Agni Purana· Agni Purāṇa
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अध्याय 252 / 381

Adhyaya 253

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अध्याय २५२

श्लोक 1

व्यवहारकथनं अग्निर् उवाच गृहीतार्थः क्रमाद्दाप्यो धनिनामधमर्णिकः ।दत्वा तु ब्राह्मणायादौ नृपतेस्तदनन्तरम्

vyavahārakathanaṃ agnir uvāca gṛhītārthaḥ kramāddāpyo dhanināmadhamarṇikaḥ / datvā tu brāhmaṇāyādau nṛpatestadanantaram

हिन्दी अर्थ

देवी-देवताको चढ़ाकर छोड़े गये पशु, दस दिनके भीतरकी ब्यायी हुई गाय तथा अपने यूथसे बिछुड़कर दूसरे स्थानपर आया हुआ पशु-ये दूसरेको फसल चर लें तो भी दण्डनीय नहीं हैं, छोड़ देने योग्य हैं। जिसका कोई चरवाहा न हो, ऐसे देवोपहत तथा राजोपहत पशु भी छोड़ ही देने योग्य हैं। गोप (चरवाहा) प्रातःकाल गौओंके स्वामीके

English

Great men hold that the five ways of casting a noose are: extending in a straight line, long, broad, horizontal and whirling.

अध्याय २५२

श्लोक 2

राज्ञाधमर्णिको दाप्यः साधिताद्दशकं स्मृतम् ।पञ्चकन्तु शतं दाप्यः प्राप्तार्थो ह्य् उत्तमर्णकः

rājñādhamarṇiko dāpyaḥ sādhitāddaśakaṃ smṛtam / pañcakantu śataṃ dāpyaḥ prāptārtho hy uttamarṇakaḥ

हिन्दी अर्थ

सँभलाये हुए पशु सायंकाल उसी प्रकार लाकर स्वामीको सौंप दे। वेतनभोगी ग्वालेके प्रमादसे मृत अथवा खोये हुए पशु राजा उससे पशु- स्वामीको दिलाये। गोपालकके दोषसे पशुओंका

English

The uses of a disc (are): cutting, piercing, felling, whirling and severing.

अध्याय २५२

श्लोक 3

हीनजातिं परिक्षीणमृणार्थं कर्म कारयेत् ।ब्राह्मणस्तु परिक्षीणः शनैर् दाप्यो यथोदयम्

hīnajātiṃ parikṣīṇamṛṇārthaṃ karma kārayet / brāhmaṇastu parikṣīṇaḥ śanair dāpyo yathodayam

हिन्दी अर्थ

विनाश होनेपर उसके ऊपर साढ़े तेरह पण दण्ड लगाया जाय और वह स्वामीको नष्ट हुए पशुका मूल्य भी दे। ग्रामवासियोंकी इच्छासे अथवा राजाकी आज्ञाके अनुसार गोचारणके लिये भूमि छोड़ दे; उसे जोते-बोये नहीं । ब्राह्मण सदा, सभी स्थानोंसे तृण, काष्ठ और पुष्प ग्रहण कर सकता है। ग्राम और क्षेत्रका अन्तर सौ धनुषके प्रमाणका हो, अर्थात् गाँवके चारों ओर सौ-सौ धनुष भूमि

English

jMay you know that the uses of a spear are: slapping, thrashing, cleaving, frightening, incarcerating and, the sixth, striking down.

अध्याय २५२

श्लोक 4

दीयमानं न गृह्णाति प्रयुक्तं यः स्वकन्धनम् ।मध्यस्थस्थापितं तत्स्याद्वर्धते न ततः परं

dīyamānaṃ na gṛhṇāti prayuktaṃ yaḥ svakandhanam / madhyasthasthāpitaṃ tatsyādvardhate na tataḥ paraṃ

हिन्दी अर्थ

परती छोड़ दी जाय और उसके बादको भूमिपर ही खेती की जाय। खर्वट (बड़े गाँव) और क्षेत्रका अन्तर दो सौ धनुष एवं नगर तथा क्षेत्रका अन्तर चार सौ धनुष होना चाहिए

English

O Excellent Brahmin! It has been declared that an iron club (TOMARA) (is used) in striking the eyes, the arms (and) sides (of the enemy) and should be countered with an arrow of the defendent.

