Agni Purana· Agni Purāṇa
290
अध्याय 290 / 381

Adhyaya 291

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अध्याय २९०

श्लोक 1

शान्त्यायुर्वेदः धन्वन्तरिर् उवाच गोविप्रपालनं कर्यं रज्ञा गोशान्तिमावदे ।गावः पवित्रा माङ्गल्या गोषु लोकाः प्रतिष्ठिताः

śāntyāyurvedaḥ dhanvantarir uvāca goviprapālanaṃ karyaṃ rajñā gośāntimāvade / gāvaḥ pavitrā māṅgalyā goṣu lokāḥ pratiṣṭhitāḥ

हिन्दी अर्थ

तद्बच्च॒ जयन्तं हस्तिनापुरे । वाराहं वर्धमाने च काश्मीरे चक्रपाणिनम्॥

English

After having worshipped Sridhara (a form of Visnu), Sri (consort of Visnu) and Uccaihsravas, the chief among the horses, on an auspicious day, one should offer ghee as oblation with (the recitation of the formula) Savitra (Gayatri).

अध्याय २९०

श्लोक 2

शकृन्मूत्रं परं तासामलक्ष्मीनाशनं परं ।गवां कण्डूयनं वारि शृङ्गस्याघौघमर्दनम्

śakṛnmūtraṃ paraṃ tāsāmalakṣmīnāśanaṃ paraṃ / gavāṃ kaṇḍūyanaṃ vāri śṛṅgasyāghaughamardanam

हिन्दी अर्थ

हृषीकेशं गङ्गाद्वारे जटाधरम्॥ नेपाले लोकभावनम्॥

English

Then fees should be paid to the brahmins. Then the horses would increase. The propitiatory rite (should be done)

अध्याय २९०

श्लोक 3

गोमूत्रं गोमयं क्षीरं दधि सर्पश् च रोचना ।शडङ्गं परमं पाने दुःस्वप्नाद्यादिवारणं

gomūtraṃ gomayaṃ kṣīraṃ dadhi sarpaś ca rocanā / śaḍaṅgaṃ paramaṃ pāne duḥsvapnādyādivāraṇaṃ

हिन्दी अर्थ

नरं भूमौ तथा व्योम्नि वसिष्ठे गरुडध्वजम् । वासुदेवं च सर्वत्र संस्मरन् भुक्तिमुक्तिभाक् ॥

English

The reading oapufmatafi in the venk. cdn. does not fit in.

अध्याय २९०

श्लोक 4

रोचना विषरक्षोघ्नी ग्रासदः स्वर्गगो गवां ।यद्गृहे दुःखिता गावः स याति नरकन्नरः

rocanā viṣarakṣoghnī grāsadaḥ svargago gavāṃ / yadgṛhe duḥkhitā gāvaḥ sa yāti narakannaraḥ

हिन्दी अर्थ

तत्सर्वं कोटिगुणितं मृतो ब्रह्ममयो भवेत् । यः (अग्निपु० ३०५। १-१७)

English

Gorochana destroys poison and demons; the giver of fodder to cows goes to heaven; the man in whose house cows suffer goes to hell.

अध्याय २९०

श्लोक 5

परगोग्रासदः स्वर्गी गोहितो ब्रह्मलोकभाक् ।गोदानात्कीर्तनाद्रक्षां कृत्वा चोद्धरते कुलम्

paragogrāsadaḥ svargī gohito brahmalokabhāk / godānātkīrtanādrakṣāṃ kṛtvā coddharate kulam

हिन्दी अर्थ

श्रीनरसिंह आदिके मन्त्र

English

The giver of fodder to others' cows is a heaven-goer; one devoted to cows shares Brahma's world. By giving cows, praising them, protecting them, he lifts the family.

अध्याय २९०

श्लोक 6

गवां श्वासात् पवित्रा भूः स्पर्शनात्किल्विषक्षयः ।गोमूत्रं गोमयं क्षीरं दधि सर्पिः कुशोदकम्

gavāṃ śvāsāt pavitrā bhūḥ sparśanātkilviṣakṣayaḥ / gomūtraṃ gomayaṃ kṣīraṃ dadhi sarpiḥ kuśodakam

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं-मुने! स्तम्भन, विद्वेषण, ये “क्ुद्र'संज्ञक अभिचारिक कर्म हैं। इनसे छुटकारा कैसे प्राप्त हो? यह बात बताऊँगा; सुनो-

English

The earth is purified by the breath of cows; by touching them, sin is destroyed. Cow-urine, cow-dung, milk, curds, ghee and kusha water,

अध्याय २९०

श्लोक 7

एकरात्रोपवासश् च श्वपाकमपि शोधयेत् ।सर्वाशुभविनाशाय पुराचीरतमीश्वरैः

ekarātropavāsaś ca śvapākamapi śodhayet / sarvāśubhavināśāya purācīratamīśvaraiḥ

हिन्दी अर्थ

श्मशान-भूमिमें रातको इस मन्त्रका तीन लाख जप करे। फिर चिताको आगमें धतूरेको समिधाओंद्वारा हवन करे। इस प्रयोगसे शत्रु सदा भ्रान्त होता-चक्करमें पड़ा रहता है।

