Agni Purana· Agni Purāṇa
244
अध्याय 244 / 381

Adhyaya 245

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अध्याय २४४

श्लोक 1

रत्नपरीक्षा अग्निर् उवाच रत्नानां लक्षणं वक्ष्ये रत्नं धार्यमिदं नृपैः ।वज्रं मरकतं रत्नं पद्मरागञ्च मौक्तिकं

ratnaparīkṣā agnir uvāca ratnānāṃ lakṣaṇaṃ vakṣye ratnaṃ dhāryamidaṃ nṛpaiḥ / vajraṃ marakataṃ ratnaṃ padmarāgañca mauktikaṃ

हिन्दी अर्थ

४. प्रतिभूके अभावमें वेतन देकर रक्षक-पुरुषोंकी नियुक्ति करनी चाहिए। जैसा कि कात्यायनका कथन है-- अथ चेत् प्रतिभूर्नास्ति कार्ययोगस्तु वादिनः । स रक्षितो दिनस्यान्ते दद्याद् भृत्याय वेतनम्॥

English

A profuse oblation of ghee oflered in the fire through a long bamboo 'or plough.

अध्याय २४४

श्लोक 2

इन्द्रनीलं महानीलं वैदूर्यं गन्धशस्यकं ।चन्द्रकान्तं सूर्यकान्तं स्फटिकं पुलकं तथा

indranīlaṃ mahānīlaṃ vaidūryaṃ gandhaśasyakaṃ / candrakāntaṃ sūryakāntaṃ sphaṭikaṃ pulakaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

द्वारा लगाये गये अभियोगको यदि प्रत्यर्थीने अस्वीकार कर दिया और अर्थीने गवाही आदि देकर अपने दावेको पुनः उससे स्वीकार करा लिया, तब प्रत्यर्थी अर्थीको अभियुक्त धन दे और दण्डस्वरूप उतना ही धन राजाको भी दे। यदि अर्थी अपने दावेको सिद्ध न कर सका तो

English

Relating to $iva, being the five elements/suq, moofif and die saerificer*

अध्याय २४४

श्लोक 3

कर्केतनं पुष्परागं तथा ज्योतीरसं द्विज ।स्पटिकं राजपट्टञ्च तथा राजमयं शुभं

karketanaṃ puṣparāgaṃ tathā jyotīrasaṃ dvija / spaṭikaṃ rājapaṭṭañca tathā rājamayaṃ śubhaṃ

हिन्दी अर्थ

हो गया; उस दशामें वही अभियुक्त धनराशिसे दूना धन राजाको अर्पित करे॥ ४० ३ ॥

English

O Golden embryo of the Fire god or Sun that is lying imbedded inside the golden egg! You give me appeasement that yields limitless meritorious fruits.

अध्याय २४४

श्लोक 4

सौगन्धिकं तथा गञ्जं शङ्खब्रह्ममयं तथा ।गोमेदं रुधिराक्षञ्च तथा भल्लातकं द्विज

saugandhikaṃ tathā gañjaṃ śaṅkhabrahmamayaṃ tathā / gomedaṃ rudhirākṣañca tathā bhallātakaṃ dvija

हिन्दी अर्थ

गलौज), दण्डपारुष्य (निर्दयतापूर्वक की हुई मारपीट), दूध देनेवाली गायके अपहरण, अभिशाप (पातकका अभियोग), अत्यय (प्राणघात) एवं धनातिपात तथा स््त्रियोंके चरित्र-सम्बन्धी विवाद प्राप्त होनेपर तत्काल अपराधीसे उत्तर माँगे, विलम्ब न करे। अन्य प्रकारके विवादोंमें उत्तरदानका समय वादी, प्रतिवादी, सभासद् तथा प्राडविवाककी इच्छाके अनुसार रखा जा सकता है

English

You are lord Visnu in the form of Fish from which the nectar has come. You have the moon and the sun as the vehicle always. Hence you get me tranquillity.

अध्याय २४४

श्लोक 5

धूलीं मरकतञ्चैव तुथकं सीसमेव च ।पीलुं प्रवालकञ्चैव गिरिवज्रं द्विजोत्तम

dhūlīṃ marakatañcaiva tuthakaṃ sīsameva ca / pīluṃ pravālakañcaiva girivajraṃ dvijottama

हिन्दी अर्थ

(दुष्टोंकी पहचान इस प्रकार करे) अभियोगके विषयमें बयान या गवाही देते समय जो एक जगहसे दूसरी जगह जाता-आता है, स्थिर नहीं रह पाता, दोनों गलफर चाटता है,

English

O Cow of the colour of (lord) Kesava (Visnu), on account of the fact that you are the entire earth that always removes the sin, you give me tranquillity.