अध्याय २५२

श्लोक 5

ऋक्थग्राह ऋणं दाप्यो योषिद्ग्राहस्तथैव च ।पुत्रो ऽनन्याश्रितद्रव्यः पुत्रहीनस्य ऋक्थिनः

ṛkthagrāha ṛṇaṃ dāpyo yoṣidgrāhastathaiva ca / putro 'nanyāśritadravyaḥ putrahīnasya ṛkthinaḥ

हिन्दी अर्थ

(अब अस्वामिविक्रय नामक व्यवहारपदपर विचार आरम्भ करते हैं-नारदजीने ' अस्वामिविक्रय ' का लक्षण इस प्रकार बताया है- अर्थात् धरोहरके तौरपर रखे हुए पराये द्रव्यको खोया हुआ पाकर अथवा स्वयं चुराकर जो स्वामीके परोक्षमें बेच दिया जाता है, वह ' अस्वामिविक्रय’ कहलाता है।' द्रव्यका स्वामी

English

O Brahmin! The use of a mudgara{m3LCc) is for striking, cutting, pounding, causing deluge and killing *

अध्याय २५२

श्लोक 6

अविभुक्तैः कुटुम्बार्थं यदृणन्तु कृतम्भवेत् ।दद्युस्तदृक्थिनः प्रेते प्रोषिते वा कुटुम्बिनि

avibhuktaiḥ kuṭumbārthaṃ yadṛṇantu kṛtambhavet / dadyustadṛkthinaḥ prete proṣite vā kuṭumbini

हिन्दी अर्थ

अपनी वस्तु दूसरेके द्वारा बेची हुई यदि किसी खरीददारके पास देखे तो उसे अवश्य पकड़े अपने अधिकारमें ले ले। यहाँ “विक्रीत' शब्द 'दत्त' और 'आहित'का भी उपलक्षण है । अर्थात्

English

The uses of a bhindipala (sling) are for sarfilranta, otf- rdnta and govisarga and sudurdhara (that is extremely unbearable). The same are the uses of a laguda (club).

अध्याय २५२

श्लोक 7

न योषित् पतिपुत्राभ्यां न पुत्रेण कृतं पिता ।दद्यादृते कुटुम्बार्थान्न पतिः स्त्रीकृतं तथा

na yoṣit patiputrābhyāṃ na putreṇa kṛtaṃ pitā / dadyādṛte kuṭumbārthānna patiḥ strīkṛtaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

यदि कोई दूसरेकी रखी हुई वस्तु उसे बताये बिना दूसरेके यहाँ रख दे या दूसरेको दे दे तो उसपर यदि स्वामीकी दृष्टि पड़ जाय तो स्वामी उस वस्तुको हठात् ले ले या अपने अधिकारमें कर ले; क्योंकि उस वस्तुसे उसका स्वामित्व

English

O Excellent Brahmin! The uses of a mace (VAJRA) are for (striking) with the end, with the middle, turning back and commanding. The same (are the uses) of a paffiia (a kind of spear with sharp edge).

अध्याय २५२

श्लोक 8

गोपशौण्डिकशैनूषरजकव्याधयोषितां ।ऋणं दद्यात्पतिस्त्वासां यस्माद्वृत्तिस्तदाश्रया

gopaśauṇḍikaśainūṣarajakavyādhayoṣitāṃ / ṛṇaṃ dadyātpatistvāsāṃ yasmādvṛttistadāśrayā

हिन्दी अर्थ

निवृत्त नहीं हुआ। यदि खरीददार उस वस्तुको खरीदकर छिपाये रखे, किसीपर प्रकट न करे तो उसका अपराध माना जाता है। तथा जो हीन पुरुष है, अर्थात् उस द्रव्यको प्राप्तिके उपायसे

English

Taking away, cutting, killing, piercing, anointing, felling and snapping are indicated as the uses of a sword.

अध्याय २५२

श्लोक 9

प्रतिपन्नं स्त्रिया देयं पत्या वा सह यत् कृतं ।स्वयं कृतं वा यदृणं नान्यस्त्री दातुमर्हति

pratipannaṃ striyā deyaṃ patyā vā saha yat kṛtaṃ / svayaṃ kṛtaṃ vā yadṛṇaṃ nānyastrī dātumarhati

हिन्दी अर्थ

रहित है, उससे एकान्तमें कम मूल्यमे और असमयमें (रात्रि आदिमे) उस वस्तुको खरीदनेवाला मनुष्य चोर होता है, अर्थात् चोरके समान दण्डनीय होता है। अपनी खोयी हुई या चोरीमें गयी हुई वस्तु जिसके पास देखे, उसे स्थानपाल आदि राजकर्मचारीसे पकड्वा दे। यदि उस स्थान अथवा समयमें राजकर्मचारी न मिले तो चोरको स्वयं पकड़कर राजकर्मचारीको सौंप दे। यदि खरीददार

English

The functions of a sling are indicated to be frighten¬ ing, protecting, killing and helping a big fighting column. The same are the functions of a machine also.

