अध्याय २४०
श्लोक 1
राजनीतिः राम उवाच षड्विधन्तु बलं व्यूह्य देवान् प्रार्च्य रिपुं व्रजेत् ।मौलं भूतं श्रोणिसुहृद्द्विषदाटविकं बलं
rājanītiḥ rāma uvāca ṣaḍvidhantu balaṃ vyūhya devān prārcya ripuṃ vrajet / maulaṃ bhūtaṃ śroṇisuhṛddviṣadāṭavikaṃ balaṃ
हिन्दी अर्थ
वसिष्ठपुत्रि नन्दे! सब प्रकारके बीजोंसे युक्त एवं सम्पूर्ण रत्नोंसे सम्पन्न इस मनोरम नन्दनवनमें विहार करो। प्रजापतिपुत्रि! देवि भद्रे! तुम उत्तम लक्षणों एवं श्रेष्ठ व्रतको धारण करनेवाली हो; कश्यपनन्दिनि! इस भूमिमय चतुष्कोणभवनमें निवास करो। भार्गवतनये देवि ! तुम सम्पूर्ण विश्वको ऐश्वर्य प्रदान करनेवाली हो; श्रेष्ठ आचायोँद्वारा पूजित एवं गन्ध और मालाओंसे अलंकृत मेरे
English
If the sapindikarana has to be performed for a (dead) person within a year (after death), the food for him should be given to a brahmin the whole year together with a vessel filled with water.