Agni Purana· Agni Purāṇa
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अध्याय 251 / 381

Adhyaya 252

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अध्याय २५१

श्लोक 1

व्यवहारकथनं अग्निर् उवाच व्यवहारं प्रवक्ष्यामि नयानयविवेकदं ।चतुष्पाच्च चतुःस्थानश् चतुःसाधन उच्यते

vyavahārakathanaṃ agnir uvāca vyavahāraṃ pravakṣyāmi nayānayavivekadaṃ / catuṣpācca catuḥsthānaś catuḥsādhana ucyate

हिन्दी अर्थ

धनपर अनायास ही स्वत्व होता है, इसलिये वह 'अप्रतिबन्ध दाय' है। चाचा और भाई आदिको पुत्र और स्वामीके अभावमें धनपर अधिकार प्राप्त होता है, इसलिये वह ' सप्रतिबन्ध दाय' है। इसी प्रकार उनके पुत्र आदिके लिये भी समझ लेना चाहिए। जिसके अनेक स्वामी हैं, ऐसे धनको बाँटकर एक-एकके अंशको पृथक्- पृथक् व्यवस्थित कर देना “विभाग” कहलाता

English

The observance marking the completion of one's study.

अध्याय २५१

श्लोक 2

चतुर्हितश् चतुर्व्यापी चतुष्कारी च कीर्त्यते ।अष्टाङ्गो ऽष्टादशपदः शतशाखस्तथैव च

caturhitaś caturvyāpī catuṣkārī ca kīrtyate / aṣṭāṅgo 'ṣṭādaśapadaḥ śataśākhastathaiva ca

हिन्दी अर्थ

है। इस अध्यायमें दाय-विभाग और स्वत्वपर विचार किया गया है, जो धर्मशास्त्रकारों एवं महर्षियोंको अभिमत है।)

English

A kind of severe penance to be finished in 12 nights.

अध्याय २५१

श्लोक 3

त्रियोनिर्द्व्यभियोगश् च द्विद्वारो द्विगतिस् तथा ।धर्मश् च व्यवहारश् च चरित्रं राजशासनं

triyonirdvyabhiyogaś ca dvidvāro dvigatis tathā / dharmaś ca vyavahāraś ca caritraṃ rājaśāsanaṃ

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं- वसिष्ठ! यदि पिता अपने जीवनमें सब पुत्रोंमें धनका विभाजन करे तो वह इच्छानुसार ज्येष्ठ पुत्रको श्रेष्ठ भाग दे या सब पुत्रोंको समांश भागी बनाये।' यदि पिता सब पुत्रोंको समान भाग दे, तो अपनी उन स्त्रियाँको भी समान भाग दे, जिनको पति अथवा श्वशुरको ओरसे स्त्रीधन न मिला हो। जो पुत्र धनोपार्जनमें समर्थ होनेके कारण पैतृक धनको इच्छा न रखता

English

Eating for nine days the quantity of water one can hold in the band and fasting for three days. But compare the e]q>lanation given in the next chter.

अध्याय २५१

श्लोक 4

चतुष्पाद्व्यवहाराणामुत्तरः पूर्वसाधकः ।तत्र सत्ये स्थितो धर्मो व्यवहारस्तु साक्षिषु

catuṣpādvyavahārāṇāmuttaraḥ pūrvasādhakaḥ / tatra satye sthito dharmo vyavahārastu sākṣiṣu

हिन्दी अर्थ

हो, उसे भी थोड़ा-बहुत धन देकर विभाजनका कार्य पूर्ण करना चाहिए। पिताके द्वारा दिया हुआ न्यूनाधिक भाग, यदि धर्मसम्मत है, तो वह पितृकृत होनेसे निवृत्त नहीं हो सकता, ऐसा

English

Fasting for twelve days.

अध्याय २५१

श्लोक 5

१ वर्मिणन्त्विति घ॥ , ञ॥ च :प् ४०७ चरित्रं सङ्ग्रहे पुंसां राजाज्ञायान्तु शासनं ।सामाभ्युपायसाध्यत्वाच्चतुःसाधन उच्यते

1 varmiṇantviti gha.. , ña.. ca :p 407 caritraṃ saṅgrahe puṃsāṃ rājājñāyāntu śāsanaṃ / sāmābhyupāyasādhyatvāccatuḥsādhana ucyate

हिन्दी अर्थ

स्मृतिकारोंका मत है। माता-पिताको मृत्युके पश्चात् पुत्र पिताके धन और ऋणको बराबर- बराबर बाँट लें । माताद्वारा लिये गये ऋणको चुकानेके बाद बचा हुआ मातृधन पुत्रियाँ आपसमें बाँट लें'। उनके अभावमें पुत्र आदि उस धनका विभाग कर लें। पैतृक धनको हानि न पहुँचाकर जो धन स्वयं उपार्जित किया गया हो, मित्रसे

English

A woman in her courses touched by another woman in her courses belonging to the same caste no doubt gets purified by bathing that day itself.

अध्याय २५१

श्लोक 6

चतुर्णामाश्रमाणाञ्च रक्षणात्स चतुर्हितः ।कर्तारं साक्षिणश् चैव सत्यान्राजानमेव च

caturṇāmāśramāṇāñca rakṣaṇātsa caturhitaḥ / kartāraṃ sākṣiṇaś caiva satyānrājānameva ca

हिन्दी अर्थ

मिला हो और विवाहमें प्राप्त हुआ हो, भाई आदि दायाद उसके अधिकारी नहीं होते। यदि सब भाइयोंने सम्मिलित रहकर धनको वृद्धि की हो तो उस धनमें सबका समान भाग माना

English

A woman in her courses having been touched by a

अध्याय २५१

श्लोक 7

व्याप्नोति पादगो यस्माच्चतुर्व्यापी ततः स्मृतः ।धर्मस्यार्थस्य यशसो लोकपङ्क्तेस्तथैव च

vyāpnoti pādago yasmāccaturvyāpī tataḥ smṛtaḥ / dharmasyārthasya yaśaso lokapaṅktestathaiva ca

हिन्दी अर्थ

(यहाँतक पैतृक सम्पत्तिमें पुत्रोंका विभाग किस प्रकार हो, यह बतलाया गया। अब पितामहके धनमें पौत्रोंका विभाग कैसे हो, इस विषयमें विशेष बात बताते हैं-) यद्यपि पितामहके धनमें पौत्रोंका पुत्रोंके समान जन्मसे ही स्वत्व है, तथापि यदि वे पौत्र अनेक पितावाले हैं तो उनके पिताओंको द्वार बनाकर ही पितामहके द्रव्यका विभाजन होगा। सारांश यह कि यदि संयुक्त

English

Drinking milk, ghee or water heated once every dtreedays.

अध्याय २५१

श्लोक 8

चतुर्णाङ्करणादेष चतुष्कारी प्रकीर्तितः ।राजा सपुरुषः सभ्याः शास्त्रं गणकलेखकौ

caturṇāṅkaraṇādeṣa catuṣkārī prakīrtitaḥ / rājā sapuruṣaḥ sabhyāḥ śāstraṃ gaṇakalekhakau

हिन्दी अर्थ

परिवारमें रहते हुए ही अनेक भाई अनेक पुत्रोंको उत्पन्न करके परलोकवासी हो गये और उनमेंसे एकके दो, दूसरेके तीन और तीसरेके चार पुत्र हों, तो उन पौत्रोंकी संख्याके अनुसार पितामहको

English

A man having discharged urine passing through a road and drinking water forgetfully becomes pure after fasting a day and night and by taking the five products got from a cow.

