अध्याय २६१
श्लोक 1
उत्पातशान्तिः पुष्कर उवाच श्रीसूक्तं प्रतिवेदञ्च ज्ञेयं लक्ष्मीविवर्धनं ।हिरण्यवर्णा हरिणीमृचः पञ्चदश श्रियः
utpātaśāntiḥ puṣkara uvāca śrīsūktaṃ prativedañca jñeyaṃ lakṣmīvivardhanaṃ / hiraṇyavarṇā hariṇīmṛcaḥ pañcadaśa śriyaḥ
हिन्दी अर्थ
अथर्ववेदमें सुमन्तु, जाजलि, श्लोकायनि, शौनक, पिप्पलाद और मुञ्जकेश आदि शाखाप्रवर्तक ऋषि हैं। इसमें सोलह हजार मन्त्र और सौ उपनिषद् हैं। व्यासरूपमें अवतीर्ण होकर भगवान् श्रीविष्णुने ही वेदोंकी शाखाओंका विभाग आदि किया है। वेदोंके शाखाभेद आदि इतिहास और पुराण सब विष्णुस्वरूप हैं । भगवान् व्याससे लोमहर्षण सूतने पुराण आदिका उपदेश पाकर उनका प्रवचन किया।
English
I have described the use of ( the hymns of) Tajur (oeda). I shall (now) describe the use of (the hymns of) Sdma {veda). One will get all the pleasures by repeating the oaifioi hymns.