English

and a one-night fast would purify even a dog-cooker. For destruction of all evil, practiced of old by lords,

अध्याय २९०

श्लोक 8

प्रत्येकञ्च त्र्यहाभ्यम्तं महासान्तपनं स्मृतं ।सर्वकामप्रदञ्चैतत् सर्वाशुभविमर्दनम्

pratyekañca tryahābhyamtaṃ mahāsāntapanaṃ smṛtaṃ / sarvakāmapradañcaitat sarvāśubhavimardanam

हिन्दी अर्थ

सुनहरे गेरूसे शत्रुको प्रतिमा बनाकर उक्त की हुई सोनेकी सूइयोंसे उस प्रतिमाके कण्ठ अथवा हृदयको बींधे। इस प्रयोगसे शत्रुको मृत्यु हो जाती है। गधेका बाल (अथवा खराश्वा-मयूरशिखा नामक ओषधिके पत्ते),

English

each of three days is remembered as the great Santapana. This fulfils all desires and crushes all evil.

अध्याय २९०

श्लोक 9

कृच्छ्रातिकृच्छ्रं पयसा दिवसानेकविंशतिं ।निर्मलाः सर्वकामाप्त्या स्युर्गगाः स्पुर् नतोत्तमाः

kṛcchrātikṛcchraṃ payasā divasānekaviṃśatiṃ / nirmalāḥ sarvakāmāptyā syurgagāḥ spur natottamāḥ

हिन्दी अर्थ

चिताका भस्म, ब्रह्मदण्डी (ब्रह्मदारु या तूतको लकड़ी) तथा मर्कटी (करंजभेद)-इन सबको जलाकर भस्म (चूर्ण) बना ले। उस भस्म

English

Krichchhra-atikrichchhra with milk for twenty-one days: they become stainless, and with all desires attained, the best of cows (devotees) become bowed.

अध्याय २९०

श्लोक 10

त्र्यहमुष्णं पिवेन्मूत्रं त्र्यहमुष्णं घृतं पिवेत् ।त्र्यहमुष्णं पयः पीत्वा वायुभक्षः परं त्र्यहम्

tryahamuṣṇaṃ pivenmūtraṃ tryahamuṣṇaṃ ghṛtaṃ pivet / tryahamuṣṇaṃ payaḥ pītvā vāyubhakṣaḥ paraṃ tryaham

हिन्दी अर्थ

या चूर्णको उक्त मन्त्रसे अभिमन्त्रित करके उत्सादनका प्रयोग करनेवाला पुरुष शत्रुके घरपर अथवा उसके मस्तकपर फेंक दे' भृगु (स) आकाश (ह), दीप्त (दीर्घ आकारयुक्त) रेफसहित भृगु (स) अर्थात् (सहस्रा), फिर र, वर्म (हुम्) और फट् इस प्रकार सब मिलकर मन्त्र बना सहस्त्रार हुं फट्।' इसका

English

Three days one should drink hot urine; three days drink hot ghee; three days drinking hot milk; then three days living on air.

अध्याय २९०

श्लोक 11

तप्तकृच्छ्रव्रतं सर्वपापघ्नं ब्रह्मलोकदं ।शीतैस्तु शीतकृच्छ्रं स्याद्ब्रह्मोक्तं ब्रह्मलोकदं

taptakṛcchravrataṃ sarvapāpaghnaṃ brahmalokadaṃ / śītaistu śītakṛcchraṃ syādbrahmoktaṃ brahmalokadaṃ

हिन्दी अर्थ

अङ्गन्यास इस प्रकार है-आचक्राय स्वाहा, हृदयाय नमः। विचक्राय स्वाहा, शिरसे स्वाहा।

English

The Tapta-krichchhra vow destroys all sin and gives Brahma's world; with cold things it is Shita-krichchhra, told by Brahma, giving Brahma's world.

अध्याय २९०

श्लोक 12

गोमूत्रेणाचरेत्स्नानं वृत्तिं कुर्याच्च गोरसैः ।गोभिर्व्रजेच्च भुक्तासु भुञ्जीताथ च गोव्रती

gomūtreṇācaretsnānaṃ vṛttiṃ kuryācca gorasaiḥ / gobhirvrajecca bhuktāsu bhuñjītātha ca govratī

हिन्दी अर्थ

न्यास पूर्ववत् कहे गये हैं। अङ्गन्यासपूर्वक जपा हुआ सुदर्शनचक्र मन्त्र पूर्वोक्त 'क्षुद्र'संज्ञक अभिचारों तथा ग्रहबाधाओंको हर लेनेवाला और समस्त मनोरथोंको पूर्ण करनेवाला है उक्त सुदर्शन-मन्त्रके छः अक्षरोंका क्रमशः

English

One should bathe with cow-urine and make a living from cow products; go with the cows, eat when they have eaten, a vower of the cow.

