Agni Purana· Agni Purāṇa
254
अध्याय 254 / 381

Adhyaya 255

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अध्याय २५४

श्लोक 1

दायविभागकथनम् अग्निर् उवाच विभागञ्चेत् पिता कुर्यादिच्छया विभजेत् सुतान् ।ज्येष्ठं वा श्रेष्ठभागेन सर्वे वा स्युः समांशिनः

dāyavibhāgakathanam agnir uvāca vibhāgañcet pitā kuryādicchayā vibhajet sutān / jyeṣṭhaṃ vā śreṣṭhabhāgena sarve vā syuḥ samāṃśinaḥ

हिन्दी अर्थ

भार वहन करे। साथ ही जिस कलहके लिये जो दण्ड बताया गया है, उतना अर्थदण्ड भी चुकाये। नावसे लोगोंको पार उतारनेवाला नाविक यदि स्थलमार्गका शुल्क ग्रहण करता है तो उसपर दस

English

One that inherits a property, as well as the wife of a deceased person that inherits the property should be made to pay the ( incurred) debt. The debt of a sonless owner of a pro¬ perty (should be paid) by the person that inherits the property.

अध्याय २५४

श्लोक 2

यदि दद्यात् समानंशान् कार्याः पत्न्यः समांशिकाः ।न दत्तं स्त्रीधनं यासां भर्त्रा वा श्वशुरेन वा

yadi dadyāt samānaṃśān kāryāḥ patnyaḥ samāṃśikāḥ / na dattaṃ strīdhanaṃ yāsāṃ bhartrā vā śvaśurena vā

हिन्दी अर्थ

पण दण्ड लगाना चाहिए। यदि यजमानके पास वैभव हो और पड़ोसमें विद्वान् और सदाचारी ब्राह्मण बसते हों तो श्राद्ध आदिमें उनको निमन्त्रण न देनेपर उस यजमानपर भी वही दण्ड लगाना चाहिए। किसीको दीवारपर मुद्गर आदिसे आघात करनेवालेपर पाँच पण, उसे विदीर्ण करनेवालेपर दस पण तथा उसको फोड़ने या दो टूक करनेवालेपर बीस पण दण्ड लगाया जाय और वह दीवार

English

The husbands of the women of the gopa (a guard), Saudika (a distiller and seller of spirituous liquors), SailUfa (an actor or dancer), rajaka (a washerman) or lySdha,(a hunter) (castes) should repay the loan incurred by them because their livelihood is dependent on them (those women).

अध्याय २५४

श्लोक 3

शक्तस्थानीहमानस्य किञ्चिद्दत्वा पृथक् क्रिया ।न्यूनाधिकविभक्तानां धर्म्यश् च पितृना कृतः

śaktasthānīhamānasya kiñciddatvā pṛthak kriyā / nyūnādhikavibhaktānāṃ dharmyaś ca pitṛnā kṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

गिरा देनेवालेसे पैंतीस पण दण्ड वसूल किया जाय। साथ ही उस दीवारके मालिकको नये सिरेसे दीवार बनानेका व्यय उससे दिलाया जाय। किसीके घरमें दुःखोत्पादक वस्तु-कण्टक आदि

English

The wife need not repay any other loan except that (incurred by her husband) with her consent, or that incurred jointly with her husband or that incurred by herself.

अध्याय २५४

श्लोक 4

विभजेयुः सुताः पित्रोरूर्ध्वमृक्थमृणं समम् ।मातुर्दुहितरः शेषमृणात्ताभ्य ऋते ऽन्नयः

vibhajeyuḥ sutāḥ pitrorūrdhvamṛkthamṛṇaṃ samam / māturduhitaraḥ śeṣamṛṇāttābhya ṛte 'nnayaḥ

हिन्दी अर्थ

करनेवाली वस्तु-विषधर सर्प आदि फेंकनेपर मध्यम साहस--पाँच सौ पण दण्ड देनेका विधान है। क्षुद्र पशुको पीड़ा पहुँचानेवालेपर दो पण, उसके शरीरसे रुधिर निकाल देनेवालेपर चार करनेवालेपर आठ पण दण्ड लगावे। क्षुद्र पशुका लिङ्ग-छेदन करने या उसको मार डालनेपर मध्यम साहसका दण्ड दे और अपराधीसे स्वामीको उस पशुका मूल्य दिलाये। महान् पशु-हाथी-घोड़े

English

The son need not repay the debt incurred by the father by drinking or wenching or by way of the balance of fine inflicted by the court or by making improper gifts.