अध्याय २५२

श्लोक 10

पितरि प्रोषिते प्रेते व्यसाभिप्लुते ऽथ वा(१) ।पुत्रपौत्रैर् ऋणन्देयं निह्नवे साक्षिभावितम्

pitari proṣite prete vyasābhiplute 'tha vā(1) / putrapautrair ṛṇandeyaṃ nihnave sākṣibhāvitam

हिन्दी अर्थ

यह कहे कि “मैंने चोरी नहीं की है, अमुकसे खरीदी है', तो वह बेचनेवालेको पकड़वा देनेपर शुद्ध (अभियोगसे मुक्त) हो जाता है। जो नष्ट या अपहत वस्तुका विक्रेता है, उसके पाससे

English

When the father has gone abroad, died, or been overwhelmed by distress, the debt is to be paid by sons and grandsons, when denied established by witnesses;

अध्याय २५२

श्लोक 11

सुराकामद्यूतकृतन्दण्डशुल्कावशिष्टकम् ।वृथा दानं तथैवेह पुत्रो दद्यान्न पैतृकम्

surākāmadyūtakṛtandaṇḍaśulkāvaśiṣṭakam / vṛthā dānaṃ tathaiveha putro dadyānna paitṛkam

हिन्दी अर्थ

द्रव्यका स्वामी द्रव्य, राजा अर्थदण्ड और खरीदनेवाला अपना दिया हुआ मूल्य पाता है। वस्तुका स्वामी लेख्य आदि आगम या उपभोगका प्रमाण देकर खोयी हुई वस्तुको अपनी सिद्ध करे। सिद्ध न करनेपर राजा उससे वस्तुका पञ्चमांश दण्डके रूपमें ग्रहण करे। जो मनुष्य अपनी खोयी हुई अथवा चुरायी गयी वस्तुको राजाको बिना बतलाये दूसरेसे ले ले, राजा उसपर छानबे

English

what was incurred for liquor, lust, gambling, the remainder of fines and tolls, and a gift made in vain — a son should not pay these as paternal.

अध्याय २५२

श्लोक 12

भ्रातॄणामथ दम्पत्योः पितुः पुत्रस्य चैव हि ।१ व्यसनाभिप्लुतेपि वेति ख॥ , घ॥ , ञ॥ च :प् ४१४ प्रतिभाव्यमृणं ग्राह्यमविभक्तेन च स्मृतम्(१)

bhrātṝṇāmatha dampatyoḥ pituḥ putrasya caiva hi / 1 vyasanābhiplutepi veti kha.. , gha.. , ña.. ca :p 414 pratibhāvyamṛṇaṃ grāhyamavibhaktena ca smṛtam(1)

हिन्दी अर्थ

पणका अर्थदण्ड लगावे। शौल्किक (शुल्के अधिकारी) या स्थानपाल (स्थानरक्षक) जिस खोये अथवा चुराये गये द्रव्यको राजाके पास लायें, उस द्रव्यको एक वर्षके पूर्व ही वस्तुका

English

For brothers, for a married pair, for father and son, suretyship and debt are remembered as to be taken by the undivided;

अध्याय २५२

श्लोक 13

दर्शने प्रत्यये दाने प्रतिभाव्यं विधीयते ।आधौ तु वितथे दाप्या वितथस्य सुता अपि

darśane pratyaye dāne pratibhāvyaṃ vidhīyate / ādhau tu vitathe dāpyā vitathasya sutā api

हिन्दी अर्थ

स्वामी प्रमाण देकर प्राप्त कर ले; एक वर्षके बाद राजा स्वयं उसे ले ले। घोड़े आदि एक खुरवाले पशु खोनेके बाद मिलें, तो स्वामी उनकी रक्षाके निमित्त चार पण राजाको दे; मनुष्यजातीय द्रव्यके मिलनेपर पाँच पण; भैंस, ऊँट और गौके प्राप्त होनेपर दो-दो पण तथा भेड़-बकरीके मिलनेपर पणका चतुर्थांश राजाको अर्पित

English

suretyship is ordained for appearance, credit and payment. In a pledge when it is false the sons of the false one are to be made to pay;