अध्याय २९०

श्लोक 13

मासेनैकेन निष्पापो गोलोकी स्वर्गगो भवेत् ।विद्याञ्च गोमतीं जप्त्वा गोलोकं परमं व्रजेत्

māsenaikena niṣpāpo golokī svargago bhavet / vidyāñca gomatīṃ japtvā golokaṃ paramaṃ vrajet

हिन्दी अर्थ

अङ्गोंमें न्यास करे। इसके बाद चक्रस्वरूप भगवान् विष्णुका ध्यान करे--' भगवान् चक्राकार कमलके आसनपर विराजमान हैं। उनकी आभा

English

In one month he becomes sinless and a dweller in the cow-world, heaven-goer. Having recited the Gomati knowledge he goes to the supreme cow-world;

अध्याय २९०

श्लोक 14

गितैर् नृत्यैर् अप्सरोभिर्विमाने तत्र मोदते ।गावः सुरभयो नित्यं गावो गुग्गुलगन्धिकाः

gitair nṛtyair apsarobhirvimāne tatra modate / gāvaḥ surabhayo nityaṃ gāvo guggulagandhikāḥ

हिन्दी अर्थ

१. ' तन्त्रसार-संग्रह' १७ वें पटल, श्लोक ३०में भी इस मन्त्रका यही रूप है। इस मन्त्रका अङ्गन्यास इस प्रकार करना चाहिए -- ' ॐ नमो भगवते हृदयाय नम: । उन्मत्तरुद्राय शिरसे स्वाहा। भ्रम भ्रम भ्रामय भ्रामय शिखायै वषट्। अमुकं वित्रासय वित्रासय कवचाय २. “तन्त्रसार-संग्रह ' में इस श्लोकका पाठ इस प्रकार मिलता है-- सप्तग्रामोत्थवल्मीकमृत्ल्नाविषतरुत्वचौ । कर्ण्यग्निमन्थवन्दाकौ पक्षौ मूकद्विकद्विषोः॥ खरवालं चिताभस्म ब्रह्मदण्डी च मर्कटी। गृहे वा मूर्ध्नि तच्चूर्ण क्षिप्तमुत्सादनं रिपोः॥ (१७ पटल, श्लोक ७०-७२) “सात गाँवोंके बिमौटकी मिट्टी, विषवृक्षकी छाल, कर्णी (कमलगट्टा), अग्निमन्थवन्दाक (वस्तुविशेष), काकपंख, उल्लूकी पाँख,

English

with songs and dances and Apsarases he rejoices there in an aerial car. Cows are ever fragrant; cows smell of guggulu;

अध्याय २९०

श्लोक 15

गावः प्रतिष्ठा भूतानां गावः स्वस्त्ययनं परं ।अन्नमेव परं गावो देवानां हविरुत्तमम्

gāvaḥ pratiṣṭhā bhūtānāṃ gāvaḥ svastyayanaṃ paraṃ / annameva paraṃ gāvo devānāṃ haviruttamam

हिन्दी अर्थ

खरबाल, चिताभस्म, ब्रह्मदण्डी (शहतूतकी लकड़ी) और मर्कटी (करंज)-इन दस वस्तुओंका भस्म-चूर्ण यदि शत्रुके घरपर या उसके मस्तकपर डाल दिया जाय तो उसका उत्सादन (उजड़कर अन्यत्र जाना अथवा वहीं नष्ट हो जाना ) होता है।' ३. 'शारदातिलक में यहाँ आत्मरक्षाके लिये दिग्बन्ध करने और अग्निमय प्राकार (चहारदिवारी) निर्माण करनेकी आवश्यक्ता बताते हुए दिग्बन्ध-मन्त्र एवं अग्नि-प्राकार-मन्त्र दिये गये हैं, जो इस प्रकार हैं- ३» ऐ्द्रीं (आग्नेयीम् इत्यादि) चक्रेण बध्नामि

English

cows are the foundation of beings; cows are the supreme blessing; cows are the best food, the best oblation of the gods;

अध्याय २९०

श्लोक 16

पावनं सर्वभूतानां क्षरन्ति च वदन्ति च ।हविषा मन्त्रपूतेन तर्पयन्त्यमरान्दिवि

pāvanaṃ sarvabhūtānāṃ kṣaranti ca vadanti ca / haviṣā mantrapūtena tarpayantyamarāndivi

हिन्दी अर्थ

नमश्चक्राय स्वाहा '--यह 'दिग्बन्ध' है तथा “३ त्रैलोक्यं रक्ष रक्ष हुं फट् स्वाहा ।'--यह अग्निमय-प्राकारमन्त्र है। द्रष्टव्य --पटल १५, - अग्निसे भी अधिक तेजस्विनी है। उनके मुखमें दाढ़ें हैं। वे चार भुजाधारी होते हुए भी अष्टबाहु हैं। वे अपने हाथोंमें क्रमशः शङ्ख, चक्र, गदा,

English

purifying all beings, they flow and speak. With oblation purified by mantra they satisfy the immortals in heaven.

