् तथा ।प्रकृतीश् च महाभाग प्रतीहारनिवेदिताः

tatrastho brāhmaṇān paśyedamātyānmantriṇas tathā / prakṛtīś ca mahābhāga pratīhāraniveditāḥ

हिन्दी अर्थ

७. एकपर ही चढ़ाई करनेके लिये जब शत्रु और विजिगीषु दोनों जाते हैं, उस समय यात्राकालमें जो उन दोनोंमें संगठन या साँठ-गाँठ हो जाती है, ऐसी संधिको संयोग कहते हैं। ८. जहाँ दो राजाओंमें एक नतमस्तक हो जाता है और दूसरा यह शर्त रखता है कि मेरे और तुम्हारे दोनों सेनापति मिलकर मेरा अमुक कार्य सिद्ध करें, तो उस शर्तपर होनेवाली संधि पुरुषान्तर कही जाती है।

English

Staying there he should see Brahmins, ministers and counselors, and the subjects, great one, announced by the door-keeper;

अध्याय २३३

श्लोक 9

श्रुत्वेतिहासं कार्याणि कार्याणां कार्यनिर्णयम् ।व्यवहारन्ततः पश्येन्मन्त्रं कुर्यात्तु मन्त्रिभिः

śrutvetihāsaṃ kāryāṇi kāryāṇāṃ kāryanirṇayam / vyavahārantataḥ paśyenmantraṃ kuryāttu mantribhiḥ

हिन्दी अर्थ

९. अकेले तुम मेरा अमुक कार्य सिद्ध करो, उसमें मैं अथवा मेरी सेनाका कोई योद्धा साथ नहीं रहेगा -जहाँ शत्रु ऐसी शर्त सामने रखे, वहाँ उस शर्तपर की जानेवाली संधि ' अदृष्ट-पुरुष'कही जाती है। उसमें एक पक्षका कोई भी पुरुष देखनेमें नहीं आता, अतएव उसका नाम अष्ृष्टपुरुष है।

English

having heard history, tasks and decision of the tasks, he should then see to legal business; he should take counsel with counselors.

अध्याय २३३

श्लोक 10

नैकेन सहितः कुर्यान्न कुर्याद्बहुभिः सह ।न च मूर्खैर् नचानाप्तैर् गुप्तं न प्रकटं चरेत्(१)

naikena sahitaḥ kuryānna kuryādbahubhiḥ saha / na ca mūrkhair nacānāptair guptaṃ na prakaṭaṃ caret(1)

हिन्दी अर्थ

११. जहाँ अपनी सेना देकर संधि की जाती है, वहाँ अपने-आपको ही आमिष (भोग्य) बना देनेके कारण उस संधिका नाम आत्मामिष है। १२. जहाँ प्राणरक्षाके लिये सर्वस्व अर्पण कर दिया जाता है, वह संधि उपग्रह कही गयी है।

English

He should not take counsel with one alone, nor with many, nor with fools or the untrustworthy; he should act secretly, not openly;

अध्याय २३३

श्लोक 11

मन्त्रं स्वधिष्ठितं कुर्याद्येन राष्ट्रं न बाधते ।आकारग्रहणे राज्ञो मन्त्ररक्षा परा मता(२)

mantraṃ svadhiṣṭhitaṃ kuryādyena rāṣṭraṃ na bādhate / ākāragrahaṇe rājño mantrarakṣā parā matā(2)

हिन्दी अर्थ

१३. जहाँ कोषका एक भाग, कुप्य (वस्त्र, कम्बल आदि) अथवा सारा ही खजाना देकर शेष प्रकृति (अमात्य, राष्ट्र आदि) - की रक्षा की जाती है, वहाँ मानो उस धनसे उन शेष प्रकृतियोंका क्रय किया जाता है; अतएव उस संधिको परिक्रय कहते हैं।

English

he should make the counsel well established so that the nation is not harmed. In the matter of reading the king's expressions, protection of counsel is held supreme;

अध्याय २३३

श्लोक 12

आकारैर् इङ्गितैः प्रज्ञा मन्त्रं गृह्णन्ति पण्डिताः ।सांवत्सराणां वैद्यानां मन्त्रिणां वचने रतः

ākārair iṅgitaiḥ prajñā mantraṃ gṛhṇanti paṇḍitāḥ / sāṃvatsarāṇāṃ vaidyānāṃ mantriṇāṃ vacane rataḥ

हिन्दी अर्थ

१४. जहाँ सारभूत भूमि (कोष आदिकी अधिक वृद्धि करानेवाले भूभाग)-को देकर संधि की जाती है, वह अपना उच्छेद करनेके समान होनेसे उच्छिन्न कहलाती है। १५. अपनी सम्पूर्ण भूमिसे जो भी फल या लाभ प्राप्त होता है, उसको कुछ अधिक मिलाकर देनेके बाद जो संधि होती है, वह परदूषण कही गयी है।

English

the wise grasp counsel by expressions and hints with intelligence. The king who is attentive to the words of astrologers, physicians and counselors

अध्याय २३३

श्लोक 13

राजा विभूतिमाप्नोति(३) धारयन्ति नृपं हि ते ।मन्त्रं कृत्वाथ व्यायामञ्चक्रे याने च शस्त्रके

rājā vibhūtimāpnoti(3) dhārayanti nṛpaṃ hi te / mantraṃ kṛtvātha vyāyāmañcakre yāne ca śastrake