अध्याय २५४

श्लोक 5

पितृद्रव्याविनाशेन यदन्यत् स्वयमर्जयेत् ।मैत्रमौद्वाहिकञ्चैव दायादानान्न तद्भवेत्

pitṛdravyāvināśena yadanyat svayamarjayet / maitramaudvāhikañcaiva dāyādānānna tadbhavet

हिन्दी अर्थ

आदिके प्रति दुःखोत्पादन आदि पूर्वोक्त अपराध करनेपर क्षुद्र पशुओंको अपेक्षा दूना दण्ड जानना चाहिए। जिनकी डालियाँ काटकर अन्यत्र लगा दी जानेपर अङ्कुरित हो जाती हैं, वे बरगद आदि

English

A loan should be- got by a member of the undivided family against the surety of the brothers, the husband and wife, the father or the son.

अध्याय २५४

श्लोक 6

सामान्यार्थसमुत्थाने विभागस्तु समः स्मृतः ।अनेकपितृकाणान्तु पितृतो भागकल्पना

sāmānyārthasamutthāne vibhāgastu samaḥ smṛtaḥ / anekapitṛkāṇāntu pitṛto bhāgakalpanā

हिन्दी अर्थ

वृक्ष प्ररोहिशाखी' कहलाते हैं। ऐसे प्ररोही वृक्षोंकी तथा जिनकी डालियाँ अङ्कुरित नहीं होतीं, परंतु जो जीविका चलानेके साधन बनते हैं, उन आम आदि वृक्षोंकी शाखा, स्कन्ध तथा मूलसहित समूचे वृक्षका छेदन करनेपर क्रमशः बीस पण, चालीस पण और अस्सी पण दण्ड लगानेका विधान है

English

A surety.consists in being a witness, or in giving a guarantee (for the repayment of aidebt). When a property is pledged by a person that has no rigiit of possession, the sons of that mortgager should be liable to repay (the incurred loan).

अध्याय २५४

श्लोक 7

भूर्यापिता महोपात्ता निबन्धो द्रव्यमेव वा ।तत्र स्यात् सदृशं स्वाम्यं पितुः पुत्रस्य चोभयोः

bhūryāpitā mahopāttā nibandho dravyameva vā / tatra syāt sadṛśaṃ svāmyaṃ pituḥ putrasya cobhayoḥ

हिन्दी अर्थ

(अब 'साहस' नामक विवादपदका विवेचन करनेके लिये पहले उसका लक्षण बताते हैं) सामान्य द्रव्य अथवा परकीय द्रव्यका बलपूर्वक अपहरण 'साहस' कहलाता है। (यहाँ यह कहा

English

A mortgse shall be forfeited if that is not redeemed by paying double the amount. (The right for redemption) would cease at the lapse of the period agreed upon at the time of the mortgage. But it would not cease if enjoyments of the proceeds have been ageed upon.

अध्याय २५४

श्लोक 8

विभक्तेषु सुतो जातः सवर्णायां विभागभाक् ।दृश्याद्वा तद्विभागः स्यादायव्ययविशोधितात्

vibhakteṣu suto jātaḥ savarṇāyāṃ vibhāgabhāk / dṛśyādvā tadvibhāgaḥ syādāyavyayaviśodhitāt

हिन्दी अर्थ

गया कि राजदण्डका उल्लङ्घन करके, जनसाधारणके आक्रोशकी कोई परवा किये बिना राजकीय पुरुषोंसे भिन्न लोगोंके सामने जो मारण, अपहरण तथा परस्त्रीके प्रति बलात्कार आदि किया जाता है, वह सब 'साहस'को कोटिमें आता है।) जो दूसरोंके द्रव्यका अपहरण करता है, उसके ऊपर उस अपहत द्रव्यके मूल्यसे दूना दण्ड लगाना चाहिए। जो 'साहस' (लूट-पाट,

English

Money borrowed by pledging one's character, should be repaid together with interest. Money borrowed on a solemn affirmation should be returned double ( that).