अध्याय २९०

श्लोक 17

ऋषीणामग्निहोत्रेषु गावो होमेषु योजिताः ।सर्वेषामेव भूतानां गावः शरणमुत्तमं

ṛṣīṇāmagnihotreṣu gāvo homeṣu yojitāḥ / sarveṣāmeva bhūtānāṃ gāvaḥ śaraṇamuttamaṃ

हिन्दी अर्थ

करते हैं। उनके केश पिङ्गलवर्णके और नेत्र लाल हैं। उन्होंने अरोंसे त्रिलोकीको व्याप्त कर रखा है। चक्रकी नाभि (नाहा) उस अग्रिसे आविद्ध (व्याप्त) है। उसके चिन्तनमात्रसे समस्त

English

In the Agnihotras of sages, cows are employed in oblations; for all beings cows are the best refuge;

अध्याय २९०

श्लोक 18

गावः पवित्रं परमं गावो माङ्गल्यमुत्तमं ।गावः स्वर्गस्य सोपानं गावो धन्याः सनातनाः

gāvaḥ pavitraṃ paramaṃ gāvo māṅgalyamuttamaṃ / gāvaḥ svargasya sopānaṃ gāvo dhanyāḥ sanātanāḥ

हिन्दी अर्थ

रोग तथा अरिष्टग्रह नष्ट हो जाते हैं। सम्पूर्ण चक्र पीतवर्णका है। उसके सुन्दर अरे रक्तवर्णके हैँ। उन अरोंका अवान्तरभाग श्यामवर्णका है । चक्रकी नेमि श्वेतवर्णकी है। उसमें बाहरकी ओरसे कृष्णवर्णकी पार्थिवी रेखा है। अरोंसे युक्त जो मध्यभाग है, उसमें समस्त अकारादि वर्ण हैं।' इस प्रकार दो चक्र-चिह अङ्कित करे ॥ ९--१२॥ आदि (उत्तरवर्ती) चक्रपर कलशका जल ले

English

cows are the supreme purifier, cows the best auspiciousness; cows are the stairway to heaven, cows are fortunate and eternal.

अध्याय २९०

श्लोक 19

नमो गोभ्यः श्रीमतीभ्यः सौरभेयीभ्य एव च ।नमो ब्रह्मसुताभ्यश् च पवित्राभ्यो नमो नमः

namo gobhyaḥ śrīmatībhyaḥ saurabheyībhya eva ca / namo brahmasutābhyaś ca pavitrābhyo namo namaḥ

हिन्दी अर्थ

अपने आगे समीपमें ही स्थापित करे। दूसरे दक्षिण चक्रपर सुदर्शनकी पूजा करके वहाँ अग्निमें क्रमशः घी, अपामार्गकी समिधा, अक्षत, तिल, सरसों, खीर और गोघृत--सबकी आहुतियाँ

English

Homage to the cows, the glorious, the Saurabheyis; homage to the Brahma-born, the pure ones; homage, homage.

अध्याय २९०

श्लोक 20

ब्राह्मणाश् चैव गावश् च कुलमेकं द्विधा कृतम् ।एकत्र मन्त्रास्तिष्ठन्ति हविरेकत्र तिष्ठति

brāhmaṇāś caiva gāvaś ca kulamekaṃ dvidhā kṛtam / ekatra mantrāstiṣṭhanti havirekatra tiṣṭhati

हिन्दी अर्थ

दे। प्रत्येक वस्तुकी एक हजार आठ आहुतियाँ पृथक्-पृथक् देनी चाहिए विधि-विधानका ज्ञाता विद्वान् प्रत्येक द्रव्य हुतशेष भाग कलशमें डाले । तदनन्तर एक प्रस्थ (सेर) अन्नद्वारा निर्मित पिण्ड उस कलशके भीतर रखे। फिर विष्णु आदि देवोंके लिये सब

English

Brahmins and cows are one family made twofold; in one the mantras stand, in the other the oblation stands.

अध्याय २९०

श्लोक 21

देवब्राह्मणगोसाधुसाध्वीभिः सकलं जगत् ।धार्यते वै सदा तस्मात् सर्वे पूज्यतमा मताः

devabrāhmaṇagosādhusādhvībhiḥ sakalaṃ jagat / dhāryate vai sadā tasmāt sarve pūjyatamā matāḥ

हिन्दी अर्थ

देय वस्तु वहीं दक्षिण भागमें स्थापित करे

English

The whole world is always supported by gods, Brahmins, cows, good men and good women; therefore all are held most worthy of worship.

अध्याय २९०

श्लोक 22

पिवन्ति यत्र तत्तीर्थं गङ्गाद्या गाव एव हि ।गवां माहात्म्यमुक्तं हि चिकित्साञ्च तथा शृणु

pivanti yatra tattīrthaṃ gaṅgādyā gāva eva hi / gavāṃ māhātmyamuktaṃ hi cikitsāñca tathā śṛṇu

हिन्दी अर्थ

इसके बाद ' सर्वशान्तिकर विष्णुजनों (भगवान् विष्णुके पार्षदों)-को नमस्कार है। वे शान्तिके लिये यह उपहार ग्रहण करें। उनको नमस्कार है।इस मन्त्रको पढ़कर हुतशेष जलसे बलि समर्पित करे। किसी काष्ठ-फलकपर या कलशमें अथवा दूधवाले वृक्षको लकड़ीसे बनवाये हुए

English

Where they drink is a holy place — the cows themselves are Ganga and the rest. The greatness of cows has been told; now hear their treatment likewise.