अध्याय २५२

श्लोक 14

दर्शनप्रतिभूर्यत्र मृतः प्रात्ययिको ऽपि वा ।न तत्पुत्रा धनं दद्युर्दद्युर्दानाय ये स्थिताः

darśanapratibhūryatra mṛtaḥ prātyayiko 'pi vā / na tatputrā dhanaṃ dadyurdadyurdānāya ye sthitāḥ

हिन्दी अर्थ

' दत्ताप्रदानिक "का स्वरूप नारदने इस प्रकार बताया है--''जो असम्यग्रूपसे ( अयोग्य मार्गका आश्रय लेकर) कोई द्रव्य देनेके पश्चात् फिर उसे लेना चाहता है, उसे 'दत्ताप्रदानिक' नामक

English

where the surety for appearance has died, or the credit surety, his sons need not pay the wealth; those standing for payment should pay.

अध्याय २५२

श्लोक 15

बहवः स्युर्यदि स्वांशैर् दद्युः प्रतिभुवो धनम् ।एकच्छायाश्रितेष्वेषु धनिकस्य यथा रुचि

bahavaḥ syuryadi svāṃśair dadyuḥ pratibhuvo dhanam / ekacchāyāśriteṣveṣu dhanikasya yathā ruci

हिन्दी अर्थ

व्यबहारपद कहा जाता है।'' इस प्रकरणमें इसीपर विचार किया जाता है। जीविकाका उपरोध न करते हुए ही अपनी वस्तुका दान करे; अर्थात् कुटुम्बके भरण-पोषणसे बचा हुआ धन ही देनेयोग्य है। स्त्री और पुत्र किसीको न दे। अपना वंश होनेपर किसीको

English

If there are many, the sureties should pay the wealth by their own shares; among those under one shelter, as the creditor pleases.

अध्याय २५२

श्लोक 16

प्रतिभूर्दापितो यत्र प्रकाशं धनिने धनम् ।द्विगुणं प्रतिदातव्यमृणिकैस्तस्य तद्भवेत्

pratibhūrdāpito yatra prakāśaṃ dhanine dhanam / dviguṇaṃ pratidātavyamṛṇikaistasya tadbhavet

हिन्दी अर्थ

सर्वस्वका दान न करे। जिस वस्तुको दूसरेके लिये देनेकी प्रतिज्ञा कर ली गयी हो, वह वस्तु उसीको दे, दूसरेको न दे। प्रतिग्रह प्रकटरूपमें ग्रहण करे। विशेषतः स्थावर भूमि, वृक्ष आदिका

English

Where a surety has been made to pay publicly wealth to the owner, the debtors should repay it double to him.

अध्याय २५२

श्लोक 17

स्वसन्ततिस्त्रीपशव्यं धान्यं द्विगुणमेव च ।वस्त्रं चतुर्गुणं प्रोक्तं रसश्चाष्टगुणस् तथा

svasantatistrīpaśavyaṃ dhānyaṃ dviguṇameva ca / vastraṃ caturguṇaṃ proktaṃ rasaścāṣṭaguṇas tathā

हिन्दी अर्थ

प्रतिग्रह तो सबके सामने ही ग्रहण करना चाहिए । जो वस्तु जिसे धर्मार्थ देनेकी प्रतिज्ञा की गयी हो, बह उसे अवश्य दे दे और दी हुई वस्तुका कदापि फिर अपहरण न करे-उसे वापस न (अब 'क्रीतानुशय' बताया जाता है। इसका स्वरूप नारदजीने इस प्रकार कहा है--““जो खरीददार मूल्य देकर किसी पण्य वस्तुको खरीदनेके बाद उसे अधिक महत्त्वकी वस्तु नहीं मानता है, अतः

English

Grain for one's own offspring, women and cattle is double; cloth is said fourfold and juice eightfold.

अध्याय २५२

श्लोक 18

आधिः प्रणश्येत् द्विगुणे धने यदि न मोक्ष्यते ।काले कालकृतं नश्येत् फलभोग्यो न नश्यति

ādhiḥ praṇaśyet dviguṇe dhane yadi na mokṣyate / kāle kālakṛtaṃ naśyet phalabhogyo na naśyati

हिन्दी अर्थ

उसे लौटाना चाहता है तो यह मामला 'क्रीतानुशय' नामक विवादपद कहलाता है। ऐसी वस्तुको जिस दिन खरीदा जाय, उसी दिन अविकृतरूपसे मालधनीको लौटा दिया जाय। यदि दूसरे दिन

English

The pledge is lost when the wealth has doubled, if not released; at the time what is done by time is lost; the one enjoying the fruit does not lose.