अध्याय २५४

श्लोक 9

क्रमादभ्यागतं द्रव्यं हृतमभ्युद्धरेच्च यः ।दायादेभ्यो न तद्दद्याद्विद्यया लब्धमेव च

kramādabhyāgataṃ dravyaṃ hṛtamabhyuddharecca yaḥ / dāyādebhyo na taddadyādvidyayā labdhameva ca

हिन्दी अर्थ

डकैती आदि) कर्म करके उसे स्वीकार नहीं करता--' मैंने नहीं किया है '--ऐसा उत्तर देता है, उसके ऊपर वस्तुके मूल्यसे चौगुना दण्ड लगाना

English

One who recovers property that has come in order and been taken, he should not give it to the co-heirs; nor what was gained by learning.

अध्याय २५४

श्लोक 10

पितृभ्यां यस्य यद्दत्तं तत्तस्यैव धनं भवेत् ।पितुरूर्ध्वं विभजतां माताप्यंशं समं हरेत्

pitṛbhyāṃ yasya yaddattaṃ tattasyaiva dhanaṃ bhavet / piturūrdhvaṃ vibhajatāṃ mātāpyaṃśaṃ samaṃ haret

हिन्दी अर्थ

जो मनुष्य दूसरेसे डकैती आदि 'साहस' करवाता है, उससे उस साहसके लिये कथित दण्डसे दूना दण्ड लेना चाहिए। जो ऐसा कहकर आदि) करो '', दूसरेसे 'साहस'का काम कराता है, उससे साहसिकके लिये नियत दण्डकी अपेक्षा चौगुना दण्ड वसूल करना चाहिए। श्रेष्ठ पुरुष (आचार्य आदि)-को निन्दा या आज्ञाका

English

What was given to one by his parents is his wealth alone. For those who divide after the father, the mother too takes an equal share.

अध्याय २५४

श्लोक 11

असंस्कृतास्तु संस्कार्या भ्रातृभिः पूर्वसंस्कृतैः ।भागिन्यश् च निजादंशाद्दत्वांशन्तु तुरीयकं

asaṃskṛtāstu saṃskāryā bhrātṛbhiḥ pūrvasaṃskṛtaiḥ / bhāginyaś ca nijādaṃśāddatvāṃśantu turīyakaṃ

हिन्दी अर्थ

उल्लङ्घन करनेवाले, भ्रातृपत्नी (भौजाई या भयहु)-पर प्रहार करनेवाले, प्रतिज्ञा करके न देनेवाले, किसीके बंद घरका ताला तोड़कर खोलनेवाले तथा पड़ोसी और कुटुम्बीजनोंका

English

The uninitiated are to be initiated by earlier-initiated brothers, and the sisters by giving a fourth part from their own shares.

अध्याय २५४

श्लोक 12

चतुःस्त्रिद्व्येकभागाः स्युर्वर्णशो ब्राह्मणात्मजाः ।क्षत्रजास्त्रिद्व्येकभागा विड्जास्तु द्व्येकभागिनः

catuḥstridvyekabhāgāḥ syurvarṇaśo brāhmaṇātmajāḥ / kṣatrajāstridvyekabhāgā viḍjāstu dvyekabhāginaḥ

हिन्दी अर्थ

अपकार करनेवालेपर राजा पचास पणका दण्ड लगावे, यह शास्त्रका निर्णय है (बिना नियोगके) स्वेच्छाचारपूर्वक विधवासे गमन करनेवाले, संकटग्रस्त मनुष्यके पुकारनेपर उसकी रक्षाके लिये दौड़कर न जानेवाले, अकारण ही लोगोंको रक्षाके लिये पुकारनेवाले, चाण्डाल

English

Sons of a Brahmin by caste would have four, three, two, one shares; Kshatriya's sons three, two, one; Vaishya's sons two and one.

अध्याय २५४

श्लोक 13

अन्योन्यापहृतं द्रव्यं विभक्ते यत्तु दृश्यते ।तत् पुनस्ते समैर् अंशैर् विभजेरन्निति स्थितिः

anyonyāpahṛtaṃ dravyaṃ vibhakte yattu dṛśyate / tat punaste samair aṃśair vibhajeranniti sthitiḥ

हिन्दी अर्थ

होकर श्रेष्ठ जातिवालोंका स्पर्श करनेवाले, हैव एवं पितृकार्यमें संन्यासीको भोजन करानेवाले, शूद्र, अनुचित शपथ करनेवाले, अयोग्य (अनधिकारी) होनेपर भी योग्य (अधिकारी)-

English

What is seen to have been taken from each other when divided, that again they should divide in equal shares — so it is established.