अध्याय २९०

श्लोक 23

शृङ्गामयेषु धेनूनां तैलं दद्यात् ससैन्धवं ।शृङ्गवेरबलामांसकल्कसिद्धं समाक्षिकं

śṛṅgāmayeṣu dhenūnāṃ tailaṃ dadyāt sasaindhavaṃ / śṛṅgaverabalāmāṃsakalkasiddhaṃ samākṣikaṃ

हिन्दी अर्थ

दधिपूर्ण काष्ठपात्रमें बलिको वस्तु रखकर प्रत्येक दिशामें अर्पित करे। यह करके ही द्विजोंके द्वारा होम कराना चाहिए। दक्षिणासहित दो बार किया हुआ यह होम भूत-प्रेत आदिका नाशक होता

English

In horn diseases of cows one should give oil with rock salt, cooked with paste of ginger, bala and meat, with honey.

अध्याय २९०

श्लोक 24

कर्णशूलेषु सर्वेषु मञ्जिष्ठाहिङ्गुसैन्धवैः ।सिद्धं तैलं प्रदातव्यं रसोनेनाथ वा पुनः

karṇaśūleṣu sarveṣu mañjiṣṭhāhiṅgusaindhavaiḥ / siddhaṃ tailaṃ pradātavyaṃ rasonenātha vā punaḥ

हिन्दी अर्थ

दही लगे हुए पत्तेपर लिखित मन्त्रक्षरोंद्वारा किया गया होम क्षुद्र रोगोंका नाशक होता है। दूर्वासे होम किया जाय तो वह आयुको, कमलोंकी आहुति दी जाय तो वह श्री (ऐश्वर्य) - की और गूलर-काष्ठसे हवन किया जाय तो वह पुत्रकी प्राप्ति करानेवाला होता है। गोशालामें घीके द्वारा आहुति देनेसे गौओंकी प्राप्ति एवं वृद्धि होती है। इसी प्रकार सम्पूर्ण वृक्षोंकी

English

In all earaches, oil prepared with manjishtha, hing and rock salt should be given, or again with garlic.

अध्याय २९०

श्लोक 25

बिल्वमूलमपामार्गन्धातकी चसपाटला ।कुटजन्दन्तमूलेषु लेपात्तच्छूलनाशनं

bilvamūlamapāmārgandhātakī casapāṭalā / kuṭajandantamūleṣu lepāttacchūlanāśanaṃ

हिन्दी अर्थ

समिधासे किया गया होम बुद्धिको वृद्धि करनेवाला होता है

English

Bilva root, apamarga, dhataki, patala, kutaja, applied to the tooth roots, destroys the pain;

अध्याय २९०

श्लोक 26

दन्तशूलहरैर् द्रव्यैर् घृतं राम विपाचितं ।मुखरोगहरं ज्ञेयं जिह्वारोगेषु सैन्धवं

dantaśūlaharair dravyair ghṛtaṃ rāma vipācitaṃ / mukharogaharaṃ jñeyaṃ jihvārogeṣu saindhavaṃ

हिन्दी अर्थ

--यह भगवान् नरसिंहका मन्त्र समस्त पापोंका निवारण करनेवाला है। इसका जप आदि किया जाय तो यह क्षुद्र महामारी, विष एवं रोगोंका हरण कर सकता है। चूर्णीभूत मण्डूक-वयस् (औषध- विशेष)-से हवन किया जाय तो वह जलस्तम्भन और अग्नि-स्तम्भन करनेवाला होता है

English

ghee cooked with substances removing toothache, Rama, is to be known as removing mouth diseases; in tongue diseases, rock salt.

अध्याय २९०

श्लोक 27

शृङ्गवेरं हरिद्रे द्वे त्रिफला च गलग्रहे ।हृच्छूले वस्तिशूले च वातरोगे क्षये तथा

śṛṅgaveraṃ haridre dve triphalā ca galagrahe / hṛcchūle vastiśūle ca vātaroge kṣaye tathā

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें 'नरसिंह आदिके मन्त्रीका कथन नामक तीन सौ छठवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

Ginger, the two turmerics and triphala in throat-seizure; in heart colic, bladder colic, wind disease and consumption;

अध्याय २९०

श्लोक 28

त्रिफला घृतमिश्रा च गवां पाने प्रशस्यते ।अतीसारे हरिद्रे द्वे पाठाञ्चैव प्रदापयेत्

triphalā ghṛtamiśrā ca gavāṃ pāne praśasyate / atīsāre haridre dve pāṭhāñcaiva pradāpayet