अध्याय २५१

श्लोक 9

हिरण्यमग्निरुदकमष्टाङ्गः समुदाहृतः ।कामात् क्रोधाच्च लोभाच्च त्रिभ्यो यस्मात् प्रवर्तते

hiraṇyamagnirudakamaṣṭāṅgaḥ samudāhṛtaḥ / kāmāt krodhācca lobhācca tribhyo yasmāt pravartate

हिन्दी अर्थ

सम्पत्तिका बँटवारा नहीं होगा, अपितु उन पौत्रोंके पिताओंकी संख्याके अनुसार होगा। जिसके दो पुत्र हैं, उसे अपने पिताका एक अंश प्राप्त है, जिसके तीन पुत्र हैं, उसे भी अपने पिताका एक अंश प्राप्त होगा और जिसे चार हैं, उसे भी अपने पिताका एक ही अंश मिलेगा। पितामहद्वारा अर्जित भूमि, निबन्ध और द्रव्यमें पिता और पुत्र दोनोंका समान स्वामित्व है। धनका विभाग होनेके

English

A brahmin having discharged urine and eaten for¬ getfully without having cleansed himself becomes pure after drinking barley (water) for three nights.

अध्याय २५१

श्लोक 10

त्रियोनिः कीर्त्यते तेन त्रयमेतद्विवादकृत् ।द्व्यभियोगस्तु विज्ञेयः शङ्कातत्त्वाभियोगतः

triyoniḥ kīrtyate tena trayametadvivādakṛt / dvyabhiyogastu vijñeyaḥ śaṅkātattvābhiyogataḥ

हिन्दी अर्थ

बाद भी सवर्णा स्त्रीमें उत्पन्न हुआ पुत्र विभागका अधिकारी होता है। अथवा आय और व्ययका संतुलन करनेके बाद दृश्य धनमें उसका विभाग होता है। पिता-पितामह आदिके क्रमसे आया

English

One whose face comes into contact with the sandal or impure thing, the means of purification for him are the earth, cow-dung or the five things got from a cow.

अध्याय २५१

श्लोक 11

शङ्काषड्भिस्तु संसर्गात्तत्त्वषोढादिदर्शणात् ।पक्षद्वयाभिसम्बन्धाद्द्विद्वारः समुदाहृतः

śaṅkāṣaḍbhistu saṃsargāttattvaṣoḍhādidarśaṇāt / pakṣadvayābhisambandhāddvidvāraḥ samudāhṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

हुआ जो द्रव्य दूसरोंने हर लिया हो और १. पिताके द्वारा स्वयं उपार्जित किया हुआ जो धन है, उसका बँटवारा वह अपनी रुचिके अनुसार कर सकता है। जिस पुत्रपर अधिक संतुष्ट हो, उसे वह अधिक दे सकता है और जिसके व्यवहारसे उसको संतोष न हो, उसे कम भी दे सकता है। परंतु जो पिता-पितामहोंकी परम्परासे आया हुआ धन है, उसमें विषम विभाजन नहीं चल सकता। उसमें वह सब पुत्रोको समांशभागी ही बनावे।

English

A brahmin who had shaved or sold or wears blue colour¬ ed cloth etc. for the purpose of austerity becomes pure by (doing) three krcchras.

अध्याय २५१

श्लोक 12

पूर्ववादस्तयोः पक्षः प्रतिपक्षस्त्वनन्तरः ।भूतच्छलानुसारित्वाद्द्विगतिः समुदाहृता

pūrvavādastayoḥ pakṣaḥ pratipakṣastvanantaraḥ / bhūtacchalānusāritvāddvigatiḥ samudāhṛtā

हिन्दी अर्थ

२. यद्यपि शास्त्रमें पैतृकधनका विषम-विभाजन भी मिलता है, तथापि वह ईर्ष्या और कलहका मूल होनेके कारण लोकदिद्विष्ट है; अतः व्यवहारमें लानेयोग्य नहीं है; इसलिये सम-विभाजन ही सर्वसम्मत है।

English

A woman in her courses having been touched by a low caste or a cantata becomes pure on the fourth day. She has to observe (a vow for) three nights.

अध्याय २५१

श्लोक 13

ऋणन्देयमदेयञ्च येन यत्र यथा च यत् ।दानग्रहणधर्मश् च ऋणादानमिति स्मृतम्

ṛṇandeyamadeyañca yena yatra yathā ca yat / dānagrahaṇadharmaś ca ṛṇādānamiti smṛtam

हिन्दी अर्थ

३. माताका ऋण भी पुत्र ही मातृधनसे चुका दें, पत्रियाँ नहीं। ऋण चुकानेसे अवशिष्ट धन पुत्रियोंमें बँट जाना चाहिए। असमर्थतावश पिता आदिने उसका उद्धार नहीं किया हो, उसे पुत्रोंमेंसे एक कोई भी पुत्र अन्य बन्धुओंकी अनुमति लेकर यदि अपने प्रयाससे प्राप्त कर ले तो वह उस धनको स्वयं ले ले,

English

One who has touched a canddla or Svapaca or the dis¬ charge from a delivered woman or a dead body or a person who has touched it (dead body) becomes pure immediately after bathing.

अध्याय २५१

श्लोक 14

स्वद्रव्यं यत्र विश्रम्भान्निक्षिपत्यविशङ्कितः ।निक्षेपन्नाम तत् प्रोक्तं व्यवहारपदम्बुधैः

svadravyaṃ yatra viśrambhānnikṣipatyaviśaṅkitaḥ / nikṣepannāma tat proktaṃ vyavahārapadambudhaiḥ

हिन्दी अर्थ

अन्य दायादोंको न बाँटे। परंतु खेतका उद्धार करनेपर उद्धारकर्ता उसका चौथाई अंश स्वयं ले, शेष भाग सब भाइयोंको बराबर-बराबर बाँट दे। इसी तरह विद्यासे (शास्त्रोंको पढ़ने-पढ़ाने या

English

A kind of simple expiation.

अध्याय २५१

श्लोक 15

वणिक्प्रभृतयो यत्र कर्म सम्भूय कुर्वते ।तत्सम्भूयसमुप्त्यानं व्यवहारपदं विदुः

vaṇikprabhṛtayo yatra karma sambhūya kurvate / tatsambhūyasamuptyānaṃ vyavahārapadaṃ viduḥ

हिन्दी अर्थ

उसकी व्याख्या करनेसे) जो धन प्राप्त हो, उसको भी दायादोंमें न बाँटे। माता-पिता अपनी जो वस्तु जिसे दे दें, वह उसीका धन होगा। यदि पिताके मरनेपर पुत्रगण पैतृक धनका विभाजन करें तो माता भी पुत्रोंके समान भागकी अधिकारिणी होती है। विभाजनके समय जिन भाइयोंके विवाह आदि संस्कार न हुए हों, उनके संस्कार वे भाई, जिनके संस्कार पहले हो चुके हैं, संयुक्त धनसे

English

See note 2 on

अध्याय २५१

श्लोक 16

दत्त्वा द्रव्यञ्च सम्यग्यः पुनरादातुमिच्छति ।दत्त्वाप्रदानिकं नाम तद्विवादपदं स्मृतं

dattvā dravyañca samyagyaḥ punarādātumicchati / dattvāpradānikaṃ nāma tadvivādapadaṃ smṛtaṃ

हिन्दी अर्थ

करें। अविवाहिता बहिनोंके भी विवाह-संस्कार सब भाई अपने भागका चतुर्थांश देकर करें। ब्राह्मणसे ब्राह्मणी आदि विभिन्न वर्णोकी स्त्रियोंमें उत्पन्न हुए पुत्र वर्णक्रमसे चार, तीन, दो और

English

Rite performed immediately after the birth of a child.