अध्याय २५२

श्लोक 19

गोप्याधिभोग्यो नावृद्धिः सोपकारे ऽथ भाविते ।नष्टो देयो विनष्टश् च दैवराजकृतादृते

gopyādhibhogyo nāvṛddhiḥ sopakāre 'tha bhāvite / naṣṭo deyo vinaṣṭaś ca daivarājakṛtādṛte

हिन्दी अर्थ

लौटावे तो क्रेता मूल्यसे ३, वाँ भाग छोड़ दे। इसके बाद वह वस्तु खरीददारकी ही हो जाती है, वह उसे लौटा नहीं सकता।'') अब बीज आदिके विषयमें बताते हैं-

English

A pledge to be kept is enjoyed without interest; in what is done with service and established, lost or destroyed, it should be paid except by fate or king.

अध्याय २५२

श्लोक 20

आधेः स्वीकरणात्सिद्धौरक्षमाणोप्यसारताम् ।यातश्चेदन्य आधेयो धनभाग् वा धनी भवेत्

ādheḥ svīkaraṇātsiddhaurakṣamāṇopyasāratām / yātaścedanya ādheyo dhanabhāg vā dhanī bhavet

हिन्दी अर्थ

बीजकी दस दिन, लोहेकी एक दिन, वाहनकी पाँच दिन, र्रोंकी सात दिन, दासीकी एक मास, दूध देनेवाले पशुकी तीन दिन और दासकी एक पक्षतक परीक्षा होती है। सुवर्ण अग्निमें डालनेपर

English

By acceptance of a pledge it is settled; even guarded, if it goes worthless, another pledge may be given, or the owner becomes a sharer of wealth;

अध्याय २५२

श्लोक 21

चरित्रं बन्धककृतं सवृद्धं दापयेद्वनं ।सत्यङ्कारकृतं द्रव्यं द्विगुणं प्रतिदापयेत्

caritraṃ bandhakakṛtaṃ savṛddhaṃ dāpayedvanaṃ / satyaṅkārakṛtaṃ dravyaṃ dviguṇaṃ pratidāpayet

हिन्दी अर्थ

क्षीण नहीं होता; परंतु चाँदी प्रतिशत दो पल, राँगे और सीसेमें प्रतिशत आठ पल, ताँबेमें पाँच पल और लोहेमें दस पल कमी होती है। ऊन और रूईके स्थूल सूतसे बुने हुए कपड़ेमें सौ पलमें दस पलकी वृद्धि होती है। इसी प्रकार मध्यम सूतमें पाँच पल और सूक्ष्म सूतमें तीन पलकी वृद्धि जाननी चाहिए। कार्मिक (अनेक रङ्गके चित्रोंसे युक्त) और रोमबद्ध (किनारेपर

English

conduct made by the mortgagee should be made to pay with interest; the wealth made by a true pledge should be repaid double.

अध्याय २५२

श्लोक 22

उपस्थितस्य मोक्तव्य आधिर्दण्डो ऽन्यथा भवेत् ।प्रयोजके सति धनं कुलेन्यस्याधिमाप्नुयात्

upasthitasya moktavya ādhirdaṇḍo 'nyathā bhavet / prayojake sati dhanaṃ kulenyasyādhimāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

गुच्छोंसे युक्त) वस्त्रमें तीसवाँ भाग क्षय होता है। रेशम और वल्कलके बुने हुए वस्त्रमें न तो क्षय होता है और न वृद्धि ही। उपर्युक्त द्र॒व्योंके नष्ट होनेपर द्रव्य-ज्ञानकुशल व्यक्ति देश, काल, उपयोग

English

The pledge should be released to the one who presents himself, otherwise a fine; if there is a lender, the wealth should be obtained from another's family;

अध्याय २५२

श्लोक 23

तत्कालकृतमूल्यो वा तत्र तिष्ठेदवृद्धिकः ।१ प्रतिभाव्यमृणं साक्ष्यमविभक्तेन तत् स्मृतमिति ख॥ , ग॥ , घ॥ , छ॥ , ज॥ , ट॥ च :प् ४१५ विना धारणकाद्वापि विक्रीणीते ससाक्षिकम्

tatkālakṛtamūlyo vā tatra tiṣṭhedavṛddhikaḥ / 1 pratibhāvyamṛṇaṃ sākṣyamavibhaktena tat smṛtamiti kha.. , ga.. , gha.. , cha.. , ja.. , ṭa.. ca :p 415 vinā dhāraṇakādvāpi vikrīṇīte sasākṣikam