हिन्दी अर्थ

' ३ क्षौं' ज्चालामालाओंसे समलंकृत दीप्तिमती दंष्ट्राओंसे देदीप्यमान, अग्निमय नेत्रवाले, सर्वराक्षससंहारक, सर्वभूतविनाशक, सर्वज्चरापहारक भगवान् नरसिंहको नमस्कार है । जलाओ, जलाओ, पकाओ, पकाओ, मुझे बचाओ, बचाओ हुं फट्।' यह इस मन्त्रका अर्थ है।

English

triphala mixed with ghee is praised as a drink for cows. In diarrhea one should give the two turmerics and patha;

अध्याय २९०

श्लोक 29

सर्वेषु कोष्ठरोगेषु तथाशाखागदेषु च ।शृङ्गवेरञ्च भार्गीञ्च कासे श्वासे प्रदापयेत्

sarveṣu koṣṭharogeṣu tathāśākhāgadeṣu ca / śṛṅgaverañca bhārgīñca kāse śvāse pradāpayet

हिन्दी अर्थ

त्रैलोक्यमोहन आदि मन्त्र

English

in all belly diseases and diseases of the branches, ginger and bharngi in cough and asthma;

अध्याय २९०

श्लोक 30

दातव्या भग्नसन्धाने प्रियङ्गुर्लबणान्विता ।तैलं वातहरं पित्ते मधुयष्टीविपाचितं

dātavyā bhagnasandhāne priyaṅgurlabaṇānvitā / tailaṃ vātaharaṃ pitte madhuyaṣṭīvipācitaṃ

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं— मुने! अब मैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष-इन चारों पुरुषार्थोंकी सिद्धिके लिये 'त्रैलोक्यमोहन' नामक मन्त्रका वर्णन करूँगा सर्वस्त्रीहदयदारण त्रिभुवनमदोन्मादकर सुर-

English

priyangu with salt should be given in fractures; oil removes wind; in bile, oil cooked with honey and licorice;

अध्याय २९०

श्लोक 31

कफे व्योषञ्च समधु सपुष्टकरजो ऽस्रजे ।तैलाज्यं हरितालञ्च भग्नक्षतिशृतन्ददेत्

kaphe vyoṣañca samadhu sapuṣṭakarajo 'sraje / tailājyaṃ haritālañca bhagnakṣatiśṛtandadet

हिन्दी अर्थ

द्रावय द्रावयाकर्षयाकर्षष परमसुभग सर्वसौभाग्यकर कामप्रदामुकं ( शत्रुम् ) हन हन

English

in phlegm, the three pungents with honey; in blood-disease, with pushta and karaja; oil, ghee and haritala should be given cooked for broken wounds.

अध्याय २९०

श्लोक 32

मासास्तिलाः सगोधूमाः पशुक्षीरं घृतं तथा ।एषां पिण्डी सलवणा वत्सानां पुष्टिदात्वियं

māsāstilāḥ sagodhūmāḥ paśukṣīraṃ ghṛtaṃ tathā / eṣāṃ piṇḍī salavaṇā vatsānāṃ puṣṭidātviyaṃ

हिन्दी अर्थ

ॐ पुरुषोत्तम त्रिभुवनमदोन्मादकर हुँ फट् शिरसे स्वाहा। दीपय दीपय शोषय शोषय मारय

English

Masha, sesame, wheat, animal milk and ghee — a ball of these with salt is this nourisher of calves;

अध्याय २९०

श्लोक 33

बलप्रदा विषाणां स्यद्ग्रहनाशाय धूपकः ।देवदारु वचा मांसी गुग्गुलुर्हिङ्गुसर्षपाः

balapradā viṣāṇāṃ syadgrahanāśāya dhūpakaḥ / devadāru vacā māṃsī guggulurhiṅgusarṣapāḥ

हिन्दी अर्थ

हुम्। आकर्षयाकर्षय महाबल हुं फट् नेत्रत्रयाय

English

strength-giving for those with horns; fumigation for destroying seizures: devadaru, vacha, mamsi, guggulu, hing and mustard;

अध्याय २९०

श्लोक 34

ग्रहादिगदनाशाय एष धूपो गवां हितः ।घण्ठा चैव गवां कार्या धूपेनानेन भूपिता

grahādigadanāśāya eṣa dhūpo gavāṃ hitaḥ / ghaṇṭhā caiva gavāṃ kāryā dhūpenānena bhūpitā

हिन्दी अर्थ

फट्। त्रैलोक्यमोहन हृषीकेशाप्रतिरूप सर्वस्त्री- हृदयाकर्षण आगच्छ-आगच्छ नमः। ( सर्वाङ्गे ) व्यापकम् इस प्रकार मूलमन्त्रयुक्त व्यापक न्यास बताया गया। फिर पूजन तथा पचास हजारको संख्यामें जप करके अभिषेक करे। तत्पश्चात् वैदिक विधिसे स्थापित कुण्डाग्निमें सौ बार आहुति दे। दही, घी,

English

this fumigation is beneficial for cows for destroying seizures and diseases. A bell should be made for cows, adorned with this incense;

अध्याय २९०

श्लोक 35

अश्वगन्धातिलैः शुक्लं तेन गौः क्षीरिणी भवेत् ।रसायनञ्च पिन्याकं मत्तो यो धार्यते गृहे

aśvagandhātilaiḥ śuklaṃ tena gauḥ kṣīriṇī bhavet / rasāyanañca pinyākaṃ matto yo dhāryate gṛhe