अध्याय २५१

श्लोक 17

अभ्युपेत्य च शुश्रूषां यस्तां न प्रतिपद्यते ।अशुश्रूषाभ्युपेत्यैतद्विवादपदमुच्यते

abhyupetya ca śuśrūṣāṃ yastāṃ na pratipadyate / aśuśrūṣābhyupetyaitadvivādapadamucyate

हिन्दी अर्थ

एक भाग प्राप्त करें। इसी प्रकार क्षत्रियसे क्षत्रिया आदिमें उत्पन्न तीन, दो एवं एक भाग और वैश्यसे वैश्यजातीय एवं शूद्रजातीय स्त्रीमें उत्पन्न पुत्र क्रमशः दो और एक अंशके अधिकारी होते हैं । धनविभागके पश्चात् जो धन भाइयोंद्वारा एक- दूसरेसे अपहत किया गया दृष्टिगोचर हो, उसे सब भाई पुनः समान अंशोंमें विभाजित कर लें, यह शास्त्रीय मर्यादा है। पुत्रहीन पुरुषके द्वारा

English

I shall describe certain subtle expiations which are highly purificatory. One's sins would get destroyed by the repe¬ tition of the purusasuktdS for a month.

अध्याय २५१

श्लोक 18

भृत्यानां वेतनस्योक्तादानादानविधिक्रिया ।वेतनस्यानपाकर्म तद्विवादपदं स्मृतम्

bhṛtyānāṃ vetanasyoktādānādānavidhikriyā / vetanasyānapākarma tadvivādapadaṃ smṛtam

हिन्दी अर्थ

दूसरेके क्षेत्रमें नियोगकी विधिसे उत्पन्न पुत्र धर्मके अनुसार दोनों पिताओंके धन और पिण्डदानका अधिकारी है

English

By the repetition of the aghamarsana thrice one gets free from all sins. The repetition of the vedic (mantras) such as the (hymns of) vayti,yama and gdyatri and the observance of the vow destroys all sins.

अध्याय २५१

श्लोक 19

निक्षिप्तं वा परद्रव्यं नष्टं लब्ध्वा प्रहृत्य वा ।किक्रीयते परोक्षं यत् स ज्ञेयो ऽस्वामिविक्रयः

nikṣiptaṃ vā paradravyaṃ naṣṭaṃ labdhvā prahṛtya vā / kikrīyate parokṣaṃ yat sa jñeyo 'svāmivikrayaḥ

हिन्दी अर्थ

अपने समान वर्णकी स्त्री जब धर्मविवाहके अनुसार ब्याहकर लायी जाती है तो उसे ' धर्मपत्नी कहते हैं। अपनी धर्मपत्रीसे स्वकीय वीर्यद्वारा उत्पादित पुत्र 'औरस' कहलाता है। यह सब पुत्रॉमें मुख्य है। दूसरा “पुत्रिकापुत्र' है। यह भी औरसके ही समान है। अपनी स्त्रीके गर्भसे किसी सगोत्र या सपिण्ड पुरुषके द्वारा अथवा

English

P.V. X. 90. la.

अध्याय २५१

श्लोक 20

विक्रीय पण्यं मूल्येन क्रेत्रे यच्च न दीयते ।विक्रीयासम्प्रदानन्तद्विवादपदमुच्यते

vikrīya paṇyaṃ mūlyena kretre yacca na dīyate / vikrīyāsampradānantadvivādapadamucyate

हिन्दी अर्थ

देवरके द्वारा उत्पन्न पुत्र 'क्षेत्रज' कहलाता है। पतिके घरमें छिपे तौरपर जो सजातीय पुरुषसे उत्पन्न होता है, वह 'गूढ़ज' माना गया है। अविवाहिता कन्यासे उत्पन्न पुत्र कानीन' कहलाता

English

When the minds of men indulge in (coveting) other's wives or other's property or in doing harm (to others) the expiation for that is the extollation (of the god).

अध्याय २५१

श्लोक 21

क्रीत्वा मूल्येन यत्पण्यं क्रेता न बहु मन्यते ।क्रीत्वा मूल्येन यत् पण्यं दुष्क्रीतं मन्यते क्रयी

krītvā mūlyena yatpaṇyaṃ kretā na bahu manyate / krītvā mūlyena yat paṇyaṃ duṣkrītaṃ manyate krayī

हिन्दी अर्थ

है। बह नानाका पुत्र माना गया है। जो अक्षतयोनि अथवा क्षतयोनिकी विधवासे सजातीय पुरुषद्वारा उत्पन्न पुत्र है, उसको ' पौनर्भव' कहते हैं। जिसे माता अथवा पिता किसीको गोद दे दें, वह 'दत्तक' पुत्र कहा गया है। जिसे किसी माता-

English

Obeisance to that all-pervasive (four times repeated) always. I salute the All-pervasive who resides in the mind, and tliat lord Hari (Vi?iu) who is the sense of my ego.

अध्याय २५१

श्लोक 22

पाषण्डनैगमादीनां स्थितिः समय उच्यते ।समयस्यानपाकर्म तद्विवादपदं स्मृतं

pāṣaṇḍanaigamādīnāṃ sthitiḥ samaya ucyate / samayasyānapākarma tadvivādapadaṃ smṛtaṃ

हिन्दी अर्थ

वह 'क्रीतपुत्र माना गया है। किसीको स्वयं धन आदिका लोभ देकर पुत्र बनाया गया हो तो वह 'कृत्रिम' कहा गया है। जो माता-पितासे रहित बालक “मुझे अपना पुत्र बना लें '--ऐसा कहकर

English

The standing arrangement of heretics, guilds and the like is called samaya (agreement); breaking an agreement is remembered as a ground of dispute.

अध्याय २५१

श्लोक 23

सेतुकेदारमर्यादाविकृष्टाकृष्टनिश् चयाः ।क्षेत्राधिकारे यत्र स्युर्विवादः क्षेत्रजस्तु सः

setukedāramaryādāvikṛṣṭākṛṣṭaniś cayāḥ / kṣetrādhikāre yatra syurvivādaḥ kṣetrajastu saḥ

हिन्दी अर्थ

स्वयं आत्मसमर्पण करता है, वह ' दत्तात्मा' पुत्र है। जो विवाहसे पूर्व ही गर्भमै आ गया और गर्भवतीके विवाह होनेपर उसके साथ परिणीत हो गया, बह 'सहोढज' पुत्र माना गया है । जिसे माता-पिताने त्याग दिया हो, वह समान वर्णका पुत्र यदि किसीने ले लिया तो वह उसका ' अपविद्ध पुत्र' माना गया है। ये जो पूर्वकथित बारह पुत्र हैं, इनमेंसे पूर्व-पूर्वके अभावमें उत्तर-उत्तर

English

Where there are decisions about dams, fields, boundaries, ploughed and unploughed land in questions of field ownership, that is a field-born dispute.

अध्याय २५१

श्लोक 24

वैवाहिको विधिः स्त्रीनां यत्र पुंसाञ्च कीर्त्यते ।स्त्रीपुंसयोगसंज्ञन्तु तद्विवादपदं स्मृतम्

vaivāhiko vidhiḥ strīnāṃ yatra puṃsāñca kīrtyate / strīpuṃsayogasaṃjñantu tadvivādapadaṃ smṛtam

हिन्दी अर्थ

पिण्डदाता और धनांशभागी होता है। मैंने सजातीय पुत्रॉंमें धन-विभागकी यह विधि बतलायी है

English

The marriage law that is declared for women and men, called the union of woman and man, is remembered as a ground of dispute.

अध्याय २५१

श्लोक 25

विभागोर्थस्य पैत्रस्य पुत्रैर् यस्तु प्रकल्प्यते ।दायमागमिति प्रोक्तं तद्विवादपदं बुधैः

vibhāgorthasya paitrasya putrair yastu prakalpyate / dāyamāgamiti proktaṃ tadvivādapadaṃ budhaiḥ

हिन्दी अर्थ

शूद्रके धनविभागकी विशेष विधि शुद्रद्वारा दासीमें उत्पन्न पुत्र भी पिताको इच्छासे धनमें भाग प्राप्त करेगा। पिताको मृत्युके पश्चात् शुद्रकी विवाहिता पत्नीसे उत्पन्न पुत्र अपने पिताके दासीपुत्रको भी भाईकी हैसियतसे आधा भाग दे।

English

The division of paternal property made by sons is called inheritance, a ground of dispute according to the wise.