अध्याय २५४

श्लोक 14

अपुत्रेण परक्षेत्रे नियोगोत्पादितः सुतः ।उभयोरप्यसावृक्थी पिण्डदाता च धर्मतः

aputreṇa parakṣetre niyogotpāditaḥ sutaḥ / ubhayorapyasāvṛkthī piṇḍadātā ca dharmataḥ

हिन्दी अर्थ

के कर्म (वेदाध्ययनादि) करनेवाले, बैल एवं क्षुद्र पशु--बकरे आदिको बधिया करनेवाले, साधारण वस्तुमें भी ठगी करनेवाले तथा दासीका पति-पत्नी तथा आचार्य-शिष्य-ये पतित न होते हुए भी यदि एक-दूसरेका त्याग करते हों तो इनके ऊपर भी सौ पण दण्ड लगावे। यदि धोबी दूसरोंके वस्त्र पहने तो तीन पण और यदि बेचे,

English

A son begotten on another's field by appointment by a childless man is heir to both and a pinda-giver by dharma.

अध्याय २५४

श्लोक 15

औरसो धर्मपत्नीजस्तत्समः पुत्रिकासुतः ।क्षेत्रजः क्षेत्रजातस्तु सगोत्रेणेतरेण वा

auraso dharmapatnījastatsamaḥ putrikāsutaḥ / kṣetrajaḥ kṣetrajātastu sagotreṇetareṇa vā

हिन्दी अर्थ

उपर्युक्त अपराधोंके लिये जो राजदण्ड है, वही मूलमें बताया गया है; परंतु जो वस्त्र उसने गायब कर दिया हो, उसका मूल्य वह वस्त्र-स्वामीको अलगसे दे। मनुजीने यह व्यवस्था दी है कि “यदि वस्त्र एक बारका धुला है तो धोबी उसके मूल्यका अष्टमांश कम करके शेष मूल्य स्वामीको चुकावे। इसी तरह कई बारके धुले हुए वस्त्रका पादांश, तृतीयांश इत्यादि कम करके वह लौटावे ।'

English

The own-born son of the dharma-wife; equal to him the appointed daughter's son; the field-born, born in the field, of the same gotra or another;

अध्याय २५४

श्लोक 16

गृहे प्रच्छन्न उत्पन्नो गूढजस्तु सुतः स्मृतः ।कानीनः कन्यकाजातो मातामहसुतो मतः

gṛhe pracchanna utpanno gūḍhajastu sutaḥ smṛtaḥ / kānīnaḥ kanyakājāto mātāmahasuto mataḥ

हिन्दी अर्थ

अर्थदण्डके योग्य होता है । तोलनदण्ड, शासन, आदिसे चिह्वित निष्क आदि)--इनमें जो कूटकारी (मानके वजनमें कमी-बेशी तथा सुवर्णमें ताँबे आदिकी मिलावट करनेवाला) हो तथा उससे कूट-तुला आदि व्यवहार करता हो, उन दोनोंको

English

the one born hidden in the house is the secretly-born son; the maiden-born is held the maternal grandfather's son;

अध्याय २५४

श्लोक 17

क्षतायामक्षतायां वा जातः पौनर्भवः सुतः ।दद्यान्माता पिता वा यं स पुत्री दत्तको भवेत्

kṣatāyāmakṣatāyāṃ vā jātaḥ paunarbhavaḥ sutaḥ / dadyānmātā pitā vā yaṃ sa putrī dattako bhavet

हिन्दी अर्थ

पृथक्-पृथक् उत्तम साहसके दण्डसे दण्डित करना चाहिए। सिक्‍कोंकी परीक्षा करते समय यदि पारखी असली सिक्केको नकली या नकली सिक्केको असली बतावे तो राजा उससे भी प्रथम साहसका

English

the one born of a woman, violated or not, again married is the son of a remarried woman; one whom mother or father would give is the given son;

अध्याय २५४

श्लोक 18

क्रीतश् च ताभ्यां विक्रीतः कृत्रिमः स्यात् स्व्यं कृतः ।दत्तात्मा तु स्वयं दत्तो गर्भे वित्तः सहोढजः

krītaś ca tābhyāṃ vikrītaḥ kṛtrimaḥ syāt svyaṃ kṛtaḥ / dattātmā tu svayaṃ datto garbhe vittaḥ sahoḍhajaḥ

