अध्याय २७१
श्लोक 1
सूर्यवंशकीर्तनं अग्निर् उवाच सूर्यवंशं सोमवंशं रज्ञां वंशं वदमि ते ।हरेर्ब्रह्मा पद्मगो ऽभून्मरीचिर्ब्रह्मणः सुतः
sūryavaṃśakīrtanaṃ agnir uvāca sūryavaṃśaṃ somavaṃśaṃ rajñāṃ vaṃśaṃ vadami te / harerbrahmā padmago 'bhūnmarīcirbrahmaṇaḥ sutaḥ
हिन्दी अर्थ
वृक्ष मङ्गल माना गया है। घरके समीप दक्षिण दिशामें उत्पन्न हुए काँटेदार वृक्ष भी शुभ हैं। आवास-स्थानके आसपास उद्यानका निर्माण करे अथवा सब ओरका भाग पुष्पित तिलोंसे सुशोभित ब्राह्मण और चन्द्रमाका पूजन करके वृक्षोंका आरोपण करे। वृक्षारोपणके लिये तीनों उत्तय, स्वाती, हस्त, रोहिणी, श्रवण और मूल-- ये नक्षत्र अत्यन्त प्रशस्त हैं। उद्यानमें पुष्करिणी
English
The number of hymns of the (wrfa), Tajur (veda), SOma {veda) and Atharva {oeda) that yield all (the desires) and confer the four ends of the human life is one lakh.