अध्याय २५१

श्लोक 26

सहसा क्रियते कर्म यत् किञ्चित् बलदर्पितैः ।तत् साहसमिति प्रोक्तं विवादपदमुच्यते

sahasā kriyate karma yat kiñcit baladarpitaiḥ / tat sāhasamiti proktaṃ vivādapadamucyate

हिन्दी अर्थ

यदि शूद्रकी परिणीतासे कोई पुत्र न हो तो वह भ्रातृहीन दासीपुत्र पूरे धनपर अधिकार कर ले; (परंतु यह तभी सम्भव है, जब उसकी परिणीताकी पुत्रियोंके पुत्र न हों। उनके होनेपर तो वह आधा

English

An act done suddenly by those proud of strength is called sahasa (violence), said to be a ground of dispute.

अध्याय २५१

श्लोक 27

देशजातिकुलादीनामाक्रोशत्यङ्गसंयुतम् ।यद्वचः प्रतिकूलार्थं वाक्पारुष्यं तदुच्यते

deśajātikulādīnāmākrośatyaṅgasaṃyutam / yadvacaḥ pratikūlārthaṃ vākpāruṣyaṃ taducyate

हिन्दी अर्थ

भाग ही पा सकता है।) जिसके पूर्वोक्त बारह प्रकारके पुत्रोंमेंसे कोई नहीं है, ऐसा पुत्रहीन पुरुष यदि स्वर्गवासी हो जाय तो उसके धनके शिष्य तथा सजातीय सहपाठी होते हैं-इनमें पूर्व-पूर्वके अभावमें उत्तरोत्तर धनके भागी होते हैं। सब वर्णोके लिये धनके विभाजनको यही विधि शास्त्रविहित है

English

Abusive speech of an adverse meaning, concerning country, caste, family and the like, accompanied by limbs, is called vakparushya (verbal assault).

अध्याय २५१

श्लोक 28

परगात्रेष्वभिद्रेही हस्तपादायुधादिभिः ।अग्न्यादिभिश् चोपघातैर्(?) दण्डपारुष्यमुच्यते

paragātreṣvabhidrehī hastapādāyudhādibhiḥ / agnyādibhiś copaghātair(?) daṇḍapāruṣyamucyate

हिन्दी अर्थ

वानप्रस्थ, संन्यासी और नैष्ठिक ब्रह्मचारियोंके धनके अधिकारी क्रमशः एक आश्रममें रहनेवाला धर्मभ्राता, श्रेष्ठ शिष्य और आचार्यः होते हैं। बँटे हुए धनको फिर मिला दिया जाय तो वह ' संसृष्ट '

English

Injury to others' bodies with hands, feet, weapons and the like, with fire and the like, is called dandaparushya (physical assault).

अध्याय २५१

श्लोक 29

अक्षवज्जशलाकाद्यैर् दैवतं द्यूतमुच्यते ।पञ्चक्रिडावयोभिश् च प्राणिद्युतसमाह्वयः

akṣavajjaśalākādyair daivataṃ dyūtamucyate / pañcakriḍāvayobhiś ca prāṇidyutasamāhvayaḥ

हिन्दी अर्थ

कहलाता है। ऐसा संसृष्ट धन जिन लोगोंके पास है, वे सभी 'संसृष्टी' कहे गये हैं। ' संसृष्टत्व- सम्बन्ध' जिस किसीके साथ नहीं हो सकता, किंतु पिता, भाई अथवा पितृव्य (चाचा)-के साथ ही हो सकता है। यदि कोई संसृष्टी मर जाय तो उसके हिस्सेका धन दूसरा संसृष्टी पुरुष मृत-संसृष्टीकी मृत्युके बाद उसको भार्यासे उत्पन्न हुए पुत्रको दे दे। पुत्र न हो तो वह संसृष्टी स्वयं

English

Gambling with dice, rods and the like is called dyuta; with five games and living beings, it is a wager and challenge.

अध्याय २५१

श्लोक 30

प्रकीर्णकः पुनर्ज्ञेयो व्यवहारो निराश्रयः ।राज्ञामाज्ञाप्रतोघातस्तत्कर्माकरणन्तथा

prakīrṇakaḥ punarjñeyo vyavahāro nirāśrayaḥ / rājñāmājñāpratoghātastatkarmākaraṇantathā

हिन्दी अर्थ

ही ले ले। पत्नी आदिको वह धन नहीं मिल

English

Miscellaneous is again known as the unsupported dispute: transgressing the king's command and not doing that act.

अध्याय २५१

श्लोक 31

व्यवहारो ऽष्टादशपदस्तेषां भेदो ऽथ वै शतम् ।क्रियाभेदान्मनुष्यानां शतशाखो निगद्यते

vyavahāro 'ṣṭādaśapadasteṣāṃ bhedo 'tha vai śatam / kriyābhedānmanuṣyānāṃ śataśākho nigadyate

हिन्दी अर्थ

सहोदर संसृष्टी उसकी मृत्युके पश्चात् पैदा हुए पुत्रको उसका अंश दे दे। यदि पुत्र न हो तो वह स्वयं ही उस संसृष्टीके अंशको ले ले; असहोदर भाई संसृष्टी होनेपर भी उसे नहीं ले सकता। अन्य माताके पेटसे पैदा हुआ सौतेला भाई भी यदि संसृष्टी हो तो वह संसूष्टी भ्राताके धनको ले सकता है। यदि वह असंसृष्टी है तो उस धनको नहीं ले सकता। अथवा असंसृष्टी भी उस

English

The legal process has eighteen grounds; their subdivisions are a hundred; by differences of men's actions it is said to have a hundred branches.

अध्याय २५१

श्लोक 32

व्यवहारान्नृपः पश्येज् ज्ञानिविप्रैर् अकोपनः ।शत्रुमित्रसमाः सभ्या अलोभाः श्रुतिवेदिनः

vyavahārānnṛpaḥ paśyej jñāniviprair akopanaḥ / śatrumitrasamāḥ sabhyā alobhāḥ śrutivedinaḥ

हिन्दी अर्थ

संसृष्टीके धनको ले सकता है, जबकि वह संसृष्टी उस असंसृष्टीका सहोदर भाई रहा हो॥ २४--२६॥

English

The king should see cases with learned Brahmins, without anger; assessors equal to enemy and friend, free from greed, learned in the Veda.

अध्याय २५१

श्लोक 33

अपश्यता(१) कार्यवशात् सभ्यैर् विप्रं नियोजयेत् ।रागाल्लोभाद्भयाद्वापि स्मृत्यपेतादिकारिणः

apaśyatā(1) kāryavaśāt sabhyair vipraṃ niyojayet / rāgāllobhādbhayādvāpi smṛtyapetādikāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

नपुंसक, पतित, उसका पुत्र, पङ्गु, उन्मत्त, जड, अन्ध, असाध्य रोगसे ग्रस्त और आश्रमान्तरमें गये हुए पुरुष केवल भरण-पोषण पानेके योग्य हैं। इन्हें हिस्सा बँटानेका अधिकार नहीं है। इन लोगोंके औरस एवं क्षेत्रज पुत्र क्लीबत्व आदि दोषोंसे रहित होनेपर भाग लेनेके अधिकारी होंगे । इनकी पुत्रियोंका भी तबतक भरण-पोषण करना चाहिए, जबतक कि वे पतिके अधीन न कर दी

English

If he does not see because of business, he should appoint a Brahmin with the assessors. Those who act contrary to the law from passion, greed or fear,