हिन्दी अर्थ

दण्ड वसूल करे। जो वैद्य आयुर्वेदको न जाननेपर भी पशुओं, मनुष्यों और राजकर्मचारियोंकी मिथ्या चिकित्सा करे, उसे क्रमशः प्रथम, मध्यम और उत्तम साहसके दण्डसे दण्डित करे। जो राजपुरुष कैद न करनेयोग्य (निरपराध) मनुष्योंको राजाको आज्ञाके बिना कैद करता है और बन्धनके योग्य बन्दीको उसके अभियोगका निर्णय होनेके पहले ही छोड़ देता है, उसे उत्तम साहसका दण्ड देना

English

one bought and sold by them is the made-son; self-made; the self-given by himself; found in the womb, the co-married-born;

अध्याय २५४

श्लोक 19

उत्सृष्टो गृह्यते यस्तु सोपविद्धो भवेत् सुतः ।पिण्डदो ऽंशहरश् चैषां पूर्वाभावे परः परः

utsṛṣṭo gṛhyate yastu sopaviddho bhavet sutaḥ / piṇḍado 'ṃśaharaś caiṣāṃ pūrvābhāve paraḥ paraḥ

हिन्दी अर्थ

चाहिए। जो व्यापारी कूटमान अथवा तुलासे धान-कपास आदि पण्यद्रव्यका अष्टमांश हरण करता है, वह दो सौ पणके दण्डसे दण्डनीय होता है। अपहत द्रव्य यदि अष्टमांशससे अधिक

English

one abandoned and taken up is the cast-off son. The pinda-giver and share-taker of these, in absence of the earlier, the later.

अध्याय २५४

श्लोक 20

सजातीयेष्वयं प्रोक्तस्तनयेषु मया विधिः ।जातो ऽपि दास्यां शूद्रस्य कामतो ऽंशहरो भवेत्

sajātīyeṣvayaṃ proktastanayeṣu mayā vidhiḥ / jāto 'pi dāsyāṃ śūdrasya kāmato 'ṃśaharo bhavet

हिन्दी अर्थ

या कम हो तो दण्डमें भी वृद्धि और कमी करनी चाहिए। ओषधि, घृत, तेल, लवण, गन्धद्रव्य, धान्य और गुड़ आदि पण्यवस्तुओंमें जो निस्सार वस्तुका मिश्रण कर देता है, राजा उसपर सोलह यदि व्यापारीलोग संगठित होकर राजाके द्वारा निश्चित किये हुए भावको जानते हुए भी लोभवश कारु और शिल्पियोंको पीड़ा देनेवाले मूल्यको वृद्धि या कमी करें तो राजा उनपर एक

English

This rule was told by me for sons of the same caste. Even one born of a Shudra's slave woman by desire becomes a share-taker.

अध्याय २५४

श्लोक 21

मृते पितरि कुर्युस्तं भ्रातरस्त्वर्धभागिकं ।अभ्रातृको हरेत् सर्वं दुहितॄणां सुतादृते

mṛte pitari kuryustaṃ bhrātarastvardhabhāgikaṃ / abhrātṛko haret sarvaṃ duhitṝṇāṃ sutādṛte

हिन्दी अर्थ

हजार पणका दण्ड लागू करे। राजा निकटवर्ती हो तो उनके द्वारा जिस वस्तुका जो मूल्य निर्धारित कर दिया गया हो, व्यापारीगण प्रतिदिन

English

When the father is dead the brothers should make him a half-share holder; the one without brothers takes all, except for daughters of the son.

अध्याय २५४

श्लोक 22

पत्नी दुहितरश् चैव पितरो भ्रातरस् तथा ।तत्सुतो गोत्रजो बन्धुः शिष्यः सब्रह्मचारिणः

patnī duhitaraś caiva pitaro bhrātaras tathā / tatsuto gotrajo bandhuḥ śiṣyaḥ sabrahmacāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

उसी भावसे क्रय-विक्रय करें; उसमें जो बचत हो, बही बनियोंके लिये लाभकारक मानी गयी है। व्यापारी देशज वस्तुपर पाँच प्रतिशत लाभ रखे और विदेशी द्रव्यको यदि शीघ्र ही क्रय- विक्रय कर ले तो उसपर दस प्रतिशत लाभ ले। राजा दूकानका खर्च पण्यवस्तुपर रखकर उसका भाव इस प्रकार निश्चित करे, जिससे क्रेता और विक्रेताको लाभ हो

English

Wife, daughters, parents, brothers, their sons, gotra-kin, relatives, pupil, fellow students —