अध्याय २४४

श्लोक 6

भुजङ्गममणिञ्चैव तथा वज्रमणिं शुभं ।टिट्टिभञ्च तथा पिण्डं भ्रामरञ्च तथोत्पलं

bhujaṅgamamaṇiñcaiva tathā vajramaṇiṃ śubhaṃ / ṭiṭṭibhañca tathā piṇḍaṃ bhrāmarañca tathotpalaṃ

हिन्दी अर्थ

जिसके भाल-देशमें पसीना हुआ करता है, चेहरेका रंग फोका पड़ जाता है, गला सूखनेसे वाणी अटकने लगती है, जो बहुत तथा पूर्वापर-विरुद्ध बातें कहा करता है, जो दूसरेकी बातका ठीक- ठीक उत्तर नहीं दे पाता और किसीसे दृष्टि नहीं मिला पाता है, जो ओठ रेढ़े-मेढ़े किया करता है, इस प्रकार जो स्वभावसे ही मन, वाणी, शरीर तथा क्रिया-सम्बन्धी विकारको प्राप्त होता

English

Serpent-gem and diamond-gem are auspicious, tittibha, pinda, bhramara and utpala (gems);

अध्याय २४४

श्लोक 7

सुवर्णप्रतिबद्धानि रत्नानि श्रीजयादिके ।अन्तःप्रभत्वं वैमल्यं सुसंस्थानत्वमेव च

suvarṇapratibaddhāni ratnāni śrījayādike / antaḥprabhatvaṃ vaimalyaṃ susaṃsthānatvameva ca

हिन्दी अर्थ

है, वह 'दुष्ट' कहा गया है॥ ४२-४३ ३॥

English

gems bound in gold bring prosperity and victory. Inner luster, purity and good shape;

अध्याय २४४

श्लोक 8

सुधार्या नैव धार्यास्तु निष्प्रभा मलिनास् तथा ।खण्डाः सशर्करा ये च प्रशस्तं वज्रधरणम्

sudhāryā naiva dhāryāstu niṣprabhā malinās tathā / khaṇḍāḥ saśarkarā ye ca praśastaṃ vajradharaṇam

हिन्दी अर्थ

जो संदिग्ध अर्थको, जिसे अधमर्णने अस्वीकार कर दिया है, बिना किसी साधनके मनमाने ढंगसे सिद्ध करनेकी चेष्टा करता है तथा जो राजाके बुलानेपर उसके समक्ष कुछ भी नहीं कह पाता है, वह भी हीन और दण्डनीय माना गया है

English

those without luster, dirty, broken or gritty should not be worn; wearing a diamond is praised.

अध्याय २४४

श्लोक 9

अम्भस्तरति यद्वज्रमभेद्यं विमलं च यत् ।षट्कोणं शक्रचापाभं लघु चार्कनिभं शुभम्

ambhastarati yadvajramabhedyaṃ vimalaṃ ca yat / ṣaṭkoṇaṃ śakracāpābhaṃ laghu cārkanibhaṃ śubham

हिन्दी अर्थ

दोनों वादियोंके पक्षोंके साधक साक्षी मिलने सम्भव हो तो पूर्ववादीके साक्षियोसे ही पूछे, अर्थात् उन्हीँकी गवाही ले। जो वादीके उत्तरमें यह कहे कि “मैंने बहुत पहले इस क्षेत्रको दानमें

English

A diamond that floats on water, unbreakable and spotless, six-cornered, rainbow-colored, light and sun-like, is auspicious.

अध्याय २४४

श्लोक 10

शुकपक्षनिभः स्निग्धः कान्तिमान्विमलस् तथा ।स्वर्णचूर्णनिभैः सूक्ष्मैर् मरकतश् च विन्दुभिः

śukapakṣanibhaḥ snigdhaḥ kāntimānvimalas tathā / svarṇacūrṇanibhaiḥ sūkṣmair marakataś ca vindubhiḥ

हिन्दी अर्थ

पाया था और तभीसे यह हमारे उपयोगमें है', वही यहाँ पूर्ववादी है; जिसने पहले अभियोग दाखिल किया है, वह नहीं। यदि कोई यह कहे कि 'ठीक है कि यह सम्पत्ति इसे दानमें मिली थी और इसने इसका उपयोग भी किया है, तथापि इसके यहाँसे अमुकने वह क्षेत्र-सम्पत्ति खरीद ली और उसने पुनः इसे मुझको दे दिया' तब पूर्वपक्ष असाध्य होनेके कारण दुर्बल पड़

English

An emerald resembling a parrot's wing, glossy, lustrous and spotless, with fine dots like gold dust, is good.