हिन्दी अर्थ

और नष्ट हुए वस्तुके सारासारकी परीक्षा करके जितनी हानिका निर्णय कर दें, राजा उस हानिकी शिल्पियोंसे अवश्य पूर्ति कराये॥ २८--३२॥ (सेवा स्वीकार करके जो उसे नहीं करता है, उसका यह बर्ताव 'अभ्युपेत्याशुश्रूषा' नामक व्यवहारपद है।) जो बलपूर्वक दास बनाया गया है और जो चोरोंके द्वारा चुराकर किसीके हाथ

English

or its price made at that time, he should stay there without interest; or without a holder he may sell with witnesses.

अध्याय २५२

श्लोक 24

यदा तु द्विगुणीभूतमृणमाधौ तदा खलु ।मोच्यश्चाधिस्तदुत्पाद्य प्रविष्टे द्विगुणे धने

yadā tu dviguṇībhūtamṛṇamādhau tadā khalu / mocyaścādhistadutpādya praviṣṭe dviguṇe dhane

हिन्दी अर्थ

बेचा गया है-ये दोनों दासभावसे मुक्त हो सकते हैं। यदि स्वामी इन्हें न छोड़े तो राजा अपनी शक्तिसे इन्हें दासभावसे छुटकारा दिलाये। जो स्वामीको प्राणसंकटसे बचा दे, वह भी दासभावसे

English

When the debt has become double on the pledge, then the pledge should be released, producing it, when double the wealth has entered.

अध्याय २५२

श्लोक 25

व्यसनस्थमनाख्याय हस्ते ऽन्यस्य यदर्पयेत् ।द्रव्यं तदौपनिधिकं प्रतिदेयं तथैव तत्

vyasanasthamanākhyāya haste 'nyasya yadarpayet / dravyaṃ tadaupanidhikaṃ pratideyaṃ tathaiva tat

हिन्दी अर्थ

मुक्त कर देनेयोग्य है। जो स्वामीसे भरण-पोषण पाकर उसका दास्य स्वीकार करके कार्य कर रहा है, वह भरण-पोषणमें स्वामीका जितना धन खर्च करा चुका है, उतना धन वापस कर दे तो दास-भावसे छुटकारा पा जाता है। जितना धन लेकर स्वामीने किसीको किसी धनीके पास

English

What substance one entrusts into another's hand, being in distress, without telling, that is a deposit, to be returned likewise.

अध्याय २५२

श्लोक 26

न दाप्यो ऽपहृतं तत्तु राजदैवकतस्करैः ।प्रेषश्चेन्मार्गिते दत्ते दाप्यो दण्डश् च तत्समम्

na dāpyo 'pahṛtaṃ tattu rājadaivakataskaraiḥ / preṣaścenmārgite datte dāpyo daṇḍaś ca tatsamam

हिन्दी अर्थ

बन्धक रख दिया है, अथवा जितना धन देकर किसी धनीने किसी ऋणग्राहीको ऋणदातासे छुड़ाया है, उतना धन सूदसहित वापस कर देनेपर आहित दास भी दासत्वसे छुटकारा पा सकता है।

English

It is not to be paid if taken by king, fate or thieves; if sent away when asked and given, he should pay and a fine equal to it;

अध्याय २५२

श्लोक 27

आजीवन् स्वेच्छया दण्ड्यो दाप्यस्तच्चापि सोदयं ।याचितावाहितन्यासे निक्षेपेष्वप्ययं विधिः

ājīvan svecchayā daṇḍyo dāpyastaccāpi sodayaṃ / yācitāvāhitanyāse nikṣepeṣvapyayaṃ vidhiḥ

हिन्दी अर्थ

मनुष्य यदि इसका प्रायश्चित्त न कर ले तो मरणपर्यन्त राजाका दास होता है। चारों वर्ण अनुलोमक्रमसे ही दास हो सकते हैं, प्रतिलोमक्रमसे नहीं। विद्यार्थी विद्याग्रहणके पश्चात् गुरुके घरमें आयुर्वेदादि शिल्प-शिक्षाके लिये यदि रहना चाहे तो समय निश्चित करके रहे। यदि निश्चित समयसे पहले वह शिल्प-शिक्षा प्राप्त कर ले तो भी उतने समयतक वहाँ अवश्य निवास करे।

English

one who lives on it at will should be fined and made to pay it with interest. This rule is also in borrowed, lent, trust and deposit.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 252
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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