अध्याय २५४

श्लोक 23

एषामभावे पूवस्य धनभागुत्तरोत्तरः ।स्वर्यात्स्य ह्य् अपुत्रस्य सर्ववर्णेष्वयं विधिः

eṣāmabhāve pūvasya dhanabhāguttarottaraḥ / svaryātsya hy aputrasya sarvavarṇeṣvayaṃ vidhiḥ

हिन्दी अर्थ

(प्रसङ्गप्राप्त साहस ' का प्रकरण समाप्त करके अब विक्रीयासम्प्रदान' आरम्भ करते हैं। नारदजीके वचनानुसार ' विक्रोयासम्प्रदान'का स्वरूप इस प्रकार है—''मूल्य लेकर पण्यवस्तुका विक्रय करके

English

in absence of these, the later takes the wealth of the earlier; for one who has gone to heaven childless this rule is in all castes.

अध्याय २५४

श्लोक 24

वानप्रस्थयतिब्रह्मचारिणामृक्थभागिनः ।क्रमेणाचार्यसच्छिष्यधर्मभ्रात्रेकतीर्थिनः

vānaprasthayatibrahmacāriṇāmṛkthabhāginaḥ / krameṇācāryasacchiṣyadharmabhrātrekatīrthinaḥ

हिन्दी अर्थ

जब खरीददारको वह वस्तु नहीं दी जाती है, तब वह 'विक्रीयासम्प्रदान' (बेचकर भी वस्तुको न देना) नामक विवादास्पद कहलाता है।'' विक्रेय वस्तु “चल' और ' अचल'के भेदसे दो प्रकारको होती है। फिर उसके छः भेद किये गये हैं --

English

Heirs of forest-dwellers, ascetics and students are in order the teacher, good pupil, dharma-brother, and co-pilgrim.

अध्याय २५४

श्लोक 25

संसृष्टिनस्तु संसृष्टी सोदरस्य तु सोदरः ।दद्याच्चापहेरेच्चांशं जातस्य च मृतस्य च

saṃsṛṣṭinastu saṃsṛṣṭī sodarasya tu sodaraḥ / dadyāccāpahereccāṃśaṃ jātasya ca mṛtasya ca

हिन्दी अर्थ

और दीप्तिसे उपलक्षित। सुपारीके फल आदि 'गणित' हैं; क्योंकि वे गिनकर बेचे जाते हैं। सोना, कस्तूरी और केसर आदि 'तुलित' हैं; क्योंकि वे तौलकर बेचे जाते हैं । शाली (अगहनी

English

A reunited one to the reunited, a uterine brother to the uterine; one should give and take a share of one born and one dead.

अध्याय २५४

श्लोक 26

अन्योदर्यस्तु संसृष्टी नान्योदर्यधनं हरेत् ।असंसृष्त्यपि चादद्यात्सोदर्यो नान्यमानृजः

anyodaryastu saṃsṛṣṭī nānyodaryadhanaṃ haret / asaṃsṛṣtyapi cādadyātsodaryo nānyamānṛjaḥ

हिन्दी अर्थ

धान) आदि 'मेय' हैं; क्योंकि वे पात्रविशेषसे माप कर दिये जाते हैं। 'क्रियोपलक्षित' वस्तुमें घोड़े, भैंस आदिकी गणना है; क्योंकि उनको चाल और दोहन आदिकी क्रियाको दृष्टिमें रखकर ही उनका क्रय-विक्रय होता है। 'रूपोपलक्षित' वस्तुमें पण्यस्त्री (वेश्या) आदिकी गणना है; क्योंकि उनके रूपके अनुसार ही उनका मूल्य होता है। “दीप्तिसे उपलक्षित' वस्तुओंमें हीरा,

English

The reunited of another womb should not take the wealth of another womb; even unreunited, the uterine brother may take, not another.

अध्याय २५४

श्लोक 27

पतितस्तत्सुतः क्लीवः पङ्गुरुन्मत्तको जडः ।अन्धो ऽचिकित्स्यरोगाद्या भर्तव्यास्तु निरंशकाः

patitastatsutaḥ klīvaḥ paṅgurunmattako jaḍaḥ / andho 'cikitsyarogādyā bhartavyāstu niraṃśakāḥ

हिन्दी अर्थ

मोती, मरकत और पद्मराग आदिकी गणना है। इन छहों प्रकारकी पण्यवस्तुको बेचकर, मूल्य लेकर भी यदि क्रेताको वह वस्तु नहीं दी जाती

English

The fallen, his son, the impotent, the lame, the mad, the dull, the blind, those with incurable disease and the like, share-less, are to be maintained;