अध्याय २५१

श्लोक 34

सभ्याः पृथक् पृथग् दण्ड्या विवादाद्व्दिगुणो दमः ।स्मृत्याचारएष्व्यपेतेन मार्गेण धर्षितः परैः

sabhyāḥ pṛthak pṛthag daṇḍyā vivādādvdiguṇo damaḥ / smṛtyācāraeṣvyapetena mārgeṇa dharṣitaḥ paraiḥ

हिन्दी अर्थ

जायँँ। इन क्लीब, पतित आदिको पुत्रहीन सदाचारिणी स्त्रियोंका भी भरण-पोषण करना चाहिए। यदि वे व्यभिचारिणी या प्रतिकूल आचरण करनेवाली हों तो उनको घरसे निर्वासित कर

English

the assessors should be fined separately, double the dispute. One who has been overpowered by others by a path contrary to law and custom,

अध्याय २५१

श्लोक 35

आवेदयति यद्राज्ञे व्यवहारपदं हि तत् ।प्रत्यर्थिनो ऽग्रतो लेख्यं यथा वेदितमर्थिना

āvedayati yadrājñe vyavahārapadaṃ hi tat / pratyarthino 'grato lekhyaṃ yathā veditamarthinā

हिन्दी अर्थ

जो विवाहकालमें अग्निके समीप मामा आदिको ओरसे मिला हो तथा जो आधिवेदनिक' आदि धन हो, वह '“स्त्रीधन' कहा गया है। जिसे १. बन्धु-बान्धव तीन प्रकारके हैं--अपने बन्धु-बान्धव, पिताके बन्धु-बान्धव तथा माताके बन्धु-बान्धव। इनमें यही क्रम अभीष्ट

English

what he reports to the king is the ground for legal proceedings. In front of the defendant it should be written as the plaintiff reported:

अध्याय २५१

श्लोक 36

समामासतदर्धाहर्नामजात्यादिचिह्नितम् ।श्रुतार्थस्योत्तरं लेख्यं पूर्वावेदकसन्निधौ

samāmāsatadardhāharnāmajātyādicihnitam / śrutārthasyottaraṃ lekhyaṃ pūrvāvedakasannidhau

हिन्दी अर्थ

है। अर्थात् पूर्वके अभावमें उत्तरोत्तर धनके भागी होते हैं।

English

marked with year, month, half-month, day, name, caste and the like. The answer to the heard matter should be written in the presence of the first complainant.

अध्याय २५१

श्लोक 37

तप्तो ऽर्थी लेखयेत्सद्यः प्रतिज्ञातार्थसाधनम् ।तत्सिद्धौ सिद्धमाप्नोति विपरीतमतो ऽन्यथा

tapto 'rthī lekhayetsadyaḥ pratijñātārthasādhanam / tatsiddhau siddhamāpnoti viparītamato 'nyathā

हिन्दी अर्थ

२. यहाँ श्लोकमें आचार्य, शिष्य और धर्मभ्राता-इस क्रमसे उल्लेख है, परंतु मिताक्षराकारने यह निर्णय दिया है कि यहाँ विलोम-क्रम लेना चाहिए।

English

The plaintiff, pressed, should have the means of proving the claimed matter recorded at once; if proved, he obtains what is proved; the reverse otherwise.

अध्याय २५१

श्लोक 38

चतुष्पाद्व्यवहारोयं विवादेषूपदर्शितः ।१ अपश्यता इत्य् अयं पाठो न साधुः :प् ४१० अभियोगमनिस्तीर्य नैनं प्रत्यभियोजयेत्

catuṣpādvyavahāroyaṃ vivādeṣūpadarśitaḥ / 1 apaśyatā ity ayaṃ pāṭho na sādhuḥ :p 410 abhiyogamanistīrya nainaṃ pratyabhiyojayet

हिन्दी अर्थ

३. जिसके विवाहके बाद पति दूसरा विवाह करे, वह स्त्री 'अधिविन्ना' कहलाती है । ऐसे विवाहके लिये उससे आज्ञा ली जाती है और इस आज्ञाके निमित्त उसको जो धन दिया जाता है, वह अधिवेदन-निमित्तक' होनेके कारण ' आधिवेदनिक' कहा गया है।

English

This four-footed legal procedure is shown in disputes. Without having crossed the charge one should not counter-charge him;

अध्याय २५१

श्लोक 39

अभियुक्तञ्च नान्येन त्यक्तं विप्रकृतिं नयेत् ।कुर्यात् प्रत्यभियोगन्तु कलहे साहसेषु च

abhiyuktañca nānyena tyaktaṃ viprakṛtiṃ nayet / kuryāt pratyabhiyogantu kalahe sāhaseṣu ca

हिन्दी अर्थ

कन्याकी माताके बन्धु-बान्धवोंने दिया हो, जिसे पिताके बन्धु-बान्धवोंने दिया हो तथा जो वर- पक्षको ओरसे कन्याके लिये शुल्करूपमें मिला हो एवं विवाहके पश्चात् पतिकुलसे जो वधूको भेंट मिला हो, वह सब 'स्त्रीधन' कहा गया है। यदि स्त्री संतानहीना हो-जिसके बेटी, दौहित्री, दौहित्र, पुत्र और पौत्र कोई भी न हों, ऐसी स्त्री यदि दिवंगत हो जाय तो उसके पति आदि

English

and one accused should not be driven into injury by another having abandoned. A counter-charge may be made in quarrels and violent acts.

अध्याय २५१

श्लोक 40

उभयोः प्रतिभूर्ग्राह्यः समर्थः काम्यनिर्णये ।निह्नवे भावितो दद्याद्धनं राज्ञे तु तत्समम्

ubhayoḥ pratibhūrgrāhyaḥ samarthaḥ kāmyanirṇaye / nihnave bhāvito dadyāddhanaṃ rājñe tu tatsamam

हिन्दी अर्थ

बान्धवजन उसका धन ले सकते हैं। ब्राह्म, हैव, आर्ष और प्राजापत्य-इन चार प्रकारके विवाहोंकी विधिसे विवाहित स्त्रियोंके निस्संतान मर जानेपर उनका धन पतिको प्राप्त होता है। यदि वे संतानवती

English

A surety should be taken from both, capable, in the decision of matters of desire. In denial, when proved, he should give wealth equal to that to the king.

अध्याय २५१

श्लोक 41

मिथ्याभियोगाद् द्विगुणमभियोगाद्धनं हरेत् ।साहसस्तेयपारुष्येष्वभिशापात्यये स्त्रियाः

mithyābhiyogād dviguṇamabhiyogāddhanaṃ haret / sāhasasteyapāruṣyeṣvabhiśāpātyaye striyāḥ

हिन्दी अर्थ

रही हों तो उनका धन उनकी पुत्रियोंको प्राप्त होता है और शेष चार गान्धर्व, आसुर, राक्षस तथा पैशाच विवाहकी विधिसे विवाहित होकर मरी हुई संतानहीना स्त्रयोंका धन उनके पिताको जो कन्याका वाग्दान करके कन्यादान नहीं करता, वह राजाके द्वारा दण्डनीय होता है तथा वाग्दानके निमित्त वरने अपने सम्बन्धियों और कन्या-सम्बन्धियोंके स्वागत-सत्कारमें जो धन

English

For a false charge double; for a charge he may take the wealth; in violence, theft and assault, in an accusation or crisis, of a woman,

अध्याय २५१

श्लोक 42

विचारयेत्सद्यः एव कालो ऽन्यत्रेच्छया स्मृतः ।देशाद्देशान्तरं याति सृक्कणी परिलेढि च

vicārayetsadyaḥ eva kālo 'nyatrecchayā smṛtaḥ / deśāddeśāntaraṃ yāti sṛkkaṇī parileḍhi ca