हिन्दी अर्थ

खीर, सघृत चरु तथा औटाये हुए दूधको पृथक्- पृथक् बारह-बारह आहुतियाँ मूलमन्त्रसे दे। फिर अक्षत, तिल और यवकी एक हजार आहुतियाँ देनेके पश्चात् त्रिमधु, पुष्प, फल, दही तथा

English

with ashvagandha and sesame white; by that the cow becomes a good milker. A rejuvenative is oil-cake; one who keeps it in the house,

अध्याय २९०

श्लोक 36

भवां पुरीषे पञ्चभ्यां नित्यं शान्त्यै श्रियं यजेत् ।वासुदेवञ्च गन्धाद्यैर् अपरा शान्तिरुच्यते

bhavāṃ purīṣe pañcabhyāṃ nityaṃ śāntyai śriyaṃ yajet / vāsudevañca gandhādyair aparā śāntirucyate

हिन्दी अर्थ

समिधाओंकी सौ-सौ बार आहुतियाँ दे तदनन्तर पूर्णाहुति-होम करके हुतावशिष्ट सघृत चरुका प्राशन करे-कराये। फिर ब्राह्मण- भोजन कराकर आचार्यको उचित दक्षिणा आदिसे संतुष्ट करे। यों करनेसे मन्त्र सिद्ध होता है । स्नान

English

in the cow-dung on the fifth, always for peace should worship Shri; and Vasudeva with scents and the rest — another peace-rite is told.

अध्याय २९०

श्लोक 37

अश्वयुक्शुक्लपक्षस्य पञ्चदश्यां यजेद्धरिं ।हरिरुद्रमजं सूर्यं श्रियमग्निं घृतेन च

aśvayukśuklapakṣasya pañcadaśyāṃ yajeddhariṃ / harirudramajaṃ sūryaṃ śriyamagniṃ ghṛtena ca

हिन्दी अर्थ

करके विधिवत् आचमन करे और मौनभावसे यागमन्दिरमें जाकर पद्मासनसे बैठे और तान्त्रिक विधिके अनुसार शरीरका शोषण करे। पहले राक्षसों तथा विघ्नकारक भूतोंका दमन करनेके

English

On the full moon of the bright half of Ashvina one should worship Hari; Hari, Rudra, the Unborn, Sun, Shri and Agni with ghee;

अध्याय २९०

श्लोक 38

दधि सम्प्राश्य गाः पूज्य कार्यं वाह्निप्रदक्षिणं ।वृषाणां योजेयेद् युद्धं गीतवाद्यरवैर् वहिः

dadhi samprāśya gāḥ pūjya kāryaṃ vāhnipradakṣiṇaṃ / vṛṣāṇāṃ yojeyed yuddhaṃ gītavādyaravair vahiḥ

हिन्दी अर्थ

लिये सम्पूर्ण दिशाओंमें सुदर्शनका न्यास करे। साथ ही यह भावना करे कि वह सुदर्शन अस्त्र पाँच क्लेशोंके बीजभूत, धूम्रवर्ण एवं प्रचण्ड अनिलरूप मेरे सम्पूर्ण पापको, जो नाभिमें स्थित है, शरीरसे अलग कर रहा है। फिर हृदयकमलमें स्थित 'रं' बीजका स्मरण करके ऊपर, नीचे तथा अगल-बगलमें फैली हुई अग्निको ज्चालाओंसे उस पाप-पुञ्को जलाकर भस्म कर दे। फिर

English

having eaten curds and worshipped cows, a circumambulation of the fire should be made; one should engage bulls in a fight outside with songs and instruments.

अध्याय २९०

श्लोक 39

गवान्तु लवणन्देयं ब्राह्मणानाञ्च दक्षिणा ।नैमित्तिके माकरादौ यजेद्विष्णुं सह श्रिया

gavāntu lavaṇandeyaṃ brāhmaṇānāñca dakṣiṇā / naimittike mākarādau yajedviṣṇuṃ saha śriyā

हिन्दी अर्थ

इस मन्त्रका अर्थ यों है-“३ श्रीं हीं हूं ओम् सच्चिदानन्दस्वरूप पुरुषोत्तम! पुरुषोत्तमप्रतिरूप! लक्ष्मीनिवास! आप अपने

English

Salt should be given to cows and a fee to Brahmins. On occasional days like the Makara (Sankranti) one should worship Vishnu with Shri;

अध्याय २९०

श्लोक 40

स्थण्डिलेब्जे मध्यगते दिक्षु केशरगान् सुरान् ।सुभद्राजो रविः पूज्यो बहुरूपो बलिर्वहिः

sthaṇḍilebje madhyagate dikṣu keśaragān surān / subhadrājo raviḥ pūjyo bahurūpo balirvahiḥ