अध्याय २५४

श्लोक 28

औरसाः क्षेत्रजास्त्वेषां निर्दोषा भागहारिणः ।सुताश् चैषां प्रभर्तव्या यावद्वै भर्तृसात्कृताः

aurasāḥ kṣetrajāstveṣāṃ nirdoṣā bhāgahāriṇaḥ / sutāś caiṣāṃ prabhartavyā yāvadvai bhartṛsātkṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

तो विक्रेताको किस प्रकार दण्डित करना चाहिए, न करनेकी स्थितिमें क्रेता या विक्रेता अनुशय जो व्यापारी मूल्य लेकर भी ग्राहकको माल न दे, उससे वृद्धिसहित वह माल ग्राहकको दिलाया जाय। यदि ग्राहक परदेशका हो तो उसके देशमें ले जाकर बेचनेसे जो लाभ होता है,

English

the own-born and field-born of these are blameless and share-takers. Their sons should be well maintained as long as they are made dependent on the husband.

अध्याय २५४

श्लोक 29

अपुत्रा योषितश् चैषां भर्तव्याः साधुवृत्तयः ।निर्वास्या व्यभिचारिण्यः प्रतिकूलास्तथैव च

aputrā yoṣitaś caiṣāṃ bhartavyāḥ sādhuvṛttayaḥ / nirvāsyā vyabhicāriṇyaḥ pratikūlāstathaiva ca

हिन्दी अर्थ

उस लाभसहित वह वस्तु राजा व्यापारीसे ग्राहकको दिलावे। यदि पहला ग्राहक मालमें किसी प्रकार संदेह होनेपर वस्तुको न लेना चाहे तो व्यापारी उस बेची हुई वस्तुको भी दूसरेके हाथ बेच

English

Childless wives of these are to be maintained if of good conduct; adulteresses and the contrary should be turned out.

अध्याय २५४

श्लोक 30

पितृमातृपतिभ्रातृदत्तमध्यग्न्युपागतं ।आधिवेदनिकुञ्चैव स्त्रीधनं परिकीर्तितं

pitṛmātṛpatibhrātṛdattamadhyagnyupāgataṃ / ādhivedanikuñcaiva strīdhanaṃ parikīrtitaṃ

हिन्दी अर्थ

सकता है। यदि विक्रेताके देनेपर भी ग्राहक न ले और वह पण्यवस्तु राजा या हैवकी बाधासे नष्ट हो जाय तो वह हानि क्रेताके ही दोषसे होनेके कारण वही उस हानिको सहन करेगा, बेचनेवाला नहीं । यदि ग्राहकके माँगनेपर भी उस बेची हुई पण्यवस्तुको बेचनेवाला नहीं दे और वह पण्यद्रव्य राजा या हैवके कोपसे उपहत हो जाय तो वह हानि विक्रेताकी होगी ॥ ४४--४६ ॥

English

What was given by father, mother, husband, brother, what was received before the fire, and the supersession gift, is declared woman's property;

अध्याय २५४

श्लोक 31

बन्धुदत्तं तथा शुल्कमन्वाधेयकमेव च ।अप्रजायामतीतायां बान्धवास्तदवाप्नुयुः

bandhudattaṃ tathā śulkamanvādheyakameva ca / aprajāyāmatītāyāṃ bāndhavāstadavāpnuyuḥ

हिन्दी अर्थ

जो व्यापारी किसीको बेची हुई वस्तु दूसरेके हाथ बेचता है, अथवा दूषित वस्तुको दोषरहित बतलाकर बेचता है, राजा उसपर वस्तुके मूल्यसे दुगुना अर्थदण्ड लगावे। जान-बूझकर खरीदे हुए

English

what was given by kin, bride-price, and later gifts. If she dies childless, her relatives would obtain it.

अध्याय २५४

श्लोक 32

अप्रजास्त्रीधनं भ्रत्तुर्ब्राह्म्यादिषु चतुर्ष्वपि ।दुहितृणां प्रसूता चेच्छ्रेषे तु पितृगामि तत्

aprajāstrīdhanaṃ bhratturbrāhmyādiṣu caturṣvapi / duhitṛṇāṃ prasūtā cecchreṣe tu pitṛgāmi tat

हिन्दी अर्थ

पण्यद्रव्योंका मूल्य खरीदनेके बाद यदि बढ़ गया या घट गया तो उससे होनेवाले लाभ या हानिको जो ग्राहक नहीं जानता, उसे 'अनुशय' (माल लेनेमें आनाकानी) नहीं करनी चाहिए। विक्रेता भी यदि बढ़े हुए दामके कारण अपनेको लगे हुए घाटेको नहीं जान पाया है तो उसे भी माल देनेमें आनाकानी नहीं करनी चाहिए। इससे यह बात स्वतः स्पष्ट हो जाती है कि खरीद-निक्रीके

English

The childless woman's property goes to her husband in the four marriages beginning with Brahma; if she has daughters, to the daughters; in the rest, to the father's side.