हिन्दी अर्थ

खर्च किया हो, वह सब सूदसहित कन्यादाता

English

one should judge at once; time is remembered otherwise by will. He goes from place to place, licks the corners of his mouth,

अध्याय २५१

श्लोक 43

ललाटं स्विद्यते चास्य मुखवैवर्ण्यमेव च ।स्वभावाद्विकृतं गच्छेन्मनोवाक्कायकर्मभिः

lalāṭaṃ svidyate cāsya mukhavaivarṇyameva ca / svabhāvādvikṛtaṃ gacchenmanovākkāyakarmabhiḥ

हिन्दी अर्थ

वरको लौटावे। यदि वाग्दत्त कन्याकी मृत्यु हो जाय, तो वर अपने और कन्यापक्ष दोनोंके व्ययका परिशोधन करके जो अवशिष्ट व्यय हो, वही कन्यादातासे ले। दुर्िक्षमें, धर्मकार्यमें, रोग या बन्धनसे मुक्ति पानेके लिये यदि पति दूसरा कोई धन प्राप्त न होनेपर स्त्रीधनको ग्रहण करे, तो पुनः उसे लौटानेको बाध्य नहीं है। जिस स्त्रीको श्वशुर अथवा पतिसे स्त्रीधन न प्राप्त हुआ हो,

English

his forehead sweats, and his face turns pale; he goes from his nature, distorted, by deeds of mind, speech and body.

अध्याय २५१

श्लोक 44

अभियोगे ऽथ वा साक्ष्ये वाग्दुष्टः परिकीर्तितः ।सन्दिग्धार्थं स्वतन्त्रो यः साधयेद्यश् च निष्पतेत्

abhiyoge 'tha vā sākṣye vāgduṣṭaḥ parikīrtitaḥ / sandigdhārthaṃ svatantro yaḥ sādhayedyaś ca niṣpatet

हिन्दी अर्थ

उस स्त्रीके रहते हुए दूसरा विवाह करनेपर पति 'आधिवेदनिक'के समान धन दे। अर्थात् ' अधिवेदन” (द्वितीय विवाह) -में जितना धन खर्च होता हो, उतना ही धन उसे भी दिया जाय। यदि

English

In a charge or in testimony he is called wicked of speech. One who, independent, establishes a doubtful matter and who flees,

अध्याय २५१

श्लोक 45

न चाहूतो वदेत् किञ्चिद्धनी दण्ड्यश् च स स्मृतः ।साक्षिषूभयतः सत्सु साक्षिणः पूर्ववादिनः

na cāhūto vadet kiñciddhanī daṇḍyaś ca sa smṛtaḥ / sākṣiṣūbhayataḥ satsu sākṣiṇaḥ pūrvavādinaḥ

हिन्दी अर्थ

उसे पति और श्वशुरकी ओरसे स्त्रीधन प्राप्त हुआ हो, तब आधिवेदनिक धनका आधा भाग ही दिया जाय। विभागका अपलाप होनेपर यदि संदेह उपस्थित हो तो कुटुम्बीजनों, पिताके बन्धु- बान्धवों, माताके बन्धु-बान्धवों, पूर्वोक्त लक्षणवाले

English

and who, not summoned, says anything, is remembered as a wealthy fine-liable man. When witnesses are present on both sides, the earlier speakers are witnesses;

अध्याय २५१

श्लोक 46

पूर्वपक्षे ऽधरीभूते भवन्त्युत्तरवादिनः ।सगणश्चेद्विवादः स्यात्तत्र हीनन्तु दापयेत्

pūrvapakṣe 'dharībhūte bhavantyuttaravādinaḥ / sagaṇaścedvivādaḥ syāttatra hīnantu dāpayet

हिन्दी अर्थ

साक्षियों तथा अभिलेख -विभागपत्रके सहयोगसे विभागका निर्णय जानना चाहिए। इसी प्रकार यौतक (दहेजमें मिले हुए धन) तथा पृथक् किये गये गृह और क्षेत्र आदिके आधारपर भी विभागका

English

if the plaintiff's case becomes lower, they become the later speakers. If there is a dispute with a group, there the deficient one should be made to pay;

अध्याय २५१

श्लोक 47

दत्तं पणं वसञ्चैव धनिनो धनमेव च ।छलन्निरस्य दूतेन व्यवहारान्नयेन्नृपः

dattaṃ paṇaṃ vasañcaiva dhanino dhanameva ca / chalannirasya dūtena vyavahārānnayennṛpaḥ

हिन्दी अर्थ

निर्णय जाना जा सकता है इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें 'दाय-विभागका कथन” नामक दो सौ छप्पनवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

the stake given and the stake, and the wealth of the wealthy man — the king should lead the proceedings by dismissing the deceit through a messenger.

अध्याय २५१

श्लोक 48

भूतमप्यर्थमप्यस्तं हीयते व्यवहारतः ।निह्नुते निखिलानेकमेकदेशविभावितम्

bhūtamapyarthamapyastaṃ hīyate vyavahārataḥ / nihnute nikhilānekamekadeśavibhāvitam

हिन्दी अर्थ

तथा झूतसमाह्ृयका विचार

English

A matter even real and even stated is lost by process. One who denies all but a single thing is shown in one part;

अध्याय २५१

श्लोक 49

दाप्यः सर्वान्नृपेणार्थान्न ग्राह्यस्त्वनिवेदितः ।स्मृत्योर्विरोधे न्यायस्तु वल्लवान् व्यवहारतः

dāpyaḥ sarvānnṛpeṇārthānna grāhyastvaniveditaḥ / smṛtyorvirodhe nyāyastu vallavān vyavahārataḥ

हिन्दी अर्थ

दो गाँवोंसे सम्बन्ध रखनेवाले खेतकी सीमाके विषयमें विवाद उपस्थित होनेपर तथा एक ग्रामके अन्तर्वर्ती खेतको सीमाका झगड़ा खड़ा होनेपर सामन्त (सब ओर उस खेतसे सटकर रहनेवाले), स्थविर (वृद्ध) आदि, गोप (गायके

English

all matters should be made to be paid by the king; one not reported is not to be taken. When two texts conflict, the rule is that of strength by procedure;

अध्याय २५१

श्लोक 50

अर्थशास्त्राद्धि बलवद्धर्मशास्त्रमिति स्थितिः(१) ।प्रमाणं लिखितं भुक्तिः साक्षिणश्चेति किर्तितम्

arthaśāstrāddhi balavaddharmaśāstramiti sthitiḥ(1) / pramāṇaṃ likhitaṃ bhuktiḥ sākṣiṇaśceti kirtitam

हिन्दी अर्थ

कोयले, धानकी भूसी तथा बरगद आदिके वृक्षोंद्वारा सीमाका निश्चयः करें। वह सीमा कैसी हो, इस प्रश्नके उत्तरमें कहते हैं-वह सीमा सेतु (पुल), वल्मीक (बाँबी), चैत्य (पत्थरके चबूतरे या

English

it is established that dharma-shastra is stronger than artha-shastra. Proof is declared: writing, possession, and witnesses;

अध्याय २५१

श्लोक 51

एषामन्यतमाभावे दिव्यान्यतममुच्यते ।सर्वेष्वेव विवादेषु बलवत्युत्तरा क्रिया

eṣāmanyatamābhāve divyānyatamamucyate / sarveṣveva vivādeṣu balavatyuttarā kriyā

हिन्दी अर्थ

देवस्थान), बाँस और बालू आदिसे उपलक्षित होनी चाहिए' अथवा दस मनुष्य लाल फूलोंकी माला और लाल वस्त्र धारण करके, सिरपर मिट्टी रखकर सीमाका निर्णय करें। सीमा-विवादमें सामन्तोंके असत्य-भाषण करनेपर राजा सबको अलग-अलग

English

in absence of any of these, one of the ordeals is said. In all disputes the later act is stronger;