हिन्दी अर्थ

सौन्दर्यसे सम्पूर्ण जगत्को क्षुब्ध कर देनेमें समर्थ हैं । समस्त स्त्रियोंक हृदयको दरण--उन्मथित कर देनेवाले हैं। त्रिभुवनको मदोन्मत्त कर देनेकी शक्ति रखते हैं । देवसुन्दरियों तथा मानवसुन्दरियोंके मनको (प्रीति-अग्निमें) तपाइये, तपाइये; उनके रागको उद्दीप्त कीजिये, उद्दीप्त कीजिये; सोखिये, सोखिये; मारिये, मारिये; उनका स्तम्भन कीजिये; स्तम्भन कीजिये; द्रवित कोजिये, द्रवित कीजिये; आकर्षित कीजिये, आकर्षित कीजिये। परम सौभाग्यनिधे ! सर्वसौभाग्यकारी प्रभो! आप सबकी मनोवाञ्छित कामना पूर्ण करनेवाले हैं। मेरे अमुक शत्रुका हनन कीजिये, हनन कीजिये। चक्रसे, गदासे और खङ्गसे; समस्त बाणोंसे बेधिये, बेधिये। पाशसे आवृत कीजिये, बाँध लीजिये। अङ्कशसे ताडित कीजिये, ताडित कीजिये। जल्दी कीजिये, जल्दी कीजिये। क्यों रुकते या ठहरते हैं? जबतक मेरा सारा

English

on the platform, a lotus in the middle, in the directions the gods on the filaments: Subhadra, the Unborn, the Sun worshipped; the manyformed, the offering outside;

अध्याय २९०

श्लोक 41

खं विश्वरूपा सिद्धिश् च ऋद्धिः शान्तिश् च रोहिणी ।दिग्धेनवो हि पूर्वाद्याः कृशरैश् चन्द्र ईश्वरः

khaṃ viśvarūpā siddhiś ca ṛddhiḥ śāntiś ca rohiṇī / digdhenavo hi pūrvādyāḥ kṛśaraiś candra īśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

मूर्धा (ब्रह्मरन्ध्)-में अमृतका चिन्तन करके सुषुम्णानाड़ीके मार्गसे आती हुई अमृतकी धाराओंसे अपने शरीरको बाहर और भीतरसे भी आप्लावित करे

English

Kha, Vishvarupa, Siddhi, Riddhi, Shanti and Rohini; the direction-cows in the east and so on; with kushara, the Moon and Ishvara;

अध्याय २९०

श्लोक 42

दिक्पालाः पद्मपत्रेषु कुम्भेष्वग्नौ च होमयेत् ।क्षीरवृक्षस्य समिधः सर्षपाक्षततण्डुलान्

dikpālāḥ padmapatreṣu kumbheṣvagnau ca homayet / kṣīravṛkṣasya samidhaḥ sarṣapākṣatataṇḍulān

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार शुद्धशरीर होकर मूलमन्त्रसे तीन बार प्राणायाम करे। फिर मस्तक और मुखपर एवं समस्त शरीरमें हाथ रखकर उनमें शक्तिका न्यास करे। इसके बाद सूर्यमण्डलसे सम्परात्माका आवाहन करके ब्रह्मरन्ध्रके मार्गसे हदय-कमलमें लाकर चिन्तन करे। वे परात्मा समस्त शुभ

English

the world-guardians on the lotus petals, in the pots and in the fire one should offer: fuel sticks of milk-tree, mustard, unbroken rice;

अध्याय २९०

श्लोक 43

शतं शतं सुवर्णञ्च कांस्यादिकं द्विजे ददेत् ।गावः पूज्या विमोक्तव्याः शान्त्यै क्षीरादिसंयुताः

śataṃ śataṃ suvarṇañca kāṃsyādikaṃ dvije dadet / gāvaḥ pūjyā vimoktavyāḥ śāntyai kṣīrādisaṃyutāḥ

हिन्दी अर्थ

लक्षणोंसे सम्पन्न हैं। प्रणवका उच्चारण करते हुए परात्माका स्मरण करना चाहिए

English

a hundred each, and gold and bronze and the like one should give to a Brahmin. Cows are to be worshipped and released for peace, joined with milk and the like.

अध्याय २९०

श्लोक 44

अग्निर् उवाच शालिहोत्रः सुश्रुताय हयायुर्वेदमुक्तवान् ।पालकाप्यो ऽङ्गराजाय गजायुर्वेदमब्रवीत्

agnir uvāca śālihotraḥ suśrutāya hayāyurvedamuktavān / pālakāpyo 'ṅgarājāya gajāyurvedamabravīt

हिन्दी अर्थ

उनके स्मरणके लिये गायत्री-मन्त्र इस प्रकार है 'त्रैलेक्यमोहनाय विदाहे। स्मराय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्। इति।' परात्माका अर्चन करनेके पश्चात् यज्ञसम्बन्धी द्रव्यों और शुद्ध पात्रका प्रोक्षण करे। विधिपूर्वक आत्मपूजा करके वेदीपर उसकी अर्चना करे

English

Agni said: Shalihotra told horse medicine to Sushruta; Palakapya told elephant medicine to Angaraja.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 290
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.