अध्याय २५४

श्लोक 33

दत्वा कन्यां हरन् दण्ड्यो व्ययं दद्याच्च सोदयम् ।मृतायां दत्तमादद्यात् परिशोध्योभयव्ययम्

datvā kanyāṃ haran daṇḍyo vyayaṃ dadyācca sodayam / mṛtāyāṃ dattamādadyāt pariśodhyobhayavyayam

हिन्दी अर्थ

पश्चात् यदि ग्राहकको घाटा दिखायी दे तो वह माल लेनेमें आपत्ति कर सकता है। इसी तरह विक्रेता उस भावपर माल देनेमें यदि हानि देखे तो वह उस मालको रोक सकता है। यदि अनुशय

English

One who takes back a maiden after giving her should be fined and pay the cost with interest; if she has died, he may take what was given after settling both expenses.

अध्याय २५४

श्लोक 34

दुर्भिक्षे धर्मकार्ये च व्याधौ संप्रतिरोधके ।गृहीतं स्त्रीधनं भर्ता न स्त्रिये दातुमर्हति

durbhikṣe dharmakārye ca vyādhau saṃpratirodhake / gṛhītaṃ strīdhanaṃ bhartā na striye dātumarhati

हिन्दी अर्थ

करें तो उनपर पण्यवस्तुके मूल्यका छठा अंश दण्ड लगाना चाहिए जो व्यापारी सम्मिलित होकर लाभके लिये व्यापार करते हैं, वे अपने नियोजित धनके अनुसार अथवा पहलेके समझौतेके अनुसार लाभ-हानिमें भाग ग्रहण करें। यदि उनमें कोई अपने साझीदारोंके

English

In famine, in a dharma act, in disease and in obstruction, woman's property taken by the husband — he need not give it back to the woman.

अध्याय २५४

श्लोक 35

अधिवित्तस्त्रियै दद्यादधिवेदनिकं समम् ।न दत्तं स्रीधनं यस्यै दत्ते त्वर्धं प्रकीर्तितम्

adhivittastriyai dadyādadhivedanikaṃ samam / na dattaṃ srīdhanaṃ yasyai datte tvardhaṃ prakīrtitam

हिन्दी अर्थ

मना करनेपर या उनके अनुमति न देनेपर, अथवा प्रमादवश किसी वस्तुमें हानि करेगा, तो क्षतिपूर्ति उसे ही करनी होगी। यदि उनमेंसे कोई पण्यद्रव्यकी विप्लवोंसे रक्षा करेगा तो वह दशमांश लाभका

English

To the superseded wife one should give an equal supersession-payment; one to whom no woman's property was given, if given, half is declared.

अध्याय २५४

श्लोक 36

विभागनिह्नवे ज्ञातिबन्धुसाक्ष्यभिलेखितैः ।विभागभावना ज्ञेया गृहक्षेत्रैश् च यौतिकैः

vibhāganihnave jñātibandhusākṣyabhilekhitaiḥ / vibhāgabhāvanā jñeyā gṛhakṣetraiś ca yautikaiḥ

हिन्दी अर्थ

पण्यद्रव्योंका मूल्य निश्चित करनेके कारण राजा मूल्यका बीसवाँ भाग अपने शुल्कके रूपमें ग्रहण करे। यदि कोई व्यापारी राजाके द्वारा निषिद्ध एवं राजोपयोगी वस्तुको लाभके लोभसे किसी दूसरेके हाथ बेचता है तो राजा उससे वह वस्तु बिना मूल्य दिये ले सकता है। जो मनुष्य शुल्कस्थानमें वस्तुका मिथ्या परिमाण बतलाता है, अथवा वहाँसे खिसक जानेकी चेष्टा करता है

English

In denial of partition, partition is to be known by kinsmen, relatives, witnesses, documents, houses, fields and marriage property.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 254
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.