अध्याय २५१

श्लोक 52

आधौ प्रतिग्रहे क्रीते पूर्वा तु बलवत्तरा ।पश्यतो ब्रुवतो भूमेर्हानिर्विंशतिवार्षिकी

ādhau pratigrahe krīte pūrvā tu balavattarā / paśyato bruvato bhūmerhānirviṃśativārṣikī

हिन्दी अर्थ

मध्यम साहसका दण्ड दे। सीमाका ज्ञान करानेवाले चिह्नोंके अभावमें राजा ही सीमाका प्रवर्तक होता है। आराम (बाग), आयतन (मन्दिर या खलिहान),

English

in pledge, acceptance and purchase the earlier is stronger. For the owner who sees and speaks, the loss of land is of twenty years;

अध्याय २५१

श्लोक 53

परेण भुज्यमाना या धनस्य दशवार्षिकी ।आधिसौमोपनिःक्षेपजडबालधनैर् विना

pareṇa bhujyamānā yā dhanasya daśavārṣikī / ādhisaumopaniḥkṣepajaḍabāladhanair vinā

हिन्दी अर्थ

और वर्षाके जलको प्रवाहित करनेवाले नाले आदिकी सीमाके निर्णयमें भी यही विधि जाननी चाहिए। मर्यादाका भेदन, सीमाका उल्लङ्घन एवं उत्तम और मध्यम साहसका दण्ड दे। यदि सार्वजनिक सेतु (पुल या बाँध) और छोटे क्षेत्रमें

English

what is enjoyed by another, of wealth, of ten years — except pledge, boundary, deposit, and the wealth of fools and children;

अध्याय २५१

श्लोक 54

तथोपनिधिराजस्त्रीश्रोत्रियाणां धनैर् अपि ।आध्यादीनां विहर्तारं धनिने दापयेद्धनं

tathopanidhirājastrīśrotriyāṇāṃ dhanair api / ādhyādīnāṃ vihartāraṃ dhanine dāpayeddhanaṃ

हिन्दी अर्थ

वह दूसरेकी कुछ भूमि अपनी सीमामें ले रहा हो, परंतु उससे हानि तो बहुत कम हो और बहुत- से लोगोंकी अधिक भलाई हो रही हो तो उसके निर्माणमें रुकावट नहीं डालनी चाहिए। जो क्षेत्रके

English

and also the wealth of deposits, the king, women and Shrotriyas. One who withholds pledges and the like should be made to pay wealth to the owner,

अध्याय २५१

श्लोक 55

दण्ड्यं च तत्समं राज्ञे शक्त्यपेक्ष्यमथापि वा ।आगमोप्यधिको भुक्तिं विना पूर्वक्रमागतां

daṇḍyaṃ ca tatsamaṃ rājñe śaktyapekṣyamathāpi vā / āgamopyadhiko bhuktiṃ vinā pūrvakramāgatāṃ

हिन्दी अर्थ

स्वामीको सूचना दिये बिना उसके क्षेत्रमें सेतुका निर्माण करता है, वह उस सेतुसे प्राप्त फलका उपभोग स्वयं नहीं कर सकता, क्षेत्रका स्वामी ही उसके फलका भोगी-भागी होगा और उसके अभावमें राजाका उसपर अधिकार होगा। जो कृषक किसीके खेतमें एक बार हल चलाकर भी उसमें स्वयं खेती न करे और दूसरेसे भी न कराये, राजा उससे क्षेत्रस्वामीको कृषिका सम्भावित फल दिलाये

English

and a fine equal to the king, or according to ability. Title is greater than possession received by earlier succession;

अध्याय २५१

श्लोक 56

आगमोपि बलन्नैव भुक्तिः स्तोकापि यत्र न ।आगमेन विशुद्धेन भोगो याति प्रमाणताम्

āgamopi balannaiva bhuktiḥ stokāpi yatra na / āgamena viśuddhena bhogo yāti pramāṇatām

हिन्दी अर्थ

और खेतको दूसरे किसानसे जुतवाये

English

but title too is not strong where there is not even a little possession. With pure title, enjoyment reaches proof;

अध्याय २५१

श्लोक 57

अविशुद्धागमो भोगः प्रामाण्यं नाधिगच्छति ।आगमस्तु कृतो येन सो ऽभियुक्तस्तमुद्धरेत्

aviśuddhāgamo bhogaḥ prāmāṇyaṃ nādhigacchati / āgamastu kṛto yena so 'bhiyuktastamuddharet

हिन्दी अर्थ

(अब गाय-भैंस या भेड्-बकरी चरानेवाले क्षेत्रका अपहरण करनेपर राजा क्रमशः अधम, चरवाहे जब किसीके खेत चरा दें तो उन्हें किस

English

enjoyment with impure title does not reach authority. The one who made the title, the accused, should clear him;

अध्याय २५१

श्लोक 58

न तत्सुतस्तत्सुतो वा भुक्तिस्तत्र गरीयसी ।योभियुक्तः परेतः स्यात् तस्य ऋक्थात्तमुद्धरेत्

na tatsutastatsuto vā bhuktistatra garīyasī / yobhiyuktaḥ paretaḥ syāt tasya ṛkthāttamuddharet

हिन्दी अर्थ

१. 'सीमा' कहते हैं-क्षेत्र आदिकी मर्यादाको । वह चार प्रकारकी होती है-जनपद-सीमा, ग्राम-सीमा, क्षेत्र-सीमा और गृह- सीमा। वह यथासम्भव पाँच लक्षणोंसे युक्त होती है, जैसा कि नारदजीने बताया है--' ध्वजिनी”, “मत्स्यिनी', ' नैधानी', ' भयवर्जिता' तथा ' राजशासननीता'। इनमेंसे जो सीमा वृक्ष आदिसे लक्षित या प्रकाशित हो, वह ' ध्वजिनी' कही गयी है। 'मत्स्य' शब्द जलका उपलक्षण है। अतः ' मत्स्यिनी'का अर्थ है-जलवती। वहाँ जलसे वह सीमा उपलक्षित होती है। 'नैधानी' कहते हैं-धानको भूसी

English

not his son or his son's son; there possession is heavier. One accused who has died, from his estate one should clear him;

अध्याय २५१

श्लोक 59

न तत्र कारणं भुक्तिरागमेन विनाकृता ।बलोपाधिविनिर्वृत्तान् व्यवहारान्निवर्तयेत्

na tatra kāraṇaṃ bhuktirāgamena vinākṛtā / balopādhivinirvṛttān vyavahārānnivartayet

हिन्दी अर्थ

या कोयले आदि गाड़कर निश्चित की हुई सीमाको। ' भयवर्जिता' वह सीमा है, जिसे अर्थी और प्रत्यर्थी दोनोंने मिलकर अपनी स्वीकृतिसे निर्धारित किया हो। जहाँ सीमाका ज्ञापक कोई चिह न हो, वहाँ राजाकी इच्छासे जो सीमा निर्मित होती है, उसको ' राजशासननीता' कहते हैं। भूमि-सम्बन्धी विवादके छः हेतु हैं। आधिक्य, न्यूनता, अंशका होना, न होना, अभोगभुक्ति तथा मर्यादा- ये भूमि-विवादके छः कारण हैं, ऐसा कात्यायनका मत है। जैसे एक कहता है कि “मेरी भूमि यहाँ पाँच हाथसे अधिक है' तो दूसरा कहता है, ' अधिक नहीं है '--यह ' आधिक्य'को लेकर विवाद हुआ। इसी तरह यदि एक कहे, “मेरी भूमि यहाँ तीन हाथ है' और दूसरा कहे कि “नहीं, तीन हाथसे कम है', तो यह 'न्यूनता'को लेकर विवाद हुआ। एक कहता है, “मेरे हिस्सेमें इतनी भूमि है और दूसरा कहता है, “यहाँ तुम्हारा हिस्सा ही नहीं है' तो यह अंशविषयक ' अस्तित्व' और 'नास्तित्व'को लेकर विवाद हुआ। एकका आरोप है कि “यह मेरी भूमि है, पहले तुम्हारे उपभोगमें कभी नहीं रही । इस समय तुम बलपूर्वक इसे अपने उपभोगमें ला रहे हो'।