अध्याय २४४

श्लोक 11

स्फटिकजाः पद्मरागाः स्यू रागवन्तो ऽतिनिर्मलाः ।जातवङ्गा भवन्तीह कुरुविन्दसमुद्भवाः

sphaṭikajāḥ padmarāgāḥ syū rāgavanto 'tinirmalāḥ / jātavaṅgā bhavantīha kuruvindasamudbhavāḥ

हिन्दी अर्थ

जाता है। ऐसा होनेपर उत्तरवादीके साक्षी ही प्रष्टव्य हैं; उन्हींको गवाही ली जानी चाहिए॥ ४५ ३ ॥

English

Rubies are crystal-born, colored and very clear; born of vanga here, born of kuruvinda;

अध्याय २४४

श्लोक 12

सौगन्धिकोत्था काषाया मुक्ताफलास्तु शुक्तिजाः ।विमलास्तेभ्य उत्कृष्टा ये च शङ्खोद्भवा मुने

saugandhikotthā kāṣāyā muktāphalāstu śuktijāḥ / vimalāstebhya utkṛṣṭā ye ca śaṅkhodbhavā mune

हिन्दी अर्थ

यदि विवाद किसी शर्तके साथ किया गया हो, अर्थात् यदि किसीने कहा हो कि 'यदि मैं अपना पक्ष सिद्ध न कर सकूँ तो पाँच सौ पण अधिक दण्ड दूँगा, तब यदि वह पराजित हो जाय तो उसके पूर्वकृत पणरूपी दण्डका धन राजाको दिलवावे। परंतु जो अर्थी धनी है, उसे राजा विवादका आस्पदभूत धन ही दिलवावे'

English

born of saugandhika, kashaya (tinted); pearls are oyster-born; spotless ones are better; those conch-born, sage,

अध्याय २४४

श्लोक 13

नागदन्तभवाश्चाग्र्याः कुम्भशूकरमत्स्यजाः ।वेणुनागभवाः श्रेष्ठा मौक्तिकं मेघजं वरं

nāgadantabhavāścāgryāḥ kumbhaśūkaramatsyajāḥ / veṇunāgabhavāḥ śreṣṭhā mauktikaṃ meghajaṃ varaṃ

हिन्दी अर्थ

राजा छल छोड़कर वास्तविकताका आश्रय ले व्यवहारोंका अन्तिम निर्णय करे। यथार्थ वस्तु भी यदि लेखबद्ध न हुई हो तो व्यवहारमें वह पराजयका कारण बनती है। सुवर्ण, रजत

English

born of elephant tusks are chief; born of pot, boar and fish; born of bamboo and serpent are best; the cloud-born pearl is best.

अध्याय २४४

श्लोक 14

वृत्तत्वं शुक्रता स्वाच्छ्यंमहत्त्वं मौक्तिके गुणाः ।इन्द्रनीलं शुभं क्षीरे राजते भ्राजते ऽधिकं(१)

vṛttatvaṃ śukratā svācchyaṃmahattvaṃ mauktike guṇāḥ / indranīlaṃ śubhaṃ kṣīre rājate bhrājate 'dhikaṃ(1)

हिन्दी अर्थ

और वस्त्र आदि अनेक वस्तुएँ अर्थीके द्वारा अभियोग-पत्रमें लिखा दी गयी हैं, परंतु प्रत्यर्थी उन सबको अस्वीकार कर देता है, उस दशामें यदि साक्षी आदिके प्रमाणसे एक वस्तुको भी प्रत्यर्थीने स्वीकार कर लिया, तब राजा उससे अभियोग-पत्रमें लिखित सारी वस्तुएँ दिलवाये। यदि कोई वस्तु पहले नहीं लिखायी गयी और बादमें उसको भी वस्तुसूचीमें चर्चा की गयी हो

English

Roundness, whiteness, clarity and size are the qualities in a pearl. A sapphire in milk is auspicious, in silver it shines more;

अध्याय २४४

श्लोक 15

रञ्जयेत् स्वप्रभावेण तममूल्यं विनिर्दिशेत् ।नीलरक्तन्तु वैदूर्यं श्रेष्ठं हारादिकं भजेत्(२)

rañjayet svaprabhāveṇa tamamūlyaṃ vinirdiśet / nīlaraktantu vaidūryaṃ śreṣṭhaṃ hārādikaṃ bhajet(2)

हिन्दी अर्थ

तो उसको राजा नहीं दिलवावे। यदि दो स्मृतियां अथवा धर्मशास्त्र-बचनोंमें परस्पर विरोधको प्रतीति होती हो तो उस विरोधको दूर करनेके लिये

English

it colors by its own power: declare it priceless. A blue-red cat's-eye is best; one should use it in necklaces and the like.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 244
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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