हिन्दी अर्थ

. १६. जहाँ परिंगणित फल (लाभ) खण्ड-खण्ड करके अर्थात् कई किश्तोंमें बाँटकर पहुँचाये जाते हैं, वैसी संधि स्कन्धोपनेय कही

English

obtains prosperity, for they support the king. Having taken counsel, then exercise, in vehicle and weapons,

अध्याय २३३

श्लोक 14

निःसत्त्वादौ नृपः स्नातः पश्येद्विष्णुं सुपूजितं ।हुतञ्च पावकं पश्येद्विप्रान् पश्येत्सुपूजितान्

niḥsattvādau nṛpaḥ snātaḥ paśyedviṣṇuṃ supūjitaṃ / hutañca pāvakaṃ paśyedviprān paśyetsupūjitān

हिन्दी अर्थ

है, वह 'संधेय' कहलाता है। उसके दो भेद हैं अभियोक्ता और अनभियोक्ता। उक्त संधियोंमेंसे उपन्यास, प्रतीकार और संयोग ये तीन संधियाँ अनभियोक्ता (अनाक्रमणकारी)-के प्रति करनी चाहिए। शेष सभी अभियोक्ता (आक्रमणकारी)- के प्रति कर्तव्य हैं ॥ ५--८॥

English

the king, bathed, seeing Vishnu well worshipped, should see the oblation-fire and see well-honored Brahmins;

अध्याय २३३

श्लोक 15

१ गुप्तं चाप्रकटं चरेदिति ग॥ , ज॥ , ट॥ च २ आकार ग्रहणे राज्ञो मन्त्ररक्षा परा मता इत्य् अस्य स्थाने आकारेङ्गिततत्त्वज्ञः कार्याकार्यविचक्षण इति ट॥ पुस्तकपाठः ३ राजाधिभूतिमाप्नोतीति ज॥ :प् ३४९ भूषितो भोजनङ्कुर्याद् दानाद्यैः सुपरीक्षितं ।भुक्त्वा गृहीतताम्बूलो वामपार्श्वेन संस्थितः(१)

1 guptaṃ cāprakaṭaṃ carediti ga.. , ja.. , ṭa.. ca 2 ākāra grahaṇe rājño mantrarakṣā parā matā ity asya sthāne ākāreṅgitatattvajñaḥ kāryākāryavicakṣaṇa iti ṭa.. pustakapāṭhaḥ 3 rājādhibhūtimāpnotīti ja.. :p 349 bhūṣito bhojanaṅkuryād dānādyaiḥ suparīkṣitaṃ / bhuktvā gṛhītatāmbūlo vāmapārśvena saṃsthitaḥ(1)

हिन्दी अर्थ

परस्परोपकार, मैत्र, सम्बन्धज तथा उपहार -- ये ही चार संधिके भेद जानने चाहिए-ऐसा अन्य लोगोंका मत है

English

adorned he should take food, well tested, by gifts and the rest; having eaten, taking betel, resting on the left side,

अध्याय २३३

श्लोक 16

शास्त्राणि चिन्तयेद् दृष्ट्वा योधान् कोष्ठायुधं गृहं ।अन्वास्य पश्चिमां सन्ध्यां कार्याणि च विचिन्त्य तु

śāstrāṇi cintayed dṛṣṭvā yodhān koṣṭhāyudhaṃ gṛhaṃ / anvāsya paścimāṃ sandhyāṃ kāryāṇi ca vicintya tu

हिन्दी अर्थ

बालक, वृद्ध, चिरकालका रोगी, भाई- बन्धुओंसे बहिष्कृत, डरपोक, भीरु सैनिकोंवाला, लोभी-लालची सेवकोंसे घिरा हुआ, अमात्य आदि प्रकृतियोंके अनुरागसे वञ्चित, अत्यन्त विषयासक्त, अस्थिरचित्त और अनेक लोगोंके सामने मन्त्र प्रकट करनेवाला, देवताओं और ब्राह्मणोंका निन्दक, हैवका मारा हुआ, हैवको ही सम्पत्ति और विपत्तिका कारण मानकर स्वयं उद्योग न करनेवाला, जिसके

English

he should think of scriptures; having seen warriors, the armory and the house; having attended the evening twilight and thought about the tasks,

अध्याय २३३

श्लोक 17

चरान् सम्प्रेष्य भुक्तान्नमन्तःपुरचरो भवेत् ।वाद्यगीतैर् अक्षितो ऽन्यैर् एवन्नित्यञ्चरेन्नृपः

carān sampreṣya bhuktānnamantaḥpuracaro bhavet / vādyagītair akṣito 'nyair evannityañcarennṛpaḥ

हिन्दी अर्थ

ऊपर दुर्भिक्षका संकट आया हो वह, जिसको सेना कैद कर ली गयी हो अथवा शत्रुओंसे घिर गयी हो वह, अयोग्य देशमें स्थित (अपनी सेनाको पहुँचसे बाहरके स्थानमें विद्यमान), बहुत-से

English

having sent out spies, having eaten, he should be a frequenter of the inner palace; guarded with music and songs and others, the king should thus always conduct himself.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 233
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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