English

there possession without title is not a cause. One should revoke transactions done by force or deceit:

अध्याय २५१

श्लोक 60

स्त्रीनक्तमन्तरागारवहिःशत्रुकृतस् तथा ।मत्तोन्मत्तार्तव्यसनिबालभीतप्रयोजितः

strīnaktamantarāgāravahiḥśatrukṛtas tathā / mattonmattārtavyasanibālabhītaprayojitaḥ

हिन्दी अर्थ

दूसरा कहता है, “नहीं, सदासे या चिरकालसे यह भूमि मेरे अधिकारमें है यह अभोगभुक्ति' विषयक विवाद हुआ। एक कहता है, “यह सीमा है? और दूसरा कहता है, “नहीं, यह है' तो वह 'सीमाविषयक' विवाद हुआ।

English

done by women, at night, inside the house, outside the house, by enemies, and prompted by the drunk, mad, ill, addicted, child or frightened,

अध्याय २५१

श्लोक 61

१ स्मृतिरिति घ॥ , ञ॥ च :प् ४१२ असम्बद्धकृतश् चैव व्यवहारो न सिद्ध्यति ।प्रनष्टाधिशतं देयं नृपेण धनिने धनं

1 smṛtiriti gha.. , ña.. ca :p 412 asambaddhakṛtaś caiva vyavahāro na siddhyati / pranaṣṭādhiśataṃ deyaṃ nṛpeṇa dhanine dhanaṃ

हिन्दी अर्थ

२. सीमाके परिचायक चिह्न दो प्रकारके होने चाहिए-'प्रकाश' और 'अप्रकाश'। बरगद, पीपल, पलाश, सेमल, साखू, ताड, दूधवाले वृक्ष, गुल्म, वेणु, शमी और लताबेलोंसे युक्त स्थल-ये सब “प्रकाश चिह' हैं। पोखरे, कुआँ, बावड़ी, झरने और देवमन्दिर आदि भी प्रकाश-चिहके ही अन्तर्गत हैं। सीमाज्ञानके लिये कुछ छिपे हुए चिह्न भी होने चाहिए। जैसे-पत्थर, हड्डी, गौके बाल, धानकी भूसी, राख, खोपड़ी, की, ईटा, कोयला, कंकड़ और बालू - भूमिमें गाड़ दिये जायँ। प्रकार दण्ड देना चाहिए--इसका विचार किया जाता है--) राजा दूसरेके खेतकी फसलको नष्ट करनेवाली भैंसपर आठ माष (पणका बीसवाँ भाग) दण्ड लगावे। गौपर उससे आधा और

English

and done unconnectedly — such a transaction is not valid. Lost property should be given by the king to the owner, up to a hundred,

अध्याय २५१

श्लोक 62

विभावयेन्नचेल्लिङ्गैस्तत्समं दातुमर्हति ।देयञ्चौरहृतं द्रव्यं राज्ञा जनपदाय तु

vibhāvayennacelliṅgaistatsamaṃ dātumarhati / deyañcaurahṛtaṃ dravyaṃ rājñā janapadāya tu

हिन्दी अर्थ

भेड्-बकरीपर उससे भी आधा दण्ड लगावे। यदि भैंस आदि पशु खेत चरकर वहीं बैठ जायें, तो उनपर पूर्वकथितसे दूना दण्ड लगाना चाहिए। जिसमें अधिक मात्रामें तृण और काष्ठ उपजता

English

and if he does not establish by marks, he should give the equivalent; stolen property should be restored by the king to the district;

अध्याय २५१

श्लोक 63

अशीतिभागो वृद्धिः स्यान्मासि मासि सबन्धके ।वर्णक्रमाच्छतं द्वित्रिचतुष्पञ्चकमन्यथा

aśītibhāgo vṛddhiḥ syānmāsi māsi sabandhake / varṇakramācchataṃ dvitricatuṣpañcakamanyathā

हिन्दी अर्थ

है, ऐसा भूप्रदेश जब स्वामीसे लेकर उसे सुरक्षित रखा जाता है तो उसे 'विवीत' (रक्षित या रखांतु) कहते हैं। उस रखांतुको भी हानि पहुँचानेपर इन भैंस आदि पशुओंपर अन्य खेतोंके समान ही दण्ड समझे। इसी अपराधमें गदहे और ऊँटोंपर भी भैंसके समान ही दण्ड लगाना चाहिए। जिस खेतमें जितनी फसल पशुओंके द्वारा नष्ट की जाय, उसका सामन्त आदिके द्वारा अनुमानित

English

interest is an eightieth part each month with security; by order of castes a hundred, two, three, four, five;

अध्याय २५१

श्लोक 64

सप्ततिस्तु पशुस्त्रीणां रसस्याष्टगुणा परा ।वस्त्रधान्यहिरण्यानां चतुस्त्रिद्विगुणा तथा

saptatistu paśustrīṇāṃ rasasyāṣṭaguṇā parā / vastradhānyahiraṇyānāṃ catustridviguṇā tathā

हिन्दी अर्थ

फल गो-स्वामीको क्षेत्रस्वामीके लिये दण्डके रूपमें देना चाहिए और चरवाहोंको तो केवल शारीरिक दण्ड देना (कुछ पीट देना चाहिए) । यदि गो-स्वामीने स्वयं चराया हो तो उससे

English

seventy for cattle and women; for juices eightfold beyond; for cloth, grain and gold fourfold, threefold, twofold;

अध्याय २५१

श्लोक 65

ग्रामान्तरात्तु दशकं सामुद्रादपि विंशतिं ।दद्युर्वा स्वकृतां वृद्धिं सर्वे सर्वासु जातिषु

grāmāntarāttu daśakaṃ sāmudrādapi viṃśatiṃ / dadyurvā svakṛtāṃ vṛddhiṃ sarve sarvāsu jātiṣu

हिन्दी अर्थ

पूर्वोक्त दण्ड ही वसूल करना चाहिए, ताडना नहीं देनी चाहिए। यदि खेत रास्तेपर हो, गाँवके समीप हो अथवा ग्रामके 'विवीत' (सुरक्षित) भूमिके निकट हो और वहाँ चरवाहे अथवा गो- स्वामीकी इच्छा न होनेपर भी अनजानेमें पशुओंने चर लिया अथवा फसलको हानि पहुँचा दी तो उसमें गो-स्वामी तथा चरवाहा-दोनोंमेंसे किसीका दोष नहीं माना जाता, अर्थात् उसके लिये दण्ड

English

ten from another village; twenty even by sea. Or all should give the interest they themselves made, in all castes.

अध्याय २५१

श्लोक 66

प्रपन्न साधयन्नर्थं न वाच्या नृपतिर्भवेत् ।साध्यमानो नृपं गच्छेद्दण्ड्यो दाप्यश् च तद्धनं

prapanna sādhayannarthaṃ na vācyā nṛpatirbhavet / sādhyamāno nṛpaṃ gaccheddaṇḍyo dāpyaś ca taddhanaṃ

हिन्दी अर्थ

नहीं लगाना चाहिए; किंतु यदि स्वेच्छासे जान- बूझकर खेत चराया जाय तो चरानेवाला और गो-स्वामी दोनों चोरको भाँति दण्ड पानेके अधिकारी हैं। साँड़, वृषोत्सर्गकी विधिसे या

English

One who has fled while accomplishing his matter should not be spoken to; if the king is approached while being settled, he is punished and made to pay that wealth.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 251
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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